भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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रविवार, 17 फ़रवरी 2019

CPI and CPI-M codemned Pulvama terrorist attack


पुलवामा की आतंकी कार्यवाही पर कम्युनिस्ट पार्टियों ने गहरा क्षोभ व्यक्त किया

आगामी तीन दिनों तक प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन करेंगी वामपंथी पार्टियां


लखनऊ- 17 फरबरी 2019, पुलवामा में हुये आतंकवादी हमलों से उत्पन्न स्थिति पर विचार करने को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी( मार्क्सवादी ) की एक संयुक्त बैठक आज यहाँ भाकपा के राज्य कार्यालय पर संपन्न हुयी।
बैठक में पुलवामा में शहीद हुये सुरक्षाबलों की शहादत पर गहरा रोष प्रकट किया गया। साथियों ने दो मिनट का मौन रख कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही शहीदों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाओं का इजहार किया।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश एवं माकपा के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव ने आतंकवादियों की इस कायराना हरकत की कड़े शब्दों में निन्दा की तथा कहाकि आतंक की राजनीति देश में गहरी जड़ें जमा चुकी है और इससे निपटने को राजनेतिक और सख्त प्रशासनिक कदम उठाने होंगे। जजवाती बयानबाजी और युद्धोन्माद फैलाने से समस्या का हल संभव नहीं है।
दोनों कम्युनिस्ट नेताओं ने कहाकि पिछले कई माह से तमाम खुफिया एजेंसियां आतंकी हमले की सूचनाएँ देरही थीं और पाकिस्तान के मीडिया में आतंकवादियों की हमले की धमकियां प्रकाशित होरही थीं फिर भी इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक लिए आतंकवादी टहलते रहे और इतना बड़ा और घ्रणित  कांड कर डाला। यह सरकार के स्तर पर बड़ी चूक है जिसको जम्मू कश्मीर के राज्यपाल ने स्वीकारा भी है।
लेकिन देश का मगरूर नेत्रत्व तब भी चुनावी वैतरणी पार करने की कवायद में जुटा था और आज भी अपनी संकीर्ण राजनैतिक कुचेष्टाओं से बाज नहीं आरहा। यहाँ तक कि पाकिस्तान विरोध के नाम पर अल्पसंख्यकों को डराने धमकाने के निंदनीय प्रयास भी किए जारहे हैं। संतोष की बात है कि देश की जनता ने आतंकवाद के विरुद्ध जबर्दस्त एकजुटता प्रदर्शित की है वहीं शांति और भाईचारा बिगाड़ने वालों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि आतंक की इस घ्रणित कार्यवाही का पुरजोर विरोध किया जाये और आतंकवाद के खिलाफ सख्त तार्किक कार्यवाही की मांग की जाये। निर्णयानुसार भाकपा और माकपा के कार्यकर्ता आगामी तीन दिनों तक जिलो जिलों में इस घटना के विरुद्ध अन्य वामदलों के साथ मिल कर विरोध प्रदर्शन करेंगे। साथ ही आम जनता से शान्ति और भाईचारा बनाये रखने की अपील करेंगे। विरोध प्रदर्शन में धरना/ प्रदर्शन/ आतंकवाद का पुतला दहन/ केंडिल मार्च आदि शामिल हैं।
भाकपा एवं माकपा नेत्रत्व ने सभी वामपंथी लोकतान्त्रिक शक्तियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा ,  उत्तर प्रदेश


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बुधवार, 13 फ़रवरी 2019

इलाहाबाद और अलीगढ़ की घटनाओं से भाजपा की बदहवासी उजागर : भाकपा




लखनऊ- एक ओर भाजपा सरकार एक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को छात्रों के आयोजन में भाग लेने हेतु इलाहाबाद जाने से रोकने का घोर अलोकतांत्रिक कदम उठाती है वहीं दूसरी ओर प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी- ए॰ एम॰ यू॰ पर हमला बोलने के लिए अपनी अराजक फौज भेज कर दंगा भड़काने की साजिश रचती है। दोनों ही घटनाएँ बेहद आपत्तिजनक हैं जिनकी सभी लोकतान्त्रिक शक्तियों को निंदा करनी चाहिए।
इतना ही नहीं कल की घटनाओं से बौखलाये संघ गिरोह ने अलीगढ़ और उसके बहाने देश के अन्य भागों में सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ाने के उद्देश्य से एएमयू में मन्दिर बनाने हेतु कार सेवा करने का ऐलान कर दिया और दंगाइयों की भीड़ को आज एएमयू की ओर कूच करा दिया। यदि पुलिस ने उन्हें रोका न होता तो कुछ भी अनहोनी होसकती थी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने यहाँ जारी एक प्रेस बयान में कहाकि  ये घटनायें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि अपना जनाधार खिसकने से भाजपा बेहद परेशान है और 2019 में वोट हासिल करने को सांप्रदायिक लपटें पैदा करने पर आमादा है। लेकिन संतोष की बात यह है कि अब आम जनता उनके हथकंडों को भलीभाँति समझ गयी है और उन्हें हर बार मुंह की खानी पड़ रही है।
डा॰ गिरीश ने कहाकि जो लोग एएमयू में मुस्लिम फ्रंट बनाए के नाम पर मीटिंग कर रहे थे उनका उद्देश्य भाजपा के हाथ में एक मुद्दा देना था। भाकपा उसकी भी आलोचना करती है। हर दिन एएमयू को लक्ष्य बनाकर कुछ न कुछ उत्पात मचाने वाली भाजपा को उन्होने फिर से एक मुद्दा थमा ही दिया। अब कल की मारपीट में शामिल एएमयू छात्रों पर देशद्रोह के आरोप मढ़ने की साजिश रची  जारही है, परन्तु देशद्रोह का आरोप अगर किसी पर बनता है तो उन संघियों पर बनता है जो कल एएमयू पर हमला बोलने पहुंचे थे।
डा॰ गिरीश ने सवाल कियाकि जब इलाहाबाद में धर्म संसद के नाम पर एकत्रित दंगाइयों की भीड़ से कुंभ की फिजा नहीं बिगड़ी तो एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय में एक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के जाने से क्या आसमान टूट पड़ता? उन्होने यह भी सवाल उठाया है कि जब भाजपा आज तक अयोध्या में मन्दिर का निर्माण नहीं करा सकी तो उसके द्वारा एएमयू में मन्दिर निर्माण का शिगूफ़ा उछालना एक विध्वंसकारी षडयंत्र नहीं तो क्या है? सच तो यह है कि मोदी और योगी की सरकारें हर तरह से बेनकाब होगयीं हैं और अब वे तानाशाही, दादागीरी और सांप्रदायिकता के बल पर ही चुनावी लक्ष्य हासिल करना चाहती हैं।
भाकपा ने सभी वामपंथी एवं जनवादी शक्तियों का आह्वान कियाकि वे भाजपा की इन फासिस्टी कारगुजारियों का माकूल जबाव दें।

डा॰ गिरीश

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शनिवार, 9 फ़रवरी 2019

उत्तर प्रदेश-- जहरीली शराब से मौतों के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार : भाकपा ने मुख्यमंत्री से की स्तीफ़े की मांग




