भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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शुक्रवार, 13 जुलाई 2018

भाकपा ने लिये कई अहम फैसले


उत्तर प्रदेश में भाकपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू की

भाजपा को हराना है प्रमुख लक्ष्य

भाकपा और वामपंथ का प्रतिनिधि लोकसभा में पहुंचाने के लिए किये जायेंगे ठोस प्रयास

लक्ष्यों को हासिल करने को त्रिस्तरीय रणनीति बनाई


लखनऊ- 13 जुलाई 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. यहाँ संपन्न भाकपा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुयी और आगामी चुनाव में भाकपा के लक्ष्य निर्धारित किये गये. भाकपा ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों में भाजपा को परास्त करने, भाकपा और वामपंथ का प्रतिनिधित्व लोकसभा में हासिल करने तथा लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष शक्तियों को सशक्त बनाने की रणनीति पर विचार किया है.
भाकपा कार्यकारिणी बैठक के निष्कर्षों की जानकारी देते हुये राज्य सचिव डा. गिरीश ने यहाँ जारी एक बयान में बताया कि उपर्युक्त लक्ष्यों को हासिल करने को भाकपा ने त्रिस्तरीय रणनीति तैयार की है.  पहली- पार्टी जनता के ज्वलंत सवालों पर जन आन्दोलनों को धार देगी, दूसरी- लोकतांत्रिक खासकर वामपंथी शक्तियों के साथ संबंधों की कड़ियाँ मजबूत करेगी तथा तीसरी- भाकपा की सांगठनिक मशीनरी को चुस्त- दुरुस्त करेगी और जनाधार को विकसित और शिक्षित करेगी.
उपर्युक्त उद्देश्यों को हासिल करने को भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने सीमित संख्या में सीटें लड़ने का निश्चय किया है. बैठक में कई सीटों को चिन्हित कर चुनाव की तैयारी करने का निर्देश संबन्धित जिला कमेटियों को दे दिया गया है. लड़ी जाने योग्य अन्य सीटों पर भी शीघ्र निर्णय लिया जायेगा. मुद्दों के आधार पर धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक शक्तियों से लक्ष्य के अनुरूप साझा समन्वय स्थापित करने का प्रयास भी किया जायेगा. आगामी 4 और 5 अगस्त को राजधानी दिल्ली में होने जारही भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी लोकसभा और जल्दी ही होने वाले तीन राज्य विधान सभा चुनावों की तैयारी के बारे में विचार किया जायेगा.
भाकपा राज्य कार्यकारिणी बैठक में निरंतर बढ़ रही महंगाई, विस्फोटक रूप लेरही बेरोजगारी, न थमने वाली किसानों की आत्महत्याओं, दिन ब दिन उजागर होरहे घोटाले और भ्रष्टाचार, महिलाओं दलितों अल्पसंख्यकों पर बढ़ रहे जुल्म- सितम तथा अराजकता की स्थिति तक पहुँच चुके अपराधों के खिलाफ और मोदी/ योगी सरकार की विफलताओं को उजागर करने को 1 से 14 अगस्त के मध्य 'भाजपा हटाओ संविधान बचाओ' अभियान चलाने का कार्यक्रम तैयार किया गया है. इस अवधि में प्रदेश भर में सभायें, नुक्कड़ और मौहल्ला सभाएं, गाँव सभायें तथा प्रदर्शन आदि करने की रूपरेखा तैयार की गयी. इस सवाल पर कुछ पुस्तिकायें प्रकाशित की गयीं हैं और व्यापक पैमाने पर पर्चे बांटे जायेंगे.
अभियानों की सफलता और जिला कमेटियों के मार्गदर्शन के लिये कार्यकारिणी सदस्यों को जिम्मेदारी बांटी गयी है. मार्गदर्शक नियुक्त किये गए कार्यकारिणी सदस्य जिला काउंसिलों में अभियानों की रूपरेखा तैयार करायेंगे, उनके अनुपालन पर निगरानी रखेंगे और संगठन के विस्तार और सुचारू संचालन में जिलों की मदद करेंगे. अभियान की सफलता सुनिश्चित करने को कई क्षेत्रीय कार्यकर्ता बैठकें भी आयोजित की जायेंगीं. अलीगढ़ और आगरा मंडल के जनपदों की एक संयुक्त बैठक 23 जुलाई को मथुरा में आयोजित किया जाना तय होचुका है.
पार्टी कार्यकर्ताओं का राजनैतिक स्तर ऊंचा उठाने को कई शिक्षण शिविर आयोजित करने का निश्चय भी किया गया है.
भाकपा और अन्य वामपंथी दल मिल कर आगामी 20 अगस्त को लखनऊ में समानुपातिक चुनाव प्रणाली और चुनाव सुधारों के लिये एक राज्य स्तरीय कन्वेंशन भी आयोजित करने जा रहे हैं. कन्वेंशन में वामपंथी दलों के राष्ट्रीय नेतागण भाग लेंगे. साथ ही अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों के नेताओं तथा बुध्दिजीवियों को भी आमंत्रित किया जासकता है.
डा. गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा,  उत्तर प्रदेश   


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गुरुवार, 5 जुलाई 2018

भाजपा ने किसानों को फिर दिखाया ठेंगा: समर्थन मूल्य वायदे से काफी कम- डा. गिरीश




खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य ( एमएसपी ) में कल की गयी ऐतिहासिक वृध्दि के दाबे की खबर का भांडा किसानों तक पहुंचते पहुंचते फूट गया. स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा किसानों को दिया भरोसा कि वे ऐतिहासिक फैसला लेने वाले हैं, छलावा ही साबित हुआ.
एमएसपी में वृध्दि की यह घोषणा भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में किये गए वायदे के पूरे चार साल बाद ऐसे समय में की गयी है जबकि एक साल के भीतर लोकसभा और कुछ ही माहों में कई महत्वपूर्ण राज्यों के विधान सभा चुनाव होने वाले हैं. इसलिये इस वृध्दि के राजनैतिक निहितार्थ भी निकाला जाना स्वाभाविक है.
यह परख की कसौटी पर इसलिये भी हैं कि भाजपा ने 2014 के लोक सभा चुनावों के समय जारी घोषणापत्र में वायदा किया था कि किसानों को फसल की लागत से पचास फीसदी अधिक कीमतें मुहैया करायी जायेंगी. श्री मोदी ने बार बार चुनाव सभाओं में इसे न केवल दोहराया था बल्कि वे आज भी 2022 तक किसानों की आमद दो गुना करने का वायदा कर रहे हैं.
जिस स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट के आधार पर विपक्ष पर ताने कसते हुये ये वायदा किया गया था उसका कहना है कि एमएसपी में इजाफा लागत के मुकाबले 50 फीसदी ज्यादा रिटर्न देने वाला होना चाहिए. तब उपज का दाम डेढ़ गुना होगा. लेकिन सरकार द्वारा कल की गयी बढोत्तरी गत एमएसपी पर आधारित है और उसकी तुलना में  4 से लेकर 50 प्रतिशत है न कि लागत से 50 प्रतिशत अधिक रिटर्न पर आधारित.
किसान और किसान संगठन मांग करते रहे हैं कि स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिश सी- 2 लागत यानीकि फसल की पैदाबार से संबंधित हर जमा लागत के ऊपर 50 प्रतिशत जोड़ कर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाना चाहिये, जैसाकि भाजपा ने वायदा किया है. इसका अर्थ है कि मूल लागत (ए-2 ) + पारिवारिक श्रम ( एफएल ) + जमीन का किराया + ब्याज आदि समूची लागत में आते हैं. पर सरकार द्वारा घोषित एमएसपी मात्र ए-2 और एफएल पर आधारित है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुये इन्हीं तथ्यों को अपने ढंग से उजागर किया है. उनके अनुसार धान की एक एकड़ फसल तैयार करने पर जुताई पर रुपये 4800, रोपाई पर 2800, सिंचाई पर 6000, उर्बरक पर 3000, कीटनाशक पर 1000 और जमीन का किराया 15000 आता है. इसको देखते हुये धान के एमएसपी में कम से कम 600 रूपये प्रति कुंतल का इजाफा होना चाहिये.
यहाँ एक और मजेदार तथ्य यह भी है कि दो मुख्य फसलों- धान और गेहूँ को छोड़ कर सभी के समर्थन मूल्य बाजार दर से कम रहते रहे हैं. घोषित मूल्य न मिल पाना एक और अहम समस्या रही है. किसान अब भी सशंकित हैं कि उन्हें घोषित मूल्य मिल पायेगा.
वेतनभोगी लोगों की तरह किसानों की आमद में निरंतरता नहीं होती. उसे लगभग छह माह के अंतराल पर फसल से आमद होती है. इस दरम्यान उसे परिवार और अगली फसल दोनों पर खर्च करना होता है. पैदाबार हाथ में आते ही उसे बेचने को मजबूर होना पड़ता है. जमाखोर उसे कम मूल्य पर खरीद लेते हैं. घाटे का शिकार किसान निरंतर कर्जग्रस्त होता जाता है. सरकार इन चार सालों में इस समस्या का निदान कर नहीं पायी और किसान आत्महत्याएं करते रहे. ताजा घोषित मूल्य भी उसे इस संकट से उबार नहीं पायेंगे.
सरकार की अन्य नीतियाँ भी किसानों की कमर तोड़ने वाली हैं. वह कीमतें नियंत्रित करने के नाम पर कृषि उत्पादों के निर्यात पर पाबन्दी और आयात खोलती रही है. वैश्वीकरण और उदारीकरण के लाभों से भी वह वंचित रहा है. कृषि उत्पादों के समुचित विपणन और उन्नत खेती से भी औसत किसान दूर ही है. ऐसे में देर से और आँखों में धूल झोंकने की गरज से की गयी इस मूल्यवृध्दि से किसानों के चिरकालिक संकट का निदान दिखाई नहीं  देरहा है.
( डा. गिरीश )


