भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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बुधवार, 14 जून 2017

Report of Agitation of Left Parties in U.P. on Jun 12

उत्तर प्रदेश में वामपंथी दलों का दमन विरोधी दिवस बेहद सफल

जिला केंद्रों पर किये गये धरने- प्रदर्शनऔर आम सभायें


लखनऊ- 12 जून, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं वामपंथी दलों के आह्वान पर दमन विरोधी दिवस समूचे उत्तर प्रदेश में बेहद सफल रहा. सहारनपुर और प्रदेश के अन्य भागों में हुयी हिंसा की वारदातों और उनमें दलितों- अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने, महिलाओं के साथ होरहीं दिल कंपा देने वाली वारदातों, जघन्य अपराधों जिनमें सर्राफों व्यापारियों, व्यापारियों, वाहनों और बैंकों की लूट शामिल हैं, हाईवे और नेशनल हाईवेज पर लूट,  हत्या और सामूहिक बलात्कार की बड़ती वारदातें, जर्जर होचुकी कानून व्यवस्था, गुंडा तत्वों द्वारा शांतिप्रिय नागरिकों को निशाना बनाने यहां तक कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकरियों को निशाना बनाने, छात्रों और नौजवानों को जेल भिजवाने और जगह जगह दंगे फैलाने के प्रदेश सरकार और संघ परिवार के कारनामों पर कारगर रोक लगाने आदि प्रदेश को  मथ रहे सवालों पर यह आंदोलन केंद्रित था.
इसके अलावा हाल ही में महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में उठ खड़े हुये किसान आंदोलनों और मध्य प्रदेश में पुलिस गोली से 6 किसानों के मारे जाने, किसानों की जर्जर हालत को पलटने को स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू करने, केंद्र सरकार द्वारा काटने के लिये पशुओं की खरीद- फरोक्त को रोकने वाली अधिसूचना को रद्द करने, उत्तर प्रदेश के समस्त सीमांत और लघु किसानों के सभी कर्जे अविलंब माफ करने, प्रदेश सरकार की खनन और पशु कटान नीति से तथा नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया में लगाई पाबंदी आदि से बेरोजगारी में बढ़ोत्तरी और विकास के चौपट होने आदि सवाल भी इस आंदोलन के केंद्र में थे.
योगी सरकार के सत्ता में आने के बाद से यह संयुक्त वामपंथ का पहला बड़ा आन्दोलन था. भीषण गर्मी और रमजान के बावजूद भाकपा और वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने जिस उत्साह और जुझारू तेवरों के साथ आंदोलन को कामयाब बनाया उसके लिये वे बधाई के पात्र हैं. जैसाकि आजकल यूपी में संघ गिरोह द्वारा जनवादी आंदोलनों पर हमलों की वारदातें होरहीं हैं और हमें आशंका थी कि वे ऐसा करेंगे, हमारे कार्यकर्ताओं ने हिम्मत और गर्मजोशी के साथ दमन के विरुध्द आवाज बुलंद की.
प्रत्येक जगह जिलाधिकारियों के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति और राज्य पाल को उपर्युक्त मुद्दों से जुड़ी मांगों को शामिल कर ज्ञापन दिये गये.
राजधानी लखनऊ में जहाँ चार दिन पूर्व वामदलों के धरने को पीत पट्टाधारियों ने निशाना बनाने की कोशिश की थी, वहीं गांधी प्रतिमा पर पहले से ज्यादा लोग एकत्रित हुये और जोशीले नारों के साथ धरने पर बैठे. भाकपा के जिला सचिव मो. खालिक की अध्यक्षता में हुयी सभा को पार्टी के राज्य सहसचिव अरविंदराज स्वरुप सचिव मंडल सदस्य आशा मिश्रा, रामप्रताप त्रिपाठी, मो. अकरम और कांती मिश्रा आदि ने संवोधित किया. सभा का संचालन सीपीएम के जिला सचिव प्रदीप शर्मा ने किया.
प्रधानमंत्री मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में वामपंथी कार्यकर्ताओं ने लहुरावीर चोक स्थिति आजाद पार्क में धरना दिया. यहां संपन्न सभा की अध्यक्षता भाकपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार ने की. संचालन माकपा के नंद लाल पटेल ने किया. सीपीएम के राज्य सचिव हीरालाल यादव, भाकपा के निजामुदीन, अजय मुखर्जी, राजनाथ पांडे, फार्बर्ड ब्लाक के संजय भट्टाचार्य सहित अन्य वाम नेताओं ने संवोधित किया.
कानपुर में वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने राम आसरे पार्क में धरना और सभा का आयोजन किया. भाकपा के जिला सचिव रामप्रसाद कनौजिया, असित कुमार सिंह, माकपा के अरविंद कुमार, एसयूसीआई के बालेंदु कुमार आदि ने सभा को संबोधित किया.
अलीगढ़ में भाकपा और माकपा के कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट पर धरना देकर सभा की. भाकपा के जिला सहसचिव इकबाल मंद, पूर्व सचिव एहतेशाम बेग, रामबाबू गुप्ता, सीपीएम के जिला सचिव इदरीश अहमद, नरेंद्र पचौरी, ओमप्रकाश शर्मा और माले के धर्मेंद्र ने सभा को संबोधित किया.
आगरा में भाकपा और माकपा ने सुभाष पार्क से कलक्ट्रेट तक जुलूस निकाला और आम सभा की. सभा को भाकपा की राज्य काउंसिल के सदस्य तेज सिंह वर्मा, जिला सचिव ताराचंद, ओम प्रकाश प्रधान, पूरन सिंह ऐड्वोकेट, एस. के. खोसला, जगदीश प्रसाद शर्मा, भीकम सिंह, सुधीर कुलश्रेष्ठ, मोहनसिंह जादूगर, भवन निर्माण संघ के धर्मजीत सिंह, सीपीएम के जिला सचिव श्रीलाल तोमर और भारतसिंह ने संबोधित किया.
 राज्य कार्यकारिणी सदस्य का. नसीम अंसारी के अनुसार इलाहाबाद में उपर्युक्त सवालों पर भाकपा, माकपा और माले ने 10 और 11 जून को पुतला दहन कर ज्ञापन दिया.
फैजाबाद में तहसील के समक्ष तिकौनियां पार्क पर धरना और सभा की गयी. सभा को भाकपा के जिला सचिव अशोक कुमार तिवारी, रामतीर्थ पाठक, रामजी राम, एस. एन. बागी, नौजवान सभा के राज्य सचिव आफताव अहमद, सीपीएम के माताबदल व सत्यभान सिंह और माले के नेताओं ने संबोधित किया.
झांसी में भाकपा ने कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन और आम सभा की. जिला सचिव शिरोमणि सिंह राजपूत की अध्यक्षता में संपन्न सभा को भगवान दास पहलवान, लक्ष्मण सिंह आदि ने संवोधित किया.
मेरठ में भाकपा और किसान सभा ने जिलाधिकारी कार्यालय पर भाकपा जिला सचिव शरीफ अहमद, इदरीस और किसान सभा के नेता जितेंद्र वर्मा और संग्राम सिंह के नेत्रत्व में प्रदर्शन किया और आमसभा की.
बांदा में भाकपा ने जिलाधिकारी कार्यालय पर भारी सुरक्षाबलों की मौजूदगी में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया. सभा को राज्य काउंसिल सदस्य राम चंद्र सरस, जिला सचिव केवलसिंह, देवीदयाल गुप्ता, श्यामसुंदर राजपूत, मदन भाई पटेल, श्यामबाबू तिवारी, वकार खान और हसीब अली आदि ने संबोधित किया.
जनपद चित्रकूट में भी भाकपा ने तहसील पर प्रदर्शन और आम सभा की. सभा को अमित यादव, चंद्रपाल पाल और माकपा के रुद्रप्रसाद मिश्र ने संबोधित किया.
ललितपुर में भी भाकपा ने जिला कलक्ट्रेट पर सभा कर ज्ञापन दिया. जिला सचिव जमील अहमद एड्वोकेट, किशन लाल, पर्वत लाल अहिरवार व महेंद्र बौध्द आदि ने सभा को संबोधित किया.
गाज़ियाबाद में जिलाधिकारी कार्यालय पर भाकपा द्वारा जिला सचिव जितेंद्र शर्मा के नेत्रत्व में धरना एवं आम सभा की गयी. यहाँ रहीमुद्दीन, सगीर अहमद, पर्वीन, सरदार जर्नेल सिंह ने संबोधित किया. अल्पसंख्यक आबादी बहुल मोहल्ला- शहीद नगर में सैकड़ों रोजेदारों ने वहाँ के पार्टी कार्यालय से टेलीफोन एक्स्चेंज तक जुलूस निकाला.
