भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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रविवार, 5 नवंबर 2017

भाकपा और एटक का प्रतिनिधिमंडल कल ऊंचाहार में



लखनऊ- 5 नवंबर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ( एटक ) का एक राज्य स्तरीय प्रतिनिधिमंडल 6 नवंबर, सोमवार को ऊंचाहार पहुंचेगा. प्रतिनिधिमंडल वहां एनटीपीसी हादसे के पीड़ितों से मुलाक़ात कर उनका दर्द बांटेगा. कर्मचारी यूनियनों और प्रबंधतंत्र से मिल कर दुर्घटना के कारणों और दुर्घटना से हुयी हानि के बारे में समझने की कोशिश करेगा. प्रतिनिधिमंडल वहां पत्रकारों से भी बातचीत करेगा.
प्रतिनिधिमंडल में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश, एटक के संरक्षक का. अरविन्द राज स्वरूप, इप्टा के प्रांतीय महामंत्री संतोष डे तथा भाकपा राज्य काउंसिल के सदस्य का. ओमप्रकाश आनन्द आदि प्रमुख रूप से शामिल होंगे.

डा. गिरीश 

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शनिवार, 4 नवंबर 2017

चंद्रशेखर पर रासुका की कार्यवाही की भाकपा ने निंदा की : माननीय उच्च न्यायालय और राज्य निर्वाचन आयोग से संज्ञान लेने का अनुरोध किया.



लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने सहारनपुर जिला प्रशासन द्वारा भीम सेना के संस्थापक श्री चंद्रशेखर "रावण" पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत की गयी कार्यवाही की कड़े से कड़े शब्दों में भर्त्सना की है. भाकपा ने चंद्रशेखर पर थोपी गयी रासुका को फ़ौरन हठाये जाने की मांग की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि भाजपा की उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह से दमनचक्र पर उतारू है और वह कमजोर लोगों पर होरहे अत्याचारों के खिलाफ उठ रही हर आवाज को दबा देना चाहती है. सहारनपुर प्रकरण में पहले एकतरफा कार्यवाही करते हुए चंद्रशेखर को संगीन दफाओं में जेल में डाला और अब जब माननीय उच्च न्यायालय ने उन्हें चार मामलों में जमानत दे दी, तो न्यायालय के आदेशों को निष्प्रभावी करने को उन पर रासुका की कार्यवाही कर दी.
भाकपा राज्य सचिव ने माननीय उच्च न्यायालय से भी अनुरोध किया है कि दमन के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाने वाली इस कार्यवाही का संज्ञान लेते हुये जिला प्रशासन को तलब करें. भाकपा ने राज्य निर्वाचन आयोग से भी मांग की कि वह आचार संहिता लागू रहने के दरम्यान राजनैतिक लाभ उठाने के उद्देश्य  से की गयी इस कार्यवाही का को रद्द करने को कदम उठायें.
भाकपा राज्य सचिव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह दलितों के वोट हड़पने को कथित दलित नेताओं को पार्टी में शामिल कर ऊंचे पदों पर बैठालती है, वहीं दलितों- कमजोरों के हित में आवाज उठाने वालों के साथ मुजरिमाना व्यवहार करती है. सरकार की इस कार्यवाही से वे कथित दलित नेता बेनकाव होगये हैं जो सत्ता सुख भोगने के लिए अथवा कार्यवाही के भय से इस संगीन मगर मानवीय प्रश्न पर चुप्पी साधे बैठे हैं, डा. गिरीश ने कहा है.

डा. गिरीश 

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गुरुवार, 2 नवंबर 2017

रसोई गैस के दामों में भारी वृध्दि वापस ले सरकार: भाकपा



लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य इकाई ने रसोई गैस के दामों में हुयी भारी बढ़ोत्तरी की कड़े शब्दों में निंदा की है और जनहित में इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है. पार्टी ने दो पहिया वाहनों की बीमा फीस बढाने की भी आलोचना की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि घरेलू गैस के गैर सब्सिडी वाले सिलिंडरों की कीमतों में 93. 50 रूपये, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 146. 50 रुपये तथा सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत में 4. 56 रुपये प्रति सिलेंडर की वृध्दि कर दी गयी है. इससे  स्पष्ट है कि सरकार गरीब और आम लोगों लोहे के डंडे से हांक रही है.
इन बढ़ोत्तरियों का सीधा प्रभाव बाज़ार मूल्यों पर पडेगा और पहले से ही आम और गरीब लोगों को हलकान कर रही महंगाई तेजी से छलांग भरेगी. नोटबंदी और जीएसटी से चौपट पड़ा व्यापार और भी चौपट होजायेगा. लेकिन सरकार ने मानो जनता और उद्योग व्यापार तथा कृषि को बर्वाद करने की ही ठान ली है.
यह आकस्मिक नहीं है कि जब सरकार को कोई जनविरोधी कार्यवाही करनी होती है तो सरकार समर्थक संगठन उससे पहले ही संवेदनशील मुद्दों को हवा देना शुरू कर देते हैं. राम मंदिर के नाम पर उनकी ताजा मुहीम सरकार के इन कदमों पर पर्दा डालने और गुजरात, हिमाचल प्रदेश विधान सभाओं और उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों में वोट हासिल करने की कवायद के अलावा कुछ नहीं है क्योंकि हर कोई जानता है कि मंदिर मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है.
भाकपा ने चेतावनी दी कि चुनाव आचार संहिता की समाप्ति के बाद जनता को तवाह करने वाले इस सवाल को जनता के बीच लेजाया जायेगा.

डा. गिरीश 

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बुधवार, 1 नवंबर 2017

रायबरेली हादसे पर भाकपा ने गहरा दुःख जताया: राहत और वाचाव कार्य सेना को सौंपे जाने की मांग की



लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने रायबरेली के पावर प्लांट में हुयी ह्रदयविदारक घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि घटना की भयावहता को देखते हुये राहत और बचाव का काम सेना के सुपुर्द किया जाना चाहिये, घायलों को एयर एम्बुलेंस से उचित चिकित्सालयों में भेजा जाना चाहिये, मृतकों के परिवारों को रुपये 25 लाख, अधिक घायलों को रुपये 5 लाख और कम घायलों को रु. 1 लाख तत्काल मुहैया कराया जाना चाहिये. घायलों की जान बचाने को हर संभव कार्य किया जाना चाहिये.
डा. गिरीश ने कहाकि यह हादसा एनटीपीसी की उस यूनिट में हुआ है जिसका निर्माण अभी अभी हुआ है और उसका ट्रायल ही चल रहा था. अतएव सभी के मन में इसके निर्माण में घपले- घोटाले का शक पैदा होना स्वाभाविक है. अतएव इस बड़े हादसे की सीबीआई जांच के आदेश तत्काल दिए जाने चाहिये और घटनास्थल के साक्ष्यों को सुरक्षित करने की गारंटी की जानी होगी.
डा. गिरीश ने कहाकि यह वक्त इस विकराल दुर्घटना के शिकार लोगों के प्रति संवेदनाओं के प्रकटीकरण का है और राजनीति करने का नहीं. लेकिन उत्तर प्रदेश में एक से एक बड़े हादसे होरहे हैं, इलाज और आक्सीजन के अभाव में बच्चे जान देरहे हैं, ह्त्या बलात्कार और लूट की तमाम वारदातें होरही हैं, लेकिन प्रधानमंत्रीजी जो इसी सूबे से सांसद हैं और स्वयं मुख्यमंत्रीजी मंदिर मठों मकबरों में सिजदा करने और देश विदेशों में विचरण करने में मस्त हैं. रायबरेली की इस मर्मान्तक घटना जिसमें कि अब तक 16 लोगों के जान गंवाने और सौ से अधिक के घायल होने की खबर है, के समय भी प्रदेश के मुख्यमंत्री देश से बाहर हैं. भाजपा की सरकारें जनता के प्रति कतई जबावदेह नहीं हैं.
डा. गिरीश 
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बुधवार, 25 अक्तूबर 2017

