भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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बुधवार, 7 फ़रवरी 2018

गरीबों को गरीब तथा अमीरों को अमीर बनाने वाला है आम बजट



“ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको हमने ठगा नहीं.” सैकड़ों सालों से कानपुर के प्रसिध्द ‘ठग्गू के लड्डू’ बेचने वाले का यही नारा है. अपने केन्द्रीय वित्तमंत्री जी ने भी बजट बनाते हुए ठग्गू के लड्डू बेचने वाले के इसी नारे पर अमल किया है.
यूं तो आज़ादी के बाद से पूंजीवादी और अब कारपोरेटी सरकारों द्वारा पेश किये जाते रहे हर बजट को सरकारें लोक लुभावन होने का दावा करती रही हैं लेकिन आज़ादी के 70 साल बाद भी जनता की हालत में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है. देश के तीस करोड़ से अधिक लोग आज भी गरीबी की सीमा के नीचे हैं तो 12 करोड़ जिनमें अधिकतर बच्चे हैं, कुपोषण के शिकार हैं. बजट दर बजट आते रहे और गरीबी अमीरी के बीच खाई निरंतर चौड़ी होती रही. गत साढ़े तीन सालों में यह खाई और भी चौड़ी होती गयी और देश के कई धनवान व्यापारिक घराने दुनिया के धनाढ्यों की सूची में आगये हैं. देश की दौलत केवल 1 से 10 प्रतिशत तक लोगों के हाथों में सिमटती जारही है जबकि गरीबों की संख्या लगातार बढ़ती जारही है. केंद्र सरकार का यह बजट  इस खाई को और अधिक चौड़ा करेगा. यही वजह है कि उद्योग जगत ने इसकी तारीफ़ की है और व्यापारी, लघु उद्यमी, मध्य वर्ग, किसान, मजदूर, महिलायें, विद्यार्थी और नौजवान आदि सभी इससे निराश हुए हैं.
सबसे ज्यादा धोखाधडी किसानों के साथ हुयी है जिनसे गत लोकसभा चुनावों के समय उनकी आमदनी दोगुना करने का झांसा दिया गया था. बाद में सरकार अपने इस वायदे से मुकर गयी और सर्वोच्च न्यायालय में लिखित रूप से कहाकि किसानों की आमदनी को डेढ़ गुना नहीं किया जासकता. अब अचानक बजट भाषण में उनकी आमद डेढ़ गुना बढाने का दावा किया गया है. बिना यह बताये कि किसानों की जरूरत वाली चीजों के दाम कितने घटाए जायेंगे और सभी फसलों का समर्थन मूल्य कितना बढाया जाएगा. फसलों की मौजूदा कीमत में लगभग पचास फीसद बढ़ोत्तरी की दरकार है और पिछले साढ़े तीन साल के अनुभव बताते हैं कि समर्थन मूल्यों में मामूली वृध्दि ही होगी. फसल बीमा योजना के आंकड़े बताते हैं कि उसके जरिये निजी क्षेत्र की कंपनियों ने अरबों रुपये प्रीमियम के रूप में किसानों की जेब से निकलवा लिए और फसल हानि की भरपाई के नाम पर उन्हें प्याज के टुकड़े ही मिले.
मध्यवर्ग और अच्छी तनख्वाह पाने वाले जिनका बड़ा हिस्सा भाजपा और उसकी सरकार का पिट्ठू बना हुआ है, को उम्मीद थी कि उन्हें आयकर आदि में रियायतें मिलेंगी. लेकिन उन्हें इस बजट से भारी निराशा हुयी है. सरकार की ठग प्रवृत्ति का इससे बढ़ा उदहरण क्या मिलेगा कि पेट्रोल डीजल पर दो फीसद उत्पाद कर घटाया तो उतना ही उस पर सेस लगा दिया. अंबानी का पेट्रोल महँगा बिक सके इसलिये विश्व बाज़ार में कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद उसे उपभोक्ताओं के लिए महंगा बनाया हुआ है. नोटबंदी और जीएसटी से लुटा पिटा लघु उद्यमी और व्यापारी राहत की आस लगाए बैठा था मगर उसे भी निराशा ही हाथ लगी है. महिलाओं की मौजूदा स्थिति में बदलाव शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सुरक्षा के जरिये ही आसकता है, पर बजट इस पर मौन है.
मजदूर वर्ग इस सरकार की प्राथमिकता में कभी नहीं रहा और इस बजट में भी उसकी घनघोर उपेक्षा की गयी है. यहाँ तक कि ग्रामीण रोजगार देने वाली मनरेगा को भी अपेक्षित बजट आबंटन नहीं मिला. शिक्षा का बजट 4 फीसद भी नहीं किया गया. सरकार शिक्षा ऋण पर जोर देती रही है. पर बिना रोजगार की गारंटी किये यह ऋण उन्हें पकोड़ा बेचने को ही बाध्य करेगा और यही सरकार की मंशा भी है. रोजगार देने वाली योजनाओं की नामौजूदगी और चार साल में कीगयी उपेक्षा से नौजवानों में भारी निराशा है. वे आवेदनों की लहीम सहीम फीस, साक्षात्कारों के बाद भी नियुक्तियां न होने और भर्ती की आयुसीमा घटने से भी नाखुश हैं. उज्ज्वला योजना ने इस सरकार को वोट दिलाये हैं अतएव उसे जारी रखा गया है. लेकिन बहुचर्चित स्वास्थ्य बीमा योजना का धन बीमा कंपनियां हडप जायेंगी और इसका भी हश्र फसल बीमा योजना जैसा होगा.
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपालों और सांसदों के वेतनों में अप्रत्याशित वृध्दि गरीबों और आम जनता के जले पर नमक छिडकने वाली है.
आज़ादी के बाद यह पहला बजट है जिसमें एक भी नई रेल चलाने या उनके फेरे बढाने की कोई घोषणा नहीं हुयी. बुलट ट्रेन के सपने दिखाने वाली सरकार को आम आदमी की सुगम यात्रा की कोई फ़िक्र नहीं है.
जहां तक हाथरस का सवाल है यहाँ के लोगों को आशा थी कि उन्होंने भाजपा को सांसद, विधायक और नगरपालिका का चेयरमेन दिया है, इसका उसे पुरूस्कार मिलेगा. लेकिन हाथरसवासियों को न तो कोई नयी ट्रेन मिली न बहुप्रतीक्षित ओवरब्रिज. न कोई उद्योग मिला न शिक्षण संस्थान. हाथरस के लोग अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं.
इस सरकार का पिछला बजट भी इसी तर्ज पर था. इसने भी गरीबी अमीरी की खाई को चौड़ा किया है. ओक्सफेम की रिपोट के अनुसार 2017 में अर्जित कुल संपत्ति का 73 प्रतिशत भाग मात्र एक प्रतिशत लोगों के हाथों में चला गया जबकि शेष 99 प्रतिशत लोगों को इसका केवल 27 प्रतिशत हिस्सा ही मिला. इन 1 प्रतिशत लोगों की संपत्तियां बढ़ कर 20. 9 लाख करोड़ होगयी हैं. इस सर्वेक्षण के अनुसार देश की कुल संपत्ति का 58 फीसद भाग एक फीसद लोगों के पास है जबकि विश्व स्तर  पर यह अनुपात कम है और 1 फीसद लोगों के पास 50 फीसद संपत्ति है. जाहिर है भारत में गरीबी और अमीरी की खाई दुनिया में सबसे अधिक है और इसी विषमता पर पर्दा डालने को भाजपा और संघ परिवार कृत्रिम मुद्दे उठा कर हिन्दू मुस्लिम विभाजन पैदा कर रहे हैं.

