लखनऊ- गत
दो दिन पहले रिकार्ड तोड़ चुकी पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कल फिर 19 पैसे
प्रति लीटर की वृध्दि कर दी गयी. गत दो दिन पहले की वृध्दि में ही पेट्रोल ने
पिछले पांच साल का रिकार्ड तोडा दिया था जबकि डीजल पहली बार अब तक की इस ऐतिहासिक
उंचाई पर पहुंचा था.
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में
कच्चे तेल के दामों में होरही वृध्दि के नाम पर प्रति दिन की जारही इस वृध्दि के
विरुध्द अब आवाज उठाना जरुरी होगया है. क्योंकि जब अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में
पेट्रोलियम पदार्थों के दाम रिकार्ड नीचाई पर थे तब सरकार ने कर भार बढ़ा कर उपभोक्ताओं
को इसका लाभ मिलने से वंचित किया और अब जबकि कच्चे तेल के दाम ऊपर की ओर खिसक रहे
हैं तो बाजार व्यवस्था के नाम पर प्रतिदिन कीमतें बढ़ाई जारही हैं. आम उपभोक्ता ही
नहीं समूचा बाजार इससे से ठगा महसूस कर रहे हैं.
‘एक देश एक टैक्स’ नारे के
तहत लागू किये गये जीएसटी से पेट्रोलियम पदार्थों को बाहर रखना सरकार की बदनीयती
का परिचायक है. यह अतार्किक व्यवस्था ज्यादा दिन नहीं चलने देनी चाहिए.
पेट्रोलियम पदार्थों की
कीमतों में वृध्दि के तात्कालिक और दूरगामी प्रभाव होते हैं. इससे किराया- भाड़ा बढ़
जाता है, अतः प्रत्येक उपभोक्ता वस्तु की कीमतें बढ़ जाती हैं. सिंचाई की लागत, खाद
बीज डीजल बिजली कीटनाशकों आदि की कीमतें बढ़ने से कृषि उत्पाद महंगे होजाते हैं.
जिन उद्योगों में पेट्रोलियम पदार्थों से उत्पादन होता है वहां तो दोहरी मार पड़ती
है. मुद्रास्फीति की दर बड़ने से चहुन्तरफा महंगाई की मार झेलनी पड़ती है. विकास
ठिठक जाता है.
लेकिन आश्चर्य की बात है कि
विकास विकास का दिन रात ढिंढोरा पीटने वाली सरकार सब कुछ भूल, लूट में लगी है.
संप्रग सरकार के ज़माने में बाहर से समर्थन देरहे वामदलों ने पेट्रोल डीजल के दाम न
बढ़ने देने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी, और उपभोक्ताओं को लाभ पहुँचाया था. पर एनडीए
के घटक दल मौन हैं. आम जनता के हित में उन्हें सरकार पर दबाव बनाना चाहिए.
लेकिन सबसे ज्यादा
आश्चर्यजनक इस मुद्दे पर मध्यम वर्ग की चुप्पी है. जाति- धर्म की राजनीति में बंटा
और निजी स्वार्थों के लिये ही मुखर होने वाले मध्यवर्ग को अब अपने जबड़े इस बढ़ोतरी
के खिलाफ खोलने चाहिए.
मैं भाकपा कार्यकर्ताओं,
वामपंथी साथियों और जनहितैषी अन्य शक्तियों से आग्रह करता हूँ कि वे किसी न किसी
रूप में पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई पर प्रतिरोध दर्ज करायें और सरकार से मांग
करें कि वह इन पर कर भार तत्काल घटा कर कीमतों को नीचे लाये. इन्हें जीएसटी के
दायरे में लाने के लिये सभी को दबाव बनाने की जरूरत है.
और अंत में कुछ निजी उपाय.
मैं स्वयं सप्ताह में एक दिन पेट्रोल डीजल उपयोग न करने का उपवास करूंगा. सप्ताह
में एक दिन ऐसे किसी वाहन में यात्रा नहीं करूंगा जो पेट्रोल अथवा डीजल से चलता
हो. आप भी यह प्रयास सकते हैं.