भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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बुधवार, 3 मार्च 2021

Press Note of CPI UP


 

भाकपा के प्रतिनिधिमंडल ने अलीगढ़ के गांव किवलाश पहुंच दलित बिटिया की हत्या के संबंध में गांववासियों से भेंट की, घटनास्थल का निरीक्षण किया

पुलिस द्वारा गढ़ी गयी कहानी को संदेहास्पद बताते हुये घटना की सीबीआई से जांच की मांग की

लखनऊ/ अलीगढ़- 3 मार्च 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव डा॰ गिरीश के नेत्रत्व में भाकपा का एक प्रतिनिधि मंडल आज अलीगढ़ जनपद के थाना- अकराबाद अंतर्गत किवलाश गांव पहुंचा। प्रतिनिधि मंडल में राज्य काउंसिल सदस्य एवं जिला सचिव अलीगढ़ का॰ सुहेव शेरवानी, सहसचिव का॰ इरफान अंसारी, का॰ हरीश लोदी, भाकपा हाथरस के कार्यकारी सचिव का॰ संजय खान, सहसचिव का॰ सत्यपाल रावल, मोहम्मद मुकीम एवं आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन ( एआईएसएफ़ ) हाथरस के जिला सचिव हितेश अंबेडकर आदि शामिल थे।

प्रतिनिधि मंडल ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। घटना के संबंध में गांववासी स्त्री- पुरुषों से जानकारी ली। पीड़िता के परिवार को पुलिस ने थाना- अकराबाद बुला लिया था, प्रतिनिधि मंडल जब उनसे मिलने थाना पहुंचा तो वे वहाँ से जा चुके थे। अतएव उनसे भेंट न हो सकी। गांव में स्थित डा॰ भीमराव अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष उपस्थित गांववासियों को डा॰ गिरीश ने संबोधित किया। प्रतिनिधि मंडल ने अकराबाद थाने के समीप मौजूद पत्रकारों के साथ वार्ता की, और घटना के संबंध में भाकपा का पक्ष रखा।

किवलाश गांव में गांववासियों और अकराबाद में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुये भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि नाबालिग और वह भी कम विकसित ज्ञानेन्द्रियों वाली बालिका के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश और असफल रहने पर बहशी तरीके से की गई हत्या रोंगटे खड़े करने वाली है। घटनास्थल के निरीक्षण से पता लगता है कि जहां हत्या की गयी वहां से लाश को घसीट कर कई मीटर दूर ला कर पटक दिया गया। इतनी जघन्य वारदात को शातिरों का कोई ग्रुप ही अंजाम दे सकता है। लेकिन पुलिस ने पड़ोसी गांव के एक अवयस्क युवक पर आरोप निरूपित कर मामले से पल्ला झाड लिया है। पुलिस द्वारा गड़ी गयी कहानी में कई झोल हैं और उस पर सहज विश्वास नहीं किया जा सकता। गत दिनों उन्नाव में तीन बहिनों की जहरखुरानी, जिसमें दो की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी थी के बारे में भी पुलिस ने ऐसी ही कहानी गड़ी थी।

सुहेव शेरवानी ने पत्रकारों को बताया कि पुलिस की इस कहानी पर न तो गांववासियों को विश्वास हो रहा है और थाने के बाहर मौजूद जनसमुदाय भी इस कहानी को नकार रहा है। अतएव घटना की सचाई सामने आनी चाहिए।

डा॰ गिरीश ने कहाकि पीड़िता के परिवार को न्याय मिलना चाहिये, और सचाई को उजागर करने को घटना की जांच सीबीआई को सौंपनी चाहिये। उन्होने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में बालिकायेँ, महिलाएं और आम नागरिक कोई भी सुरक्षित नहीं हैं। अपराधी बेखौफ हो वारदातों को अंजाम देरहे हैं और मुख्यमंत्री विपक्ष को प्रताड़ित करने में जुटे हैं। गत दिनों विधान सभा में उनके द्वारा विपक्ष को अशिष्ट भाषा में धमकी दी गयी जो कि लोकतन्त्र के लिये खतरा है। मुख्यमंत्री को बंगाल की नहीं यूपी की फिक्र करनी चाहिये- जो कि जंगलराज बन चुका है।