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बुधवार, 4 जुलाई 2018

एएमयू प्रकरण- संघ के निशाने पर वे शिक्षा केन्द्र हैं जहां हिंदुत्व का एजेंडा नहीं चल पारहा: भाकपा




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने आरोप लगाया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और दूसरे अल्पसंख्यक संस्थानों में एससी, एसटी एवं अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण के मामले में खुद भाजपा और आरएसएस की नीयत साफ़ नहीं है और इस मुद्दे के जरिये एक ही ईंट से कई निशाने साधना चाहते हैं.
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि भाजपा और संघ को दलित हितों से कोई लेना देना नहीं है. यदि उन्हें दलितों/पिछड़ों की शिक्षा की जरा भी फ़िक्र होती तो वे उनके लिये सरकार के चार साल के कार्यकाल में कई विश्विद्यालय बना कर खड़े कर सकते थे. लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया. रोहित वेमुला प्रकरण, ऊना में दलितों के साथ की गयी दरिन्दगी, भीमसेना के नेता को जेल में डालने तथा समूचे देश में दलितों, पिछड़ों पर होरहे अत्याचार की वारदातों से उत्पन्न गुस्से को भटकाने के लिए वे इस मुद्दे को उठा रहे हैं.
उन्होंने कहाकि भाजपा और संघ के निशाने पर वे शिक्षा केन्द्र पहले से ही हैं जहां उनका कथित हिन्दुत्व का एजेंडा नहीं चल पारहा है. सभी जानते हैं कि पहले उन्होंने जेएनयू और आईआईएम को निशाना बनाया. फिर जिन्ना की तस्वीर के बहाने एएमयू को निशाना बनाया गया और अब आरक्षण के नाम पर उस पर ताला जड़ने की कोशिश की जारही है. अनुसूचित जाति जनजाति आयोग में नामांकित संघी उसका अनुदान समाप्त करने की धमकियां देरहे हैं और एएमयू प्रशासन को नोटिस भी थमाया जारहा है. यह समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश का हिस्सा है.
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि भाजपा और संघ जनता से किये गए वायदों को पूरा करने में पूरी तरह विफल होचुके हैं और चार साल के सरकार के कार्यकाल की सफलता के नाम पर उसके हाथ पूरी तरह खाली हैं. अतएव वो समाज के विभाजन के लिये हर हथकंडा अपना रहे है. मदरसों में ड्रेस कोड का शिगूफा और एएमयू में आरक्षण का मुद्दा ऐसे ही ताजा हथकंडे हैं. भाकपा इन हथकंडों को कामयाब नहीं होने देगी और सरकार और भाजपा की विफलताओं के पर्दाफ़ाश के लिये अगस्त माह में व्यापक अभियान चलायेगी.
डा. गिरीश
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शुक्रवार, 29 जून 2018

सूफी संत कबीर की समाधि पर भी राजनैतिक रोटियाँ सेंकने से बाज नहीं आये मोदीजी : भाकपा




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि जिस संत ने अपना सारा जीवन सत्य की खोज और असत्य के खंडन में लगा दिया, प्रधानमंत्री जी ने अपने असत्य के प्रसार और सत्य की हत्या के लिये उसी महापुरुष का जन्म दिवस और उन्हीं के महापरिनिर्वाण स्थल को चुना.
डा. गिरीश कल महान सूफी सन्त कबीर के परिनिर्वाण स्थल 'मगहर' में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम और उनके अनर्गल प्रलाप पर भाकपा की प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे.
सच तो यह है कि प्रधानमंत्री जी देश भर और खास कर उत्तर प्रदेश में विपक्ष की संभावित एकता से इस कदर भयभीत हैं कि वे निर्णय नहीं कर पारहे कि कब कहाँ और क्या बोला जाये. कल कबीरदास जी की सीखों को ग्रहण कर उनकी शिक्षाओं पर बोलने के बजाय श्री मोदी भाजपा के चुनावी एजेंडे पर ही चिंघाड़ते रहे, विपक्ष पर स्तरहीन टिप्पणियां करते रहे.
डा. गिरीश ने कहाकि संत कबीर को सच्चा सम्मान तब दिया जा सकता था कि प्रधानमंत्री जी महान संत की सीखों पर अमल करते हुये अपनी सरकार के चार साल के सच को उद्घाटित करते. उनकी सरकार के चार साल के कार्यकाल में देश को चहुँतरफा बर्वादी का सामना करना पड़ा है. अर्थव्यवस्था निरंतर नीचे की ओर जारही है. प्रधानमंत्रीजी के हर विदेशी दौरे के बाद रुपये की दर डालर के मुकाबले नीचे की ओर खिसक जाती है और वह इतिहास के उच्चतम स्तर तक जा पहुंची है. पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों ने भी इतिहास गढ़ दिया है जिससे महंगाई सातवें आसमान पर है. पूंजीपतियों पर बैंकों का बकाया बढ़ता ही जारहा है. घोटालेबाज जेल जाने के बजाय विदेशों में आराम फरमा रहे हैं. चार साल में स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा धन 50 फीसदी बढ़ गया है. देश की सीमाएं असुरक्षित हैं, हमारे जवान मारे जारहे हैं और मोदी सरकार एक अदद सर्जिकल स्ट्राइक पर ही जश्न मना रही है.
डा. गिरीश ने कहाकि अच्छा होता प्रधानमंत्रीजी नौजवानों से किये गए दो करोड़ रोजगार देने, किसानों की आय दोगुना करने और हर एक के खाते में 15 लाख पहुंचाने के वायदों को कबीर जी की समाधि पर दोहराते और सभी के स्वास्थ्य और सम्पूर्ण शिक्षा की राजकीय जिम्मेदारी को दोहराते. जिस उत्तर प्रदेश में मोदीजी भाषण कर रहे थे वहां की सरकार उद्योगपतियों के हित में 2013 के भूमि अधिग्रहण क़ानून को बदल कर किसानों की जमीनों पर डाका डालने जारही है. मोदीजी को इस पर सफाई देनी चाहिये. अच्छा होता वे उत्तर प्रदेश सरकार को नसीहत देते जिसके रहते महिलाओं की इज्जत और जान तार तार होरही है, क़ानून व्यवस्था पंचर हुयी पड़ी है. दलितों अल्पसंख्यकों और सर्वसमाज के विपन्न तबकों पर भारी अत्याचार होरहे हैं. इलाज के अभाव में गरीबों की अकाल मौतें होरही हैं. गरीब न पढाई कर पारहे हैं न रोजगार हासिल कर पारहे हैं. शासन प्रशासन में भ्रष्टाचार पांच गुना बढ़ गया है.
जहाँ तक कबीर अकादमी के शिलान्यास की बात है, चुनावी साल में उसकी याद आने को राजनैतिक उद्देश्य से किया कदम ही माना जायेगा. आचार संहिता लगने तक ऐसे कई शिलान्यास देखने को मिलेंगे. इसका शिलान्यास यदि 2014 में ही कर दिया गया होता तो अब तक उसका निर्माण पूरा होचुका होता और लोगों को उस पर भरोसा जमता.
डा गिरीश ने कहाकि उत्तर प्रदेश में अब भाजपा की नौटंकी दोबारा चलने वाली नहीं है. भाकपा भी भाजपा कुशासन को बेनकाब करने को व्यापक रणनीति बनाने जारही है. इस हेतु 8 जुलाई को भाकपा की उत्तर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी की बैठक लखनऊ में आहूत की गयी है.
डा. गिरीश

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शनिवार, 23 जून 2018

दिलों के घाव ले के भी चले चलो

चले चलो दिलों में घाव ले के भी चले चलो
चलो लहूलुहान पांव ले के भी चले चलो
चलो कि आज साथ-साथ चलने की जरूरतें
चलो कि ख़त्म हो न जाएं जिन्दगी की हसरतें

जमीन, ख्वाब, जिंदगी, यकीन सबको बांटकर
वो चाहते हैं बेबसी में आदमी झुकाए सर
वो चाहते हैं जिंदगी हो रोशनी से बेखबर
वो एक-एक करके अब जला रहे हैं हर शहर
जले हुए घरो के ख्वाब ले के भी चले चलो
चले चलो ...

