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गुरुवार, 3 मई 2018
at 1:34 pm | 0 comments | जिन्ना, भाकपा, भाजपा, संघ परिवार
जिन्ना की तस्वीर की आड़ में देश को नफ़रत की आग में झोंकने में जुटे हैं भाजपा और संघ परिवार: भाकपा उत्तर प्रदेश
लखनऊ- 3 मई, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के
राज्य सचिव मंडल ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय छात्र संघ भवन में लगी मोहम्मद अली
जिन्ना की तस्वीर को हठाने की आरएसएस/ भाजपा की मांग और इसकी आड़ में सांप्रदायिकता
फ़ैलाने, गुंडागर्दी करने तथा हिंसा भड़काने की कोशिशों की कड़े शब्दों में निन्दा की
है.
यहां जारी एक प्रेस बयान
में भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि भाजपा देश चलाने और जनता से किये वायदों
को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही है. अतएव जनता को विभाजित करने को वह ऐसे
संवेदनशील मुद्दे खड़े कर रही है जिनसे देश और समाज को भारी क्षति पहुंचेगी.
ताज़ा मामला एएमयू में लगी
जिन्ना की तस्वीर को हठाने का है. डा. गिरीश ने कहाकि आरएसएस और जनसंघ 1977 में
जनता पार्टी की सरकार में शामिल थे. 1999 से 2004 तक भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए की
सरकार थी. और अब 4 साल से अपार बहुमत वाली भाजपा सरकार केन्द्र में है. उत्तर
प्रदेश में भी 1966 से आज तक अनेकों बार भाजपा शासन में रही है. लेकिन कभी संघ
परिवार को जिन्ना की तस्वीर हठाने की याद नहीं आयी.
लेकिन अब जबकि भाजपा हर
मोर्चे पर पूरी तरह विफल होचुकी है, और काला धन वापस लाने, हर नागरिक को रु. -15 लाख
देने, दो करोड़ युवाओं को हर साल रोजगार देने, किसानों की आमदनी दोगुना किये जाने
तथा स्वच्छ प्रशासन देने जैसे उसके खास वायदों को पूरा करने से मुकर गयी है तो
उसने तमाम विभाजनकारी मुद्दे उठाना शुरू कर दिया है. वोट की राजनीति के लिये वह देश
की युवा पीढ़ी के दिलों में नफरत का जहर घोल रही है और उन्हें अपनी घ्रणित राजनीति
का मोहरा बना रही है. अपने कुत्सित उद्देश्यों को पूरा करने को पहले उसने कासगंज
में विद्यार्थियों को दंगों की आग में झोंका तो अब अलीगढ में छात्र- नौजवानों को
नफरत की आग का ईंधन बनाया जारहा है.
जो भाजपा सरकार पूर्ण बहुमत
में होते हुये न मंदिर निर्माण करा पायी, न धारा 370 को हठा पायी 2019 के लोक सभा चुनावों के निकट आने और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में फायदा
उठाने को वह अब जिन्ना की तस्वीर हठाने के नाम पर हिंसा और उपद्रव
पैदा कर रही है. रिकार्ड गवाह हैं कि हर चुनाव से पहले भाजपा गड़े मुर्दे उखाड़ना
शुरू कर देती है. आजादी के आन्दोलन से बाहर रहा संघ परिवार कभी भी देश में अनेक
जगह लगी अंग्रेज शासकों की मूर्तियों को हठाने की मांग नहीं करता. नहीं भाजपा
सरकार ने कभी पाकिस्तान से कूटनीतिक संबंध तोड़े हैं. अपितु श्री मोदी तो वहां बिना
आमंत्रण के ही जाचुके हैं. भाजपा को यह भी जबाव देना होगा कि उसके अनुयायी डा.
आंबेडकर और पेरियार की प्रतिमाएं क्यों तोड़ा करते हैं? क्या पेरियार और आंबेडकर ने
भी पाकिस्तान बनाया था?
