लखनऊ- कठुआ, उन्नाव, एटा, सिकंदरा राऊ ( हाथरस ), नोएडा, पीलीभीत, सूरत तथा देश और उत्तर
प्रदेश के हर कोने से महिलाओं और अबोध बालिकाओं के साथ बलात्कार, सामूहिक बलात्कार
और बलात्कार के बाद हत्याओं की दिल दहलाने वाली खबरें आरही हैं. विदेशों तक में इन
शर्मनाक वारदातों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन होरहे हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ तक ने
इन घटनाओं पर गहरी चिन्ता जतायी है. अल्पसंख्यकों के बाद अब दलित- गरीब और पिछड़े सामंती
और सरकारी उत्पीडन के शिकार होरहे हैं. फर्जी एनकाउंटरों में नौजवान मौत के घाट
उतारे जारहे हैं. अपराध थमने के बजाय बढ़ते ही जारहे हैं. पुलिस प्रशासन लूट खसोट
में मस्त है. आमजन त्राहि त्राहि कर रहा है.
इन सभी मुद्दों पर केन्द्र
और उत्तर प्रदेश की सरकार की निद्रा तोड़ने के उद्देश्य से आज वामपंथी दलों ने
समूचे उत्तर प्रदेश में जिला और तहसील मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन किये.
प्रदर्शनों के बाद जिले के संबंधित अधिकारियों को राष्ट्रपति और राज्यपाल को
संबोधित ज्ञापन दिए गए. ज्ञापनों में प्रमुख रूप से बलात्कारियों के खिलाफ सख्त और
त्वरित कार्यवाही किये जाने, दलितों- कमजोरों का उत्पीडन रोके जाने, अपराधों पर
नियंत्रण करने और राजनैतिक उद्देश्य से किये जारहे एन्काउन्टरों को रोके जाने की
मांग की गयी.
वामदलों का आरोप है कि
भाजपा और उसकी सरकार दबंगों, सामंतवादी और जातिवादी तत्वों तथा शोषक वर्गों के
हितों को साधने में लगी है, शासक दल के विधायक और सांसद जो आपराधिक और आर्थिक
आपराधिक प्रष्ठभूमि के हैं, एक के बाद एक वारदातों को अंजाम देरहे हैं लेकिन
ध्रतराष्ट्रवादी सरकार उनको बचाने में लगी रहती है. 2 अप्रैल के भारत बंद के बाद
दलितों पर नए हमलों की शुरूआत होचुकी है और उन्हें जेलों में ठूँसा जारहा है.
महिलाओं की रक्षा का भरोसा दिलाने के बजाय भाजपा के अग्रणी नेता उनके प्रति कड़वे
बोल बोल रहे हैं. कठुआ में तो भाजपा के मंत्रियों और नेताओं ने बलात्कारियों के
पक्ष में जुलूस निकाले.
वामपंथी दलों ने आरोप लगाया
है कि एनकाउन्टर के नाम पर योगी सरकार राजनीति कर रही है. सुनियोजित तरीके से
दलितों अल्पसंख्यकों और अन्य गरीबों के घरों के नौजवानों की हत्या की जारही है. 14
सौ से अधिक इन हत्याओं के बावजूद अपराधों में कमी न आना इस बात का जीता जागता
प्रमाण है कि अपराधी आजाद घूम रहे हैं और निर्दोष लोग मौत के घाट उतारे जारहे हैं.
वामदलों के इस आन्दोलन में भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा- ( मार्क्सवादी ), भाकपा- माले, फारबर्ड ब्लाक और
एसयूसीआई- सी के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने दाबा
किया कि फसलों की कटाई और मढ़ाई के सीजन के बावजूद वामदलों के इस आन्दोलन में बड़ी
संख्या में लोगों ने भाग लिया.