मथुरा में भाकपा, माकपा और माले ने धरनास्थल से जिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकाल कर आमसभा की. सभा को भाकपा की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य गफ्फार अब्बास ऐडवोकेट, अब्दुल अशफाक, मास्टर वीरेंद्र सिंह, प्रेम मिस्त्री, माकपा के दिगंबर सिंह व टीकेंद्र शाद और माले के नसीर शाह ऐडवोकेट व सौरभ इंसान आदि ने संबोधित किया.
जालौन जिले के मुख्यालय उरई में भाकपा कार्यालय मजदूर भवन से जिलाधिकारी कार्यालय तक शानदार जुलूस निकाला और आम सभा की. सभा को भाकपा के वरिष्ठ नेता कैलाश पाठक, राज्य कार्यकारिणी सदस्य सुधीर अवस्थी, जिला सचिव विजय सिंह, नौजवान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष विनय पाठक, माकपा के जिला सचिव कमला कांत और माले के सचिव कुशवाहा ने संबोधित किया.
जौनपुर जिला मुख्यालय पर भाकपा, माकपा व एसयूसीआई ने विशाल प्रदर्शन किया. सभा को भाकपा राज्यकार्यकारिणी के सदस्य जयप्रकाश सिंह, जिला सचिव कल्पनाथ गुप्ता, रामनाथ यादव, सुभाष पटेल, जगन्नाथ शास्त्री, सत्यनारायन पटेल, माकपा के किरणशंकर रघुवंशी, जयलाल सरोज व इंद्रजीत पाल, एसयूसीआई के जगदीशचंद्र अस्थाना, महेंद्रकुमार मौर्य  श्रीपति सिंह व प्रवीन शुक्ल ने संबोधित किया. सभा का संचालन सुबास गौतम ने किया.
गाज़ीपुर में भाकपा द्वारा का. सरयू पांडे पार्क में धरना दिया गया. सभा को पूर्व सांसद विश्वनाथ शास्त्री, जिला सचिव अमरीका यादव, डा. रामबरन सिंह, जनार्दनराम, शमीम, राम अवध, रामलाल, मनोजसिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख रामायण यादव आदि ने संबोधित किया.
मऊ में भी जिला मुख्यालय पर भाकपा ने जिला मुख्यालय पर धरना दिया. सभा को जिला सचिव विनोद राय, रामसोच यादव, माकपा के वीरेंद्र व माले के विनोद ने संबोधित किया.
औरैया में भाकपा ने  जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया. सभा को राज्य काउंसिल सदस्य अतरसिंह कुशवाहा, सरनाम सिंह, बाबूराम निराला, ओमप्रकाश दोहरे, हनुमंतसिंह व दिग्विजय सिंह ने संबोधित किया.
प्रतापगढ में भाकपा ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया. सभा को जिला सचिव रामबरन, कमरुद्दीन, राजमणि, त्रिभुवननाथ शर्मा, उपेंद्रनारायण पांडे, हेमंत ओझा, महाराजदीन यादव, सीपीएम के लालबहादुर तिवारी, माले के रामनरेश पटेल, एसयूसीआई के पुष्पेंद्र विश्वकर्मा ने संबोधित किया.
भदोही में भाकपा और माकपा ने जिला मुख्यालय पर धरना/ प्रदर्शन किया. सभा को भाकपा ,राज्य कार्यकारिणी के सदस्य फूलचंद यादव, जिला सचिव सुशील श्रीवास्तव, भुआल पाल, राजेंद्र कनौजिआ, महबूब अली, माकपा के सचिव कैलाशनाथ, इंद्रदेव पाल, जगन्नाथ मौर्य ने संबोधित किया.
शाहजहांपुर में निषेधाज्ञा को तोड़ कर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया. सभा को जिला सचिव मो. सलीम, रामशंकर नेताजी, सुरेश कुमार नेताजी, डा. रुपा शर्मा, मनीश चंद्र व प्रदीपकुमार गुप्ता ने संबोधित किया.
सुल्तानपुर में तिकौनियां पार्क में धरना/ प्रदर्शन किया गया जिसे भाकपा के जिला सचिव शारदा पांडे, रामअजोर उपाध्याय, मुन्ना शर्मा, प्रेमा देवी, शमीम खान, रामखिलावन, माकपा के बाबूराम यादव व एसयूसीआई के जयप्रकाश मौर्य ने संबोधित किया.
पीलीभीत में नेहरु ऊर्जा पार्क में संयुक्त धरने का आयोजन किया गया. सभा को भाकपा जिला सचिव चिरोंजीलाल यादव, भीमसेन शर्मा, बालकराम, भोजपाल, फारबर्ड ब्लाक के प्रांतीय सचिव एस.एन.सिंह चौहान, माकपा के रजीउद्दीन शम्सी ने संबोधित किया.
बहराइच में  भाकपा ने जिला केंद्र पर जुझारू प्रदर्शन किया. सभा को भाकपा नेता सिध्दनाथ श्रीवास्तव, कुलेराज यादव, शशिवाला श्रीवास्तव, लालबहादुर लोदी, रामबचन सिंह, मो. शरीफ व श्रावस्ती के जंगबहादुर सिंह ने संबोधित किया.
बस्ती में  प्रदर्शनकारी शास्त्री चौक पर इकट्ठे हुये मगर प्रशासन ने आगे नहीं बढने दिया. वहीं सभा की गयी जिसे भाकपा नेता अशर्फीलाल गुप्ता, भिखई राम, गंगाराम सोनकर, विशलावती, दुर्गावती, शांति व माकपा के के.के. तिवारी ने संबोधित किया. जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया.
महाराजगंज जिला मुख्यालय पर भाकपा ने प्रदर्शन किया जिसमें जिला सचिव गुरुशरण यादव, अवधराज यादव, अमजद शाह, रोहित, कल्पनाथ ने भाग लिया.
हाथरस में भाकपा के साथियों ने उप जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच कर सभा की. जिला सचिव चरन सिंह बघेल, सत्यपाल रावल, द्रुगपाल सिंह, संजय खान आदि ने संबोधित किया.
बुलंदशहर के स्याना तहसील मुख्यालय पर भाकपा ने जोरदार प्रदर्शन किया और सभा की. सभा को राज्य सचिव मंडल सदस्य अजय सिंह, वरिष्ठ नेता सागर सिंह, जिला सचिव मुरारीलाल आदि ने संबोधित किया.
मुजफ्फरनगर में भी जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना और सभा की गयी जिसे भाकपा के जिला सचिव राजबल त्यागी, शाहनवाज खान, सुभाष उपाध्याय, छोटे खान, मूर्तज़ा सलमानी, धीर सिंह सीपीएम के श्यामवीर राठी और सहदेव सिंह ने संबोधित किया.
अमरोहा के जिला मुख्यालय पर धरना और आमसभा की गयी जिसे भाकपा के जिला सचिव नरेश चंद्रा, घसीटा सिंह, गोविंद गोला तथा माकपा और फार्बर्ड के नेताओं ने संबोधित किया.
गोरखपुर में भाकपा और माकपा ने जिला मुख्यालय पर धरना दिया. सभा को भाकपा जिला सचिव, सुरेश राय, समी उल्लाह खान तथा राममूर्ति ने संबोधित किया.
मुरादाबाद में भाकपा, माकपा और माले ने प्रदर्शन कर सभा की जिसे भाकपा के राम किशोर रस्तोगी व मोहम्मद असलम आदि ने संबोधित किया.
कानपुर देहात के जिला मुख्यालय पर भाकपा द्वारा जोरदार धरना/ आम सभा की गयी जिसे जिला सचिव राजेंद्रदत्त शुक्ला, वरिष्ठ नेता रणजीतसिंह सेंगर, हरिमोहन त्रिपाठी, मोतीलाल भारती, रामअवतार भारती, केप्टन आर. एस. यादव, आदि ने संबोधित किया.
मैंनपुरी में भाकपा और किसान सभा ने जिला केंद्र पर धरना प्रदर्शन किया जिसे भाकपा जिला सचिव रामधन, वीरेंद्रसिंह चौहान तथा किसान सभा के सचिव राधेश्याम यादव ने संबोधित किया.
जनपद फतेहपुर के खागा कस्बे में नगरपालिका से तहसील तक जुलूस निकाला और सभा की. सभा को भाकपा राज्य कार्यकारिणी सदस्य मोती लाल, जिला सचिव रामसजीवन सिंह, राज्य काउंसिल सदस्य फूलचंद पाल, हीरालाल चौधरी, पूरन लाल, रामप्रकाश तथा माकपा के नरोत्तम सिंह व गया प्रसाद आदि ने संबोधित किया. तहसील के 250 गांवों को कौशांबी जनपद में देने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर भी विरोध प्रकट किया गया.
बरेली में भाकपा ने दामोदर स्वरुप पार्क में धरना दिया जिसमें राज्य कार्यकारिणी सदस्य राजेश तिवारी, तार्केश्वर चतुर्वेदी, डी.डी. बेलवाल, रामनाथ चच्चा, आर.एस. चौहान, रामकिशोर व उमेश वाल्मीकि आदि शामिल थे.
देवरिया में भाकपा ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जिसमें सीपीएम के कुछ साथी शामिल थे. सभा को जिला सचिव आनंद चौरसिया, चक्रपाणि तिवारी, कमला यादव, सदानंद ने संबोधित किया.
कौशाम्बी में भाकपा द्वारा शिवसिंह यादव के नेत्रत्व में सिराथू तहसील पर प्रदर्शन किया गया और सभा की गयी.
फरुखाबाद में यह कार्यक्रम 15 जून को आयोजित होगा. अन्य जिलों की रिपोर्ट अपेक्षित है.
गोंडा में भाकपा जिला सचिव रघुनाथ राम, सत्यनारायन तिवारी, ईश्वरशरण शुक्ल, दीनानाथ त्रिपाठी माकपा के कौशलेंद्र पांडे आदि ने ज्ञापन दिया.

