भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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रविवार, 26 जून 2022

लोकसभा उपचुनाव परिणामों पर भाकपा की प्रतिक्रिया


वैचारिक संघर्ष और मुद्दों पर आंदोलन खड़ा करके ही भाजपा को परास्त किया जा सकता है; विचारधारा-विहीन लफ्फाजी और जातियों के गठजोड़ से नहीं

लखनऊ- 26 जून 2022, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा उपचुनाव नतीजों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के सचिव मंडल ने कहा कि भाजपा को निरन्तर वैचारिक संघर्ष और उठ रहे जन मुद्दों पर व्यापक आंदोलन खड़े करके ही परास्त किया जा सकता है। विचारधार-विहीन लफ़्फ़ाज़ी, जातियों- उपजातियों के गठजोड़ और संकीर्ण दलीय स्वार्थों को लेकर चलने वाले दल और व्यक्ति, महाशक्ति बन चुकी भाजपा को परास्त नहीं कर सकते।

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा कि सत्ता, प्रशासन के भय, धनबल, विभाजनकारी नीतियों और बिके हुये मीडिया की एकतरफा भूमिका के बावजूद इन चुनावों में भाजपा की हार के लिए पर्याप्त कारण मौजूद थे। आकाश छूती महंगाई, बेरोजगारी, नित रोज सामने आरहे घोटाले, अर्थव्यवस्था की दयनीय दशा, सार्वजनिक क्षेत्र का बेचा जाना, अग्निपथ जैसी योजनाएँ लाकर नौजवानों से छलावा और उनका दमन, विकास और गरीबी के मानकों में उत्तर प्रदेश का पिछड़ते जाना, बलात्कार हत्या लूट जैसे अपराधों की बाढ़, अल्पसंख्यकों दलितों कमजोरों का उत्पीड़न, ऊपर से दमनकारी बुलडोजरवाद और पुलिसराज जैसे तमाम मुद्दे थे जिन पर भाजपा और उसकी सरकार को घेरा जा सकता था। लेकिन विपक्ष की क्षेत्रीय पार्टियां इन मुद्दों को उभारने में असफल रहीं और जातीय जोड़ तोड़ और विचारधारा-विहीन लफ्फाजी पर ही आश्रित रहीं।

भाकपा ने कहा कि विधान सभा एवं विधान परिषद के चुनावों में भाजपा के हाथों करारी हार के बावजूद विपक्षी नेत्रत्व ने उपचुनावों में समस्त भाजपा विरोधी ताकतों को एकजुट नहीं किया, वामपंथी दलों से संपर्क तो दूर उनके बारे में नकारात्मक टिप्पणियाँ की गयीं, आजमगढ़ जैसी जगह जहां भाकपा का परंपरागत आधार है, उसकी उपेक्षा की गयी और भाजपा की ताकत के मुक़ाबले एक सक्षम और समानान्तर ताकत खड़ी करने की कोशिश दूर दूर तक नहीं की गयी। अतएव नतीजा सामने है। इन नतीजों ने भाजपा के दुस्साहस को और बढ़ा दिया है और अब वह और अधिक निर्ममता एवं निर्भयता से दमन और आतंक चलायेगी।

अतएव भाकपा दोहराती है कि भाजपा और संघ की कट्टर हिंदुत्ववादी और कारपोरेटपरस्त नीतियों और उनके लागू किये जाने से पैदा हो रहे मुद्दों पर वैचारिक अभियान और आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है। वामपंथी दल इसके लिये प्रतिबध्द हैं और शीघ्र ही एक ठोस कार्ययोजना आम जनता के समक्ष रखी जायेगी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश    

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शुक्रवार, 17 जून 2022

देश के सुरक्षा सरोकारों से खिलवाड़ है 'अग्निपथ' योजना


अग्निपथ योजना को फौरन रद्द किया जाये, रिक्तियों को मौजूदा प्रक्रिया से तत्काल भरा जाये: भाकपा

लखनऊ- 17 जून 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने सेना को छोटी और युवा बनाने के नाम पर अग्निपथ नाम की नयी योजना को लागू करने के कदम को सिरे से खारिज कर दिया है।

यहां जारी एक प्रेस बयान में कहा गया है कि भाकपा महसूस करती है कि सैनिकों की मौजूदा सेवा शर्तों और अनुशासन में किया जाने वाला कोई भी बदलाव देश की सुरक्षा और संप्रभुता को हानि पहुंचाएगा। सरकारी राजस्व के व्यय से संपूर्ण प्रशिक्षण पाने के बाद संविदा पर नियुक्ति एवं अल्पकालिक रोजगार न केवल सेवाओं की गुणवत्ता को प्रभावित करेगा, अपितु प्रशिक्षित युवाओं के भविष्य को भी हानि पहुंचायेगा। 4 साल बाद वापस आने के बाद उन्हे उपयुक्त रोजगार पाना कठिन ही नहीं असंभव हो जाएगा।

भाकपा ने अग्निपथ को लेकर युवाओं के आक्रोश को स्वाभाविक बताते हुये उनकी मांगों को सामयिक और न्यायोचित बताया है। पार्टी ने लोकतान्त्रिक ढंग से आवाज उठाने की सलाह युवाओं को दी है।

भाकपा ने सरकार को सुरक्षा बलों में भर्ती अथवा पदोन्नति के मौजूदा ढांचे में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करने की चेतावनी दी है।

भाकपा मांग करती है कि अग्निपथ योजना को तत्काल रद्द किया जाये और मौजूदा रिक्तियों को मौजूद प्रक्रिया से ही फौरन भरा जाये।

डा॰गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 13 जून 2022

उत्तर प्रदेश सरकार की कारगुजारियों पर भाकपा ने उठाए सवाल


अवैध ध्वस्तीकरण रोको; उकसाबेबाजों को दंडित करो

लखनऊ- 13 जून 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मण्डल ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भय, विभाजन और राजनैतिक पूंजी बढ़ाने के उद्देश्य से लोगों के आवासों पर चलाया बुलडोजर अवाम के रहने, जीने के अधिकार और गरिमा पर बर्बर हमला तो है ही, यह पूरी तरह गैर कानूनी, असंवैधानिक और न्याय के सिध्दांत का ध्वस्तीकरण है। मध्यकालीन बर्बरता को बहुत पीछे छोड़ चुकी इन कार्यवाहियों को उत्तर प्रदेश सरकार को तत्काल रोकना चाहिये। वरना पुनः जंगल का कानून लौटते देर नहीं लगेगी।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवा निव्रत्त न्यायाधीश श्री गोविन्द माथुर की इस गंभीर टिप्पणी के बाद कि “यह पूरी तरह गैर कानूनी है, भले ही एक पल के लिये ही यह मान लें कि निर्माण अवैध था, करोड़ो भारतीय भी ऐसे ही रहते हैं। यह अनुमति नहीं है कि आप रविवार को एक घर को ध्वस्त कर दें, जबकि उसका निवासी हिरासत में हो। यह कोई तकनीकी मुद्दा नहीं है। कानून के शासन का सवाल है।“ यह तय होगया कि सबकुछ मनमाने ढंग से चल रहा है। इसका न्यायिक प्रतिकार होना चाहिये भाकपा ने कहा है।

शुक्रवार को हुयी पत्थरबाजी की घटनायें कदापि उचित नहीं कही जा सकतीं और हर जिम्मेदार दल और व्यक्ति ने उसकी आलोचना की है। लेकिन भाजपा, आरएसएस, केन्द्र व राज्य सरकार तथा मीडिया के बड़े हिस्सों द्वारा निरंतर की जा रहीं उकसाबे की कार्यवाहियाँ क्या इन घटनाओं के लिये जिम्मेदार नहीं हैं? क्या इन उकसाबेबाजों को पहले ही दंडित नहीं किया जाना चाहिये था? यदि उनको कानून के तहत कठघरे में खड़ा किया गया होता तो बहुत संभव है, ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनायें होती ही नहीं। फिर पत्थरबाजी की घटनायें निरंतर मानसिक प्रताड़ना से उद्वेलित लोगों द्वारा किन्ही निहित राजनैतिक स्वार्थों के भड़काने पर की गयी प्रतीत होती हैं, लेकिन यह अवैध ध्वस्तीकरण तो उन हस्तियों द्वारा किया और कराया जा रहा है जो संवैधानिक पदों पर आसीन है।