लाठीचार्ज की निंदा

योगीजी ने लाठीतंत्र में बदल दिया है लोकतंत्र को

भाकपा ने आंगनबाडीयों पर लाठी चार्ज की निंदा की


लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने राजधानी लखनऊ में गत दो दिनों में आंगनबाडी कार्यकर्ताओं पर किये गए लाठीचार्ज की कड़े  शब्दों में निन्दा की है.
एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि पिछले कई सालों से अपनी बाजिव मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री आंदोलनरत हैं और विगत सालों में अनेक बार वे लखनऊ में भी धरने- प्रदर्शन करती रही हैं. लेकिन यह पहला अवसर है जब 48 घंटों में उन पर कई कई बार लाठीचार्ज हुआ और पुलिस ने इस कार्यवाही में सारी मर्यादायें लांघ दीं.
डा. गिरीश ने कहा कि योगी सरकार के अल्पकालिक कार्यकाल में काम मांग रहे लोगों पर तो बार बार लाठी चार्ज किया गया है, मेरठ में हाईकोर्ट बेच की मांग कर रहे अधिवक्ताओं पर भी भयानक तरीके से लाठीचार्ज किया गया. श्री योगी ने लोकतंत्र को लाठीतंत्र में बदल दिया है.
भाकपा ने सरकार से कहा कि वह रोजी रोटी की मांग कर रहे समाज के अभावग्रस्त तबकों के प्रति अपने रवैय्ये में परिवर्तन करे और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को नसीहत दे कि वे भारतीयों से भारतीय जैसा व्यवहार करें, शत्रुओं जैसा नहीं. भाकपा ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है.
डा. गिरीश
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सोमवार, 16 अक्तूबर 2017

Some views on Octobar Revolution

 