वो चाहते हैं बांटना दिलों के सारे बलबले
वो चाहते हैं बांटना ये जिंदगी के काफिले
वो चाहते हैं ख़त्म हों उम्मीद के ये सिलसिले
वो चाहते हैं गिर सकें न लूट के ये सब किले
सवाल ही हैं अब जवाब ले के भी चले चलो
चले चलो ....

वो चाहते हैं जातियों की बोलियों की फूट हो
वो चाहते हैं धर्म को तबाहियों की छूट हो
वो चाहते हैं जिंदगी ये हो फ़रेब, झूठ हो
वो चाहते हैं जिस तरह भी हो मगर ये लूट हो
सिरों में जो बची है छांव ले के भी चले चलो
चले चलो दिलों में घाव ले के भी चले चलो
- ब्रज मोहन
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बुधवार, 20 जून 2018

कमरतोड़ महंगाई के खिलाफ भाकपा ने हल्ला बोला: राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के तहत समूचे उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन किये गये




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर केन्द्र और राज्य सरकार की नीतियों के कारण थोक और खुदरा बाजार में निरन्तर बढ़ रही महंगाई, पेट्रोल डीजल और रसोई गैस की कीमतों में ऐतिहासिक वृध्दि और राशन प्रणाली की पंगुता के खिलाफ समूचे उत्तर प्रद्रेश में धरने प्रदर्शन आयोजित किये गए.
प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन स्थानीय प्रशासन को सौंपे गए. इन ज्ञापनों में बढ़ती महंगाई के लिये केन्द्र और राज्य सरकारों की प्रतिगामी और कारपोरेटपरस्त नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुये उसे फ़ौरन नीचे लाने को त्वरित कदम उठाने की मांग की गयी. साथ ही डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस पर से उत्पाद कर हठाने, इन पर से राज्यों के कर समाप्त करने तथा राशन प्रणाली को व्यापक एवं भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने की मांग की गयी.
ज्ञापनों में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी को काबू में लाने, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं को आम आदमी के लिये सुलभ बनाने, किसानों के हालात सुधारे जाने, मनरेगा को पुनर्व्यवस्थित करने, कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने, आवारा पशुओं द्वारा किसान की फसल और जनहानि रोके जाने, दलितों महिलाओं, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बन्द किये जाने तथा धर्म जाति के नाम पर दंगे और अराजकता फ़ैलाने पर रोक लगाने की मांग की गयी.
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने दाबा किया कि अब तक राज्य केन्द्र को प्राप्त सूचनाओं के अनुसार प्रदेश भर में दस हजार से अधिक जनता भाकपा के झंडे तले सडकों पर उतरी है. कानपुर और मऊ में क्रमशः भाकपा के राज्य सहसचिव अरविन्दराज स्वरूप और इम्तियाज अहमद के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया.
राज्य केन्द्र को अब तक गाज़ियाबाद, मेरठ, बडौत (बागपत), मुज़फ्फर नगर, आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ, मैनपुरी, इलाहाबाद, कायमगंज (फरुखाबाद), कानपुर देहात, उरई, चित्रकूट, लखनऊ, खागा (फतेहपुर), हरदोई, शाहजहांपुर, बरेली, गोंडा, आजमगढ़, पिंडरा व राजापुर (वाराणसी), गाजीपुर, जौनपुर, राबर्ट्सगंज, भदोही, कुशीनगर, बलरामपुर, बदायूं तथा बांदा आदि जनपदों से सफल आयोजनों की खबरें प्राप्त होचुकी हैं.
डा. गिरीश ने कहाकि आन्दोलन के अगले चरण में 1 से 14 अगस्त तक मोदी सरकार द्वारा गत चार सालों में जनता से की गयी वायदाखिलाफी और हर मोर्चे पर सरकार की असफलता का पर्दाफाश करने को भाकपा द्वारा बड़े पैमाने पर सभायें, नुक्कड़ सभाएँ और गोष्ठियां आयोजित की जायेंगी.

डा. गिरीश

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मंगलवार, 19 जून 2018

राजनैतिक उद्देश्यों से हिंसा भड़का रहे हैं भाजपा और संघ परिवार : भाकपा ने पिलखुआ काण्ड की कड़े शब्दों में भर्त्सना की




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहाकि जनपद हापुड़ के पिलुखुआ थानान्तर्गत बझेडा खुर्द गांव में गोहत्या के नाम पर की गयी अल्पसंख्यक व्यक्ति की हत्या आरएसएस और भाजपा द्वारा बनाये गये विषाक्त वातावरण के कारण हुयी है. भाकपा इस हत्या और हमले की कड़े शब्दों में निन्दा करती है.
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि जब मुसलमानों द्वारा गाय पालने और उसके लाने लेजाने पर कोई कानूनी पाबन्दी नहीं है तो किसी भी मुस्लिम को गौहत्या किये ही बिना कैसे हत्यारा बताया जासकता है और उसकी कैसे हत्या की जासकती है. भीड़ को यदि यह शक भी है कि लेजायी जारही गाय की हत्या की जासकती है तो वह इसकी सूचना पुलिस को दे सकती है, उसे क़ानून हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं है.
लेकिन राजनैतिक उद्देश्यों से भाजपा और समूचे संघ गिरोह ने ऐसा वातावरण तैयार कर दिया है कि हड्डियों के टुकड़ों के मिलने पर अथवा पालने या व्यापार के लिये गायों के लेजाने पर संघ गिरोह के लोग अफवाह फैला कर भोले भाले लोगों को भी अपने जाल में फंसा लेते हैं. इसी तरह दादरी के बिसाहडा में अख़लाक़ की हत्या की गयी और अब ऐसा ही काण्ड बझेडा खुर्द में कर डाला गया.
भाकपा का आरोप है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2014 के लोक सभा चुनाव से पहले भाजपा ने गौहत्या, लव जेहाद, धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दे खड़े कर और बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे करा कर अपनी जड़ें मजबूत की थीं और अब वह कैराना और नूरपुर में करारी हार के बाद फिर उसी राह पर लौट रही है. भाजपा और संघ की यह काली करतूतें केन्द्र की मोदी सरकार और प्रदेश की योगी सरकार के संरक्षण में अंजाम दी जारही हैं.
भाकपा महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल महोदय से मांग करती है कि वे संविधान और क़ानून की धज्जियाँ बिखेरने वाली इन घ्रणित कार्यवाहियों का संज्ञान लें और वांछित कार्यवाही करें. भाकपा ने पुलिस प्रशासन से भी मांग की है कि वह हत्या और हमले के दोषियों और उकसावे की कार्यवाही करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करे. भाकपा राज्य सरकार से मांग करती है कि मृतक परिवार को रूपये 20 लाख और घायल को रूपये 5 लाख फ़ौरन उपलब्ध कराये. क्षेत्र में शान्ति बनाये रखने को हर संभव कदम उठाया जाये.
डा. गिरीश
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सोमवार, 18 जून 2018

CPI demanded postponment of PCS entrance examination in U.P.


पीसीएस परीक्षाओं की तिथि आगे बढ़ाने को हस्तक्षेप करें राज्यपाल: भाकपा


लखनऊ- 18 जून भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने जून माह में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश पीसीएस परीक्षा को निश्चित तिथि से कम से कम एक माह आगे बढाने की मांग की है.
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि अभी हाल में ही सिविल सेवा परीक्षा होकर चुकी है. अधिकतर अभ्यर्थी उस परीक्षा में शामिल हुये थे. उन्हें दूसरी परीक्षा जो कि बिल्कुल नये पैटर्न से होने जारही है, की तैयारी के लिए और अधिक समय चाहते हैं. अभ्यर्थी समय बढवाने के लिये केन्द्र और राज्य सरकार का हर दरवाजा खटखटा चुके हैं लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गयी. सरकार के इस तानाशाहीपूर्ण और एकतरफा रवैय्ये से छात्रों में नाराजगी होना स्वाभाविक है. भाकपा भी इस जिद को अनुचित मानती है.
पीसीएस परीक्षा की तैयारी में जुटे अभ्यर्थियों के अनुसार उनके और मुख्यमंत्री के बीच जुलाई में परीक्षायें कराने पर सहमति बन गयी थी लेकिन बाद में सरकार मुकर गयी.
भाकपा राज्य सचिव ने महामहिम राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वे भविष्य के इन प्रशासनिक अधिकारियों के हितों को देखते हुये हस्तक्षेप करें और परीक्षाओं की तिथि आगे बढ़ाने के लिये राज्य सरकार को निर्देशित करें.

