भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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गुरुवार, 25 मई 2017

जल रहा है उत्तर प्रदेश: योगीजी को केंद्र में बुलाये भाजपा

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उत्तर प्रदेश के बिगड़ते हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. पार्टी ने दृढता के साथ कहा कि इन खौफनाक कारनामों में अधिकतर के पीछे शासक दल के लोग हैं. जब तक शासक दल संरक्षित गिरोहों पर रोक नहीं लगाई जायेगी प्रदेश के हालात सुधर नहीं सकते. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि कल जेबर के पास यमुना एक्सप्रेस वे पर एक परिवार के वाहन को रोक कर महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार, ह्त्या और लूट की घटना ने हर नागरिक को झकझोर कर रख दिया है. यह घटना राज्य सरकार के माथे पर गहरा कलंक है. घटना की जितनी निंदा की जाए कम है. असली अपराधियों को तत्काल पकडे जाने, दोषी पुलिसजनो को सजा दिए जाने और पीड़ित परिवार की फ़ौरन मदद किये जाने की जरूरत है. भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि सूबे के मुखमंत्री आये दिन दरोगा की तरह धमकियां दे रहे हैं. लेकिन उन्हीं की पार्टी के सांसद, विधायक और कार्यकर्ता अराजकता फैला रहे हैं. सहारनपुर आज भी सुलग रहा है. संभल, मुरादाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, मथुरा, अलीगढ़, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, कानपुर, पीलीभीत, लखनऊ, शाहजहांपुर में बढी बढी वारदातें होरही हैं. सांप्रदायिक, सामंती तत्व और पेशेवर गुंडे खुल कर अराजकता फैला रहे हैं. दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, अन्य कमजोरों और यहाँ तक कि व्यापारियों को निशाना बनाया जारहा है. आदमी न तो घर में सुरक्षित है न घर के बाहर. डा. गिरीश ने कहा कि सवा दो माह की इन ताबड़तोड़ वारदातों से जाहिर है कि श्री योगी जी से प्रदेश संभल नहीं रहा. उनकी और भाजपा की चिंता में प्रदेश के हालात सुधारना कम भाजपा के बिगड़ते हालातों को सुधारना और शिक्षा, शासन और प्रशासन में संघ के एजेंडे को घुसाना ज्यादा है. अपनी नाकामियों पर संजीदा होने के बजाय वे विपक्ष पर हमले बोल रहे हैं. तवाही उत्तर प्रदेश की जनता झेल रही है. यदि योगीजी भाजपा के लिए अनमोल रतन हैं तो मोदीजी - अमित शाह को उन्हें केन्द्र में बुला कर बड़ी से बड़ी जिम्मेदारी सौंपनी चाहिये. उसी के लिए कि उत्तर प्रदेश की जनता ने उन्हें सांसद बनाया भी था. पर अब उत्तर प्रदेश की जनता पर मेहरवानी करें मोदी जी, अमित शाह जी, भाकपा राज्य सचिव ने कहा है. डा. गिरीश
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सोमवार, 22 मई 2017

CPI on Munispal elections

समय पर कराये जायें निकाय चुनाव: भाकपा लखनऊ- 22 मई 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव निर्धारित समय पर कराये जाने की मांग की है. यहां जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि सूबे के मुख्यमंत्री और राज्य निर्वाचन आयोग के अलग अलग बयानों से साफ होगया है कि प्रदेश के निकाय चुनावों को हठाने की साजिश चल रही है. मुख्यमंत्री वोटरलिस्ट की गड़्बड़ियों को दुरुस्त करने ओर ओबीसी सर्वे को पुन: कराने का बहाना ले रहे हैं तो राज्य निर्वाचन आयोग खराब कानून- व्यवस्था का सहारा ले रहा है. लेकिन इन दोनों बातों की जिम्मेदार तो राज्य सरकार ही है. भाकपा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के तीन साल और योगी सरकार के दो माह के कार्यकाल की कलई खुल चुकी है. भाजपा यह जान चुकी है कि जिस छल से उसने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बहुमत हथिया लिया अब वह दोबारा चलने वाला नहीं है. इससे बचने को वह वोटरलिस्ट और वार्डों के आरक्षण के आधार को बदलना चाहती है. इसी कृत्य के लिये वह चुनावों को हठा रही है. सर्व सत्ताहरण की भाजपा की यह साजिश लोकतंत्र के लिये खतरनाक है. डा. गिरीश ने कहा कि जब सपा और बसपा की सरकारों ने निकाय चुनावों को टाला था, भाकपा ने तब भी उसका विरोध किया था और आज भी वह इस कार्यवाही की विरोधी है. जिस पार्टी पर ईवीएम में गड़बड़ी करने के आरोप लग रहे हैं, सत्ता में रहते हुये वह क्या मतदाता सूचियों के पुनर्निर्माण और आरक्षण का आधार बदलने से चूक जायेगी? भाकपा ने सवाल किया है. भाकपा ने सभी वामपंथी और जनवादी ताकतों का आह्वान किया है कि वे समय पर निकाय चुनाव कराने और मतदाता सूची और आरक्षण आधार में बदलाव करने की भाजपा सरकार की साजिश को विफल बनाने को आवाज उठायें. डा.गिरीश
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गुरुवार, 18 मई 2017

