श्रमिकों
पर टूट रहे सरकारों के कहर और कोरोना के नाम पर तानाशाही लादने के खिलाफ वामपंथी दलों
ने विरोध का बिगुल फूंका
सैकड़ों स्थानों
पर अनशन किया गया, धरने दिये गये और ज्ञापन सौंपे गये
लखनऊ- 11 मई 2020, कोरोना से
निपटने में केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार की अदूरदर्शिता, लाक
डाउन को मनमाने और बचकाने तरीकों से लागू करने से देश और उत्तर प्रदेश की जनता का
बहुमत संकटों से घिर गया है। मजदूरों और प्रवासी मजदूरों की तो सरकारों ने दुर्गति
बना कर रख दी है। आम जनता को इस संकट से उबारने के लिये संजीदा प्रयास करने के
बजाय सरकारें संकट का भार आमजनों खास कर मजदूरों पर थोप रही हैं। अफसोस है कि इस
संकट काल में भी भाजपा और उसकी सरकारें सांप्रदायिक कार्ड खेलने से बाज नहीं
आरहीं। इससे संकट और भी गहरा होगया है। पुलिस का कहीं कहीं मानवीय चेहरा दिख जाता
है परंतु शेष मामलों में वह दमन की पर्याय बन कर रह गयी है।
वामपंथी दल स्पष्टरूप से कहना चाहते हैं कि मजदूरों, किसानों, लघु उद्यमियों, व्यापारियों
और आमजन को तत्काल कदम उठा कर संकट से निकाला न गया तो देश और उत्तर प्रदेश की
जनता को अभूतपूर्व हानि उठानी पड़ सकती है। अतएव इसी परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश
के वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट
पार्टी- मार्क्सवादी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माले एवं आल
इंडिया फारबर्ड ब्लाक के हजारों कार्यकर्ताओं ने आज उपर्युक्त तबकों को राहत
प्रदान करने की मांग को लेकर अपने कार्यालयों, घरों, तहसीलों एवं जिलाधिकारी कार्यालयों पर सैकड़ो स्थानों पर अनशन अथवा धरने
आयोजित किये।
यद्यपि वामदलों ने कार्यालयों अथवा घरों पर ही धरने
अथवा भूख हड़ताल का आह्वान किया था लेकिन कई जगह उत्साही साथियों ने कलक्ट्रेट, तहसील अथवा खंड विकास कार्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे। प्रदेश में
वामदलों के आह्वान पर कई स्वतंत्र वामपंथियों, ट्रेड यूनियनों
और महिला संगठनों ने भी मेहनतकश तबकों और देश हित में अपनी आवाज बुलंद की। एक एक जिले
में कई कई जगह धरने/ अनशन किये गये। कई जगह अधिकारियों से मिल कर ज्ञापन दिये गये तो
कई जगह ईमेल के जरिये ज्ञापन राष्ट्रपति और राज्यपाल को भेजे गये।
सभी 15 सूत्रीय ज्ञापनों में कहा गया है कि केन्द्र
सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार ने पहले से महंगे चल रहे डीजल और पेट्रोल की
कीमतों में भारी व्रद्धि कर दी है, जिसका उद्योग, व्यापार और खेती पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और महंगाई और भी बढ़ जायेगी। अतएव
केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा की गयी व्रद्धियां तत्काल वापस ली जायें। कम से कम
आधी की जायेँ।
ज्ञापनों में कहा गया महामारी का सारा बोझ आम जनता
पर डालना बन्द किया जाये और अमीरों पर अधिक टैक्स लगाया जाये।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा श्रम क़ानूनों को 3 साल
के लिये रद्द करने और काम के घंटे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। यह लाक डाउन से
लुटे-पिटे मजदूरों पर आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा हमला है। इन कदमों को अविलंब वापस