डा. गिरीश


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रविवार, 10 जून 2018

Agitation Prograam of CPi, U. P.


जनविरोधी और लोकतंत्रविरोधी भाजपा सरकार के खिलाफ भाकपा अभियान चलायेगी

20 जून को महंगाई विरोधी प्रदर्शनों से शुरूआत होगी


लखनऊ- 10 जून 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउंसिल की दो दिवसीय बैठक आज यहाँ संपन्न हुयी. बैठक की अध्यक्षता अमेरिका सिंह यादव ने की. बैठक में पार्टी के दो केन्द्रीय सचिव का. अतुल कुमार अनजान एवं का. शमीम फैजी दोनों दिन उपस्थित रहे. उन्होंने राष्ट्रीय राजनैतिक परिद्रश्य पर विस्तार से चर्चा की. राज्य सचिव डा. गिरीश ने राजनैतिक एवं सांगठनिक रिपोर्ट प्रस्तुत की.
कुल मिला कर बैठक में हुयी चर्चा का निष्कर्ष है कि भाजपा की केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सरकार जनता से किये अपने वायदों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही हैं. आज ये सरकारें जनता के लिये असहनीय बोझ बन गयी हैं और जनता इनसे फ़ौरन निजात पाना चाहती है. हाल में देश भर में हुए उपचुनावों के नतीजों से भी यह जाहिर होगया है. अतएव भाकपा ने जनमुक्ति के लिये व्यापक कार्य योजना तैयार की है. जिनमें स्वतन्त्र अभियानों के साथ धर्मनिरपेक्ष, लोकतान्त्रिक और वामपंथी शक्तियों का एक प्लेटफार्म का निर्माण करना भी शामिल है. आगामी दिनों में भाकपा कई बुनियादी सवालों को लेकर सडकों पर उतरेगी.
भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने यहाँ जारी प्रेस बयान में बताया कि आगामी 20 जून को आसमान छूती महंगाई के खिलाफ जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किये जायेंगे और पेट्रोल डीजल पर से उत्पाद कर हठाने  और उन्हें नीचे लाने की मांग की जायेगी. मोदी सरकार की विफलताओं और उत्तर प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर करने को 1 अगस्त से 14 अगस्त के बीच व्यापक अभियान चलाया जायेगा. 'देश बचाओ संविधान बचाओ' 'जनविरोधी भाजपा सरकार को सता से बाहर करो' नारे के साथ देश के कोने कोनों से जत्थे निकालने की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की प्रस्तावित योजना को पूर्ण समर्थन प्रदान किया जायेगा. सांगठनिक कार्यवाही के तहत कोल्लम में हाल में ही संपन्न भाकपा के राष्ट्रीय महाधिवेशन के फैसलों को जिलों से शाखाओं तक पहुँचाने को विस्तरित कार्यकर्ता बैठकें आयोजित की जायेंगीं.
भाकपा राज्य काउंसिल ने उत्तर प्रदेश में अपनी समस्त जिला इकाइयों का आह्वान किया है कि वे इन अभियानों की तैयारियों में मुस्तैदी से जुट जायें और उन्हें अधिकतम स्तर तक कामयाब बनायें.
राज्य काउंसिल ने एक 25 सदस्यीय कार्यकारिणी का चुनाव भी किया जिसमें राज्य सचिव डा. गिरीश, सहसचिव का. अर्विन्दराज स्वरूप एवं का. इम्तियाज़ अहमद के अलाबा 22 अन्य शामिल हैं. का. प्रदीप तिवारी को पुनः कोषाध्यक्ष चुना गया है.

डा. गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश


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गुरुवार, 31 मई 2018

CPI, U.P. on Results of Kairana and Nuurpur elections.


कैराना और नूरपुर में भाजपा की हार पर भाकपा ने मतदाताओं को दी बधाई

कारपोरेटों को मालामाल और आमजनों को कंगाल बनाने का नतीजा हैं यह परिणाम


लखनऊ- 31 मई 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा और नूरपुर विधान सभा सीटों पर भाजपा की करारी हार को भाजपा द्वारा चलाई जारही आर्थिक नवउदारवाद की नीतियों- जिनके चलते बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, किसानों की तंगहाली तथा गरीबों और मजदूरों की बदहाली बड़ी है, की पराजय बताया है. यह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और अन्य कमजोर वर्गों पर ढाये जारहे जुल्मों- अत्याचारों और बदतर क़ानून व्यवस्था और किसानों- कामगारों की उपेक्षा को लेकर भाजपा को आम मतदाताओं का कड़ा जबाव है. यह कारपोरेटों को मालामाल और आम आदमी को कंगाल बनाने का नतीजा है.
गोरखपुर और फूलपुर की वीआईपी लोकसभा सीटों पर हार के बाद हुयी इस हार ने यह साबित कर दिया है कि गाय, गोबर, गंगा, दंगा, जिन्ना और टीपू जैसे सवालों के जरिये विभाजन पैदा करने और वोट हासिल करने की नीति को अब आम जनता भलीभांति समझ चुकी है. ये चुनाव नतीजे इस बात का सबूत हैं कि जनविरोधी नीतियों और झूठे वायदों के बल पर कोई दल लंबे समय तक जनता का विश्वास बनाए नहीं रख सकता.
यह हार इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यहां सारी राजनैतिक मर्यादाएं और नैतिकतायें लांघ कर चुनाव प्रचार बंद होने और मतदान से पहले दोनों चुनाव क्षेत्रों के अति सन्निकट प्रधानमंत्री ने 27 मई को लोकार्पण की आड़ में रोडशो और रैली कर विपक्ष पर तीखे हमले बोले थे और कई लुभावनी घोषणायें की थीं. भाकपा और राष्ट्रीय लोकदल ने तो इस अवैध रैली को निरस्त करने की मांग निर्वाचन आयोग से की थी. मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, दर्जनों केन्द्रीय और प्रदेश के मंत्रियों तथा भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं ने वहां जमकर चुनाव अभियान चलाया था. भाजपा ने दोनों ही क्षेत्रों में सहानुभूति भुनाने को मृत प्रतिनिधियों की बेटी और पत्नी को चुनाव मैदान में उतारा था और ईवीएम में गडबड़ियाँ हुयीं थीं सो अलग.
ये परिणाम मोदी और योगी की लोकप्रियता की कलई खोलने वाले हैं जिनकी दुहाई भाजपाई दिन रात दिया करती है.
भाकपा और वामपंथ ने केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार की जनविरोधी, सांप्रदायिक और फासीवादी नीतियों को शिकस्त देने और राजनैतिक अपरिहार्यता को ध्यान में रखते हुये कैराना, नूरपुर और इससे पहले गोरखपुर तथा फूलपुर में गैर- भाजपा दलों के प्रत्याशियों को समर्थन दिया था. संयुक्त वामपंथ के इस निर्णय से भी भाजपा की हार सुनिश्चित हुयी है. हमें अपने इस निर्णय पर प्रशन्नता है. भाकपा और वामपंथ इन क्षेत्रों के मतदाताओं को इस सूझबूझपूर्ण निर्णय के लिये बधाई देते हैं.
देश के अन्य भागों में हुये उपचुनावों के नतीजे भी अधिकतर भाजपा के विपक्ष में जारहे हैं. ये नतीजे 2019 की तस्वीर साफ़ करने को पर्याप्त हैं.