Two months of Yogi Government in U.P.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आज दो माह पूरे कर लिये हैं. खुद योगी जी ने दोमाह में सब कुछ ठीक करने के दाबे किये थे. अब वे इसके लिये एक वर्ष का समय मांग रहे हैं. इससे भी बड़ी बात यह है कि वे इन बिगड़े हालातों के लिये विपक्ष पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं. सभी को उम्मीद थी कि नई सरकार आने के बाद प्रदेश के हालात सुधरेंगे, पर इसके ठीक विपरीत वे बद से बदतर होते जा रहे हैं. सामान्यतौर पर यह कानून व्यवस्था की समस्या दिखाई देती है. पर गहराई से देखने पर सब कुछ सुनियोजित सा लगता है. 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के वास्ते बूचड़ खाना बना दिया गया था और बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यकों के जानमाल को हानि पहुंचाई गयी थी. पर अब सारे उत्तर प्रदेश को बूचड़ खाना बनाया जारहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश तो मानो अब भी जल रहा है. उत्तर प्रदेश की आधी आबादी- दलितों, महिलाओं अल्पसंख्यकों और व्यापारियों का बड़ा भाग आज युध्द जैसे हालातों का सामना कर रहा है. उन सबको क्या पता था कि जिनको वोट देकर वे सत्ता सौंपने जारहे हैं वो ही उनके खून के प्यासे बन जायेंगे. जो कल तक हाथ जोड़ कर वोट की गुहार लगा रहे थे, वे ही आज हथियार लेकर हमले कर रहे हैं. पुलिस प्रशासन को अर्दब में लेकर उन्हीं के खिलाफ कार्यवाही करबा रहे हैं. रोजी रोटी छीन रहे हैं, उकसाबे की कार्यवाहियां कर रहे हैं, मार रहे हैं और प्रतिरोध की हर आवाज को हर तरह से कुचल रहे हैं. सत्ता में आते ही योगी सरकार ने मीटबंदी का तुगलकी फरमान जारी कर दिया. लाखों लोग बेरोजगार होगये. यह अल्पसंख्यकों के एक खास तबके पर आर्थिक हमला था, लेकिन इसकी चपेट में पशुपालक किसान, पशु व्यापारी, टैनरी और साबुन जैसे उद्योग भी आये हैं. सरकार ने आदेश पारित कर उन्हें निशाना बनाया तो सरकार समर्थकों ने उन पर शारीरिक हमले किये. कथित गोरक्षकों ने उनकी दुकानों, खोखों में तोड़ फोड़ की, आग लगायी और पशु ले जाते व्यापारियों- किसानों पर कातिलाना हमले किये. कई को जेल के सींखचों के पीछे पहुंचा दिया गया. इसी तरह योगी सरकार ने खनन पर रोक लगा दी. खनन के काले कारोबार में सरकार और सत्ता पक्ष से जुड़े लोग अरबों- खरबों कमाते रहे हैं. भाजपा सरकार इस समूचे काले धंधे को अपने अधीन कर लेना चाहती है. पर इसका नतीजा यह निकला कि बालू, बजरी और गिट्टी- मिट्टी के अभाव में उत्तर प्रदेश का समूचा निर्माण उद्योग ठप होकर रह गया और इस कार्य में लगे लगभग एक करोड़ मजदूर, ठेकेदार और व्यापारी बेरोजगार होगये. एंटी रोमियो अभियान चलाकर युवाओं को निशाना बनाया गया और पुलिस- प्रशासन के अलाबा बजरंग दल ने युवक- युवतियों की ठुकाई की. युवाओं में एक अजीब सा भय व्याप्त है. सहारनपुर, शामली, संभल और मेरठ में आजकल जो कुछ घट रहा है वह बेहद गंभीर है. पहले भाजपा ने वहां दलितों और अल्पसंख्यकों के बीच फूट के बीज बोने की कोशिश की. सहारनपुर के सड़क दूधली गांव में वर्षों पहले विवाद के चलते डा. भीमराव अंबेडकर जयंती के कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गयी थी. लेकिन भाजपा के सांसद, विधायकों और स्थानीय नेताओं ने वहां अंबेडकर शोभायात्रा का आयोजन किया. स्थानीय अंबेडकरवादियों ने इस आयोजन से दूरी बना कर रखी. अनुमति न होने के बावजूद सैकड़ो की तादाद में भाजपाई वहां पहुंचे और जानबूझ कर अल्पसंख्यक आबादी से जुलूस निकालने की कोशिश की. पुलिस ने इस अवैध यात्रा को रोकने की कोशिश की तो बौखलाये भाजपाइयों ने अल्पसंखकों की दुकानों- मकानों पर हमले वोले और गाड़ियों को रुकवा कर मुसलमानों को मारा- पीटा. इतना ही नहीं सांसद राघव लखनपाल के नेत्रत्व में भाजपाइयों ने सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आवास पर हमला बोल दिया, वहां तोड़ फोड़ की, सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिये . एसएसपी का परिवार और बच्चे दहशत में आगये. वहां भी पुलिस की मौजूदगी में अल्पसंख्यकों को मारा- पीटा गया. घटना के तूल पकड़ने के बावजूद राज्य सरकार ने कानून हाथ में लेने वाले सांसद और उनकी मंडली के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की. उलटे एसएसपी का तबादला कर दिया गया. इसके एक दिन पहले शामली के थाना भवन में बाइक से ट्रक टकरा जाने को लेकर अल्पसंख्यकों पर हमला बोला गया. कई अल्पसंख्यकों ने थाने में घुस कर जान बचाई. अब भाजपा के निशाने पर दलित आगये हैं क्योंकि वे अल्पसंख्यकों के खिलाफ भाजपा के हाथ की कठपुतली नहीं बने. सहारनपुर, बिजनौर और शामली जनपदों का यह धुर पश्चिमी- उत्तरी क्षेत्र एक ओर जहां सांप्रदायिक रुप से संवेदंशील है वहीं दलितों और गैर दलितों के लोगों के बीच वहां लगातार टकराव चलते रहते हैं. सामंती उत्पीड़न का मुकाबला करने को यहाँ के दलितों ने बिजनौर के कामरेड ब्रह्मानंद के नेत्रत्व में 60- 70 के दशक में 'चमार यूनियन' नामक संगठन का गठन भी किया था. गत लोक सभा और विधान सभा चुनावों में यहां अधिकतर सीटों पर भाजपा से दबंग और सामंती लोग विजयी हुये हैं और दबंग जातियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं. 5 मई को ठाकुर बिरादरी के लोगों ने समूचे प्रदेश में बड़े पैमाने पर महाराणा प्रताप जयंतियों का आयोजन किया. देवबंद क्षेत्र के बढ़ाकलां शब्बीरपुर गांव में भी प्रताप जयंती का आयोजन किया गया. इस गांव के दलित 14 अप्रेल को रैदास मंदिर में डा. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करना चाहते थे. ठाकुरों ने इसका विरोध किया था. तभी से दलितों और ठाकुरों के बीच तनाव चल रहा था. इस तनाव के बीच जब बिना अनुमति के राणाप्रताप शोभायात्रा निकाली गयी. जब यह यात्रा दलितों की आबादी में पहुंची तो डी. जे. की आवाज को लेकर विवाद हो गया. दोनों तरफ से पथराव शुरु होगया. आस पास के गांवों के दबंग लोग हथियार बंद हो कर आगये. इस बीच ठाकुर बिरादरी के एक युवक की मौत होगयी. चर्चा है कि उसकी मौत सिर में पत्थर लगने से हुयी जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसकी मौत दम घुटने से हुयी. बौखलाये दबंगों ने शब्बीरपुर के दलितों पर हमला बोल दिया. पचास से ज्यादा मकान और दुकानें फूंक दी गयीं. दर्जंनों लोग घायल हुये. पुलिस कर्मियों के वाहन आदि भी जला दिये गये. पुलिस ने दोनों तरफ के लोगों को बराबर का दोषी मानते हुये लगभग डेढ़ दर्जन लोगों को जेल भेज दिया. भयभीत दलित गांव से पलायन कर गये. पुलिस- प्रशासन ने विपक्षी दलों के गांव में घुसने पर पाबंदी लगा रखी है. हालातों का जायजा लेने को पुलिस महानिदेशक और प्रमुख सचिव- ग्रह सहारनपुर पहुंचे, मगर उन्होने घटना स्थल पर पहुंचने से परहेज बरता. इससे दलितों अल्पसंख्यकों का सरकार पर से विश्वास डिगा है. 9 मई को भीम आर्मी एकता मिशन नामक संगठन ने शब्बीरपुर कांड को लेकर रैदास छात्रावास में बैठक बुलाई जिसे पुलिस ने रोक दिया. तब दलित स्थानीय गांधी पार्क में एकत्रित हुये मगर पुलिस ने वहां से भी उन्हे खदेड़ दिया. गुस्साये दलितों ने सहारनपुर नगर को आने वाले तमाम मार्गों पर जाम लगा दिया और पुलिस से मुठभेड़ें कीं. यह हिंदूवादी जातिवादी उत्पीड़न के खिलाफ दलितों का स्वाभाविक प्रस्फोट था. अब सरकार दलितों के खून की प्यासी बन गयी है और 24 लोगों को संगीन दफाओं में गिरफ्तार किया गया है. भीम सेना के पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की कोशिश जारी है. दबंगों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उसने दलितों के खिलाफ कठोर कार्यवाही न की तो वे खुद हथियारबंद कार्यवाही करेंगे. इससे पहले बुलंदशहर जनपद के पहासू थानांतर्गत एक गांव में एक हिंदू युवती के मुस्लिम युवक के साथ चले जाने पर बजरंग दल और हिंदू युवा वाहिनी के लोगों ने गांव पर धाबा बोल दिया और एक अधेड़ मुस्लिम को पीट पीट कर मार डाला. संभल जिले के गुन्नौर थानांतर्गत नदरौली गांव में एक विवाहिता के मुस्लिम युवक के साथ चले जाने पर गांव के मुस्लिमों के ऊपर हमला बोल दिया. उनके मकान जला डाले गये, औरतों के साथ बदसलूकी की गयी और बच्चों तक को निशाना बनाया गया. यह सब कुछ पुलिस की मौजूदगी में हुआ. शासन- प्रशासन पर से लोगों का विश्वास पूरी तरह हठ गया है और इस गांव के लोग आसपास के शहरों को पलायन कर गये हैं. संभल जिला भी बहुत ही संवेदनशील है. यहाँ अप्रेल में भी सांप्रदायिक मुठ्भेड़ हुयी थी. अब यहाँ भी दलित और सामंती टकराव उभर रहा है. दलितों के उत्पीड़न और उनके बाल काटने को स्थानीय नाइयों पर सवर्णों द्वारा लगायी गयी पाबंदी के विरोध में वाल्मीकि समाज के लोगो ने हिंदू देवताओं की मूर्तियों का रामगंगा नदी में विसर्जन किया. बजरंग दल ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन दलितों ने उन्हें खदेड़ दिया. दलितों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके साथ भेदभाव न रोका गया तो वे धर्म परिवर्तन करेंगे और अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण करेंगे. अलीगढ़ के गांधीपार्क क्षेत्र में कल्लू बघेल नामक व्यक्ति द्वारा अपनी बीमार भेंस बेचने पर कथित गौरक्षकों ने न केवल उसे पीटा बल्कि छह लोगों को जेल भिजवा दिया. भाजपाइयों के इशारों पर नाच रही पुलिस ने कल्लू बघेल को पीटने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की. यू. पी. में दलितों को अपमानित करने के उद्देश्य से जगह जगह अंबेडकर प्रतिमायें तोड़ी जारही हैं. दलित इस पर प्रतिरोध दर्ज करा रहे हैं. जहाँ दलितों और सामंती तत्वों के बीच भूमि विवाद चल रहे हैं वहां उन जमीनों को दलितों से हड़पने की कोशिशें की जारही हैं. जगह जगह सांप्रदायिक वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है. बजरंग दल, हिंदू युवा वाहिनी, प्रताप सेना जैसे संगठन निर्भीक होकर आपराधिक और सांप्रदायिक घटनाओं को अंजाम देरहे हैं. प्रेम प्रसंग के मामलों में पहले भी उत्पीड़न की बारदातें होती थीं लेकिन इन दो माहों में परिवारीजनों द्वारा कानून हाथ में लेकर कई युगलों को मौत के घाट उतार दिया. बलात्कार और बलात्कार के बाद हत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. राजधानी लखनऊ तक में ऐसी दर्जन भर घटनायें होचुकी हैं. अब आईएएस अधिकारी के वीआईपी गेस्ट हाउस में हुये कत्ल ने सरकार की अकर्मण्यता की कलई खोल कर रख दी है. मथुरा में सर्राफा व्यापारियों की लूट के उद्देश्य से की गयी हत्याओं के अलावा कत्ल, लूट और लूट के साथ हत्या की तमाम बारदातें निर्बाध रुप से जारी हैं. अकेले ब्रज क्षेत्र में कल तक 104 लूट और 76 हत्याओं की घटनायें अंजाम दी जाचुकी हैं. आगरा में 21 लूट, 13 हत्या, फीरोजाबाद में 11 लूट 6 हत्यायें, कासगंज में 10 लूट, 11 हत्यायें, मैनपुरी में 14 लूट, 8 हत्यायें, मथुरा में 17 लूट और 9 हत्यायें, एटा में 8 लूट और 10 हत्यायें, अलीगढ़ में 12 लूट, 10 हत्यायें जबकि हाथरस में 10 लूट और 9 हत्यायें होचुकी हैं. अन्य अपराधों के आंकड़े भी कम नहीं हैं. समूचे उत्तर प्रदेश के आंकड़ों का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है. यही वजह है कि मुख्यमंत्रीजी अपराधों के आंकड़े देने से कतरा रहे हैं. इसके अलाबा इस अवधि में अल्पसंख्यकों के आस्थास्थलों पर 220 हमले हुये हैं जबकि 180 छोटी- बड़ी सांप्रदायिक वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है. जगह जगह भाजपा के नेता पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों तक पर हमले कर रहे हैं. योगीजी की कथित चेतावनियों का उन पर कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है. जिस कानून व्यवस्था की बदहाली के नाम पर पिछली सरकार को मतदाताओं ने 'गुड बाय' कह दिया था योगी सरकार उससे भी बुरी साबित हो रही है. अपने राजनैतिक उद्देश्यों के लिये सांप्रदायिक तत्वों और दबंगों को खुली छूट दिये हुये हैं. अपनी इन बदनीयत कारगुजारियों से ध्यान हठाने को भाजपा, आरएसएस और स्वयं योगी आदित्य नाथ सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेंडे को हवा दे रहे हैं. पर शासन में रहते हुये उनकी यह कारगुजारी उनके इरादों को परवान चढ़ाने में सहायक होगी या आपात्काल की तरह उनकी पराजय का कारण बनेगी, अभी देखना बाकी है. डा. गिरीश
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CPI on Law and Order in U.P.

भाकपा ने प्रदेश में बढते अपराधों पर गहरी चिंता जताई व्यापारिक संगठनों के आंदोलन को समर्थन प्रदान किया लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने पिछले दो माहों में उत्तर प्रदेश में आई अपराधों और अत्याचारों की आंधी पर गहरी चिंता व्यक्त की है. पार्टी ने सरकार से प्रदेशवासियों को अपराध और अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की मांग की है. भाकपा ने अपराधों के खिलाफ कल व्यापारिक संगठनों द्वारा किये जाने वाले विरोध प्रदर्शन को समर्थन प्रदान किया है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश जल रहा है और मुख्यमंत्री अपराधों और अत्याचारों की बाढ़ से अपना पल्ला झाड़ कर विपक्ष पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं. यह मुख्यमंत्री के पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है. सच तो यह है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सारे शातिर अपराधी और गुन्डे मवालियों को भाजपा में भर्ती कर लिया गया है. और वे दिन में पीला दुपट्टा ओड़ कर पुलिस प्रशासन के अधिकारियों पर रौब गांठते हैं और दिन छिपते ही जघन्य वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. यही वजह है कि प्रदेश में हत्या, लूट, वाहन लूट, लूट के लिये हत्या, बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, बलात्कार के बाद हत्या, दलितों अल्पसंख्यकों और सभी शांतिप्रिय नागरिकों पर अत्याचारों की बाढ सी आगयी है और प्रदेश की कानून व्यवस्था चौपट होगयी है. नोट बंदी, मीट बंदी और खनन और भर्तियों पर लगी रोक ने बेरोजगारी में अचानक इजाफा कर दिया है, और सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है. भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा अर्दब में लिये गये अधिकारी संभवत: अपने विवेक का स्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. मुख्यमंत्री पहले कानून- व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये दो माह का समय मांग रहे थे, अब दो माह पूरे होजाने पर एक साल का समय मांगने लगे. 'आपकी नीतियां और कारगुजारियां यदि वैसी ही रहीं जैसी अब तक हैं, तो योगीजी आप एक साल तो क्या पांच सालों में भी कुछ नहीं कर पाओगे', भाकपा राज्य सचिव ने आगाह किया है. भाकपा राज्य सचिव मंडल ने पार्टी की सभी जिला इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे अपराधों के खिलाफ कल दि. 19 मई को होने वाले व्यापारिक संगठनों के आंदोलन को नैतिक और भौतिक समर्थन प्रदान करें. डा. गिरीश
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बुधवार, 10 मई 2017