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब से होरही मौतों पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है। भाकपा ने इन मौतों के लिये प्रदेश मुख्यमंत्री को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया है और उनसे त्यागपत्र की मांग की है।  
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाया कि उनकी प्राथमिकता में उत्तर प्रदेश में सरकार चलाना नहीं अपितु लोगों को गुमराह करना और विपक्ष पर हमले बोलना है। प्रदेश के शासन पर ध्यान देने के बजाय वे राम कुंभ गाय गंगा नामों की बदली जैसे भ्रामक मुद्दों पर ही सारी ऊर्जा खपाये रहते हैं। यही वजह है कि यूपी की कानून व्यवस्था तार तार होचुकी है और अब मौत की शराब से प्रदेश में लगभग 100 लोगों की मौत होचुकी है और अन्य कई मौत के आगोश में सिमटते जारहे हैं।
भाकपा राज्य सचिव ने आरोप लगाया कि संवेदनहीन सरकार और उसका प्रशासन मौतों का आंकड़ा कम करके दिखाने को शवों के पोस्टमार्टम न करके उन्हें स्वाभाविक मौतें बता कर टरका रहा है। कइयों को सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं मिली और उन्होने निजी अस्पतालो में दम तोड़ दिया तथा परिजनों ने उनका अंतिम संस्कार कर दिया। इस तरह के सारे म्रतकों का आंकड़ा जुटाया जाये तो और अधिक पहुंचेगा।
डा॰ गिरीश ने कहाकि योगी के सत्ता संभालने के बाद यह तीसरा बड़ा हादसा है जिसमें जहरीली शराब से बड़े पैमाने पर मौतें हुयीं हैं। गत माहों में जब ऐसा ही हादसा हुआ था तो मैंने स्वयं सरकार को आगाह किया था कि उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में अवैध शराब का धंधा बड़े पैमाने पर चल रहा है। मैंने यह भी खुलासा किया था कि शराब माफिया ने अब सत्ताधारी दल में पैठ बना ली है और सत्ताधारी दल के लोग इस धंधे से बड़े पैमाने पर अवैध कमाई कर मालामाल होरहे हैं। लेकिन योगी सरकार ने तब मामले को गंभीरता से लेने के बजाय म्रतको के परिजनों को कुछ मुआबजा देकर और छोटे अपराधियों पर चलताऊ कार्यवाही करके कर्तव्य की इतिश्री कर दी थी। यदि उसी समय कठोर कार्यवाही की गयी होती तो आज इतना बड़ा हादसा न होता।
भाकपा ने कहाकि योगी सरकार इन मौतों के लिये सीधे तौर पर जिम्मेदार है। लोगों की सामूहिक मौतों के लिये जिम्मेदार योगी को इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए और अपने पद से स्तीफ़ा देकर हिमालय में जाकर प्रायश्चित करना चाहिये। भाकपा ने हर म्रतक के परिवार को रु॰ 25 लाख का मुआबजा और शराब पीड़ितों को इलाज के लिये रु॰ 5 लाख की धनराशि फौरन प्रदान करनी चाहिये।

डा॰ गिरीश

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शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

ओलों से हुयी फसलहानि की तत्काल भरपाई करे सरकार : भाकपा




लखनऊ- 8 फरबरी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने गत रात उत्तर प्रदेश के विभिन्न भागों में हुयी भारी ओला व्रष्टि से फसलों की तवाही पर गहरी चिन्ता व्यक्त की है। पार्टी ने सरकार से फसल हानि की त्वरित रूप से भरपाई की मांग की है। पार्टी ने इस बात पर अफसोस जताया कि गत पखबाड़े हुयी ओला व्रष्टि से बरवाद हुयी फसलों का अभी तक मुआबजा नहीं दिया गया।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि गत रात प्रदेश के मेरठ, सहारनपुर, अलीगढ़, आगरा, मुरादाबाद, बरेली मंडलों में व्यापक रूप से और कानपुर व लखनऊ मंडलों के कुछ जिलों में सामान्य रूप से ओला व्रष्टि हुयी है। नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़ और मथुरा जनपदों के कुछ हिस्सों में तो सड़कों पर बरफ की मोटी  चादर बिछ गयी। इससे सरसों और आलू की फसलों को भारी हानि पहुंची है। इससे आवारा पशुओं से तवाहहाल किसानों की और अधिक तवाही हुयी है।
डा॰ गिरीश ने कहाकि सरकार कुंभ में मस्त है और किसान बरवाद होरहा है। भाकपा पुनः मांग करती है कि ओलों से हुयी फसल हानि की शत शत भरपाई अविलंब की जाये।

डा॰ गिरीश


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शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019

जुमलेबाज सरकार का जुमला बजट आमजनों ने ठुकराया; भाकपा




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने केन्द्र सरकार के अंतिम बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहाकि यह जुमलेबाज सरकार का जुमला बजट है जो उसका अंतिम संस्कार कर देने को काफी है। सूट बूट वाले लोग इसकी तारीफ में कसीदे पढ़ रहे हैं जबकि किसान, कामगार, बेरोजगार नौजवान और आम लोग इससे ठगा महसूस कर रहे हैं।
किसानों से इस सरकार ने चलते चलते भी वही छलाबा किया जो वह उनके साथ पाँच साल से करती आरही है। उनकी आमदनी दोगुना करने के जुमले के पूरी तरह उजागर होने के बाद और किसानों की आत्महत्याओं के लगातार जारी रहने के बाद सरकार ने उन्हें रु॰ 17 प्रतिदिन का लालीपाप थमाया है जिसको किसान जले पर नमक छिड़कने के समान मान रहे हैं। कई राज्य सरकारों द्वारा किसानों को दी जारही राहत के मुक़ाबले ये ऊंट के मुंह में जीरा है।
 2017- 18 में बेरोजगारों की संख्या में बेतहाशा व्रध्दी हुयी है मगर रोजगार देने के मोर्चे पर यह बजट एकदम फ्लाप है। मनरेगा के बजट में जितनी कटौती पूर्व के बजटों में की गयी थी उसको इस बजट में भी पूरा नहीं किया गया। मजदूरों व अन्य वर्गों की भलाई के लिए कीगयी घोषणाएँ बजट आबंटन से मेल नहीं खातीं। उनके लागू होने के बारे में भी तमाम संशय बने हुये हैं। गरीब मजदूरों को इसे पाने के लिये 100 रुपये साल अदा करने पड़ेंगे।
सामान्य गरीबों को दिये आरक्षण का लाभ देने की सीमा 8 लाख निर्धारित होने के बाद आयकर दाताओं को उम्मीद बंधी थी कि उन्हें भी आयकर में 8 लाख आमद तक पर छूट मिलेगी लेकिन सरकार ने उन्हें भी हताश- निराश किया है। बजट भाषण में 5 लाख तक की आमद पर छूट के भ्रम से उल्लसित लोगों का उल्लास 10 मिनट में ही आसमान से जमीन पर आगया जब उन्हें पता लगा कि यह छूट तो केवल 5 लाख तक की आमदनी वालों के लिये है। समाज के अन्य सामान्य तबके भी ठगा ही महसूस कर रहे हैं।
डा॰ गिरीश ने कहाकि यह सरकार मूंगफली देकर बादाम देने का प्रचार करने में माहिर है। वह उसने आज के बजट में भी किया है। बजट पेशी के दौरान मोदी और उनकी मायावी मंडली द्वारा सैकड़ों बार मेजें थपथपा कर और मोदी मोदी के नारे लगा कर पैदा किया गया क्रत्रिम जोश 10 मिनट भी नहीं ठहर पाया जब टीवी चैनलों पर किसानों और आमजनों ने इसका पर्दाफाश कर दिया। चुनावी लाभ की गरज से कागजी घोषणाओं से सजाया संवारा गया बजट वजूद में आने से पहले ही निर्वस्त्र होगया।
यह अन्तरिम बजट था लेकिन सरकार ने सारी नैतिकता और संवैधानिक मर्यादाएं लांघ कर पूर्ण बजट पेश कर दिया। चुनावी लाभ के लिये सरकार सारी सीमाएं लांघने पर आमादा है।
कुल मिला कर यह कार्पोरेट्स के हितों का रक्षक बजट है इसीलिए औद्योगिक संगठन उसकी प्रशंसा के पुल बांध रहे हैं। पूंजीवाद से अवाम की बढ़ रही नाराजी को कम करने को कुछ खैरातें बांटने का नाटक किया गया है। पर रिश्वतख़ोरी और अफसरशाही के चलते ये सारी योजनाएं जमीन पर पहुँचने से पहले ही दम तोड़ देतीं हैं यह हर कोई जानता है। डा॰ गिरीश ने कहाकि आजादी के 71 साल में आये हर बजट से जनता अपने जीवन की बेहतरी की उम्मीद लगाये रही पर  जनता की हालत आज भी जस की तस बनी हुयी है। जनता का उत्थान समाजवाद में ही संभव है पूंजीवाद में नहीं। यह इन 71 सालों में स्पष्ट होगया है।

डा॰ गिरीश

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सोमवार, 28 जनवरी 2019

मुजफ्फरनगर दंगों के दोषियों से केस वापस लेने की करतूत की भाकपा ने निन्दा की



 

