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शनिवार, 26 अगस्त 2017

Deport so called Gaurakshaks of Bulandshahar: CPI

बुलंदशहर में गोरक्षा के नाम पर उत्पात मचाने वालों को जेल भेजा जाये: भाकपा


लखनऊ- 26 अगस्त, जिस वक्त बाबा राम रहीम के समर्थक हरियाणा में तबाही मचा रहे थे ठीक उसी वक्त आरएसएस और बजरंगदल के लोग मोदी और योगी की चेतावनियों को दरकिनार कर जनपद बुलंदशहर के ग्राम अढौली में तांडव मचा रहे थे. हरियाणा में उनका निशाना कानून व्यवस्था, न्यायपालिका और आम नागरिक थे तो बुलंदशहर में इनके निशाने पर अल्पसंख्यक, अमन और भाईचारा थे.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आरएसएस गिरोह द्वारा प्रायोजित इस उत्पात की कडे से कडे शब्दों में निंदा की है और जिला पुलिस और प्रशासन से अपेक्षा की है कि वे मोदी जी और योगीजी द्वारा जनता को लगातार दिये जारहे आश्वासनों कि “गाय के नाम पर हिंसा बर्दाश्त नहीं की जायेगी” का अनुपालन करेंगे और इन कथित गौरक्षकों को जेल के सींखचों के पीछे अविलंब पहुंचाने का काम करेंगे.
अपने पार्टी के साथियों और अन्य सूत्रों से जुटाई जानकारी के आधार पर भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि जनपद बुलंदशहर के ग्राम अढौली में बहुसंख्यक और अल्पसंख्यक बिरादरी के लोग सदियों से भाईचारे के साथ रह रहे हैं. लेकिन पहले केंद्र और अब राज्य में भाजपा के सत्तारूढ होने के बाद गांव में काम कर रहे संघ के सहयोगी संगठनों से जुड़े कई कार्यकर्ता अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने का कोई न कोई बहाना ढूंढते रहते हैं.
गत दिन गांव की पोखर के पास किसी मृत पशु के अवशेष पड़े थे. संघियों ने उन्हें गाय के अवशेष बता कर भीड़ इकट्ठी कर ली. सूचना पर आयी पुलिस ने जब भांप लिया कि अवशेष अज्ञात जानवर के हैं तो उन्हें दफन करा दिया. लेकिन अगले दिन संघियों ने आसपास के गांवों से अपनी चांडाल-  चौकड़ी इकट्ठी कर ली और सुनियोजित तरीके से अपसंख्यकों के धर्मस्थलों और उनके मकानों पर धावा बोल दिया. कई लोगों को पीटा और कई घरों में लूटपाट की. लेकिन दिन के उजाले में की गयी इन बारदातों को अंजाम देने वालों पर अभी तक कोई कार्यवाही इसलिये नहीं की गयी कि हमलावर शासक गिरोह से संबंधित हैं. उलटे पुलिस ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ मामला दर्ज किया हुआ है. पुलिस की यह करतूत मोदीजी और योगीजी के दावों को मुहं चिढा रही है.
डा. गिरीश ने कहाकि गांवों के सामंती तत्व जिन्हें आज भाजपा और उसकी सरकार का सरंक्षण हासिल है, अल्पसंख्यकों को इसलिये भी प्रताडित कर रहे हैं कि वे गांवों से पलायन कर जायें और उनकी संपात्तियों को वे औने- पौने दामों पर हथिया लें. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दलितों और अति पिछ्ड़ों को गांवों से पहले ही खदेड़ा जाचुका है. दूसरे- भाजपा और संघ गाय के नाम पर अपनी विभाजन की राजनीति को बरकरार रखना चाहते हैं. गाय से इन्हें कितना प्रेम है आज सभी जान चुके हैं. चारे के अभाव में तमाम बछड़े छुट्टल छोड़ दिये गये हैं और वे किसानों की फसलों को रौंद रहे हैं और इंसानों पर जानलेवा हमले बोल रहे हैं. संघियो द्वारा नियंत्रित गोशालाओं में कितनी गायें दम तोड़ चुकी हैं किसी से छिपा नहीं है. गौ और गौसुतों की मुरीद सरकार ने आज तक उनके लालन- पालन का कोई इंतज़ाम नहीं किया है.

डा. गिरीश