CPI On Saharanpur

सहारनपुर की स्थिति को शीघ्र काबू में करे राज्य सरकार: भाकपा लखनऊ- 10 मई 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आरोप लगाया है कि कल की सहारनपुर की घटनायें भाजपा की मात्र डेढ माह पुरानी सरकार की राजनैतिक और प्रशासनिक विफलता का परिणाम हैं. पिछले तीन सप्ताह में इस जनपद में हिंसा और आगजनी की ये तीसरी बड़ी वारदात है. यद्यपि इन घटनाओं के लिये शासन- प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है लेकिन जिन लोगों ने गुस्से में आकर कानून हाथ में लिया और जन और धन को निशाना बनाया वह निंदनीय है. एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि इस क्षेत्र के दलित और अल्पसंख्यक इन दिनों लगातार सामंती और सरकार के आक्रमणों को झेल रहे हैं. 5 मई को हुये उपद्रव में यद्यपि एक क्षत्रिय युवक की दुखद मौत होगयी थी लेकिन शब्बीरपुर और उसके आसपास के गांवों में बड़े पैमाने पर दलितों के ठौर- मकान फूंक डाले गये थे. इस मुद्दे पर विचार करने हेतु दलित रविदास छात्रावास में बैठक करना चाहते थे जिसको रोक दिया गया. पुन: उन्होने गांधीपार्क में बैठक बुलाई और उन्हें वहां से भी खदेड़ दिया गया. भाकपा की यह द्रढ़ राय है कि यदि रविदास छात्रावास में हो रही बैठक को होने दिया गया होता तो मामला सड़कों पर न आता. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि तीन सप्ताह से सुलग रहे सहारनपुर और उसके आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षाबल तैनात नहीं किये गये. आस पास के जिलों की फोर्स मुख्यमंत्री जी की सुरक्षा हेतु मेरठ भेज दी गयी थी. डा. गिरीश ने कहाकि भाजपा ने कई हथकंडे अपना कर गत विधानसभा चुनावों में दलितों के वोट तो हथिया लिये मगर अब सत्ता पर काबिज होने के बाद वह असली रुप में आगयी है. सरकार, शासन- प्रशासन सभी में सामंती तत्वों का जमाबड़ा है अतएव समूचे प्रदेश में कमजोर तबकों पर चहुंतरफा हमले बोले जारहे हैं. किसी को रोमियो बता कर मारा जा रहा है तो किसी को शराब का विरोध करने पर पीटा जारहा है. बजरंगदल और हिंदू युवा वाहिनी के मुस्तंड एक ओर आमजनों पर हमले बोल रहे हैं और जहाँ तहां पुलिस को भी निशाना बना रहे हैं. नोटबंदी, मीटबंदी, खननबंदी जैसी कार्यवाहियों से लोगों के रोजगार छिन गये हैं और उनके जीवनयापन की समस्या खड़ी होगयी है. प्रताडित और प्रभावित लोगों से सरकार ने पूरी तरह से संवाद बंद कर रखा है और हर तबके से लाठी डंडे से निपट रही है. यहाँ तक कि पीड़ित लोगों से विपक्षी दलों के मिलने पर पाबंदी लगा दी है. राजनैतिक- सामाजिक प्रयासों के अभाव में स्थिति दिन ब दिन बद से बदतर होती जारही है. समूचा उत्तर प्रदेश सुलग रहा है. सतापक्ष ही कानून व्यवस्था के लिये चुनौती खड़ा कर रहा है. आज भी सहारनपुर में दलितों को निजी हथियारों के बल पर सबक सिखाने की चुनौती कुछ लोग खुले आम देरहे हैं. भाकपा ने सरकार से आग्रह किया कि वह स्थिति से निपटने के लिये संतुलित और न्यायोचित कदम फौरन उठाये. विपक्षी दलों के जनता से संवाद पर लगी रोक को हठाये. जन और धन की हानि का मुआबजा दे. बजरंग दल और हिंदू युवा वाहिनी जैसे संगठनों की गुंडागर्दी को रोके. भाकपा ने चेतावनी दी है कि पूर्वाग्रहों के आधार पर और बदले की भावना से की गयी किसी भी कार्यवाही का भाकपा पुरजोर विरोध करेगी. डा. गिरीश
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शनिवार, 6 मई 2017

भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों की साजिश का नतीजा हैं सहारनपुर की वारदातें

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य इकाई ने कल सहारनपुर जनपद के ग्राम- शब्बीरपुर में हुयी घटना पर गहरा रोष और अफसोस जताया है जिसमें एक युवक की जान चली गयी, दर्जनों लोग घायल हुये हैं तथा तमाम सरकारी और निजी संपत्तियों का विनाश हुआ है. यहाँ जारी एक बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि गत दो सप्ताहों में सहारनपुर हुयी यह दूसरी बड़ी घटना है जिससे जनता की एकता तार तार हुयी है. दोनों घटनायें पूर्व नियोजित जान पड़ती हैं और इनमें कई समानताएं हैं. दोनों घटनाओं में कमजोर तबकों को निशाना बनाया गया है तथा दोनों के मूल में भाजपा के बड़े नेता और कार्यकर्ता हैं. भाकपा के सूत्रों के अनुसार शब्बीरपुर गाँव के दलित समाज के लोग काफी समय से वहां के रैदास मंदिर पर डा. अंबेडकर की प्रतिमा लगाने का प्रयास कर रहे थे और स्थानीय भाजपा और क्षत्रिय समाज उसका विरोध कर रहे थे. अतएव वहां पहले से ही तनाव व्याप्त था. ऐसे तनावग्रस्त गाँव में दलितों की आबादी के बीच से महाराणा प्रताप की शोभा यात्रा निकालना और आयोजन में भाजपा के चार चार मंत्रियों व विधायकों को आमंत्रित करने को दलितों को सबक सिखाने के उद्देश्य से की गयी कार्यवाही माना जारहा है. सभी को मालूम है कि गत 20 अप्रेल को इसी जनपद के गाँव- सड़क दूधली में भाजपा के सांसद और विधायक ने अल्पसंख्यकों की आबादी में जबरिया तरीके से डा. अंबेडकर शोभा यात्रा निकाली जो अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने और दलितों व अल्पसंख्यकों के बीच फूट डालने के उद्देश्य से आयोजित की गयी थी. अराजकता का ऐसा नंगा नाच खुद शासक दल के नेता कर रहे हैं. दोनों वारदातों में अल्पसंख्यकों और दलितों तथा उनकी संपत्तियों को निशाना बनाया गया और पुलिस के अफसरों और उनके वाहन आदि को क्षति पहुंचाई गयी है. यह मामला बेहद संवेदनशील इसलिए भी है कि इस समूचे क्षेत्र में सामंती ताकतें काफी मजबूत हैं. उन्हीं के बीच से भाजपा के सांसद और विधायक चुने गए हैं और उनमें से कई मंत्री हैं. एक युवक की दुर्भाग्यपूर्ण मौत को बहाना बना कर वे जातीय उन्माद भड़का सकते हैं और दलितों व अल्पसंख्यकों पर हमले बोल सकते हैं. गत लोकसभा चुनाव से पहले से ही भाजपा और संघ परिवार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में वोटों के लिए विभाजन और हिंसा का सहारा लेता रहा है और लगता है वे इस आग को सुलगाये रखना चाहते हैं. सहारनपुर ही नहीं उत्तर प्रदेश में हर बड़ी आपराधिक वारदात भाजपा और उसके सहयोगी संगठनों के सौजन्य से होरही है और योगी सरकार को बदनामी झेलनी पड़ रही है. भाकपा ने कहा कि राज्य सरकार ये सुनिश्चित करे कि राज्य सत्ता में भागीदारों के दबाव में कमजोर वर्गों के लोग न पिसने पावें और वास्तविक दोषियों को क़ानून के हवाले किया जाय. डा. गिरीश
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गुरुवार, 4 मई 2017

cpi

लखनऊ- 4 मई 17, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को श्री सुब्रह्मण्यम स्वामी और उनके बयान के बारे में जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये. आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्य नाथ योगी से मिलने के बाद श्री स्वामी द्वारा दिया गया बयान कि मंदिर तो श्री राम के जन्म स्थान पर ही बनेगा, मस्जिद तो कहीं भी बन सकती है, कई सवाल खड़े करता है, अलाबा इसके कि यह भाजपा के सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेंडे को गरम रखने की कवायद है. यहाँ जारी एक बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और सर्वोच्च न्यायालय श्री स्वामी को अवांछित पक्ष बता चुका है, फिर भी स्वामी निरंतर विवादित बयानबाजी कर रहे हैं. आज का उनका बयान एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति- मुख्यमंत्री से भेंट के बाद आया है. इसके क्या अर्थ निकाले जायें? एक ओर भाजपा, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री दुहरा चुके हैं कि अयोध्या विवाद का समाधान सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अथवा आपसी सहमति से ही संभव है, उन्हीं की पार्टी के एक नेता जनता के समक्ष इससे विपरीत बात रखते हैं. भाजपा इसे उनकी निजी राय बता कर पला झाड़ सकती है, पर यह सवाल तो बना रहेगा कि कैसे केंद्र और उत्तर प्रदेश में शासक दल का एक व्यक्ति निरंतर एक ही बयान दिये जारहा है. क्योंकि यह बयान श्री स्वामी ने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात के बाद दिया है अतएव मुख्यमंत्री को इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये. यह इसलिए भी जरुरी है कि प्रधानमंत्रीजी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हमारे मुख्यमंत्रीजी लगातार सार्वजनिक बयान दे रहे हैं कि किसी को भी क़ानून से खेलने की इजाजत नहीं दी जायेगी और कार्यकर्ता शालीनता बरतें. ऐसे में उनका एक अग्रणी नेता लगातार क़ानून को चुनौती देने वाली और समुदाय विशेष में भय पैदा करने वाली भाषा बोल रहा है तो भाजपा को सबसे पहले उसीको पटरी पर लाना चाहिये. वरना जनता इसका यही अर्थ लेगी कि ये सारी बयानबाजियां जनता को भ्रम में डालने के लिए होरही हैं. डा. गिरीश, राज्य सचिव
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सोमवार, 1 मई 2017

CPI, U.P.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश का राज्य स्तरीय शिक्षण शिविर दिनांक- 26, 27, 28 मई 2017 को जनपद- बाराबंकी के फतेहपुर कस्बे में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश का एक तीन दिवसीय शिक्षण शिविर दिनांक- 26, 27 एवं 28 मई 2017 को जनपद- बाराबंकी के कस्बे- फतेहपुर के नेशनल इंटर कालेज में होने जा रहा है. इस शिविर में गत विधान सभा और लोक सभा चुनावों में पार्टी के प्रत्याशी रहे साथी अनिवार्य रुप से भाग लेंगे. जिन जिलों में चुनाव नहीं लड़ा गया वहाँ से जिला सचिव, सह सचिव अथवा राज्य काउंसिल के सदस्य जिन्होने अभी तक इस स्तर के किसी शिविर में भाग नहीं लिया है, भाग लेंगे. यदि इस स्तर के साथी पहले शिविर कर चुके हों तो जिला कार्यकारिणी स्तर के साथियों को मौका दिया जाये. महिलाओं और जन संगठनों को अतिरिक्त कोटा दिया जायेगा. शिक्षण शिविर 26 मई को सुबह 11.00 बजे शुरु होगा और 28 मई दोपहर को समाप्त होगा. भाग लेने वाले साथियों को सुबह 10.00 बजे तक अवश्य पहुंचना होगा और शिविर की समाप्ति तक पूरे समय शिविर में उपस्थित रहना होगा. पश्चिम अथवा बुंदेलखंड से आने वाले साथी पहले लखनऊ पहुंचें. लखनऊ के कैसरबाग बस अड्डे से फतेहपुर के लिये बसें जाती हैं. जिनकी ट्रेनें बाराबंकी जाती हैं वे बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर उतर सकते हैं. पूरब से आने वाले साथी बाराबंकी स्टेशन पर ही उतरें. वहां से रोडवेज बस अड्डा मात्र 500 मीटर की दूरी पर है जहां से बस पकड़ कर फतेहपुर पहुंचें. फतेहपुर बस अड्डे से नेशनल इंटर कालेज मात्र 1.00 कि. मी. के फासले पर है और पैदल अथवा रिक्शे से पहुंचा जा सकता है. निम्न साथियों से मोबाइल पर संपर्क किया जा सकता है. का. रणधीर सिंह सुमन एडवोकेट, राज्य काउंसिल सदस्य- 9450195427 का. ब्रज मोहन वर्मा एडवोकेट, जिला सचिव- 9044720559 शिविर का उद्घाटन भाकपा के राष्ट्रीय सचिव व सांसद का. डी. राजा करेंगे तथा का. अनिल राजिमवाले आदि उच्च स्तरीय व्याख्याताओं के व्याख्यान होंगे.
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शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