डा. गिरीश



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गुरुवार, 8 जून 2017

जनता पर दमन चक्र चलाना बंद करें भाजपा सरकारें और संघ परिवार

जनता पर दमन चक्र चलाना बंद करें भाजपा सरकारें और संघ परिवार

वामपंथी दलों का उत्तर प्रदेश में दमन विरोधी दिवस  12 जून को


लखनऊ- 8 जून, 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने मध्य प्रदेश में पुलिस द्वारा 6 किसानों की ह्त्या, माकपा महासचिव का. सीताराम येचुरी पर हिन्दू सेना द्वारा किये गये हमले, लखनऊ में छात्रों की मद के धन को मुख्यमंत्री के स्वागत समारोह में खर्च करने का विरोध कर मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने वाले छात्रों को गिरफ्तार कर जेल भेजने और आज इस सबके विरुध्द लखनऊ में गांधी प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन कर रहे वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं पर संघ समर्थक टोली द्वारा हमले बोलने की कोशिश की कड़े शब्दों में निंदा की है. भाकपा ने मंदसौर में पुलिस की गोली से शहीद हुए किसानों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की है.
एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि भाजपा की केन्द्र और राज्य सरकारें कारपोरेट घरानों के हित पूरे करने में इस कदर जुटी हैं कि आम जनता का देवाला ही निकल चुका है. किसान कर्ज में डूब चुके हैं, मजदूरों और दस्तकारों से रोजगार छिन चुके हैं, नौजवानों को रोजगार से वंचित कर दिया गया है. सभी पीड़ित तबके अपने हक़ माँगने के लिए सडकों पर उतर रहे हैं और भाजपा सरकारें उन पर दमन चक्र चला रही हैं. अपराधों की बाढ़ से आम लोग त्राहि त्राहि कर उठे हैं.
उत्तर प्रदेश सहित देश के उन सभी राज्यों में जहां भाजपा की सरकारें हैं वहां दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, किसानों, मजदूरों, युवाओं और छात्रों को सीधे निशाना बनाया जा रहा है. एक तरफ सरकार और प्रशासन लाठियां गोलियां बरसा रहे हैं वहीं दूसरी ओर हिन्दू युवा वाहिनी, बजरंगदल और आर.एस.एस. से जुड़े संगठन शारीरिक हमले बोल रहे हैं. भाजपा और संघ परिवार आक्रोश और विसंगति की हर आवाज को दबा रहे हैं. संविधान प्रदत्त बोलने की स्वंत्रता व विचारों की आजादी पर तीखे हमले किये जारहे हैं. यह लोकतंत्र के लिये घातक है. संघ परिवार के प्रभुत्ववाद पर लगाम लगाया जाना जरूरी होगया है. सभी लोकतांत्रिक ताकतों को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिये.
भाकपा हर दबे कुचले के साथ खड़ी है. वह किसानों, कामगारों, युवा- छात्रों, दलितों अल्पसंख्यकों के हक़ की हर लड़ाई का साथ देगी. भाकपा ने जनता के हितों की लड़ाई में उसके साथ कंधे से कंधा मिला कर चलने का निश्चय किया है और 12 जून को सभी वामपंथी दलों के साथ मिल कर समूचे उत्तर प्रदेश में दमन विरोधी दिवस मनाने का पहले ही निर्णय ले लिया है.