भाकपा ने किवलाश की दलित बिटिया को न्याय दिलाने और शातिर अपराधियों को जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाने के लिये घटना की सीबीआई जांच करने की मांग की।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा,  उत्तर प्रदेश   

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मंगलवार, 2 मार्च 2021

उत्तर प्रदेश में जंगलराज

 

अलीगढ़ बालिका की संदिग्ध परिस्थितियो में हत्या की भाकपा ने निन्दा की

भाकपा का प्रतिनिधिमंडल डा॰ गिरीश के नेत्रत्व में कल अलीगढ़ पहुंचेगा

लखनऊ-2 मार्च 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के सचिव मण्डल ने जनपद- अलीगढ़ के अकराबाद के अंतर्गत एक गाँव में बहरी- गूंगी दलित बालिका की संदिग्ध परिस्थितियों में बेहद खौफनाक तरीके से की गयी हत्या पर गहरा दुख और आक्रोश प्रकट किया है। भाकपा ने पीढ़ित परिवार को न्याय दिलाने, उचित मुआबजा  देने और आरोपियों  को शीघ्र जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाने की मांग की है।

यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ने आरोप लगाया कि योगीराज में अपराधों खासकर महिलाओं और बालिकाओं के साथ दरिंदगी की वारदातें थम नहीं पा रही हैं। जिस दिन अलीगढ़ की बालिका को मौत के घाट उतारा  गया उसी दिन पीलीभीत में दुस्साहसी शोहदे एक दलित के घर में घुस गए और परिवार की 19 वर्षीय बेटी से दरिंदगी का प्रयास किया। बचाने को आयी उसकी छोटी बहिन पर भी हमला बोला। हाथरस में पुत्री से छेड़खानी की शिकायत करने वाले पिता को कल गोली से उड़ा दिया गया। जनपद कानपुर देहात में एक सभासद के दो बच्चों और शिक्षक बीबी को जिन्दा जला दिया गया जिसमें दोनों मासूम बच्चों की मौत होगयी।

इससे पूर्व हाथरस, बलरामपुर, उन्नाव, शाहजहाँपुर जैसी तमाम घटनाओं ने प्रदेश की बेटियों और उनके अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। अपराधिक तत्वों पर काबू पाने में असमर्थ मुख्यमंत्री विपक्ष को विधान सभा के भीतर गुंडों की भांति धमकियाँ देते हैं। यह निंदनीय तो है ही, लोकतन्त्र के लिए भी खतरा है, भाकपा ने कहा है।  

भाकपा राज्य सचिव मंडल अलीगढ़ के घटनास्थल का जायजा लेने और पीढ़िता के परिवार से मिल कर संवेदना व्यक्त करने को कल अपना उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल अलीगढ़ भेज रहा है। 3 मार्च को राज्य सचिव डा॰ गिरीश के नेत्रत्व में यह प्रतिनिधि मंडल अलीगढ़ पहुंचेगा।


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शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2021

उन्नाव कांड पर भाकपा की प्रतिक्रिया

उन्नाव कांड की भाकपा ने तीव्र भर्त्सना की। पीढ़ित परिवार के प्रति संवेदना जतायी

घटना की सीबीआई से जांच और तीसरी बिटिया को एम्स भेजने की मांग की 

राज्य सरकार से जघन्य वारदातों की नैतिक ज़िम्मेदारी लेने की मांग दोहराई

 लखनऊ- 19 फरबरी 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने उन्नाव की घटना, जिसमें कि दो बालिकाओं की मौत हो गयी और तीसरी गंभीर अवस्था में अस्पताल में भर्ती है, की कठोर शब्दों में निन्दा की और पीढ़ित परिवार के प्रति गहरी सहानुभूति जताई है।

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहाकि उत्तर प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं के साथ घट रही असंख्य वारदातों में से ये एक विशिष्ट वारदात है। यह हाथरस कांड की पुनराव्रत्ति है। गज़ब की बात यह है कि राजधानी लखनऊ से सटा जिला- उन्नाव महिलाओं के लिये दुर्दांत स्थल बन गया है जहां एक से बढ़ कर एक लोमहर्षक घटनायें लगातार होरही हैं।

भाकपा ने कहाकि ये वारदातें जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से टीवी चेनलों पर लगातार चल रहे उस विज्ञापन को मुंह चिढ़ा रही हैं जिसमें अलापा जारहा है कि यूपी की तो अब बात ही अलग है। हां यूपी की बात वाकई अलग है क्योंकि यह अपराध और अत्याचार प्रदेश बन गया है; भाकपा ने कहा है।  

भाकपा ने मांग की कि इससे पहले कि घटना और घटनास्थल के सबूत धूमिल हों, घटना की जांच सीबीआई को सौंप देनी चाहिये, और उसे कम से कम समय में जांच पूरी करने के निर्देश दिये जाने चाहिये। पीढ़ित परिवार भी शुरू से सीबीआई जांच की ही मांग कर रहा है। दूसरे- चिकित्साधीन बिटिया को एयर- एंबुलेंस से एम्स, दिल्ली तत्काल भेजा जाना चाहिये, ताकि उसके जीवन को बचाया जासके। उसका बचाया जाना अपराधियों को अंजाम तक पहुंचाने के लिये भी जरूरी है।

इससे पहले कि विपक्ष सरकार से त्यागपत्र की मांग करे, राज्य सरकार को इन वारदातों की नैतिक ज़िम्मेदारी तो लेनी ही चाहिए; भाकपा ने स्पष्ट कहा है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 18 फ़रवरी 2021

किसान आंदोलन के समर्थन में उत्तर प्रदेश में भाकपा मैदान में

 

लखनऊ- दिनांक- 18- 2-2021, संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा देश भर में रेल रोकने के आह्वान के समर्थन में उत्तर प्रदेश में आज भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भी सड़कों पर उतरी। तीनों क्रषी क़ानूनों को तत्काल रद्द करने, एमएसपी को लागू कराने को कानून बनाने, विद्युत बिल 2020 को रद्द करने, पेट्रोल डीजल रसोई गैस की कीमतें आधी करने, महंगाई पर कारगर रोक लगाने, गन्ने का खरीद मूल्य घोषित करने तथा उन्नाव की बालिकाओं के साथ हुयी हैवानियत की जांच सीबीआई से कराने आदि सवाल भाकपा के आन्दोलन के केन्द्र में रहे।

राज्य सरकार की तमाम दमनात्मक कार्यवाहियों के बावजूद भाकपा और विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चे ने किसानों के समर्थन में उरई में का॰ कैलाश पाठक के नेत्रत्व में रेल रोकी। बाद में सैकड़ों नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। फ़ैज़ाबाद में भाकपा जिला सचिव का॰ रामतीरथ पाठक के नेत्रत्व में रेल रोकने के प्रयास में दर्जनों कार्यकताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। कानपुर में भी भाकपा, माकपा और किसान यूनियन के दर्जनों कार्यकर्ता गिरफ्तार कर लिए गये। जौनपुर में जिला सचिव कल्पनाथ गुप्ता एवं सालिगराम पटेल आदि को सुभ से ही घर में नजरबंद कर लिया गया। बाराबंकी में भी किसान सभा के पदाधिकारियों को घर पर ही पुलिस ने पाबंद कर दिया।

राज्य सरकार की तमाम पाबन्दियों के बावजूद भाकपा ने जगह जगह स्वतंत्र और संयुक्त रूप से धरने प्रदर्शन आयोजित किये और महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन दिये। इन ज्ञापनों के माध्यम से मांग की गयी है कि क्रषी और किसान विरोधी तीनों काले क़ानूनों को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाये। एमएसपी को लागू कराने के लिये कानून बनाया जाये। दिल्ली के आसपास जुटे किसानों के धरनों के इर्द गिर्द खड़े किये गये अवांच्छित और अमानुषिक अवरोध तत्काल हठाये जायेँ। तीन साल से रोके गये गन्ने का समर्थन मूल्य तत्काल घोषित किया जाये। गन्ना किसानों के चीनी मिलों पर बकाये का भुगतान मय ब्याज के कराया जाये। श्रम क़ानूनों मेँ किये गये प्रतिगामी परिवर्तनों को तत्काल रोका जाये। विद्युत अधिनियम 2020 को रद्द किया जाये।

पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतें आधी की जायें। अथवा उन्हें जीएसटी के अंतर्गत लाया जाये। पूर्ववर्ती मूल्य नियंत्रण प्रणाली लागू की जाये। महंगाई पर कारगर रोक लगायी जाये। कारपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने को गरीब और आम आदमी के ऊपर आर्थिक बोझ लादना रोका जाये। सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना तत्काल बन्द किया जाये।

युवाओं को रोजगार उपलब्ध्ध कराया जाये। काम के पूरे दाम दिये जायें। उत्तर प्रदेश मेँ आंदोलनों और आंदोलनकारियों पर दमन रोका जाये। कुशासन और भ्रष्टाचार की स्थिति मेँ सुधार किया जाये। उन्नाव में तीन दलित बालिकाओं के साथ हुयी हैवानियत की जांच सीबीआई से कराई जाये।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मण्डल ने देश और प्रदेश में शांतिपूर्ण तरीके से रेल रोकने और आंदोलन करने के लिए किसानों, भाकपा कार्यकर्ताओं और अन्य दलों के कार्यकर्ताओं को क्रान्तिकारी बधाई प्रेषित की है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा उत्तर प्रदेश

 

 

 

 

 

 

 

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शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

किसान आंदोलन पर हठधर्मिता त्यागे केन्द्र सरकार


सफल रास्ताजाम एवं व्यापक विरोध प्रदर्शन के लिये भाकपा ने किसानों और कार्यकर्ताओं को दी बधाई

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खड़े किए गये तमाम अवरोधों के बावजूद सफल रहा आंदोलन: भाकपा ने दमन की निन्दा की

किसान आंदोलन की आड़ में घोर जनविरोधी और लोकतंतर्विरोधी एजेंडे पर काम कर रही हैं भाजपा सरकारें: डा॰ गिरीश

गन्ना मूल्य घोषित करने और चीनी मिलों पर गन्ने के बकाए को किसानों को दिलाने की मांग भी की गयी

लखनऊ- 6 फरबरी 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल ने आज देश भर में सफलतम चक्का जाम के लिये देश के किसानों- कामगारों को क्रांतिकारी बधाई दी। भाकपा ने उत्तर प्रदेश के भाकपा, अखिल भारतीय किसान सभा, खेत मजदूर यूनियन एवं वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं को विशिष्ट बधाई दी जिन्होने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा खड़े किए गए तमाम अवरोधों के बावजूद उत्तर प्रदेश के जिलों जिलों में धरने, प्रदर्शन एवं विरोध सभाएं आयोजित कीं और ज्ञापन सौंपे।

गत रात्रि कुछ किसान नेताओं द्वारा अचानक उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड एवं दिल्ली में हाईवे जाम न करने की घोषणा से असमंजस की स्थिति पैदा होगयी थी, लेकिन भाकपा और सहयोगी संगठनों ने पहले से ही धरने/ प्रदर्शन एवं सभा आदि करने का फैसला ले रखा था। अतएव बदली परिस्थिति में भी उसे बरकरार रखा गया।

उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिलों के प्रशासन ने जगह जगह इस आंदोलन की राह में रोड़े अटकाये। तमाम नेताओं को अर्दब में लेने की कोशिश की। भाकपा जौनपुर के सचिव का॰ कल्पनाथ गुप्ता को हाउस अरेस्ट करने के बावजूद वहाँ सभा कर ज्ञापन दिये गये। रास्ता जाम स्थगन की दिल्ली से घोषणा के बावजूद उरई में का॰ कैलाश पाठक के नेत्रत्व में सर्वदलीय किसान समर्थक मोर्चे के सैकड़ों कार्यकर्ता हाइवे पर पहुँच गये। वहाँ सभा कर ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा गया। वाराणसी में किसानों के समर्थन में अधिवक्ता, पत्रकार और आम नागरिक उतर आए तो कई जिलों में आदिवासियों ने मोर्चा संभाला। अन्य अनेक जिलों में किसानों के समर्थन में महिलाएं, खेत मजदूर, मजदूर, छात्र एवं नौजवान सड़कों पर उतरे।

