भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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शुक्रवार, 2 अगस्त 2013

कर्मठ आइएस अधिकारी दुर्गाशक्ति के निलम्बन मामले में अपने ही बुने जाल में फंसते जा रहे हैं श्री अखिलेश यादव.

दल-दल में छलांग लगाने का एक ही मतलब है उसमें और भी फंसते जाना. ऐसा ही उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री के साथ हो रहा है. बेचारे अंडर ट्रेनी मुख्यमन्त्री एक कर्मठ अंडर ट्रेनी महिला आइएस को अब्बा,चाचा,मौसी के कहने पर निलम्बित तो कर बैठे पर अब मामला संभाले नहीं संभल रहा. जांचे-परखे मुस्लिम कार्ड को खेला तो चच्चा मियां ने यह कह कर हवा निकाल दी कि उन्हें इस अफसर को निलम्बित कराने में ४१ मिनट भी नहीं लगे. वैसे कादरपुर गाँव के निवासियों और नोइडा के जिलाधिकारी दोनों के कथन ने कि मस्जिद के नाम पर वहां कोई तनाव नहीं था मुख्यमन्त्री के दाबों को पहले ही झुठला दिया था. अखिलेश यादव समझ लें कि वे दिन कब के हवा हो चुके हैं जब उनको उज्ज्वल छवि वाला नौजवान राजनेता माना जाता था और उनके कतिपय कामों को परिवारवाद में फंसे एक नौसिखिये की बेबसी मान कर लोग नजरंदाज कर देते थे. लेकिन बाबूसिंह कुशवाहा जैसे दागी नेता को पार्टी में शामिल करने, एक से बड कर एक महाभ्रष्ट अफसरों को महिमामंडित करने और कई दागियों को मंत्रिमंडल में शामिल करने वाले अखिलेश निलम्बित अफसर पर जिस तरह अपने क्षुद्र राजनैतिक स्वार्थों के चलते सांप्रदायिकता भड़काने का आरोप जड़ रहे हैं उससे उनका असली चेहरा सामने आगया है. बात यहीं खत्म नहीं होजाती. वे आइएस एसोसिएशन तक को धमका रहे हैं. वे उसको याद दिला रहे हैं कि उन्होंने ही इस एसोसिएशन को जिन्दा किया था. सवाल उठता है कि क्या अब श्री अखिलेश इस अहसान की कीमत बसूलना चाहते हैं? यदि ऐसा है तो इससे घटिया और क्या होसकता है एक मुख्यमन्त्री के पार्ट पर. डॉ.गिरीश.
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मंगलवार, 16 जुलाई 2013

फिर चर्चा में है लैप-टाप

लैप-टाप के वितरण समारोहों के आयोजन पर होरहे भारी खर्चों के लिए समूचे विपक्ष की आलोचना झेल रही उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पिछले दिनों खबर दी गई कि अब यह वितरण जिला प्रशासन की देख-रेख में कालेज के प्रधानाचार्यों के जरिये कराया जायेगा| अब आज मुख्य मंत्री ने कहा है कि हमारा काम बाँटना है और हम बाँटेंगे| खबर है कि इलाहाबाद में आयोजित होने वाले समारोह के लिए डेढ़ लाख का बजट बना है| लगता है अपने को समाजवादी कहने वाली सरकार को जनता के दूसरे सरोकारों से कोई लेना-देना नहीं| तभी तो वह उसकी गाढ़े पसीने की कमाई को दोनों हाथों से उलीच रही है| लैप-टाप से जुडी एक रोचक खबर और है- एच.पी. ने रु. एक हजार करोड़ की कीमत के लैप-टाप प्रदेश सरकार को सप्लाई कर दिए,लेकिन उसे अभी तक सौ करोड़ रु. का ही भुगतान मिला है| एच.पी. के नौ सौ करोड़ रु. सरकार पर बकाया पड़े हैं| लेकिन सरकार के मुखिया बेपरवाह हैं| उन्होंने मीडिया के समक्ष टका सा जबाब दे दिया- “हमारा काम बाँटना है, भुगतान का अधिकारी जानें|” अब खुद ही हैं कोतवाल तो डर कैसा| डॉ.गिरीश.
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