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रविवार, 28 जुलाई 2013
at 8:50 pm | 0 comments | फिडेल कास्तरो, मोनाकाडा, विश्व शांति, AIPSO
मोनाकाडा क्रांति की 60 वीं जयंती पर गोष्ठी
बुधवार, 24 जुलाई 2013
at 9:14 am | 0 comments | AFSPA, BSF, CPI, S Sudhakar Reddy
CPI Wants Judicial Probe into Ramban Killings; Demands AFSPA to go
New Delhi: The Communist Party of India (CPI) today demanded a judicial probe into the recent killings of four civilians in Jammu and Kashmir, saying the “unprovoked action” was alienating large populace of the state from the mainstream.
The Left party also demanded immediate withdrawal of the Armed Forces Special Powers Act (AFSPA) from the hilly state.
“It is necessary that a judicial enquiry be ordered and the Armed Forces Special Powers Act be withdrawn at the earliest,” CPI general secretary S Sudhakar Reddy said here.
He said it was very unfortunate that four people were killed and 15 injured in the firing. The firing was allegedly carried out by the BSF. The firing was unnecessary, he said, adding that the BSF camp had been closed in the area after the incident, but accountability had to be fixed for the deaths.
मंगलवार, 23 जुलाई 2013
at 2:25 pm | 0 comments | कल्याण, दौलत, मनुष्य, हाय रे पैसे
हाय रे पैसे ---मोहम्मद ख़ालिक़
कहें तो क्या कहें?किस से
सभी हैं एक ही के हिस्से
कोई है नहीं जुदा हमसे
क्या कार वाले क्या जहाज वाले
क्या जो चलाते हैं रिक्शे
सभी की आँखों मे हैं,एक ही नक्शे
हाय रे पैसे,हाय रे पैसे
जीवन मे पैसे,पैसे हैं
फिर भी हैं कम,पैसे
दौलत भरी हो खान मे फिर भी कम हैं पैसे
पैसे से चिपक जाएंगी जब ज़िंदगी ऐसे
होगा मनुष्य का कल्याण फिर कैसे?
हाय रे पैसे,हाय रे पैसे । ।
*******************************************************
![]() |
| कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ |
(कामरेड मोहम्मद ख़ालिक़ इस समय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी , लखनऊ के ज़िला मंत्री हैं। उन्होने एक साक्षात्कार मेअपने उपरोक्त उद्गारों को व्यक्त करते हुये बताया कि जब वह छ्ठवी /सातवी कक्षा मे पढ़ते थे तब एक गरीब सहपाठी की उपेक्षा देख कर उनके मन मे ये विचार आए थे जिनको अक्सर वह लोगों से साझा करते रहते हैं।) उन्होने पार्टी को एक यह नारा भी दिया है-
निशान हो हँसिया बाली
और झण्डा हो लाल
खुशहाली से हम भी जिये
जिये हमारे लाल । ।
रविवार, 21 जुलाई 2013
बिजली का निजीकरण पूरी तरह जनविरोधी - भाकपा करेगी तीखा विरोध
शनिवार, 20 जुलाई 2013
at 10:22 am | 0 comments | आर एस पी, फारवर्ड ब्लाक, सी पी आई, सी पी एम
वामपंथी दलों के राष्ट्रीय कन्वेंशन का घोषणा-पत्र (उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में)
कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के शासन काल में खाने-पीने की आवश्यक वस्तुओं सहित हर चीज़ के दामों में भारी वृद्धि हुई है. मंहगाई की मार से जनता त्राहि-२ कर उठी है. किसान हितों के विपरीत नीतियों के चलते उनकी आर्थिक हालत जर्जर है और बड़ी संख्या में किसानों ने आत्म-हत्याएं की हैं. जमीनों पर बिल्डरों, खनन माफियाओं और कार्पोरेट घरानों का कब्जा होता जा रहा है. बेरोजगारी की दर में हैरान करने वाली वृद्धि हुई है. पांच साल से कम के ४५ प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. शिक्षा,इलाज,पेय जल और यहाँ तक कि पर्याप्त भोजन आबादी के बड़े हिस्से को मिल नहीं पा रहा है.