डा. गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश 

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शनिवार, 13 जनवरी 2018

नेतान्याहू की भारत यात्रा पर 15 जनवरी को विरोध प्रदर्शन करेंगे वामपंथी दल



लखनऊ- 13 जनवरी 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश एवं भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी ) के सचिव का. हीरालाल ने कहाकि इजरायल के प्रधानमंत्री नेतान्याहू के भारत आगमन का उत्तर प्रदेश में पुरजोर विरोध किया जायेगा. उन्होंने दोनों पार्टियों की जिला कमेटियों का आह्वान किया कि वे दूसरे वामपंथी दलों, धर्मनिरपेक्ष और साम्राज्यवाद विरोधी ताकतों को साथ लेकर विरोध प्रदर्शन करें और महामहिम राष्ट्रपति को संवोधित ज्ञापन भेजें.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में नेताद्वय ने कहाकि हाल के दिनों में हमारी घोषित राष्ट्रीय नीति और परंपराओं में प्रतिगामी बदलाव हुये जिसके परिणामस्वरूप नेतान्याहू के भारत आगमन पर लाल कारपेट्स बिछाये जारहे हैं. भारतीय समाज सदैव से फिलिस्तीनियों के साथ खड़ा रहा है और आज भी वह अमेरिका समर्थित इजरायल की दादागीरी के विरुध्द है.
आपत्तिजनक बात यह है कि 6 दिसंबर 2017 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देदी. यह कदम अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और पश्चिमी तट और पूर्वी जेरुशलम पर इजरायल के कब्जे के खिलाफ सुरक्षा परिषद् में पारित विभिन्न प्रस्तावों के खिलाफ है. जेरुशलम अंतर्राष्ट्रीय संप्रभुता के अधीन है और इजरायल उसके किसी हिस्से पर दावा नहीं कर सकता. लेकिन इजरायल ने पूर्वी जेरुशलम पर 1967 से कब्ज़ा जमा रखा है.
अब ट्रंप द्वारा लिए गए इस अपराधिक फैसले के खिलाफ उसी दिन से सभी जगह विरोध प्रदर्शन होरहे हैं. विरोध प्रदर्शन करने वाले 10 फिलिस्तीनी मारे जाचुके हैं और 170  बच्चों सहित 600 लोग गिरफ्तार किये गए हैं.
आज भारत इजरायली हथियारों का सबसे बड़ा खरीददार है. आज इजरायल के साथ किसी भी सहयोग का मतलब अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और फिलिस्तीनियों के अधिकारों का हनन है. हथियारों की खरीद अथवा अन्य व्यापारिक गतिविधियों से इजरायल के पास पहुँचने वाला हमारा धन फिलिस्तीनियों के दमन और उनकी भूमियों पर कब्जा करने की इजरायली कारगुजारी को मजबूत करता है.
भारत में नेतान्याहू का स्वागत इजरायल के अपराधों का खुला समर्थन है. उत्तर प्रदेश और देश भर के सभी प्रगतिशील लोगों को इसका विरोध करना चाहिये. फिलिस्तीनियों के उत्पीडन की हर कार्यवाही पर हमें प्रतिरोध जताना चाहिए. आज फिलिस्तीनियों के साथ खड़े होना धर्मनिरपेक्षता, समानता और न्याय के साथ खड़ा होना है. आज हम अपने समाज में भी इन उद्देश्यों के लिए संघर्षरत हैं. ये मूल्य भारत की फिलिस्तीनियों के प्रति लंबे समय से चली आरही एकजुटता के आधार स्तंभ हैं. आज नेतान्याहू के कूटनीतिक दौरे का प्रबल विरोध करके हमें फिर से अपनी परंपरागत  एकजुटता को पुनर्जीवित और पुनर्स्थापित करना होगा. हमें इजरायल से नए व्यापारिक सौदों से परहेज करना होगा और पुरानों को रद्द करने पर विचार करना होगा.
अतएव हम उत्तर प्रदेश के प्रबुध्द लोगों से अपील करते हैं कि वे नेतान्याहू के भारत दौरे के खिलाफ 15 जनवरी को विरोध प्रदर्शन करें. भाकपा और माकपा ने अपनी सभी इकाइयों से भी अपील की है कि वे जनता के व्यापक हिस्सों को विरोध प्रदर्शन में उतारें.

जारी द्वारा-

डा. गिरीश, राज्य सचिव


भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

बाराबंकी- जहरीली शराब काण्ड के लिये राज्य सरकार जिम्मेदार : भाकपा



लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने बाराबंकी में जहरीली शराब पीने से दर्जन भर नागरिकों की मौत पर गहरा दुःख प्रकट किया है और शोक संतप्त परिवारोंb के प्रति गहरी संवेदनाओं का इजहार किया है. भाकपा ने हर मृतक के परिवार को रूपये 10 लाख और इलाज करा रहे लोगों को रुपये 2 लाख की आर्थिक सहायता तत्काल दिए जाने की मांग की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने इस बात पर हैरत जतायी कि चन्द माह पूर्व जनपद एटा के अलीगंज में जहरीली शराब से हुयी कई दर्जन लोगों की मौतों से मौजूदा राज्य सरकार ने कोई सबक नहीं लिया और एक और ह्रदयविदारक हादसा होगया. सरकार की संवेदनहीनता का इससे बढ़ा उदहारण क्या होगा कि प्रशासन ने मुआबजे का लालच देकर पीड़ित परिवारों से बयान दिलवाए कि मौतें ठंड के कारण हुयी हैं. सच तो यह है कि इन मौतों के लिये केवल और केवल राज्य सरकार और उसकी मशीनरी जिम्मेदार है.
भाकपा ने कहा की सरकार को इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिये और नीचे से ऊपर तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जानी चाहिये.

डा. गिरीश,  

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बुधवार, 20 दिसंबर 2017

विद्यत दरों में वृध्दि के खिलाफ प्रदेश भर में सडकों पर उतरे वामपंथी



लखनऊ-  राज्य सरकार द्वारा 30 नवंबर को बिजली के दामों में की गयी भारी वृध्दि के विरोध में वामपंथी दलों ने आज समूचे उत्तर प्रदेश में जुझारू प्रदर्शन किये और जगह जगह राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपे गये. ज्ञापनों में जनता, किसानों और व्यापारियों की कमर तोड़ देने वाली इस वृध्दि को तत्काल वापस लेने की मांग की गयी है.
ज्ञातव्य हो कि प्रदेश में 29 नवंबर तक निकाय चुनाव होरहे थे, जिनके पूरे होते ही अगले दिन बिजली की कीमतों में बढ़ोत्तरी का यह तोहफा भाजपा सरकार द्वारा जनता के ऊपर थोप दिया गया. वामदलों ने 1 नवंबर को बैठक कर इसको वापस लेने की मांग की अन्यथा सडकों पर उतरने की चेतावनी डी थी. तदनुसार 12 से 19 दिसंबर तक जन अभियान चलाया गया जो पूर्ण सफल रहा और आज जिलों जिलों में शानदार प्रदर्शन किये गये जिनकी खबरें राज्य मुख्यालय को लगातार प्राप्त होरही हैं. वामपंथी दलों ने दावा किया है कि इन प्रदर्शनों में बीस हजार से अधिक जनता सडकों पर उतरी.
सबसे शानदार प्रदर्शन सहारनपुर में हुआ जहाँ पांच सौ से अधिक किसान मजदूर जिनमें बड़ी संख्या में महिलायें शामिल थीं, ने स्थानीय गांधी पार्क से कलक्ट्रेट तक जुझारू तेवरों के साथ जुलूस निकाला. भीषण नारेबाजी के बाद यह प्रदर्शन सभा में तब्दील होगया. सभा को भाकपा के सचिव जनेश्वर उपाध्याय, सहसचिव शहनाज बेगम, शरीफ अहमद, मेयर प्रत्याशी रहे फरीद अहमद, भाकपा(मा.) के तिलक राजभाटिया, सचिव राव दाऊद व नवनीत और माले के मेलाराम ने संबोधित किया. मुरादाबाद में भी भाकपा, माकपा, माले और एसयूसीआई के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक प्रदर्शनकारी जुलूस निकाला और कलेक्ट्रेट पर पहुँच कर सभा की और ज्ञापन दिया. बलिया में रेलवे स्टेशन से कलेक्ट्रेट तक सैकड़ों भाकपा कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला, सभा की गयी और ज्ञापन सौंपा गया. भाकपा नेता दीनानाथ सिंह आदि ने सभा को संबोधित किया.
इलाहाबाद में वामपंथी दलों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर शानदार प्रदर्शन किया, सभा की और ज्ञापन सौंपा. इससे पूर्व सात दिनों तक संयुक्त रूप से जन अभियान भी चलाया गया. यह संपूर्ण अभियान भाकपा राज्य कार्यकारिणी के सदस्य नसीम अंसारी, सीपीएम के जिला सचिव अखिल, माले के सचिव कमाल उसरी और एसयूसीआई-सी के सचिव राजेन्द्र सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुआ. शाहजहांपुर में भाकपा ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा. आम सभा को वरिष्ठ नेता रमाशंकर, जिला सचिव मो. सलीम तथा सुरेश कुमार नेताजी ने संबोधित किया. इससे पहले सप्ताह भर तक चले अभियान में सभाएं, जन चौपाल और पुतला दहन आदि आयोजित किये गए.
मथुरा में भाकपा नेता का. गफ्फार अब्बास एडवोकेट और भाकपा- माले के सचिव का. नसीर शाह के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं द्वारा जिला कलेक्ट्रेट से जुलूस निकाला गया और केंट स्थित बिजली घर का घेराव किया गया. कई घंटों के प्रदर्शन और सभा के बाद विद्युत् अभियंता को ज्ञापन सौंपा गया. मैनपुरी में भाकपा के जिला सचिव का. रामधन और किसान सभा के सचिव राधेश्याम यादव के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना एवं सभा का आयोजन किया गया और ज्ञापन सौंपा गया.
अलीगढ में भाकपा और माकपा के संयुक्त तत्वावधान में जिला कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन उप नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा गया. भाकपा सचिव प्रो. सुहेव शेरवानी एवं माकपा के नेता मो. इदरीस के नेतृत्व में हुए इस आन्दोलन में रामबाबू गुप्ता एवं इकबाल मंद आदि प्रमुख रूप से शामिल थे. हाथरस में भाकपा कार्यकर्ताओं ने एसडीएम सदर के कार्यालय पर धरना दिया और सभा की. ज्ञापन उप जिलाधिकारी को सौंपा गया. जिला सचिव का. चरणसिंह बघेल के नेतृत्व में हुये इस कार्यक्रम में सत्यपाल रावल, संजय खां, राजाराम कुशवाहा, आर. डी. आर्य एवं गीतम सिंह आदि प्रमुखतः मौजूद रहे.
जनपद मऊ में भाकपा, भाकपा (मा.), भाकपा- माले तथा एसयूसीआई ने गाजीपुर चौराहे से संयुक्त जुलूस निकाला जो कलक्ट्रेट पहुँच कर सभा में परिवर्तित होगया. सभा को भाकपा के पूर्व विधायक इम्तेयाज़ अहमद, विनोद राय, रामसोच यादव, इतवारी देवी, माकपा के वीरेन्द्र व शेरबहादुर, माले के वसंत व विनोद सिंह, एसयूसीआई के शैलेन्द्र तथा त्रिभुवन ने संबोधित किया. चंदौली में भाकपा और माकपा के कार्यकर्ताओं ने एसडीएम चकिया के कार्यालय पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जिसका नेतृत्व माकपा नेता रामअचल यादव एवं भाकपा नेता सुखदेव मिश्र ने किया. भदोही में भी भाकपा, माकपा और माले के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा.
आजमगढ़ में भाकपा, माकपा और माले के कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया जिसका नेत्रत्व श्रीकांत सिंह और रामायण सिंह आदि ने किया. मेरठ में भाकपा नेता शरीफ अहमद, माकपा सचिव रजनीश और आरएसपी के रंजीत वर्मा के नेतृत्व में सैकड़ों वामपंथियों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया. गोरखपुर में सीपीआई और सीपीएम के कार्यकर्ताओं ने गांधी प्रतिमा पर धरना दिया जिसमें महिलाओं की भी अच्छी भागीदारी थी. देवरिया में जिला मुख्यालय और सलेमपुर तहसील पर धरने दिए गए. कासगंज और एटा में भी भाकपा और माकपा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किये.
कुशीनगर में भाकपा और माकपा के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया. हरदोई में भी जिला मुख्यालय पर धरना दिया गया. इटावा में माकपा ने मुकुट सिंह के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा. बुलंदशहर में जिला मुख्यालय पर माकपा ने तो भाकपा ने स्याना में प्रदर्शन किया. कानपूर में माकपा और भाकपा कार्यकर्ताओं ने बड़े चौराहे से कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकाल कर ज्ञापन सौंपा. जनपद जालौन के जिला मुख्यालय उरई में गत दिन ही भाकपा द्वारा प्रदर्शन किया जाचुका है.
राजधानी लखनऊ में भाकपा, माकपा और भाकपा- माले के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एक शानदार जुलुस माकपा कार्यालय से निकाला जो विधानसभा मार्ग, हजरतगंज चौराहा होते हुए शक्ति भवन पहुंचा. वहां भीषण नारेबाजी और सभा के बाद ज्ञापन विद्युत् अधिकारी को सौंपा गया. सभा को आशा मिश्र, मो. खालिक, कांती मिश्र, परमानन्द द्विवेदी, मो. अकरम, कल्पना पाण्डेय, प्रदीप शर्मा, आर.एस. बाजपेयी, सीमा राना, नंदिनी बोरकर तथा रमेश सिंह सेंगर आदि ने संबोधित किया.
बांदा में भाकपा और माले ने अशोक लाट चौराहे पर धरना दिया और सभा की. सभा को राम चन्द्र सरस, रामधारी भाई, वकार अहमद, श्यामबाबू तिवारी तथा राम प्रवेश ने संवोधित किया. चित्रकूट में जनपद और तहसील मुख्यालयों पर अमित यादव के नेतृत्व में प्रदर्शन किये गए. सभाओं को राम प्रसाद, विनोद पाल और संदीप पांडे आदि ने संवोधित किया.
जौनपुर में भाकपा, माकपा और एसयूसीआई  ने पोलिटेक्निक चौराहे से कलेक्ट्रेट तक जुलूस निकला और आम सभा की. सभा को कल्पनाथ गुप्ता, सालिग्राम पटेल, सुभाष पटेल, आर. आर. यादव, सत्यनारायण पटेल, ऊदल यादव, किरणशंकर रघुवंशी तथा रविशंकर मौर्या ने संबोधित किया. गोंडा में भाकपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय पर धरना दिया, आम सभा की और ज्ञापन दिया. भाकपा के सुरेश त्रिपाठी, दीनानाथ त्रिपाठी, रघुनाथ, माकपा के राजीव तथा माले के जमाल ने संबोधित किया. बरेली में भी भाकपा ने ज्ञापन सौंपा.
वामपंथी दलों का कहना है कि बिजली के दामों में हुयी इस वृध्दि से महंगाई में और अधिक वृध्दि होगी और पहले से भारी तबाही झेल रहे किसान और तवाह होंगे. किसानों गरीबों और आम जनता पर बढ़ोत्तरी थोपना और उद्योगपतियों को छूट देना योगी सरकार के दोगले चरित्र को उजागर करता है. वामदलों ने आज इन प्रदर्शनों के माध्यम से जनता के आक्रोश को दर्ज करा दिया है और यह आन्दोलन आगे भी जारी रहेगा. वामदलों के नेताओं ने इस आन्दोलन कजो सफल बनाने के लिए वामपंथी कार्यकर्ताओं और आम जनता को बधाई दी है.
जारी द्वारा-
डा. गिरीश, राज्य सचिव
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सोमवार, 11 दिसंबर 2017

नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टियों की जीत पर भाकपा ने दी बधाई



लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कौंसिल की दो दिवसीय बैठक यहां भाकपा राज्य मुख्यालय पर संपन्न हुयी, बैठक की अध्यक्षता भाकपा के वरिष्ठ नेता कामरेड नसीम अंसारी ने की.
बैठक में अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और उत्तर प्रदेश के राजनैतिक हालातों पर एक विस्तृत रिपोर्ट राज्य सचिव डा. गिरीश ने प्रस्तुत की जिस पर हुयी व्यापक चर्चा में 30 प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
अंतर्राष्ट्रीय जगत पर हुयी चर्चा में प्रतिनिधियों ने नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टियों की एकतरफा जीत पर भारी खुशी का इजहार किया और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियों के नेताओं कार्यकर्ताओं और आम जनता को बधाई दी. ऐसे समय जब कार्पोरेटी ताकतें, उनकी पिट्ठू सरकार और मीडिया कम्युनिस्ट पार्टियों और कम्युनिस्टों की समाप्ति की घोषणा करते नहीं थकते उस समय नेपाल में कम्युनिस्टों की भारी जीत भारत समेत तमाम दुनियां के शोषितों- पीड़ितों को उनकी मुक्ति के प्रति भरोसा जताता है. नेपाल में कम्युनिस्ट पार्टियों की यह एकता भारत में कम्युनिस्ट और वामपंथी एकता के प्रति प्रेरित करती है.
बैठक में अमेरिका द्वारा येरुशलम को इजरायल की राजधानी के रूप में मान्यता देने और वहां दूतावास स्थापित करने के कदम की कड़े शब्दों में निंदा की. अमेरिका का यह कदम प्रभुत्ववादी है जिससे उस क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है और शांति स्थापित करने की प्रक्रिया बाधित हुयी है. यह कदम स्वयं अमेरिका की पूर्व की स्थिति के विपरीत है और यूरोपियन यूनियन के देशों सहित अनेक देशों ने इसकी आलोचना की है. भारत की हमेशा यह दृढ राय रही है कि फिलिस्तीन की समस्या का हल बातचीत के जरिये निकाला जाना चाहिए, अतएव भारत सरकार को तत्काल अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करनी चाहिये, बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है.
राज्य काउंसिल बैठक में पारित रिपोर्ट में कहा गया है कि केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह जनता के हितों की उपेक्षा कर रही हैं और और पूंजीपति वर्ग, खास कर कार्पोरेट घरानों को मजबूत कर रही हैं. इन सरकारों की नीतियों के परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में गिरावट आयी है, निर्यात में कमी आयी है, बेरोजगारी बढ़ी है, भ्रष्टाचार के तमाम मामले सामने आरहे हैं, किसानों की हालत बदतर होरही है, दलितों अल्पसंख्यकों और अन्य सभी कमजोरों पर हमले बढ़ रहे हैं. भाजपा द्वारा किये गए तमाम वायदे आज जुमले साबित होचुके हैं.
उत्तर प्रदेश में भी योगी सरकार के आठ माह के शासनकाल में अपराधों ने पैर पसारे हैं. बलात्कार, सामूहिक बलात्कार और बलात्कार के बाद हत्याओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं लेरहा. राजधानी लखनऊ तक में आये दिन होरही बलात्कार की घटनायें राज्य सरकार के दाबों की कलई खोल रही हैं. सरकारी विभागों और पुलिस विभाग के भ्रष्टाचार ने आम लोगों को परेशान कर रखा है. दबंगई और गुंडई से जनता बदहाल है और पुलिस- प्रशासन नत- मस्तक है.
भाजपा की इन नीतियों के चलते जनता का उससे मोहभंग हुआ है. अपनी करतूतों और असफलताओं  से जनता का ध्यान हठाने को भाजपा और संघ परिवार संवेदनशील मुद्दों को हवा देता रहता है. ये भाजपा की विफलताओं का ही परिणाम है कि हाल में देश में हुए कई उपचुनावों में भाजपा की करारी हर हुयी है. उत्तर प्रदेश निकायों में भी नगर निगमों में अधिक सीट जीतने के अलाबा अन्य सभी जगहों पर हर तरीके से भाजपा को पराजय का मुहँ देखना पड़ा है. सरकार की असफलताओं से आक्रोशित जनता के तमाम हिस्से आंदोलनरत हैं और सडकों पर उतर रहे हैं.
भाकपा राज्य कौंसिल ने इस दरम्यान की गयी अपनी तमाम गतिविधियों की समीक्षा की और आगे के अभियानों की रूपरेखा तैयार की. निकाय चुनावों में भाकपा ने सीमित तौर पर भाग लिया. पार्टी बांदा जनपद की अतर्रा नगरपालिका परिषद् के अध्यक्ष पद पर सम्मानजनक मतों से विजयी हुयी हुयी है और सात सभासद के पद हासिल करने में कामयाब रही है. पार्टी के एक दर्जन से अधिक सभासद और एक नगर पंचायत अध्यक्ष और भी निर्वाचित हुए हैं जिनको सिम्बल नहीं दिया जसका था.
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली की दरों में की गयी अप्रत्याशित वृध्दि के खिलाफ अन्य वामपंथी दलों के साथ मिल कर कल- 12 से 19 दिसंबर तक जनाभियान चलाने और 20 दिसंबर को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने का निश्चय किया है. जन अभियान के तहत सभाएं नुक्कड़ सभायें और जनता चौपाल लगाने का आह्वान किया गया.
26 जनवरी को संविधान, लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता की रक्षा दिवस मनाने का निर्णय किया गया.
भाकपा का हर तीन वर्ष बाद होने वाला राज्य सम्मेलन 16 से 18 मार्च 2018 को जनपद मऊ में आयोजित होगा. सभी जिला सम्मलेन 15 फरवरी तक पूरे कर लिए जायेंगे.

डा. गिरीश 

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बुधवार, 6 दिसंबर 2017

बाबरी मस्जिद ध्वंस की वरसी पर वाम दलों ने उत्तर प्रदेश में काला दिवस आयोजित किया



लखनऊ- 6 दिसंबर  बाबरी मस्जिद की 25 वीं शहादत और डा. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर वामदलों ने आज समूचे प्रदेश में कला दिवस मनाया. इस अवसर पर धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र की रक्षा और दलितों अल्पसंख्यकों और शोषितों की सुरक्षा के संकल्प के साथ धरने, प्रदर्शन और सभायें की गयीं तथा जिलाधिकारियों के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को संवोधित ज्ञापन प्रेषित किये गये.
राजधानी लखनऊ में भाकपा, माकपा, भाकपा- (माले), एसयुसीआई- सी और फारवर्ड ब्लाक ने हजरतगंज स्थित डा. अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष प्रदर्शन और सभा की. मथुरा में वामदलों ने जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया. सोनभद्र में राबर्ट्सगंज जिला मुख्यालय पर धरना दिया गया तो इलाहाबाद में गोष्ठी और धरना डिया गया. फरुखाबाद में फरुखाबाद जिला मुख्यालय और कायमगंज तहसील दोनों ही जगह कला दिवस मनाया गया. बदायू में भाकपने कई संगठनों के साथ प्रदर्शन किया तो बलिया और अलीगढ़ में काली पट्टियां बाँध कर विरोध जताया गया.
समाचार लिखते  वक्त भी राज्य मुख्यालय पर वामदलों द्वारा जिलों में आयोजित किये गए विरोध प्रदर्शनों की लगातार रिपोर्टें मिल रही हैं.

डा. गिरीश 

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शुक्रवार, 1 दिसंबर 2017

बिजली दरों में बढ़ोत्तरी की भाकपा ने निन्दा की: जिला इकाइयों को विरोध प्रदर्शन का दिया निर्देश



 लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने बिजली के दामों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी की कठोर शब्दों में निंदा की. पार्टी ने जनहित में इस बढ़ोत्तरी को तत्काल वापस लेने की मांग की.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि निकाय चुनावों में भोले- भाले मतदाताओं से वोट हथिया लेने के बाद भाजपा सरकार ने उन्हें महंगी बिजली का तोहफा दिया है. आम लोग जब नए साल का जश्न मना कर चुके होंगे तब उनके हाथों में नये और बढे हुये बिजली बिल का बधाई पत्र होगा. यह ऐसी बढ़ोत्तरी है जो हर वर्ग, हर तबके पर थोपी गयी है. शहरी और ग्रामीण गरीब हों या किसान सभी को निशाना बनाया गया है. इससे पहले से ही आसमान छूरही महंगाई और भी बड़ेगी और आम जनता का जीवन और भी कठिन होजायेगा.
भाकपा राज्य सचिव ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के आठ माह के कार्यकाल में बिजली के उत्पादन, वितरण और उसकी उपलब्धता की दर में कोई सुधार नहीं आया और वह पिछली सरकारों से भी पिछड़ गयी है. लेकिन बहुमत के नशे में चूर सरकार अपनी अक्षमता का भार आम जनता के ऊपर लाद रही है. यह सब जनता की बर्दाश्त की सीमा से बाहर जारहा है.
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने अपनी जिला इकाइयों से अपील की है कि वे इस बढोत्तरी का पुरजोर विरोध करें. लगातार विरोध प्रदर्शन संगठित करें और इनमें वामपंथी जनवादी दलों और शक्तियों का साथ लें.

डा. गिरीश 

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रविवार, 5 नवंबर 2017

भाकपा और एटक का प्रतिनिधिमंडल कल ऊंचाहार में



लखनऊ- 5 नवंबर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस ( एटक ) का एक राज्य स्तरीय प्रतिनिधिमंडल 6 नवंबर, सोमवार को ऊंचाहार पहुंचेगा. प्रतिनिधिमंडल वहां एनटीपीसी हादसे के पीड़ितों से मुलाक़ात कर उनका दर्द बांटेगा. कर्मचारी यूनियनों और प्रबंधतंत्र से मिल कर दुर्घटना के कारणों और दुर्घटना से हुयी हानि के बारे में समझने की कोशिश करेगा. प्रतिनिधिमंडल वहां पत्रकारों से भी बातचीत करेगा.
प्रतिनिधिमंडल में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश, एटक के संरक्षक का. अरविन्द राज स्वरूप, इप्टा के प्रांतीय महामंत्री संतोष डे तथा भाकपा राज्य काउंसिल के सदस्य का. ओमप्रकाश आनन्द आदि प्रमुख रूप से शामिल होंगे.

डा. गिरीश 

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शनिवार, 4 नवंबर 2017

चंद्रशेखर पर रासुका की कार्यवाही की भाकपा ने निंदा की : माननीय उच्च न्यायालय और राज्य निर्वाचन आयोग से संज्ञान लेने का अनुरोध किया.



लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने सहारनपुर जिला प्रशासन द्वारा भीम सेना के संस्थापक श्री चंद्रशेखर "रावण" पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत की गयी कार्यवाही की कड़े से कड़े शब्दों में भर्त्सना की है. भाकपा ने चंद्रशेखर पर थोपी गयी रासुका को फ़ौरन हठाये जाने की मांग की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि भाजपा की उत्तर प्रदेश सरकार पूरी तरह से दमनचक्र पर उतारू है और वह कमजोर लोगों पर होरहे अत्याचारों के खिलाफ उठ रही हर आवाज को दबा देना चाहती है. सहारनपुर प्रकरण में पहले एकतरफा कार्यवाही करते हुए चंद्रशेखर को संगीन दफाओं में जेल में डाला और अब जब माननीय उच्च न्यायालय ने उन्हें चार मामलों में जमानत दे दी, तो न्यायालय के आदेशों को निष्प्रभावी करने को उन पर रासुका की कार्यवाही कर दी.
भाकपा राज्य सचिव ने माननीय उच्च न्यायालय से भी अनुरोध किया है कि दमन के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाने वाली इस कार्यवाही का संज्ञान लेते हुये जिला प्रशासन को तलब करें. भाकपा ने राज्य निर्वाचन आयोग से भी मांग की कि वह आचार संहिता लागू रहने के दरम्यान राजनैतिक लाभ उठाने के उद्देश्य  से की गयी इस कार्यवाही का को रद्द करने को कदम उठायें.
भाकपा राज्य सचिव ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह दलितों के वोट हड़पने को कथित दलित नेताओं को पार्टी में शामिल कर ऊंचे पदों पर बैठालती है, वहीं दलितों- कमजोरों के हित में आवाज उठाने वालों के साथ मुजरिमाना व्यवहार करती है. सरकार की इस कार्यवाही से वे कथित दलित नेता बेनकाव होगये हैं जो सत्ता सुख भोगने के लिए अथवा कार्यवाही के भय से इस संगीन मगर मानवीय प्रश्न पर चुप्पी साधे बैठे हैं, डा. गिरीश ने कहा है.