डा. गिरीश, राज्य सचिव


भाकपा, उत्तर प्रदेश 

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शुक्रवार, 2 जून 2017

Left in U.P. decided to Protest on !2th June on Law and Order

वामपंथी दलों ने सहारनपुर में प्रवेश पर रोक की निंदा की 5 जून को महामहिम राज्यपाल से मिलने का निश्चय 12 जून को जिला मुख्यालयों पर संयुक्त प्रदर्शनों का निर्णय लखनऊ- 2 जून 2017, प्रदेश के वामपंथी दलों ने राज्य सरकार और सहारनपुर जिला प्रशासन द्वारा जनपद सहारनपुर में विपक्षी दलों के प्रवेश पर लगायी पाबंदी पर घोर आपत्ति जताई है. इस तरह की कार्यवाहियों को घोर तानाशाहीपूर्ण और अलोकतांत्रिक बताते हुये इसे तत्काल बंद करने की मांग की है. सहारनपुर हिंसा और प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर वाम दलों ने महामहिम राज्यपाल जी से मिलने और ज्ञापन देने हेतु 5 जून का समय मांगा है और 12 जून को जिला मुख्यालयों संयुक्त प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. यहाँ संपन्न वामपंथी दलों की बैठक में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश था कि सहारनपुर में हुयी हिंसा का जायजा लेने को वहाँ आज पहुंचने वाली वामपंथी दलों के नेताओं की टीम के सहारनपुर प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गयी. इतना ही नहीं स्थानीय कार्यकर्ताओं को धमकाया गया कि न तो किसी को सहारनपुर में घुसने दिया जायेगा, न किसी से मिलने दिया जायेगा और न प्रेस वार्ता होने दी जायेगी. वामदलों ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है. बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि भाजपा के 75 दिन के शासन में उत्तर प्रदेश सुलग रहा है. दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और अन्य कमजोर वर्गों पर अत्याचार की सारी हदें पार होगयीं हैं. सांप्रदायिक, सामंती और सरकार संरक्षित तत्व दंगे- फसाद करा रहे हैं, महिलाओं के साथ बदसलूकी और उनकी हत्यायें हो रही हैं. व्यापारियों को लूटा जा रहा है, कत्ल, राहजनी और आगजनी की वारदतों ने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं. सहारनपुर की आग अभी शांत नहीं हुयी थी कि जेवर में चार महिलाओं के साथ हथियारों की नोंक पर सामूहिक बलात्कार, उसी परिवार के एक व्यक्ति की हत्या और लूट ने हर नागरिक को अंदर तक हिला दिया है. दंगे और कमजोरों पर हमले भाजपा और उसके संगठनों की अगुवाई में होरहे हैं. यहाँ तक कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों तक पर हमले किये जारहे हैं और उन्हें दबाव में लेकर अपनी करतूतों पर पर्दा डालने और अन्य पर अनुचित कार्यवाही करने को मजबूर किया जारहा है. कानून के राज की जगह गुंडाराज ने ले ली है और कानून- व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है. बड़े पैमाने पर पुलिस- प्रशासन के अधिकारियों के तबादलों के बावजूद स्थिति में कोई फर्क नहीं पड़ा है. आये दिन मुख्यमंत्री जी द्वारा दी जारही चेतावनियों का कोई असर नहीं होरहा क्योंकि कानून की धज्जियां बिखेरने वाले अधिकांश तत्व भाजपा के हैं अथवा उन्हें भाजपा का सरंक्षण हासिल है. सरकार अपराधों पर रोक लगाने से ज्यादा अपने परंपरागत विभाजनकारी कदमों को आगे बढ़ाने और विपक्ष पर हमला बोलने में व्यस्त है. जनता की उसे कोई परवाह नहीं है. नोटबंदी, मीटबंदी, खननबंदी और भर्तियों और भर्ती परीक्षा के परिणामों पर रोक ने बेरोजगारी का बड़ा पहाड़ खड़ा कर दिया है. किसानों के कर्जमाफी की घोषणा के क्रियान्वित न होने के कारण किसानों की आत्म हत्यायों का सिलसिला थम के नहीं देरहा. आलू प्याज आदि जैसी चीजों के मूल्यों में गिरावट ने उन्हें तवाह करके रख दिया है. इधर भाजपा की केंद्र सरकार द्वारा पशुओं की खरीद- फरोक्त पर रोक लगाने वाली अधिसूचना ने किसानों, मीट के छोटे कारोबारियों और गैर शाकाहारी लोगों पर बड़ा प्रहार किया है. केंद्र सरकार क्या खाया जाय, क्या पढा जाये और क्या खरीदा बेचा जाये जैसे तानाशाहीपूर्ण फैसले जनता पर थोप रही है और चुनावों में किये गये वायदों से दूर भाग रही है. तीन महीने भी अभी सरकार ने पूरे नहीं किये हैं और आम जनता में हा हाकार मचा हुआ है. अतएव वामपंथी दलों ने महामहिम राज्यपाल महोदय से मिल कर स्थिति से उन्हें अवगत कराने का निश्चय किया है. इसके अलावा सहारनपुर की घटनाओं की न्यायिक जांच कराने, दलितों अल्पसंख्यकों महिलाओं और अन्य कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोके जाने, सांप्रदायिक जातिवादी और अपराधिक तत्वों को जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाने, दंगाराज नहीं, कानून का राज स्थापित किये जाने, जनतांत्रिक कार्यवहियों को सीमित करने की कोशिशों को रोके जाने, किसानों को बदहाली से उबारे जाने तथा पशुओं की खरीद- फरोक्त संबंधी केंद्र सरकार की अधिसूचना को रद्द किये जाने आदि सवालों पर 12 जून को जिला मुख्यालयों पर संयुक्त रुप से धरने अथवा प्रदर्शन किये जाने का निर्णय भी बैठक में लिया गया है. बैठक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी( मा.) के सचिव का. हीरा लाल यादव, सीपीआई- एमएल के राज्य सचिव का. सुधाकर यादव, फारबर्ड ब्लाक के राज्य सचिव एसएन सिन्ह चौहान तथा एसयूसीआई-सी के सचिव जगन्नाथ वर्मा व अन्य शामिल थे. डा. गिरीश
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बुधवार, 31 मई 2017

Delegation of Left Parties will reach Saharanpur on June 2. 2017

2 जून को सहारनपुर पहुंचेगा वामपंथी दलों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल लखनऊ- उत्तर प्रदेश के 6 वामपंथी दलों का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल वहां कई दौरों में हुयी हिंसा के पीढ़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने, उनकी पीढ़ा से रुबरु होने और स्थिति का जमीनी स्तर पर जायजा लेने को दिनांक- 2 जून को सहारनपुर पहुंच रहा है. पहले दौर की हिंसा की घटनाओं के बाद भी वामदलों के प्रतिनिधि अलग अलग वहाँ पहुंचे थे और महामहिम राष्ट्रपति तक को वहाँ की भयावह स्थिति से अवगत कराया था. लेकिन उसके बाद वहाँ कई घटनाक्रम घटित हुये हैं और वामपंथी दलों ने वहाँ संयुक्त रुप से पहुंचने का निश्चय किया है. कार्यक्रमानुसार वामपंथी नेता वहाँ पीढ़ितों से मिलेंगे, जनपद के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से भेंट करेंगे और पत्रकारों से वार्ता करेंगे. वामपंथी दलों के इस प्रतिनिधिमंडल में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी( मा.) के राज्य सचिव का. हीरालाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव का. सुधाकर यादव, फारबर्ड ब्लाक के राज्य सचिव का. एस. एन. सिंह चौहान और एसयूसीआई-सी के सचिव का. जगन्नाथ वर्मा प्रमुख रुप से शामिल रहेंगे. डा. गिरीश
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मंगलवार, 30 मई 2017