एक ओर जनता जहाँ इस कदर तंग हाल है वहीं संप्रग सरकार ने कार्पोरेट समूहों और बड़े,करोबारियों को भूमि,खनिज, गैस तथा स्पैकट्रम जैसे प्राकृतिक संसाधनों को लूटने की खुली छूट दे दी है. क्षेत्र की विशालकाय संपदाओं को धीरे-२ इन्हीं के हवाले किया जा रहा है. पिछले बजट में इन पर ५ लाख करोड़ रूपये के टैक्स को छोड़ दिया गया. जबकि पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों पर दी जाने वाली सब्सिडी में कटौती कर दी गयी. सरकार ने हर क्षेत्र में बड़े-२ घोटालों और भ्रष्टाचार को खुला प्रश्रय दिया है और जनता की अपार संपत्ति उसके हाथों से छिन कर घोटालेबाजों की तिजोरियों में चली गयी. यह सरकार विदेशी वित्तीय पूंजी को लाभ पहुंचाने के लिए खुदरा बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा दे रही है, परिणाम स्वरूप हमारे लगभग ४ करोड़ खुदरा व्यापारियों की आजीविका संकट में है.
महिलाओं को भोग की वस्तु बना कर रख दिया है अतएव उनके प्रति यौन हिंसा में वृद्धि हुई है. समाज में बराबरी के दर्जे से उन्हें वंचित किया जा रहा है. दलितों पर उत्पीडन बढ़ा है और उन्हें उनके बुनियादी हकों और आर्थिक उत्पादन की गतिविधियों में उनकी भागीदारी से वंचित रखा जा रहा है. मुस्लिम अल्पसंख्यकों की हालत सच्चर कमेटी ने उजागर कर दी है लेकिन इन हालातों में सुधार लाने को बहुत कुछ नहीं किया गया है, आतंकवाद से लड़ाई के नाम पर अक्सर बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को निशाना बनाया जाता है.
कांग्रेसनीत संप्रग सरकार ने हमारी घोषित विदेश नीति को पलट कर एक ऐसी विदेश नीति को अपनाया है जो हमारे घरेलू हितों की परवाह किये बिना हमें अमेरिकी हितों के पक्ष में खड़ी कर रही है. सीरिया में बढ़ते अमेरिकी –नाटो हस्तक्षेप के साथ भारत की गुप-चुप सहमति और अमेरिकी दबाव में ईरान से तेल की आपूर्ति में लगातार कटौती इसके ताजा उदाहरण हैं.
स्पष्ट है कि संप्रग सरकार की नीतियां जनविरोधी एवं जनवाद विरोधी हैं. वैकल्पिक नीतियों को आगे बढाने को कांग्रेस और संप्रग का न केवल विरोध करना होगा अपितु उन्हें सत्ता से हटाना होगा.
भाजपा की आर्थिक नीतियाँ पूरी तरह वही हैं जो कांग्रेस और संप्रग की. ऊपर से भाजपा घनघोर सम्प्रदायवादी है और समाज का बंटवारा कर मुक्त बाजार की लूट की व्यवस्था को मौका मुहैय्या कराती है. भावी लोकसभा चुनाव में अपनी जीत के लिए उसने मोदी का चेहरा आगे किया है. मोदी के गुजरात माडल का एक ही अर्थ है –मुस्लिम अल्पसंख्यकों का कत्ले आम और कारपोरेट समूहों की पौ बारह. इसीलिये पूंजीवादी तत्व मोदी का गुणगान कर रहे हैं. इस बात को सरासर छिपाया जा रहा है कि गुजरात में ग्रामीणों, गरीबों,आदिवासियों की हालत बेहद खराब है और सबसे ज्यादा कुपोषण गुजरात में है.
भाजपा संप्रग सरकार के भ्रष्टाचार पर कितनी भी हाय-तौबा करे लेकिन उसका भी दामन घपलों-घोटालों की गन्दगी से अटा पड़ा है. कर्नाटक की उसकी सरकार ने अवैध खनन से हजारों करोड़ की लूट की और विधान सभा चुनावों में उसे भारी हार का सामना करना पड़ा.
