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सोमवार, 2 जून 2014

महिलाओं की सुरक्षा की मांग को लेकर सड़कों पर उतरेगी भाकपा

लखनऊ 2 जून। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की एक बैठक आज यहां सम्पन्न हुई। बैठक में चुनाव परिणामों एवं चुनाव के बाद पैदा हुई राजनैतिक स्थिति पर गहन मंथन किया गया तथा उत्तर प्रदेश में महिलाओं की इज्जत और उनकी जिन्दगी पर हो रहे गहरे आक्रमणों पर चर्चा हुई। साथ ही उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था एवं बिजली कटौती से पैदा हुए संकट से भी विचार हुआ। भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश द्वारा इस सम्बंध में प्रस्तुत लिखित रिपोर्ट पर हुई चर्चा में 20 साथियों ने भाग लिया।
भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने इस बात पर गहरा रोष प्रकट किया कि उत्तर प्रदेश में महिलाओं की जिन्दगी और इज्जत तार-तार हो रही है। प्रतिदिन लगभग दर्जन भर संगीन वारदातों की खबरें राज्य भर से प्राप्त हो रही हैं। पुलिस और प्रशासन में पैठ बनाये हुए असामाजिक और गुण्डा तत्व इन घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस प्रशासन ऐसे अपराधियों को प्रश्रय दे रहा है। राज्य सरकार भी कुछ कर नहीं पा रही। भाकपा ने तय किया कि महिलाओं की सुरक्षा के इस सवाल पर सघन आन्दोलन चलाया जाये। इस हेतु 12 जून को भाकपा महिलाओं को सुरक्षा दिये जाने के लिए सभी जिला केन्द्रों पर प्रदर्शन करेगी। साथ ही भाकपा का एक प्रतिनिधिमंडल राज्य सचिव डा. गिरीश के नेतृत्व में कल दिनांक 3 जून को बदायूं पहुंचेगा और पीड़ित परिवार के साथ दुःख बांटेगा।
भाकपा ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था की भी नाजुक स्थिति पर नाराजगी जाहिर की है। प्रदेश में पैदा हुए अभूतपूर्व बिजली संकट पर भाकपा ने मांग की है कि केन्द्र और राज्य सरकारें इस संकट का निदान खोजें, परस्पर बयानबाजी से कोई हल निकलने वाला नहीं है। गन्ना किसानों के मिलों पर पड़े बकाये के भुगतान और गन्ने की अगली फसल के लिए उचित मूल्य निर्धारण के लिए भी भाकपा आन्दोलन की रूपरेखा बनाने जा रही है।
राज्य कार्यकारिणी ने इस बात का नोटिस लिया कि नई सरकार को सत्तारूढ़ हुए एक पखवाड़ा बीत रहा है परन्तु अभी तक महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से निबटने की कोई सक्रियता केन्द्र सरकार ने नहीं दिखाई है। कथित अच्छे दिनों की शुरूआत रेल दुर्घटना में मरे लगभग 2 दर्जन लोगों से हुई और अब डीजल के दाम बढ़ा कर इस कड़ी को और आगे बढ़ाया गया है। लोगों को एकजुट करने के बजाय धारा 370 और कॉमन सिविल कोड जैसे विभाजनकारी एजेंडे चालू कर दिये गये हैं और सरकार महंगाई के बारे में चिन्तित दिखाई ही नहीं दे रही है। विदेशी बैंकों में जमा धन की एक सूची केन्द्र सरकार के पास पहले से ही है लेकिन वायदे के अनुसार उसको भारत में लाने का कार्य शुरू नहीं किया गया है। एक भारी भरकम जांच कमेटी बना कर लोगों को इस धन को अपनी सुविधा के अनुसार ठिकाने लगाने का वक्त दे दिया गया है। उद्योगपतियों और पूंजीपतियों पर बैंकों के एनपीए बकायों को वसूली करने का अभियान भी अभी शुरू नहीं किया गया है।
पार्टी की राज्य कौंसिल की बैठक 28-29 जून को लखनऊ में आयोजित करने का फैसला लिया गया है ताकि उसमें सभी बिन्दुओं की समीक्षा कर भविष्य की रणनीति तैयार की जा सके।


कार्यालय सचिव