CPI on BABARI Issue

बाबरी विध्वंस मामला- भाकपा ने किया अदालत के फैसले का स्वागत: उमा को हठाया जाये लखनऊ- माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद दोबारा शुरु हुये बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में श्री लालकृष्ण आड्वाणी, श्री मुरली मनोहर जोशी, सुश्री उमा भारती सहित 12 के खिलाफ सीबीआई अदालत द्वारा आज अभियोग आरोपित करने की घटना एक ऐतिहासिक घटना है और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल इसका तहेदिल से स्वागत करती है. एक ऐसे दौर में जब सताधारी गिरोह ने तमाम संवैधानिक संस्थाओं को रौंदने का काम शुरु कर दिया है अदालत का यह फैसला न्याय और लोकतंत्र के प्रति हमारे विश्वास को मजबूत करता है. यह भाईचारे और एकदूसरे पर विश्वास की भावना जो कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिये बेहद आवश्यक है को मजबूत करता है. संरक्षित ढांचे को ध्वस्त करने, राष्ट्रीय एकता को क्षति पहुंचाने और सांप्रदायिक दंगे भड़्काने आदि आरोपों को अदालत द्वारा स्वीकार करने के बाद कई सवाल खड़े होगये हैं. पहला- क्या दिन रात कथित रुप से रामकाज में जुटी होने का दावा करने वाली सुश्री उमा भारती नैतिकता का परिचय देते हुये केंद्रीय मंत्रिमंडल से स्तीफा देंगी? दूसरा- यदि नहीं तो शुचिता, नैतिकता और औरों से अलग पार्टी होने का प्रपोगंडा करने वाली भाजपा और उसके प्रधानमंत्री उनसे स्तीफा लेंगे और तीसरा- अपने प्रभाव और षडयंत्रों के बल पर संविधान के साथ धोखाधड़ी कर मंत्रिमंडलों में शामिल रहने वाले श्री आडवानी, श्री जोशी, सुश्री उमा भारती आदि के बारे में सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान लेते हुये एक और अदालती कार्यवाही का निर्देश देगा? भाकपा की राय है कि यह मामला सामान्य नहीं है, बेहद विशिष्ट है. क्योंकि इसमें शामिल लोग अति विशिष्ट हैं और उनसे ज्यादा जिम्मेदाराना व्यवहार की अपेक्षा की जाती है. अतएव उन्हें सामान्य व्यक्तियों की तरह लाभ नहीं दिया जाना चाहिये. भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि आज भी भाजपा के नेता और प्रवक्ता बयान दे रहे हैं कि उन्होने सीबीआई को औरों की तरह बंधक नहीं बनाया है. यदि इसमें तनिक भी सच्चाई होती तो मामले में 25 साल की देरी न होती. लेकिन सच तो यह है कि यह कार्यवाही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद होरही है. अब मामले में सीबीआई को सबूत दाखिल करने हैं और आने वाले दिनों में यह साबित हो जायेगा कि सीबीआई अपनी जिम्मेदारी निष्पक्षता से निभाती है अथवा केंद्र सरकार के प्रभाव में आजाती है. भाकपा ने सुश्री उमा भारती को मंत्रिमंडल से तत्काल हठाये जाने की मांग करते हुये सभी न्यायप्रिय संस्थाओं और व्यक्तियों से उपर्युक्त तीन बिंदुओं पर आवाज उठाने की जरुरत पर बल दिया है. डा.गिरीश
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गुरुवार, 25 मई 2017

जल रहा है उत्तर प्रदेश: योगीजी को केंद्र में बुलाये भाजपा

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उत्तर प्रदेश के बिगड़ते हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. पार्टी ने दृढता के साथ कहा कि इन खौफनाक कारनामों में अधिकतर के पीछे शासक दल के लोग हैं. जब तक शासक दल संरक्षित गिरोहों पर रोक नहीं लगाई जायेगी प्रदेश के हालात सुधर नहीं सकते. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि कल जेबर के पास यमुना एक्सप्रेस वे पर एक परिवार के वाहन को रोक कर महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार, ह्त्या और लूट की घटना ने हर नागरिक को झकझोर कर रख दिया है. यह घटना राज्य सरकार के माथे पर गहरा कलंक है. घटना की जितनी निंदा की जाए कम है. असली अपराधियों को तत्काल पकडे जाने, दोषी पुलिसजनो को सजा दिए जाने और पीड़ित परिवार की फ़ौरन मदद किये जाने की जरूरत है. भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि सूबे के मुखमंत्री आये दिन दरोगा की तरह धमकियां दे रहे हैं. लेकिन उन्हीं की पार्टी के सांसद, विधायक और कार्यकर्ता अराजकता फैला रहे हैं. सहारनपुर आज भी सुलग रहा है. संभल, मुरादाबाद, मेरठ, बुलंदशहर, मथुरा, अलीगढ़, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, कानपुर, पीलीभीत, लखनऊ, शाहजहांपुर में बढी बढी वारदातें होरही हैं. सांप्रदायिक, सामंती तत्व और पेशेवर गुंडे खुल कर अराजकता फैला रहे हैं. दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, अन्य कमजोरों और यहाँ तक कि व्यापारियों को निशाना बनाया जारहा है. आदमी न तो घर में सुरक्षित है न घर के बाहर. डा. गिरीश ने कहा कि सवा दो माह की इन ताबड़तोड़ वारदातों से जाहिर है कि श्री योगी जी से प्रदेश संभल नहीं रहा. उनकी और भाजपा की चिंता में प्रदेश के हालात सुधारना कम भाजपा के बिगड़ते हालातों को सुधारना और शिक्षा, शासन और प्रशासन में संघ के एजेंडे को घुसाना ज्यादा है. अपनी नाकामियों पर संजीदा होने के बजाय वे विपक्ष पर हमले बोल रहे हैं. तवाही उत्तर प्रदेश की जनता झेल रही है. यदि योगीजी भाजपा के लिए अनमोल रतन हैं तो मोदीजी - अमित शाह को उन्हें केन्द्र में बुला कर बड़ी से बड़ी जिम्मेदारी सौंपनी चाहिये. उसी के लिए कि उत्तर प्रदेश की जनता ने उन्हें सांसद बनाया भी था. पर अब उत्तर प्रदेश की जनता पर मेहरवानी करें मोदी जी, अमित शाह जी, भाकपा राज्य सचिव ने कहा है. डा. गिरीश
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सोमवार, 22 मई 2017

CPI on Munispal elections

समय पर कराये जायें निकाय चुनाव: भाकपा लखनऊ- 22 मई 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनाव निर्धारित समय पर कराये जाने की मांग की है. यहां जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि सूबे के मुख्यमंत्री और राज्य निर्वाचन आयोग के अलग अलग बयानों से साफ होगया है कि प्रदेश के निकाय चुनावों को हठाने की साजिश चल रही है. मुख्यमंत्री वोटरलिस्ट की गड़्बड़ियों को दुरुस्त करने ओर ओबीसी सर्वे को पुन: कराने का बहाना ले रहे हैं तो राज्य निर्वाचन आयोग खराब कानून- व्यवस्था का सहारा ले रहा है. लेकिन इन दोनों बातों की जिम्मेदार तो राज्य सरकार ही है. भाकपा ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के तीन साल और योगी सरकार के दो माह के कार्यकाल की कलई खुल चुकी है. भाजपा यह जान चुकी है कि जिस छल से उसने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बहुमत हथिया लिया अब वह दोबारा चलने वाला नहीं है. इससे बचने को वह वोटरलिस्ट और वार्डों के आरक्षण के आधार को बदलना चाहती है. इसी कृत्य के लिये वह चुनावों को हठा रही है. सर्व सत्ताहरण की भाजपा की यह साजिश लोकतंत्र के लिये खतरनाक है. डा. गिरीश ने कहा कि जब सपा और बसपा की सरकारों ने निकाय चुनावों को टाला था, भाकपा ने तब भी उसका विरोध किया था और आज भी वह इस कार्यवाही की विरोधी है. जिस पार्टी पर ईवीएम में गड़बड़ी करने के आरोप लग रहे हैं, सत्ता में रहते हुये वह क्या मतदाता सूचियों के पुनर्निर्माण और आरक्षण का आधार बदलने से चूक जायेगी? भाकपा ने सवाल किया है. भाकपा ने सभी वामपंथी और जनवादी ताकतों का आह्वान किया है कि वे समय पर निकाय चुनाव कराने और मतदाता सूची और आरक्षण आधार में बदलाव करने की भाजपा सरकार की साजिश को विफल बनाने को आवाज उठायें. डा.गिरीश
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गुरुवार, 18 मई 2017

Two months of Yogi Government in U.P.