CPI on Saharanpur incidents

सहारनपुर, शामली की घटनाओं को गंभीरता से ले योगी सरकार: भाकपा लखनऊ- 21 अप्रेल, 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कल सहारनपुर और शामली जनपदों को दंगों की आग में झौंकने के भाजपा और उनके सहयोगियों के प्रयास की कड़े शब्दों में निंदा की है. पार्टी ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि इस घटना का तटस्थ एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से विश्लेषण कर कठोर कदम उठायें वरना उन्हीं की पार्टी के सांप्रदायिक और निहित स्वार्थी तत्व उनकी सरकार को बदनाम और विफल बना देंगे. यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा है कि न तो यह घटनायें स्वत:स्फूर्त थीं न ही सांप्रदायिक. अल्पसंख्यकों को सबक सिखाने, उन्हें भयभीत करने, उनकी जान और माल को हानि पहुंचाने, दलितों और अल्पसंख्यकों के बीच वैमनस्य पैदा करने और वहां तैनात पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को हठवा कर मनपसंद अधिकारियों को तैनात कराने के उद्देश्य से स्थानीय सांसद, विधायक और अन्य भाजपाइयों द्वारा इन वारदातों को अंजाम दिया गया. सहारनपुर के संवेदनशील सड़क दूधली गांव में भाजपाइयों ने अल्पसंख्यकों को सबक सिखाने और दलितों अल्पसंख्यकों में फूट डालने के उद्देश्य से सात साल से बंद डा. अंबेडकर शोभायात्रा निकालने का प्रयास किया. भाजपाइयों ने अपने इरादों को अंजाम देने को अपने पिट्ठू संगठनों की ओर से यात्रा निकालने की अनुमति लेनी चाही, लेकिन सांप्रदायिक रुप से संवेदनशील इलाकों में किसी नये कार्यक्रम की अनुमति न दिये जाने के शासकीय आदेश के चलते अनुमति नहीं दी गयी. लेकिन फिर भी भाजपाइयों ने गांव से बाहर की भीड़ बुला कर जबरिया यात्रा शुरु कर दी जिसका स्थानीय तौर पर विरोध होना स्वाभाविक था. इसी का बहाना लेकर भाजपाइयों ने स्थानीय सांसद और विधायक के नेत्रत्व में पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़ फोड़ की और अल्पसंख्यकों पर एकतरफा हमले बोल दिये. यहां तक कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भी निशाना बनाया गया. प्रशासनिक अधिकारियों के दबाव में न आने से बौखलाये भाजपाइयों ने कानून हाथ में लेकर एसएसपी आवास पर तोड़ फोड. की, उस पर कब्जा जमा लिया और सांसद ने मीडिया पर घोषणा की कि नये कप्तान के आने तक उन्होने स्वयं कप्तान का चार्ज संभाल लिया है. पुलिस की मौजूदगी में मुख्यमार्ग पर वाहनों को रोक कर अल्पसंख्यकों की पहचान कर उन पर हमले किये गये. अभी भी आग को फैलाने के तमाम प्रयास किये जा रहे हैं. इससे एक दिन पहले पडौसी जिले शामली के थाना भवन में ट्रक से मोटर साइकिल भिड़ जाने की मामूली घटना को लेकर अल्पसंख्यकों के ट्रक को जला डाला और चुन चुन कर दुकानें जलायीं और राहगीरों पर हमले बोले गये. भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने के बाद से भाजपा और उसके संगठनों ने सारी संवैधानिक- सामाजिक मर्यादायें तोड़ दीं हैं और वे अल्पसंख्यकों दलितों और कमजोरों पर एकतरफा हमले बोल रहे हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश को उन्होने सांप्रदायिक उत्पीड़न के जरिये ध्रुवीकरण की प्रयोगशाला बना रखा है जिसके बलबूते वे इस क्षेत्र में अधिकतर लोकसभा और अब विधान सभा की सीटें जीतने में कामयाब रहे हैं. वो आगे भी इसी रणनीति पर चलेंगे. इस बीच स्थानीय पुलिस प्रशासन को दबाव में लेने अथवा अपने मन- मुताबिक अधिकारी तैनात कराने का खेल भी उत्तर प्रदेश में इन दिनों खूब चल रहा है. भाकपा की स्पष्ट राय है कि शांति सद्भाव को पलीता लगाने वाली और कानून व्यवस्था को हाथ में लेकर दलितों अल्पसंख्यकों का लोकतांत्रिक व्यवस्था से विश्वास डिगाने वाली इन वारदातों को शीघ्र ही नहीं रोका गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे. सूबे के मुख्यमंत्री को भी इस सबको गंभीरता से लेना होगा. आखिर कानून व्यवस्था को कायम रखने की पहली जिम्मेदारी तो उन्हीं की बनती है. भाकपा ने कानून व्यवस्था, न्याय, शांति और सद्भाव के लिये प्रतिबध्द सभी ताकतों से अपील की कि वे समय रहते इन षडयंत्रों का एकजुट हो जबाव दें. डा. गिरीश
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बुधवार, 19 अप्रैल 2017

CPI on Babari Issue

बाबरी विध्वंस मामले पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भाकपा ने स्वागत किया कल्याण सिंह और उमा भारती को न्याय हित में पदों से हठाने की मांग की लखनऊ- 19 अप्रेल 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने बाबरी विध्वंस मामले पर आज सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है. भाकपा ने उन भाजपा नेताओं से सार्वजनिक पद छोड़ने की मांग की है जो इस केस में संलिप्त हैं. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से 25 साल पुराने इस केस में दोषियों को सजा मिलने की उम्मीद जगी है जो उच्च न्यायालय इलाहाबाद के विगत फैसले के चलते धूमिल होगयी थी. यह और भी स्वागत योग्य है कि सर्वोच्च न्ययालय ने मामले की सुनवायी दो साल के भीतर पूरा कर लेने का निर्देश उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ को दिया है. भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा है कि इस मामले में न्याय मिलने में पहले ही बहुत देर होचुकी है और इसमें अब और देर नहीं होनी चाहिये. अतएव इस मामले में लिप्त उन व्यक्तियों को जो संवैधानिक पदों पर बैठे हैं न्याय के हित में और नैतिकता के तहत अपने पदों से तुरंत त्यागपत्र देकर अभियोग का सामना करना चाहिये. अपराधिक साजिश में लिप्त किसी भी व्यक्ति का वैसे भी किसी संवैधानिक पद पर बने रहना राष्ट्रहित में नहीं है. श्री कल्यान सिंह ने तो इस अपराध को स्वयं स्वीकार किया था और घटना के अगले दिन 7 दिसंबर 1992 को भीड़ के साथ अयोध्या पहुंच कर नारे लगाये थे- “जो कहा सो किया” और “रामलला हम आयेंगे, मंदिर यहीं बनायेंगे” आदि. उन्होने मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर रहते हुये विवादित ढांचे की रक्षा करने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश और ढांचे की रक्षा करने को राष्ट्रीय एकता परिषद में स्वयं द्वारा दिये गये आश्वासन का उल्लंघन किया था. इसके लिये सर्वोच्च न्यायलय ने उन्हें एक दिन की सजा भी दी थी. ढांचा गिरते ही सुश्री उमा भारती खुशी के मारे उछल कर श्री आडवानी की पीठ पर चढ गयीं थीं और श्री मुरली मनोहर जोशी तालियां बजा रहे थे. देश का दुर्भाग्य है कि देश के संविधान और उसकी एकता अखंडता को तार तार करने के इरादे रखने वाले लोग आज सता पर काबिज हैं. प्रधानमंत्री श्री मोदी और भाजपा अध्यक्ष श्री अमित शाह बार बार यह दुहराते रहे हैं कि भाजपा औरों से अलग पार्टी है, एक चरित्रवान और नैतिकता से ओत प्रोत पार्टी है. आज उनके सामने इन दाबों को साबित करने की चुनौती है. अतएव उन्हें चाहिये कि श्री कल्याण सिंह और सुश्री उमा भारती को पदों से मुक्त करने को ठोस कदम उठायें ताकि उनका ससमय और सभी के साथ ट्रायल हो सके; भाकपा ने मांग की है. डा. गिरीश
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शनिवार, 15 अप्रैल 2017

CPI on Rail accident

रामपुर रेल हादसे पर भाकपा ने चिंता जताई मोदी से रेल मंत्री को तत्काल हठाने की मांग की लखनऊ- 15 अप्रेल 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आज उत्तर प्रदेश के रामपुर में राज्यरानी एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने पर गहरी चिंता व्यक्त की है. पार्टी ने संतोष जताया कि इत्तफाक ही है कि सात बोगियों के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होजाने के बाद भी इस दुर्घटना में अधिक जन हानि नहीं हुयी. सरकार को सभी घायलों के इलाज की समुचित व्यवस्था करनी चाहिये. भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि मोदी जी के शपथ ग्रहण वाले दिन से लेकर आज तक देश में दर्जनों बड़ी रेल दुर्घटनायें होचुकी हैं, जिनमें भारी जन धन की हानि हुयी है. पर आज तक केंद्र सरकार ने इस दिशा में कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया है. दुर्घटना के बाद एक जांच बैठा दी जाती है, मंत्रियों- अफसरों के दौरे होजाते हैं, घटना पर दुख जता दिया जाता है, मुआबजे की घोषणा कर दी जाती है और केंद्र सरकार के नकारापन से ध्यान हठाने को इसमें आतंकवादियों का हाथ होना बता दिया जाता है. मान भी लिया जाये कि ये आतंकवादियों की करतूतें हैं, तो भी तो उसके लिये सरकार ही जिम्मेदार है. मोदी के राज्य में रेलें यमराज की बहिनें बन गयीं हैं. तरह तरह से लोगों की जेब पर डाका डालने के बावजूद न तो सुरक्षा के इंतजाम किये जारहे हैं और न सुविधायें प्रदान की जारही हैं. अब तीन घंटे में रिपोर्ट देने का शिगूफा छोड़ा गया है. इससे यात्रियों का क्या लाभ होगा जो रेल में यात्रा कर जान गंवाने को अभिशप्त हैं. डा. गिरीश ने कहाकि भाजपा जब विपक्ष में हुआ करती थी तो छोटी छोटी रेल दुर्घटनाओं पर रेल मंत्री के स्तीफे की मांग उठाया करती थी. लेकिन साढ़े तीन साल में सैकड़ों लोगों की जान चले जाने और सार्वजनिक संपत्ति के भारी नुकसान के बावजूद आज तक मोदी सरकार ने अपने रेल मंत्री से स्तीफा नहीं मांगा. अब पानी सिर से ऊपर जारहा है, अतएव भाकपा मोदी जी से मांग करती है कि रेल मंत्रीको तत्काल प्रभाव से हठाया जाये. डा. गिरीश
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गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

CPI on Local Body elections

बैलट से ही कराये जायें निकाय चुनाव: भाकपा लखनऊ- 13 अप्रेल 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने मांग की है कि आगामी जुलाई से होने वाले निकाय चुनावों को मत पत्रों से ही कराया जाये. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग ने आज यह स्वीकार किया है कि निकाय चुनाव की ईवीएम मशीनें छह साल पुरानी हैं और वे उपयोग के योग्य नहीं रहीं. आयोग ने इस बात की संभावना भी व्यक्त की है कि आगामी निकाय निर्वाचन मत पत्रों के जरिये भी हो सकता है. यह संभावना स्वागत योग्य है. डा. गिरीश ने कहा कि संपूर्ण विपक्ष द्वारा गत विधान सभा चुनावों में ईवीएम के ऊपर संदेह जताया जारहा है और विपक्षी दलों ने इस प्रकरण को केंद्रीय निर्वाचन आयोग और महामहिम राष्ट्रपति के समक्ष भी उठाया है. इसके प्रयोग के विरुध्द याचिकायें भी दायर की गयीं हैं. ऐसे में निकाय चुनावों में ईवीएम के प्रयोग का कोई औचित्य दिखाई नहीं देता. डा. गिरीश
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Jaliyaanvaalaa baag