भाकपा ने पुरजोर शब्दों में मांग की कि अवैध ध्वस्तीकरण की इन कारगुजारियों को तत्काल रोका जाये, पत्थरबाजी की घटनाओं की गहराई से जांच करा के उसके प्रेरकों को दंडित किया जाये, मुस्लिम समुदाय को मानसिक प्रतारणा देने वाली कार्यवाहियाँ तत्काल रोकी जायें उकसाबेबाजों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही की जाये, ध्वस्त की गई संपत्तियों का मुआबजा दिया जाये। भाकपा अपेक्षा करती है कि उच्च और सर्वोच्च न्यायालय समूचे हालातों का स्वतः संज्ञान लेकर विधि के शासन और न्यायिक प्रणाली के प्रति विश्वास की रक्षा करेंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश   

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शुक्रवार, 10 जून 2022

वामपंथी दलों की विस्तारित बैठक 6 जुलाई को भाकपा कार्यालय लखनऊ में


जातीय जनगणना, अल्पसंख्यकों के प्रति घ्रणा अभियान, विधायक निधि में बढ़ोत्तरी, महंगाई और बेरोजगारी, बुलडोजरवाद और पुलिसराज के विरूध्द उत्तर प्रदेश में अभियान चलाने की रूपरेखा बनाने में जुटे वामपंथी दल

लखनऊ- 10 जून 2022, जातिगत जन गणना से उत्तर प्रदेश सरकार के मुकरने, पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी विधायक निधि को बढ़ा कर रु॰ 5 करोड़ कर दिये जाने, सारी सीमायें लांघ रही महंगाई और बेरोजगारी, अल्पसंख्यकों के प्रति केन्द्र, उत्तर प्रदेश सरकारों और संघकुल  द्वारा चलाये जा रहे घ्रणा अभियान, बुलडोजरवाद और पुलिसराज के चक्र तले रौंदे जा रहे अवाम की पीड़ा जैसे सवालो पर उत्तर प्रदेश में वामपंथी दल बड़ी कार्यवाहियों की ओर बढ़ने की योजना पर काम कर रहे हैं।

इस संबंध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी एवं भाकपा- माले के राज्य सचिवों ने आज लखनऊ में बैठक कर प्राथमिक चर्चा की।

बैठक में निर्णय लिया गया कि उपर्युक्त के संबन्ध में विस्तारित चर्चा हेतु वामपंथी दलों का शीर्ष नेत्रत्व एक और विस्तारित बैठक आयोजित करेगा। यह बैठक आगामी 6 जुलाई को पूर्वान्ह 10: 30 बजे भाकपा के राज्य कार्यालय, 22 कैसरबाग, लखनऊ में आयोजित की जायेगी। बैठक में वामदलों के राज्य सचिव मंडलों के साथीगण शिरकत करेंगे। वामपंथ की सहयोगी कई अन्य पार्टियों की ओर से उनके दो प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जा रहा है।

बैठक के बाद एक संयुक्त प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव एवं भाकपा माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने दलितों और पिछड़ों को जाति- धर्म के नाम पर बरगला कर उनका वोट हासिल कर सरकारें तो बना लीं, पर अब वह उनकी समस्याओं के निदान और सामाजिक न्याय के सवाल से भाग रही है। इसीलिए केन्द्र और राज्य सरकारें जाति आधारित जनगणना और गणना कराने में निरंतर टालमटोल कर रही हैं। जनता की आलोचनाओं के बावजूद उत्तर प्रदेश सरकार ने विधायक निधि को बढ़ा कर 5 करोड़ कर उनकी सात पीढ़ियों के विलासितापूर्ण जीवन का इंतज़ाम कर दिया है। लोकसभा के उपचुनावों और राष्ट्रपति चुनाव से पहले यह कार्यवाही चुनावी लाभ की भावना से प्रेरित है।

वामपंथी नेताओं ने कहा कि महंगाई पहले ही सातवें आसमान पर है और अब जिम्मेदार संस्थाओं ने विकास दर के नीचे जाने और महंगाई को छप्पड़ फाड़ कर आगे जाने की भविष्यवाणियाँ की हैं। इससे जनता का जीवन संकट में आ गया है और कई लोगों ने धनाभाव से पीढ़ित हो स्वयं अथवा परिवारों सहित आत्महत्याएं की हैं। वामपंथ निरंतर इस सवाल पर संघर्षरत है और उसने 25 से 31 मई तक व्यापक जन आंदोलन चलाया है। लेकिन अब इस सवाल को और शिद्दत से आगे बढ़ाया जायेगा। रोजगार देने वाली परंपरागत योजनाओं से मुकरने, मनरेगा को सीमित करने, भर्ती जाम और सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण से बेरोजगारी ने युवाओं और मजदूरों को भुखमरी के गर्त में धकेल दिया है, अतएव संघर्ष का यह एक अहम मुद्दा होगा।

सरकारों का पीछा कर रही समस्याओं से ध्यान हटाने को सत्ता की ताकत से चूर संघकुल द्वारा अपनी अल्पसंख्यक विरोधी विचारधारा को सरकारों के जरिये अमल में लाने से आज अल्पसंख्यकों के खिलाफ भारी घ्रणा अभियान चलाया जा रहा है जिसकी कीमत देश को विश्व स्तर पर चुकानी पड़ी है। ज्वलंत समस्याओं से आक्रोशित जनमानस को बुलडोजर चला कर और पुलिस को दमन की खुली छूट दे कर भयाक्रांत किया जा रहा है। राजनीति से प्रेरित इस दमनचक्र के बावजूद उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था जर्जरतम स्थिति में है।

6 जुलाई को होने जा रहे वाम- समागम में इन सवालों पर गंभीरता से विचार कर आगे की कार्ययोजना तैयार की जायेगी, वाम नेताओं ने कहा है।

जारी द्वारा-

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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रविवार, 5 जून 2022

बुलडोजरवाद पुलिसराज के तले कराह रहा है उत्तर प्रदेश


हापुड़ में फैक्ट्री मजदूरों की दर्दनाक मौत पर भाकपा ने गहरी वेदना प्रकट की

भाकपा की मेरठ मंडल की इकाइयों को आवश्यक कदम उठाने और 8 जून को

ज्ञापन दिये जाने का निर्देश दिया

लखनऊ- 5 जून 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने जनपद- हापुड़ के धौलाना में एक फैक्ट्री में हुये हादसे में अब तक हुयी 13 मजदूरों की दर्दनाक मौत पर गहरी वेदना व्यक्त की। घायलों के प्रति गहरी सहानुभूति जताते हुये उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की तथा आशा जतायी कि लापता मजदूर शीघ्र अपने परिवारों को वापस मिल जायेंगे। घायलों के संपूर्ण और समुचित इलाज की मांग करते हुये प्रत्येक म्रतक परिवार को रुपये 50 लाख की  आर्थिक सहायता तथा घायलों को इलाज और आजीविका खर्च अलग से दिये जाने की मांग की।

भाकपा ने घटना की उच्च स्तरीय जांच कराये जाने और उत्तर प्रदेश के उद्योगों में मजदूर वर्ग के शोषण उनके उत्पीड़न और उनकी असुरक्षा जैसे सवालों पर न्यायिक आयोग बैठाये जाने की मांग की।

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा कि उत्तर प्रदेश का कथित विकास का माडल मजदूर वर्ग की यातनाओं, शोषण और उनकी जान की नींव पर खड़ा है। श्रम क़ानूनों को चार लेबर कोड्स में बदले जाने के बाद से तो मजदूरों की हालत कीड़े मकोड़ों जैसी हो गयी है। उन्हें बेहद कम वेतन, ठेके या दैनिक मजदूरी पर हर तरह से असुरक्षित और अमानवीय वातावरण में काम करना होता है। बिजली के खंभों में करेंट आ जाने, बिना सुरक्षा उपकरणों के सीवर लाइनों में काम करने, सड़कों और पुलों के जोखिमपूर्ण कामों में बिना सुरक्षा इंतज़ामों के लगाने और भाजपा की इंस्पेक्टर राज समाप्त करने की सनक के चलते हर रोज मजदूर जान से हाथ धो रहे हैं और सरकार की अनदेखी उनके परिवारों को असुरक्षित भविष्य की अन्धी गली में धकेल रही है।

