प्रकाशनार्थ-
उत्तर
प्रदेश में हिंसा और दमन को लेकर वामदलों ने
व्यापक
पैमाने पर ज्ञापन दिये
लखनऊ- 30 दिसंबर 2019, उत्तर प्रदेश में पुलिस प्रायोजित हिंसा जिसमें अब तक 22 लोग मारे जाचुके
है, वाराणसी, लखनऊ तथा प्रदेश के अन्य भागों
में वामपंथी दलों, सिविल सोसायटी और आमजनता खास कर अल्पसंख्यकों
की गिरफ्तारी, कर्फ़्यूनुमा धारा 144 के साये में यूपी भर में
चल रहे दमन के राज के खिलाफ और सीएए एनपीआर और एनआरपी की वापसी की मांगों को लेकर भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी
), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माले- लिबरेशन एवं अन्य
वामपंथी दलों द्वारा आज 30 दिसंबर 2019 को उत्तर प्रदेश भर में ब्लाक, तहसील और जिला स्तर पर ज्ञापन दिये गये। कई जगह संविधान की प्रस्तावना की
उद्देशिका का वाचन कर उसकी रक्षा का संकल्प लिया गया।
उत्तर प्रदेश के वामदलों के
इस आह्वान के समर्थन में दिल्ली में वामपंथी दलों ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया जिसे
वामदलों के शीर्ष नेताओं सहित तमाम प्रबुध्द लोगों ने संबोधित किया। कई अन्य राज्यों
में भी यूपी में सरकारी आतंक के खिलाफ वामदलों द्वारा इसी तरह के प्रतिरोध प्रदर्शन
किए गये। उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने उन सभी को इस एकजुटता प्रदर्शन के लिये धन्यवाद
दिया है।
यूपी में कर्फ़्यूनुमा 144 और
हिंसा के माहौल के चलते वामदलों ने केवल शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने की अपील की
थी, मगर यह कार्य बहुत ही व्यापक पैमाने पर हुआ। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण, न केवल जिला मुख्यालयों अपितु ब्लाक और तहसील स्तरों पर भी ज्ञापन दिये गये।
कई जगहों पर अधिकारियों ने वामपंथी कार्यकर्ताओं को धमकियाँ दीं तो कई अन्य जगह अधिकारियों
ने काले क़ानूनों के पक्ष में तर्क देकर स्वामिभक्ति का परिचय दिया। पर वामदल इन धमकियों
से डरने वाले नहीं हैं।
स्थानीय अधिकारियों
के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को दिये गये ज्ञापनों मांग की गयी है
कि विभाजनकारी, भय का पर्याय बने और और संविधान को तहस- नहस करने वाले नागरिकता संशोधन
कानून ( CAA ) को रद्द किया जाये। NPR
एवं NRC लागू करने की योजना निरस्त की जाये। CAA के पारित होने के बाद हुयी हिंसा की न्यायिक जांच कराई जाये। जांच में
पुलिस- प्रशासन की भूमिका भी शामिल की जाये। हानि की भरपाई के नाम पर की जारही
जबरिया और गैर कानूनी कार्यवाही को अविलंब रद्द किया जाये।
पुलिस प्रशासन द्वारा बदले
की भावना से की जारही गिरफ्तारियाँ बंद की जायें। छानबीन और पर्याप्त सबूत मिलने
के बाद ही गिरफ्तारी की जाये।
वाराणसी में 19 दिसंबर
2019 को राष्ट्रीय आह्वान के अंतर्गत शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे वामपंथी दलों और
सिविल सोसायटी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगाई गयी संगीन धाराओं को रद्द कर
उन्हें अविलंब बिना शर्त रिहा किया जाये।लखनऊ एवं प्रदेश के अन्य स्थानों पर
वामपंथी बुद्धिजीवियों, सिविल सोसायटी के लोगों और अन्य नागरिकों जिन्हें वैचारिक आधार पर
प्रताड़ना के उद्देश्य से गिरफ्तार किया गया है उन्हें बिना शर्त, तत्काल रिहा किया जाये। उन पर लगे मुकदमे वापस किए जायें। अन्य को फँसाने
की कारगुजारी रोकी जाये।
लोकतांत्रिक गतिविधियो को
कुचलने के उत्तर प्रदेश सरकार के कदमों पर रोक लगाई जाये। पुलिस कार्यवाही में
म्रतको के परिवारीजनों को मुआबजा दिया जाये, संपत्तियों के नुकसान की भरपाई की
जाये। गिरफ्तारियों के नाम पर लोगों के आवासों, दुकानों और
अन्य संपत्तियों की तोड़फोड़ बंद कराई जाये।
कर्नाटक में
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य कार्यालय में आगजनी की त्वरित जांच कराकर
दोषियों को गिरफ्तार किया जाये। मणिपुर में भाकपा के राज्य सचिव एल॰ सोतीन कुमार
की जमानत के बाद पुनः गिरफ्तारी निंदनीय है। उन्हें तत्काल रिहा किया जाये।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के
राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी) के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल
एवं भाकपा माले – लिबरेशन के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव ने उत्तर प्रदेश के सभी वामपंथी
कार्यकर्ताओं को इस दमघोंटू माहौल में अवाम की आवाज उठाने के लिये बधाई दी है। उन्होने
कहाकि आगामी दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जायेगा।
वामपंथी नेताओं ने सूबे में
धारा 144 हटाने की अपील की ताकि लोकतान्त्रिक आंदोलन को कुचलने के लिये उसका दुरुपयोग
न हो।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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