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने मुजफ्फरनगर दंगों के संगीन धाराओं वाले केसों को वापस लेने के राज्य सरकार के फैसले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है।
भाकपा ने राज्य सरकार के इस निर्णय को न्याय के सिध्दांत की हत्या बताते हुये इस कदम को तत्काल वापस लेने की मांग की है। पार्टी ने आशा व्यक्त की कि अदालतें जिस स्तर पर भी संभव हो इसका संज्ञान लेंगीं न्याय को दोहरा बनाने की भाजपा सरकार की इस करतूत को रद्दी की टोकरी में डाल देंगी।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि 2013 में मुजफ्फरनगर और उसके समीपस्थ जिलों में भाजपा और संघ द्वारा प्रायोजित दंगों में सरकारी तौर पर 66 लोग मारे गये थे और 50 हजार से अधिक लोग विस्थापित हुये थे। माली नुकसान का तो आंकलन कर पाना भी बेहद कठिन है। दंगाइयों के खिलाफ 125 से अधिक केस दर्ज हुये थे जिनमें अधिकतर भाजपा के नेतागण हैं। उनमें से कई तो सांसद, विधायक अथवा भाजपा के संगठन के उच्च पदों पर आसीन हैं।
ऐसे राजनैतिक अपराधियों से संगीन केसों को वापस लेकर सरकार राजनीति में हिंसक अपराधियों की प्रतिष्ठा का काम कर रही है। आगामी लोकसभा चुनावों से पहले केस वापस लेकर भाजपा संगीन अपराधियों को संदेश देना चाहती है कि वे चुनावों में भाजपा का साथ दें तो उन्हें भी बिना ट्रायल मुक्ति मिल जायेगी। यह भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता के दुरुपयोग का गंभीर मामला है जिसका सामाजिक जीवन पर गंभीर असर पड़ेगा।
डा॰ गिरीश ने कहाकि भाजपा की कथनी करनी में अंतर है। वह सामान्य लोगों पर फर्जी मुकदमे लगा रही है, यूपीकोका जैसे कानून बनाती है और उसकी पुलिस तमाम नौजवानों को बिना आपराधिक सबूतों के फर्जी एंकाउंटर कर मौत के घाट उतारने का काम कर रही है। वहीं भाजपा अपने कार्यकर्ताओं पर लगे संगीन केसों को मनमाने ढंग से खत्म कर देना  चाहती है। इससे पहले स्वयं मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ ने अपने ऊपर लगे मुकदमे वापस लेलिए थे। तिकड़मों और कथित धर्मनिरपेक्ष दलों के नेताओं की साठ गांठ से कई भाजपाई और संघी बाबरी ध्वंस के केसों से न केवल आज तक बचे हुये हैं बल्कि सत्तासुख भोग रहे हैं।
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि सरकार के इस निंदनीय और समाजविरोधी कदम का पुरजोर विरोध किया जाएगा। 5 फरबरी को भाकपा तमाम जिलों में इसके विरोध में प्रदर्शन कर ज्ञापन देंगी।

डा॰ गिरीश

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बुधवार, 23 जनवरी 2019

ओला और तूफान से हुयी हानि का पूरा मुआबजा तत्काल दे सरकार: भाकपा उत्तर प्रदेश




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश की राज्य कार्यकारिणी ने प्रदेश भर में ओला व्रष्टि और तूफान से हुयी बरवादी पर भारी चिन्ता का इजहार किया है। पार्टी ने राज्य सरकार से इस बरवादी पर तत्काल ध्यान केन्द्रित करने की मांग की है।
यहां जारी बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि उत्तर प्रदेश के किसान पहले ही आवारा पशुओं, नील गायों, बन्दरों आदि से फसल की बरवादी की मार झेल रहे थे अब मौसम की मार ने उनकी समस्याओं को और भी बड़ा दिया है। गत दो दिन से ओलों के गिरने और बवंडर से सरसों, आलू आदि की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है और अब मौसम विभाग ने आगे भी वारिश, ओले और तूफान आने की भविष्यवाणी की है। इससे किसानों के माथे पर चिन्ता की लकीरें खिंचना स्वाभाविक है।
एक ओर किसानों पर चहुंतरफा मार पड़ रही है वहीं सरकार इन समस्याओं से मुंह चुरा रही है। वह ऐसे कामों में लिप्त है जिनसे जनता के हितों का कोई सरोकार नहीं। भाकपा ने सरकार से किसानों की इस हानि का सौ फीसद मुआबजा तत्काल दिलाने और प्राक्रतिक आपदा से उन्हें बचाने की मांग की है। भाकपा ने फसल बीमा कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने और हर क्षेत्र में हुयी न्यूनतम हानि को आधार मान कर बीमा भुगतान की मांग की है।
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि यदि सरकार ने हानि की भरपाई के लिये तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाये तो भाकपा 5 फरबरी को प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेगी।
डा॰ गिरीश

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शनिवार, 19 जनवरी 2019

Matter for Pamphlate


( 5 फरबरी 2019 को जिला मुख्यालयों पर होने वाले आंदोलन के पर्चे का प्रारूप )


झूठी नाकारा और झांसेबाज़ सरकार को जगाने को 5 फरबरी 2019 को जिला मुख्यालय चलो

किसानों कामगारों महिलाओं और सभी कमजोरों की आवाज बुलंद करने को भाकपा का प्रदर्शन


भाइयो और बहिनो,
केन्द्र और प्रदेश की झूठी, नाकारा और झांसेबाज़ सरकारों के कारनामों से हर तबका परेशान है। सरकार की गोधन नीति से तो किसान ही नहीं हर आदमी परेशान है। आवारा पशुओं के झुंड किसानों की फसल को नष्ट कर रहे हैं। पीड़ित किसान भीषण सर्दी में ठिठुरते हुये फसलों की रखवाली कर रहे हैं। खूंख्वार सांड उन पर हमले बोल रहे हैं। हर दिन किसी न किसी के मारे जाने या घायल होने की खबरें मिल रही हैं। किसान जब उन्हें पकड़ कर बंद करते हैं तो उन पर मुकदमे दर्ज किये जारहे हैं। कई जगह इन पशुओं को लेकर किसानों में आपसी झगड़े भी होराहे हैं। सरकार और संघियों द्वारा नियंत्रित पशुशालायें धन के दोहन का जरिया बनी हुयी हैं। वहाँ से गायों/ बछड़ों को भगा दिया जाता है या फिर चारा पानी नहीं दिया जाता। वे भूख से तड़प तड़प कर मर रहे हैं। भाजपाई और संघी गोभक्तों का चोगा पहन कर पशु व्यापारियों को प्रताड़ित कर रहे हैं और पुलिस से मिल कर उनसे धन वसूल रहे हैं। इनमें से शायद ही कोई हो जो गाय को पालता हो।
दूसरे किसान कामगार भी बेहद परेशान हैं। खुद मुख्यमंत्री ने 14 दिन के भीतर गन्ने के बकाए का मय ब्याज के भुगतान कराने अथवा मिल मालिकों के खिलाफ मुकदमे लिखे जाने का वायदा किया था। लेकिन पुराने बकाये का भुगतान तो दूर नए बकाये और होगये। पहले धान बाजरा की फसलों की उचित कीमतें न मिलने से परेशान किसान अब आलू आदि की कीमतों में गिरावट का खामियाजा भुगत रहा है। ग्रामीण नौजवानो और मजदूरों को रोजगार देने वाली मनरेगा को पर्याप्त धन न मिलने से वह दम तोड़ रही है। धन के अभाव में लोग बच्चों की फीस तक नहीं देपारहे और कई तो परेशान हो आत्महत्याएं कर रहे हैं। सरकार ने बिजली के दाम बड़ा दिये और भुगतान करने में असमर्थ लोगों के कनेक्सन काटे जारहे हैं। उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किये जराहे हैं।
ये सरकार रामराज लाने का सपना दिखा कर सत्ता में आयी थी पर प्रदेश में अपराधों की बाड़ ने लोगों को परेशान कर दिया है। हर तरह के अपराध चरम पर हैं। पर सबसे बड़ी दुर्दशा बहू बेटियों की है। प्रतिदिन उनके साथ बलात्कार और सामूहिक बलात्कार की दिल दहलाने वाली घटनायेँ होरही हैं। कई की हत्या कर दी जाती है तो कई सिस्टम से तंग आकर आत्महत्यायें कर रही हैं। यह योगी सरकार के माथे पर कलंक है। दलितों अल्पसंख्यकों पर भी तमाम तरह के अत्याचार होरहे हैं। सरकारी योजनायेँ भ्रष्टाचार की भेंट चड़ चुकीं हैं तो पुलिस प्रशासन में खुल कर भ्रष्टाचार होरहा है। आम आदमी तवाह बरवाद होरहा है।
रोजगार घट रहे हैं। साढ़े चार लाख स्थान केन्द्रीय सेवाओं में तो 40 लाख राज्यों की सेवाओं में खाली पड़े हैं जिन्हें भरा नहीं जारहा। भर्तियों में धांधली के चलते भर्ती प्रक्रियाएं बाधित होरही हैं। रोजगार देने के नाम पर सामान्य आरक्षण का झुनझुना पकड़ा दिया जिनके नए नियम बनाने तक भर्ती प्रक्रिया रुकी रहेगी। फिर चुनावी आचार संहिता लग जायेगी तो भर्तियाँ भी रुक जाएंगी। हर तरह से युवाओं पर ही गाज गिर रही है। दो करोड़ को रोजगार देने का वायदा पकौड़े तलने की नसीहत में बदल गया। किसानों की आमदनी दो गुना होना तो दूर वे पुनः कर्ज के जाल में फंस गये। कालाधन कम होने के बजाय और भी बड़ गया।  सरकार की नीतियों- नोटबंदी, जीएसटी और खनन प्रक्रिया के भ्रष्टाचार में डूबे रहने से मजदूर मिस्त्री आदि बेकार बैठे हैं। ऊपर से महंगाई सबके लिए डायन बनी हुयी है। पेट्रोल डीजल रसोई गैस जैसी जरूरी चीजें बेहद महंगी हैं। डालर के मुक़ाबले रुपये की कीमत का असर हर चीज पर पड़ रहा है। घपले घोटालों में तो पिछली सरकारों के रिकार्ड को ही तोड़ दिया।
जनता की इन सभी संगीन परेशानियों की फिक्र न तो केन्द्र सरकार को है और न उत्तर प्रदेश सरकार को। पूरे 5 साल उन्होने राम मंदिर गंगा गाय की थोथी गाथा गाते ही गुजार दिये। अब कह रहे हैं कि मंदिर 2025 में बनेगा। चुनावों में फिर से वे कुछ थोथे नारे लेकर आयेंगे और आप सभी को छलने की दोबारा कोशिश करेंगे। आप सभी को इनके इस छल से सावधान रहना होगा।
उपरयुक्त जनता की प्रमुख समस्याओं को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उत्तर प्रदेश भर में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। हम अपने इस जनपद में भी 5 फरबरी को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन/ धरना आयोजित करने जारहे हैं। आपसे अनुरोध है कि आप भी शामिल हों।