डा. गिरीश ने कहाकि जहाँ तक
अलीगढ का सवाल है वहां संघी संगठनों को हिंसा और उत्पात भड़काने की खुली छूट
स्थानीय प्रशासन ने दी. उन्हें यदि एएमयू परिसर से दूर ही रोकने के बजाय पुलिस-
प्रशासन कथित जागरण मंच वालों की सुरक्षा में लगा था. भाकपा का आरोप है कि योगी
राज में पुलिस प्रशासन बेहद दबाव में काम कर रहा है. इसीलिये समूचा प्रदेश
अराजकता, गुंडागर्दी और सांप्रदायिकता की गिरफ्त में है. मुख्यमंत्री को क़ानून
व्यवस्था सुधारने से ज्यादा भाजपा के डूबते जहाज को बचाने की फ़िक्र है. कल आये
तूफ़ान में आधा सैकड़ा से अधिक लोगों के मारे जाने और भारी तबाही के बावजूद वे
कर्नाटक विधान सभा चुनाव में वोट बटोरने की कबायद में लगे हैं.
भाकपा ने अलीगढ़ में उत्पात
मचाने वाले संघियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत कार्यवाही किये
जाने की मांग की है.
बुधवार, 25 मई 2016
भाकपा ने की राज्यपाल के बयान की निंदा: राष्ट्रपति से की उचित कार्यवाही की मांग
लखनऊ/अलीगढ: 25 मई, 2016- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा.गिरीश ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक के उस बयान पर गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया है जिसमें उन्होने उत्तर प्रदेश में बजरंग दल द्वारा अपने कार्यकर्ताओं को आग्नेयास्त्रों सहित तमाम हथियारों की ट्रेनिंग देने को चलाये जारहे शिविरों को जायज ठहराया है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि राज्यपाल महोदय अपना कार्यभार संभालने के दिन से ही सांप्रदायिक बयानबाजी करते रहे हैं और हर वह काम करते रहे हैं जो संघ परिवार के एजेंडे को आगे बढाने वाला है. पर कल अलीगढ के अतरौली में दिया गया उनका बयान कानून और संविधान की धज्जियां बिखेरने वाला है. यह मामला इसलिये और गंभीर होजाता है कि यह बयान उस व्यक्ति ने दिया है जो संविधान और कानून की रक्षा करने वाले पद पर आसीन है.
प्रमुख अंग्रेजी दैनिक ‘टाइम्स आफ इंडिया’ के अनुसार श्री नाईक ने कहा कि “उन्हें इन शिविरों के आयोजन पर कोई एतराज नहीं है.” उन्होने यह भी कहा कि “इन केम्प्स को आयोजित करने का उद्देश्य ‘हिंदुओं की अन्य धर्मावलम्बियों से रक्षा करना है’.” इससे भी आगे बढ कर राज्यपाल ने कहा कि “ आत्मरक्षा करना कोई गलत बात नहीं है. यदि लोग अपनी रक्षा नहीं कर पायेंगे तो वे अपने समाज की रक्षा कैसे कर पायेंगे? हमें इस तरह की ट्रेनिंग जारी रखनी चाहिये. आपको इस ट्रेनिंग के इरादे को समझना चाहिये. .............. मुझे इस पर कोई आपत्ति नहीं.” आदि.
सवाल खडे होते हैं कि क्या अल्पसंखकों, दलितों, आदिवासियों आदि को भी इस तरह के केम्प आयोजित करने की छूट राज्यपाल महोदय देंगे जो संघ परिवार और उसकी विचारधारा के हमलों के शिकार बनते हैं? क्या फिर कश्मीर, पूर्वोत्तर और वामपंथी उग्रवादियों के शिविरों को भी जायज नहीं माना जाना चाहिये? क्या राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को इस तरह का बयान देना चाहिये?
भाकपा ने माननीय राष्ट्रपति महोदय से अपील की कि वे इस प्रकरण पर शीघ्र संविधान सम्मत कदम उठायें ताकि संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति से संविधान की रक्षा की जासके.
डा. गिरीश ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि वह अयोध्या, सुल्तानपुर, गोरखपुर, पीलीभीत, नोएडा एवं फतेहपुर आदि में बजरंग दल द्वारा रायफल, तलवार और लाठी की ट्रेनिंग देने वाले शिविरों पर फौरन रोक लगाये और इसके आयोजकों पर देशद्रोह का अभियोग पंजीकृत कर उन्हें गिरफ्तार करे.
डा. गिरीश
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