डा. गिरीश 

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गुरुवार, 2 नवंबर 2017

रसोई गैस के दामों में भारी वृध्दि वापस ले सरकार: भाकपा



लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य इकाई ने रसोई गैस के दामों में हुयी भारी बढ़ोत्तरी की कड़े शब्दों में निंदा की है और जनहित में इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है. पार्टी ने दो पहिया वाहनों की बीमा फीस बढाने की भी आलोचना की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि घरेलू गैस के गैर सब्सिडी वाले सिलिंडरों की कीमतों में 93. 50 रूपये, कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में 146. 50 रुपये तथा सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत में 4. 56 रुपये प्रति सिलेंडर की वृध्दि कर दी गयी है. इससे  स्पष्ट है कि सरकार गरीब और आम लोगों लोहे के डंडे से हांक रही है.
इन बढ़ोत्तरियों का सीधा प्रभाव बाज़ार मूल्यों पर पडेगा और पहले से ही आम और गरीब लोगों को हलकान कर रही महंगाई तेजी से छलांग भरेगी. नोटबंदी और जीएसटी से चौपट पड़ा व्यापार और भी चौपट होजायेगा. लेकिन सरकार ने मानो जनता और उद्योग व्यापार तथा कृषि को बर्वाद करने की ही ठान ली है.
यह आकस्मिक नहीं है कि जब सरकार को कोई जनविरोधी कार्यवाही करनी होती है तो सरकार समर्थक संगठन उससे पहले ही संवेदनशील मुद्दों को हवा देना शुरू कर देते हैं. राम मंदिर के नाम पर उनकी ताजा मुहीम सरकार के इन कदमों पर पर्दा डालने और गुजरात, हिमाचल प्रदेश विधान सभाओं और उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों में वोट हासिल करने की कवायद के अलावा कुछ नहीं है क्योंकि हर कोई जानता है कि मंदिर मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है.
भाकपा ने चेतावनी दी कि चुनाव आचार संहिता की समाप्ति के बाद जनता को तवाह करने वाले इस सवाल को जनता के बीच लेजाया जायेगा.

डा. गिरीश 

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बुधवार, 1 नवंबर 2017

रायबरेली हादसे पर भाकपा ने गहरा दुःख जताया: राहत और वाचाव कार्य सेना को सौंपे जाने की मांग की



लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने रायबरेली के पावर प्लांट में हुयी ह्रदयविदारक घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि घटना की भयावहता को देखते हुये राहत और बचाव का काम सेना के सुपुर्द किया जाना चाहिये, घायलों को एयर एम्बुलेंस से उचित चिकित्सालयों में भेजा जाना चाहिये, मृतकों के परिवारों को रुपये 25 लाख, अधिक घायलों को रुपये 5 लाख और कम घायलों को रु. 1 लाख तत्काल मुहैया कराया जाना चाहिये. घायलों की जान बचाने को हर संभव कार्य किया जाना चाहिये.
डा. गिरीश ने कहाकि यह हादसा एनटीपीसी की उस यूनिट में हुआ है जिसका निर्माण अभी अभी हुआ है और उसका ट्रायल ही चल रहा था. अतएव सभी के मन में इसके निर्माण में घपले- घोटाले का शक पैदा होना स्वाभाविक है. अतएव इस बड़े हादसे की सीबीआई जांच के आदेश तत्काल दिए जाने चाहिये और घटनास्थल के साक्ष्यों को सुरक्षित करने की गारंटी की जानी होगी.
डा. गिरीश ने कहाकि यह वक्त इस विकराल दुर्घटना के शिकार लोगों के प्रति संवेदनाओं के प्रकटीकरण का है और राजनीति करने का नहीं. लेकिन उत्तर प्रदेश में एक से एक बड़े हादसे होरहे हैं, इलाज और आक्सीजन के अभाव में बच्चे जान देरहे हैं, ह्त्या बलात्कार और लूट की तमाम वारदातें होरही हैं, लेकिन प्रधानमंत्रीजी जो इसी सूबे से सांसद हैं और स्वयं मुख्यमंत्रीजी मंदिर मठों मकबरों में सिजदा करने और देश विदेशों में विचरण करने में मस्त हैं. रायबरेली की इस मर्मान्तक घटना जिसमें कि अब तक 16 लोगों के जान गंवाने और सौ से अधिक के घायल होने की खबर है, के समय भी प्रदेश के मुख्यमंत्री देश से बाहर हैं. भाजपा की सरकारें जनता के प्रति कतई जबावदेह नहीं हैं.
डा. गिरीश 
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बुधवार, 25 अक्तूबर 2017

लाठीचार्ज की निंदा

योगीजी ने लाठीतंत्र में बदल दिया है लोकतंत्र को

भाकपा ने आंगनबाडीयों पर लाठी चार्ज की निंदा की


लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने राजधानी लखनऊ में गत दो दिनों में आंगनबाडी कार्यकर्ताओं पर किये गए लाठीचार्ज की कड़े  शब्दों में निन्दा की है.
एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि पिछले कई सालों से अपनी बाजिव मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्त्री आंदोलनरत हैं और विगत सालों में अनेक बार वे लखनऊ में भी धरने- प्रदर्शन करती रही हैं. लेकिन यह पहला अवसर है जब 48 घंटों में उन पर कई कई बार लाठीचार्ज हुआ और पुलिस ने इस कार्यवाही में सारी मर्यादायें लांघ दीं.
डा. गिरीश ने कहा कि योगी सरकार के अल्पकालिक कार्यकाल में काम मांग रहे लोगों पर तो बार बार लाठी चार्ज किया गया है, मेरठ में हाईकोर्ट बेच की मांग कर रहे अधिवक्ताओं पर भी भयानक तरीके से लाठीचार्ज किया गया. श्री योगी ने लोकतंत्र को लाठीतंत्र में बदल दिया है.
भाकपा ने सरकार से कहा कि वह रोजी रोटी की मांग कर रहे समाज के अभावग्रस्त तबकों के प्रति अपने रवैय्ये में परिवर्तन करे और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों को नसीहत दे कि वे भारतीयों से भारतीय जैसा व्यवहार करें, शत्रुओं जैसा नहीं. भाकपा ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है.
डा. गिरीश
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सोमवार, 16 अक्तूबर 2017

Some views on Octobar Revolution

 


