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बुधवार, 4 जुलाई 2018

एएमयू प्रकरण- संघ के निशाने पर वे शिक्षा केन्द्र हैं जहां हिंदुत्व का एजेंडा नहीं चल पारहा: भाकपा




लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने आरोप लगाया कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और दूसरे अल्पसंख्यक संस्थानों में एससी, एसटी एवं अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण के मामले में खुद भाजपा और आरएसएस की नीयत साफ़ नहीं है और इस मुद्दे के जरिये एक ही ईंट से कई निशाने साधना चाहते हैं.
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि भाजपा और संघ को दलित हितों से कोई लेना देना नहीं है. यदि उन्हें दलितों/पिछड़ों की शिक्षा की जरा भी फ़िक्र होती तो वे उनके लिये सरकार के चार साल के कार्यकाल में कई विश्विद्यालय बना कर खड़े कर सकते थे. लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया. रोहित वेमुला प्रकरण, ऊना में दलितों के साथ की गयी दरिन्दगी, भीमसेना के नेता को जेल में डालने तथा समूचे देश में दलितों, पिछड़ों पर होरहे अत्याचार की वारदातों से उत्पन्न गुस्से को भटकाने के लिए वे इस मुद्दे को उठा रहे हैं.
उन्होंने कहाकि भाजपा और संघ के निशाने पर वे शिक्षा केन्द्र पहले से ही हैं जहां उनका कथित हिन्दुत्व का एजेंडा नहीं चल पारहा है. सभी जानते हैं कि पहले उन्होंने जेएनयू और आईआईएम को निशाना बनाया. फिर जिन्ना की तस्वीर के बहाने एएमयू को निशाना बनाया गया और अब आरक्षण के नाम पर उस पर ताला जड़ने की कोशिश की जारही है. अनुसूचित जाति जनजाति आयोग में नामांकित संघी उसका अनुदान समाप्त करने की धमकियां देरहे हैं और एएमयू प्रशासन को नोटिस भी थमाया जारहा है. यह समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश का हिस्सा है.
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि भाजपा और संघ जनता से किये गए वायदों को पूरा करने में पूरी तरह विफल होचुके हैं और चार साल के सरकार के कार्यकाल की सफलता के नाम पर उसके हाथ पूरी तरह खाली हैं. अतएव वो समाज के विभाजन के लिये हर हथकंडा अपना रहे है. मदरसों में ड्रेस कोड का शिगूफा और एएमयू में आरक्षण का मुद्दा ऐसे ही ताजा हथकंडे हैं. भाकपा इन हथकंडों को कामयाब नहीं होने देगी और सरकार और भाजपा की विफलताओं के पर्दाफ़ाश के लिये अगस्त माह में व्यापक अभियान चलायेगी.
डा. गिरीश