आर .एस.एस.और भाजपा ने पिछले एक-डेढ़ साल में उत्तर प्रदेश के कई शहर-कस्बों में साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा फैलाने का काम किया है. अब वे पुनः अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के मुद्दों को पुनर्जीवित कर रहे हैं और जम्मू व कश्मीर के सम्बन्ध में संविधान की धारा ३७० को हटाये जाने के अपने ऐजेंडे को आगे बढाने के लिए मौके का इन्तजार कर रहे हैं.
नीतियों और कार्यक्रम के सन्दर्भ में भाजपा,कांग्रेस का विकल्प नहीं है. अतएव सभी धर्म निरपेक्ष,देश भक्त और जनवादी ताकतों का यह कर्तव्य है कि भाजपा को कदापि सत्ता में न आने दें.
यह बहुत ही खतरनाक है कि देश की राजनीति में पैसे की ताकत और व्यापारिक प्रतिष्ठानों का प्रभुत्व बढ़ता जा रहा है. चुनावों में बड़े पैमाने पर धन के इस्तेमाल से राजनीतिक व्यवस्था दूषित हो रही है. जनादेश में जनता की आकांक्षा की जगह धन की ताकत परिलक्षित हो रही है. इसे रोकना होगा. पैसे की ताकत को रोकने के लिए चुनाव सुधारों की फौरी जरूरत है. बुनियादी सुधार के तौर पर आंशिक सूची व्यवस्था के साथ समानुपातिक प्रतिनिधित्व को लागू करने की जरूरत है. इससे एक हद तक धन बल और बाहु बल के दुरूपयोग पर रोक लगेगी.
देश को और अधिक संघीय व्यवस्था की जरूरत है. शक्तियों और संसाधनों का केंद्र के हाथों में संकेन्द्रण को कम किया जाना चाहिए. राज्यों की शक्तियों और अधिकारों को बढ़ाना होगा. जहाँ तक संसाधनों के हस्तांतरण का सम्बन्ध है तो पिछड़े राज्यों को विशेष दर्जा दिया जाना चाहिए. इसके लिए केंद्र राज्य संबंधों के पुनर्गठन की आवश्यकता है.
कांग्रेस नीत यूं.पी.ए.और भाजपा नीत एन. डी. ए. दोनों ही अंतर्विरोधों में फंसे हुए हैं और उनका दायरा सिकुड़ रहा है. ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि दोनों ही प्रमुख दल उन नीतियों और कार्यक्रमों को आगे बढ़ाते रहे हैं जो जनता के हितों में न होकर एक छोटे से दौलतमंद तबके के हित में है. वाम दलों के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों को छोड़ कर अन्य राज्य सरकारों ने भी आर्थिक नव उदारवाद के ढाँचे को ही आगे बढ़ाया है. अतएव ये सरकारें केंद्र सरकार के गर्भ से पैदा हो रही जनविरोधी और जनतंत्र विरोधी कार्यवाहियों से मुक्त नहीं हैं. उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियां भी कार्पोरेट समूहों,बड़े उद्योग समूहों तथा दलाल-माफियाओं के हित में काम कर रही हैं और किसान,कामगार,दस्तकार और आम आदमी की कठिनाइयाँ बढ़ा रही हैं. यह सरकार अपने चुनावी वायदों को भी पूरा करने से मुकर रही है. किसानों के कर्जे माफ़ नहीं किये गए,समस्त बेरोजगारों को भत्ता देने का वायदा अधूरा पड़ा है,किसानों की जमीनों का बड़े पैमाने पर अधिग्रहण जारी है,बिजली की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी कर दी गयी है,पेट्रोल,डीजल,गैस के ऊपर वैट की दरें कम करने को सरकार तैयार नहीं है,मंहगाई को रोकने में सरकार की कोई भूमिका नहीं है,शिक्षा एवं चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में निजी पूंजी का फैलाव आम आदमी की कठिनाइयों में इजाफा कर रहा है. शासन-प्रशासन में भ्रष्टाचार एवं क़ानून व्यवस्था की बदतर हालत लोकजीवन और सामाजिक सौहार्द पर भारी पड़ रही है. प्रदेश का मुख्य विपक्षी पार्टी बसपा है जो जनता के हित में कभी बोलती तक नहीं. शासक दल और मुख्य विपक्षी दल दोनों ही चुनावी मकसद से जातीय एजेंडे को ही आगे बढ़ा रहे हैं.