डा. गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश


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गुरुवार, 24 मई 2018

CPI furtherdemands cancelation of Modi's programm on 27th in Baghpat


पीएम मोदी के कार्यक्रम पर रोक न लगाने का निर्णय अविवेकी एवं पक्षपातपूर्ण

भाकपा ने निर्वाचन आयोग से पुनर्विचार करने की मांग की


लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने पीएम मोदी की 27 मई की रैली और लोकार्पण कार्यक्रम को बेहद लचर तर्कों को आधार बना कर प्रतिबंधित न करने के फैसले को अविवेकपूर्ण और पक्षपातपूर्ण बताया है. भाकपा ने लोकहित और लोकतंत्र के हित में अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि निर्वाचन आयोग ने उन परिस्थितियों पर गौर नहीं किया जिसके आधार पर 27 मई को प्रस्तावित रैली एवं लोकार्पण कार्यक्रम को प्रतिबंधित करने की मांग की गयी है.
सभी जानते हैं कि गत लोकसभा चुनावों के दरम्यान प्रत्येक मतदान के दिन मोदी ने कहीं न कहीं रोडशो अथवा रैलियाँ आयोजित की थीं. एक तरफ क्षेत्र विशेष में मतदान चल रहा होता था तो दूसरी तरफ भाजपा के क्रीत टीवी चैनल उसका लाइव प्रसारण कर रहे होते थे. इससे मतदाताओं का प्रभावित होना स्वाभाविक था. बाद में भाजपा के पक्ष में आये आश्चर्यजनक चुनाव नतीजों से भी यह साबित होगया था.
डा. गिरीश ने आरोप लगाया कि बाद में कई विधानसभा चुनावों और उपचुनावों में भी भाजपा ने इस हथकंडे का प्रयोग किया. गुजरात विधान सभा के चुनावों का प्रचार थमने के बाद भी श्री मोदी ने वहां “यो यो फेरी” का उद्घाटन किया था यह भी सभी के संज्ञान में है.
उन्होंने निर्वाचन आयोग से सवाल कियाकि क्या निर्वाचन आयोग ने प्रधानमंत्री सचिवालय से यह पूछा कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने ईस्टर्न पेरिफेरल हाइवे के लोकार्पण के लिये 31 मई तक की समय सीमा निर्धारित की है तो क्यों नहीं यह कार्यक्रम 28 मई के बाद रखा गया? क्यों जानबूझ कर यह कार्यक्रम कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा के निर्वाचन के समय चुनाव प्रचार बन्द होजाने और मतदान से पहले रखा गया?
भाकपा ने यह भी प्रश्न किया है कि क्या निर्वाचन आयोग इस बात की गारंटी करेगा कि श्री मोदी के इन कार्यक्रमों में इन दोनों चुनाव क्षेत्रों के मतदाताओं को नहीं लाया जायेगा? क्या उनके लाने लेजाने और खाने- पीने पर धन खर्च नहीं किया जाएगा? क्या इन कार्यक्रमों का टीवी चैनलों को प्रभावित कर लाइव प्रसारण अथवा बार बार समाचार प्रसारण नहीं कराया जायेगा और वह इन दोनों मतदेय क्षेत्रों में प्रसारित नहीं होगा? क्या मतदान वाले दिन दोनों चुनाव क्षेत्रों में बंटने वाले समाचार पत्र मोदीजी के भाषणों और कथित घोषणाओं से भरे नहीं होंगे? और क्या इस सबसे दोनों क्षेत्रों के मतदाता प्रभावित नहीं होंगे?
इन सारी स्थितियों- परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार कर निर्णय लेने के बजाय शामली के जिलाधिकारी की इस रिपोर्ट कि आचार संहिता तो शामली में लगी है, निर्वाचन आयोग ने यह सुविधाजनक निर्णय लेलिया. कौन नहीं जानता कि उपचुनावों में आचार संहिता संबंधित जिले में ही लगती है. निर्वाचन आयोग को शासक दल की मंशा और दोनों कार्यक्रमों से पैदा होने वाली परिस्थितियों का परीक्षण भी करना चाहिये. भाकपा ने निर्वाचन आयोग से अपने उपर्युक्त फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है.
ज्ञातव्य होकि गत दिन भाकपा ने एक बयान जारी कर मोदी द्वारा किये जाने वाले लोकार्पण कार्यक्रम और चुनाव क्षेत्रों के समीपस्थ जिले में प्रस्तावित रैली को रद्द करने की मांग की थी और फिर राष्ट्रीय लोकदल ने निर्वाचन आयोग से लिखित अपील की थी.

डा. गिरीश

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मंगलवार, 22 मई 2018

CPI demands postponment of BJP Railly in Bahapat, U.P.


कैराना लोकसभा और नूरपुर विधान सभा क्षेत्रों का प्रचार थमने और मतदान से पहले होने जारही मोदी की बागपत रैली और लोकार्पण कार्यक्रम पर रोक लगाये निर्वाचन आयोग

भाकपा ने की मांग


लखनऊ- 22 मई, 2018—भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने केन्द्रीय निर्वाचन आयोग से मांग की है कि वह उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीटों पर प्रचार थमने के बाद से मतदान संपन्न होने के दरम्यान उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रस्तावित लोकार्पण कार्यक्रमों और आम सभाओं को प्रतिबंधित करें.
ज्ञातव्य हो कि उपर्युक्त दोनों सीटों पर 26 मई को सायंकाल प्रचार कार्य थम जायेगा और 28 मई की शाम पांच बजे तक मतदान होगा.
भाजपा और प्रधानमंत्री ने इस प्रचारबन्दी और मतदान की अवधि में बड़ी चतुराई से 27 मई को समीपस्थ जिले बागपत के मवीकलां में ईस्टर्न पेरिफेरल हाईवे का उद्घाटन करने और खेकडा में आमसभा करने का कार्यक्रम निर्धारित कर लिया है. इस कार्यक्रम में अपने खर्च पर और बड़े पैमाने पर  भाजपा दोनों चुनाव क्षेत्रों से जनता और मतदाताओं को लेजाने में जुटी है. साथ ही समूची कार्यवाही और लोकलुभावन घोषणाओं को टीवी चैनलों एवं अन्य समाचार माध्यमों के जरिये फैला कर मतदाताओं को प्रभावित किया जायेगा.
गत लोक सभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों के दरम्यान भी भाजपा और श्री मोदी ने किसी एरिया विशेष में मतदान के दिन किसी अन्य क्षेत्र में रैली, आमसभा अथवा रोडशो आयोजित कर संचार माध्यमों के जरिये मतदाताओं को प्रभावित करने का षडयंत्र किया था. यही कहानी वे 27 मई को दोहराने जारहे हैं. जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 31 मई तक इस हाईवे के लोकार्पण की छूट देरखी है तो यह कार्यक्रम 28 मई के बाद की किसी तिथि पर आयोजित किया जासकता है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय को भी संज्ञान लेना चाहिये कि उनके आदेश की आड़ में राजनैतिक खेल तो नहीं खेला जारहा है.
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने भाजपा की इस कार्यवाही को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन और नियम विरुध्द बताते हुये इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.

डा. गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश


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बुधवार, 16 मई 2018

वाराणसी पुल हादसे पर भाकपा ने शोक जताया




लखनऊ- 16 मई 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने गत दिन वाराणसी में हुये निर्माणाधीन पुल हादसे में हुयी निर्दोष नागरिकों की मौतों पर गहरा दुःख जताया है और शोकातुर उनके परिवारों के प्रति गहरी सहानुभूति व्यक्त की है. भाकपा ने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है.
यहाँ जारी एक बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यह एक मानवजनित त्रासदी है जिसकी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार को लेनी चाहिये. संपूर्ण मामला भ्रष्टाचार और अहमन्यता की देन है जिसकी जद में आकर कई दर्जनों की जानें चली गयीं और अन्य अनेक गंभीर रूप से घायल हैं.
भाकपा ने प्रत्येक मृतक परिवार को रूपये पचास लाख बतौर जनहानि मुआबजा दिया जाने, हर मृतक के एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने, घायलों का सुचारू संपूर्ण इलाज और उन्हें कम से कम पांच लाख रुपये की सहायता राशि दिये जाने की मांग की है. यदि कोई घायल व्यक्ति विकलांग होजाता है तो उसे भी नौकरी दी जानी चाहिए.
भाकपा की राय है कि क्योंकि यह निर्माण कार्य स्वयं प्रधानमंत्री जी के संसदीय क्षेत्र में होरहा था और इसकी उच्च स्तर पर निगरानी चल रही थी तो जिम्मेदारी भी उच्च स्तर पर बनती है. पर सरकार छोटी मछलियों को निशाना बना रही हैं. ये बहुत अनुचित है. घुमक्कड़ प्रधानमंत्री को भी तत्काल अपने संसदीय क्षेत्र के पीड़ितों का दुःख बांटने आना चाहिए था.
भाकपा ने अपनी जिला कमेटी को निर्देश दिया कि वह पीड़ितों के दुःख दर्द में शामिल रहे और हादसे के जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने की आवाज को बुलंद रखे.