अक्तूबर क्रांति और वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता

डा. गिरीश


कुछ प्रगतिशील और अतिवादी वाम- बुध्दिजीवी कहते हैं कि सोवियत संघ इसलिये बिखर गया कि समाजवादी क्रांति को एक ऐसे देश में निष्पन्न किया गया जो औद्योगिक रुप से पिछड़ा था. यह जारशाही रुस में क्रांतिकारी शक्तियों का स्वाभाविक निष्पाद नहीं था. अपितु लेनिन और उनकी पार्टी ने अनिच्छुक लोगों पर इसे थोप दिया था.
लेकिन यह सच नहीं है. लेनिन ने अपनी पुस्तक इम्पीरियलिज्म में कई नतीजे निकाले थे. उनके अनुसार औद्योगिक रुप से विकसित प्रत्येक देश में व्यापार, औद्योगिक पूंजी और बैंकें एकाधिकारवादी वित्तीय पूंजी में विलीन होजाते हैं जिन्हें उस राज्य की सत्ता का पूरा सहयोग हासिल रहता है. इस एकाधिकारवादी पूंजी के असमान विकास के चलते कोलौनीज के बंदरवांट के लिये विश्व युध्द अवश्यंभावी है. युध्द से उत्पन्न हालात भी क्रांति के लिये आधार तैयार करते हैं. पहले और दूसरे दोनों विश्व युध्दों ने क्रांति का रास्ता खोला. प्रथम विश्वयुध्द के बाद यदि रुस में समाजवादी क्रांति संभव हुयी तो दूसरे के बाद भारत सहित तमाम देश आजाद हुये.
लेनिन ने कहाकि समाजवादी क्रांति वहीं होगी जहां साम्राज्यवाद की चेन की कड़ियां सबसे कमजोर होंगी. जारशाही रुस साम्राज्यवादी शृंखला की सबसे कमजोर कड़ी है. उन्होने कहाकि एक देश में समाजवादी क्रांति का सफल होना संभव है क्योंकि वहाँ समाजवाद के निर्माण के लिये साम्राज्यवादी देशों के आपसी टकरावों को स्तेमाल किया जासकता है. अंतत: रूस में 1917 में क्रांति निष्पन्न हुयी.
तमाम कठिनाइयों का सामना करते हुये सोवियत संघ में समाजवाद के निर्माण का काम चल ही रहा था कि तीस के दशक में साम्राज्यवादी देशों ने उपनिवेशों के बंटवारे के लिये दूसरा विश्वयुध्द छेड़ दिया. निश्चय ही साम्राज्यवादी देशों के फासिस्टी खीमे को साम्राज्यवादी देशों का गैर फासिस्टी खीमा नहीं हरा सकता था. यह सोवियत संघ और उसकी लाल सेना ही थी जिसने हिटलर और उसके फासीवाद के खतरनाक इरादों को ध्वस्त कर दिया. यदि उस समय फासिज्म विजयी हुआ होता तो भारत की आजादी कम से कम 15 अगस्त 1947 की तिथि पर तो नहीं ही हुयी होती.
यह जल्द इसलिये संभव हुआ क्योंकि दूसरे विश्व युध्द के अंत ने विश्व में राजनैतिक शक्तियों के संतुलन को पूरी तरह बदल दिया था. फासीवाद ध्वस्त होचुका था. साम्राज्यवाद कमजोर हो गया था. सोवियत संघ सामरिक दृष्टि से मजबूत देश के रुप में उभरा था जिसका नैतिक बल दूसरे देशों से ऊंचा था. परिणामस्वरुप एक दशक के भीतर सारे औपनिवेशिक देशों ने आजादी हासिल कर ली. भारत उनमें सबसे पहला था जहाँ का राष्ट्रीय आंदोलन उन्नत मंज़िलें हासिल कर चुका था. सोवियत संघ की मदद से नव स्वतंत्र देशों ने अपनी आर्थिक आजादी की राह तलाशना शुरु कर दी.
ब्रिटिश- अमेरिकी सैनिक प्रतिरोध के बावजूद 1949 में चीन में समाजवादी क्रांति की जीत हुयी. 1950 में चीन और कोरियाई सेनाओं के संयुक्त प्रयासों से कोरिया में अमेरिका की हार हुयी. 1962 में सोवियत संघ की मदद से क्यूबा की क्रांति विजयी हुयी. 1974 में वियतनाम में अमेरिका की सबसे शर्मनाक पराजय हुयी. उसके बाद चिली में वोट के माध्यम से कम्युनिस्टों और सोशलिस्टों की सरकार बनी जिसे अमेरिकी साम्राज्यवाद ने सैनिक प्रतिक्रांति के जरिये कुचल दिया. यह वह दौर था जब पांचों महाद्वीपों के देशों में लाल परचम एक ताकत था. 1960 तक अपने निर्णायक हथियारों के बल पर सोवियत संघ साम्राज्यवादियों के बरावर की ताकत बन चुका था.
पर 1960 के बाद साम्राज्यवाद ने अपनी वित्तीय पूंजी के आधुनिकीकरण और उसके भूमंडलीकरण के लिये सचेतन कदम उठाये. वैज्ञानिक और तकनीकी क्रांति ने पूंजीवाद को उत्पादन के हर क्षेत्र में नयी उचाइयां हासिल करने में मदद की. लेनिन ने जिस साम्राज्यवाद की व्याख्या की थी वह नया चरित्र ग्रहण कर रहा था. इजारेदार राष्ट्रीय- राजकीय पूंजी वित्तीय पूंजी का भूमंडलीय ग्रिड बन गयी. लेकिन दुनियां के कम्युनिस्ट इन बदलावों से अनभिज्ञ थे और उन्होने मार्क्सवाद की किताबें तब खोलीं जब 1990 में सोवियत रूस का पतन होगया. वे लेनिन की इसी प्रस्थापना पर अटके रहे कि “साम्राज्यवाद पूंजीवाद के विकास की अंतिम स्टेज है. पूंजीवादी विश्व का एकमात्र भविष्य सामाजिक विघटन और समाजवाद में उसकी परिणति है.”
1960 से 80 के बीच बढत हासिल कर चुके विश्व पूंजीवाद ने मजदूरवर्ग पर हमले तेज कर दिये. सोवियत संघ को उसने हथियारों की होड़ में फंसने को मजबूर किया जिसे सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था झेल नहीं पायी. आक्रामक कदम उठाते हुये साम्राज्यवादियों ने विकासशील देशों के राष्ट्रीय पूंजीपतिवर्ग को भूमंडलीकरण, निजीकरण और उदारीकरण की राह पर चलने को बाध्य किया. सोवियत संघ इस भूमंडलीय वित्तीय पूंजी की चुनौती का मुकाबला करने को आर्थिक और राजनीतिक रणनीति बनाने में असफल रहा. इससे समूचा विश्व परिदृश्य ही बदल गया. विजेता की हैसियत में विश्व साम्राज्यवाद ने हुंकार भरी कि “मार्क्सवाद मर चुका है और पूंजीवाद का कोई विकल्प नहीं है.”
आज अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय पूंजी इतनी शक्तिशाली होगयी है कि कुछ कल्याणकारी कार्यों के बल पर अपने शोषण को आसानी से छिपा रही है. इस तरह वह अभावग्रस्तों के क्रांतिकारी आंदोलनों की धार को कमजोरकर रही है. मोदी सरकार द्वारा चलायी गयी उज्ज्वला योजना, गरीबों के घरों में शौचालयों का निर्माण और अब मुफ्त बिजली कनेक्शन इसके ताजा उदाहरण हैं.
90 के दशक में विकासशील देशों द्वारा साम्राज्यवादी नीतियों के सामने घुटने टेक देने के बाद यूरोप में पूंजीवाद ने छलांग भरी. पर इसमें रोजगार की दर शून्य थी. इससे दुनियां का वातावरण बिगड़ा और विश्व बैंक के कर्जों का भार बढने लगा. अतएव हमें पुन: मार्क्सवाद की तह में जाना पड़ा. मार्क्स गत शताब्दी के महानतम बुध्दिजीवी घोषित किये गये.
साढे तीन दशक के घटनाक्रमों ने यह जाहिर कर दिया कि सारी बुराइयां कारपोरेट जगत के कुछ महारथियों के सिंडीकेट द्वारा पैदा की जारही हैं जिसका प्रबंधन अमेरिकी नियंत्रण वाली विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोश जैसी संस्थाओं के हाथ में है. भारत में चंद कारपोरेट घरानों की पूंजी में अप्रत्याशित इजाफा और गरीबी की सीमा के नीचे चले जारहे लोगों का अनुपात विस्मयकारी है.
इस व्यवस्था पर पहला विश्वव्यापी हमला 1999 में सियेटल में विश्व के लोगों ने बोला और तबसे प्रतिरोध की ताकतें निरंतर संगठित होती जारही हैं.
एकध्रुवीय विश्व की स्थिति का लाभ उठाते हुये अमेरिकी साम्राज्यवाद ने संयुक्त राष्ट्र संघ को समाप्त करने की ठानी. बढते भूमंडलीय तापमान, जैविक युध्द, बारुदी सुरंगें और खतरनाक हथियार हठाने तथा नस्लवाद जैसे सवालों पर उसने हाथ खींच लिये. उसने अंतरिक्ष में नाभिकीय हथियार स्थापित कर हर प्रकार के हमलों से सुरक्षित शक्ति बन जाने की की कोशिश की. इस एक ध्रुवीय विश्व के मंसूबे को बनाये रखने को अमेरिकी साम्राज्यवाद ने मुस्लिम पुनरुत्थानवादियों के साथ खुला खेल खेला. उसने इस्लामिक आतंकवाद को लोकतांत्रिक पार्टियों, ताकतों और राष्ट्रों को कमजोर करने और अपने हथियारों को कानूनी/ गैर कानूनी तरीके से बेचने को स्तेमाल किया. मुस्लिम पुनरुत्थानवाद का भयदोहन कर भारत में जड़ जमा रही हिंदुत्व की ताकतों को भी उसने समर्थन प्रदान किया. लेकिन 11 सितंबर 2001 को अमेरिकी आर्थिक प्रतिष्ठान पर हुये हमले ने अमेरिकी साम्राज्यवाद को अपनी कुछ रणनीतियों में परिवर्तन करने को बाध्य किया. स्टार वार उड़नछू होगया. आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लामबंदी के लिये संयुक्त राष्ट्र संघ की जरूरत महसूस की जाने लगी.
विश्व को एक ध्रुवीय बनाये रखने को अमेरिका ने साम्राज्यवाद के लिये चुनौती बने राष्ट्रों और नेताओं को समाप्त करने और साम्राज्यवादपरस्त टापुओं को मजबूत करने की नीति अपनाई. ईराक और लीबिया में सीधे सैनिक हस्तक्षेप के जरिये तख्ता पलट कराया. पाकिस्तान की सीमा में घुस कर ओसामा बिन लादेन का एनकाउंटर किया. अफगानिस्तान की बरवादी तक युध्द थोपे रखा. यूक्रेन और सीरिया में हस्तक्षेप किया लेकिन आतंकवाद के वाहक पुनरुत्थानवादी संगठनों और उनके पोषक देशों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की. उसने वेनेज्वेला आदि दक्षिण अमेरिकी देशों और उत्तर कोरिया के खिलाफ अघोषित युध्द छेड़ा हुआ है. लेकिन उत्तर कोरिया अमेरिकी साम्राज्यवाद के लिये खुली चुनौती बना हुआ है, और अब ट्रंप ने उससे वार्ता की पेशकश की है.
अक्तूबर क्रांति हमें याद दिलाती है कि हम अपने देश की परिस्थितियों के अनुसार संघर्षों की रूपरेखा तैयार करें. पडौसी देशोंसे हमारा टकराव न्यूनतम होना चाहिये. चीन से परंपरागत और कृत्रिम टकरावों को कम करना चाहिये. अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश, श्रीलंका, म्यांमार और नेपाल की शांति और लोकतंत्र को मजबूत करने वाली ताकतों के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिये. अमेरिकी साम्राज्यवाद के विरोध में तीसरी दुनियां के देशों की एकता के लिये हमें निरंतर आवाज उठानी चाहिये.
हमें धार्मिक पुनरुत्थानवाद के हर ब्रांड के विरुध्द निर्मम संघर्ष करना होग. नस्लीय अलगाववाद और आतंकवाद के खिलाफ सदैव आवाज उठानी चाहिये. जन गण के बीच समरसता और सुदृढ लोकतंत्र ही भारतीय क्रांति को आगे बढाने में सहायक होसकते है.
आज जमीनों का पुनर्वितरण फिर से राष्ट्रीय एजेंडा बन चुका है. पूंजीवाद साम्राज्यवाद के साथ मिल कर भारतीय ग्राम्य जीवन के परंपरागत ताने बाने को नष्ट कर रहा है. विकास के नाम पर बेतहाशा भूमि अधिग्रहण, उसके लिये कानूनों में बदलाव, बेरोजगारी और ग्रामीण क्षेत्रों से अधिकाधिक श्रम शक्तियों का खदेड़े जाना विश्व बैंक द्वारा निर्देशित परियोजनाओं का मूल आधार बन चुका है. भूमि सुधार और सामूहिक खेती से ग्रामीण जीवन में नयी जान फूंकी जा सकती है.
सार्वजनिक क्षेत्र को बचाने और उसे और भी मजबूत बनाने के संघर्ष को हमें धार देनी होगी. हमें यह ध्यान में रखना चाहिये पूंजीवाद में मजदूरों के श्रम का अतिरिक्त अधिशेष पूंजीवाद को मजबूती देता है और उसके समाप्त होने से समाजवाद का निर्माण होता है. अतएव हमें मेहनतकशों चाहे वे मजदूर, दस्तकार अथवा किसान हों उनके श्रम का संपूर्ण फल दिलाने को संघर्ष चलाना होगा. इन संघर्षों को फासीवादी शक्तियों के विरुध्द संघर्ष से जोड़ना होगा.
अक्तूबर क्रांति की 100वीं वर्षगांठ पर हमें वाम और कम्युनिस्ट एकता के लिये त्वरित कदम उठाने को प्रतिबध्द होना होगा.
( जौनपुर, उत्तर प्रदेश में 8 अक्तूबर को अक्तूबर क्रांति की 100 वीं वर्षगांठ पर हुयी विचार गोष्ठी में दिये गये भाषण पर आधारित )