अक्तूबर क्रांति और वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता

डा. गिरीश


कुछ प्रगतिशील और अतिवादी वाम- बुध्दिजीवी कहते हैं कि सोवियत संघ इसलिये बिखर गया कि समाजवादी क्रांति को एक ऐसे देश में निष्पन्न किया गया जो औद्योगिक रुप से पिछड़ा था. यह जारशाही रुस में क्रांतिकारी शक्तियों का स्वाभाविक निष्पाद नहीं था. अपितु लेनिन और उनकी पार्टी ने अनिच्छुक लोगों पर इसे थोप दिया था.
लेकिन यह सच नहीं है. लेनिन ने अपनी पुस्तक इम्पीरियलिज्म में कई नतीजे निकाले थे. उनके अनुसार औद्योगिक रुप से विकसित प्रत्येक देश में व्यापार, औद्योगिक पूंजी और बैंकें एकाधिकारवादी वित्तीय पूंजी में विलीन होजाते हैं जिन्हें उस राज्य की सत्ता का पूरा सहयोग हासिल रहता है. इस एकाधिकारवादी पूंजी के असमान विकास के चलते कोलौनीज के बंदरवांट के लिये विश्व युध्द अवश्यंभावी है. युध्द से उत्पन्न हालात भी क्रांति के लिये आधार तैयार करते हैं. पहले और दूसरे दोनों विश्व युध्दों ने क्रांति का रास्ता खोला. प्रथम विश्वयुध्द के बाद यदि रुस में समाजवादी क्रांति संभव हुयी तो दूसरे के बाद भारत सहित तमाम देश आजाद हुये.
लेनिन ने कहाकि समाजवादी क्रांति वहीं होगी जहां साम्राज्यवाद की चेन की कड़ियां सबसे कमजोर होंगी. जारशाही रुस साम्राज्यवादी शृंखला की सबसे कमजोर कड़ी है. उन्होने कहाकि एक देश में समाजवादी क्रांति का सफल होना संभव है क्योंकि वहाँ समाजवाद के निर्माण के लिये साम्राज्यवादी देशों के आपसी टकरावों को स्तेमाल किया जासकता है. अंतत: रूस में 1917 में क्रांति निष्पन्न हुयी.
तमाम कठिनाइयों का सामना करते हुये सोवियत संघ में समाजवाद के निर्माण का काम चल ही रहा था कि तीस के दशक में साम्राज्यवादी देशों ने उपनिवेशों के बंटवारे के लिये दूसरा विश्वयुध्द छेड़ दिया. निश्चय ही साम्राज्यवादी देशों के फासिस्टी खीमे को साम्राज्यवादी देशों का गैर फासिस्टी खीमा नहीं हरा सकता था. यह सोवियत संघ और उसकी लाल सेना ही थी जिसने हिटलर और उसके फासीवाद के खतरनाक इरादों को ध्वस्त कर दिया. यदि उस समय फासिज्म विजयी हुआ होता तो भारत की आजादी कम से कम 15 अगस्त 1947 की तिथि पर तो नहीं ही हुयी होती.
यह जल्द इसलिये संभव हुआ क्योंकि दूसरे विश्व युध्द के अंत ने विश्व में राजनैतिक शक्तियों के संतुलन को पूरी तरह बदल दिया था. फासीवाद ध्वस्त होचुका था. साम्राज्यवाद कमजोर हो गया था. सोवियत संघ सामरिक दृष्टि से मजबूत देश के रुप में उभरा था जिसका नैतिक बल दूसरे देशों से ऊंचा था. परिणामस्वरुप एक दशक के भीतर सारे औपनिवेशिक देशों ने आजादी हासिल कर ली. भारत उनमें सबसे पहला था जहाँ का राष्ट्रीय आंदोलन उन्नत मंज़िलें हासिल कर चुका था. सोवियत संघ की मदद से नव स्वतंत्र देशों ने अपनी आर्थिक आजादी की राह तलाशना शुरु कर दी.
ब्रिटिश- अमेरिकी सैनिक प्रतिरोध के बावजूद 1949 में चीन में समाजवादी क्रांति की जीत हुयी. 1950 में चीन और कोरियाई सेनाओं के संयुक्त प्रयासों से कोरिया में अमेरिका की हार हुयी. 1962 में सोवियत संघ की मदद से क्यूबा की क्रांति विजयी हुयी. 1974 में वियतनाम में अमेरिका की सबसे शर्मनाक पराजय हुयी. उसके बाद चिली में वोट के माध्यम से कम्युनिस्टों और सोशलिस्टों की सरकार बनी जिसे अमेरिकी साम्राज्यवाद ने सैनिक प्रतिक्रांति के जरिये कुचल दिया. यह वह दौर था जब पांचों महाद्वीपों के देशों में लाल परचम एक ताकत था. 1960 तक अपने निर्णायक हथियारों के बल पर सोवियत संघ साम्राज्यवादियों के बरावर की ताकत बन चुका था.
पर 1960 के बाद साम्राज्यवाद ने अपनी वित्तीय पूंजी के आधुनिकीकरण और उसके भूमंडलीकरण के लिये सचेतन कदम उठाये. वैज्ञानिक और तकनीकी क्रांति ने पूंजीवाद को उत्पादन के हर क्षेत्र में नयी उचाइयां हासिल करने में मदद की. लेनिन ने जिस साम्राज्यवाद की व्याख्या की थी वह नया चरित्र ग्रहण कर रहा था. इजारेदार राष्ट्रीय- राजकीय पूंजी वित्तीय पूंजी का भूमंडलीय ग्रिड बन गयी. लेकिन दुनियां के कम्युनिस्ट इन बदलावों से अनभिज्ञ थे और उन्होने मार्क्सवाद की किताबें तब खोलीं जब 1990 में सोवियत रूस का पतन होगया. वे लेनिन की इसी प्रस्थापना पर अटके रहे कि “साम्राज्यवाद पूंजीवाद के विकास की अंतिम स्टेज है. पूंजीवादी विश्व का एकमात्र भविष्य सामाजिक विघटन और समाजवाद में उसकी परिणति है.”
1960 से 80 के बीच बढत हासिल कर चुके विश्व पूंजीवाद ने मजदूरवर्ग पर हमले तेज कर दिये. सोवियत संघ को उसने हथियारों की होड़ में फंसने को मजबूर किया जिसे सोवियत संघ की अर्थव्यवस्था झेल नहीं पायी. आक्रामक कदम उठाते हुये साम्राज्यवादियों ने विकासशील देशों के राष्ट्रीय पूंजीपतिवर्ग को भूमंडलीकरण, निजीकरण और उदारीकरण की राह पर चलने को बाध्य किया. सोवियत संघ इस भूमंडलीय वित्तीय पूंजी की चुनौती का मुकाबला करने को आर्थिक और राजनीतिक रणनीति बनाने में असफल रहा. इससे समूचा विश्व परिदृश्य ही बदल गया. विजेता की हैसियत में विश्व साम्राज्यवाद ने हुंकार भरी कि “मार्क्सवाद मर चुका है और पूंजीवाद का कोई विकल्प नहीं है.”
आज अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय पूंजी इतनी शक्तिशाली होगयी है कि कुछ कल्याणकारी कार्यों के बल पर अपने शोषण को आसानी से छिपा रही है. इस तरह वह अभावग्रस्तों के क्रांतिकारी आंदोलनों की धार को कमजोरकर रही है. मोदी सरकार द्वारा चलायी गयी उज्ज्वला योजना, गरीबों के घरों में शौचालयों का निर्माण और अब मुफ्त बिजली कनेक्शन इसके ताजा उदाहरण हैं.
90 के दशक में विकासशील देशों द्वारा साम्राज्यवादी नीतियों के सामने घुटने टेक देने के बाद यूरोप में पूंजीवाद ने छलांग भरी. पर इसमें रोजगार की दर शून्य थी. इससे दुनियां का वातावरण बिगड़ा और विश्व बैंक के कर्जों का भार बढने लगा. अतएव हमें पुन: मार्क्सवाद की तह में जाना पड़ा. मार्क्स गत शताब्दी के महानतम बुध्दिजीवी घोषित किये गये.
साढे तीन दशक के घटनाक्रमों ने यह जाहिर कर दिया कि सारी बुराइयां कारपोरेट जगत के कुछ महारथियों के सिंडीकेट द्वारा पैदा की जारही हैं जिसका प्रबंधन अमेरिकी नियंत्रण वाली विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोश जैसी संस्थाओं के हाथ में है. भारत में चंद कारपोरेट घरानों की पूंजी में अप्रत्याशित इजाफा और गरीबी की सीमा के नीचे चले जारहे लोगों का अनुपात विस्मयकारी है.
इस व्यवस्था पर पहला विश्वव्यापी हमला 1999 में सियेटल में विश्व के लोगों ने बोला और तबसे प्रतिरोध की ताकतें निरंतर संगठित होती जारही हैं.
एकध्रुवीय विश्व की स्थिति का लाभ उठाते हुये अमेरिकी साम्राज्यवाद ने संयुक्त राष्ट्र संघ को समाप्त करने की ठानी. बढते भूमंडलीय तापमान, जैविक युध्द, बारुदी सुरंगें और खतरनाक हथियार हठाने तथा नस्लवाद जैसे सवालों पर उसने हाथ खींच लिये. उसने अंतरिक्ष में नाभिकीय हथियार स्थापित कर हर प्रकार के हमलों से सुरक्षित शक्ति बन जाने की की कोशिश की. इस एक ध्रुवीय विश्व के मंसूबे को बनाये रखने को अमेरिकी साम्राज्यवाद ने मुस्लिम पुनरुत्थानवादियों के साथ खुला खेल खेला. उसने इस्लामिक आतंकवाद को लोकतांत्रिक पार्टियों, ताकतों और राष्ट्रों को कमजोर करने और अपने हथियारों को कानूनी/ गैर कानूनी तरीके से बेचने को स्तेमाल किया. मुस्लिम पुनरुत्थानवाद का भयदोहन कर भारत में जड़ जमा रही हिंदुत्व की ताकतों को भी उसने समर्थन प्रदान किया. लेकिन 11 सितंबर 2001 को अमेरिकी आर्थिक प्रतिष्ठान पर हुये हमले ने अमेरिकी साम्राज्यवाद को अपनी कुछ रणनीतियों में परिवर्तन करने को बाध्य किया. स्टार वार उड़नछू होगया. आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लामबंदी के लिये संयुक्त राष्ट्र संघ की जरूरत महसूस की जाने लगी.
विश्व को एक ध्रुवीय बनाये रखने को अमेरिका ने साम्राज्यवाद के लिये चुनौती बने राष्ट्रों और नेताओं को समाप्त करने और साम्राज्यवादपरस्त टापुओं को मजबूत करने की नीति अपनाई. ईराक और लीबिया में सीधे सैनिक हस्तक्षेप के जरिये तख्ता पलट कराया. पाकिस्तान की सीमा में घुस कर ओसामा बिन लादेन का एनकाउंटर किया. अफगानिस्तान की बरवादी तक युध्द थोपे रखा. यूक्रेन और सीरिया में हस्तक्षेप किया लेकिन आतंकवाद के वाहक पुनरुत्थानवादी संगठनों और उनके पोषक देशों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की. उसने वेनेज्वेला आदि दक्षिण अमेरिकी देशों और उत्तर कोरिया के खिलाफ अघोषित युध्द छेड़ा हुआ है. लेकिन उत्तर कोरिया अमेरिकी साम्राज्यवाद के लिये खुली चुनौती बना हुआ है, और अब ट्रंप ने उससे वार्ता की पेशकश की है.
अक्तूबर क्रांति हमें याद दिलाती है कि हम अपने देश की परिस्थितियों के अनुसार संघर्षों की रूपरेखा तैयार करें. पडौसी देशोंसे हमारा टकराव न्यूनतम होना चाहिये. चीन से परंपरागत और कृत्रिम टकरावों को कम करना चाहिये. अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बंगलादेश, श्रीलंका, म्यांमार और नेपाल की शांति और लोकतंत्र को मजबूत करने वाली ताकतों के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिये. अमेरिकी साम्राज्यवाद के विरोध में तीसरी दुनियां के देशों की एकता के लिये हमें निरंतर आवाज उठानी चाहिये.
हमें धार्मिक पुनरुत्थानवाद के हर ब्रांड के विरुध्द निर्मम संघर्ष करना होग. नस्लीय अलगाववाद और आतंकवाद के खिलाफ सदैव आवाज उठानी चाहिये. जन गण के बीच समरसता और सुदृढ लोकतंत्र ही भारतीय क्रांति को आगे बढाने में सहायक होसकते है.
आज जमीनों का पुनर्वितरण फिर से राष्ट्रीय एजेंडा बन चुका है. पूंजीवाद साम्राज्यवाद के साथ मिल कर भारतीय ग्राम्य जीवन के परंपरागत ताने बाने को नष्ट कर रहा है. विकास के नाम पर बेतहाशा भूमि अधिग्रहण, उसके लिये कानूनों में बदलाव, बेरोजगारी और ग्रामीण क्षेत्रों से अधिकाधिक श्रम शक्तियों का खदेड़े जाना विश्व बैंक द्वारा निर्देशित परियोजनाओं का मूल आधार बन चुका है. भूमि सुधार और सामूहिक खेती से ग्रामीण जीवन में नयी जान फूंकी जा सकती है.
सार्वजनिक क्षेत्र को बचाने और उसे और भी मजबूत बनाने के संघर्ष को हमें धार देनी होगी. हमें यह ध्यान में रखना चाहिये पूंजीवाद में मजदूरों के श्रम का अतिरिक्त अधिशेष पूंजीवाद को मजबूती देता है और उसके समाप्त होने से समाजवाद का निर्माण होता है. अतएव हमें मेहनतकशों चाहे वे मजदूर, दस्तकार अथवा किसान हों उनके श्रम का संपूर्ण फल दिलाने को संघर्ष चलाना होगा. इन संघर्षों को फासीवादी शक्तियों के विरुध्द संघर्ष से जोड़ना होगा.
अक्तूबर क्रांति की 100वीं वर्षगांठ पर हमें वाम और कम्युनिस्ट एकता के लिये त्वरित कदम उठाने को प्रतिबध्द होना होगा.
( जौनपुर, उत्तर प्रदेश में 8 अक्तूबर को अक्तूबर क्रांति की 100 वीं वर्षगांठ पर हुयी विचार गोष्ठी में दिये गये भाषण पर आधारित )