निवेदक

जिला काउंसिल

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जनपद- ………………………….


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सोमवार, 14 जनवरी 2019

CPI will work for unity of left, democratic and secular forces to defeat BJP in next parliament election of U.P.



भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कार्यकारिणी ने आगामी लोकसभा चुनावों में आरएसएस एवं उसके द्वारा नियंत्रित भाजपा को हराने को वामपंथी, लोकतान्त्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष शक्तियों की एकता स्थापित करने पर बल दिया है.

यहाँ दो दिनों तक चली पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में इस तथ्य को शिद्दत से रेखांकित किया कि गत साढ़े चार सालों में किसानों, कामगारों, नौजवानों, छात्रों, महिलाओं और अन्य कमजोर तबकों के ज्वलंत सवालों पर वामपंथी दलों ने ही सडकों पर उतर कर संघर्ष किया है. देश के कई भागों और राजधानी दिल्ली में किसानों के बडे बड़े जमावडों और 8 एवं 9 जनवरी की श्रमिक वर्ग की देशव्यापी हड़तालों में भी लाल झंडों की रहनुमाई को सारे देश ने खुली आँखों से देखा है.
उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य भागों में कई और मोर्चों पर भी संघर्ष हुए हैं. जहाँ भी भाजपा और संघ ने अपनी फासीवादी हिन्दुत्ववादी राजनीति का हमला बोला है, उसका वैचारिक जबाव भी भाकपा और वामपंथ ने दिया है. भाजपा अध्यक्ष द्वारा दीगयी वैचारिक युध्द की चुनौती का जबाव भी वामपंथ ही दे सकता है. भाकपा राज्य कार्यकारिणी का यह स्पष्ट मत है कि कोई सुस्पष्ट विचारधारा से रहित गठजोड़ संघ और भाजपा को चुनौती नहीं देसकता. अतएव किसी ऐसे गठजोड़ जिसमें कि भाकपा और वामपंथ की मौजूदगी न हो से भाजपा और संघ को हराने की कल्पना भी नहीं की जासकती.
भाकपा राज्य कार्यकारिणी का यह भी मत है कि भाजपा के खिलाफ जमीनी स्तर पर लोग लामबंद होरहे हैं. वे भाजपा को हराना चाहते हैं. पर वे एक समूचे विपक्ष की एकता देखना चाहते हैं. दुर्भाग्य है कि कुछ लोगों की वजह से ऐसा नहीं होसका. उत्तर प्रदेश में भाजपा/ आरएसएस के विरुध्द संघर्ष राष्ट्रीय संघर्ष का हिस्सा है जिसे वामपंथी लोकतान्त्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष शक्तियों के गठजोड़ से ही आगे बढ़ाया जा सकता है. अतएव भाकपा ऐसी सभी ताकतों को एकजुट करने का प्रयास करेगी.
भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने आवारा पशुओं से किसानों की फसल की बरवादी और जनहानि, महिलाओं के साथ बदसलूकी की बढ़ती घटनाओं एवं यूपी की चरमराई कानून व्यवस्था, गन्ना/ आलू उत्पादक किसानों की बदहाली, कर्जमाफी, महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार आदि सभी सवालों पर आगामी 5 फरबरी को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने का निर्णय भी लिया है. इसके अलाबा कई क्षेत्रीय रैलियां/ सभाएं भी आयोजित की जायेंगीं.
बैठक में भाकपा के केन्द्रीय सचिव का. अतुल अंजान ने भी विचार रखे. राज्य सचिव डा. गिरीश ने राजनैतिक रिपोर्ट पेश की. अध्यक्षता का. कल्पनाथ गुप्ता ने की. का. अर्विन्दराज स्वरूप, अशोक मिश्र, सदरुद्दीन राना, सुधीर अवस्थी, गफ्फार अब्बास, रामचंद ' सरस', रामरक्षा, नसीम अंसारी, दीनानाथ सिंह, शिरोमन राजपूत, शरीफ अहमद, अजय सिंह, हामिद अली, राजेन्द्र यादव, राजेश तिवारी, फूलचंद यादव एवं मोतीलाल ने विचार व्यक्त किये.
डा. गिरीश

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Press Note of Cpi Central


New Delhi,
January 14, 2019
Press Release

The National Secretariat of the Communist Party of India issued the following statement on January 14, 2019:
The National Secretariat of the Communist Party of India has condemned the action of police to submit a charge sheet after 1000 days and to falsely implicate Kanhaiya Kumar the ex-president of JNU. This is politically motivated action by police to please the masters and has been done keeping coming Lok Sabha election in mind. This is how the present government is subverting the authority to serve its political need. We are confident that people will see this game and defeat the designs of government.
(Roykutty)
Office Secretary

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गुरुवार, 10 जनवरी 2019

प्रधानमंत्री की सभाओं में होरहा है सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार: भाकपा उत्तर प्रदेश


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य इकाई ने आरोप लगाया है कि कल प्रधानमंत्री की आगरा में हुयी चुनाव सभा की इमारत पूरी तरह से सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के ढांचे पर टिकी थी जिसकी कि अविलंब जांच किए जाने की जरूरत है।

भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने उपर्युक्त आरोप यहां जारी एक प्रेस बयान में लगाया है।
उन्होने कहाकि प्रधानमंत्री जी आगरा में आम सभा के मंच से जब सारी मर्यादायें भुला कर विपक्ष पर बौखलाहट निकाल रहे थे और अपने को चौकीदार साबित करने को- “ चौकीदार जागता है, चौकीदार सामने खड़ा है, पूरी ईमानदारी के साथ खड़ा है” जैसे जुमले उछाल रहे थे तो वे भूल गये कि जिस सभा को वे संबोधित कर रहे हैं उसका लहीम- सहीम खर्चा और साधन शासकीय मशीनरी के बल पर भारी भ्रष्टाचार के जरिये जुटाये गये हैं।
डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया कि सभा में भीड़ लाने को जो वाहन लाये गये वे सब प्रशासन ने जुटाये। आगरा सहित आसपास के तमाम जिलों जहां से भीड़ लायी जानी थी सर्दी का बहाना बना कर स्कूलों की कहीं दो दिन तो कहीं तीन दिनों की छुट्टी करा दी गयी और बच्चों को स्कूल लाने लेजाने वाली बसों को जबरिया भीड़ लेजाने को जुटाया गया। परिवहन संबंधी विभाग और पुलिस प्रशासन ने अन्य अनेक वाहनों की भी व्यवस्था की।
इतना ही नहीं रैली स्थल की व्यापक व्यवस्थाओं – मंच, शामियाना, कुर्सियों आदि की व्यवस्था के लिये सरकारी विभागों से कमीशन और हेरा फेरी वाला धन जुटाया गया और छोटे बड़े जन प्रतिनिधियों के माध्यम से भीड़ के लिये भोजन और दिहाड़ी देने को रकम इकट्ठा की गयी। अंततः मोदीजी की इस हुंकार का सारा भार जनता के कंधों पर ही आन पड़ा। उन्होने कहाकि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से चौकीदार की जहां भी सभाएं आयोजित की गईं हैं, उसका खर्चा इसी पवित्र क्रिया से जुटाया गया है।
यह चरित्र और नैतिकता की दुहाई देने वालों के गाल पर कडा तमाचा है। लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों का यह तकाजा है कि इसकी जांच होनी चाहिये। डा॰ गिरीश ने कहाकि शासक दल ने अभी से घोषणाओं, लोकार्पण और शिलान्यासों के नाम पर ख़र्चीले आयोजनों के जरिये चुनाव अभियान छेड़ दिया है और इसमें बड़े पैमाने पर शासकीय मशीनरी का दुरुपयोग कर कदाचार किया जारहा है। आज यह स्पष्ट होगया कि अपने को कामकाजी बताने वाले प्रधानमंत्री ने आखिर लोकपाल की नियुक्ति क्यों नहीं की।
डा॰ गिरीश ने कहाकि इतने बड़े लोकतन्त्र में आखिर कोई तो होगा जो भाजपा के इस भ्रष्टाचार का संग्यान ले और कड़ी कार्यवाही करे। राष्ट्रपति, निर्वाचन आयोग, सीबीआई, ईडी अथवा सतर्कता आयोग किसी को तो आगे आना चाहिये ताकि लोकतन्त्र पर जनता का भरोसा बना रहे। और नहीं तो संसदीय समिति के जरिये ही इस सब की जांच कराके सच्चाई को उजागर किया जाना चाहिए। अन्यथा भाकपा इस सवाल को जनता की अदालत में लेजाएगी।
डा॰ गिरीश
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शुक्रवार, 28 दिसंबर 2018

Press Note of CPI, U.P.


नोएडा में नमाज पर दुर्भावना से लगाई पाबंदी निरस्त की जाये: भाकपा


लखनऊ- 28 दिसंबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने नोएडा प्रशासन द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर नमाज अदा करने पर लगाई पाबंदी को पूरी तरह अनुचित बताया है। कल ही केन्द्र सरकार ने लोकसभा में तीन तलाक रोकने के नाम पर एक ऐसा बिल पास कराया जिसका मुस्लिम महिलाओं के हितों से दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं। भाकपा ने भाजपा की केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों पर आरोप लगाया कि वे वोटों के ध्रुवीकरण के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ एकतरफा युध्द छेड़े हुये है।
सभी जानते हैं कि नोएडा प्रशासन ने अनुमति न होने के नाम पर पार्कों व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर नमाज पड़े जाने पर रोक लगादी है। इतना ही नहीं प्रशासन ने नमाज रोकने के नाम पर पार्क में पानी भर दिया। लेकिन उत्तर प्रदेश की सरकार बिना किसी अनुमति के तमाम पार्कों में आरएसएस की शाखाएं लगाने की छूट दिये हुये है। जबकि नमाज एक धार्मिक क्रिया है जबकि संघ की शाखाओं में विद्वेष और हिसा फैलाने का वैचारिक आधार तैयार किया जाता है। गत दिनों तो इन शाखाओं में सुप्रीम कोर्ट के विरोध में समूह गान गाया जारहा था। सुबह पार्कों में शुध्द वातावरण की तलाश में आने वाले लोगों को संघ की इन देशविरोधी संविधान विरोधी गतिविधियों से ठेस पहुंचती है। अतएव संघ की शाखाओं को सार्वजनिक स्थल पर लगाने से रोका जाना चाहिए।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने महामहिम राष्ट्रपति महोदय और उत्तर प्रदेश के राज्य पाल से अपील की है कि वे हस्तक्षेप करें और नोएडा प्रशासन की इस कार्यवाही को निरस्त करायें।
डा॰ गिरीश
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गुरुवार, 27 दिसंबर 2018