आज की जरूरत है कि कांग्रेस और भाजपा दोनों की नीतियों और उनके राजनीतिक मंचों को खारिज किया जाये. उत्तर प्रदेश सरकार की जनविरोधी कारगुजारियों के विरुद्ध आवाज उठाई जाए तथा बसपा जैसे दलों की मौक़ा परस्ती का पर्दाफ़ाश किया जाए.
देश को एक विकल्प की जरूरत है. ऐसा विकल्प केवल वैकल्पिक नीतियों के आधार पर ही उभर सकता है. एक वैकल्पिक नीति मंच होना चाहिए जिसके इर्द-गिर्द एक राजनीतिक विकल्प बनाया जा सकता है.
देश और प्रदेशों में चल रही आर्थिक नीतियों की जगह वैकल्पिक आर्थिक नीतियां, धर्म निरपेक्ष और सामजिक न्याय की हिफाजत,संघीय ढाँचे की मजबूती और एक स्वतंत्र विदेश नीति,ये तमाम एक वैकल्पिक नीति मंच की महत्वपूर्ण विशेषताएं हैं.
वामपंथी दलों ने आर्थिक,राजनीतिक और सामजिक क्षेत्र में एक ऐसे वैकल्पिक नीति मंच को सामने रखा है. इस वैकल्पिक मंच की मुख्य विशेषताएं हैं:
१.भूमि सुधार के क़दमों को लागू करना. अतिरिक्त जमीन का भूमिहीनों के बीच वितरण. हर एक भूमिहीन परिवार को घर बनाने के लिए जमीन सुनिश्चित करना. जबरन भूमि अधिग्रहण की समाप्ति. लखनऊ आगरा हाईवे जैसे गैर जरूरी मार्गों के निर्माण की योजना को रद्द करना. स्वामीनाथन आयोग की रपट के आधार पर किसानों को वाजिब मूल्य और सस्ता ऋण.
२.अधिक रोजगार के लिए आधारभूत ढाँचे और विनिर्माण व दूसरे उद्योगों हेतु सार्वजनिक निवेश को बढ़ाना . खनन व तेल संसाधनों का राष्ट्रीयकरण. उत्तर प्रदेश में रिक्त पड़े सभी प्रकार के पदों को भरा जाना, बंद पड़ी मिलों को पुनः चलाना.
३.टैक्स संबंधी उपायों में चोर दरवाजों को बंद करना और क़ानून सम्मत टैक्सों की उगाही सुनिश्चित करना. देश में सट्टेबाज वित्तीय पूंजी के प्रवेश पर नियंत्रण. वित्तीय क्षेत्र को निजी धनपतियों के लिए खोले जाने पर रोक. खुदरा व्यापार में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश नहीं. प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों पर वैट कम करना.
४.सार्वजनिक जन वितरण प्रणाली को लागू करना जिसमें सभी परिवारों को हर महीने अधिकतम २ रूपये किलो की दर से ३५ किलो अनाज मिले,इसे सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा क़ानून को पारित किया जाना चाहिए संप्रग द्वारा बनाया मौजूदा क़ानून खाद्य सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ है. प्रदेश में एक के बाद एक हो रहे खाद्यान घोटालों पर कारगर रोक तथा दोषियों को कड़ी सजा दिया जाना.
५.धर्मनिरपेक्षता के बुनियादी सिद्धांत के रूप में धर्म और राज्य को एक दूसरे से अलग रखने को संविधान में प्राविधान स्थापित करना. साम्प्रदायिक ताकतों पर लगाम लगाने के लिए ठोस कारवाई हो तथा उत्तर प्रदेश में हुए दंगों की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों के विरुद्ध ठोस कार्यवाही की जाए.
६.शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए धन आबंटन में बढ़ोत्तरी. स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं के निजीकरण पर रोक. शिक्षा का अधिकार क़ानून में अमल की गारंटी. प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटालों के दोषियों को सजा.
