भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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सोमवार, 14 मई 2012


CPI Gen. Secy. S. Sudhakar Reddy in Press Conference at Lucknow

Lucknow 14th May. "CPI shall work hard for building a program based left democratic alternative to Congress led UPA and BJP led NDA", said S. Sudhakar Reddy, newly elected General Secretary of Communist Party of India (CPI) in a press conference here in Press Club. He said that UPA & NDA both are pushing the same economic policies of neo-liberalism, which are anti-people & pro corporate houses. These economic policies are leading to galloping gap in between poor & rich. As per international reports, India is one of the worst performers on the front of human development index & hunger index.
CPI General Secretary Sudhakar Reddy informed that left parties shall meet in New Delhi on 23rd May to work out common demands & program. We shall to the public to attain those demands and shall welcome all secular & democratic parties to join us by agreeing to our demands in furtherance of building a pro-people, vibrant, sensitive & strong left & democratic alternative in the country.
"Finance Minister is telling that he is having sleepless nights due to alarming economic situation of the country but his Government is not ready to withdrawn the subsidies being given to corporate houses but repeatedly speaking against the subsidies for common man, which are hardly half of the subsidies being given to corporate houses", said CPI General Secretary Sudhakar Reddy.
CPI General Secretary Sudhakar Reddy, objected on the signals being given by Washington to Indian Government for new edition of retrograde economic reforms. He also vehemently condemned the comments made by rating agency "Standard & Poors" suggesting the same economic reforms while downgrading the rating of India. He questioned why this rating agency not suggested any thing to USA while downgrading rating of USA few months ago.
CPI General Secretary Sudhakar Reddy declared CPI's opposition to proposed reforms of insurance, pension & banking sectors and allowing FDI in retail sector.
CPI General Secretary Sudhakar Reddy demanded fixing per capital income of Rs 100/- per day for identification of BPL. He said that only calorie intake should not be considered for deciding who is BPL or who is APL, instead availability of drinking water, shelter, education, health etc. should also be taken into consideration.
CPI General Secretary Sudhakar Reddy expressed opposion to a non political President. Some intellectual may also be considered but he should have ability, integrity and secular & democratic credentials to become fit for President Ship. He said that the post of President of the country is political and it would be better to have a political person in President House. While rejecting the name of APJ Abdul Kalam, he said that CPI is not averse to his ability as a scientist but not for presidentship. It is duty of the Congress to decide the name for next President and make efforts to build consensus. Only thereafter we shall take a decision to support or suggest a new name. He stressed for a non-congress & non-BJP candidate.
Referring completion of 60 years of Indian Parliament, but objected to the speech of the Prime Minister yesterday in the Parliament. He vehemently condemned the UPA Government for not allowing the elected MPs to raise the issues of Public in the parliament leading to the pandemonium. If they cannot raise issues of public, then what for these MPs are in parliament? He questioned.
Just 50 years ago, parliament completed its longest session of 140 days, but now-a-days, parliament is not meeting even 100 days in a year, said Sudhakar Reddy. Disenchantment has started increasing among the Public, which is not a good signal for democracy. Successive governments are responsible for it. Political system must wake up now.
CPI General Secretary termed Man Mohan Singh as worst Prime Minister of the country till date. On public issues, he is most inefficient, but he is brave enough to serve the interest of US imperialism & corporate houses.  Crony capitalism rose to new heights with much speed under his prime minister ship. Wealth of corporate houses increased many fold but the poor are not getting food even.
He demanded that Akhilesh Government must fulfil his election promises. On completing the studies, the student becomes unemployed in the age group of 18-20 years. After 35 years, people use to settle anyhow. Government must not disappoint this segment, he said.
Increasing employment potentiality of Uttar Pradesh is much more important task. UP is greater than half of Europe. If UP develops, India will develop. New young Chief Minister must give proper attention to this front, Sudhakar Reddy said.
                CPI General Secretary was accompanied by Secretary of Nation council of CPI Atul Kumar Anjan, State Secretary Dr Girish and senior leader Pradeep Tewari.
                CPI State Council is still in session and its decisions shall be circulated tomorrow.

