लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पांच
महानगरों की विद्युत् व्यवस्था के निजीकरण को उपभोक्ता, कर्मचारियों और समाज के
हितों के विपरीत और पूंजीपतियों और ठेकेदारों के हित में बताया है. भाकपा ने इस
जनविरोधी फैसले को वापस लेने की राज्य सरकार से मांग की है.
यहां जारी एक प्रेस बयान
में पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि जहां जहां, जिस जिस व्यवस्था का भी
निजीकरण किया गया उससे आम जनता अथवा सरकार को कोई लाभ नहीं हुआ, केवल प्रायवेट
कंपनियों को लाभ पहुंचा है. पूर्व में टोरेंट कंपनी को सौंपी गयी आगरा और नोएडा की
विद्युत् व्यवस्था ने भी उपभोक्ताओं की कठिनाइयां ही बढ़ाई हैं.
भाकपा राज्य सचिव ने
निजीकरण के विरुध्द चल रहे विद्युत् कर्मचारियों और अधिकारियों के आन्दोलन का
समर्थन करते हुये भाकपा की जिला इकाइयों का आह्वान किया है कि वे जनहित में
विद्युत् कर्मचारी और अधिकारियों के आन्दोलन का समर्थन करें ताकि सरकार अपने इस
जनविरोधी फैसले को वापस लेने को बाध्य हो.
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