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शुक्रवार, 9 जनवरी 2015
अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत आने पर २४ जनबरी को विरोध प्रदर्शन करेंगे वामदल - भाकपा
लखनऊ- ९ जनबरी २०१५ : भारत के अंदरूनी मामलों में अमेरिका की दखलंदाजी, भारत के खिलाफ पाकिस्तानी आतंकवाद को अमेरिका द्वारा अप्रत्यक्ष समर्थन दिए जाने तथा भाजपा नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार की अमेरिकापरस्त नीतियों आदि के विरोध में देश के छह वामपंथी दल अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के विरोध में २४ जनबरी को विरोध प्रदर्शन करेंगे. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी), भाकपा(माले), फार्बर्ड ब्लाक, एसयूसीआई(सी) एवं आर.एस.पी. ने इस दिन पूरे देश में सडकों पर उतरने का निर्णय लिया है.
उपर्युक्त के संबन्ध में जानकारी देते हुये भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने बताया कि भाकपा की जिला इकाइयों को निर्देश जारी कर दिया गया है कि वे २४ जनबरी को उपर्युक्त सभी दलों को साथ लेकर अपने जनपदों में धरने, प्रदर्शन, सभाएं एवं नुक्कड़ सभायें आयोजित कर अमेरिकी राष्ट्रपति की भारत यात्रा के खिलाफ व्यापक रूप से प्रतिरोध दर्ज करायें. इससे पूर्व गोष्ठियां आदि भी आयोजित की जासकती हैं. आन्दोलन के जरिये वामदल भारत के अंदरूनी मामलों में अमेरिकी दखलंदाजी बंद किये जाने, अमेरिकी- भारतीय रणनीतिक साझेदारी बंद किये जाने, पश्चिम एशिया एवं विश्व के अन्य भागों में अमेरिका की हमलावर कार्यवाहियां रोके जाने एवं भारत के खिलाफ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को अमेरिकी समर्थन बंद किये जाने की मांग करेंगे.
डा.गिरीश ने कहा कि हमें जनता के सामने यह रखना है कि भारत सरकार अमेरिकापरस्त विदेश नीति पर चल रही है और भारत की परंपरागत आत्मनिर्भर गुट निरपेक्ष नीति को हानि पहुंचा रही है. यह भारत और विदेश के कार्पोरेट घरानों के पक्ष में है और आम जनता के हितों के विपरीत है. इससे बढ़ा मजाक क्या होगा कि जो दिन(गणतंत्र दिवस) भारत की स्वतंत्रता एवं संप्रभुता का सबसे बड़ा प्रतीक दिवस है, उस दिन एक ऐसे देश के राष्ट्राध्यक्ष को खास मेहमान बनाया गया है जो दुनियां में तमाम देशों की संप्रभुताओं का हनन करता रहा है और हर मौके पर जो भारतीय हितों के विरुध्द खड़ा हुआ है. स्वयं ओबामा लीबिया में आक्रमण एवं ईराक में दोबारा बमबारी कराने तथा वहां सेनायें भेजने के लिए जिम्मेदार है. एक राष्ट्र के रूप में सीरिया की पहचान मिटाने को अमेरिका हर संभव प्रयास कर रहा है.
वामपंथी दल भारत-अमेरिकी रक्षा ढांचा समझौते का भी विरोध करते हैं, जो भारत को एशिया में अमेरिकी सैनिक रणनीति में फंसाने वाला है. इतना ही नहीं ओबामा प्रशासन द्वारा भारत के वित्तीय क्षेत्र को अमेरिकी पूँजी के लिये खोल देने के लिए भारी दबाव बनाया जा रहा है और भारत सरकार द्वारा उसे अमलीजामा भी पहनाया जा रहा है. बीमा क्षेत्र में ४९ प्रतिशत एफ.डी.आई. लाने को सरकार द्वारा जारी अध्यादेश इसकी शुरुआत है.
डा.गिरीश
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