हमेशा प्रासंगिक रहेगा जलियांवाले बाग कांड में हुआ बलिदान कई घटनायें कालजयी होती हैं. खास काल और खास परिस्थितियों में हुयी ये घटनायें हमें वर्तमान काल और खास परिस्थितियों का मूल्यांकन करने और नई राह तलाशने में मदद करती हैं. जलियांवाला बाग कांड भी ऐसी ही घटनाओं में से एक है. आजादी के आंदोलन में भी इसका विशिष्ट अर्थ था तो आज भी इसका खास मतलब है. यही वजह है कि दो वर्ष बाद सौ वर्ष पूरे करने जारहे इस जघन्य हत्याकांड की यादें आज भी आम हिंदुस्तानी के मन- मस्तिष्क को झकझोर देती हैं. इस घटना ने हमारे इतिहास की समूची धारा को पूरी तरह बदल दिया था. यही वजह है कि आज भी पूरे देश में इस घटना को याद किया जाता है. 13 अप्रेल 1919 को हुये इस जघन्य हत्या कांड का कारण ब्रिटिश हुकूमत द्वारा लाया जारहा वह काला कानून था जिसे रोलट एक्ट के नाम से जाना जाता है. यह कानून आजादी के लिये चल रहे आंदोलन को कुचलने की मंशा से लाया गया था. इस कानून के जरिये अंग्रेजी हुकूमत ने और अधिक अधिकार हड़प लिये थे जिनके तहत वह प्रेस पर सेंसरशिप लगा सकती थी, बिना मुकदमे के नेताओं को जेल में रख सकती थी, लोगों को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती थी तथा उन पर विशेष ट्रिब्यूनलों में और बंद कमरों में बिना जवाबदेही दिये मुकदमे चला सकती थी आदि. आज न देश पर कोई विदेशी ताकत शासन कर रही है न कोई रोलट एक्ट सामने है. पर देश और समाज को झकझोरने वाले घटनाक्रम आज भी हमारा पीछा नहीं छोड़ रहे. भारतीय प्रेस उस समय आजादी के आंदोलन की पक्षधर ताकतों के हाथ में था. वह उपनिवेशी शासन को उखाड़ फैंकने को तत्पर ताकतों की आवाज हुआ करता था. लुटेरी, जनविरोधी और तानाशाह ताकतें जितनी बंदूक की आवाज से नहीं डरतीं जितना कि मुट्ठी तान के खड़े होजाने वाले लुटे- पिटे लोगों की संगठित आवाज से डरती हैं. रोलट एक्ट उसी आवाज को दबाने के लिये प्रेस सेंसरशिप लादने व अन्य दूसरे कदम उठाने को लाया गया था. पर आज हमारे प्रेस और मीडिया का बड़ा भाग लुटी पिटी ताकतों के साथ नही, लुटेरी, जनविरोधी और फासिस्ट इरादों वाली ताकतों के साथ खड़ा है. बिना रोलेट एक्ट के ही किसी को भी देशद्रोही करार देकर जेलों में ठूंसने, भीड़ बना कर किसी को भी झूठा अभियोग लगा कर मार डालने, शासन और संगठित निजी सेनाओं के जरिये युवाओं छात्रों दलितों अल्पसंख्यकों महिलाओं/ युवतियों और प्रतिरोध की आवाज बुलंद करने वाले नेताओं समाज सेवियों बुध्दिजीवियों और मीडियाकर्मियों को प्रताड़ित करने उनकी हत्या करने और उन्हें भयभीत करने का कारोबार बढ़े पैमाने पर चल रहा है. जनविरोधी रोलट एक्ट के विरोधस्वरुप पूरा देश उठ खड़ा हुआ और लोगों ने जगह जगह गिरफ्तारियां दीं. हुकूमत ने आंदोलन को कुचलने के लिये दमन का रास्ता अपनाया. पंजाब के दो लोकप्रिय नेताओं डा. सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू को अमृतसर मे बिना किसी वजह के गिरफ्तार कर लिया गया. इसके विरोध में एक बड़ा जुलूस निकला. पुलिस ने शांतिपूर्ण जुलूस को रोका और अंतत: भीड़ पर गोलियां चला दीं. दो लोग मारे गये. इससे पूरे पंजाब में उबाल आजाना स्वाभाविक था. इतिहास एक नया मोड़ लेने की दहलीज पर था. नेताओं की गिरफ्तारी और इस गोली कांड के विरोध में बैसाखी के दिन 13 अप्रेल 1919 की शाम को अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक सभा का आयोजन किया गया. यद्यपि शहर में कर्फ्यू था फिर भी 10- 15 हजार के लगभग लोग बाग में जमा हुये. लोगों को सबक सिखाने के लिये बाग के एकमात्र दरबाजे पर पर पोजीशन लेकर ब्रिगेडियर जनरल रेजीनल्ड डायर ने बिना किसी चेतावनी के गोली चलवा दी. 1,650 राउंड गोलियां चलीं. जान बचाने के लिये तमाम लोग बाग में मौजूद कुयें में कूद गये. एक हजार से ज्यादा स्त्री पुरुष बच्चे बूढ़े जवान शहीद हुये और सैकड़ों की तादाद में घायल हुये. कई बार दमनचक्र उलट परिणाम देता है और दमन के खिलाफ जंग के लिये उत्प्रेरक का काम करता है, यह शासक वर्ग और शासक तबके भूल जाते हैं. जलियांवाला बाग कांड ने देश के लोगों को झकझोर के रख दिया और वे आज़ादी की लड़ाई में और ताकत से जुटने लगे. पंजाब पूरी तरह स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़ा. गांधी जी ने 1920 में असहयोग आंदोलन शुरू कर दिया जो 1922 आते आते एक ब्रिटिश विरोधी सशस्त्र संघर्ष में बदल गया था. इसी कांड में घायल एक युवक ऊधमसिंह ने अंग्रेजों से इसका बदला लेने की शपथ ली और इस घटना के इक्कीस साल बाद 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हाल में जनरल डायर को पिस्तौल की गोलियों से भून डाला. भगत सिंह और उन जैसे तमाम युवाओं ने इस घटना से उद्वेलित होकर देश की गुलामी की जंजीरों को तोड़ने के लिये अपने जीवन को बलिदान करने का सुदृढ- संकल्प लिया. हम सब आज जलियांवाला बाग काण्ड के शहीदों को याद करते हुये मौजूदा शासक वर्ग और शासकों से सवाल करें कि इस इतिहास में उनके लिये कोई सबक छिपा है क्या? डा. गिरीश
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सोमवार, 10 अप्रैल 2017

Press Communique of CPI, U.P.

भाजपा की फासीवादी नीतियों के खिलाफ एकजुट हों धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक एवं वामपंथी ताकतें : भाकपा लखनऊ- 10 अप्रेल 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल ने प्रदेश में होने वाले नगर निकाय चुनावों में बढ़े पैमाने पर उतरने का फैसला किया है. नगर निकायों के माध्यम से जनता की सेवा को प्रतिबध्द भाकपा इन चुनावों में वामपंथी दलों के साथ मिल कर उतरेगी. उपर्युक्त सहित अन्य कई निर्णय यहां संपन्न भाकपा की दो दिवसीय बैठक में लिये गये हैं. बैठक में भाकपा के राष्ट्रीय सचिव कामरेड डी. राजा, सांसद दोनों दिन उपस्थित रहे. बैठक की अध्यक्षता का. गफ्फार अब्बास एडवोकेट ( मथुरा ) ने की. बैठक में लिये गये अन्य प्रमुख फैसलों के बारे में जानकारी देते हुये भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने बताया कि पूरे प्रदेश में भारत रत्न डा. भीमराव अंबेडकर का जन्म दिवस 14 से 21 अप्रेल तक मनाया जायेगा. इस अवसर पर जाति की विडम्बना को मिटाने, दलितों और कमजोरों के उत्पीडन को समाप्त करने और उनके सामाजिक आर्थिक तथा शैक्षिक उत्थान के रास्ते तलाशने हेतु विचार गोष्ठियां, मीटिंगें तथा अन्य कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे. राज्य काउंसिल बैठक में उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनैतिक स्थिति पर भी गहनता से चर्चा हुयी. राज्य काउंसिल हाल ही में सत्तारुढ सरकार के क्रिया कलापों और उसके मूल्यांकन के लिये कुछ और दिन इंतजार करना चाहती है. लेकिन प्रदेश सरकार के इस अल्प कार्यकाल में कई समस्यायें खड़ी होगयी हैं जिन पर किसी को भी चिंतित होना स्वाभाविक है. इस अवधि में जघन्य अपराध बढे हैं, अपराधी तत्वों के हौसले बरकरार हैं और वह आमजनता ही नहीं पुलिस बलों पर भी हमलाबर हैं. हाल में ही तीन पुलिस कांस्टेबिलों की दुखद हत्या गंभीर मामला है. लूट कत्ल और अन्य अपराध भी बेखौफ तरीके से जारी हैं. लगता है योगीजी का ‘सुपर एक्टिविस्म’ मीडिया में सुर्खियां बटोरने तक सीमित है. भाकपा राज्य काउंसिल ने गरीब आबादियों में शराब के ठेके खोले जाने का विरोध कर रही महिलाओं के उत्पीड़्न, उन पर लाठियां बरसाने और उन पर मुकदमे दर्ज कर आतंकित किये जाने के कदम को अनुचित मानते हुये उसकी आलोचना की है. सरकार के इस कदम से लगता है कि पूर्व की सरकारों की तरह यह सरकार भी शराब माफियाओं के हितों के पोषण में लगी है और और जनता के अच्छे उद्देश्यों के लिये किये जा रहे स्वत:स्फूर्त आंदोलनों को लाठी डंडे के बल पर दबाना चाहती है. मीटबंदी के बारे में भाकपा की राय है कि इसे राजनैतिक उद्देश्यों अर्थात गोरक्षा के नाम पर अल्पसंख्यकों और दलितों पर आक्रमण करने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के उद्देश्य से लागू किया गया है. इसी तरह एंटी रोमियो अभियान के नाम पर आधुनिक दृष्टिकोण रखने वाले युवक युवतियों को उट्पीड़न का शिकार बनाया गया है. किसान कर्जा माफी पर भाकपा ने कहा कि यह एक और धोखा साबित हुआ है और किसानों में भारी निराशा है. हताशा में किसानों की आत्महत्याओं का दौर फिर शुरू हो गया है और बुंदेलखंड में हाल ही में कई किसानों ने आत्महत्या की है. भाकपा चाहती है कि किसानों के समस्त कर्जों को माफ किया जाये जैसाकि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने चुनाव अभियान में किसानों को भरोसा दिया था. इस कर्जमाफी के लाभ के दायरे में बटायीदार किसानों को भी लाया जाना चाहिये जिन्होने बड़े सूद पर सूदखोरों से कर्जा लिया है. क्षेत्रीय खेत मजदूरों को भी सहायता प्रदान करने का रास्ता निकाला जाना चाहिये. भाकपा राज्य काउंसिल ने अपनी इस मांग को दोहराया है कि नेशनल हाईवेज और स्टेट हाईवेज टोल- टैक्स मुक्त हों. भाकपा का तर्क है कि वाहन खरीद के समय, वाहन रजिस्ट्रेशन कराने के समय उपभोक्ताओं से भारी टैक्स बसूला जाता है और पेट्रोल डीजल पर सड़्क निर्माण के नाम पर विशिष्ट टैक्स ( सेस ) बसूला जाता है तो फिर एक अन्य टैक्स बसूलने का कोई औचित्य नहीं. सिवाय इसके कि यह जनता की बलपूर्वक की जारही सरकारी लूट है. भाकपा ने गत सरकार द्वारा निजी नलकूपों के शुल्क में की गयी लगभग चार गुना वृध्दि को किसानों की जर्जर आर्थिक हालत को और खराब करने वाला बताया और इस संबंधित आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग की. भाकपा ने रोड्वेज कर्मचारियों, शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों पर छह माह तक हड़्ताल न करने की पाबंदी को तानाशाहीपूर्ण कदम बताते हुये इसे तत्काल वापस लेने की मांग की. भाकपा राज्य काउंसिल ने पांच राज्यों के चुनाव परिणामों की भी समीक्षा की. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बारे में राज्य काउंसिल ने कहा कि भाजपा ने अपने सांप्रदायिक एजेंडे को धार देकर, खुल कर जातीय कार्ड खेलते हुये कल्पना से परे धन बहा कर और मीडिया की एकतरफा पक्षधरता के बल पर इन चुनावों को जीता है. चुनाव आयोग ने मतदान को सात चरणों में फैला कर और अन्य कई कदमों से भाजपा को जीतने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद की है. यह लोकप्रिय जनादेश नहीं अपितु, छल बल, घृणित सांप्रदायिक और जातीय विभाजन तथा धन बल से हासिल किया गया बहुमत है जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने जबर्दस्त भूमिका निभायी है. पंजाब में सत्तारूढ़ भाजपा गठबंधन पूरी तरह समाप्त हो गया, गोआ में भी उसे करारी हार मिली और मणिपुर में भी बहुमत हासिल करने से भजपा पीछे छूट गयी. मगर गोआ और मणिपुर में भाजपा ने सारी मर्यादाओं को ताक पर रख कर राज्यपालों की मदद से और विधायकों को खरीद कर अपनी सरकार बनाई है. यह मोदी लहर नहीं थी जैसे कि दाबे किये जारहे हैं. अब अपने विभाजनकारी एजेंडे को धार देने को भाजपा ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में घनघोर कट्टर चेहरों को कमान सौंपी है. बैठक को संबोधित करते हुये कामरेड डी. राजा ने कहा कि देश, संविधान और जनता को भाजपा और संघ परिवार की फासीवादी नीतियों से भारी खतरा है. इसके मुकाबले के लिये धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और वामपंथी शक्तियों को एक मंच पर लाने की जरूरत है. भाकपा इसके लिये प्रयासरत है और वामपंथी दलों समेत अन्य लोकतांत्रिक दलों से वार्ता जारी है. उन्हें भरोसा है कि ऐसी सभी शक्तियां मौके की नजाकत को पहचानेंगीं और देश हित में योजना बना कर मुद्दों के आधार पर एकजुट होकर काम करेंगी. उन्होने स्पष्ट किया कि इसे चुनावी गठबंधन नहीं समझना चाहिये. डा. गिरीश
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मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

