पेट्रोल, डीजल की कीमतों में निरंतर और असहनीय उछाल के विरूध्द-
उत्तर प्रदेश
भर में वामपंथी दलों के व्यापक और जुझारू प्रदर्शन
लखनऊ- 29 जून 2020, उत्तर प्रदेश
के वामपंथी दलों ने आज अपने को अनलाक करते हुये सड़कों पर संघर्ष का बिगुल बजा दिया।
केन्द्रीय नेत्रत्व के आह्वान पर आज चारों वामदलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा, माले- लिबरेशन एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक ने मोदी सरकार द्वारा 23 दिनों
से लगातार बढ़ाये जारहे पेट्रोल डीजल के मूल्यों और कमरतोड़ महंगाई के खिलाफ जिलों जिलों
में संघर्ष का शंखनाद कर चेतावनी दे दी कि यदि उसने जनता को लूट कर तवाह
करने वाले अपने कदमों को पीछे न खींचा तो आगे उसे और व्यापक संघर्षों का सामना करना
पड़ेगा। उनके इस संघर्ष को किसानों, खेतिहर मजदूरों, युवाओं, छात्रों और महिला संगठनों का भी साथ मिला।
वामपंथी दल और उनके सहयोगी संगठन लाक डाउन के काल में
भी निरंतर संघर्षरत थे और मर्यादाओं का पालन करते हुये कोई दर्जन भर कार्यक्रमों का
आयोजन किया था। पर ‘जुल्म जब बड़ता है तो पाबंदियाँ टूट जाती
हैं, पानी जब जोर मारता है तो बंधे तक ढह जाते हैं’ की कहावत को चरितार्थ करते हुये हजारों वाम कार्यकर्ताओं ने आज प्रतिरोध का
बिगुल फूंक दिया।
टीवी चेनलों ने भले ही इस बड़ी कार्यवाही से आंखें मूँद
ली थीं, लेकिन सोशल मीडिया आक्रोशपूर्ण नारों के प्रदर्शन की गूंज से पटा पड़ा था।
वामदलों के इस दाबे को कोई भी सोशल मीडिया पर जाकर चैक कर सकता है। कई जिलों में कई
कई जगह कार्यक्रम हुये तो कई जगह पुलिस ने पाबंदियां थोपने का पुश्तैनी काम किया। लेकिन
दमन का यह दुष्चक्र वामपंथी कार्यकर्ताओं के कदम रोक न सका।
सोशल मीडिया के माध्यम से शाम 5 बजे तक जिन जिलों की
कार्यवाहियों को जाना गया उनकी फहरिश्त लंबी है। लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, कानपुर शहर, मथुरा, मेरठ, गोरखपुर, आगरा, कानपुर देहात, जालौन, इलाहाबाद, झांसी, चित्रकूट, सुल्तानपुर, सोनभद्र, अलीगढ़, गाजियबाद, कुशीनगर, गाजीपुर, महाराजगंज, बुलंदशहर, मुरादाबाद, शामली, औरैया, कासगंज, बांदा, इटावा, मैनपुरी, फ़तेहपुर ( खागा ), जौनपुर, चंदौली, मिर्जापुर, बहराइच, बलरामपुर, फरुखाबाद, रायबरेली, आजमगढ़ ( लालगंज
), बलिया, भदोही,
बाराबंकी, हाथरस, गोंडा, देवरिया, मऊ, बस्ती, अंबेडकर नगर, हमीरपुर, आदि जगहों
पर कार्यक्रमों की सूचना सायं 5 बजे तक मिल चुकी थी।
इस संबंध में राष्ट्रपति महोदय एवं राज्यपाल उत्तर प्रदेश
को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपे गए।
ज्ञापनों में कहा गया है कि गत तीन सप्ताह से अधिक होगये, पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार व्रद्धि होरही है। इस व्रद्धि से
पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतें रुपये 80 प्रति लीटर के पार होगयी हैं। यह भी उस
समय होरहा है जबकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अभूतपूर्व
गिरावट आयी। इस गिरावट का लाभ आम जनता को मिल पाता उससे पहले ही केन्द्र सरकार ने
पेट्रोल डीजल पर उत्पाद कर और राज्य सरकारों ने वैट बढ़ा दिया। रही सही कसर