डा. गिरीश

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शुक्रवार, 4 मई 2018

प्राकृतिक आपदा की मार को गंभीरता से नहीं लेरहीं हैं केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सरकार: भाकपा




लखनऊ- 4 मई भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने विगत दिन आये बवंडर से हुये जान और माल के भारी नुकसान पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है. पार्टी ने आपदा में मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना का इजहार करते हुये सरकार से आपदा राहत के लिये फौरी कदम उठाने की मांग की है.
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि तूफ़ान से देश में 100 से अधिक लोगों की जानें चली गयीं. सर्वाधिक तवाही उत्तर प्रदेश में हुयी है. अकेले आगरा में ही 50 से अधिक लोगों की जानें जाचुकी हैं. सैअक्दों लोग घायल हैं. बड़े पैमाने पर फसलों, पशुधन और इमारतों को नुकसान पहुंचा है. आगरा के अलावा बिजनौर, बरेली, सहारनपुर, पीलीभीत, फीरोजाबाद, चित्रकूट, मुज़फ्फरनगर, रायबरेली और उन्नाव जिलों में भी भारी तवाही हुयी है. लेकिन राहत और बचाव कार्यों के नाम पर अभी तक कागजी कार्यवाही ही देखने में आरही है.
डा. गिरीश ने कहाकि मौसम विभाग द्वारा पहले से दी गयी चेतावनियों को नोटिस में लेकर जरुरी तैयारियां की गयीं होतीं तो इस भारी हानि से किसी हद तक बचा जा सकता था. अब भी आगे और बवंडर आने की चेतावनी को भी बहुत गंभीरता से नहीं लिया जारहा. प्राकृतिक आपदा से लगे आघातों  को भरने की कोशिशों के बजाय पूरी सरकार, भाजपा और संघ गिरोह जिन्ना प्रकरण खड़ा कर वोटों की फसल उगाने में जुटा है. मोदी जी और जोगी जी कर्णाटक में चुनाव अभियान में जुटे हैं. पीड़ित जनता को संवेदनहीन प्रशासन के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है.
भाकपा ने मृतकों के परिवारों को रु. 4 लाख और घायलों को घोषित 50 हजार की सहायता को अपर्याप्त बताया है. भाकपा ने प्रत्येक मृतक के परिवार को रु. 10 लाख और घायलों को कम से कम 2 लाख दिए जाने की मांग की है. साथ ही फसल और अन्य हानियों का तत्काल सर्वे कराकर हानि  की शत- प्रतिशत भरपाई की मांग की है.

डा. गिरीश


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गुरुवार, 3 मई 2018

जिन्ना की तस्वीर की आड़ में देश को नफ़रत की आग में झोंकने में जुटे हैं भाजपा और संघ परिवार: भाकपा उत्तर प्रदेश




 लखनऊ- 3 मई, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ भवन में लगी मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर को हठाने की आरएसएस/ भाजपा की मांग और इसकी आड़ में सांप्रदायिकता फ़ैलाने, गुंडागर्दी करने तथा हिंसा भड़काने की कोशिशों की कड़े शब्दों में निन्दा की है.
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि भाजपा देश चलाने और जनता से किये वायदों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है. अतएव जनता को विभाजित करने को वह ऐसे संवेदनशील मुद्दे खड़े कर रही है जिनसे देश और समाज को भारी क्षति पहुंचेगी.
ताज़ा मामला एएमयू में लगी जिन्ना की तस्वीर को हठाने का है. डा. गिरीश ने कहाकि आरएसएस और जनसंघ 1977 में जनता पार्टी की सरकार में शामिल थे. 1999 से 2004 तक भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार थी. और अब 4 साल से अपार बहुमत वाली भाजपा सरकार केन्द्र में है. उत्तर प्रदेश में भी 1966 से आज तक अनेकों बार भाजपा शासन में रही है. लेकिन कभी संघ परिवार को जिन्ना की तस्वीर हठाने की याद नहीं आयी.
लेकिन अब जबकि भाजपा हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल होचुकी है, और काला धन वापस लाने, हर नागरिक को रु. -15 लाख देने, दो करोड़ युवाओं को हर साल रोजगार देने, किसानों की आमदनी दोगुना किये जाने तथा स्वच्छ प्रशासन देने जैसे उसके खास वायदों को पूरा करने से मुकर गयी है तो उसने तमाम विभाजनकारी मुद्दे उठाना शुरू कर दिया है. वोट की राजनीति के लिये वह देश की युवा पीढ़ी के दिलों में नफरत का जहर घोल रही है और उन्हें अपनी घ्रणित राजनीति का मोहरा बना रही है. अपने कुत्सित उद्देश्यों को पूरा करने को पहले उसने कासगंज में विद्यार्थियों को दंगों की आग में झोंका तो अब अलीगढ में छात्र- नौजवानों को नफरत की आग का ईंधन बनाया जारहा है.
जो भाजपा सरकार पूर्ण बहुमत में होते हुये न मंदिर निर्माण करा पायी, न धारा 370 को हठा पायी 2019 के लोक सभा चुनावों के  निकट आने और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में फायदा उठाने को वह अब जिन्ना की तस्वीर हठाने के नाम पर हिंसा और उपद्रव पैदा कर रही है. रिकार्ड गवाह हैं कि हर चुनाव से पहले भाजपा गड़े मुर्दे उखाड़ना शुरू कर देती है. आजादी के आन्दोलन से बाहर रहा संघ परिवार कभी भी देश में अनेक जगह लगी अंग्रेज शासकों की मूर्तियों को हठाने की मांग नहीं करता. नहीं भाजपा सरकार ने कभी पाकिस्तान से कूटनीतिक संबंध तोड़े हैं. अपितु श्री मोदी तो वहां बिना आमंत्रण के ही जाचुके हैं. भाजपा को यह भी जबाव देना होगा कि उसके अनुयायी डा. आंबेडकर और पेरियार की प्रतिमाएं क्यों तोड़ा करते हैं? क्या पेरियार और आंबेडकर ने भी पाकिस्तान बनाया था?
डा. गिरीश ने कहाकि जहाँ तक अलीगढ का सवाल है वहां संघी संगठनों को हिंसा और उत्पात भड़काने की खुली छूट स्थानीय प्रशासन ने दी. उन्हें यदि एएमयू परिसर से दूर ही रोकने के बजाय पुलिस- प्रशासन कथित जागरण मंच वालों की सुरक्षा में लगा था. भाकपा का आरोप है कि योगी राज में पुलिस प्रशासन बेहद दबाव में काम कर रहा है. इसीलिये समूचा प्रदेश अराजकता, गुंडागर्दी और सांप्रदायिकता की गिरफ्त में है. मुख्यमंत्री को क़ानून व्यवस्था सुधारने से ज्यादा भाजपा के डूबते जहाज को बचाने की फ़िक्र है. कल आये तूफ़ान में आधा सैकड़ा से अधिक लोगों के मारे जाने और भारी तबाही के बावजूद वे कर्नाटक विधान सभा चुनाव में वोट बटोरने की कबायद में लगे हैं.
भाकपा ने अलीगढ़ में उत्पात मचाने वाले संघियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्यवाही किये जाने की मांग की है.

डा. गिरीश

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सोमवार, 23 अप्रैल 2018

पेट्रोल- डीजल की कीमतें तत्काल नीचे लायी जायें : डा. गिरीश




लखनऊ-  गत दो दिन पहले रिकार्ड तोड़ चुकी पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कल फिर 19 पैसे प्रति लीटर की वृध्दि कर दी गयी. गत दो दिन पहले की वृध्दि में ही पेट्रोल ने पिछले पांच साल का रिकार्ड तोडा दिया था जबकि डीजल पहली बार अब तक की इस ऐतिहासिक उंचाई पर पहुंचा था.
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में होरही वृध्दि के नाम पर प्रति दिन की जारही इस वृध्दि के विरुध्द अब आवाज उठाना जरुरी होगया है. क्योंकि जब अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम रिकार्ड नीचाई पर थे तब सरकार ने कर भार बढ़ा कर उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलने से वंचित किया और अब जबकि कच्चे तेल के दाम ऊपर की ओर खिसक रहे हैं तो बाजार व्यवस्था के नाम पर प्रतिदिन कीमतें बढ़ाई जारही हैं. आम उपभोक्ता ही नहीं समूचा बाजार इससे से ठगा महसूस कर रहे हैं.
‘एक देश एक टैक्स’ नारे के तहत लागू किये गये जीएसटी से पेट्रोलियम पदार्थों को बाहर रखना सरकार की बदनीयती का परिचायक है. यह अतार्किक व्यवस्था ज्यादा दिन नहीं चलने देनी चाहिए.
पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृध्दि के तात्कालिक और दूरगामी प्रभाव होते हैं. इससे किराया- भाड़ा बढ़ जाता है, अतः प्रत्येक उपभोक्ता वस्तु की कीमतें बढ़ जाती हैं. सिंचाई की लागत, खाद बीज डीजल बिजली कीटनाशकों आदि की कीमतें बढ़ने से कृषि उत्पाद महंगे होजाते हैं. जिन उद्योगों में पेट्रोलियम पदार्थों से उत्पादन होता है वहां तो दोहरी मार पड़ती है. मुद्रास्फीति की दर बड़ने से चहुन्तरफा महंगाई की मार झेलनी पड़ती है. विकास ठिठक जाता है.
लेकिन आश्चर्य की बात है कि विकास विकास का दिन रात ढिंढोरा पीटने वाली सरकार सब कुछ भूल, लूट में लगी है. संप्रग सरकार के ज़माने में बाहर से समर्थन देरहे वामदलों ने पेट्रोल डीजल के दाम न बढ़ने देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, और उपभोक्ताओं को लाभ पहुँचाया था. पर एनडीए के घटक दल मौन हैं. आम जनता के हित में उन्हें सरकार पर दबाव बनाना चाहिए.
लेकिन सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक इस मुद्दे पर मध्यम वर्ग की चुप्पी है. जाति- धर्म की राजनीति में बंटा और निजी स्वार्थों के लिये ही मुखर होने वाले मध्यवर्ग को अब अपने जबड़े इस बढ़ोतरी के खिलाफ खोलने चाहिए.
मैं भाकपा कार्यकर्ताओं, वामपंथी साथियों और जनहितैषी अन्य शक्तियों से आग्रह करता हूँ कि वे किसी न किसी रूप में पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई पर प्रतिरोध दर्ज करायें और सरकार से मांग करें कि वह इन पर कर भार तत्काल घटा कर कीमतों को नीचे लाये. इन्हें जीएसटी के दायरे में लाने के लिये सभी को दबाव बनाने की जरूरत है.
और अंत में कुछ निजी उपाय. मैं स्वयं सप्ताह में एक दिन पेट्रोल डीजल उपयोग न करने का उपवास करूंगा. सप्ताह में एक दिन ऐसे किसी वाहन में यात्रा नहीं करूंगा जो पेट्रोल अथवा डीजल से चलता हो. आप भी यह प्रयास सकते हैं.