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बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

भाजपा का भ्रष्टाचार उजागर करने और महंगाई, बेरोजगारी जैसे सवालों पर भाकपा ने समूचे उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन किया



लखनऊ-  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की केन्द्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर उत्तर प्रदेश में आज भाकपा ने सभी जिला मुख्यालयों पर धरने और प्रदर्शनों का आयोजन किया और राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रेषित किये. इससे पहले प्रदेश में तीन सप्ताह तक लगातार जन अभियान  चलाया गया.
उपर्युक्त के संबंध में जानकारी देते हुये भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने बताया कि यह आन्दोलन केन्द्र सरकार और उत्तर प्रदेश सहित तमाम राज्य सरकारों द्वारा किये जारहे घपले- घोटालों और भ्रष्टाचार, पनामा दस्तावेजों के खुलासे, निरंतर बढ़ रही महंगाई, नोटबन्दी और जीएसटी के लागू होने से उद्योग व्यापार और कृषि पर आये संकट, बैंकों में जमा जनता के धन से पूंजीपतियों को दिए कर्ज को बट्टे खाते में डालने से बैंकिंग व्यवस्था के समक्ष खड़े हुए संकट, बढ़ती बेरोजगारी और उजड़ती खेती जैसे सवालों को बहस के केंद्र में लाने और सरकारों को कार्यवाही के लिये मजबूर किये जाने के उद्देश्य से किया गया था.
प्रदर्शनों के दरम्यान भाकपा ने इस सवाल को शिद्दत से उठाया कि केंद्र सरकार के कार्यकाल के चालीस माह पूरे होते होते भाजपा नेताओं और उसकी सरकारों के भ्रष्टाचार की परतें एक के बाद एक कर उघडती जारही हैं. भ्रष्टाचार का यह राक्षस आज सर चढ़ कर बोल रहा है और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बेटे की संपत्ति में हुयी अनाप शनाप वृध्दि ने भाजपा के कथित सदाचार की चूलें हिला दी हैं. एक ओर भाजपा के दर्जन भर मंत्री संवैधानिक मर्यादाओं को लांघ कर इस गैर सरकारी व्यक्ति के भ्रष्टाचार को दबाने में जुट गए हैं तो दूसरी तरफ भाजपा के कई शीर्षस्थ नेताओं ने खुलकर इसके काले कारनामों और नीतियों का मुखर विरोध शुरू कर दिया है. भाकपा ने कहा कि अर्थव्यवस्था मंदी की ओर जारही है और विकास दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जारही है. सरकार  बताये कि दो हजार और  पांच सौ के नोट कहाँ गायब होगये?
संगीन आरोपों और असंख्य से घिरा भाजपा का नेत्रत्व बौखला कर एक ओर विपक्षी दलों के खिलाफ अनर्गल बयानवाजी कर रहा है वहीं जनता को फुसलाने को खुद प्रधानमंत्री और भाजपा के मुख्यमंत्रीगण धर्म का बेजा स्तेमाल कर रहे हैं. मंदिरों में पूजा का ढोंग किया जारहा है और राम- रहीमों ( साधुओं ) की टोलियों को भाजपा का कवच बताया जारहा है. बात बात पर आरएसएस की तारीफों के पुल बांधे जारहे हैं. भाकपा ने सवाल खडा किया कि यदि आरएसएस ही सब कुछ कर रहा है तो उसे खुद ही एक राजनैतिक पार्टी के रूप में सामने आना चाहिये भाजपा नामक ढोंग को समाप्त कर देना चाहिये.
भाकपा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में खनन नीति से बेकारी बढी है. त्योहारों के इस सीजन तक में मजदूरों को काम नहीं मिल रहा. बिजली के दाम असहनीय स्थिति तक बढ़ा दिए गए हैं. सरकारी विभागों और पुलिस में भ्रष्टाचार सारी सीमाएं लांघ चुका है. इलाज के अभाव में बूढ़े बच्चे सभी दम तोड़ रहे हैं, क़ानून व्यवस्था का बुरा हाल है. सरकार के दावों के विपरीत कई दंगे होचुके हैं.
आज दिए गए ज्ञापनों में मांग की गयी है कि केंद्र सरकार विदेशों में जमा काले धन संबंधी पनामा दस्तावेजों में दर्ज नामों का खुलासा करे, काले धन को वापस ला जनता से किये गए वायदों को पूरा करे, बैंकों द्वारा बट्टेखाते में डाल दिए गए पूंजीपतियों पर बकाया धन को सख्ती से बसूल करे, पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में और कमी लाई जाए, महंगाई को नीचे लाया जाए, नोटबन्दी और जीएसटी जैसे कदमों से उद्योग व्यापार और कृषि पर आये संकट को दूर करने को कारगर कदम उठाये जाएँ, रोजगार दिए जाएँ, शिक्षा और स्वास्थ्य का बजट दोगुना कर मुफ्त इलाज और पढाई मुहैय्या कराई जाए, किसानों के सभी प्रकार के कर्जे माफ़ किये जाएँ और उनकी आमदनी दोगुना करने के वायदे को पूरा किया जाए, बिजली के दामों में घटोत्तरी की जाए, छुट्टा जानवरों से किसानों की फसलों और नागरिकों के जीवन की रक्षा की जाए तथा उत्तर प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए आदि.
जनपद जालों के उरई मुख्यालय पर कल ही एक शानदार प्रदर्शन किया गया था. आज इस समाचार के जारी किये जाने तक कानपुर शहर, आगरा, शामली, संत कबीर नगर, लखनऊ, जौनपुर, हाथरस, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ, बदायूं, शाहजहांपुर, फिरोजाबाद, इलाहाबाद, गोरखपुर, मऊ, आज़मगढ़, गाज़ियाबाद, बुलंदशहर, मैनपुरी, झांसी, चित्रकूट, वाराणसी, सोनभद्र, बछरावां, फैजाबाद, प्रतापगढ़, बलिया, कुशीनगर, मुरादाबाद, मुज़फ्फर नगर तथा गाजीपुर जनपद से प्रदर्शन कर ज्ञापन दिए जाने के समाचार प्राप्त होचुके हैं.