CPI ON Farmers Loan

कर्जमाफी: एक बार फिर ठगे गये किसान – भाकपा लखनऊ- 4 अप्रेल 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के किसानों के साथ एक बार फिर धोखा हुआ है और सत्ता में आते ही किसानों के कर्ज माफ करने का प्रधान मंत्री मोदी और अमित शाह का वायदा एक बार फिर जुमला साबित हुआ है. किसानो के कर्जे माफ करने संबंधी उत्तर प्रदेश सरकार के बहु प्रतीक्षित फैसले पर भाकपा की प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि भाजपा नेतृत्व ने अपने चुनाव घोषणा पत्र और चुनाव अभियान में सरकार गठन के फौरन बाद लघु और सीमांत किसानों पर बकाया कर्जों को माफ करने का वायदा किया था. लेकिन आज हुयी प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में केवल 86 लाख किसानों का एक लाख तक का कर्ज माफ किया गया है. इन 86 लाख किसानों का एक लाख से ऊपर वाला कर्ज तथा अन्य करोड़ों किसानों पर लदी कर्ज की भारी धनराशि उनके सामने कठिन समस्या बने रहेंगे. प्रदेश में लघु और सीमांत किसानों की संख्या 2 करोड़ 43 लाख के करीब है. उत्तर प्रदेश के किसानों की दयनीय हालत को देखते हुये उनके शेष कर्जे भी माफ किये जाने चाहिये और इस तरह की व्यवस्था की जानी चाहिये कि इसका लाभ बटाईदार किसानों और खेतिहर मजदूरों को भी मिले. लेकिन कर्जा माफी एक तात्कालिक राहत हुआ करती है. सरकार को किसान के संकट के पूर्ण समाधान के लिये एक सुगठित किसान नीति तैयार करनी चाहिये. केंद्र और उत्तर प्रदेश में एक ही दल की संपूर्ण बहुमत वाली सरकारों के रहते किसानों को उनसे भारी उम्मीदें हैं. डा. गिरीश, राज्य सचिव भाकपा, उत्तर प्रदेश
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बुधवार, 29 मार्च 2017

CPI on Meet Ban

लखनऊ- 29 मार्च, 2017. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की हाल ही में पदारुढ सरकार ने मीटबंदी के मामले में न्यायसंगत कदम उठाने के बजाये राजनैतिक उद्देश्यों के लिये इसे एक वर्ग विशेष के विरुध्द अभियान के रुप में चलाया हुआ है. राज्य सरकार को इस दुर्भावनापूर्ण कदम में सुधार करना चाहिये. एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि मीट से जुड़े कारोबार से कुछ न कुछ हर समुदाय के लोग जुड़े हैं, लेकिन सरकार और भाजपा से जुड़े लोग इसकी आड़ में मुस्लिम समाज पर हमले बोल रहे हैं. पुलिस अविवेकपूर्ण तरीके से सरकार के फैसले को अंजाम दे रही है तो सरंक्षण प्राप्त अराजक तत्व मीट विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों पर हमले बोल रहे हैं. गत दिनों हाथरस सहित कई स्थानों पर मीट विक्रेताओं के खोखों/ दुकानों में आग लगा दी गयी. सरकार का उद्देश्य खाली एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना मात्र था तो उसे पहले मीट कारोबारियों को लाइसेंस प्राप्त करने और सुरक्षित स्थानों पर अपनी दुकान आदि शिफ्ट करने की चेतावनी दी जानी चाहिये थी. जो नगर निकाय अवैध कमाई के चलते कारोबारियों के लाइसेंस नवीनीकृत नहीं कर रहे अथवा नये लाइसेंस जारी नहीं कर रहे, पहले उनसे ऐसा करने के लिये कहा जाना चाहिये था. सरकार द्वारा नोटबंदी की तरह राजनैतिक उद्देश्यों से की गयी मीटबंदी के दुष्परिणाम आने शुरु होगये हैं. हर तबके के अनेक लोग मीट खाते हैं और आज उससे बने व्यंजन लोगों की थाली से गायब हो रहे हैं. कई चीजों के दाम बढ़ना शुरु होगये हैं और उद्योग व्यापार पर भी संकट आया है. बेरोजगारी बढ़ना तो अवश्यंभावी है. मीट महंगा होने से सब्जी दालों की खपत बढ़ी है, और उनकी कीमतों में उछाल आना शुरु हो गया है. किसानों के रिटायर्ड पशुधन या तो बिक नहीं रहे या बहुत कम कीमत पर बिक रहे हैं. पशु पैंठ ( हाट ) बाजारों तक पर पुलिस छापेमारी कर रही है और कथित हिदूवादियों के लंपट गिरोह किसानों और व्यापारियों को पशु बाजारों से खदेड़ रहे हैं. चारे का संकट पैदा होने जा रहा है और इससे दूध और उससे बने पदार्थों के दाम बढ़ सकते हैं. डा. गिरीश ने कहा कि मीट उद्योग से जुड़े होटल, टैनरी, साबुन, फर्टिलाइजर और ट्रांसपोर्ट जैसे तमाम उद्योग भी चौपट होरहे हैं और निर्यात दर गिरने से विदेशी मुद्रा की आमद घटेगी. अतएव उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी घोषित नीति “सबका साथ सबका विकास” पर चलते हुये मीटबंदी के अपने फैसले में सुधार करना चाहिये. डा. गिरीश
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सोमवार, 6 फ़रवरी 2017

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र - विधान सभा चुनाव 2017

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का चुनाव घोषणा पत्र
- विधान सभा चुनाव 2017
देश के सबसे बड़े राज्य - उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के गठन के लिए 17वीं विधान सभा का चुनाव हो रहा है। प्रदेश की जनता इन चुनावों को स्वतंत्र भारत के इतिहास में एक परिवर्तनकारी, महत्वपूर्ण एवं निर्णायक चुनाव साबित कर सकती है। इसके लिए जरूरी है कि आम मतदाता -
·         जाति-पांति, धार्मिक एवं क्षेत्रीय संकीर्णताओं से बाहर निकल कर अपने बदतर हालातों पर गौर करें;
·         चुनावों के दौरान अपनाये जाने वाले भ्रष्ट तौर-तरीकों से प्रभावित होने से स्वयं को बचायें और इस बात को दिल-दिमाग में बैठा लें कि तात्कालिक संतोष के लिए उसे पांच सालों की कुर्बानी नहीं देनी है; और
·         अपने वर्गीय हितों तथा प्रदेश एवं देश के हितों को ध्यान में रखकर चुनावों में अपने कीमती मताधिकार का प्रयोग करना ही सच्ची देशभक्ति है।
प्रदेश की आम जनता का ध्यान इस ओर आकर्षित करना जरूरी है कि आजादी के समय सरकार के पास संसाधन काफी सीमित थे तथा देश ने विकास के ख्वाब देखना भी शुरू नहीं किया था। लेकिन उस वक्त आजादी के बाद स्वतंत्रता संग्राम में अपना सब कुछ न्यौछावर करने वाले हमारे पूर्वजों की पीढ़ी राजनीति में मौजूद थी। राजनीति में चोर-उचक्कों, माफियाओं और भ्रष्टों की दखलंदाजी नहीं थी। संसाधन विहीनता के उस दौर में हमने सार्वजनिक क्षेत्र को बुलंदियों तक पहुंचाने के रास्ते से स्वतंत्र आर्थिक विकास के रास्ते को चुना था। और हम उस रास्ते पर चले भी। उस दौर में हमने बड़े-बड़े बांध बनाये, नए कल-कारखाने लगाये, हरित एवं श्वेत क्रान्तियां की और देश जो विकास कर रहा था, उसका फायदा शहरों से लेकर दूर-दराज के गांवों तक की जनता को पहुंचना शुरू हो गया था।
                परन्तु आज हालात बिलकुल उसके उलट हैं। आज जब प्रदेश की जनता 17वीं विधान सभा के लिए वोट डालने की दहलीज पर खड़ी है, अधिसंख्यक जनता आज भी गरीब है। एक गरीब आदमी तो अपनी पूरी कमाई पेट पालने में ही खर्च कर देता है और उसके पास तो बचाने के लिए कुछ होता ही नहीं है फिर भी वह जो कुछ खर्च करता है, उसका 15-20 प्रतिशत उसे केन्द्र एवं राज्य सरकारों को विभिन्न टैक्सों के रूप में देना पड़ता है। जैसे-जैसे यह कमाई बढ़ती है, वैसे-वैसे टैक्सों का बोझ बढ़ता चला जाता है। मध्यमवर्गीय कर्मचारियों पर तो टैक्सों का बोझ 30-35 प्रतिशत से भी ज्यादा है। नए-नए टैक्सों को जनता पर लादा जाता रहा परन्तु जब भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास जैसी सुविधाओं के सवाल उठते हैं तो पूंजीवादी दलों के नेता सरकारों के पास संसाधन न होने का रोना रोने लगते है।
                तब और अब में जो अंतर है वह यह है कि आजादी के बाद के दौर में अपना सब कुछ देश की आजादी के लिए न्यौछावर करने वाले नेता राजनीति में मौजूद थे तो आज राजनीति को कमाई का जरिया बनाने वाले लोग सत्तासीन हो रहे हैं।
                सवाल हैं -
·         लाखों-करोड़ों रूपये चुनाव में खर्च वाले करने लोग जब चुनाव जीत कर सरकार बनाते हैं, तो क्या उनसे प्रदेश के विकास की आशा की जा सकती है? ऐसे लोग सरकार में आने के बाद चुनाव में लगाये गये धन की न केवल वसूली में जुट जाते हैं बल्कि कई पुश्तों की व्यवस्था भी करने में लगे रहते हैं।
·         भ्रष्टाचार के खिलाफ सत्तासीन राजनीतिज्ञ बड़ी-बड़ी बातें जुमलों के रूप में उछालते रहते हैं। लेकिन वही पूंजीवादी दल के नेता जब चुनावों के दौरान हवाई-जहाजों और हेलीकाप्टरों से चुनाव प्रचार करने जाते हैं, तो उस पर खर्च होने वाला पैसा किस मेहनत की कमाई से आता, बता नहीं सकते?
                आम जनता को इन चुनावों के वक्त अपनी आत्मा को टटोलना चाहिए।
                प्रदेश के सबसे बड़े राज्य में 17वीं विधान सभा के चुनावों के वक्त जरूरत इस बात की है कि प्रदेश की जनता चुनावों में यह सुनिश्चित करने के लिए वोट देने जाये कि -
·         उसे प्रदेश के हर मर्द, औरत और बच्चे को भोजन मुहैया कराने के लिए वोट देना है।
·         उसे प्रदेश के हर बच्चे को शिक्षित बनाने के लिए वोट देना है।
·         उसे प्रदेश के हर नागरिक को इलाज मुहैया कराने के लिए वोट देना है।
·         उसे प्रदेश के हर नागरिक को आवास मुहैया कराने के लिए वोट देना है।
·         उसे प्रदेश के हर नागरिक को रोजगार मुहैया कराने के लिए वोट देना है। और
·         उसे प्रदेश के हर दलित, दमित, उत्पीड़ित, महिला और मजदूर को सम्मान व सुरक्षा दिलाने के लिए वोट करना है। आदि-आदि।
                भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी चुनावों के दौरान जनता का आह्वान करती है कि अपनी जाति-पांति, धर्म और क्षेत्रीय संकीर्णताओं से ऊपर उठ कर मतदान करने से पहले उपरोक्त बातों का ख्याल रखे।
                भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जनता का ध्यान इस तथ्य की ओर भी आकर्षित करना चाहती है कि जातिवादी दल जातियों के उत्थान की बातें जरूर करते हैं परन्तु उसका वर्गीय चरित्र पूंजीवादी और उनका ढांचा भ्रष्टाचार के अर्थशास्त्र पर आधारित है। सत्ता में आने पर न तो इनके द्वारा कोई उत्थान किया जाता है और न ही उनसे जनता ऐसी आशा रखे। इनका ध्येय एक ऐसा कंक्रीटी (मसलन हाईवे, पथरीले पार्क, मेट्रो आदि का) विकास है जिसमें अधिक से अधिक जनता के पैसे को लूटा जा सके।
                यही हाल साम्प्रदायिक तथा क्षेत्रीय संकीर्णताओं को उभारने वाले दलों का भी है।
                ऐसी राजनीतिक ताकतें सरकार बनाने के बाद प्रदेश और प्रदेश की जनता के समग्र विकास के बजाय सरमायेदारों के सरमाये का विकास करने में लगी रहती हैं क्योंकि इन्हीं ताकतों से उन्हें भ्रष्टाचार के जरिये धन मिलता है। प्रदेश का किसान, मजदूर, खेत मजदूर, नौजवान, विद्यार्थी, महिलाओं जैसे समाज के विभिन्न तबकों से इन्हें पांच साल तक कुछ मिलने वाला नहीं होता है, इसलिए ये ताकतें और दल इन तबकों के विकास का कोई ख्याल भी नहीं रखती हैं।
                अस्तु प्रदेश और प्रदेश की जनता के समग्र विकास के लिए अमीरों की अमीरी और गरीबों की गरीबी के विकास के इस खेल को जनता को इस बार रोकना ही होगा।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के लक्ष्य
·         17वीं विधान सभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी तथा वामपंथी दलों की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करना जिससे वह सत्ता की नीतियों में प्रभावकारी दखलंदाजी की विधाई ताकत हासिल कर सके।
·         वर्तमान विधान सभा चुनावों के जरिये तमाम माफियाओं, भ्रष्ट तथा जनविरोधी राजनीतिज्ञों को अगली विधान सभा में प्रवेश को भरसक रोकना।
·         साम्प्रदायिक एवं जातिवादी पार्टियों और ताकतों को भरसक पीछे धकेलना।
·         नेताओं और पार्टियों का विकल्प नेता अथवा पार्टी नहीं हो सकता। अतएव नीतियों का विकल्प तैयार करना।
·         विधान सभा के भीतर नाम मात्र का विपक्ष नहीं अपितु मजबूत, जुझारू, संवेदनशील एवं कारगर विपक्ष खड़ा करना।
                भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उपरोक्त लक्ष्यों को हासिल करने और जनता के हित में निम्न प्रमुख कार्यों को पूरा करने को अपना चुनाव घोषणापत्र जारी करती है:
भ्रष्टाचार के खिलाफ और राजनीति के शुद्धिकरण का अभियान
·         विधान सभा में प्रभावी दखलंदाजी की ताकत मिलने पर भाकपा अन्य वामपंथी दलों के सहयोग के साथ एक विशेषज्ञ आयोग के गठन का काम करेगी जो यह पता लगाये कि टैक्सों की दर अनाप-शनाप बढ़ने के तथा नये-नये टैक्स लगने के बावजूद सरकार को प्राप्त होने वाला धन किस जरिये (परनाले) से निकल जाता है कि सरकार के पास प्रदेश की आम जनता को आवास, भोजन, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए पैसा नहीं बचता है।
·         विशेषज्ञ आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार के संसाधनों के इस भ्रष्ट बहाव को रोकने के लिए उचित तथा तेज मशीनरी और प्रक्रिया को विकसित करना जिससे राजनीति के शुद्धिकरण को अमल में लाया जा सके जिससे सरकारी संसाधनों का उपयोग ऐसे विकास पर खर्च किया जाये जिससे राजनैतिक एवं नौकरशाही का भ्रष्टाचार समाप्त हो सके और सरकारी संसाधनों का उपयोग कंक्रीटी विकास के बजाय प्रदेश और प्रदेश की जनता के वास्तविक विकास पर खर्च करना मुमकिन हो सके।
·         प्रभावी लोकपाल के प्रति भाकपा अपनी प्रतिबद्धता पुनः जाहिर करती है जिसे सभी पूंजीवादी दल कदापि नहीं चाहते।
·         जांच से लेकर मुकदमा चलाने तक सीबीआई सहित सभी जांच एजेंसियों को कार्यगत स्वतंत्रता मुहैया कराना। उन्हें शासक दलों के चंगुल से मुक्त कराना।
·         शहरी सम्पत्तियों में भ्रष्टाचार के पैसे के निवेश को रोकने के लिए शहरी भूमि सीमारोपण कानून को दुबारा लागू किया जायेगा जिसे भूमंडलीकरण-उदारीकरण-निजीकरण के दौर में समाप्त कर दिया गया है। अवशेष शहरी भूमियों का अधिग्रहण कर लिया जायेगा।
·         सोने में भ्रष्टाचार के पैसे के निवेश को रोकने के लिए प्रति परिवार सोने का मालिकाना हक की कानूनी सीमा तय कर दी जायेगी और उससे   अधिक सोना पाये जाने पर सख्त सज़ा दिये जाने का कानून बनाया जायेगा।
·         सीबीआई की तरह एक स्वतंत्र जांच एजेंसी का प्रदेश स्तर पर गठन।
·         सभी स्तरों पर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती से त्वरित कार्यवाही। भ्रष्टाचार के मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए विशेष न्यायालयों का गठन।
·         जन-धन के सभी उपयोगों की स्वतंत्र एजेंसी से आडिट आवश्यक करना और उनके सोशल आडिट के लिए कानूनी व्यवस्था।
·         सामाजिक कल्याण योजनाओं के सोशल आडिट की व्यवस्था।
·         राजनैतिक भ्रष्टाचार की एक जड़ - सांसद एवं विधायक निधि को समाप्त करना।
उत्तर प्रदेश का विकास
·         भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ऐसी आर्थिक-राजनीतिक-सामाजिक नीतियों को लागू करेगी जिससे उत्तर प्रदेश के समस्त भौगोलिक क्षेत्रों का समग्र, समान एवं त्वरित विकास हो। शहरी ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार का सृजन हो। इस समग्र आर्थिक विकास से ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रूकेगा तथा विभाजनकारी राजनैतिक शक्तियों, नेताओं और सरकारों की प्रदेश और प्रदेश की जनता को विभाजित करने की सारी विघटनकारी चालबाजियाँ भी ध्वस्त हो जायेंगी। समग्र रूप से विकसित उत्तर प्रदेश में ही इसकी 21 करोड़ जनता का भविष्य सुरक्षित रह सकता है।
विद्यार्थियों तथा नौजवानों के लिये
·         दोहरी शिक्षा प्रणाली की समाप्ति और शिक्षा का राष्ट्रीयकरण। सभी एक जगह पढ़ें, एक जैसी शिक्षा ग्रहण करें।
·         सभी स्कूल/कालेजों में इंटरनेट सुविधा युक्त कम्प्यूटर तथा विज्ञान की प्रयोगशालाओं की स्थापना के साथ वैज्ञानिक शिक्षण को लागू करना।
·         शत-प्रतिशत साक्षरता की दिशा में आवश्यक कदम उठाना। प्राईमरी स्कूलों में ड्रॉप आउट रोकने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य।
·         रोजगार मुहैया कर सकने वाली निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था।
·         मध्यान्ह भोजन योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करना।
·         धर्मनिरपेक्षता, राष्ट्रीय एकता तथा प्रगतिशील मानव मूल्यों का संचार करने वाले तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्रदान करने वाले पाठ्यक्रमों को तैयार करना।
·         सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के रिक्त लाखों-लाख स्थानों पर भर्ती। भर्ती प्रक्रिया को आर्थिक भ्रष्टाचार एवं भाई-भतीजावाद से मुक्त बनाना सुनिश्चित करना। रिक्ति निकले तो नौकरी जरूर मिले की नीति सुनिश्चित करना।
·         छात्रों एवं नौजवानों में खेल के प्रति रूझान पैदा करने के लिए जिलों-जिलों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल-कूद की पर्याप्त सुविधाओं को विकसित करना।
·         बेरोजगारी समाप्ति के लिए रोजगार सृजन के लिए तमाम क्षेत्रों का विकास।
·         मनरेगा के समकक्ष योजना शहरी क्षेत्रों के लिए भी तैयार करना और उसे लागू कराना।
महिलाओं एवं बच्चों के लिये
·         संसद एवं विधायिकाओं में महिलाओं के एक तिहाई आरक्षण का कानून बनवाना।
·         महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों पर कठोरतम कदम उठाना तथा शीघ्र न्याय मुहैया कराने की मशीनरी एवं प्रक्रिया को सुनिश्चित करना।
·         महिलाओं के लिए समान कानूनी अधिकार। समान काम के लिए समान वेतन और विकास के समान अवसर।
·         महिला एवं बाल-कल्याण कार्यक्रमों को सार्वभौमिक बनाना एवं इन योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करना।
·         बच्चों के खिलाफ अपराध पर कठोर कार्यवाही तथा इन अपराधों के लिए सजा में बढ़ोतरी।
·         बालश्रम का उन्मूलन। भ्रूण हत्या और कुपोषण से मुक्ति।
औद्योगिक मजदूरों के लिए
·         मजदूरों के हितों की पूरी दृढ़ता से रक्षा। मजदूरी को विकास का  आधार माना जाना।
·         श्रम कानूनों में मजदूरों के हित में परिवर्तन तथा कानूनों को प्रभावी तरह से लागू करना।
·         मजदूर यूनियन बनाने में अड़ंगे डालने वालों को सख्त सजा दिये जाने के लिए कानून बनाना।
