भाकपा और
सहयोगी संगठनों ने उत्तर प्रदेश में बिजलीकर्मियों के आंदोलन का जमकर समर्थन किया
“बिजली एक
सामाजिक जरूरत है, जिसे पाने का अधिकार हर भारतीय को है”:
डा॰ अंबेडकर
आने वाले
दिनों में सभी को और तीव्र संघर्षों के लिये तैयार रहना होगा:
डा॰ गिरीश
लखनऊ- 01 जून 2020, ऊर्जा क्षेत्र
के निजीकरण के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये विद्युत संशोधन अधिनियम 2020
के खिलाफ विद्युतकर्मियों और अभियन्ताओं के प्रतिरोध आंदोलन को उत्तर प्रदेश में भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी और उसके सहयोगी संगठनों का आज जम कर समर्थन मिला।
भाकपा के राज्य सचिव मण्डल ने इस ज्वलंत जन- प्रश्न
पर सत्ता द्वारा थोपे गये सन्नाटे और भय के आडंबर को तोड़ने के लिये विद्युतकर्मियों/
अभियन्ताओं, भाकपा एवं सहयोगी संगठनों के कार्यकर्ताओं एवं अन्य
सभी आंदोलनकारियों को क्रान्तिकारी अभिनंदन पेश किया है।
ज्ञातव्य हो कि भाकपा के उत्तर प्रदेश राज्य नेत्रत्व
ने 30 मई को ही इस आंदोलन को समर्थन प्रदान करने का आह्वान किया था।
भाकपा राज्य काउंसिल के आह्वान और निर्देश पर आज पार्टी
की अधिकतर जिला इकाइयों ने स्थानीय विद्युत प्रतिष्ठानों पर सामूहिक रूप से पहुंच कर
समर्थन का पत्र संघर्षरत अभियंताओं- कर्मचारियों को सौंपा। कई जगह स्थानीय अधिकारियों
के माध्यम से ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति अथवा प्रधानमंत्री जी को प्रेषित किये गये।
भाकपा ही नहीं कई जगह किसान सभा, एटक, नौजवान सभा, विद्युत पेंशनर्स
एसोसियेशन एवं केंद्रीय श्रम संगठनों की संयुक्त कमेटियों ने भी समर्थन में बैठकें
कीं, धरने दिये और ज्ञापन अथवा एकजुटता पत्र सौंपे। वे सभी बधाई
के पात्र हैं।
इन सब गतिविधियों की खबरें सोशल मीडिया पर लगातार प्राप्त
होरही हैं।
कई जगह राजनीतिक दलों और देश के भविष्य के प्रति जागरूक
नागरिकों ने भी आंदोलन का समर्थन किया। वाराणसी के वामपंथी- लोकतान्त्रिक दलों ने तो
कल ही बैठक कर निजीकरण के इस प्रयास के विरोध में उतर रहे मेहनतकशों के प्रति एकजुटता
का इजहार किया। वे सब भी धन्यवाद के पात्र हैं। कुल मिला कर के आंदोलन को अभूतपूर्व
समर्थन मिला है।
“ बिजली एक सामाजिक जरूरत है, जिसे पाने का हर भारतीय को अधिकार है। सरकार की यह ज़िम्मेदारी है कि वह हर
नागरिक को बिजली उपलब्ध कराये।“ यह शब्द किसी और के नहीं स्वयं बाबा साहब डा॰ भीमराव
अंबेडकर के हैं। इसीलिए आजाद भारत में पहले बिजली उत्पादन और फिर वितरण को सार्वजनिक
क्षेत्र में लाया गया भी। उसके परिणाम भी देखने को मिले।
लेकिन कारपोरेट घरानों की हितचिंतक यह सरकार जनता के
हितों हेतु हमारे राजनैतिक अग्रजों द्वारा उठाए कदमों को पलटने पर आमादा है। सार्वजनिक
क्षेत्र की बरवादी के इस कदम को बेशर्मी के साथ ‘आत्मनिर्भरता’ का नाम दिया जा रहा है। इसे न कर्मचारी बर्दाश्त करेंगे, न जनता बर्दाश्त करेगी, न लोकवादी राजनैतिक शक्तियां
बर्दाश्त करेंगी और नहीं वामपंथी शक्तियां।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि आने वाले दिनों
में सभी को अधिक कठिन संघर्षों के लिये तैयार रहना होगा।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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