डा. गिरीश 

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बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

Mass Contact programme of CPI

महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अत्याचार को लेकर उत्तर प्रदेश में भाकपा का जन अभियान जारी


11 अक्तूबर को जिला केंद्रों पर प्रदर्शन की तैयारी


लखनऊ- 4 अक्तूबर 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर पनामा दस्तावेजों का खुलासा करो, एनपीए की वसूली करो, भाजपा की केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा किये जारहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाओ, महंगाई पर रोक लगाओ, नोटबंदी, जीएसटी, निजीकरण के कुफलों जैसे- बेरोजगारी, आर्थिक मंदी, किसान मजदूर व व्यापरियों को बर्वादी से बचाने को कारगर कदम उठाओ, किसानों को विपन्नता की स्थिति से बचाओ, आवारा पशुओं से किसानों की फसलों और नागरिकों के जान माल की रक्षा करो, उत्तर प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति में सुधार लाओ आदि सवालों पर भाकपा का प्रांतव्यापी जन अभियान लगातार जारी है.
ज्ञातव्य हो कि भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने उपर्युक्त अभियान को सारे देश में 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक चलाने का आह्वान किया था लेकिन उत्तर प्रदेश में खरीफ और रबी की फसलों के काम में किसानों की व्यस्तता, कई महत्वपूर्ण त्योहारों में आम लोगों की भागीदारी और ए. आई. एस. एफ. तथा अ. भा. नौजवान सभा के लोंगमार्च के सितंबर के प्रथम सप्ताह में यहाँ से गुजरने जैसे मामलों के चलते भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने इस अभियान को उत्तर प्रदेश में 24 सितंबर से 10 अक्तूबर तक जनता से संवाद के रूप में चलाने और 11 अक्तूबर को जिला मुख्यालयों पर धरने/ प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे जाने का निर्णय लिया.
लेकिन यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि जौनपुर आदि कई जिलों ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा लिये गये निर्णयों की सूचना मिलने के बाद अभियान को 15 सितंबर से ही प्रारंभ कर दिया था और अब तक जौनपुर जनपद की हर तहसील में कई कई सभायें आयोजित की जाचुकी हैं. यहां इसी अभियान के अंग के रुप में 8 अक्तूबर को सभी वामपंथी दलों के साथ मिल कर “अक्तूबर क्रांति एवं भारत का स्वतंत्रता संग्राम” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया जारहा है.
अभियान का श्रीगणेश जनपद मेरठ के मवाना में किसानों के विशाल सम्मेलन के साथ होगया था जिसमें भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश, उत्तर प्रदेश किसान सभा के सचिव राजेंद्र यादव- पूर्व विधायक, सहसचिव अजय सिंह, भाकपा नेता शरीफ अहमद, प्रोफेसर इशान जैन, जितेंद्र कुमार आदि नेताओं ने संवोधित किया था. जनपद झांसी में अभियान की शुरुआत जिला मुख्यालय पर किसानों, बीडी मजदूरों और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की एक सभा के साथ हुयी जिसे राज्य सह्सचिव अरविंदराज स्वरुप एवं उत्तर प्रदेश महिला फेडरेशन की सचिव प्रोफ. निशा राठौर ने संवोधित किया.
इसी बीच वाराणसी में छात्रा के साथ दुर्व्यवहार के बाद वहाँ छात्राओं और छात्रों का एक बड़ा आंदोलन फूट पड़ा और भाकपा के सहयोग एआईएसएफ एवं नौजवान सभा के कार्यकर्ताओं ने खागा, आज़मगढ, बदायूं, उरई, इलाहाबाद, चित्रकूट, मथुरा आदि कई स्थानों पर वाराणसी के छात्र- छात्राओं के समर्थन में धरने प्रदर्शन किये गये.
जनपद हाथरस में भाकपा ने 1 से 10 अक्तूबर तक “जन संवाद”  कार्यक्रम छेड़ा हुआ है जिसकी शुरुआत पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कराई.
इस अवसर पर डा. गिरीश ने कहाकि आज मोदी के 40 और योगी के 4 महीनों में अर्थ व्यवस्था धरातल पर आगयी है, बेरोजगारी चरम पर है, महंगाई ने सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं और ऊपर से नीचे तक व्याप्त भ्रष्टाचार से जनता त्राहि त्राहि कर उठी है. कुशासन के चलते किसान, कामगार और नौजवान बेहद परेशानहाल हैं. हालात इतने खराब हैं कि भाजपा के अंदर से भी इस सबके खिलाफ आवाज उठने लगी है.
डा. गिरीश ने कहाकि भाकपा ने इस सबको लेकर देशव्यापी अभियान चला रखा है. उन्होने कहाकि पनामा सहित विदेशों और देश में छुपाया सारा काला धन जब्त कर लिया जाये तो देश भर के किसानों- कामगारों का सारा कर्जा माफ किया जासकता है. बैंकों के पूंजीपतियों पर बकाया जिस धन को बट्टेखाते में डाल दिया गया है उसे यदि वसूल लिया जाये तो हर जरूरतमंद सीनियर सिटीजन को आजीवन रुपये 10 हजार मासिक पेंशन दी जासकती है. पर भाजपा और उसकी सरकारें बड़े पूंजीपतियों को मुनाफा पहुंचाने और जनता की कमर तोड़ने में जुटी हैं.
हम मांग कर रहे हैं कि कच्चे तेल की गिरती कीमतों को देखते हुये पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें आधी की जायें पर यह सरकार उन्हें हद के बाहर लेजारही है. दबाव बड़्ने पर अब मात्र दो रुपये की कमी की गयी है जबकि रसोई गैस की कीमतों में बड़ी वृध्दि कर दी गयी है. हम शिक्षा और स्वास्थ्य का बजट दो गुना करने की मांग कर रहे हैं ताकि सभी को दवाई और पढाई मुफ्त मिल सके. किसानों को पैदावार के उचित दाम दिये जाने और छुट्टा पशुओं पर रोक लगाने की भी हम मांग कर रहे हैं. चहुंतरफा भ्रष्टाचार से आजिज जनता को कैसे इससे निजात दिलाई जाये आज यह एक बड़ा सवाल बन गया है.
 डा. गिरीश ने कहाकि आज जनता में आक्रोश इस हद तक है कि वह इस सरकार से फौरन पिंड छुड़ाना चाहती है और विकल्प के लिये टकटकी लगा देख रही है. भाकपा और दूसरी वामपंथी ताकतों को एक वैकल्पिक नीति का विकल्प पेश करने को गंभीरता से काम करना होगा. जन संवाद कार्यक्रम जारी है और 11 अक्तूबर के प्रदर्शन की तैयारी चल रही है.
भाकपा राज्य मुख्यालय को बरेली, बुलंदशहर, शाहजहांपुर, अमरोहा, गाज़ियाबाद, मथुरा, आगरा, कानपुर, जालौन, झांसी, इलाहाबाद, चित्रकूट, भदोही, फैज़ाबाद, मऊ, गाज़ीपुर, बाराबंकी, बलिया, सुल्तानपुर, प्रतापगढ, फरुखाबाद, कासगंज, बदायूं, बहराइच, कुशीनगर, आदि जनपदों से जन अभियान के जारी रहने और लगभग सभी जनपदों में 11 अक्तूबर के प्रदर्शन की तैयारी की खबरें मिल रही हैं.

डा. गिरीश

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सोमवार, 25 सितंबर 2017

CPI, U.P. demands judicial probe on astrocities on BHU students.

वाराणसी की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लें मुख्यमंत्री आदित्यनाथ