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बुधवार, 11 अक्तूबर 2017

भाजपा का भ्रष्टाचार उजागर करने और महंगाई, बेरोजगारी जैसे सवालों पर भाकपा ने समूचे उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन किया



लखनऊ-  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की केन्द्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर उत्तर प्रदेश में आज भाकपा ने सभी जिला मुख्यालयों पर धरने और प्रदर्शनों का आयोजन किया और राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रेषित किये. इससे पहले प्रदेश में तीन सप्ताह तक लगातार जन अभियान  चलाया गया.
उपर्युक्त के संबंध में जानकारी देते हुये भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने बताया कि यह आन्दोलन केन्द्र सरकार और उत्तर प्रदेश सहित तमाम राज्य सरकारों द्वारा किये जारहे घपले- घोटालों और भ्रष्टाचार, पनामा दस्तावेजों के खुलासे, निरंतर बढ़ रही महंगाई, नोटबन्दी और जीएसटी के लागू होने से उद्योग व्यापार और कृषि पर आये संकट, बैंकों में जमा जनता के धन से पूंजीपतियों को दिए कर्ज को बट्टे खाते में डालने से बैंकिंग व्यवस्था के समक्ष खड़े हुए संकट, बढ़ती बेरोजगारी और उजड़ती खेती जैसे सवालों को बहस के केंद्र में लाने और सरकारों को कार्यवाही के लिये मजबूर किये जाने के उद्देश्य से किया गया था.
प्रदर्शनों के दरम्यान भाकपा ने इस सवाल को शिद्दत से उठाया कि केंद्र सरकार के कार्यकाल के चालीस माह पूरे होते होते भाजपा नेताओं और उसकी सरकारों के भ्रष्टाचार की परतें एक के बाद एक कर उघडती जारही हैं. भ्रष्टाचार का यह राक्षस आज सर चढ़ कर बोल रहा है और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बेटे की संपत्ति में हुयी अनाप शनाप वृध्दि ने भाजपा के कथित सदाचार की चूलें हिला दी हैं. एक ओर भाजपा के दर्जन भर मंत्री संवैधानिक मर्यादाओं को लांघ कर इस गैर सरकारी व्यक्ति के भ्रष्टाचार को दबाने में जुट गए हैं तो दूसरी तरफ भाजपा के कई शीर्षस्थ नेताओं ने खुलकर इसके काले कारनामों और नीतियों का मुखर विरोध शुरू कर दिया है. भाकपा ने कहा कि अर्थव्यवस्था मंदी की ओर जारही है और विकास दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जारही है. सरकार  बताये कि दो हजार और  पांच सौ के नोट कहाँ गायब होगये?
संगीन आरोपों और असंख्य से घिरा भाजपा का नेत्रत्व बौखला कर एक ओर विपक्षी दलों के खिलाफ अनर्गल बयानवाजी कर रहा है वहीं जनता को फुसलाने को खुद प्रधानमंत्री और भाजपा के मुख्यमंत्रीगण धर्म का बेजा स्तेमाल कर रहे हैं. मंदिरों में पूजा का ढोंग किया जारहा है और राम- रहीमों ( साधुओं ) की टोलियों को भाजपा का कवच बताया जारहा है. बात बात पर आरएसएस की तारीफों के पुल बांधे जारहे हैं. भाकपा ने सवाल खडा किया कि यदि आरएसएस ही सब कुछ कर रहा है तो उसे खुद ही एक राजनैतिक पार्टी के रूप में सामने आना चाहिये भाजपा नामक ढोंग को समाप्त कर देना चाहिये.
भाकपा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में खनन नीति से बेकारी बढी है. त्योहारों के इस सीजन तक में मजदूरों को काम नहीं मिल रहा. बिजली के दाम असहनीय स्थिति तक बढ़ा दिए गए हैं. सरकारी विभागों और पुलिस में भ्रष्टाचार सारी सीमाएं लांघ चुका है. इलाज के अभाव में बूढ़े बच्चे सभी दम तोड़ रहे हैं, क़ानून व्यवस्था का बुरा हाल है. सरकार के दावों के विपरीत कई दंगे होचुके हैं.
आज दिए गए ज्ञापनों में मांग की गयी है कि केंद्र सरकार विदेशों में जमा काले धन संबंधी पनामा दस्तावेजों में दर्ज नामों का खुलासा करे, काले धन को वापस ला जनता से किये गए वायदों को पूरा करे, बैंकों द्वारा बट्टेखाते में डाल दिए गए पूंजीपतियों पर बकाया धन को सख्ती से बसूल करे, पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में और कमी लाई जाए, महंगाई को नीचे लाया जाए, नोटबन्दी और जीएसटी जैसे कदमों से उद्योग व्यापार और कृषि पर आये संकट को दूर करने को कारगर कदम उठाये जाएँ, रोजगार दिए जाएँ, शिक्षा और स्वास्थ्य का बजट दोगुना कर मुफ्त इलाज और पढाई मुहैय्या कराई जाए, किसानों के सभी प्रकार के कर्जे माफ़ किये जाएँ और उनकी आमदनी दोगुना करने के वायदे को पूरा किया जाए, बिजली के दामों में घटोत्तरी की जाए, छुट्टा जानवरों से किसानों की फसलों और नागरिकों के जीवन की रक्षा की जाए तथा उत्तर प्रदेश को सूखाग्रस्त घोषित किया जाए आदि.
जनपद जालों के उरई मुख्यालय पर कल ही एक शानदार प्रदर्शन किया गया था. आज इस समाचार के जारी किये जाने तक कानपुर शहर, आगरा, शामली, संत कबीर नगर, लखनऊ, जौनपुर, हाथरस, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ, बदायूं, शाहजहांपुर, फिरोजाबाद, इलाहाबाद, गोरखपुर, मऊ, आज़मगढ़, गाज़ियाबाद, बुलंदशहर, मैनपुरी, झांसी, चित्रकूट, वाराणसी, सोनभद्र, बछरावां, फैजाबाद, प्रतापगढ़, बलिया, कुशीनगर, मुरादाबाद, मुज़फ्फर नगर तथा गाजीपुर जनपद से प्रदर्शन कर ज्ञापन दिए जाने के समाचार प्राप्त होचुके हैं.


डा. गिरीश 

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बुधवार, 4 अक्तूबर 2017

Mass Contact programme of CPI

महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अत्याचार को लेकर उत्तर प्रदेश में भाकपा का जन अभियान जारी