बिखराव की ओर एनडीए और टूट की ओर भाजपा




अपने घनघोर कट्टरपंथी एजेंडे को जनता पर जबरिया थोपने, 2014 के लोकसभा चुनावों में मतदाताओं से किये वायदों से पूरी तरह मुकरने और काम करने की जगह थोथी बयानबाजी के चलते राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन (एनडीए) और भाजपा के प्रति जनता में भारी आक्रोश पैदा हुआ है। हाल ही में पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा की करारी हार और पिछले दिनों हुये लोकसभा और विधानसभा की सीटों के उपचुनावों में उसकी उल्लेखनीय पराजय ने आग में घी का काम किया है। यही वजह है कि आज एनडीए बिखर रहा है और भाजपा कण कण करके टूट रही है। हालात ये हैं कि 2019 के चुनाव आते आते एनडीए के ध्वंसावशेष ही दिखेंगे और भाजपा 2014 के पूर्व की स्थिति में पहुँच जायेगी।
तेलगू देशम पार्टी ने तो एनडीए को पहले ही तलाक देदिया था तो आतंकवाद से निपटने में असफलता के चलते बदनामी झेल रही भाजपा ने जम्मू कश्मीर में पीडीपी से खुद ही हाथ छुड़ा लिया। अब एनडीए के आधा दर्जन से अधिक घटक दल खुल कर विद्रोह पथ पर हैं तो अन्य कई के अंदर अंदर आग सुलग रही है। उनका धैर्य कब जबाव दे जाएगा और विलगाव के स्वर कब फूट पड़ेंगे कहा नहीं जासकता।
यूपी के फूलपुर और गोरखपुर के लोकसभा उपचुनावों से शुरू हुयी और कैराना में परवान चढ़ी  विपक्षी एकता ने ऐसा ज़ोर पकड़ा कि साल का अन्त आते आते एनडीए के विखराव की आधारशिला तैयार होगयी। इन चुनावों में सपा, बसपा और रालोद ने वामपंथी दलों के सहयोग से तीनों प्रतिष्ठापूर्ण सीटें जीत लीं। इस जीत ने विपक्ष और जनता में आत्मविश्वास जगाया कि भाजपा को हराया जासकता है। तीन हिन्दी भाषी राज्यों की सत्ता भाजपा के हाथ से निकल जाने पर तो यह आत्मविश्वास हिलोरें लेने लगा। सत्तापक्ष की हताशा के चलते एक के बाद एक सहयोगी दल के असंतोष से एनडीए दरकने लगा। भाजपा एक मजबूत पार्टी से मजबूर पार्टी की स्थिति में आगयी। इससे भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा और असुरक्षा की भावना के चलते भाजपा से भी लोग किनारा करने लगे।
बिहार की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी साढ़े चार साल तक सत्ता में साथ निभाने के बाद एनडीए को छोड़ कर संप्रग का हिस्सा बन गयी। उसने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पिछड़ों और गरीबों के लिये कोई काम नहीं किया।
कार्पोरेट्स नियंत्रित आज की राजनीति में विचार और सिध्दांत की जगह चुनावों में जीत हार और सत्ता प्राप्ति की संभावना पार्टियों के बीच हाथ मिलाने का आधार बनते हैं। जब तक ये संभावनायें भाजपा के पास थीं, पार्टियों का प्रवाह भाजपा की ओर था। 2014 में मोदी लहर में जिनको जीत और सत्ता दिख रही थी वे भाजपा के साथ आये, उनको लाभ मिला। पर आज हालात बदल गये हैं और इस प्रवाह की दिशा भी उलट चुकी है।
केन्द्र सरकार के शासन के साड़े चार सालों में दलितों के साथ भारी अन्याय हुआ है। इससे वे उद्वेलित और आंदोलित हैं। इससे विचलित बिहार के दुसाधों के आधार वाली पार्टी लोजपा भी असुरक्षित समझने लगी। उसके नेताओं ने ताबड़तोड़ बयानबाजी कर भाजपा को बैक फुट पर लादिया। गत लोकसभा चुनावों में बिहार में 30 सीटें लड़ कर 22 सीटें जीतने वाली भाजपा को मात्र 17 सीटों पर संतोष करना पड़ा। उसे जीती हुयी पांच सीटों की कुर्बानी लोजपा और जदयू के लिये करनी पड़ी। एक राज्यसभा सीट भी लोजपा को देनी पड़ी।
राजनीति के पर्यवेक्षक अभी भी इसे स्थायी समाधान नहीं, “पैच अप” मान रहे हैं। यदि भाजपा ने साख बचाने की गरज से मंदिर निर्माण के लिये अध्यादेश लाने की कोशिश की तो दोनों की राहें जुदा होसकतीं हैं। क्योंकि दोनों के जनाधार के समक्ष मंदिर नहीं, किसान- कामगारों की दयनीय स्थिति का मुद्दा प्रमुख है। नीतीश कुमार की भी यही स्थिति है। वे कह भी चुके हैं कि राम मंदिर का मुद्दा सहमति या अदालत से हल होगा।
महाराष्ट्र में भाजपा की पुश्तैनी सहयोगी रही शिवसेना भी आँखें तरेर रही है। वह लगातार भाजपा को कठघरे में खड़ा कर रही है। इसके सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने तो यहाँ तक कह डाला कि 'दिन बदल रहे हैं, चौकीदार ही अब चोरी कर रहे हैं।' उद्धव राफेल विमान सौदे में घोटाले को उजागर करने की मांग भी जोरदारी से कर रहे हैं।
सुभासपा के नेता और योगी सरकार में काबीना मंत्री श्री ओमप्रकाश राजभर राज्य सरकार के गठन के दिन से ही उस पर खुले हमले बोल रहे हैं। सुभासपा ने अब भाजपा के केंद्रीय नेत्रत्व पर भी हल्ला  बोल दिया है। वह आरक्षण को तीन भागों में बांटने की मांग को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही है। भाजपा की हिम्मत नहीं कि उसे बाहर का रास्ता दिखा सके।
जातीय और क्षेत्रीय पहचान तथा सामाजिक न्याय के प्रश्न पर क्षेत्रीय पार्टियों का अभ्युदय हुआ था। भाजपा और संघ का हिन्दुत्वनामी कट्टरपंथ क्षेत्रीय दलों की आकांक्षाओं को रौंद रहा है। अतएव एनडीए के घटक अपना दल को भी अपना अस्तित्व खतरे में नजर आरहा है। इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश सरकार पर सम्मान न देने का आरोप लगाया। उन्होने कहाकि मौजूदा हालात में सोचना पड़ेगा कि जहां सम्मान न हो, स्वाभिमान न हो, वहां क्यों रहें?’ उन्होने केन्द्र में राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल की अनदेखी का आरोप भी लगाया और सभी विकल्प खुले रखने का संकेत दिया। उल्लेखनीय है कि अपना दल ने पांच साल में यह पहला बड़ा हमला बोला है।
पंजाब में अकाली दल ने आँखें दिखाना शुरू कर दीं हैं तो तमिलनाड्डु में भाजपा खोखली होचुकी एआईएडीएमके की बैसाखियों पर निर्भर है। पूर्वोत्तर में विपरीतधर्मी पार्टियों के साथ हनीमून के दौर से गुजर रही भाजपा से उनका कब तलाक होजायेगा कोई नहीं जानता।
एनडीए ही नहीं 2019 में पुनर्वास की चिन्ता में डूबी भाजपा भी आंतरिक विघटन की पीड़ा से गुजर रही है। एक एक कर सहयोगी दल भाजपा से छिटक रहे हैं। इससे भाजपा में छटपटाहट है। कर्नाटक में जीत के जादुयी आंकड़े से दूर रही भाजपा के पांच राज्यों में चुनावी हार से कार्यकर्ताओं का मनोबल और भी टूटा है। वे अब मोदी के करिश्मे और संघ की दानवी ताकत पर भरोसा नहीं कर पारहे हैं। हार की ज़िम्मेदारी तय न करने पर भी सवाल उठ रहे हैं। श्री नितिन गडकरी ने इशारों इशारों में नरेन्द्र मोदी और अमितशाह पर सवाल उठाया कि सफलता के कई पिता होते हैं पर असफलता अनाथ होती है। कामयाब होने पर उसका श्रेय लेने को कई लोग दौड़े चले आते हैं, पर नाकाम होने पर लोग एक दूसरे पर अंगुलियां उठाते हैं।
जहाज डूबने को होता है तो चूहे भी उसे छोड़ कर भागने लगते हैं। पाला बदलने का दौर शुरू होगया है। हर दिन किसी न किसी भाजपाई के पार्टी छोड़ने की खबरें अखबारों की सुर्खियां बन रही हैं। 40 से 50 फीसदी सांसदों की टिकिटें काटने की भाजपा की योजना है। टिकिट गँवाने वाले ये सांसद क्या गुल खिलायेंगे, सहज अनुमान लगाया जासकता है।
कार्पोरेट्स को लाभ पहुंचाने और किसान कामगारों की उपेक्षा के चलते समस्याओं का अंबार लग गया है और पीड़ित तबके उनसे जूझ रहे हैं। हाल ही में देश के कई भागों और राजधानी में किसानों ने बड़ी संख्या में एकत्रित हो हुंकार भरी है। देश के व्यापकतम मजदूर तबके 8 व 9 जनवरी को हड़ताल पर जाने वाले हैं। शिक्षक, बैंक कर्मी, व्यापारी, दलित, पिछड़े और महिलाएं सभी आंदोलनरत हैं। जमीनी स्तर पर वंचित और उपेक्षित तबकों की हलचल जिस तेजी से बड़ रही है उसी तेजी से संघ और भाजपा की बेचैनी बड़ रही है। स्थिति यहां तक पहुंच गयी है कि साढ़े चार साल में पहली बार भाजपा नेताओं की सभाओं में लोग प्रतिरोध जता रहे हैं। एक ओर लोग मन्दिर नहीं तो वोट नहीं जैसे नारे लगा रहे हैं तो दूसरी ओर महंगाई भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से आजिज़ युवक सभाओं में पत्थर फेंक रहे हैं।
दशहरे पर अपने भाषण में मन्दिर राग छेड़ने वाले संघ प्रमुख पांच राज्यों के चुनाव परिणामों से उसकी निस्सारिता को समझ चुके हैं। परन्तु अन्य कोई विकल्प सामने न देख संघ “मन्दिर शरणम गच्छामि के उद्घोष को मजबूर है। गंगा, गाय, नामों के बदलने और मूर्तियों के निर्माण से भी हानि की भरपाई हो नहीं पारही है। ऐसे में न्यायालय से मन्दिर- मस्जिद प्रकरण पर जल्द फैसला आता न देख विश्वसनीयता की रक्षा के लिए केन्द्र सरकार मन्दिर निर्माण के लिये अध्यादेश ला सकती है।
इस अध्यादेश का हश्र क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा पर बचे- खुचे एनडीए को खंड खंड करने और भाजपा के विघटन के लिये यह काफी होगा । भाजपा के गैर संघी लोगों को अब यह राह स्वीकार्य नहीं।   
डा॰ गिरीश
27- 12- 2018




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बुधवार, 12 दिसंबर 2018

बुलंदशहर की घटना के असली मुजरिमों को बचाने में जुटी है उत्तर प्रदेश सरकार और उसके मातहत मशीनरी



