पेज

शुक्रवार, 25 जून 2010

नगर निकाय निर्वाचन पद्धति में अलोकतांत्रिक परिवर्तन का भाकपा द्वारा विरोध

लखनऊ। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने पार्टी चिन्ह पर निकाय चुनाव न कराये जाने, नगर निकायों में नामित सदस्यों की संख्या-4 से बढ़ाकर 13 किये जाने की तथा उनको वोट का अधिकार दिये जाने जैसे कदमों की कठोर शब्दों में निन्दा करते हुए उन्हें तत्काल रद्द करने की मांग की है।उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री और महामहिम राज्यपाल को फैक्स भेजकर भा.क.पा. राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने प्रदेश के नगर निकायों के सभासदों के चुनाव की उस नई नियमावली पर गहरी आपत्ति जतायी है जिसमें सरकार ने उपर्यक्त प्रावधान किये हैं। भाकपा ने इस बात पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया है कि संविधान से खिलवाड़ करने वाली इस कार्यवाही की सूचना राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त दलों तक को नहीं दी गई। यह तीनों ही प्राविधान घनघोर अलोकतांत्रिक है। जिस तरह राज्य सरकार ने गुपचुप तरीके से राजनैतिक दलों को बिना सूचना के नई नियमावली अधिसूचित की है वह भाकपा को कदापित स्वीकार नहीं है। अतएव भाकपा इन संशोधनों का तीखा विरोध करती है तथा इस अधिसूचना को तत्काल रद्द करने की मांग करती है।यहां जारी प्रेस बयान में डॉ. गिरीश ने आरोप लगाया है कि साम-दाम-दण्ड-भेद की नीति अपना कर बसपा ने डुमरियागंज का उपचुनाव भले ही जीत लिया हो, लेकिन वह अपने खिसकते जनाधार से बौखलाहट में आ गई है। इसीलिए बसपा सुप्रीमो ने पहले 2012 तक किसी भी उपचुनाव में भाग न लेने की घोषणा की और अब चोर रास्ते से नगर निकायों पर कब्जा करने की साजिश रच रही है। भाकपा इसका पुरजोर विरोध करेगी और समूचे प्रदेश में इसके विरोध में सड़कों पर उतरेगी।

1 टिप्पणी: