लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने मुजफ्फरनगर दंगों के संगीन धाराओं वाले केसों को वापस
लेने के राज्य सरकार के फैसले की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है।
भाकपा ने राज्य सरकार के इस निर्णय को न्याय के सिध्दांत
की हत्या बताते हुये इस कदम को तत्काल वापस लेने की मांग की है। पार्टी ने आशा व्यक्त
की कि अदालतें जिस स्तर पर भी संभव हो इसका संज्ञान लेंगीं न्याय को दोहरा बनाने की
भाजपा सरकार की इस करतूत को रद्दी की टोकरी में डाल देंगी।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰
गिरीश ने कहाकि 2013 में मुजफ्फरनगर और उसके समीपस्थ जिलों में भाजपा और संघ द्वारा
प्रायोजित दंगों में सरकारी तौर पर 66 लोग मारे गये थे और 50 हजार से अधिक लोग विस्थापित
हुये थे। माली नुकसान का तो आंकलन कर पाना भी बेहद कठिन है। दंगाइयों के खिलाफ 125
से अधिक केस दर्ज हुये थे जिनमें अधिकतर भाजपा के नेतागण हैं। उनमें से कई तो सांसद, विधायक अथवा भाजपा के संगठन के उच्च पदों पर आसीन हैं।
ऐसे राजनैतिक अपराधियों से संगीन केसों को वापस लेकर
सरकार राजनीति में हिंसक अपराधियों की प्रतिष्ठा का काम कर रही है। आगामी लोकसभा चुनावों
से पहले केस वापस लेकर भाजपा संगीन अपराधियों को संदेश देना चाहती है कि वे चुनावों
में भाजपा का साथ दें तो उन्हें भी बिना ट्रायल मुक्ति मिल जायेगी। यह भारतीय दंड प्रक्रिया
संहिता के दुरुपयोग का गंभीर मामला है जिसका सामाजिक जीवन पर गंभीर असर पड़ेगा।
डा॰ गिरीश ने कहाकि भाजपा की कथनी करनी में अंतर है।
वह सामान्य लोगों पर फर्जी मुकदमे लगा रही है, यूपीकोका जैसे कानून
बनाती है और उसकी पुलिस तमाम नौजवानों को बिना आपराधिक सबूतों के फर्जी एंकाउंटर कर
मौत के घाट उतारने का काम कर रही है। वहीं भाजपा अपने कार्यकर्ताओं पर लगे संगीन केसों
को मनमाने ढंग से खत्म कर देना चाहती है। इससे
पहले स्वयं मुख्यमंत्री श्री आदित्यनाथ ने अपने ऊपर लगे मुकदमे वापस लेलिए थे। तिकड़मों
और कथित धर्मनिरपेक्ष दलों के नेताओं की साठ गांठ से कई भाजपाई और संघी बाबरी ध्वंस
के केसों से न केवल आज तक बचे हुये हैं बल्कि सत्तासुख भोग रहे हैं।
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि सरकार के इस निंदनीय और समाजविरोधी
कदम का पुरजोर विरोध किया जाएगा। 5 फरबरी को भाकपा तमाम जिलों में इसके विरोध में प्रदर्शन
कर ज्ञापन देंगी।
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