लखनऊ- उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जनपद में 3 दिसंबर को हुये अराजकता के नाच को जिसमें कि एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या और एक तमाशवीन युवक की दर्दनाक मौत हुयी, के दस दिन बीतने के बाद भी पुलिस और प्रशासन इस पर से रहस्य की चादर हठा नहीं पारहे हैं। उलटे पुलिस और प्रशासन के रवैये से लग रहा है कि वह येन केन प्रकारेण असली अपराधियों जो कि स्पष्टतः संघ गिरोह से संबन्धित हैं, को क्लीन चिट देकर कुछ निर्दोषों और तमाशवीनों को बलि का बकरा बना रहे हैं।
ज्ञातव्य होकि जनपद बुलन्दशहर की स्याना कोतवाली के अंतर्गत महाव गांव के एक किसान के गन्ने के खेत में कुछ म्रत पशुओं के अवशेष खेत मालिक को 3 दिसंबर को सुबह पड़े मिले थे। किसान ने इसकी सूचना स्याना पुलिस को दी तो वह घटनास्थल पर पहुंची और उपस्थित ग्रामीणों को रिपोर्ट लिख कर उचित कार्यवाही करने का आश्वासन भी दिया। ग्रामीण इससे संतुष्ट भी होगये। पर सुनियोजित उद्देश्यों के लिये हिंसा भड़काने को उतारू संघ गिरोह को यह मंजूर नहीं था।
अतएव बजरंगदल के जिलाध्यक्ष और भाजपा के दूसरे आंगिक संगठनों ने वहाँ कथित गोकशी की अफवाहें फैला कर कई गांवों की भीड़ इकट्ठी कर ली। वे म्रत पशुओं के अवशेष एक ट्रेक्टर में डाल कर पुलिस चौकी चिंगरावटी पर ले आए और वहां जाम लगा दिया। संघियों ने अपने उत्तेजक बयानों और नारे बाजी से भीड़ को उकसाया और पथराव शुरू होगया। इस बीच पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा। बेहद दुखद है कि संघियों द्वारा लगाई इस आग के चलते स्याना कोतवाली के इंचार्ज की ह्त्या कर दी गयी और एक स्थानीय युवक सुमित भी मारा गया।
ज्यों ज्यों समय व्यतीत होरहा है घटना की परतें और साजिशें सामने आती जारही हैं। बुलंदशर में घटना के कई दिनों पहले से मुस्लिमों का इज़्तजा चल रहा था जिसमें कि अल्पसंख्यकों की भारी भीड़ जुटी थी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को हिंसा की आग में झौंकने के लिये संघ गिरोह ने इसे एक नायाब मौका समझा। उन्होने ग्रामीण क्षेत्रों में अफवाहें फैलायीं कि मुस्लिमों के समारोह में आए लोगों को गोमांस परोसने के लिये बड़े पैमाने पर गायें काटी जारही हैं। लेकिन आम जनता सच्चाई जानती थी और वह टस से मस नहीं हुयी। उलटे कई ग्रामों में गैर मुस्लिमों ने मुस्लिम समारोह में आये अल्पसंख्यकों को नमाज पढ़ने के लिये मंदिरों और अपने आवासों में जगह दी। इससे संघी बौखला गये।
अपनी साज़िशों को अंजाम देने के लिये संघियों ने पशुओं की खाल उतारने वाले मजदूरों से गन्ने के खेत में म्रत पशुओं के अंग गिरवा दिये और बिना जांच के ही कुछ गरीब मुस्लिमों को गिरफ्तार करने को दबाव बनाया। पर पुलिस इंस्पेक्टर स्याना बिना जांच किए गिरफ्तारी करने को तैयार नहीं थे। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह दादरी के अखलाक हत्याकांड की जांच से भी जुड़े थे और उन्हें लगातार धमकियाँ भी मिल रहीं थीं।
अब जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या संघियों ने एक तीर से कई निशाने साधने की साजिश की थी? क्या उनका उद्देश्य छत्तीसगड और मध्य प्रदेश के चुनावों में भाजपा की दुर्गति की खबरों के बीच राजस्थान चुनाव से पहले ध्रुवीकरण को अंजाम देने की साजिश रची थी? अथवा लोकसभा चुनावों से पहले पूर्व की भांति  पश्चिमी उत्तर प्रदेश को फिर से हिंसा और हिंसा के जरिये विभाजन पैदा करने का कोई महाषडयंत्र था?
यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पुलिस इंस्पेक्टर की हत्या ने संघियों के मंसूबे पर पानी फेर दिया। इस हिंसा से पुलिसकर्मियों और आम जनता के बीच योगी सरकार और संघ गिरोह के विरोध में जबर्दस्त गुस्सा था जिसकी चिनगारियों से संघ गिरोह के पंख झुलसते नजर आये। अब कई किस्म की जाँचें बैठा दी गईं हैं। संघ गिरोह के लोगों को बचाने के प्रयास जारी हैं। एक फौजी को हत्यारा साबित करने की कवायद चल रही है। डीजीपी सहित तमाम आला अधिकारी पहले तो संघ परिवार का नाम लेने से बचते रहे और अब संघ परिवार को क्लीन चिट देने को तत्पर जान पड़ते हैं।  पर अब इसका फैसला जनता की अदालत में होना बाकी है, भले ही कार्यपालिका मामले पर कितनी ही लीपापोती क्यों न कर दे।
 भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने उसी दिन हुयी उस घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया था। एक प्रेस बयान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया था कि समूची घटना के पीछे भाजपा, बजरंग दल और आरएसएस के समर्थकों की साजिश है जो 2019 के चुनावों से पहले दंगा भड़काने, समाज को बांटने और कानून व्यवस्था को भंग करने पर उतारू हैं।
भाकपा का आरोप है कि जनता के बीच पूरी तरह बेनकाब होचुके संघ और भाजपा अब सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने पर उतारू हैं। जगह जगह गोहत्या का नाटक खड़ा कर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जारहा है। धर्मसभा, कमल यात्रा और अन्य कई तरीकों से उन्माद और भय पैदा किया जारहा है। लोकसभा चुनावों से पहले ऐसी तमाम वारदातों को अंजाम देने की साजिश है। कुत्सित राजनैतिक उद्देश्यों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मुजफ्फरनगर की तरह फिर से दंगों की आग में झौंकने का षडयंत्र है।
भाकपा  ने कहाकि योगीजी यूपी में रामराज्य की बातें करते रहे हैं लेकिन वो रामराज्य तो दूर दूर तक नहीं दिखाई देरहा। अब तक उनकी गैर कानूनी सेनाएं अल्पसंख्यकों, दलितों और कमजोरों पर हमले बोल रही थीं, अब उनके निशाने पर पुलिस भी आगयी है। योगीजी और भाजपा को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिये।
भाकपा ने यह भी कहाकि माननीय उच्च न्यायालय को स्वतः संग्यान लेकर जांच के लिये गठित टीमों  की जांच पर निगरानी रखनी चाहिये क्योंकि सत्ता के दबाव में जांच को हत्याकांड से हठा कर कथित गोकशी की ओर मोड़ा जासकता है और संघ गिरोह को क्लीन चिट दी जासकती है।  भाकपा ने लावारिश गायों और सांडों को बाड़ों में बंद करने की मांग भी की है जो न केवल किसानों की फसलें उजाड़ रहें अपितु  तमाम लोगों की जानें भी लेरहे हैं।
भाकपा ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि वह प्रदेश को दंगों और विभाजन की आग में झौंकने की भाजपा और संघ की साजिश से सावधान रहें और हर कीमत पर शान्ति बनाए रखें। भाकपा ने शहीद इंस्पेक्टर और म्रतक ग्रामीण के परिवारों को न्याय दिये जाने की मांग भी की है।

डा॰ गिरीश

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सोमवार, 3 दिसंबर 2018

CPI on Bulandashahar carnage


बुलन्दशहर की त्रासद घटना संघ और भाजपा की साजिश का परिणाम

यूपी में रामराज्य कहाँ है बतायें योगी: भाकपा


लखनऊ- 3 दिसंबर 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने आज जनपद बुलन्दशहर की स्याना कोतवाली के अंतर्गत हुयी उस घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया है जिसमें एक पुलिस इंस्पेक्टर और एक ग्रामीण की हत्या होगयी।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया कि समूची घटना के पीछे भाजपा, बजरंग दल और आरएसएस के समर्थकों की साजिश है जो 2019 के चुनावों से पहले दंगा भड़काने, समाज को बांटने और कानून व्यवस्था को भंग करने पर उतारू हैं।
भाकपा का आरोप है कि जनता के बीच पूरी तरह बेनकाब होचुके संघ और भाजपा अब सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने पर उतारू हैं। जगह जगह गोहत्या का नाटक खड़ा कर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जारहा है। धर्मसभा, कमल यात्रा और अन्य कई तरीकों से उन्माद और भय पैदा किया जारहा है। 6 दिसंबर से पहले ऐसी तमाम वारदातों को अंजाम देने की साजिश है। कुत्सित राजनैतिक उद्देश्यों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को मुजफ्फरनगर की तरह फिर से दंगों की आग में झौंका जासकता है।
डा॰ गिरीश ने कहाकि योगीजी यूपी में रामराज्य की बातें करते रहे हैं लेकिन वो रामराज्य तो दूर दूर तक नहीं दिखाई देरहा। अब तक उनकी गैर कानूनी सेनाएं अल्पसंख्यकों, दलितों और कमजोरों पर हमले बोल रही थीं, अब उनके निशाने पर पुलिस भी आगयी है। योगीजी और भाजपा को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिये।
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि माननीय उच्च न्यायालय को स्वतः संग्यान लेकर जांच के लिये गठित एसआईटी की जांच पर निगरानी रखनी चाहिये क्योंकि सत्ता के दबाव में जांच को हत्याकांड से हठा कर कथित गोकशी की ओर मोड़ा जासकता है। भाकपा ने लावारिश गायों और सांडों को बाड़ों में बंद करने की मांग भी की है जो न केवल फसलें उजाड़ रहें अपितु  लोगों की जानें भी लेरहे हैं।
भाकपा ने प्रदेश की जनता से अपील की है कि वह प्रदेश को दंगों और विभाजन की आग में झौंकने की भाजपा और संघ की साजिश से सावधान रहें और हर कीमत पर शान्ति बनाए रखें। भाकपा ने शहीद इंस्पेक्टर और म्रतक ग्रामीण के परिवारों को न्याय दिये जाने की मांग भी की है।

डा॰ गिरीश


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शुक्रवार, 30 नवंबर 2018

Mr. Modee Must Go: Farmers Gathered in Delhi.