बी. एच. यू. की घटनाओं की न्यायिक जांच कराई जाये: भाकपा


लखनऊ- 25 सितंबर 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने बनारस में छात्राओं और छात्रों पर  चलाये गये दमनचक्र की कड़े शब्दों में निंदा करते हुये मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से इसकी जिम्मेदारी लेते हुये छात्राओं और छात्रों से क्षमा मांगने की मांग की है. भाकपा ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय परिसर में छेड़छाड़ से क्षुब्ध छात्राओं द्वारा बनारस में श्री मोदी की मौजूदगी के दौरान किये गये प्रतिरोध प्रदर्शन जिसके कारण मोदी के काफिले का मार्ग बदलना पड़ा; से बौखला कर भाजपा और उसकी राज्य सरकार ने छात्रों और छात्राओं को सबक सिखाने को यह दमनात्मक कार्यवाही की है.
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि समूचे प्रदेश में महिलाओं और छात्राओं से प्रतिदिन औसतन दो सौ बदसलूकी की घटनायें होरही हैं, लेकिन आज हालात यहाँ तक पहुंच गये हैं कि एक प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय जो कि प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र में स्थित है, में छात्राओं से सरेआम बदसलूकी होती है. वह भी तब जब प्रधानमंत्री की बनारस यात्रा के चलते वहां चप्पे चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात किये गये थे और सारा बनारस एक्स्ट्रा सुरक्षा निगरानी में था. अपने चुनाव क्षेत्र में छात्राओं के साथ होने वाली इस घृणित और शर्मनाक वारदात पर दो दिनों तक बनारस में ही मौजूद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल महोदय की चुप्पी हैरान करने वाली है.
उलटे कैम्पस के अंदर दो दिनों से जारी छात्राओं के आंदोलन की चट्टानी एकता से बीएचयू के कुलपति, भाजपा और राज्य सरकार बौखला गये और उन्होने आंदोलनकारियों को सबक सिखाने के लिये पहले आधी रात को और फिर दिन में पुलिस के जरिये भारी अत्याचार कराया और दो दर्जन छात्रों को हिरासत में ले लिया. छात्राओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें भद्दी गालियां दीं. उत्तर प्रदेश में आजादी के बाद यह पहली सरकार है जो अपने हक और सम्मान की आवाज उठाने वाले छात्र- छात्राओं पर न केवल दमनचक्र चला रही है अपितु उन्हें जेल के सींखंचों के पीछे पहुंचा रही है. सरकार की इस दमनात्मक कार्यवाही से छात्र समुदाय उद्वेलित है और वह ए.एम.यू. हो या बी.एच.यू. समूचे प्रदेश में सड़कों पर उतर रहा है. बैकफुट पर आयी सरकार और उसका पिट्ठू विद्यार्थी संगठन भ्रम फैलाने में जुट गये हैं.
भाकपा उत्तर प्रदेश के छात्रों के इस न्यायिक संघर्ष का पुरजोर समर्थन करती है और छात्राओं, महिलाओं से बदसलूकी रोके जाने, उत्पीडनात्मक कार्यवाहियों के समस्त दोषियों को दंडित किये जाने और वाराणसी के छात्र- छात्राओं पर हुये अत्याचार और बी.एच.यू. में लंबे समय से चल रही छात्र विरोधी कार्यवाहियों की न्यायिक जांच की मांग करती है. भाकपा सरकार को आगाह करना चाहती है कि छात्र- छात्राओं के साथ दुश्मनों सरीखा व्यवहार उसे महंगा पड़ेगा.


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शनिवार, 26 अगस्त 2017

Deport so called Gaurakshaks of Bulandshahar: CPI

बुलंदशहर में गोरक्षा के नाम पर उत्पात मचाने वालों को जेल भेजा जाये: भाकपा


लखनऊ- 26 अगस्त, जिस वक्त बाबा राम रहीम के समर्थक हरियाणा में तबाही मचा रहे थे ठीक उसी वक्त आरएसएस और बजरंगदल के लोग मोदी और योगी की चेतावनियों को दरकिनार कर जनपद बुलंदशहर के ग्राम अढौली में तांडव मचा रहे थे. हरियाणा में उनका निशाना कानून व्यवस्था, न्यायपालिका और आम नागरिक थे तो बुलंदशहर में इनके निशाने पर अल्पसंख्यक, अमन और भाईचारा थे.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आरएसएस गिरोह द्वारा प्रायोजित इस उत्पात की कडे से कडे शब्दों में निंदा की है और जिला पुलिस और प्रशासन से अपेक्षा की है कि वे मोदी जी और योगीजी द्वारा जनता को लगातार दिये जारहे आश्वासनों कि “गाय के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जायेगी” का अनुपालन करेंगे और इन कथित गौरक्षकों को जेल के सींखचों के पीछे अविलंब पहुंचाने का काम करेंगे.
अपने पार्टी के साथियों और अन्य सूत्रों से जुटाई जानकारी के आधार पर भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि जनपद बुलंदशहर के ग्राम अढौली में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक बिरादरी के लोग सदियों से भाईचारे के साथ रह रहे हैं. लेकिन पहले केंद्र और अब राज्य में भाजपा के सत्तारूढ होने के बाद गांव में काम कर रहे संघ के सहयोगी संगठनों से जुड़े कई कार्यकर्ता अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने का कोई न कोई बहाना ढूंढते रहते हैं.
गत दिन गांव की पोखर के पास किसी मृत पशु के अवशेष पड़े थे. संघियों ने उन्हें गाय के अवशेष बता कर भीड़ इकट्ठी कर ली. सूचना पर आयी पुलिस ने जब भांप लिया कि अवशेष अज्ञात जानवर के हैं तो उन्हें दफन करा दिया. लेकिन अगले दिन संघियों ने आसपास के गांवों से अपनी चांडाल-  चौकड़ी इकट्ठी कर ली और सुनियोजित तरीके से अपसंख्यकों के धर्मस्थलों और उनके मकानों पर धावा बोल दिया. कई लोगों को पीटा और कई घरों में लूटपाट की. लेकिन दिन के उजाले में की गयी इन बारदातों को अंजाम देने वालों पर अभी तक कोई कार्यवाही इसलिये नहीं की गयी कि हमलावर शासक गिरोह से संबंधित हैं. उलटे पुलिस ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ मामला दर्ज किया हुआ है. पुलिस की यह करतूत मोदीजी और योगीजी के दावों को मुहं चिढा रही है.
डा. गिरीश ने कहाकि गांवों के सामंती तत्व जिन्हें आज भाजपा और उसकी सरकार का सरंक्षण हासिल है, अल्पसंख्यकों को इसलिये भी प्रताडित कर रहे हैं कि वे गांवों से पलायन कर जायें और उनकी संपात्तियों को वे औने- पौने दामों पर हथिया लें. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलितों और अति पिछ्ड़ों को गांवों से पहले ही खदेड़ा जाचुका है. दूसरे- भाजपा और संघ गाय के नाम पर अपनी विभाजन की राजनीति को बरकरार रखना चाहते हैं. गाय से इन्हें कितना प्रेम है आज सभी जान चुके हैं. चारे के अभाव में तमाम बछड़े छुट्टल छोड़ दिये गये हैं और वे किसानों की फसलों को रौंद रहे हैं और इंसानों पर जानलेवा हमले बोल रहे हैं. संघियो द्वारा नियंत्रित गोशालाओं में कितनी गायें दम तोड़ चुकी हैं किसी से छिपा नहीं है. गौ और गौसुतों की मुरीद सरकार ने आज तक उनके लालन- पालन का कोई इंतज़ाम नहीं किया है.

डा. गिरीश

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गुरुवार, 24 अगस्त 2017

Left Demanded expulsion of Rail Minister and Health Minister of U.P.

रेल मंत्री और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की बर्खास्तगी तथा घटनाओं की न्यायिक जांच आदि  मांगों को लेकर प्रदेश भर में सड़कों पर उतरे वाम दल