राष्ट्रपति को सौंपे गये ज्ञापनों में तीनों क्रषी क़ानूनों को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने को कानून बनाने, शहीद किसानों के परिवारों को रु॰ 25- 25 लाख का मुआबजा  दिये जाने, आंदोलनकारियों पर लगे मुकदमे वापस लिये जाने, गिरफ्तार किसान नेताओं को रिहा किए जाने तथा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किसानों और विपक्ष के आंदोलनकारियों के विरूध्द की जा रही उत्पीड़नात्मक कार्यवाही रोके जाने की मांग की गयी।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि देश भर के लोगों का ध्यान किसान आंदोलन पर टिका है और भाजपा सरकारें उसकी आड़ में निरंतर जनता को लूटने के एजेंडे पर काम कर रही है। पेट्रोल, डीजल एवं रसोई की कीमतों में भारी बदोत्तरी कर दी गयी है। वेशकीमती सरकारी संपत्तियों को पूँजीपतियों के हाथों बेचा जा रहा है। गन्ने का 2021 का समर्थन मूल्य घोषित किया नहीं गया और गन्ना सप्लाई पर्चियों पर कीमत के खाने में शून्य लिख कर दिया जा रहा है। पिछले सत्र का किसानों का करोड़ों रुपया चीनी मिलों पर बकाया पड़ा है। सरकार न किसानों की सुन रही है न आमजनों की। आज के ज्ञापनों में इन सवालों को भी उठाया गया।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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बुधवार, 13 जनवरी 2021

किसान आंदोलन का स्वर्णिम 50वां दिन


उत्तर प्रदेश के कोने कोने में फूंकी गयीं काले क्रषी क़ानूनों की प्रतियां

आपातकाल सरीखे हालातों के बावजूद प्रदेश में निरंतर बढ़ रहा है किसान आंदोलन को समर्थन

छलावे से बाज आये, काले क़ानूनों को तत्काल रद्द करे केन्द्र सरकार: वामदल

लखनऊ- 13 जनवरी 2021, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने दावा किया कि आपातकाल जैसी पाबंदियों के बावजूद उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का समर्थन निरंतर बढ़ रहा है और आज आंदोलन के 50वें दिन प्रदेश के कोने कोने में तीनों काले क्रषी क़ानूनों की प्रतियाँ सैकड़ों स्थानों पर जलायी गईं।

ज्ञातव्य हो कि लोढ़ी/ मकर संक्रांति के अवसर पर एआईकेएससीसी ने आज क्रषी क़ानूनों की प्रतियां जलाये जाने का आह्वान किया था और वामपंथी दलों ने इसे समर्थन प्रदान किया था। अनेक जगह अन्य जनवादी दलों और सामाजिक संगठनों ने संयुक्त मोर्चे गठित कर आंदोलन के साथ खड़ा होने का निश्चय किया था।

तदनुसार आज जगह जगह से सुबह से ही काले क़ानूनों की प्रतियां जलाने की खबरें वामपंथी दलों के मुख्यालयों को प्राप्त होने लगीं। सोशल मीडिया पर फोटो एवं वीडियोज़ उपस्थित होने लगे। गोदी मीडिया भले अपने प्रसारण में इन कार्यवाहियों को स्थान न दे, सोशल मीडिया पर आज उत्तर प्रदेश और देश भर की प्रतियां दहन की कार्यवाहियाँ छायी हुयी हैं।

काले क़ानूनों की प्रतियां जलाये जाने से पहले अनेक जगह जुलूस निकाले गये, सभाएं की गयीं और कई जगह धरने दिये गये। सायंकाल सहयोगी संगठनों द्वारा केंडिल मार्च निकालने का सिलसिला प्रारंभ हो गया है। इसके अतिरिक्त यूपी के वामपंथी दलों के सहयोगी संगठन किसान आंदोलन के समर्थन में लगातार दिल्ली के विभिन्न वार्डरों खासकर गाजीपुर वार्डर पर पहुंच रहे हैं।

वामदलों ने केन्द्र सरकार की कठोर शब्दों में निंदा की कि वो काले क्रषी क़ानूनों को रद्द करने के बजाय छलावेपूर्ण कार्यवाहियों में मशगूल है। वह इस स्तर तक गिर चुकी है कि किसान आंदोलन में आतंकवादियों के प्रवेश की कुत्सित और मनगढ़न्त कहानियाँ गढ़ रही है। इसके दूरगामी परिणाम होंगे और किसानों का गुस्सा और भी बढ़ेगा, वामदलों ने चेताया है। क्यौंकि किसानों ने लाखों की तादाद में 50 दिनों तक शांतिपूर्ण आंदोलन करके इतिहास निर्मित कर दिया है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा, माले लिबरेशन के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा ने आज की ऐतिहासिक कार्यवाहियों के लिये सभी आंदोलनकारियों को बधाई दी है।

उन्होने 18 जनवरी को महिला किसान दिवस एवं 23 जनवरी को सुभाष जयंती पर किसान दिवस को और भी व्यापक तरीके से आयोजित करने का आह्वान किया है।

डा॰ गिरीश

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मंगलवार, 12 जनवरी 2021

आंदोलनकारी किसानों को फिर से मिला वामदलों का साथ


 

किसान आंदोलन के अगले चरण का वामदलों ने किया पुरजोर समर्थन

कल 13 जनवरी को काले क्रषी क़ानूनों की होली जलायी जायेगी

18 को महिला किसान दिवस तथा 23 जनवरी को किसान दिवस का आयोजन होगा

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी का संज्ञान ले राज्य सरकार: दमनात्मक कार्यवाहियों से आए बाज- वाम दल

लखनऊ- 12 जनबरी 2021, उत्तर प्रदेश के चारों वामपंथी दलों ने आल इंडिया किसान संघर्ष समन्वय समिति ( एआईकेएससीसी ) द्वारा जारी आंदोलन के कार्यक्रम को समर्थन प्रदान करते हुये वामदलों के कार्यकर्ताओं का आह्वान किया है कि वे किसानों के साथ मिल कर इन कार्यक्रमों को पूरी शिद्दत से सफल बनायें। वामदलों ने शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से आंदोलन कर किसान कामगार और अन्य शोषित पीडितों की आवाज उठाने वाले वांमपंथी एवं लोकतांत्रिक दलों के कार्यकर्ताओं/ नेताओं की राज्य सरकार द्वारा उत्पीड़नात्मक कार्यवाही को जनता के समक्ष बेनकाव करने का आह्वान भी किया है।

यहाँ जारी एक संयुक्त प्रेस बयान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा, माले- लिबरेशन एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के प्रादेशिक नेताओं ने आरोप लगाया कि केन्द्र की सरकार अपने कार्पोरेट्स आकाओं के हिट साधने के लिये किसानों और खेती को बरवाद करने वाले तीन काले क़ानूनों को जबरिया किसानों पर थोप रही है। वह किसानों को उनकी उपजों का न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की कानूनी गारंटी लेने तक को तैयार नहीं है।

किसानों के समक्ष लड़ो या मरो की स्थिति आ गयी है और वे पिछले डेढ़ माह से अधिक से  हाड़कंपाने वाली ठंड और वरसात में दिल्ली के चारों ओर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। घोर जनविरोधी एवं लोकतन्त्र विरोधी सरकार हठधर्मिता बरत रही है और आंदोलन को शिथिल करने को अनेकों मायावी हथकंडे अपना रही है। मजबूरन किसानों ने धरने के अतिरिक्त देश भर में गणतन्त्र दिवस तक कई कार्यक्रमों के आयोजन का आह्वान किया है।

लोढ़ी/ मकर संक्रान्ति के अवसर पर 13 जनवरी को देश भर में किसानो की बरवादी के प्रतीक तीनों काले क्रषी क़ानूनों की होली जलाई जायेगी। 18 जनवरी को महिला किसान दिवसों का आयोजन किया जायेगा तथा 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का 125 वां जनम दिवस किसान दिवस के रूप में मनाया जायेगा। यदि फिर भी काले क़ानूनों को रद्द नही  किया गया तो गणतन्त्र दिवस पर किसान परेड की योजना है। वामदल इन सभी कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं।

वामदलों ने कहा कि योगी सरकार निरंतर जनवादी आंदोलनों को दमानात्मक तरीकों से कुचलती रही है। वाराणसी में वामदलों के नेताओं के विरूध्द गैगस्टर एक्ट में एफआईआर दर्ज की गयीं हैं तथा भारत बंद में भाग लेने पर अलीगढ़ में भी संगीन दफाओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं। किसानों को दिल्ली जाने से बलपूर्वक रोका जा रहा है, धरने प्रदर्शन और अन्य आंदोलनकारी कार्यवाहियों को बाधित किया जा रहा है तथा लोगों को थानों में ले जा कर प्रताड़ित किया जा रहा है। यह लोकतान्त्रिक आंदोलनों को कुचलने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