प्रतिदिन पेट्रोल डीजल की कीमतें बढ़ा कर तेल कंपनियों ने पूरी कर दी। रसोई गैस की
कीमतें भी काफी बढ़ चुकी हैं। यह भारत ही है जहां पेट्रोल,
डीजल पर विश्व में सर्वाधिक लगभग 69 प्रतिशत टैक्स लिया जारहा है।
73 साल में यह भी पहली बार हुआ है कि डीजल की
कीमतें पेट्रोल से अधिक होगयी है। निश्चय ही यह बेहद संकटपूर्ण स्थिति है। इससे
खेती, उद्योग, ट्रांसपोर्ट और नागरिक आवागमन सभी महंगे
होगये हैं। परिणामस्वरूप महंगाई ने छलांग भरना शुरू कर दी। यह सब उस समय और अधिक
तकलीफ बढ़ाने वाला है जब कोरोना संकट और लाक डाउन से भयंकर पैमाने पर बेरोजगारी फैली
है और आम नागरिकों की जेब खाली है। बदतर हालत में पहुंच चुकी अर्थव्यवस्था के
सामने और अधिक संकट खड़ा होगया है। इस सबसे वेपरवाह सरकार जनता को लूटने में जुटी
है।
पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ी कीमतों की मार से
किसानों, मजदूरों, व्यापारियों,
ट्रांसपोर्टरों और आम जनता को राहत दिलाने के लिये वामपंथी दल लगातार आवाज उठा रहे
हैं, लेकिन मगरूर सरकारों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अतएव
वामपंथी दलों ने देश भर में पुनः अभियान छेड़ा है। अवाम की कुछ अन्य समस्याओं को भी
उठाया गया है-
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पर्याप्त कमी तत्काल
की जाये। रसोई गैस की कीमतें भी कम की जायें। पेट्रोल एवं डीजल पर हाल ही के
सप्ताहों में बढ़ाये गये उत्पाद कर और वैट को तत्काल वापस लिया जाये। पेट्रोल, डीजल एवं रसोई गैस की पूर्व की मूल्य नियंत्रण प्रणाली लागू की जाये। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार पर कारगर रोक लगायी जाये।
आयकर के दायरे से बाहर समस्त परिवारों के खाते में
हर माह रुपये- 7500 अगले 6 माह तक निरंतर डाले जायें। हर जरूरतमन्द परिवार को
प्रति व्यक्ति 10 किलोग्राम के हिसाब से अनाज अगले 6 माह तक निरंतर मुहैया कराया
जाये।
उत्तर प्रदेश में चरमरा चुकी कानून व्यवस्था की हालत
को नियंत्रण में किया जाये। महिलाओं, दलितों और
अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न रोका जाये। कोविड अस्पतालों और एकांत केन्द्रों की दयनीय
व्यवस्थाओं में सुधार लाया जाये। अधिकाधिक जांच करा कर लोगों का मानवीय संजीदगी से
मुफ्त इलाज कराया जाये। मनरेगा का आकार बढ़ाया जाये और भ्रष्टाचार से बचाया जाये।
साथ ही इस मांग को भी जोरदारी से उठाया गया कि जनता
के हित में आवाज उठाने वाले विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का राजनैतिक
उत्पीड़न बंद किया जाये। अन्य गतिविधियों की तरह विपक्ष की राजनैतिक गतिविधियों को
अनलाक किया जाये।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा- माले, लिबरेशन के सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं फारबर्ड ब्लाक के संयोजक अभिनव कुशवाहा
ने प्रदेश के सभी वामपंथी नेताओं, कार्यकर्ताओं, सहयोगी संगठनों, शुभचिंतकों एवं आम जनता को इस सफल जन
कार्यवाही के लिये क्रांतिकारी बधाई प्रेषित की है और उम्मीद की है कि आने वाले दिनों
में वे जनता के ज्वलंत सवालों पर और भी सघन कार्यवाहियों के लिये तत्पर रहेंगे।
जारी द्वारा-
डा॰ गिरीश
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