वैसे भी बुलडोजरवाद और पुलिसराज के तहत कशमशा रहे उत्तर प्रदेश का हर दिन बेहद पीड़ादायक होता है। आज की ही खास खबरों पर नजर डालें तो मथुरा जनपद के गाँव नवादा में भाजपा नेता की फैक्ट्री में चौकीदार को चारपाई से बांध ट्रेक्टर चड़ा कर उसकी न्रशंस हत्या कर दी गयी। इसी जनपद के विद्यापति नगर थाने के मऊ बाज़ार में गरीबी और आर्थिक तंगी से आजिज़ आकर मनोज झा ने बूढ़ी माँ और परिवार के 5 सदस्यों सहित आत्महत्या कर ली। बदायूं में थर्ड डिग्री देकर पुलिसकर्मियों ने एक युवक को मरणासन्न हालत में पहुंचा दिया तो जनपद जौनपुर में होमगार्ड को पीट पीट कर मार डाला गया। कहीं ट्यूशन टीचर के पति ने छात्रा से मुंह काला किया तो कहीं बलात्कार पीड़िता ने न्याय न मिलने पर फांसी पर लटका लिया। हत्या लूट अपहरण और बलात्कार तो यहां रामराज्य के आभूषण बन चुके हैं।

पर यह खबरें कानपुर की पत्थरबाजी और ज्ञानवापी की नक्काशी की तरह भक्तों को उद्वेलित नहीं करतीं। नहीं साधुवेशधारी श्रीमानों का खून खौलता है। गरीबों के हितैषी होने का करोड़ों रुपये वाला विज्ञापन चलवाने वाले पीएम और सीएम के कार्यालयों के अफसर उनके नाम से घड़ियाली आँसू बहाने वाला ट्वीटर जारी कर कर्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। ऐसे में गरीबों को न्याय की उम्मीद कैसे की जाये। प्रदेश के ऐसे हालातों पर जितना अफसोस जताया जाये कम है।

भाकपा पुनः मांग करती है कि हापुड़ के मजदूरों को न्याय दिलाने को हर संभव और पारदर्शी कदम उठाये जायें। जांच के दायरे में श्रम/ उद्योग विभागों और प्रशासन की ज़िम्मेदारी को शामिल किया जाये। भाकपा ने अपनी मेरठ मंडल की इकाइयों को आवश्यक कदम उठाने और इस संबंध में 8 जून को मंडल भर में ज्ञापन दिये जाने के निर्देश दिये हैं।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश   

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शुक्रवार, 3 जून 2022

कानपुर में शान्ति स्थापित की जाये : भाकपा


कानपुर की दुर्भाग्यपूर्ण घटनायें सत्ता प्रतिष्ठान द्वारा निर्मित घ्रणा और उन्माद के वातावरण की देन

प्रशासन ही नहीं शासन की भी है ज़िम्मेदारी, कड़ी कार्यवाही हो: भाकपा  

एकतरफा नहीं, तटस्थभाव से जांच कर हो सर्व- स्वीकार्य कार्यवाही

भाजपायी नुस्खों से सुशासन चलता तो कश्मीर आज भी क्यों दहक रहा होता 

लखनऊ- 3 जून 2022, भाजपा नेत्री नूपुर शर्मा के आपत्तिजनक बयान के विरोध में पूर्व घोषणा के अनुसार बाजार बन्द करा रहे लोगों से बजरंग दल और विहिप के नेताओं के साथ आयी भीड़ से हुये टकराव के परिणामस्वरूप कानपुर में भड़की हिंसा उस घ्रणा और उन्मादी वातावरण की देन है जिसे सरकार, भाजपा और उसके पाले- पोसे तत्व हवा दे रहे हैं। यह प्रशासन की ही नहीं सरकार की भी असफलता है और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दोनों को कटघरे में खड़ा करती है।

