किसान- कामगारों की समस्याओं
और उत्तर प्रदेश में कमजोर तबकों के उत्पीड़न के खिलाफ भाकपा का प्रदेशव्यापी आंदोलन
24 से 26 जुलाई तक
लखनऊ- किसानों- कामगारों की ज्वलंत
समस्याओं के समाधान और उत्तर प्रदेश में व्याप्त अराजकता के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी 24, 25 और 26 जुलाई को समस्त जिलों में प्रदर्शन आयोजित करेगी. भाकपा की राष्ट्रीय
परिषद के निर्देश और राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर होने जारहे प्रदर्शनों के उपरांत
महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिले के अधिकारियों को सौंपे जायेंगे.
भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश
के अनुसार यह आंदोलन स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किये जाने, खेती की बढती लागत को नीचे
लाने, क्रषि उपादानों को जीएसटी के बाहर रखे जाने, क्रषि उत्पादों की बढती कीमतों को स्थिर करने हेतु
सरकार द्वारा एक लाख करोड़ का कीमत नियंत्रण कोष स्थापित किये जाने, सभी बैंकों एजेंसियों से लिया
गया कर्ज माफ किये जाने, सभी किसानों, खेत मजदूरों और दस्तकारों को रु.
10 हजार प्रति माह पेंशन दिये जाने, भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को तत्काल वापस किये जाने, भूमि सुधार अमल में लाने, सहारनपुर की घटनाओं की न्यायिक
जांच कराने व वहाँ कमजोर वर्ग के खिलाफ होरही एकतरफा कार्यवाहियों को रोके जाने, दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, छात्रों- युवाओं, अन्य कमजोर तबकों और व्यापारियों
पर होरहे अत्याचारों पर रोक लगाने तथा दंगाराज- गुंडाराज समाप्त कर कानून का राज स्थापित
करो आदि प्रमुख मांगों को लेकर किया जारहा है.
डा. गिरीश ने कहा कि मोदी और
योगी की सरकारें जन सरोकारों से मुहं चुरा रही हैं. वे समाज को गाय, गंगा और मंदिर जैसे सवालों पर बांट कर राज करने की नीति पर चल रही हैं.
अपनी असफलताओं पर पर्दा डालने को वे धार्मिक उन्माद और युध्दोन्माद पैदा कर रही हैं.
इससे जनता तबाह होरही है और नेता अफसर माफिया फल फूल रहे हैं. बेरोजगारी ने नौजवानों
की कमर तोड़ कर रख दी है. जनता को अब तत्काल राहत प्रदान किया जाना जरुरी है. भाकपा
द्वारा यह आंदोलन इसी उद्देश्य को लेकर किया जारहा है. उन्होने शोषित- पीड़ित जनता से
अपील की कि अपने हकों के लिये इस आंदोलन में भागीदारी करें.