डा. गिरीश 

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शनिवार, 21 अप्रैल 2018

भाजपा को सत्ता से बेदखल करने को लामबंद होरही हैं देश की प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टियां




देश की तीन प्रमुख कम्युनिस्ट पार्टियां अन्य वामपंथी जनवादी दलों को साथ लेकर केंद्र की घोर जनविरोधी, छलिया, सांप्रदायिक और फासीवादी रुझानों से परिपूर्ण भाजपा की केन्द्र सरकार को 2019 में सत्ता सिंहासन से अपदस्थ करने की रणनीति को अंजाम देने में जुटी हैं. भारतीय कम्युनिस्ट आन्दोलन में विभाजन के बाद यह पहला अवसर है जब देश की तीन कम्युनिस्ट पार्टियां- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी ) तथा भाकपा- माले ( लिबरेशन ) एक सामान्य राजनैतिक रणनीति बनाने के बेहद करीब हैं.
देश की सबसे पुरानी कम्युनिस्ट पार्टी- भाकपा ने लगभग 10 माह पूर्व ही अपनी इस परिकल्पना को प्रस्तुत कर दिया था कि भाजपा द्वारा जनता, हमारे सामाजिक ताने बाने, लोकतंत्र और संविधान पर किये जारहे हमलों का जबाव देने के लिये एक धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक और वामपंथी शक्तियों प्लेटफार्म तैयार किया जाये. 25 से 29 अप्रैल तक केरल के शहर कोल्लम में होने जारहे भाकपा के 23 वें महाधिवेशन में इसी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाना है.
शब्दों का हेर फेर होसकता है लेकिन माकपा के हैदराबाद में चल रहे 22 वें महाधिवेशन में कल पारित राजनैतिक प्रस्ताव में इस बात पर जोर दिया गया है कि हमारी मुख्य लड़ाई भाजपा/ आरएसएस से है और इसे परास्त करने को जनता के व्यापकतम हिस्सों को लामबंद किया जाना चाहिये. गत माह संपन्न भाकपा- माले के महाधिवेशन में पारित प्रस्ताव में भाजपा को मुख्य चुनौती मानते हुये इसे सत्ता से हठाने को वामपंथी लोकतांत्रिक शक्तियों को बड़े पैमाने पर गोलबंद करने की जरूरत पर बल दिया गया.
निश्चय ही देश की लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष ताकतों को लामबंद करने में कम्युनिस्ट पार्टियों की साझा रणनीति एक आधार का काम करेगी. वामपंथ में बन रही इस व्यापक रणनीतिक एकता के वस्तुगत और अपरिहार्य कारण भी हैं.
देश आजादी के बाद के सबसे जटिल संकट से गुजर रहा है. देश और अधिकतर राज्यों की सत्ता ऐसे समूह के हाथों में केन्द्रित है जो संपूर्णतः देश के मेहनतकशों के हितों पर डाका डाल कर पूंजीपतियों की तिजौरियां भरने को प्रतिबध्द है. देश की आबादी का लगभग 70 प्रतिशत भाग आज भी ग्रामों में रहता है. यह ग्रामीण भारत खेती और खेती से जुड़े लघु उद्यमों पर आश्रित है. आज यह ग्रामीण समुदाय आर्थिक रूप से सबसे अधिक असुरक्षित और विपन्न है. कारण- खेती बेहद घाटे का सौदा बन चुकी है. पूंजीवादी अर्थतंत्र खेती के बल पर टिका हुआ है पर खेती किसान की लागत और उसके परिश्रम को निगल रहा है. खेती बदहाल है तो उससे जुड़े लघु और कुटीर उद्योग भी वरबाद हैं.
खेती और उसकी बदहाली के कई कारण हैं. कृषि उत्पादों की कीमतें तय करने का अधिकार किसान के पास नहीं है. कुछेक खाद्यान्नों की कीमतें सरकार तय करती है तो फल सब्जी और कई अन्य की कीमतें मंडी में मांग- आपूर्ति के आधार पर तय होती हैं. यह लागत, जमीन के किराये और किसान के परिश्रम की तुलना में काफी कम होती हैं. इसके अलाबा खेती में काम आने वाली हर वस्तु की कीमत मुनाफे पर आधारित बाजार निर्धारित करता है. इससे खेत्ती का लागत मूल्य बढ़ जाता है. प्राकृतिक आपदाओं की मार भी किसानों के ऊपर ही पड़ती है.
इन्हीं वजहों से किसान निरंतर घाटे के चलते कर्जदार होता जारहा है. बैंक ऋण हासिल करने में आने वाली कठिनाइयां उसे सूदखोरों से कर्ज लेने को बाध्य करती हैं. यही वजह है कि कर्ज में डूबे पीड़ित किसानों द्वारा आत्महत्यायें करने का दौर थमने का नाम नहीं लेरहा. भाजपा और मोदी ने गत लोकसभा चुनावों के दौरान किसानों की आमदनी दोगुना करने का वायदा किया था. अन्य वायदों की तरह यह भी जुमला साबित हुआ. ग्रामीण श्रमिकों की जीवनरेखा- मनरेगा को भी सीमित कर दिया गया है.
यद्यपि गत शताब्दी के सातवें दशक से ही मन्दी और उद्योग बन्दी शुरू होगयी थी लेकिन 1991 में शुरू हुये आर्थिक नवउदारवाद के दौर में मंदी और उद्योग बंदी की यह रफ़्तार और तेज होगयी. मोदी सरकार के कतिपय कदमों जिनमें नोटबन्दी और जीएसटी का लागू किया जाना प्रमुख हैं, ने हालातों को और संगीन बना दिया है. फलतः हमारी अर्थव्यवस्था में चहुँतरफा गिरावट स्पष्ट दिखाई दे रही है. डालर के मुकाबले रूपये की कीमत गिर कर निम्नतम स्तर पर पहुंच गयी है. आयात बढ़ा है और निर्यात घटा है. सकल घरेलू उत्पाद ( जीएसटी ) की दर हो या औद्योगिक उत्पादन की दर, हरएक में लगातार क्षरण होरहा है.
अतएव बेरोजगारी में बेतहाशा वृध्दि हुयी है. मोदीजी ने दो करोड़ नौजवानों को हर वर्ष रोजगार देने का वायदा किया था पर उन्हें रोजगार देने के बजाय सिर्फ मुद्रा, स्टार्टअप, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया आदि नारों से बहलाने की कोशिश की जारही है. पूंजीपतियों जिनके कतिपय हिस्से आज कारपोरेट घराने बन चुके हैं, को लाभ पहुंचाने को जनता की गाड़े पसीने की कमाई से स्थापित हुये व स्वदेशी बुध्दिमत्ता और परिश्रम से विकसित हुये सार्वजनिक उद्यमों को उनके हाथों बेचा जारहा है. बैंकों में जमा आम जनता के धन को धनिक वर्ग को दिलाया जारहा है जिसे वे वापस करने के बजाय बट्टे खाते में डलवा रहे हैं या फिर बैंकों से भारी रकमें लेकर विदेशों को भाग रहे हैं. बैंकों से लगातार होरही इन अवैध निकासियों का भार सामान्य निवेशकों पर डाला जारहा है. जितने घपले घोटाले संप्रग सरकार के दो कार्यकालों में हुये थे उससे कहीं ज्यादा राजग/ भाजपा के चार सालों में होचुके हैं.
अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों ने ऐतिहासिक ऊंचाई छू ली है. जिससे पहले से आसमान छूरही महंगाई को और भी पंख लगने वाले हैं. पेटोलियम पदार्थों के सस्ते होते हुए भी उपभोक्ताओं को महंगे दामों पर बेचने वाली सरकार अब बढ़ती कीमतों का भार अपने सर पर लेने को तैयार है न उसको जीएसटी के अंतर्गत लाने को तैयार है.
सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली को वरबाद करने की प्रक्रिया दशकों से जारी थी लेकिन मोदी राज में वह और तेज हुयी है. शिक्षा का बजट निम्नतम स्तर पर ला दिया गया है. अब चुनींदा और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों को निजीकरण की दिशा में धकेला जारहा है. नीति यह है कि इसे इतना महंगा बना दिया जाये कि समाज के सामान्य हिस्से इससे वंचित होजायें और वे लुटेरी और शोषक पूंजीवादी व्यवस्था की भट्टी में जलने वाले सस्ते ईंधन के तौर पर स्तेमाल होते रहें. इस उद्देश्य से श्रम कानूनों को भी कमजोर बनाया जारहा है. शिक्षा को धर्मान्धता, पाखण्ड, पोंगापंथ और सांप्रदायिकता फ़ैलाने का औजार बनाने को इसके पाठ्यक्रमों में प्रतिगामी बदलाव किये जारहे हैं. इतिहास, कला और संस्कृति की व्याख्या संघ के द्रष्टिकोण से की जारही है.
स्वास्थ्य सेवायें भी सरकार के निशाने पर हैं और वे भी बेहद महंगी और आम आदमी की पहुंच से बाहर होती चली जारही हैं. सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पंगु बना कर गरीबों के मुहँ का निवाला छीना जारहा है. हर तरह की सब्सिडी को खत्म किया जारहा है.
आतंकवाद को समाप्त करने और सीमापार के दुश्मनों का खात्मा करने के मोदी और भाजपा के दावों का खोखलापन इसीसे से जाहिर होजाता है कि गत चार सालों में पूर्व के भारत- पाक युध्दों से भी अधिक संख्या में हमारे सैनिक और अन्य सुरक्षा बलों के जवान शहीद होचुके हैं.
मोदी, भाजपा और आरएसएस की तिकड़ी और कारपोरेट हितों की पोषक इस सरकार के प्रति जनता का मोहभंग तेजी से बढ़ रहा है. हाल में कई राज्यों में हुये उपचुनावों, निकाय और अन्य चुनावों के परिणामों ने भाजपा के पैरों तले से जमीन के खिसकने का संकेत दे दिया है. उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और फूलपुर की लोकसभा सीटें जिन पर प्रदेश के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री  जीते थे, पर भाजपा की करारी हार ने साबित कर दिया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की पराजय का रास्ता तैयार होरहा है. उनका दावा कि “मोदी का कोई विकल्प नहीं”, उत्तर प्रदेश में ही दम तोड़ रहा है.
लेकिन संपूर्ण सत्ता का स्वाद चख चुकी भाजपा और उसका रिंग मास्टर आरएसएस इसे इतनी आसानी से छोड़ने वाला नहीं. बेनकाबी जितनी तेजी से बढ़ रही है उसको नकाब पहनाने के प्रयास भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहे हैं. अतएव हर वह हथकंडा जो जनता को गुमराह और विभाजित कर सके अपनाया जारहा है. सभी जानते हैं कि मंदिर- मस्जिद विवाद सर्वोच्च न्यायालय के विचाराधीन है और उसका फैसला आने पर ही हल हो सकता है. फिर भी मंदिर निर्माण के लिये लगातार तीखे बोल बोले जारहे हैं. कथित लव जिहाद, गोरक्षा और तीन तलाक जैसे मुद्दों की आड़ में अल्पसंख्यकों और दलितों को निशाना बनाया जारहा है. दंगे कराये जारहे हैं और दंगों तथा  हत्याओं में संलिप्त संघी अपराधियों को आरोपों से मुक्त किया जारहा है. आरक्षण के सवाल पर भी भाजपा समाज को बांटने का काम कर रही है. विभाजनकारी यह एजेंडा दिन व दिन धारदार बनाया जाना है. संविधान और न्यायिक प्रणाली तक को बदलने का प्रयास जारी है.
कारपोरेट हितों की पोषक और फासिस्टी रुझानों से सराबोर इस सरकार को सत्ताच्युत करना आज हर लोकतंत्रवादी ताकत का सबसे प्रमुख लक्ष्य बन गया है. कम्युनिस्ट पार्टियां महसूस करती हैं कि जनविरोधी, लोकतंत्र और संविधान विरोधी इस सरकार को अपदस्थ करने को एक व्यापक और व्यावहारिक रणनीति बनाई जाये. सभी लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और वामपंथी ताकतों का एक प्लेटफार्म तैयार कर संघर्षों को नयी उंचाइयों तक लेजाया जाये. बरवादी की जड़ आर्थिक नवउदारवाद की नीतियों का एक आर्थिक- सामजिक विकल्प पेश किया जाए. सांप्रदायिकता, धर्मान्धता और रूढ़िवादिता के खिलाफ वैचारिक मुहीम चलाई जाये. तीनों कम्युनिस्ट पार्टियों के राजनैतिक दस्तावेजों में इन तथ्यों को शिद्दत के साथ रेखांकित किया गया है. भारत के वामपंथी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष आन्दोलन के लिये यह एक नयी शुरुआत है.