आज कानपुर में हुये उपद्रव पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुये भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा कि जिस जनपद में शासक वर्ग की क्रीम- राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल मौजूद हों और पूरे मंडल को हाई एलर्ट पर रखा गया हो वहीं इस तरह की विस्फोटक घटनायें प्रदेश की कानून व्यवस्था और आम आदमी की सुरक्षा पर गहरे प्रश्न खड़े करती हैं। क्या महामहिम राष्ट्रपति जी अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वाह करते हुये प्रधानमंत्री जी को राज्य सरकार को दंडित करने का निर्देश देंगे, भाकपा ने सवाल उठाया है। आज ही लखनऊ में हुये पूंजीपतिवर्ग के मेले में मुख्यमंत्री की तारीफ में कसीदे पढ़ने वाले प्रधानमंत्री जी से क्या हम यह न्यायोचित उम्मीद करें?

भाकपा ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी दल और उनके बहुरूपी समर्थक महंगाई, बेरोजगारी और अन्य ज्वलंत मुद्दों से ध्यान हटाने को सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने को हर हथकंडा अपना रहे हैं। समाज के एक हिस्से के प्रति घ्रणा और हिंसक अभियान चला कर सत्तारूढ़ समूह 1989- 1992 जैसा विषाक्त वातावरण बनाने में जुटे हैं। बाबरी विध्वंस इसी वातावरण की देन था। ऐसे वातावरण में प्रदेश में निवेश आयेगा क्या? जैसा कि सत्ता प्रतिष्ठान दाबे कर रहा है।

कानपुर के भाजपा विधायकगण आज भी शांति की बात करने के बजाए एक पक्ष पर ज़िम्मेदारी डाल कर एकतरफा कार्यवाही के संकेत दे रहे हैं। बुलडोजर चलाने और संपत्तियां जब्त करने की धमकियाँ दे रहे हैं। हमारा सवाल है कि तनाव की जड़ नूपुर शर्मा के खिलाफ कार्यवाही होगी क्या? भीड़ बना कर बाज़ार खुलवाने आए बजरंगियों पर कार्यवाही होगी क्या? अगर गरीबों पर बुलडोजर चलाने भर  से शान्ति स्थापित होती तो यह वारदात होती ही क्यों? भाजपायी नुस्खों से सुशासन चलता तो कश्मीर आज भी क्यों सुलग रहा होता? ये ज्वलंत सवाल हैं जिन पर सत्ता प्रतिष्ठान को गंभीरता से विचार करना होगा।

भाकपा ने कहा विस्फोटक वातावरण बनाया जायेगा तो विस्फोट होगा ही। अतएव भाजपा घ्रणा और उन्माद फैलाना बन्द करे। तटस्थ भाव से घटनाओं की छानबीन कर समदर्शी भाव से समस्त दोषियों के विरूध्द कार्यवाही करे। प्रशासन ही नहीं शासन की भी ज़िम्मेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिये। बड़बोलापन नहीं, सर्वस्वीकार्य एक्शन होना चाहिये। यही प्रदेश के हित में होगा और यही देश के भी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश   

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गुरुवार, 2 जून 2022

जातीय गणना के प्रश्न पर वामदलों ने उत्तर प्रदेश सरकार को घेरा


बिहार की तरह उत्तर प्रदेश में भी जाति आधारित गणना करायी जाये: वामदल 

प्रकरण पर सर्वदलीय बैठक शीघ्र बुलाये जाने की मुख्यमंत्री से मांग की

लखनऊ- 2 जून 2022, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने मांग की कि बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी जाति आधारित गणना करायी जाये, और इस पर विचार करने के लिये राज्य सरकार वामदलों सहित सभी राजनैतिक दलों की बैठक शीघ्रातिशीघ्र आहूत करे।