(Shamsher Bahadur Singh)
Office Secretary
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भाकपा महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी की पत्रकार वार्ता का संक्षेप

CPI Gen. Secy. S. Sudhakar Reddy in Press Conference at Lucknow
लखनऊ 14 मई। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नवनिर्वाचित महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने यहां प्रेस क्लब में पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस नीत संप्रग एवं भाजपा नीत राजग के खिलाफ एक कार्यक्रम आधारित वाम लोकतांत्रिक विकल्प के निर्माण के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी गंभीर प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि दोनों गठबंधन नव उदारवाद की जिस आर्थिक नीति को आगे बढ़ा रहे हैं, वह देश की जनता के खिलाफ तथा बड़े पूंजीपतियों के हित में है। इस आर्थिक नीति ने अमीर और गरीब के बीच की खाई को बहुत ज्यादा गहरा कर दिया है। अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार मानव विकास सूचकांक एवं भूख सूचकांक के मोर्चे पर भारत दुनियां केे सबसे खराब परफॉर्मेंस देने वाले देशों में शामिल है।
भाकपा महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने कहा कि नई दिल्ली में 23 मई को सभी वामपंथी पार्टियां एक बैठक कर रहीं हैं जिसमें साझा मांगों एवं कार्यक्रम पर फैसला लिया जायेगा। हम इन मांगों को पूरा करवाने के लिए जनता के मध्य जायेंगे और धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक उन राजनीतिक दलों का मोर्चे में स्वागत करेंगे जो हमारी मांगों एवं कार्यक्रम के साथ जुड़ने के लिए तैयार हों जिससे एक मजबूत, जनता के प्रति संवेदनशील वाम लोकतांत्रिक विकल्प का निर्माण किया जा सके।
भाकपा महासचिव सुधाकर रेड्डी ने कहा कि वित्त मंत्री कह रहे हैं कि देश की खराब आर्थिक स्थिति के कारण उन्हें रात में नीद नहीं आती लेकिन सरकार पूंजीपतियों को दिये जा रहे अनुदान को वापस लेने के लिए कतई तैयार नहीं है जबकि आम आदमी को दिये जा रहे अनुदान का लगातार रोना रोया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि आम आदमी को दिया जाने वाला अनुदान पूंजीपतियों को दिये जाने वाले अनुदान का आधा भी नहीं है।
भाकपा महासचिव सुधाकर रेड्डी ने वाशिंगटन द्वारा आर्थिक सुधारों के नए संस्करण के लिए नई दिल्ली को दिये जाने वाले संकेतों की कटु निन्दा की। उन्होंने रेटिंग एजेंसी ‘स्टैन्डर्ड एंड पुअर्स’ द्वारा भारत की रेटिंग को घटाते समय आर्थिक सुधारों की जरूरत के बारे में दिये गये बयान की भी निन्दा की। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि कुछ ही समय पूर्व जब इस रेटिंग एजेंसी ने अमरीका की रेटिंग को नीचे गिराया था तब अमरीकी सरकार के लिए इसी तरह की जरूरतों को रेखांकित क्यों नहीं किया था?
भाकपा महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने कहा कि भाकपा बीमा, बैंक और पेंशन के क्षेत्रों में प्रस्तावित कथित सुधारों तथा खुदरा व्यापार में विदेशी निवेश के खिलाफ है और ऐसे किसी भी कदम के खिलाफ संसद और सड़कों पर विरोध करेगी।
भाकपा महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने मोंटेक फार्मेूले की निन्दा करते हुए कहा कि गरीबी की रेखा के नीचे उन लोगों को शामिल किया जाये जिनकी प्रतिदिन प्रतिव्यक्ति आय एक सौ रूपये है। उन्होंने कहा कि केवल निर्धारित कैलोरी आवश्यकता के आधार पर गरीबों को चिन्हित करना उचित नहीं है बल्कि इसके लिए पीने के पानी, आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी जरूरतों को भी शामिल किया जाना चाहिए।
भाकपा महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने कहा गैर राजनीतिक व्यक्ति के राष्ट्रपति बनाने का भाकपा समर्थन नहीं करती है। उन्होंने कहा कि देश के राष्ट्रपति का पद एक राजनीतिक पद है और उस किसी राजनीतिक व्यक्ति को ही बैठाना अधिक उपयुक्त होगा। किसी बौद्धिक व्यक्ति को भी राष्ट्रपति बनाया जा सकता है परन्तु राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए उसकी क्षमता, उसकी ईमानदारी, धर्मनिरपेक्षता एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था पर उसके पिछले रिकार्ड को भी ध्यान में रखना जरूरी है। प्रेस वार्ता में पूछे गये एक सवाल पर उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नाम पर अपनी असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि हम एक तकनीशियन के रूप में उनकी क्षमताओं के कायल हैं लेकिन राष्ट्रपति जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए उन्हें उपयुक्त नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को चाहिए कि वह नये राष्ट्रपति के लिए प्रस्ताव लेकर अन्य दलों से वार्ता कर आम सहमति बनाने का प्रयास करे। उसके बाद ही भाकपा यह तय कर पायेगी कि वह उस व्यक्ति का समर्थन करेगी अथवा किसी नए नाम का सुझाव देगी। उन्होंने राष्ट्रपति पद के लिए एक गैर-कांग्रेसी और एक गैर-भाजपाई व्यक्ति की आवश्यकता को रेखांकित किया।
भारतीय संसद द्वारा 60 वर्ष पूरा करने के सन्दर्भ में उन्होंने कल संसद में प्रधानमंत्री के भाषण की निन्दा करते हुए कहा संप्रग सरकार निर्वाचित सांसदों को संसद में जनता के मुद्दों को उठाने नहीं देती है जिसके कारण संसद में हंगामा होता है। उन्होंने प्रश्न किया कि यदि सांसद संसद में जनता के मुद्दे नहीं उठा सकते तो आखिर वे किस लिये चुने जाते हैं?
भारत के मजबूत लोकतंत्र की चर्चा करते हुए भाकपा महासचिव सुधाकर रेड्डी ने कहा कि संसद के 140 दिन चले सबसे लम्बे सत्र को पचास साल बीत चुके हैं लेकिन अब संसद की पूरे साल में 100 बैठकें भी नहीं होती। जनता के मध्य गुस्सा पनप रहा है जोकि लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। तमाम सरकारें इसके लिए जिम्मेदार हैं। राजनीतिक सिस्टम को अब जाग जाना चाहिए।
भाकपा महासचिव सुधाकर रेड्डी ने मनमोहन सिंह को देश का सबसे अक्षम प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि जनता के मुद्दों पर वे अक्षम और अकर्मण्य बन जाते हैं परन्तु अमरीकी साम्राज्यवाद और पूंजीवाद की चाकरी करने में वे बहुत बहादुराना चेहरा सामने लेकर आते हैं। उनके कार्यकाल में देश में पूंजीपतियों ने बहुत तेजी से प्रगति की है। कारपोरेट घरानों की परिसम्पत्तियों में हजारों गुना की बढ़ोतरी हुई है लेकिन गरीब को आज भोजन तक नसीब नहीं हो पा रहा।
भाकपा महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने कहा कि अखिलेश सरकार को चुनावों के दौरान जनता को दिये गये वायदों को पूरा करना चाहिए। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र बेरोजगार युवा बन जाता है। उसे उस समय धन की जरूरत होती है और 35 साल की उम्र तक तो आदमी कुछ न कुछ करने लग जाता है चाहे वह खोंचा लगाये, रिक्शा चलाये या मजदूरी करे। उन्होंने कहा कि बेरोजगार युवकों को प्रदेश सरकार को निराश नहीं करना चाहिये और 20 साल की उम्र पर बेरोजगारी भत्ता बिना किसी शर्त के देना चाहिए।
भाकपा महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में रोजगार सृजन किसी भी अन्य काम से ज्यादा महत्वपूर्ण काम है। उत्तर प्रदेश पूरे यूरोप का आधा है। अगर उत्तर प्रदेश विकसित होता है तो पूरा देश विकसित होगा। उत्तर प्रदेश के नये युवा मुख्यमंत्री को इस ओर पर्याप्त ध्यान देना चाहिए।
पत्रकारों से प्रेस क्लब में वार्ता के दौरान भाकपा की राष्ट्रीय परिषद के सचिव अतुल कुमार अंजान, राज्य सचिव डा. गिरीश तथा वरिष्ठ नेता प्रदीप तिवारी मौजूद थे।
(शमशेर बहादुर सिंह)
कार्यालय सचिव
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