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गुरुवार, 10 जुलाई 2014

आम आदमी को निराश और धनिक वर्ग को लाभ दिलाने वाला है आम बजट

लखनऊ-१० जुलाई. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहा है कि अच्छे दिन आने वाले हैं के सपनों और चुनाव अभियान के दौरान मोदी द्वारा किये गये असंख्य लुभावने वायदों के चलते देशवासियों को इस बजट से भारी उम्मीदें थीं. सरकार के डेढ़ माह के कार्यकाल में बढ़ी महंगाई से निजात पाने की आशा भी इस बजट से की जा रही थी. ये सभी एक ही झटके में तार तार होगयीं. यह बजट कोई नयी दिशा नहीं देता. यह आकड़ों का मायाजाल और शब्दों का जंजाल है जिसमें आम और गरीब आदमी के हाथ निराशा ही हाथ लगी है. देश और विदेश के बड़े उद्योग घरानों को लाभ के अवसर जरूर खोलता है यह बजट. मोदी सरकार के पहले बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने कहा कि इस बजट ने कई चीजें भी साफ कर दीं हैं. पहली – मौजूदा सरकार पिछली सरकार की आर्थिक नीतियों को ही और मजबूती से आगे बढ़ाने वाली है. दूसरी - जिन नीतियों का विपक्ष में रह कर भाजपा विरोध करती थी आज सत्ता में आकर उन्हीं नीतियों को मुस्तैदी से लागू कर रही है. तीसरी – महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी सवाल इसकी प्राथमिकता में नहीं हैं, और नहीं आम और गरीब आदमी. सरकार ने रक्षा जैसे राष्ट्ररक्षा के क्षेत्र में विदेशी पूंजी निवेश को २६% से बढ़ा कर ४९% कर दिया. बीमा क्षेत्र में भी यह निवेश ४९% तक लेजाने का फैसला लेलिया. भाजपा और उसका स्वदेशी जागरण मंच इसके खिलाफ लगातार अभियान चलाया करते थे, यह सब फरेब साबित हुआ. निजीकरण को बढ़ावा देने को पीपीपी माडल को तरजीह देने का खुला ऐलान किया गया है और जनता के धन से मुनाफा कमाने वालों को मालामाल करने का रास्ता खोल दिया गया है. कुल मिला कर यह एफडीआई और पीपीपी का बजट है. इस बजट को लाकर सरकार ने साबित कर दिया कि वह पूंजीपतियों की, पूंजीपतियों के वास्ते उन्हीं के द्वारा लायी गयी सरकार है. आय कर में थोड़ी छूट देकर मध्यवर्ग को लुभाने की कोशिश की गयी है, लेकिन बढ़ती महंगाई और बढ़ती मुद्रास्फीति के चलते ये राहत बेअसर होजायेगी ये सभी जानते हैं. मन्दिर के पुजारी की तरह हर क्षेत्र को थोडा थोडा प्रसाद बांटा गया है जिससे बुनियादी विकास संभव नहीं है. भूमिहीनों को कर्ज और कृषि को कुछ आबंटन किये गये हैं लेकिन कठोर प्रशासकीय नियमों के चलते यह राहत शायद ही प्रभावी हो पाये. आइआइटी, आइआइएम, मेडिकल कालेज अथवा एम्स जैसे नये शैक्षिक प्रतिष्ठान खोलने की घोषणा स्वागत योग्य है लेकिन प्राथमिक से लेकर माध्यमिक तक की बुनियादी शिक्षा के हालात सुधारने के लिए बजट में कुछ भी नहीं है. सिगरेट तम्बाकू महंगे करने की बात तो समझ में आती है पर कपड़े महंगे करने की बात तो समझ से परे है. डा.गिरीश ने कहा कि सरदार पटेल का सभी सम्मान करते हैं और उनकी प्रतिमा निर्माण के लिये आबंटन पर कोई ऐतराज नहीं है. लेकिन सवाल यह उठता है कि मोदीजी के आह्वान पर सरदार पटेल की प्रतिमा के निर्माण के नाम पर देश भर से जो लोहा और धन इकट्ठा किया गया उसका हिसाब कौन देगा? क्या यह धन भी श्रीराम मन्दिर के निर्माण के लिये एकत्रित धन की तरह काल के गाल में समा गया. मालवीय जी की स्मृति में योजना चले इससे ऐतराज नहीं है, लेकिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर की उपेक्षा का औचित्य समझ से परे है. डा.गिरीश ने कहा कि इस सरकार के डेढ़ माह के कार्यकाल में महंगाई ने ऊंची छलांग लगाई है, और अब रही सही कमी रेल और आम बजट ने पूरी कर दी है. भाकपा केंद्र सरकार के जन विरोधी और देश विरोधी क्रियाकलापों के खिलाफ आगामी १४ जुलाई को पूरे प्रदेश में जिला केन्द्रों पर धरने प्रदर्शन आयोजित करेगी. डा.गिरीश.

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