वामदलों ने कहा कि राज्य सरकार को कल सर्वोच्च न्यायालय की दो टूक टिप्पणी कि “हम नागरिकों के प्रदर्शनों को रोकने के लिये कोई आदेश नहीं देंगे” का संज्ञान लेना चाहिए और अपनी तानाशाहीपूर्ण कारगुजारियों पर विराम देना चाहिए। उन्होने कहाकि न्यायिक प्रतिष्ठान को भी इसका संज्ञान लेना चाहिए।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं आ॰ इ॰ फारबर्ड ब्लाक के संयोजक अभिनव कुशवाहा ने उपर्युक्त कार्यक्रमों को सफल बनाने की अपील की है।

डा॰ गिरीश

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बुधवार, 6 जनवरी 2021

Badaayun Episode: Shame on Yogi Govt.

 

बदायूं में मन्दिर में हुये सामूहिक बलात्कार और हत्या की घटना के लिये ज़िम्मेदारी वहन करे राज्य सरकार

 

भाकपा ने कड़े शब्दों में निन्दा की। कहा यूपी में कोई भी कहीं भी सुरक्षित नहीं।

 

लखनऊ- 6 जनबरी 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने जनपद-  बदायूं में  पति के स्वास्थ्य के लिये मन्नत मांगने गयी 50 वर्षीय महिला के साथ सामूहिक बलात्कार और उसकी जघन्य हत्या की कड़े शब्दों में निन्दा की। हद तो तब हो गयी जब पुलिस ने पहले मुकदमा तक दर्ज करने से मना कर दिया। भाकपा ने इस सबके लिये योगी सरकार की कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।

भाजपा और संघ का ये कैसा रामराज्य है जिसमें मंदिरों तक में महिलाओं से दरिंदगी हो रही है? हाथरस, बलरामपुर और बलात्कार के अन्य दर्जनों मामलों की यादें जहन को अब भी झकझोर रहीं थीं कि मन्दिर में हुये इस राक्षसी क्रत्य ने लोगों की आस्था पर चोट की है। धर्म की दुहाई देकर वोट बटोरने वाली पार्टी का घिनौना और क्रूर चेहरा सामने आ गया है।

भाकपा ने कहा कि यदि यही घटना अन्य किसी धर्म के स्थल में हुयी होती तो भाजपाइयों ने उसकी एक एक ईंट उखाड़ दी होती। लेकिन मन्दिर में हुये इस कुक्रत्य पर भाजपा मुंह खोलने को तैयार नहीं। मुद्दों पर दोगलेपन की ये इंतिहाँ है।

भाकपा का आरोप है कि उत्तर प्रदेश के जंगलराज में कोई भी सुरक्षित नहीं। महिलाएं न घर में सुरक्षित हैं न मंदिरों में। किसान खेतों में सुरक्षित नहीं और उन्हें आवारा पशु मार रहे हैं। आंदोलनो में जाने पर उन्हें पुलिस पीट रही है। अन्त्येष्टि करने जाने वालों की लाशें शमशान घाट से घरों को पहुँच रही हैं। रोटी रोजगार मांगने वाले और कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या कर रहे हैं अथवा पुलिस प्रशासन द्वारा दबोचे जा रहे हैं। ढेरों यात्री राजमार्गों पर दुर्घटनाओं में मारे जा रहे हैं। लूटपाट और हर अपराध की बढ़ोत्तरियों ने आम नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है।

हर मामले में राज्य सरकार कुछ अफसरों- कर्मचारियों पर कार्यवाही कर अपनी वाहवाही लूट लेती है। जबकि इस सबके लिये सरकार की असफलता सबसे बड़ा कारण है। सरकार को इनकी ज़िम्मेदारी कबूल करनी चाहिए।

भाकपा ने पीड़िता के परिवार के परिवार के प्रति संवेदना जताते हुये उसे न्याय दिलाने और सरकार द्वारा ज़िम्मेदारी वहन करने की मांग की।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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