७.उच्च स्तरीय भ्रष्टाचार पर नकेल के लिए ठोस कदम. जांच करने की स्वतंत्र शक्तियों वाला लोकपाल क़ानून बने. चुनाव सुधार हों. उत्तर प्रदेश की पूर्व सरकार के कार्यकाल में हुए घोटालों के दोषियों को कड़ी सजा. मौजूदा शासन-प्रशासन में भ्रष्टाचार पर रोक.
८.महिलाओं को सभी क्षेत्रों में बराबर अधिकार. संसद और विधायिकाओं में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण :दलितों के हकों की हिफाजत और एस सी/एस टी के लिए आरक्षण का निजी क्षेत्र तक विस्तार. अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण पर रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट को लागू करना.आतंकवाद के नाम पर निर्दोषों को प्रताड़ित किये जाने पर रोक. आदिवासियों के लिए पांचवी व छठी अनुसूची के अधिकारों की रक्षा. उत्तर प्रदेश में महिलाओं,दलितों,अल्पसंख्यकों एवं आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों पर कारगर रोक.
९.मेहनतकश वर्गों के अधिकार –जायज न्यूनतम वेतन और सामजिक सुरक्षा उपायों का कडाई से अनुपालन, श्रम की ठेकेदारी और अनियमित काम की समाप्ति. उत्तर प्रदेश में श्रम कानूनों का पालन हो. न्यूनतम वेतनमान रूपये ११०००/-प्रतिमाह हो.
१०.स्वतंत्र विदेश नीति अपनाओ. अमेरिका परस्ती एवं साम्राज्यवाद परस्ती छोडो.
११.उत्तर प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बेहद खराब है. यहाँ माफिया-पुलिस-गुंडाराज चल रहा है. प्रदेश में क़ानून के राज की स्थापना की जाए.
वामपंथी दल सभी जनवादी ताकतों,जनवादी दलों और जनसंगठनों से इस वैकल्पिक राजनीतिक मंच को समर्थन देने की अपील करते हैं. वामपंथी दल इस मंच के पक्ष में समर्थन जुटाने के लिए एक राजनीतिक अभियान चला रहे हैं. आइये और इस अभियान में जुटिये ताकि हम सब एक ताकतवर राजनीतिक विकल्प के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ सकें और आम आदमी के जीवन को बेहतर बना सकें.
शुक्रवार, 19 जुलाई 2013
at 8:54 am | 1 comments | आशा मिश्रा, प्रदेशन, महिला फेडरेशन, विधानसभा
पुलिस विरोध के बावजूद विधानसभा पर 'महिलाओं का विरोध-प्रदर्शन'
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| दायें से दूसरे-का .आशा मिश्रा प्रादेशिक महासचिव ,भारतीय महिला फेडरेशन |
गुरुवार, 18 जुलाई 2013
at 8:23 am | 0 comments | CPI, Karnataka, Posco, South Korean Company
Posco Withdraws Plan for Steel Plant in India--great success of CPI
Posco Withdraws Plan for Steel Plant in India-By Sean McLain, Saurabh Chaturvedi, Kanga Kong
South Korean Company Cites Rights Delays, Local Opposition for Dropping $5.3 Billion Project
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A file photo of supporters of the Communist Party of India at a protest rally in New Delhi against Posco.
Saurabh Das/Associated Press |
बुधवार, 17 जुलाई 2013
at 6:39 pm | 0 comments | एफ डी आई, दूर संचार, बीमा, रक्षा क्षेत्र
संचार क्षेत्र में विदेशी पूँजी निवेश बेहद घातक. भाकपा ने वापस लेने की मांग की.
सी पी आई का साहस ---राष्ट्रीय सहारा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को धन्यवाद दिया जाना चाहिए कि उसने देश के लोकतंत्र की सबलता के प्रतीक ˜सूचना का अधिकार कानून की मर्यादा का खयाल रखा और पार्टी से संबंधित सवालों का बेबाकी से जवाब दिया। हैरानी यह है कि जिस कांग्रेस की अगुवाई में देश को यह युगांतरकारी अधिकार मिला था वही पार्टी इस कानून के लिहाज में पीछे रह गई। यह और अफसोसनाक है कि लोकतांत्रिक लिहाज की इस अवज्ञा में बीजेपी, सीपीएम, एनसीपी और बीएसपी जैसे राष्ट्रीय दलों ने भी उसका साथ दिया। राजनीतिक दलों को इस कानून की जद में लाए जाने की विरोधी खुद सीपीआई भी है लेकिन तिरस्कार की जगह उसने इस व्यवस्था का सम्मान रखा और साथ में लोकतांत्रिक अंदाज में अपनी आलोचना भी रखी। लेकिन बाकी पार्टियों के आचरण से झलक गया है कि वे किसी भी हालत में अपनी ˜सूचना अपने वोटरों के साथ साझा करने को तैयार नहीं हैं। खबर है कि कानून मंत्रालय ने सूचना अधिकार कानून में वे संशोधन भी तैयार कर लिए हैं जो राजनीतिक पार्टियों के लिए कवच का काम करेंगे। पहले र्चचा थी कि अध्यादेश के रास्ते ये संशोधन प्रभावी कर दिए जाएंगे। लेकिन खाद्य सुरक्षा के तुरंत बाद दूसरा अध्यादेश, वह भी ऐसे संवेदनशील मसले पर लाए जाने से शायद बचना चाह रही थी सरकार। सरकार को मालूम है कि सूचना कानून में इस सेंध के बाद कैसा बवाल मचना है। इसीलिए वह सभी पार्टियों को साथ कर संसद के रास्ते इस कानून की धार को मंद करने की राह पर चलना चाहेगी। अब यह देखिए कि सीपीआई ने इस कानून के तहत यही तो बताया कि उसे पिछले वर्षो में कहां से और कितना फंड मिला। बड़े चंदों की रसीदें भी उसने दिखाई। पारदर्शिता के इस आचरण से पूरे देश के दिल पर थोड़ा मरहम तो जरूर लगा होगा जो महाभ्रष्टाचारों की अनंत कथा सुन-सुन कर सुलगने लगा है। सूचना के अधिकार को अपने कामकाज में दखलंदाजी के रूप में क्यों ले रही हैं पार्टियां! सभी पार्टियां चंदे पर चलती हैं और रकम की मात्रा सत्ता में उनकी हनक के अनुपात में घटती-बढ़ती रहती है। चंदे के स्रेत और मात्रा को गोपनीयता के चादर में छुपाना पार्टियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा देता है। राजनीतिक पार्टियों की हैसियत वोटर बनाते हैं और पार्टियों को आज नहीं तो कल उनके प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझनी होगी। केंद्रीय सूचना आयोग की डेडलाइन खत्म होने के बाद अब उन पार्टियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुल गया है जिन्होंने मांगी गई सूचना निर्धारित समय तक नहीं दी। लेकिन, कार्रवाई के लिए भी डेढ़ महीने का अंतराल है। जाहिर है कि पार्टियां इस अंतराल के अंदर ही कानून में बदलाव लाना चाहेंगी। जनहित के लिए बनने वाले कानून भले पार्टियों के बीच घमासान में दब कर दम तोड़ देते हों, सूचना अधिकार पर चलने वाली तलवार का हाथ कोई रोक नहीं पाएगा। कानून में बदलाव वही लोग करने वाले होंगे जिन्हें देश ने इसी काम के लिए चुन कर भेजा है। यह बात दीगर है कि वे ताकत का इस्तेमाल लोकतंत्र की मजबूती नहीं, बल्कि अपने हितों की पूर्ति के लिए कर रहे होंगे।
मंगलवार, 16 जुलाई 2013
at 6:25 pm | 0 comments | मीडिया, मुख्यमंत्री, लैपटाप, समाजवादी
फिर चर्चा में है लैप-टाप
रविवार, 14 जुलाई 2013
CPI demands rollback of gas price hike---S Sudhakar Reddy
Maintaining that the Cabinet decision to hike gas prices from USD 4.2 to USD 8.4 per unit would increase the burden on the people, CPI General Secretary S Sudhakar Reddy claimed that the decision was taken "despite opposition from Left Parties, your allies and even your cabinet ministers."
In a letter to Prime Minister Manmohan Singh, he alleged that the government's decision was taken "to satisfy RIL gas company which willfully reduced the gas production to 19 per cent in KG6 (basin). We urge upon you to reconsider and withdraw this decision."
