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गुरुवार, 15 अप्रैल 2010

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी
शर्त थी लेकिन कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए
हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए
- दुष्यंत कुमार

2 टिप्‍पणियां:

  1. चुनाव सिर पर हैं. हर बार की तरह इस बार भी कृषि और कृषकों की समस्याओं को मुद्दा बनाया जाएगा, लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होगा, सारी बातें फिर से भुला दी जाएंगी. ch.sanjeev tyagi (kutabpur waley)
    33,gazawali roorkee road
    muzaffar nagar u.p
    09457392445,08802222211,09760637861

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  2. चुनाव सिर पर हैं. हर बार की तरह इस बार भी कृषि और कृषकों की समस्याओं को मुद्दा बनाया जाएगा, लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होगा, सारी बातें फिर से भुला दी जाएंगी. ch.sanjeev tyagi (kutabpur waley)
    33,gazawali roorkee road
    muzaffar nagar u.p
    09457392445,08802222211,09760637861

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