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आज दो माह पूरे कर लिये हैं. खुद योगी जी ने दोमाह में सब कुछ ठीक करने के दाबे किये थे. अब वे इसके लिये एक वर्ष का समय मांग रहे हैं. इससे भी बड़ी बात यह है कि वे इन बिगड़े हालातों के लिये विपक्ष पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं. सभी को उम्मीद थी कि नई सरकार आने के बाद प्रदेश के हालात सुधरेंगे, पर इसके ठीक विपरीत वे बद से बदतर होते जा रहे हैं. सामान्यतौर पर यह कानून व्यवस्था की समस्या दिखाई देती है. पर गहराई से देखने पर सब कुछ सुनियोजित सा लगता है. 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के वास्ते बूचड़ खाना बना दिया गया था और बड़े पैमाने पर अल्पसंख्यकों के जानमाल को हानि पहुंचाई गयी थी. पर अब सारे उत्तर प्रदेश को बूचड़ खाना बनाया जारहा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश तो मानो अब भी जल रहा है. उत्तर प्रदेश की आधी आबादी- दलितों, महिलाओं अल्पसंख्यकों और व्यापारियों का बड़ा भाग आज युध्द जैसे हालातों का सामना कर रहा है. उन सबको क्या पता था कि जिनको वोट देकर वे सत्ता सौंपने जारहे हैं वो ही उनके खून के प्यासे बन जायेंगे. जो कल तक हाथ जोड़ कर वोट की गुहार लगा रहे थे, वे ही आज हथियार लेकर हमले कर रहे हैं. पुलिस प्रशासन को अर्दब में लेकर उन्हीं के खिलाफ कार्यवाही करबा रहे हैं. रोजी रोटी छीन रहे हैं, उकसाबे की कार्यवाहियां कर रहे हैं, मार रहे हैं और प्रतिरोध की हर आवाज को हर तरह से कुचल रहे हैं. सत्ता में आते ही योगी सरकार ने मीटबंदी का तुगलकी फरमान जारी कर दिया. लाखों लोग बेरोजगार होगये. यह अल्पसंख्यकों के एक खास तबके पर आर्थिक हमला था, लेकिन इसकी चपेट में पशुपालक किसान, पशु व्यापारी, टैनरी और साबुन जैसे उद्योग भी आये हैं. सरकार ने आदेश पारित कर उन्हें निशाना बनाया तो सरकार समर्थकों ने उन पर शारीरिक हमले किये. कथित गोरक्षकों ने उनकी दुकानों, खोखों में तोड़ फोड़ की, आग लगायी और पशु ले जाते व्यापारियों- किसानों पर कातिलाना हमले किये. कई को जेल के सींखचों के पीछे पहुंचा दिया गया. इसी तरह योगी सरकार ने खनन पर रोक लगा दी. खनन के काले कारोबार में सरकार और सत्ता पक्ष से जुड़े लोग अरबों- खरबों कमाते रहे हैं. भाजपा सरकार इस समूचे काले धंधे को अपने अधीन कर लेना चाहती है. पर इसका नतीजा यह निकला कि बालू, बजरी और गिट्टी- मिट्टी के अभाव में उत्तर प्रदेश का समूचा निर्माण उद्योग ठप होकर रह गया और इस कार्य में लगे लगभग एक करोड़ मजदूर, ठेकेदार और व्यापारी बेरोजगार होगये. एंटी रोमियो अभियान चलाकर युवाओं को निशाना बनाया गया और पुलिस- प्रशासन के अलाबा बजरंग दल ने युवक- युवतियों की ठुकाई की. युवाओं में एक अजीब सा भय व्याप्त है. सहारनपुर, शामली, संभल और मेरठ में आजकल जो कुछ घट रहा है वह बेहद गंभीर है. पहले भाजपा ने वहां दलितों और अल्पसंख्यकों के बीच फूट के बीज बोने की कोशिश की. सहारनपुर के सड़क दूधली गांव में वर्षों पहले विवाद के चलते डा. भीमराव अंबेडकर जयंती के कार्यक्रमों पर रोक लगा दी गयी थी. लेकिन भाजपा के सांसद, विधायकों और स्थानीय नेताओं ने वहां अंबेडकर शोभायात्रा का आयोजन किया. स्थानीय अंबेडकरवादियों ने इस आयोजन से दूरी बना कर रखी. अनुमति न होने के बावजूद सैकड़ो की तादाद में भाजपाई वहां पहुंचे और जानबूझ कर अल्पसंख्यक आबादी से जुलूस निकालने की कोशिश की. पुलिस ने इस अवैध यात्रा को रोकने की कोशिश की तो बौखलाये भाजपाइयों ने अल्पसंखकों की दुकानों- मकानों पर हमले वोले और गाड़ियों को रुकवा कर मुसलमानों को मारा- पीटा. इतना ही नहीं सांसद राघव लखनपाल के नेत्रत्व में भाजपाइयों ने सहारनपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के आवास पर हमला बोल दिया, वहां तोड़ फोड़ की, सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिये . एसएसपी का परिवार और बच्चे दहशत में आगये. वहां भी पुलिस की मौजूदगी में अल्पसंख्यकों को मारा- पीटा गया. घटना के तूल पकड़ने के बावजूद राज्य सरकार ने कानून हाथ में लेने वाले सांसद और उनकी मंडली के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की. उलटे एसएसपी का तबादला कर दिया गया. इसके एक दिन पहले शामली के थाना भवन में बाइक से ट्रक टकरा जाने को लेकर अल्पसंख्यकों पर हमला बोला गया. कई अल्पसंख्यकों ने थाने में घुस कर जान बचाई. अब भाजपा के निशाने पर दलित आगये हैं क्योंकि वे अल्पसंख्यकों के खिलाफ भाजपा के हाथ की कठपुतली नहीं बने. सहारनपुर, बिजनौर और शामली जनपदों का यह धुर पश्चिमी- उत्तरी क्षेत्र एक ओर जहां सांप्रदायिक रुप से संवेदंशील है वहीं दलितों और गैर दलितों के लोगों के बीच वहां लगातार टकराव चलते रहते हैं. सामंती उत्पीड़न का मुकाबला करने को यहाँ के दलितों ने बिजनौर के कामरेड ब्रह्मानंद के नेत्रत्व में 60- 70 के दशक में 'चमार यूनियन' नामक संगठन का गठन भी किया था. गत लोक सभा और विधान सभा चुनावों में यहां अधिकतर सीटों पर भाजपा से दबंग और सामंती लोग विजयी हुये हैं और दबंग जातियों के हौसले सातवें आसमान पर हैं. 5 मई को ठाकुर बिरादरी के लोगों ने समूचे प्रदेश में बड़े पैमाने पर महाराणा प्रताप जयंतियों का आयोजन किया. देवबंद क्षेत्र के बढ़ाकलां शब्बीरपुर गांव में भी प्रताप जयंती का आयोजन किया गया. इस गांव के दलित 14 अप्रेल को रैदास मंदिर में डा. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करना चाहते थे. ठाकुरों ने इसका विरोध किया था. तभी से दलितों और ठाकुरों के बीच तनाव चल रहा था. इस तनाव के बीच जब बिना अनुमति के राणाप्रताप शोभायात्रा निकाली गयी. जब यह यात्रा दलितों की आबादी में पहुंची तो डी. जे. की आवाज को लेकर विवाद हो गया. दोनों तरफ से पथराव शुरु होगया. आस पास के गांवों के दबंग लोग हथियार बंद हो कर आगये. इस बीच ठाकुर बिरादरी के एक युवक की मौत होगयी. चर्चा है कि उसकी मौत सिर में पत्थर लगने से हुयी जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसकी मौत दम घुटने से हुयी. बौखलाये दबंगों ने शब्बीरपुर के दलितों पर हमला बोल दिया. पचास से ज्यादा मकान और दुकानें फूंक दी गयीं. दर्जंनों लोग घायल हुये. पुलिस कर्मियों के वाहन आदि भी जला दिये गये. पुलिस ने दोनों तरफ के लोगों को बराबर का दोषी मानते हुये लगभग डेढ़ दर्जन लोगों को जेल भेज दिया. भयभीत दलित गांव से पलायन कर गये. पुलिस- प्रशासन ने विपक्षी दलों के गांव में घुसने पर पाबंदी लगा रखी है. हालातों का जायजा लेने को पुलिस महानिदेशक और प्रमुख सचिव- ग्रह सहारनपुर पहुंचे, मगर उन्होने घटना स्थल पर पहुंचने से परहेज बरता. इससे दलितों अल्पसंख्यकों का सरकार पर से विश्वास डिगा है. 9 मई को भीम आर्मी एकता मिशन नामक संगठन ने शब्बीरपुर कांड को लेकर रैदास छात्रावास में बैठक बुलाई जिसे पुलिस ने रोक दिया. तब दलित स्थानीय गांधी पार्क में एकत्रित हुये मगर पुलिस ने वहां से भी उन्हे खदेड़ दिया. गुस्साये दलितों ने सहारनपुर नगर को आने वाले तमाम मार्गों पर जाम लगा दिया और पुलिस से मुठभेड़ें कीं. यह हिंदूवादी जातिवादी उत्पीड़न के खिलाफ दलितों का स्वाभाविक प्रस्फोट था. अब सरकार दलितों के खून की प्यासी बन गयी है और 24 लोगों को संगीन दफाओं में गिरफ्तार किया गया है. भीम सेना के पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की कोशिश जारी है. दबंगों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उसने दलितों के खिलाफ कठोर कार्यवाही न की तो वे खुद हथियारबंद कार्यवाही करेंगे. इससे पहले बुलंदशहर जनपद के पहासू थानांतर्गत एक गांव में एक हिंदू युवती के मुस्लिम युवक के साथ चले जाने पर बजरंग दल और हिंदू युवा वाहिनी के लोगों ने गांव पर धाबा बोल दिया और एक अधेड़ मुस्लिम को पीट पीट कर मार डाला. संभल जिले के गुन्नौर थानांतर्गत नदरौली गांव में एक विवाहिता के मुस्लिम युवक के साथ चले जाने पर गांव के मुस्लिमों के ऊपर हमला बोल दिया. उनके मकान जला डाले गये, औरतों के साथ बदसलूकी की गयी और बच्चों तक को निशाना बनाया गया. यह सब कुछ पुलिस की मौजूदगी में हुआ. शासन- प्रशासन पर से लोगों का विश्वास पूरी तरह हठ गया है और इस गांव के लोग आसपास के शहरों को पलायन कर गये हैं. संभल जिला भी बहुत ही संवेदनशील है. यहाँ अप्रेल में भी सांप्रदायिक मुठ्भेड़ हुयी थी. अब यहाँ भी दलित और सामंती टकराव उभर रहा है. दलितों के उत्पीड़न और उनके बाल काटने को स्थानीय नाइयों पर सवर्णों द्वारा लगायी गयी पाबंदी के विरोध में वाल्मीकि समाज के लोगो ने हिंदू देवताओं की मूर्तियों का रामगंगा नदी में विसर्जन किया. बजरंग दल ने उन्हें रोकने की कोशिश की लेकिन दलितों ने उन्हें खदेड़ दिया. दलितों ने चेतावनी दी है कि यदि उनके साथ भेदभाव न रोका गया तो वे धर्म परिवर्तन करेंगे और अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण करेंगे. अलीगढ़ के गांधीपार्क क्षेत्र में कल्लू बघेल नामक व्यक्ति द्वारा अपनी बीमार भेंस बेचने पर कथित गौरक्षकों ने न केवल उसे पीटा बल्कि छह लोगों को जेल भिजवा दिया. भाजपाइयों के इशारों पर नाच रही पुलिस ने कल्लू बघेल को पीटने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की. यू. पी. में दलितों को अपमानित करने के उद्देश्य से जगह जगह अंबेडकर प्रतिमायें तोड़ी जारही हैं. दलित इस पर प्रतिरोध दर्ज करा रहे हैं. जहाँ दलितों और सामंती तत्वों के बीच भूमि विवाद चल रहे हैं वहां उन जमीनों को दलितों से हड़पने की कोशिशें की जारही हैं. जगह जगह सांप्रदायिक वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है. बजरंग दल, हिंदू युवा वाहिनी, प्रताप सेना जैसे संगठन निर्भीक होकर आपराधिक और सांप्रदायिक घटनाओं को अंजाम देरहे हैं. प्रेम प्रसंग के मामलों में पहले भी उत्पीड़न की बारदातें होती थीं लेकिन इन दो माहों में परिवारीजनों द्वारा कानून हाथ में लेकर कई युगलों को मौत के घाट उतार दिया. बलात्कार और बलात्कार के बाद हत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. राजधानी लखनऊ तक में ऐसी दर्जन भर घटनायें होचुकी हैं. अब आईएएस अधिकारी के वीआईपी गेस्ट हाउस में हुये कत्ल ने सरकार की अकर्मण्यता की कलई खोल कर रख दी है. मथुरा में सर्राफा व्यापारियों की लूट के उद्देश्य से की गयी हत्याओं के अलावा कत्ल, लूट और लूट के साथ हत्या की तमाम बारदातें निर्बाध रुप से जारी हैं. अकेले ब्रज क्षेत्र में कल तक 104 लूट और 76 हत्याओं की घटनायें अंजाम दी जाचुकी हैं. आगरा में 21 लूट, 13 हत्या, फीरोजाबाद में 11 लूट 6 हत्यायें, कासगंज में 10 लूट, 11 हत्यायें, मैनपुरी में 14 लूट, 8 हत्यायें, मथुरा में 17 लूट और 9 हत्यायें, एटा में 8 लूट और 10 हत्यायें, अलीगढ़ में 12 लूट, 10 हत्यायें जबकि हाथरस में 10 लूट और 9 हत्यायें होचुकी हैं. अन्य अपराधों के आंकड़े भी कम नहीं हैं. समूचे उत्तर प्रदेश के आंकड़ों का अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है. यही वजह है कि मुख्यमंत्रीजी अपराधों के आंकड़े देने से कतरा रहे हैं. इसके अलाबा इस अवधि में अल्पसंख्यकों के आस्थास्थलों पर 220 हमले हुये हैं जबकि 180 छोटी- बड़ी सांप्रदायिक वारदातों को अंजाम दिया जा चुका है. जगह जगह भाजपा के नेता पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों तक पर हमले कर रहे हैं. योगीजी की कथित चेतावनियों का उन पर कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है. जिस कानून व्यवस्था की बदहाली के नाम पर पिछली सरकार को मतदाताओं ने 'गुड बाय' कह दिया था योगी सरकार उससे भी बुरी साबित हो रही है. अपने राजनैतिक उद्देश्यों के लिये सांप्रदायिक तत्वों और दबंगों को खुली छूट दिये हुये हैं. अपनी इन बदनीयत कारगुजारियों से ध्यान हठाने को भाजपा, आरएसएस और स्वयं योगी आदित्य नाथ सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेंडे को हवा दे रहे हैं. पर शासन में रहते हुये उनकी यह कारगुजारी उनके इरादों को परवान चढ़ाने में सहायक होगी या आपात्काल की तरह उनकी पराजय का कारण बनेगी, अभी देखना बाकी है. डा. गिरीश
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CPI on Law and Order in U.P.