लखनऊ- 24 अगस्त 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य वामपंथी दलों ने आज गोरखपुर बाल- संहार कांड और एक के बाद एक रेल दुर्घटनाओं में होरही मौतों और संपत्ति की हानि आदि पीडादायक सवालों को लेकर उत्तर प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिये. वामदलों ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और रेल मंत्री को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की.
वामपंथी दलों ने कहाकि गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन के अभाव में हुयी बच्चों की मौत का सवाल हो या पूर्वोत्तरी उत्तर प्रदेश में बाढ की तबाही और वहाँ पैर पसार रहीं बीमारियों का सवाल, या फिर खतौली और औरैया में हुयी रेल दुर्घटना का मामला, केंद्र और राज्य सरकार अकर्मण्य, संवेदनशून्य और अपनी अक्षमताओं पर पर्दा डालने वाली साबित हुयी हैं. वामदल देश और प्रदेश में होरहे घटनाक्रमों में जनता की इस तबाही को मूक दर्शक बन नहीं देख सकते अतएव वे जनहित में सड़कों पर उतर रहे हैं.
भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने बताया कि वामदलों के नेत्रत्व में हुये इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की है और रेल मंत्री और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की मांग को शिद्दत के साथ उठाया है. लोकतंत्र में लोक प्रश्नों पर जबावदेही तय होनी चाहिये और इस संबंध में नाटक नहीं, कार्यवाही दिखनी चाहिये. वामदलों ने गोरखपुर बाल हत्या कांड और रेल हादसों की जांच क्रमश: हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश से कराने की मांग की है.
वामदलों ने आक्सीजन कान्ड में मृत बच्चों के परिवारों को रुपये पच्चीस लाख की सहायता और जिनका इलाज चल रहा है इलाज की समूची व्यवस्था करने की मांग की है. रेल हादसों में मृतकों और घायलों के लिये भी इतनी ही धनराशि की मांग की है. वामदलों ने स्वास्थ्य सेवाओं का निजी करण रोकने, स्वास्थ्य बजट दोगुना किये जाने, स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोके जाने, हर नागरिक को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने, हर एक लाख की आबादी पर सौ शैयाओं वाला और हर दस लाख की आबादी पर एक हजार शैयाओं वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल खोले जाने तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की दशा सुधारे जाने की मांग की है.
वामदलों द्वारा दिये ज्ञापनों में बाढ की विभीषिका से नागरिकों को बचाने के लिये पर्याप्त कदम उठाने, इन इलाकों में भरपूर राहत सामग्री भेजे जाने, बाढ के बाद फैलने वाली महामारियों से बचाव के लिये ठोस कदम उठाने, इंसेफिलाइटिस, डेंगू, चिकुनगुनियां व स्वाइन फ्लू जैसी महामारियों की रोकथाम के लिये विशेष अभियान चलाने, जिन जनपदों में औसत से कम बारिश हुयी है उन्हें सूखाग्रस्त घोषित किये जाने तथा  कथित स्वच्छता अभियान के नाम पर विज्ञापनों के जरिये प्रचार माध्यमों को लुटायी जारही धनराशि को सफाई कर्मियों की नियुक्ति और सफाई उपकरण खरीदने पर खर्च किये जाने की मांग की है.
आज के इस आंदोलन में भाकपा, माकपा, भाकपा- माले, फारबर्ड ब्लाक तथा एसयूसीआई-सी ने भाग लिया. ज्ञापन राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित थे जिन्हें जिले के अधिकारियों को सौंपा गया.

डा. गिरीश

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रविवार, 20 अगस्त 2017

CPI on Rail accident

भाकपा ने मुज़फ्फरनगर रेल हादसे पर गहरा दुख जताया

रेल मंत्री से त्यागपत्र और मृतक परिवारों को रुपये पच्चीस लाख मुआबजे की मांग की


लखनऊ-  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी ने कल मुज़फ्फरनगर जनपद के खतौली में हुये रेल हादसे पर गहरा अफसोस जताया है. पार्टी ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताते हुये सभी मृतकों के प्रति श्रध्दांजलि अर्पित की है. पार्टी ने इस हादसे के लिये रेल प्रशासन को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुये रेल मंत्री को हठाये जाने की मांग की है. हर मृतक परिवार को रुपये 25 लाख सहायता राशि दिये जाने तथा प्रत्येक घायल के इलाज और तीमारदारी का संपूर्ण व्यय वहन करने की मांग भी सरकार से की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यात्रियों पर बार बार बढाये जारहे भाडे और कटौतियों का भार लादने वाला रेल मंत्रालय रेलवे के विकास और सुरक्षा के संबंध में जरुरी कदम नहीं उठा पारहा है. यही वजह कि रेलवे के ये तीन साल हादसे और जान लेने के साल बन गये हैं. एक के बाद एक बडी रेल दुर्घटना होरही है जिनमें अब तक सैकडों लोगों की जान जाचुकी है. कल की रेल दुर्घटना में भी रेल प्रशासन की मुजरिमाना लापरवाही उजागर होचुकी है. मगर न रेल मंत्री को शर्म आयी न प्रधानमंत्री की संवेदना जागी. हमें अच्छी तरह याद है कि जिस दिन प्रधानमंत्री शपथ लेने वाले थे उस दिन ही एक बडा रेल हादसा होचुका था लेकिन प्रधानमंत्रीजी ने अपने शपथग्रहण समारोह की लक- दक में कोई कमी नहीं की थी.
भाकपा ने आरोप जड़ा कि इस सरकार की संवेदना पूरी तरह मर चुकी है. और सरकारी तंत्र अपनी नाकामयाबियों पर पर्दा डालने को इसे आतंकी घटना बताने की कोशिश में जुटा है. यदि ऐसा है भी तो इसके लिये मोदी योगी के अलाबा कौन जिम्मेदार है? पूर्व की सरकारों को बात बात पर कठघरे में खड़ा करने वाली सरकार को याद दिलाना चाहते हैं कि स्वर्गीय श्री लालबहादुर शास्त्री जब रेल मंत्री थे तो उन्होने मामूली से रेल हादसे के बाद स्तीफा देदिया था. पर एक के बाद एक नर संहार होने के बावजूद भाजपा का न कोई मंत्री स्तीफा देरहा है न मुख्यमंत्री. यह जनता के प्रति जबावदेही के सिध्दांत को ठेंगा दिखाना है.
भाकपा ने रेलवे द्वारा घोषित मुआबजे को अपर्याप्त बताते हुये हर मृतक परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये मुआबजा देने  तथा हर घायल का समुचित इलाज कराने की मांग की है.
भाकपा ने अपनी मुज़फ्फरनगर जिला इकाई को निर्देश दिया है कि वह वहाँ घायलों के उपचार में पूरा सहयोग करें और अन्य जिला इकाइयों को कहा है कि वे रेल मंत्री के स्तीफे और मृतक परिवारों को पर्याप्त मुआबजे की मांग को लेकर आंदोलन करें
डा. गिरीश
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गुरुवार, 17 अगस्त 2017

Gorakhpur Carnege: left Parties will protest on August 24 on Districts headquarter in Uttar Pradesh

गोरखपुर की हृदयविदारक घटना में अबोध बच्चों की मौत के सभी जिम्मेदारों को सजा दिलाने