लिया जाये।
न्यूनतम वेतन रु॰ 21 हजार किया जाये। सभी संगठित और
असंगठित, सरकारी और गैर सरकारी विभागों/ उद्यमों में संविदा अथवा अन्य श्रमिकों के
बकाया वेतनों का भुगतान सुनिश्चित किया जाये। समस्त प्रवासी मजदूरों की घर वापसी
सरकारी खर्चे पर शीघ्र से शीघ्र सुनिश्चित की जाये। रास्ते में उनका उत्पीड़न रोका
जाये। हर एक श्रमिक को रु॰ 7500 की एकमुश्त मदद तत्काल दी जाये।
राशनकार्ड अथवा गैर राशनकार्डधारी हर परिवार को 35
किलो खाद्यान्न हर माह निशुल्क देना सुनिश्चित किया जाये। हर व्यक्ति को पूर्ण
रोजगार सुनिश्चित किया जाये। कोरोना वायरस से लड़ने के नाम पर जनता को भयाक्रांत और
दंडित करना बन्द किया जाये।
कैंसर, टीवी, हार्ट, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की फौरन
व्यवस्था की जाये। अस्पताल खोले जायें, सभी का इलाज
सुनिश्चित किया जाये। गर्भवती महिलाओं के लिये घर पर कंसल्टेशन और प्रसूति की
व्यवस्था की जाये।
मौसम की मार और लाक डाउन के प्रहार से व्यथित किसानों
के उत्पाद- अनाज, सब्जी, फल, दूध सब्जी आदि को उचित कीमत पर खरीदना सुनिश्चित किया जाये। अभी तक उत्तर
प्रदेश में गेहूं खरीद 25% भी नहीं हुयी। मौसम से प्रभावित गेहूं की भी खरीद की
जाये। प्रत्येक खरीद का तत्काल भुगतान किया जाये। किसानों को रु॰ 12 हजार की
एकमुश्त मदद की जाये। मंडी कानून में किसान विरोधी संशोधन वापस लिये जायें। आँधी-
तूफान से प्रतिदिन होरही जन और धन हानि की आर्थिक भरपाई की जाये।
कुटीर, लघु, मध्यम उद्योगों और छोटे व्यापारियों के लिये राहत पैकेज की घोषणा की
जाये। कोरोना की बीमारी के अलाबा लाक डाउन की विभिन्न कमजोरियों से अब तक लगभग 450
लोगों की जानें जा चुकी हैं। इन अवसाद, अभाव से पीड़ित
आत्महत्या करने वालों, रास्ते में दम तोड़ने वालों और
दुर्घटनाओं में म्रत श्रमिकों के परिवारों को रु॰ 50 लाख की आर्थिक सहायता दी
जाये।
सभी की कोरोना जांच मुफ्त कराई जाये। मुफ्त
चिकित्सा कराई जाये। कोरोंटाइन और आइसोलेशन केन्द्रों की स्थितियों में सुधार किया
जाये। जांच और इलाज में प्रशासनिक ढील बंद की जाये।
दलितों, अल्पसंख्यकों और
महिलाओं का उत्पीड़न और उन पर हिंसा रोकी जाये। लाक डाउन के नाम पर नागरिकों को जेल
भेजना, पीटना, वाहनों का चालान काटना
और जुर्माना बसूलना बंद किया जाये।
कोरोना की इस महा विपत्ति के समय भी भाजपा, संघ और सरकार द्वारा सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति बन्द की जाये। कोरोना
की आड़ में तानाशाही लादने को नए नये नये कानून थोपना बन्द किया जाये।
कोरोना से मुक़ाबले के लिये सभी दलों की बैठकें हर
स्तर पर बुलाई जायेँ और संयुक्त समितियां बनायी जायें। राजनैतिक गतिविधियों पर
थोपी हुयी पाबंदियां फौरन हटायी जायें।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भाकपा- मार्क्सवादी के राज्य सचिव
का॰ हीरा लाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव
एवं फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा ने आज के महत्वपूर्ण आंदोलन को सफल
बनाने वाले वामपंथी कार्कर्ताओं और समर्थकों को बधाई दी है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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