यहां जारी एक संयुक्त प्रेस वक्तव्य में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा- माले एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के राज्य नेत्रत्व ने कहा कि समाज के सभी हिस्सों की समान प्रगति सुनिश्चित करने के लिये उनके बारे में सभी तथ्य जुटाया जाना आवश्यक है, अतएव हम जातीय गणना कराना चाहते हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर भी हम जाति आधारित जनगणना ( Census ) की मांग करते चले आ रहे हैं मगर भाजपा की केन्द्र सरकार टालमटोल का रवैया अपनाती रही है। अब भाजपा समर्थित बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना ( Enumeration ) कराने का निर्णय सर्वदलीय बैठक में लिया है तो उत्तर प्रदेश के वंचित समूहों में भी अपने बारे में सही और तथ्यपूर्ण आंकड़ों की इच्छा जागी है। सामाजिक न्याय के हित में यह अति आवश्यक भी है।

अतएव हम उत्तर प्रदेश में भी जाति आधारित गणना कराये जाने की मांग करते हैं, भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरा लाल यादव, भाकपा माले के राज्य सचिव सुधाकर यादव और फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा ने संयुक्त बयान में कहा है। उन्होने उम्मीद जतायी कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री इस विषय पर विचारार्थ शीघ्र सर्वदलीय बैठक आहूत करेंगे।

जारी द्वारा-

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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बुधवार, 1 जून 2022

विधायक निधि प्रकरण पर भाकपा की प्रतिक्रिया


राजनीति में पसरे भ्रष्टाचार को और बढ़ावा देने वाला तथा राजनीति करने के इच्छुक सामान्यजनों को पीछे धकेलने वाला है विधायक निधि को बढ़ाया जाना।  भाकपा ने की रद्द करने की मांग।

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के सचिव मंडल ने विधायक निधि 3 करोड़ रुपये से बढ़ा कर 5 करोड़ करने की विधान सभा में मुख्यमंत्री की घोषणा पर गहरी आपत्ति जतायी है और इसे रद्द करने की मांग की है। यह राजनीति के नए प्रवेशार्थियों के लिये एकलव्य का अंगूठा काट लेने जैसा है, और राजनीति में पहले से ही व्याप्त महाभ्रष्टाचार को और बढ़ावा देने वाला कदम है।

एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा कि वैसे ही देश और प्रदेश की राजनीति पर धनबली, बाहुबली और माफिया हावी हैं। अपवादों को छोड़ दीजिये तो ऐसे ही लोग चुनावों में बाजी मार रहे हैं और सच्चे ईमानदार और गरीब प्रत्याशी पराजित होने को मजबूर हैं। ऐसे में धनबली बन चुके विधायकों को विकास के नाम पर 5 करोड़ मुहैया कराना उन्हें चुनावी मैदान में सामान्य प्रत्याशियों से बलशाली बनाना है।

कौन नहीं जानता कि विधायक निधि में भारी कमीशनखोरी चल रही है, और एक विधायक 5 साल के कार्यकाल में मालामाल हो जाता है। उनके वेतन भत्ते आदि पहले से ही पर्याप्त हैं। ये बेरोजगारों, मजदूर- किसानों और गरीबों को मुंह चिढ़ा रहे हैं। सरकारी सेवकों की पेंशन भी खत्म कर दी गयी है जबकि विधायक सांसदों को आजीवन पेंशन का इंतजाम है। स्पष्ट है कि शासन के अपार अधिकारों के बलबूते राजनीतिक लोग अपनी सुविधाएं और आमदनी बढ़ते जा रहे हैं और आम जनता को काफी पीछे छोड़ते जा रहे हैं।

भाकपा ने कहा कि सरकार का यह कदम सामान्य जनों को संसदीय राजनीति से अलग थलग करने वाला है। गरीबों और आम लोगों को सत्ता से दूर और चुने जा चुके लोगों को सत्ता की दौड़ में वाक ओवर देने वाला है। यह एकलव्य से अंगूठा छीनने जैसा तो है ही भ्रष्टाचार का राजनीतिकरण करने वाला है। भाकपा पर इसका उसी तरह विरोध जारी रखेगी जिस तरह वह महंगाई बेरोजगारी निजीकरण बुलडोजरवाद और पुलिसराज का विरोध कर रही है। भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि इस मुद्दे पर समान द्रष्टकोण रखने वाले दलों और संगठनों से बात कर आगे की रणनीति बनाई जायेगी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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