भाकपा ने प्रदेश में बढते अपराधों पर गहरी चिंता जताई व्यापारिक संगठनों के आंदोलन को समर्थन प्रदान किया लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने पिछले दो माहों में उत्तर प्रदेश में आई अपराधों और अत्याचारों की आंधी पर गहरी चिंता व्यक्त की है. पार्टी ने सरकार से प्रदेशवासियों को अपराध और अत्याचारों से मुक्ति दिलाने की मांग की है. भाकपा ने अपराधों के खिलाफ कल व्यापारिक संगठनों द्वारा किये जाने वाले विरोध प्रदर्शन को समर्थन प्रदान किया है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश जल रहा है और मुख्यमंत्री अपराधों और अत्याचारों की बाढ़ से अपना पल्ला झाड़ कर विपक्ष पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं. यह मुख्यमंत्री के पद की गरिमा के अनुकूल नहीं है. सच तो यह है कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद सारे शातिर अपराधी और गुन्डे मवालियों को भाजपा में भर्ती कर लिया गया है. और वे दिन में पीला दुपट्टा ओड़ कर पुलिस प्रशासन के अधिकारियों पर रौब गांठते हैं और दिन छिपते ही जघन्य वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. यही वजह है कि प्रदेश में हत्या, लूट, वाहन लूट, लूट के लिये हत्या, बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, बलात्कार के बाद हत्या, दलितों अल्पसंख्यकों और सभी शांतिप्रिय नागरिकों पर अत्याचारों की बाढ सी आगयी है और प्रदेश की कानून व्यवस्था चौपट होगयी है. नोट बंदी, मीट बंदी और खनन और भर्तियों पर लगी रोक ने बेरोजगारी में अचानक इजाफा कर दिया है, और सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है. भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा अर्दब में लिये गये अधिकारी संभवत: अपने विवेक का स्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. मुख्यमंत्री पहले कानून- व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये दो माह का समय मांग रहे थे, अब दो माह पूरे होजाने पर एक साल का समय मांगने लगे. 'आपकी नीतियां और कारगुजारियां यदि वैसी ही रहीं जैसी अब तक हैं, तो योगीजी आप एक साल तो क्या पांच सालों में भी कुछ नहीं कर पाओगे', भाकपा राज्य सचिव ने आगाह किया है. भाकपा राज्य सचिव मंडल ने पार्टी की सभी जिला इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे अपराधों के खिलाफ कल दि. 19 मई को होने वाले व्यापारिक संगठनों के आंदोलन को नैतिक और भौतिक समर्थन प्रदान करें. डा. गिरीश
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बुधवार, 10 मई 2017

CPI On Saharanpur

सहारनपुर की स्थिति को शीघ्र काबू में करे राज्य सरकार: भाकपा लखनऊ- 10 मई 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आरोप लगाया है कि कल की सहारनपुर की घटनायें भाजपा की मात्र डेढ माह पुरानी सरकार की राजनैतिक और प्रशासनिक विफलता का परिणाम हैं. पिछले तीन सप्ताह में इस जनपद में हिंसा और आगजनी की ये तीसरी बड़ी वारदात है. यद्यपि इन घटनाओं के लिये शासन- प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है लेकिन जिन लोगों ने गुस्से में आकर कानून हाथ में लिया और जन और धन को निशाना बनाया वह निंदनीय है. एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि इस क्षेत्र के दलित और अल्पसंख्यक इन दिनों लगातार सामंती और सरकार के आक्रमणों को झेल रहे हैं. 5 मई को हुये उपद्रव में यद्यपि एक क्षत्रिय युवक की दुखद मौत होगयी थी लेकिन शब्बीरपुर और उसके आसपास के गांवों में बड़े पैमाने पर दलितों के ठौर- मकान फूंक डाले गये थे. इस मुद्दे पर विचार करने हेतु दलित रविदास छात्रावास में बैठक करना चाहते थे जिसको रोक दिया गया. पुन: उन्होने गांधीपार्क में बैठक बुलाई और उन्हें वहां से भी खदेड़ दिया गया. भाकपा की यह द्रढ़ राय है कि यदि रविदास छात्रावास में हो रही बैठक को होने दिया गया होता तो मामला सड़कों पर न आता. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि तीन सप्ताह से सुलग रहे सहारनपुर और उसके आसपास के क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षाबल तैनात नहीं किये गये. आस पास के जिलों की फोर्स मुख्यमंत्री जी की सुरक्षा हेतु मेरठ भेज दी गयी थी. डा. गिरीश ने कहाकि भाजपा ने कई हथकंडे अपना कर गत विधानसभा चुनावों में दलितों के वोट तो हथिया लिये मगर अब सत्ता पर काबिज होने के बाद वह असली रुप में आगयी है. सरकार, शासन- प्रशासन सभी में सामंती तत्वों का जमाबड़ा है अतएव समूचे प्रदेश में कमजोर तबकों पर चहुंतरफा हमले बोले जारहे हैं. किसी को रोमियो बता कर मारा जा रहा है तो किसी को शराब का विरोध करने पर पीटा जारहा है. बजरंगदल और हिंदू युवा वाहिनी के मुस्तंड एक ओर आमजनों पर हमले बोल रहे हैं और जहाँ तहां पुलिस को भी निशाना बना रहे हैं. नोटबंदी, मीटबंदी, खननबंदी जैसी कार्यवाहियों से लोगों के रोजगार छिन गये हैं और उनके जीवनयापन की समस्या खड़ी होगयी है. प्रताडित और प्रभावित लोगों से सरकार ने पूरी तरह से संवाद बंद कर रखा है और हर तबके से लाठी डंडे से निपट रही है. यहाँ तक कि पीड़ित लोगों से विपक्षी दलों के मिलने पर पाबंदी लगा दी है. राजनैतिक- सामाजिक प्रयासों के अभाव में स्थिति दिन ब दिन बद से बदतर होती जारही है. समूचा उत्तर प्रदेश सुलग रहा है. सतापक्ष ही कानून व्यवस्था के लिये चुनौती खड़ा कर रहा है. आज भी सहारनपुर में दलितों को निजी हथियारों के बल पर सबक सिखाने की चुनौती कुछ लोग खुले आम देरहे हैं. भाकपा ने सरकार से आग्रह किया कि वह स्थिति से निपटने के लिये संतुलित और न्यायोचित कदम फौरन उठाये. विपक्षी दलों के जनता से संवाद पर लगी रोक को हठाये. जन और धन की हानि का मुआबजा दे. बजरंग दल और हिंदू युवा वाहिनी जैसे संगठनों की गुंडागर्दी को रोके. भाकपा ने चेतावनी दी है कि पूर्वाग्रहों के आधार पर और बदले की भावना से की गयी किसी भी कार्यवाही का भाकपा पुरजोर विरोध करेगी. डा. गिरीश
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