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गुरुवार, 2 सितंबर 2021

शराब और मीट पर पाबन्दी के तुगलकी फरमान से मथुरा एवं अन्य स्थानों पर रोजी रोटी से वंचित हो जाएंगे हजारों लोग। फैसले से बाज आये राज्य सरकार।


 

लखनऊ- 2 सितंबर 2021, भारत की परंपरा सर्वे भवन्तु सुखिन: की है, इसीसे भारत का गौरव बढ़ेगा, हिन्दुत्व का गौरव बढ़ाने के नाम पर हजारों लोगों की रोजी रोटी छीनने और उनके परिवारों को भुखमरी की विभीषिका में धकेलने से नहीं।

उपर्युक्त विचार एक प्रेस बयान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने व्यक्त किये। डा॰ गिरीश सूबे के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मथुरा में मीट और शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाने के फैसले पर अपनी पार्टी की प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।

उन्होने कहाकि इस मनहूस फैसले से मथुरा के तमाम गरीब जिनमें दलित और अल्पसंख्यक अधिक हैं, भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। जनराजस्व की भी बड़ी हानि होगी। उन्होने आरोप लगाया कि जब से भाजपा सत्ता में आयी है, लोगों के रोजगार छीनने में जुटी है। उनको वैकल्पिक रोजगार देने की व्यवस्था किये बिना दसियों हजार लोगों की रोजी रोटी छीनना कहीं से भी उचित नहीं है।

यदि मीट और शराब की बिक्री रोकने से ही हिन्दुत्व का गौरव बड़ता है तो इसकी शुरुआत योगीजी को अपने गृह जनपद गोरखपुर से करनी चाहिये। और फिर यह गौरव मथुरा तक सीमित क्यों रहे, इसे समूचे उत्तर प्रदेश में विस्तार देना चाहिये। ये कितना उपहासास्पद है कि जो सरकार जहरीली शराब का निर्माण और बिक्री तथा उससे होने वाली मौतों को नहीं रोक पारही वह असली शराब की बिक्री रोक कर हिन्दुत्व को परवान चड़ाएगी। जो सरकार राजस्व के लालच में पीक कोविड काल में शराब बिकवाती रही वह अपनी सनक को पूरा करने को उसे बिकने से रोकेगी।

सरकार ने पहले ही मथुरा के कई कस्बों में मीट की बिक्री पर पाबंदी लगा कर हजारों को रोजगार से वंचित कर रखा है। अब नया फरमान दसियों हजार लोगों के मुंह का निवाला छीनेगा। राज्य सरकार ने पहले ही हजारों सरकारी नौकरियों में भर्ती को उलझा के रखा हुआ है, और चन्द नौकरियाँ दी भी जातीं हैं तो मुख्यमंत्री नियुक्तिपत्र स्वयं वितरित कर राजनीतिक लाभ उठाने में जुट जाते हैं। भाजपा राज में रोजगार से वंचित लोग आत्महत्यायें कर रहे हैं और भुखमरी तथा अर्थाभाव से जनित बीमारियो से मर रहे हैं।

ऐसे में मथुरा में शराब और मीट की बिक्री पर पाबन्दी लगाना लोगों के जीवन से खिलवाड़ करना है।

भाकपा ने कहाकि यदि मगरूर सरकार पाबन्दी लगाना ही चाहती है तो पहले इस कारोबार और इसके सहयोगी कारोबार से जुड़े लोगों को वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करानी चाहिये, तब किसी पाबन्दी की सोचना चाहिये। भाकपा ने मथुरा एवं उत्तर प्रदेश के समस्त नागरिकों से अपील की कि हिन्दुत्व की आड़ में लोगों की रोजी रोटी छीनने वाले इस घिनौने आदेश का पुरजोर विरोध करें।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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