लखनऊ-
11 जून 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से आग्रह किया कि वे बेरोजगार युवाओं के हित में उत्तर प्रदेश
के नियुक्ति घोटालों की सीबीआई से जांच कराने की संस्तुति करें।
एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में
वर्षों से नियुक्तियों मे घोटालों का खेल चल रहा है जिसकी सजा बेरोजगार युवा झेल रहे
हैं। किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया के अंतिम रूप से पूरी होने से पहले किसी न किसी प्रकार
की धांधली सामने आ जाती है और नियुक्तियां कानूनी पेचों में फंस कर रह जाती हैं। बेरोजगार
अभ्यर्थी हाथ मलते रह जाते हैं।
मौजूदा सरकार के पदारूढ़ होने के बाद युवाओं में उम्मीद
जगी थी कि अब उन्हें धांधलियों से निजात मिलेगी और उन्हें नौकरियां मिलेंगीं। लेकिन
इस सरकार ने तो भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड तोड़ दिये। ताजातरीन मामले शिक्षा विभाग
से संबंधित हैं जिसमें 69000 शिक्षकों की नियुक्तियां घपले में फंस गयीं और बेरोजगार
एक बार फिर हाथ मलते रह गये।
यूपी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब एक अभ्यर्थी
के प्रमाणपत्रों के जरिये 25 शिक्षकों की नियुक्तियां कर दी गयीं, और असल अभ्यर्थी अनामिका शुक्ला बेरोजगार बनीं बैठी हैं। गत माहों में ऐसे
दर्जनों मामले प्रकाश में आचुके हैं जिनमें एक व्यक्ति कई स्कूलों में अथवा फर्जी दस्तावेजों
और नामों से नियुक्तियां हथिया कर वेतन ऐंठते रहे।
यूपी में विराट फर्जी नियुक्ति माफिया सक्रिय है जो
बेरोजगारों के हकों पर दोहरा डाका डाल रहा है। एक ओर वो उचित अभ्यर्थियों के हकों पर
हड़प रहा है, वहीं अन्य बेरोजगारों को अपने जाल में फंसा कर उनसे
लाखों रुपये डकार रहा है। पोल खुलने पर युवाओं को जेल की हवा भी खानी पड़ रही है। माफिया
न केवल बच निकलते हैं अपितु नौजवानों के पैसे भी हड़प कर जाते हैं।
भाकपा राज्य सचिव ने आरोप लगाया कि नियुक्तियों में
इतना बड़ा घोटाला बिना उच्च स्तरीय संरक्षण के नहीं चल सकता। अतएव राज्य की जांच एजेंसियों
से संपूर्ण खुलासे की उम्मीद नहीं की जा सकती। अतएव हम महामहिम राज्यपाल महोदय से अनुरोध
करते हैं कि यूपी नियुक्ति घोटालों की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति केंद्र सरकार
से करें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश