कश्मीर और संविधान को विनष्ट करने, दलितों अल्पसंख्यकों
आदिवासियों महिलाओं पर अत्याचारों के खिलाफ और मुख्यमंत्री को हठाये जाने की मांग को
लेकर 9 अगस्त क्रांति दिवस पर प्रदेश भर में प्रदर्शन आयोजित करेगी भाकपा
लखनऊ- 6 अगस्त 2019, भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी ने जम्मू एवं कश्मीर में आपातकाल से भी बुरे हालात
पैदा कर उस राज्य के टुकड़े टुकड़े करने वहाँ लागू संवैधानिक प्रावधानों को गैर लोकतान्त्रिक
तरीकों से समाप्त करने, संविधान और लोकतन्त्र को विनष्ट करने
की चेष्टा करने, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों एवं महिलाओं के विरूध्द होने वाले अत्याचारों के विरूध्द 7
से 9 अगस्त तक विरोध संगठित करने का आह्वान किया है।
उत्तर प्रदेश के घोरावल नरसंहार, उन्नाव बलात्कार पीड़िता और उसके परिवार को पूरी तरह नष्ट करने एवं उत्तर प्रदेश
में जंगल राज के लिये जिम्मेदार मुख्यमंत्री को हठाये जाने की मांगों पर बल देते हुये
राज्य में यह आंदोलन 9 अगस्त क्रांति दिवस के दिन आयोजित किया जाएगा।
इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं का एक विशाल
समूह 3 अगस्त को राष्ट्रीय महासचिव कामरेड डी॰ राजा, राज्य सचिव
डा॰ गिरीश, सहसचिव द्वय- अरविन्दराज स्वरूप एवं इम्तेयाज़ अहमद
के नेत्रत्व में सोनभद्र के पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचा और इस नर संहार और जमीन
घोटालों के लिये राज्य सरकार को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। भाकपा ने वहां जिले
के आला अधिकारियों को हठाये जाने और मुख्यमंत्री से स्तीफ़े की मांग की। इससे सरकार
बैकफुट पर आयी और उसे जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान और अन्य अधिकारियों
को हटाना पड़ा और भूमि घोटालों पर एफआईआर दर्ज करा जांच बैठानी पड़ी। लेकिन अन्य सवाल
अभी भी वहीं के वहीं हैं।
अब 9 अगस्त को उत्तर प्रदेश में भाकपा सभी जिला मुख्यालयों
पर धरने, प्रदर्शन और विरोध सभाएं आयोजित करेगी। इनके माध्यम से राष्ट्रपति और राज्यपाल
को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपे जायेंगे।
ज्ञापन में कश्मीर के विभाजन को रोके जाने, अनुच्छेद 370 को यथावत रखने, और संविधान को विनष्ट करने
की भाजपा और संघ परिवार की साज़िशों को रोके जाने की मांग की जायेगी।
घोरावल ( सोनभद्र ) नर संहार के दोषियों पर रासुका लगाने, समूचे प्रकरण की जांच उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश से कराने, प्रत्येक म्रतक के आश्रित को रुपये 50 लाख मुआबजा दिये जाने, घायलों के समुचित इलाज के लिये रुपये 5 लाख दिये जाने, वर्षों से ज़मीनों पर खेती कर रहे आदिवासियों को बेदखल नहीं किये जाने, उन्हें ज़मीनों का स्वामित्व दिये जाने, भूमाफियाओं के
खिलाफ कड़ी कार्यवाही किये जाने, वनाधिकार अधिनियम को लागू किये
जाने,पुराने सीलिंग कानून को पुनर्जीवित कर प्रदेश भर में भूमाफियाओं
द्वारा कब्जा रखी ज़मीनों को वितरित किये जाने तथा प्रदेश में भूमि आयोग गठित किये जाने
की मांग की जायेगी।
इसी तरह उन्नाव रेप पीड़िता एवं उसके समस्त परिवार को
विनष्ट करने के लिये जिम्मेदार सभी अपराधियों का पर्दाफाश कर उन्हे शीघ्र से शीघ्र
सजा दिलाने, पीड़िता को इलाज के लिये दिल्ली भेजने में विलंब
के लिये जिम्मेदार लोगों को चिन्हित कर उन्हें सजा दिलाने की मांग की जायेगी। उत्तर
प्रदेश में महिलाओं पर निरंतर होरहे अत्याचार- उनसे बलात्कार, बलात्कार कर वीडियो वायरल करना और बलात्कार के बाद उनकी हत्या करने जैसी जघन्य
वारदातों पर कारगर रोक लगाने की मांग की जायेगी। दोषियों को कड़ी सजा और कर्तव्यहीन
अधिकारियों को दंडित करने की मांग की जायेगी।
मोब लिंचिंग पर सख्ती से रोके जाने, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न रोके
जाने को कड़े और त्वरित कदम उठाने की मांग की जायेगी। उत्तर प्रदेश की चिंताजनक स्तर
तक गिर चुकी कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने और यूपी में जंगलराज के जनक मुख्यमंत्री
को हठाये जाने की मांग भी की जायेगी।
बिजली की दरों में प्रस्तावित व्रद्धि को वापस लेने
और बिगड़ी हुयी विद्युत प्रणाली में सुधार करने सहित प्रदेश के कुछ हिस्सों में बाढ़
और अन्य में सूखा के हालातों से निपटने को सरकार द्वारा पर्याप्त कदम उठाने की मांग
की जायेगी।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने बताया कि सभी जिला कमेटियों
को धरना, प्रदर्शन और विरोध सभाएं आयोजित करने का निर्देश दे दिया गया है।
इस संबंध में डा॰ गिरीश ने कहाकि भारतीय जनता
पार्टी सरकार अपने पाशविक बहुमत के आधार पर, तथा अन्य दलों के
विरोध के बावजूद भी संसद में खतरनाक विधेयक पास कराती जारही है। सरकार ये काम संसद
में अपने संख्या बल के बूते कर रही है, वह राजनैतिक हथकंडे
स्तेमाल कर कुछ राजनैतिक पार्टियों के ऊपर दबाव भी बना कर इन कार्यों को कर रही है।
देश के अंदर परिस्थितियाँ डरावनी होगयी हैं। आमजन
अपने आपको सुरक्षित महसूस नहीं कर पारहे हैं। दलितों, आदिवासियों एवं अल्पसंख्यकों के विरूध्द अत्याचारों में व्रद्धि हुयी है।
महिलाएं एवं बच्चे बच्चियाँ भी सुरक्षित नहीं हैं।
आरएसएस- भाजपा एवं उनकी अन्य संबध्द संस्थाएं कानून
को अपने हाथ में लेरही हैं और वो नफरत और हिंसा फैला रही हैं। मोब लिंचिंग की
घटनाओं ने बेहद कष्टकारक स्तर प्राप्त कर लिया है और उसके माध्यम से वह समाज को
अमानवीय बनाने की कोशिश में जुटे हैं।
नाबालिग लड़कियों एवं दलितों के विरूध्द अत्यंत
भयानक अपराध किए जारहे हैं। कठवा और उन्नाव की घटनाओं ने पूरे राष्ट्र को भारी
धक्का पहुंचाते हुये स्तब्ध कर दिया है।
भाजपा पूरी तरह से बेनकाब होचुकी है। क्योंकि उपरयुक्त घटनाओं में उसके
कार्यकर्ता नेता और समर्थक भी शामिल हैं और आरोपियों का बचाव और संरक्षण भी उन्हीं
के द्वारा किया जारहा है। उपेक्षित समुदायों तथा उनसे छीने जारहे उनकी भूमि के
अधिकार एवं उनके जीने का अधिकार को छीने जाने को सोनभद्र की हत्याओं ने पूरी तरह
से बेनकाब कर दिया है। इन घटनाओं ने ये भी साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश एवं
केन्द्र की सरकारें कितना अधिक दमनकारी होचुकी हैं। पूरे भारतवर्ष में आदिवासी
अपने जीवनयापन के अधिकार के विरूध्द अत्यधिक खतरा महसूस कर रहे हैं क्योंकि वन
रक्षा अधिनियम लागू नहीं किया गया है।
अब नरेन्द्र
मोदी सरकार ने धारा 370 और संविधान के अन्य प्रावधानों को एकतरफा तरीके से निरस्त कर और जम्मू
एवं कश्मीर राज्य का विभाजन कर हमारी संवैधानिक व्यवस्था को एक गंभीर आघात पहुंचाया
है। यह मुद्दा केवल जम्मू कश्मीर तक सीमित नहीं है। ये लोकतन्त्र, संघात्मकता और संवैधानिक व्यवस्था पर हमला है। यह भारत की एकता अखंडता के
लिये हानिकारक है। भारत की जनता को इसका पुरजोर विरोध करना चाहिए।
इन अत्यंत गंभीर एवं खतरनाक बनती परिस्थितियों में
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश अपनी समस्त पार्टी इकाइयो एवं आम जनता का
आह्वान करती है कि वे 9 अगस्त 2019 को विरोध संगठित करें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें