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गुरुवार, 4 मई 2017

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लखनऊ- 4 मई 17, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को श्री सुब्रह्मण्यम स्वामी और उनके बयान के बारे में जनता के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये. आज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री आदित्य नाथ योगी से मिलने के बाद श्री स्वामी द्वारा दिया गया बयान कि मंदिर तो श्री राम के जन्म स्थान पर ही बनेगा, मस्जिद तो कहीं भी बन सकती है, कई सवाल खड़े करता है, अलाबा इसके कि यह भाजपा के सांप्रदायिक और विभाजनकारी एजेंडे को गरम रखने की कवायद है. यहाँ जारी एक बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि जब मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और सर्वोच्च न्यायालय श्री स्वामी को अवांछित पक्ष बता चुका है, फिर भी स्वामी निरंतर विवादित बयानबाजी कर रहे हैं. आज का उनका बयान एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति- मुख्यमंत्री से भेंट के बाद आया है. इसके क्या अर्थ निकाले जायें? एक ओर भाजपा, प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री दुहरा चुके हैं कि अयोध्या विवाद का समाधान सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अथवा आपसी सहमति से ही संभव है, उन्हीं की पार्टी के एक नेता जनता के समक्ष इससे विपरीत बात रखते हैं. भाजपा इसे उनकी निजी राय बता कर पला झाड़ सकती है, पर यह सवाल तो बना रहेगा कि कैसे केंद्र और उत्तर प्रदेश में शासक दल का एक व्यक्ति निरंतर एक ही बयान दिये जारहा है. क्योंकि यह बयान श्री स्वामी ने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात के बाद दिया है अतएव मुख्यमंत्री को इस संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये. यह इसलिए भी जरुरी है कि प्रधानमंत्रीजी, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हमारे मुख्यमंत्रीजी लगातार सार्वजनिक बयान दे रहे हैं कि किसी को भी क़ानून से खेलने की इजाजत नहीं दी जायेगी और कार्यकर्ता शालीनता बरतें. ऐसे में उनका एक अग्रणी नेता लगातार क़ानून को चुनौती देने वाली और समुदाय विशेष में भय पैदा करने वाली भाषा बोल रहा है तो भाजपा को सबसे पहले उसीको पटरी पर लाना चाहिये. वरना जनता इसका यही अर्थ लेगी कि ये सारी बयानबाजियां जनता को भ्रम में डालने के लिए होरही हैं. डा. गिरीश, राज्य सचिव

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