Terming as "strange" government's argument that the move would boost investment in gas extraction, he said "the price increase will be a burden on people to pay Rs 16,000 crores for every additional dollar increase of gas price every year in fertilizes and power sectors alone."
Reddy also asked as to why the price of "gas produced in India by our companies with some foreign companies collaboration is being fixed in US dollars rather than in Indian rupees. This looks very illogical. The price from beginning is in dollars. It looks that there is a deep conspiracy behind this method adopted."
Noting that the rupee value was "fast shrinking" and had depreciated 13 per cent since May, he said this would not only raise petro product prices, but education and travel would cost more too and deficit financing would increase.
"The gas which is produced in India is becoming costly with every fall in the value of rupee. One corporate house Nawab enjoys the profits at the cost of 'aam aadmi'. This is unacceptable," he said in the letter.
"I urge upon you to reconsider the whole decision and instruct that the price of the gas produced in India should be fixed in Indian currency, to save the nation from further loot," Reddy said.
गुरुवार, 11 जुलाई 2013
at 2:03 pm | 0 comments | राजनीति
राजनीति में अपराधीकरण और जातिगत रैलियों पर रोक का भाकपा ने किया स्वागत
बुधवार, 10 जुलाई 2013
at 4:49 pm | 0 comments | CPI, RTI, S. Sudhakar Reddy
RTI and CPI
at 8:54 am | 0 comments | BJP'sdesperation, D. Raja
'Desperate' BJP trying to polarise nation on communal lines--- D. Raja
Raja alleged that the BJP is trying to do is undermine the political system in the country.
"We do not elect Prime Minister directly, it is not our system. Even we do not elect the President directly. Whichever party gets adequate number to form the government, whichever coalition gets adequate number to form the government after elections; it is their prerogative to choose the leader," said Raja.
"But choosing the leader before election itself shows the weakness of that party. It cannot project any policy, it cannot project any programme. It wants to project a personality who is very controversial personality in the country," he added.
Raja further alleged that it shows the desperation on the BJP's part.
"I do not think there is a wave for Modi. I do not know in which world the BJP is living, but it shows the big desperation on the part of the BJP. The BJP is extremely desperate; somehow it wants to come to power and wants to win the elections," said Raja.
"So, the BJP tries all tricks and BJP wants to communalise the situation, it wants to polarise the people on the communal lines. It can go to any extent to divide the people, polarise the people which is not in the interest of democracy," he added.
सोमवार, 8 जुलाई 2013
at 6:37 pm | 0 comments | आतंकवादी, बोधगया, भाकपा सौहार्द
बोधगया में आतंकी हमला सौहार्द को बिगाड़ने की साजिश
at 4:26 pm | 0 comments | आरएसपी, फार्बर्ड ब्लाक, भाकपा, माकपा, लोकतान्त्रिक विकल्प, वामपंथी
उत्तर प्रदेश में वाम - लोकतान्त्रिक विकल्प के निर्माण हेतु वामदलों कदम बढ़ाये |
रविवार, 7 जुलाई 2013
at 3:59 pm | 1 comments |
30 सितम्बर को भाकपा करेगी बड़ा जमावड़ा
उपर्युक्त निर्णय आज यहां सम्पन्न भाकपा की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता का. राम धन ने की।
बैठक को सम्बोधित करते हुए भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि लगातार बढ़ रही महंगाई से जनता बेहद परेशान है। पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ाये जा रहे हैं और इसके चलते हर वस्तु के दाम आसमान छू रहे हैं। महंगाई से निजात दिलाने को भाकपा और वाम दल एक व्यापक खाद्य सुरक्षा विधेयक संसद में लाने की मांग कर रहे थे ताकि हर परिवार को हर माह पैंतीस किलो अनाज 2 रूपये प्रति किलो की दर से मिल सके। लेकिन आगामी लोकसभा चुनावों में वोटों पर नजर गड़ाये बैठी केन्द्र सरकार ने एक आधा अधूरा खाद्य सुरक्षा कानून अध्यादेश के जरिये बना डाला जिसके जरिये जनता को भूख से बचाना और खाद्यान्नों की सुरक्षा सम्भव नहीं है। अतएव वाम दल एक व्यापक खाद्य सुरक्षा कानून की लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि महंगाई और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी केन्द्र सरकार से लोगों का मोहभंग हो रहा है जिसके चलते छिन्न-भिन्न हो चुके राजग तथा भाजपा के मन में सत्ता पर आरूढ़ होने का गुबार चढ़ा हुआ है। लेकिन इसके लिए वह कोई जनपरक कार्यक्रम लाने में असमर्थ है और फिर से घनघोर साम्प्रदायिक एजेण्डे पर आगे बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा के इस सपने को चुनावों में धूल धूसरित कर देगी।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश की सरकार अपने चुनावी वायदे पूरे करने से या तो मुकर रही है और जिन वायदों को पूरा करने का उपक्रम किया जा रहा है, उस पर बड़े पैमाने पर सरकारी धन व्यय किया जा रहा है। लैपटॉॅप का वितरण इसका उदाहरण है, जिसे प्रशासन के जरिये बिना किसी खर्चे के जरिये बाटा जा सकता था। यह सरकार बिजली के दाम बढ़ा चुकी है, पेट्रोल-डीजल पर वैट कम करने को तैयार नहीं है, कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और शासन-प्रशासन पंगुता की स्थिति में है। प्रदेश का शासक दल हो या मुख्य विपक्षी दल बसपा दोनों अपने जातीय समीकरण के बल पर ही लोकसभा चुनावों में जाना चाहते हैं, जनता के हितों से जुड़े मुद्दों की उन्हें कोई परवाह नहीं है।
इसलिए उत्तर प्रदेश में वामपंथी दल एक नीतिगत और कार्यक्रम आधारित विकल्प बनाने की दिशा में गम्भीरता से विचार कर रहे हैं। भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने इस बात पर जोर दिया कि सूबे के चारों वामपंथी दलों को वह साथ लेकर हाल ही में 1 जुलाई को हुए वाम दलों के केन्द्रीय कन्वेंशन के लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश में अभियान चलाया जाये। इसके लिए भाकपा, माकपा, आरएसपी और फारवर्ड ब्लाक के राज्य नेतृत्व की एक बैठक 8 जुलाई को 11 बजे भाकपा राज्य कार्यालय पर बुलाई गई है।
(शमशेर बहादुर सिंह)
कार्यालय सचिव
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उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2019- आर्थिक और अन्य सहयोग हेतु भाकपा राज्य काउंसिल की अपील। प्रिय मित्रो , उत्तर प्रदेश विधान सभा क...
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लखनऊ 2 जून। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कौंसिल सदस्य कामरेड भानु प्रताप सिंह का 70 साल की आयु म...
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bhaskar ne aaj chhapa hai : बलाचौर & पैट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने यूपीए सरकार का पुतला फूंका...
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लखनऊ-27 जून-मुद्दाविहीन,जाति-पांति और सांप्रदायिकता पर आधारित राजनीति के दुर्ग को तोड़ कर मुद्दों तथा कार्यक्रमों पर आधारित राजनीति को आगे ...
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मैं उसे खोजता हूँ जो आदमी है और अब भी आदमी है तबाह हो कर भी आदमी है चरित्र पर खड़ा देवदार की तरह बड़ा - केदार नाथ अग्रवाल
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http://www.mynews.in/ ने निम्न समाचार प्रकाशित किया है : New Delhi: Delhi units of 13 parties, including Communist Party of India (CPI) and...
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दैनिक भास्कर ने आज छापा है कि: जोधपुर. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में बढ़ोतरी के विरोध में सोमवार को यून...
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पहले धन कमाओ और धन के बल पर राजनीति करो ! फिर राजनीति से हासिल दबंगई के बल पर और दौलत लूटो. इस लूट के लिए दबदबा जरूरी है. दबदबे के लिए सरक...
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लखनऊ 8 फरवरी 2009। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव डाॅ. गिरीश ने उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती से मांग की है कि वे कहा...
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अक्तूबर क्रांति और वर्तमान में उसकी प्रासंगिकता डा. गिरीश कुछ प्रगतिशील और अतिवादी वाम- बुध्दिजीवी कहते हैं कि सोवियत संघ इसलि...