डा. गिरीश





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शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

बलात्कार रोको, दलितों का उत्पीडन बन्द करो, अपराध रोको : वामदल




लखनऊ- कठुआ, उन्नाव, एटा, सिकंदरा राऊ ( हाथरस ), नोएडा, पीलीभीत, सूरत तथा देश और उत्तर प्रदेश के हर कोने से महिलाओं और अबोध बालिकाओं के साथ बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और बलात्कार के बाद हत्याओं की दिल दहलाने वाली खबरें आरही हैं. विदेशों तक में इन शर्मनाक वारदातों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होरहे हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ तक ने इन घटनाओं पर गहरी चिन्ता जतायी है. अल्पसंख्यकों के बाद अब दलित- गरीब और पिछड़े सामंती और सरकारी उत्पीडन के शिकार होरहे हैं. फर्जी एनकाउंटरों में नौजवान मौत के घाट उतारे जारहे हैं. अपराध थमने के बजाय बढ़ते ही जारहे हैं. पुलिस प्रशासन लूट खसोट में मस्त है. आमजन त्राहि त्राहि कर रहा है.
इन सभी मुद्दों पर केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सरकार की निद्रा तोड़ने के उद्देश्य से आज वामपंथी दलों ने समूचे उत्तर प्रदेश में जिला और तहसील मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किये. प्रदर्शनों के बाद जिले के संबंधित अधिकारियों को राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन दिए गए. ज्ञापनों में प्रमुख रूप से बलात्कारियों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्यवाही किये जाने, दलितों- कमजोरों का उत्पीडन रोके जाने, अपराधों पर नियंत्रण करने और राजनैतिक उद्देश्य से किये जारहे एन्काउन्टरों को रोके जाने की मांग की गयी.
वामदलों का आरोप है कि भाजपा और उसकी सरकार दबंगों, सामंतवादी और जातिवादी तत्वों तथा शोषक वर्गों के हितों को साधने में लगी है, शासक दल के विधायक और सांसद जो आपराधिक और आर्थिक आपराधिक प्रष्ठभूमि के हैं, एक के बाद एक वारदातों को अंजाम देरहे हैं लेकिन ध्रतराष्ट्रवादी सरकार उनको बचाने में लगी रहती है. 2 अप्रैल के भारत बंद के बाद दलितों पर नए हमलों की शुरूआत होचुकी है और उन्हें जेलों में ठूँसा जारहा है. महिलाओं की रक्षा का भरोसा दिलाने के बजाय भाजपा के अग्रणी नेता उनके प्रति कड़वे बोल बोल रहे हैं. कठुआ में तो भाजपा के मंत्रियों और नेताओं ने बलात्कारियों के पक्ष में जुलूस निकाले.
वामपंथी दलों ने आरोप लगाया है कि एनकाउन्टर के नाम पर योगी सरकार राजनीति कर रही है. सुनियोजित तरीके से दलितों अल्पसंख्यकों और अन्य गरीबों के घरों के नौजवानों की हत्या की जारही है. 14 सौ से अधिक इन हत्याओं के बावजूद अपराधों में कमी न आना इस बात का जीता जागता प्रमाण है कि अपराधी आजाद घूम रहे हैं और निर्दोष लोग मौत के घाट उतारे जारहे हैं.
वामदलों के इस आन्दोलन में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा- ( मार्क्सवादी ), भाकपा- माले, फारबर्ड ब्लाक और एसयूसीआई- सी के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने दाबा किया कि फसलों की कटाई और मढ़ाई के सीजन के बावजूद वामदलों के इस आन्दोलन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया.

डा. गिरीश


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