11 अक्तूबर को जिला केंद्रों पर प्रदर्शन की तैयारी


लखनऊ- 4 अक्तूबर 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर पनामा दस्तावेजों का खुलासा करो, एनपीए की वसूली करो, भाजपा की केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा किये जारहे भ्रष्टाचार पर रोक लगाओ, महंगाई पर रोक लगाओ, नोटबंदी, जीएसटी, निजीकरण के कुफलों जैसे- बेरोजगारी, आर्थिक मंदी, किसान मजदूर व व्यापरियों को बर्वादी से बचाने को कारगर कदम उठाओ, किसानों को विपन्नता की स्थिति से बचाओ, आवारा पशुओं से किसानों की फसलों और नागरिकों के जान माल की रक्षा करो, उत्तर प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की स्थिति में सुधार लाओ आदि सवालों पर भाकपा का प्रांतव्यापी जन अभियान लगातार जारी है.
ज्ञातव्य हो कि भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने उपर्युक्त अभियान को सारे देश में 15 सितंबर से 15 अक्तूबर तक चलाने का आह्वान किया था लेकिन उत्तर प्रदेश में खरीफ और रबी की फसलों के काम में किसानों की व्यस्तता, कई महत्वपूर्ण त्योहारों में आम लोगों की भागीदारी और ए. आई. एस. एफ. तथा अ. भा. नौजवान सभा के लोंगमार्च के सितंबर के प्रथम सप्ताह में यहाँ से गुजरने जैसे मामलों के चलते भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने इस अभियान को उत्तर प्रदेश में 24 सितंबर से 10 अक्तूबर तक जनता से संवाद के रूप में चलाने और 11 अक्तूबर को जिला मुख्यालयों पर धरने/ प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे जाने का निर्णय लिया.
लेकिन यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि जौनपुर आदि कई जिलों ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी द्वारा लिये गये निर्णयों की सूचना मिलने के बाद अभियान को 15 सितंबर से ही प्रारंभ कर दिया था और अब तक जौनपुर जनपद की हर तहसील में कई कई सभायें आयोजित की जाचुकी हैं. यहां इसी अभियान के अंग के रुप में 8 अक्तूबर को सभी वामपंथी दलों के साथ मिल कर “अक्तूबर क्रांति एवं भारत का स्वतंत्रता संग्राम” विषय पर विचार गोष्ठी का आयोजन भी किया जारहा है.
अभियान का श्रीगणेश जनपद मेरठ के मवाना में किसानों के विशाल सम्मेलन के साथ होगया था जिसमें भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश, उत्तर प्रदेश किसान सभा के सचिव राजेंद्र यादव- पूर्व विधायक, सहसचिव अजय सिंह, भाकपा नेता शरीफ अहमद, प्रोफेसर इशान जैन, जितेंद्र कुमार आदि नेताओं ने संवोधित किया था. जनपद झांसी में अभियान की शुरुआत जिला मुख्यालय पर किसानों, बीडी मजदूरों और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की एक सभा के साथ हुयी जिसे राज्य सह्सचिव अरविंदराज स्वरुप एवं उत्तर प्रदेश महिला फेडरेशन की सचिव प्रोफ. निशा राठौर ने संवोधित किया.
इसी बीच वाराणसी में छात्रा के साथ दुर्व्यवहार के बाद वहाँ छात्राओं और छात्रों का एक बड़ा आंदोलन फूट पड़ा और भाकपा के सहयोग एआईएसएफ एवं नौजवान सभा के कार्यकर्ताओं ने खागा, आज़मगढ, बदायूं, उरई, इलाहाबाद, चित्रकूट, मथुरा आदि कई स्थानों पर वाराणसी के छात्र- छात्राओं के समर्थन में धरने प्रदर्शन किये गये.
जनपद हाथरस में भाकपा ने 1 से 10 अक्तूबर तक “जन संवाद”  कार्यक्रम छेड़ा हुआ है जिसकी शुरुआत पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कराई.
इस अवसर पर डा. गिरीश ने कहाकि आज मोदी के 40 और योगी के 4 महीनों में अर्थ व्यवस्था धरातल पर आगयी है, बेरोजगारी चरम पर है, महंगाई ने सारे रिकार्ड तोड़ दिये हैं और ऊपर से नीचे तक व्याप्त भ्रष्टाचार से जनता त्राहि त्राहि कर उठी है. कुशासन के चलते किसान, कामगार और नौजवान बेहद परेशानहाल हैं. हालात इतने खराब हैं कि भाजपा के अंदर से भी इस सबके खिलाफ आवाज उठने लगी है.
डा. गिरीश ने कहाकि भाकपा ने इस सबको लेकर देशव्यापी अभियान चला रखा है. उन्होने कहाकि पनामा सहित विदेशों और देश में छुपाया सारा काला धन जब्त कर लिया जाये तो देश भर के किसानों- कामगारों का सारा कर्जा माफ किया जासकता है. बैंकों के पूंजीपतियों पर बकाया जिस धन को बट्टेखाते में डाल दिया गया है उसे यदि वसूल लिया जाये तो हर जरूरतमंद सीनियर सिटीजन को आजीवन रुपये 10 हजार मासिक पेंशन दी जासकती है. पर भाजपा और उसकी सरकारें बड़े पूंजीपतियों को मुनाफा पहुंचाने और जनता की कमर तोड़ने में जुटी हैं.
हम मांग कर रहे हैं कि कच्चे तेल की गिरती कीमतों को देखते हुये पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें आधी की जायें पर यह सरकार उन्हें हद के बाहर लेजारही है. दबाव बड़्ने पर अब मात्र दो रुपये की कमी की गयी है जबकि रसोई गैस की कीमतों में बड़ी वृध्दि कर दी गयी है. हम शिक्षा और स्वास्थ्य का बजट दो गुना करने की मांग कर रहे हैं ताकि सभी को दवाई और पढाई मुफ्त मिल सके. किसानों को पैदावार के उचित दाम दिये जाने और छुट्टा पशुओं पर रोक लगाने की भी हम मांग कर रहे हैं. चहुंतरफा भ्रष्टाचार से आजिज जनता को कैसे इससे निजात दिलाई जाये आज यह एक बड़ा सवाल बन गया है.
 डा. गिरीश ने कहाकि आज जनता में आक्रोश इस हद तक है कि वह इस सरकार से फौरन पिंड छुड़ाना चाहती है और विकल्प के लिये टकटकी लगा देख रही है. भाकपा और दूसरी वामपंथी ताकतों को एक वैकल्पिक नीति का विकल्प पेश करने को गंभीरता से काम करना होगा. जन संवाद कार्यक्रम जारी है और 11 अक्तूबर के प्रदर्शन की तैयारी चल रही है.
भाकपा राज्य मुख्यालय को बरेली, बुलंदशहर, शाहजहांपुर, अमरोहा, गाज़ियाबाद, मथुरा, आगरा, कानपुर, जालौन, झांसी, इलाहाबाद, चित्रकूट, भदोही, फैज़ाबाद, मऊ, गाज़ीपुर, बाराबंकी, बलिया, सुल्तानपुर, प्रतापगढ, फरुखाबाद, कासगंज, बदायूं, बहराइच, कुशीनगर, आदि जनपदों से जन अभियान के जारी रहने और लगभग सभी जनपदों में 11 अक्तूबर के प्रदर्शन की तैयारी की खबरें मिल रही हैं.

डा. गिरीश

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सोमवार, 25 सितंबर 2017

CPI, U.P. demands judicial probe on astrocities on BHU students.

वाराणसी की घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी लें मुख्यमंत्री आदित्यनाथ

बी. एच. यू. की घटनाओं की न्यायिक जांच कराई जाये: भाकपा


लखनऊ- 25 सितंबर 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने बनारस में छात्राओं और छात्रों पर  चलाये गये दमनचक्र की कड़े शब्दों में निंदा करते हुये मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से इसकी जिम्मेदारी लेते हुये छात्राओं और छात्रों से क्षमा मांगने की मांग की है. भाकपा ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय परिसर में छेड़छाड़ से क्षुब्ध छात्राओं द्वारा बनारस में श्री मोदी की मौजूदगी के दौरान किये गये प्रतिरोध प्रदर्शन जिसके कारण मोदी के काफिले का मार्ग बदलना पड़ा; से बौखला कर भाजपा और उसकी राज्य सरकार ने छात्रों और छात्राओं को सबक सिखाने को यह दमनात्मक कार्यवाही की है.
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि समूचे प्रदेश में महिलाओं और छात्राओं से प्रतिदिन औसतन दो सौ बदसलूकी की घटनायें होरही हैं, लेकिन आज हालात यहाँ तक पहुंच गये हैं कि एक प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय जो कि प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र में स्थित है, में छात्राओं से सरेआम बदसलूकी होती है. वह भी तब जब प्रधानमंत्री की बनारस यात्रा के चलते वहां चप्पे चप्पे पर सुरक्षाबल तैनात किये गये थे और सारा बनारस एक्स्ट्रा सुरक्षा निगरानी में था. अपने चुनाव क्षेत्र में छात्राओं के साथ होने वाली इस घृणित और शर्मनाक वारदात पर दो दिनों तक बनारस में ही मौजूद प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल महोदय की चुप्पी हैरान करने वाली है.
उलटे कैम्पस के अंदर दो दिनों से जारी छात्राओं के आंदोलन की चट्टानी एकता से बीएचयू के कुलपति, भाजपा और राज्य सरकार बौखला गये और उन्होने आंदोलनकारियों को सबक सिखाने के लिये पहले आधी रात को और फिर दिन में पुलिस के जरिये भारी अत्याचार कराया और दो दर्जन छात्रों को हिरासत में ले लिया. छात्राओं ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें भद्दी गालियां दीं. उत्तर प्रदेश में आजादी के बाद यह पहली सरकार है जो अपने हक और सम्मान की आवाज उठाने वाले छात्र- छात्राओं पर न केवल दमनचक्र चला रही है अपितु उन्हें जेल के सींखंचों के पीछे पहुंचा रही है. सरकार की इस दमनात्मक कार्यवाही से छात्र समुदाय उद्वेलित है और वह ए.एम.यू. हो या बी.एच.यू. समूचे प्रदेश में सड़कों पर उतर रहा है. बैकफुट पर आयी सरकार और उसका पिट्ठू विद्यार्थी संगठन भ्रम फैलाने में जुट गये हैं.
भाकपा उत्तर प्रदेश के छात्रों के इस न्यायिक संघर्ष का पुरजोर समर्थन करती है और छात्राओं, महिलाओं से बदसलूकी रोके जाने, उत्पीडनात्मक कार्यवाहियों के समस्त दोषियों को दंडित किये जाने और वाराणसी के छात्र- छात्राओं पर हुये अत्याचार और बी.एच.यू. में लंबे समय से चल रही छात्र विरोधी कार्यवाहियों की न्यायिक जांच की मांग करती है. भाकपा सरकार को आगाह करना चाहती है कि छात्र- छात्राओं के साथ दुश्मनों सरीखा व्यवहार उसे महंगा पड़ेगा.


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