और

स्वास्थ्य सेवाओं को व्यापक बनाने और भ्रष्टाचार से मुक्त कराने आदि मांगों को लेकर

उत्तर प्रदेश के वामपंथी दल 24 अगस्त को संयुक्त रुप से विरोध प्रदर्शन करेंगे


लखनऊ-  गत दिनों गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन के अभाव में हुयी भयंकर घटना में मरने वाले निरीह बच्चों की संख्या अब तक 100 का आंकड़ा पार कर चुकी है. पीड़ित बच्चों की मौत का सिलसिला अभी भी थमने का नाम नहीं लेरहा है. अब वहां इन्सेफिलाइटिस ने कहर वरपाना शुरु कर दिया है जिसकी रोकथाम न पूर्ववर्ती सरकारें कर पायीं न गत तीन सालों में भाजपा की केंद्र सरकार. जबकि यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री का चुनाव क्षेत्र है और वे जब विपक्ष में थे तो इस मसले पर काफी शोरगुल मचाते रहते थे. अब इस क्षेत्र में भारी बाढ आयी हुयी है और सरकार उसकी विभीषिका से नहीं निपट पारही. अब बाढ और जलभराव से तमाम महामारियां फैलेंगीं और असंवेदनशील सरकार तथा भ्रष्टाचार और जडता की हालत में पहुंचा सरकारी स्वास्थ्य सेवा तंत्र इससे कैसे निपटेंगे यह एक बड़ा सवाल खड़ा होगया है.
बच्चों की मौत का गम तो कभी भुलाया नहीं जा सकता; पर उन घावों का भर पाना बेहद मुश्किल है जो इस त्रासदी के बाद हुक्मरानों ने दिये हैं. प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने बयान दिया कि 'अगस्त माह में तो इससे भी ज्यादा मौतें होती हैं.' मुख्यमंत्री ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाडते हुये कह डाला कि मौतें आक्सीजन के अभाव के कारण नहीं हुयीं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने घावों पर नमक छिड़कने वाला बयान दिया कि इतने बड़े देश में ऐसी वारदातें तो होती ही रहती हैं. अपने लाल किले से दिये गये भाषण में प्रधान मंत्री ने घटना का सतही तौर पर जिक्र किया और राज्य सरकार की अकर्मण्यता पर एक शब्द भी नहीं बोला. इतना ही नहीं अपनी घटिया और सांप्रदायिक सोच का प्रदर्शन करते हुये सरकार ने एक कर्तव्यपरायण डाक्टर जो कि अल्पसंख्यक समुदाय से हैं और जिन्होने इन बच्चों की जान बचाने को भारी मशक्कत की को बलि का बकरा बना डाला.
अब जिलाधिकारी गोरखपुर की जांच में खुलासा हुआ है कि आक्सीजन की सप्लाई बाधित हुयी थी और इसी वजह से बड़े पैमाने पर मौतें हुयीं. इस जांच के बाद राज्य सरकार को मुहं छिपाने को भी जगह नहीं बची.
वामपंथी दलों ने इस जघन्य कांड पर गहरा दुख और क्षोभ व्यक्त किया है. वे चाहते हैं कि पीडितों के जख्म भरने को ऊपर से नीचे तक दोषियों को दंडित किया जाये. इसके लिये राज्य सरकार को जिम्मेदारी लेनी चाहिये और स्वास्थ्य मंत्री को तो फौरन स्तीफा देना चाहिये.  समूची वारदात्त की न्यायिक जांच की जानी चाहिये. मृतक प्रत्येक बच्चे के परिवार को रुपये पच्चीस लाख बतौर संवेदना राशि और अभी भी इलाज करा रहे बच्चों के इलाज और तीमारदारी की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिये. वामपंथी दलों का मानना है कि सरकारों की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार के चलते प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है और वे पंगुता की स्थिति में हैं. स्वास्थ्य बजट में भारी बढोत्तरी किये जाने और स्वास्थ्य व्यवस्था को भ्रष्टाचार से मुक्त किये जाने की जरुरत है. इंसेफिलाइटिस, डेंगू, चिकुनगुनियां और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों के खिलाफ एक सुनियोजित अभियान चलाने की जरुरत है. इसके लिये स्वच्छता अभियान के प्रपोगंडा को हकीकत में बदलने की जरूरत है. हर सालआने वाली बाढ और और उसके बाद फैलने वाली महामारियों की रोकथाम के लिये ठोस कदम उठाने की जरुरत है.
सरकार की सोई संवेदनाओं को जगाने और पीढितों को न्याय दिलाने को वामपंथी दल अलग अलग और मिल कर लगातार अभियान चला रहे हैं और अब उन्होने संयुक्त बैठक कर 24 अगस्त को संयुक्त रुप से प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपे जायेंगे. ज्ञापन के जरिये निम्न मांगें उठायी जायेंगी.
1-      गोरखपुर बाल संहार की जिम्मेदारी समस्त राज्य सरकार की है और वह इसे वहन करते हुये अपने स्वास्थ्य मंत्री को हठाये.
2-      अन्य सभी दोषियों को चिन्हित करने और उन्हें सजा दिलाने को इस कांड की न्यायिक जांच कराई जाये.
3-      प्रत्येक मृतक बच्चे के परिवार को रुपये 25 लाख की संवेदना राशि फौरन दी जाये और जिन बच्चों का आज भी इलाज चल रहा है उनके इलाज की समुचित व्यवस्था की जाये.
4-      स्वास्थ्य बजट को बढा कर कम से कम दोगुना किया जाये. स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त किया जाये. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत सुधारी जाये. हर नागरिक को मुफ्त इलाज और दवाओं का दायित्व सरकार ले.
5-      हर एक लाख की आबादी पर सौ शय्याओं वाला दवाओं, डाक्टरों और उपकरणों से सुसज्जित अस्पताल खोला जाये और हर दस लाख की आबादी पर एक हजार शय्याओं वाले सुपर स्पेसियलिटी अस्पताल खोले जायें.
6-      लुटेरी निजी स्वास्थ्य सेवाओं को सीमित किया जाये.
7-      इंसेफिलाइटिस, डेंगू, चिकुनगुनियां और स्वायन फ्लू जैसी महामारियों की रोक थाम के लिये विशेष अभियान चलाया जाये.
8-      सूबे के विभिन्न इलाकों में आने वाली बाढ और उसके बाद फैलने वाली महामारियों की रोकथाम के लिये ठोस कदम उठाये जायें.
9-      बीमारियों की रोकथाम के लिये टीवी विज्ञापनों पर चर्चित स्वच्छता अभियान को जमीन पर उतारा जाये और विज्ञापनों पर खर्च होरही धनराशि को सफाई कर्मियों की नियुक्ति और सफाई के लिये आवश्यक उपकरण खरीदने पर खर्च किया जाये.

आंदोलन कर ज्ञापन देने का निर्णय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मा. ), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले), आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक तथा एसयूसीआई- सी के राज्य नेतृत्व की संयुक्त बैठक में लिया गया.उदीोकप
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रविवार, 13 अगस्त 2017

गोरखपुर काण्ड की जिम्मेदारी ले राज्य सरकार : भाकपा ने सीबीआई जांच कराने की मांग की



लखनऊ- 13 अगस्त- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी ने गोरखपुर की ह्रदय विदारक घटना जिसमें कि अब तक 60 से अधिक बच्चों की मौत की खबरें आरही हैं, पर गहरा अफसोस व्यक्त किया है. भाकपा ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है. पार्टी ने प्रत्येक मृतक बच्चे के परिवार को रूपये पांच लाख बतौर संवेदना राशि देने की मांग की है. घटना को उत्तर प्रदेश सरकार की मुजरिमाना लापरवाही करार देते हुए भाकपा ने सरकार से इसकी जिम्मेदारी कबूल करने की मांग की है. साथ ही घटना की गंभीरता को देखते हुए इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद में घटित इस जघन्यतम "नर संहार" जैसी घटना से अनुमान लगाया जासकता है कि उत्तर प्रदेश के हालात किस हद तक भयावह होचुके हैं. लेकिन बेहद अफसोस की बात है कि मुख्यमंत्री सहित समूची सरकार इस घटना पर इतनी गैर संवेदनशील है कि वह इसको सामान्य घटना बता रही है. जो स्वास्थ्य मंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री इसके लिए जिम्मेदार हैं, उनसे स्तीफा माँगने बजाय उन्हीं से जांच कराने का नाटक किया जारहा है. क्या इस घटना की जिम्मेदारी विश्विद्यालय के प्रधानाचार्य पर डाल कर सरकार इससे बचना चाहती है? या मुख्य सचिव से जांच करा के मामले में लीपा पोती करना चाहती है? बात बात पर सीबीआई की जांच बैठाने वाली और विपक्ष को सीबीआई जांच कि धमकी देने वाली सरकार इस काण्ड की सीबीआई जांच से क्यों मुकर रही है? भाकपा ने सवाल उठाये हैं.
भाकपा पुरजोर शब्दों में मांग करती है कि प्रकरण की सीबीआई से जांच कराई जाए ताकि समस्त दोषियों को सजा दिलाई जासके. भाकपा ने मृतकों के परिवार को संवेदना राशि और जिनका इलाज अभी भी चल रहा है उन्हें अनुदान राशि शीघ्र से शीघ्र प्रदान करने की मांग की है.
भाकपा ने अपनी समस्त जिला इकाइयों और अनुयायियों का आह्वान किया है कि वे सरकार की संवेदना को झकझोरने और इस काण्ड के पीडितों को न्याय दिलाने को आवाज उठायें और मोमबत्ती मार्च निकालें, धरने प्रदर्शन और पुतला दहन आदि कार्यक्रम आयोजित करें.
डा. गिरीश
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