किसानों के हालात भले न बदलें सरकार जरूर बदल देगा किसानों का आक्रोश

नई दिल्ली- अखिल भारतीय किसान सभा सहित देश के लगभग दो सौ किसान संगठनों के बैनर तले बड़ी संख्या में यहाँ रामलीला मैदान में पहुँच चुके हैं। कल चार अलग अलग दिशाओं से किसानों ने रामलीला ग्राउंड तक पैदल मार्च किया। आज वे रामलीला ग्राउंड से संसद जाने की तैयारी में हैं जहां वे अपनी खुली संसद आयोजित कर अपनी व्यथा प्रकट करेंगे।
मौसम की दुश्वारियों और यात्रा की कठिनाइयों को झेलते हुये ये किसान यूं ही दिल्ली नहीं पहुंचे हैं। इसके पीछे उनकी वह महापीड़ा छिपी है जो उन्हें पूंजीवादी दलों की सरकारों खास कर इन साढ़े चार साल में मोदी सरकार ने दी है। वर्ष दर वर्ष अपनी बदहाली और कंगाली से झूझते किसान फांसी के फंदे पर झूलते रहे और राजसत्तायेँ अट्टहास करती रहीं।
अपने चुनाव अभियान में मोदी ने किसानों के कर्जे माफी और उनकी आमद दो गुना करने का वायदा किया था, लेकिन सरकार ने किसानों के प्रति वही धोखाधड़ी का रवैया अपनाया जिसे की वह अन्य तबकों के लिए अपनाती रही है। उन्होने भाजपा और मोदी पर बड़ा भरोसा किया था और उन्हें भारी बहुमत से सत्ता सौंपी थी।  लेकिन आमदनी दोगुना करना तो दूर वे और भी बदहाली के गर्त में धकेल दिये गए।
अतएव आज वे मांग कर रहे हैं कि उनकी आमदनी डेढ़ गुना करने का बिल संसद में पास किया जाये और एक बार उन्हें सारे कर्जों से मुक्त किया जाये। वे स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की मांग भी कर रहे हैं जिसके बारे में सरकार और भाजपा भ्रम फैला रही है कि उसे तो लागू कर दिया गया। इसके अलाबा तमाम क्षेत्रीय समस्याएँ भी हैं। कहीं गन्ने का उन्हे भुगतान नहीं मिला तो कहीं चीनीं मिलें नहीं चलीं। कहीं धान, बाजरा, आलू प्याज का मूल्य नहीं मिला तो महंगे डीजल, बिजली और फर्तीलाइजर्स ने उनकी कमर तोड़ रखी है। अनेक ऐसे सवाल हैं जो उनके आक्रोश को बड़ा रहे हैं और उन्हें खींच कर दिल्ली ले आए हैं।
एक तरफ उनमें इस सरकार के प्रति गहरा गुस्सा है तो दूसरी ओर अपनी अभूतपूर्व एकता पर भारी उत्साह है। यह गुस्सा और उत्साह भले ही उनके हालात न बदले लेकिन मौजूदा सरकार को जरूर बदल देगा। देखना है सरकार उनके प्रति सहानुभूति का रवैया अपनाती है या फिर उन्हें कोरे आश्वासन और झूठे दाबों से टरकाती है। पर इतना तय है कि किसानों का यह सैलाब अब किसी झूठ को और सहने को तैयार नहीं।
डा। गिरीश,

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रविवार, 18 नवंबर 2018

जनता के आम हितों से किनाराकशी भाजपा को महंगी पड़ेगी : भाकपा




लखनऊ- 18 नवंबर: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउंसिल की बैठक यहां मथुरा के वरिष्ठ नेता कामरेड गफ्फार अब्बास एडवोकेट की अध्यक्षता में संपन्न हुयी।
बैठक में देश और प्रदेश के मौजूदा हालात पर राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने एक व्यापक समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की जिस पर 20 साथियों ने चर्चा में भाग लिया। बैठक में कार्यक्रम एवं संगठन संबंधी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये।
डा॰ गिरीश ने कहाकि केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सरकार हर मोर्चे पर विफल होचुकी हैं। चुनावों के समय भाजपा ने जनता से जो भी वायदे किये उनमें से एक भी पूरा नहीं किया गया। इन सरकारों की अकर्मण्यता और अहमन्यता ने सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं। परिणामस्वरूप बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और कमजोर तबकों पर अत्याचार की मार से लोग कराह उठे हैं। रुपये की कीमत में अभूतपूर्व गिरावट सरकार कथित कुशलता की कलई खोलने को काफी है। इसका नतीजा है कि सरकार का जनाधार बुरी तरह खिसका है। यही वजह है कि देश भर में हाल में हुये कई उपचुनावों में भाजपा को भारी पराजय का मुख देखना पड़ा है।
डा॰ गिरीश ने कहाकि पांच राज्यों की विधान सभाओं के चुनावों और लोकसभा चुनावों में  संभावित पराजय के भय से समूचे संघ परिवार ने विभाजनकारी और सांप्रदायिक एजेंडों पर पूरी ताकत झोंक दी है। सत्ता के चार सालों में मंदिर निर्माण पर पूरी खामोशी ओड़े रही भाजपा और संघ गिरोह ने अब मंदिर निर्माण का बेसुरा राग छेड़ दिया है। शहरों के ऐतिहासिक लोकप्रिय नामों को भी जबरिया बदला जारहा है। इस नाम परिवर्तन की सनक पर जनता का भारी मात्रा में धन व्यय किया जारहा है। गंगा को स्वच्छ बनाने के नाम पर ये गंगाभक्त बड़ी धनराशि डकार गये और गंगा की हालत आज भी जैसी की तैसी बनी हुयी  है। इनकी गोवंश रक्षा नीति ने आवारा पशुओं के विशाल झुंड पैदा कर दिये हैं जो किसानों की फसल उजाड़ रहे हैं और लोगों की जानें लेरहे हैं। समूची जनता त्राहि त्राहि कर रही है।
अतएव जनता की आँखों में धूल झोंकने की गरज से और एक क्षत्र तानाशाही लादने के उद्देश्य से सर्वोच्च न्यायालय को निशाना बनाया जारहा है। यह देश लोकतन्त्र और संविधान के लिये बहुत ही घातक है। वोट और सत्ता की भूख ने उन्हें अंधा बना दिया है। मोदी, योगी, भागवत और उनके अन्य सभी नेता अनापशनाप झूठ वमन कर रहे हैं और गोदी मीडिया तटस्थता का चोला दूर फेंक उनके कीर्तन में लगा है। लेकिन भाकपा की राय है कि ये न 1989 है न 1992, जबकि देश की जनता को उन्होने बरगला लिया था। जनहितों से किनारा कर भ्रामक एजेंडे पर काम करना उनके लिये उलटा पड़ने वाला है, डा॰ गिरीश ने कहा।
इन चुनौतियों से निपटने को भाकपा ने वामपंथी दलों के साथ मिल कर व्यापक जन चेतना निर्मित करने को अभियान चलाने पर ज़ोर दिया। 3 से 6 दिसंबर के बीच जिलों जिलों में “संविधान, धर्मनिरपेक्षता एवं लोकतन्त्र के समक्ष चुनौतियां” विषय पर विचार गोष्ठियाँ एवं सभा आदि आयोजित की जायेंगी। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी ) से इस मुद्दे पर सहमति बन चुकी है। अन्य वामपंथी दलों से भी चर्चा की जाएगी।
भाकपा ने अपने जिला स्तरीय नेताओं को राजनैतिक प्रशिक्षण देने हेतु एक चार दिवसीय शिविर आयोजित करने का निर्णय भी लिया। यह शिविर 6 से 9 दिसंबर के बीच बदायूं में होगा। इसमें जिला सचिव और सहसचिवों को भाग लेना है।
भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने 29 और 30 दिसंबर को दिल्ली में होने वाले देश के किसानों के संयुक्त आंदोलन को समर्थन प्रदान किया है और ज्यादा से ज्यादा किसान साथियों से दिल्ली पहुँचने की अपील की है।
बैठक में पार्टी की लोकसभा चुनावों की तैयारी पर भी चर्चा हुयी। भाकपा प्रदेश में 10 सीटें लड़ने की योजना पर कार्य कर रही है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव


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