·         विभिन्न उद्योगों के मजदूरों के लिए न्यूनतम मजदूरी के स्तर को जीने लायक मजदूरी में बदलना।
·         हर माह नियत तिथि पर मजदूरी भुगतान की गारंटी।
·         ठेका प्रथा एवं आउटसोर्सिंग की समाप्ति। ठेका मजदूरों को उद्योगों में स्थाईकरण।
·         उच्च तकनीकी कम श्रम से अधिक उत्पादन देती है। अतएव उत्पादन के समकक्ष मजदूरी अथवा श्रम के घंटे कम करना।
ग्रामीण एवं असंगठित मजदूरों के लिए
·         खेत मजदूरों तथा अन्य असंगठित वर्ग के मजदूरों के लिए आवश्यकता पर आधारित न्यूनतम मजदूरी, पेंशन और अन्य सामाजिक कल्याण लाभ, महिला मजदूरों के लिए समान मजदूरी और प्रसूति सुविधाओं की गारंटी करने वाले कानून को बनाना।
·         हदबंदी के ऊपर की बची जमीन और कृषि योग्य अन्य फालतू जमीनों का भूमिहीनों में वितरण।
·         खेती एवं किसानों के लिए
·         कृषि के विकास को राज्य की अर्थव्यवस्था के विकास की बुनियाद बनाना।
·         मूलगामी भूमि सुधारों पर अमल। कृषि भूमि को कृषि के लिए संरक्षित करने को कदम।
·         राष्ट्रीय कृषि आयोग की सिफारिशों, जिसमें 4 प्रतिशत ब्याज पर ऋण मुहैया कराना शामिल है, को लागू कराने की दिशा में कार्य।
·         भूमि अभिलेखों के सही रखरखाव, चकबंदी को भ्रष्टाचार मुक्त कराना एवं निर्धारित समय सीमा के अंदर चकबंदी को पूरा करना।
·         किसानों द्वारा खेती में प्रयुक्त सामग्रियों - खाद, बीज, पानी, डीजल आदि की कीमतों में कटौती के तमाम उपाय तथा कृषि उत्पादों को लाभ पर बेचने की व्यवस्था (जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्यों को लागत मूल्य के ऊपर तय करना शामिल है) सुनिश्चित कर खेती को लाभदायक बनाना।
·         खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए कृषि में सार्वजनिक निवेश की वृद्धि।
·         सिंचाई एवं जल संरक्षण के लिए उचित योजना बनाना और उसे कार्यान्वित करना।
·         बाढ़ नियंत्रण एवं सूखे की रोकथाम के लिए कदम उठाना। वृक्षारोपण एवं पर्यावरण सुरक्षा के लिए जरूरी कदम।
·         कृषि विज्ञान केन्द्रों के ताने-बाने का विकास जिससे रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करके फसलों की लागत को घटाया जा सके और कृषि को लाभप्रद व्यवसाय में परिवर्तित किया जा सके।
·         सहकारिता आन्दोलन को मजबूत करना और उसमें व्याप्त नौकरशाही हस्तक्षेप तथा भ्रष्टाचार का उन्मूलन।
·         कृषि के साथ किये जा सकने वाले अन्य कारोबारों - पशु पालन, मछली पालन, बागवानी आदि के लिए ढांचा विकसित करना और उसके लिए आर्थिक पैकेज की व्यवस्था, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके। सामूहिक खेती को प्रमोशन, कारपोरेट खेती पर प्रतिबंध।
·         वर्तमान किसान विरोधी भूमि अधिग्रहण कानून के स्थान पर नया कानून बनाना और उपजाऊ जमीनों के अधिग्रहण पर रोक।
·         यदि आधारभूत ढांचे के लिए कृषि भूमि के अधिग्रहण के अतिरिक्त कोई विकल्प न हो तो भूमि के उचित मूल्य के भुगतान के साथ ही प्रभावित किसान एवं ग्रामीण मजदूरों के पुनर्वास की व्यवस्था - जिसमें अन्यत्र भूमि आबंटन शामिल है, सुनिश्चित करना।
दलितों, आदिवासियों तथा पिछड़ी जनता के लिए
·         रिक्त पड़े आरक्षित पदों पर नियुक्तियां।
·         आदिवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा, गैर कानूनी ढंग से उनसे ली गयी जमीनों को उन्हें वापस करना।
·         उनके सम्मान, स्वाभिमान की रक्षा और समाज की मुख्य धारा में लाने को जरूरी विधाई कदम उठाना।
बुनकरों तथा अन्य दस्तकारों के लिए
·         यू. पी. हैण्डलूम कारपोरेशन को बहाल किया जायेगा जिससे बुनकरों एवं अन्य दस्तकारों के उत्पादों की बिक्री संभव हो सके।
·         बंद कताई मिलों को दुबारा चालू किया जायेगा।
·         बुनकरों एवं दस्तकारों को रियायती दर पर बिजली और सूत मुहैय्या कराना।
·         हथकरघा वस्त्रों तथा अन्य उत्पादों के निर्यात के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करना। उन्हें ब्याज मुक्त ऋण दिलाना।
·         दस्तकारी एवं बुनकरी के क्षेत्र में इजारेदार पूंजी के प्रवेश पर प्रभावी प्रतिबंध।
समाचार माध्यमों एवं उनके कर्मियों के बारे में
·         छोटे एवं मध्यम समाचार माध्यमों के विकास के लिए उचित माहौल।
·         मीडियाकर्मियों को वेज बोर्ड के अनुसार वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा मुहैय्या कराना।
आधारभूत ढांचा एवं सार्वजनिक क्षेत्र के लिए
·         प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए आधारभूत क्षेत्र को सार्वजनिक क्षेत्र में विकसित करना।
·         बिजली आदि क्षेत्रों में शुरू की गयी निजीकरण की प्रक्रिया को उलटना। अधिकाधिक बिजली उत्पादन सार्वजनिक क्षेत्र में।
·         सार्वजनिक क्षेत्र के बन्द पड़े उद्योगों को पुनः चालू करना।
·         सार्वजनिक क्षेत्र में नौकरशाही-हस्तक्षेप तथा भ्रष्टाचार का उन्मूलन।
·         सार्वजनिक क्षेत्र को स्वाबलंबी बनाना। सभी मार्गों का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र में और उन्हें टोल टैक्स से मुक्त करना।
·         प्रदेश के हर क्षेत्र का औद्योगिक विकास सुनिश्चित करना।
·         कृषि उत्पादों पर आधारित तथा निर्यात-उन्मुख उद्योगों के विकास पर विशेष ध्यान देना।
·         लघु उद्योगों के विकास पर विशेष ध्यान देना।
सार्वभौमिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए
·         सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौमिक बनाना और सभी परिवारों को उसके माध्यम से 14 आवश्यक वस्तुओं की रियायती कीमतों पर आपूर्ति जिससे महंगाई पर प्रभावी अंकुश रखा जा सके।
·         गरीबी की रेखा के नीचे जीवनयापन करने वालों के लिए वर्तमान सस्ती दरों पर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को भ्रष्टाचार मुक्त बनाकर हर लाभार्थी को आपूर्ति सुनिश्चित करना।
·         सभी मोहल्लों तथा ग्रामों में सस्ते दामों की दुकानों की स्थापना तथा इस प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार का उन्मूलन।
·         खाद्यान्नों को नष्ट होने से बचाने के लिए पीसीएफ के लिए गोदामों का निर्माण तथा संरक्षण के उपाय।
स्वास्थ्य एवं चिकित्सा के लिए
·         सभी जिला मुख्यालयों पर स्थित जिला एवं महिला अस्पतालों का उच्चीकरण।
·         ब्लाक, न्याय पंचायत और पंचायत स्तर पर सरकारी क्षेत्र में बुनियादी चिकित्सा सुविधाओं की व्यवस्था।
·         मंडल मुख्यालय पर मेडिकल कालेजों की स्थापना।
·         अस्पतालों में रिक्त चिकित्सकों तथा अन्य कर्मचारियों के रिक्त पड़े पदों को भरा जाना।
·         दस्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों तथा अन्य कर्मचारियों के अतिरिक्त पदों का सृजन।
·         सरकारी अस्पतालों में सभी जांचों तथा दवाईयों की मुफ्त व्यवस्था और उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करना।
·         स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को समाप्त करना।
·         स्वास्थ्य बजट को दोगुना करना।
·         बीमार का घर अस्पताल, बीमारी का निदान दवा और आरामयोजना शुरू करना।
अल्पसंख्यकों के बारे में
·         रंगनाथ मिश्र आयोग तथा सच्चर कमेटी की अनुशंसाओं को लागू करना।
·         अल्पसंख्यकों के शैक्षिक तथा आर्थिक उन्नयन के लिए उचित कदम।
·         प्रशासन, पुलिस एवं सुरक्षा बलों में भेदभाव समाप्त कर मेरिट आधारित समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना।
·         अनुसूचित जाति एवं पिछड़ी जाति के मामलों में धार्मिक भेदभाव की समाप्ति।
चुनाव सुधारों के बारे में
·         चुनावों में समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली लागू करना।
·         चुनावों को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए उचित कदम तथा निर्वाचित प्रतिनिधियों की सम्पत्तियों की निगरानी के लिए अलग निकाय का गठन।
·         निर्वाचित प्रतिनिधि द्वारा स्वयं पार्टी छोड़ने अथवा उसके पार्टी से निष्कासन पर संबंधित निकाय से उसकी सदस्यता का समापन।
·         मान्यता प्राप्त पार्टियों को राज्य की ओर से वित्तीय सहायता और इस सम्बंध में कामरेड इन्द्रजीत गुप्ता समिति की सिफारिशों का अनुमोदन एवं क्रियान्वयन।
पुलिस सुधार
·         पुलिस कानून 1861 को निरस्त कर उसके स्थान पर राष्ट्रीय पुलिस आयोग की सिफारिशों के अनुसार लोकतांत्रिक कानून बनाना।
·         पुलिस को जनता के साथ मित्रवत रहने की शिक्षा देना और उन्हें मित्रवत बनाना।
·         पुलिस हिरासत में मौतों को रोकना और इस तरह की किसी भी घटना पर कठोर तथा त्वरित कार्यवाही।
·         अपराधों पर रोक के लिए पुलिस की जांच को पुख्ता करने के लिए अपराध विज्ञान प्रयोगशालाओं की जिला स्तर पर स्थापना जिससे अपराधियों को पकड़ने में पुलिस सक्षम हो सके और मुकदमों में सजा सुनिश्चित हो सके।
·         पुलिस द्वारा निर्दोष व्यक्तियों के खिलाफ किसी भी कार्यवाही पर सख्त कार्यवाही के लिए तंत्र विकसित करना। पुलिस द्वारा शारीरिक प्रताड़ना पर हर स्तर पर रोक।
·         एफआईआर दर्ज करने से जांच तक हर स्तर पर रिश्वतखोरी को समाप्त करना।
·         चौराहों, नाकों आदि पर अनवरत चलने वाली वसूली पर प्रभावी रोक। इस हेतु सीसीटीवी का तंत्र विकसित करना।
जल प्रबंधन
·         एक व्यापक जल प्रबंधन व्यवस्था पर अमल, जिसमें नदियों को परस्पर इस ढंग से जोड़ना कि पर्यावरण पर असर न पड़े, बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, वर्षा जल संचयन एवं सभी के लिए पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था शामिल है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
·         भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करेगी। इसके लिए राज्य स्तर पर सीएसआईआर जैसी संस्था की स्थापना करेगी।
धर्मनिरपेक्षता की रक्षा तथा साम्प्रदायिक कट्टरपंथ का विरोध
·         हर किस्म की साम्प्रदायिकता, धार्मिक कट्टरपन, भाषायी, क्षेत्रीय तथा उग्र एवं अंध राष्ट्रवाद - जिससे हमारे समाज का एका और सौहार्द भंग होता है - के विरूद्ध सशक्त अभियान।
·         धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा और उसे मजबूत करना।
·         भाकपा हर तरह के जातिवादी भेदभाव और जातिवाद के राजनैतिक लाभ उठाने की हर कोशिश को समाप्त करेगी।
संसदीय लोकतंत्र की रक्षा
·         भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करेगी।
·         विधान सभा एवं विधान परिषद की साल भर में कम से कम 100 दिनों तक बैठकों के आयोजन को सुनिश्चित करेगी।
·         नीतिगत फैसलों - जिनका जनमानस पर व्यापक प्रभाव होना है, पर विधायिका की मुहर को आवश्यक करना।
·         निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा संसदीय प्रक्रिया में उनकी सहभागिता की रिपोर्ट को संबंधित जन प्रतिनिधि के क्षेत्र में जनता को सूचित करना।
अन्य
·         आवास के अधिकार को वैधानिक अधिकार बनाने की दिशा में कार्य।
·         सार्वजनिक एवं सहकारी क्षेत्र की पिछली सरकारों द्वारा बेची गयी परिसंपत्तियों का राष्ट्रीयकरण।
·         विद्यालयों को वित्तविहीन मान्यता की व्यवस्था की समाप्ति, वर्तमान वित्तविहीन विद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शिक्षकों को राज्य द्वारा वेतन भुगतान की व्यवस्था में लाना।
·         शिक्षा-मित्रों, मध्यान्ह भोजन रसोईया, आशा बहुओं, आंगनबाड़ी वर्कर्स की सेवाओं का नियमितीकरण एवं वेतन भुगतान।
·         विकलांग व्यक्ति कानून 1995 में प्रभावी अमल जिससे उन्हें अपनी क्षमताओं के निर्माण के पर्याप्त अवसर मुहैया हो सकें।
·         वृद्धावस्था, विकलांग एवं विधवा पेंशन सभी पात्र व्यक्तियों को मुहैया कराना और प्रति माह पेंशन की राशि को कम से कम जीवन निर्वाह के स्तर पर लाना। इन योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करना। इन योजनाओं में पात्रता की परिभाषा में परिवर्तन जिससे उन सभी लोगों को, जिन्हें इसकी जरूरत है, इसमें शामिल किये जा सकें।
·         अधिवक्ता कल्याण निधि की राशि को बढ़ाकर दस लाख किया जायेगा।
                भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस घोषणापत्र में व्यक्त दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध है। इन बातों को मनवाने के लिए और 17वीं विधान सभा के चुनावों में प्रदेश की जनता के समर्थन से सफलता मिलने पर विधान सभा के अन्दर इन पर अमल के लिए संघर्ष करेगी।
                इसके लिए आवश्यक है कि 16वीं विधान सभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के और कुल मिलाकर वामपंथ के विधायक अधिक से अधिक संख्या में चुन कर आयें।
                भाकपा प्रदेश के मतदाता भाइयों एवं बहनों से अपील करती है कि वह प्रदेश की जनता के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उसकी तमाम ज्वलंत समस्याओं के समाधान के लिये -
·         सर्वप्रथम भाकपा प्रत्याशियों को वोट दें।
·         भाकपा समर्थित प्रत्याशियों को वोट दें।
·         धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील, संवेदनशील, संघर्षशील एवं मजबूत वामपंथी विकल्प के निर्माण का रास्ता प्रशस्त करें जिससे जनविरोधी, भ्रष्ट और निरंकुश पूंजीवादी राजनीति पर लगाम लगाई जा सके।


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