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मंगलवार, 11 जुलाई 2017
at 3:24 pm | 0 comments |
CPI on General budget of U.P.
बजट नहीं यह सरकार
की दिशाहीनता का गजट है: भाकपा
लखनऊ- 11 जुलाई 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार के पहले आम बजट को प्रदेश सरकार की
दिशाहीनता का गजट करार दिया है. यह गत चुनावों में भाजपा के घोषणपत्र की तर्ज पर
जुमलों का दस्तावेज है. विकास के स्थान पर इसमें धार्मिक आस्थाओं के दोहन पर जोर
है. सरकार इसे सभी को समर्पित बजट बता रही है, पर यह न किसी को समर्पित
है न किसी का उत्थान करने वाला है.
कुल मिला कर यह एक परंपरागत बजट है. पिछली सरकारों की तर्ज
पर इसमें आय के परंपरागत स्रोतों से
उपलब्ध धनराशि को कुछ घटाबढी करके विभिन्न मदों के लिये आबंटित कर दिया गया है.
कुछ नयी मदें जोड दी गयी हैं. उपलब्ध धनराशि के आंकड़े मुद्रास्फीति और केंद्र की
परियोजनाओं की धनराशि के जोड़ देने के कारण अधिक दिखाई दे रहे हैं, कोई
नई आय कहीं से नहीं होरही है. गरीब, किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान, महिला, दलित अल्पसंख्यकों की मौजूदा स्थितियों पर
इससे कोई फर्क पढने वाला नहीं है. रोटी, कपड़ा, मकान, इलाज और पढाई के हालात यथावत बने रहेंगे.
बजट भाषण का बड़ा भाग राज्य सरकार की विफलताओं पर पर्दा
डालने और मुख्यमंत्री की प्रशंसा करने को समर्पित था. फर्जी आंकड़ों के बोझ तले दबे
वित्तमंत्री जी पहले लड़खड़ा कर बैठ गये और दो तीन बार पानी पीने के बाद भी उनके बजट
पढने में असमर्थ रहने पर दूसरे मंत्री ने शेष बजट पेश किया. सत्तर सालों में यह
पहला अवसर है जब उत्तर प्रदेश की विधानसभा में एक बजट दो मंत्रियों द्वारा
प्रस्तुत किया गया.
एक ध्यान देने वाली बात यह भी है कि उत्तर प्रदेश जिसमें
श्री मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हज़रत महल, चंद्रशेखर आज़ाद, अशफाक उल्लाह खान और आचार्य
नरेंद्र देव जैसे आज़ादी की लडाई के हजारों योध्दा उत्पन्न हुये उन सबकी यह सरकार
उपेक्षा कर रही है और अपनी योजनाओं का नामकरण श्यामाप्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल
उपाध्याय के नाम पर कर रही है जो आज़ादी की लडाई से कोसों दूर थे. देश के ऊपर अपने
महत्वहीन नेताओं को लादने की भाजपा की यह कोशिश उसे महंगी पड़ेगी.
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
सोमवार, 10 जुलाई 2017
at 5:32 pm | 0 comments |
CPI on illicit liquor
जहरीली शराब कांड पर
भाकपा ने क्षोभ व्यक्त किया
मृतकों के परिवारों
को रु. 10 लाख और घायलों को 1 लाख मुआबजा देने की मांग की
लखनऊ- 10 जुलाई 20017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
ने जनपद आज़मगढ़ में जहरीली शराब पीने से हुयी दर्दनाक मौतों पर गहरा क्षोभ व्यक्त
किया है. पार्टी ने इस कांड के लिये जिम्मेदार अधिकारियों और पुलिसजनों के खिलाफ
कडी कार्यवाही की मांग की है. मृतक परिवारों को रु. 10 लाख प्रति मौत और अस्पतालों
में इलाज करा रहे लोगों के मुफ्त इलाज और तीमारदारी के लिये रु. 1 लाख तत्काल दिये
जाने की मांग की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान
में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा है कि यह बेहद चिंता और खेद का विषय है
कि आज भी उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब का उत्पादन और बिक्री धड़ल्ले से होरही है.
जनपद आज़मगढ़ में गत तीन दिनों में इस शराब के सेवन से दो दर्जन से अधिक गरीब लोगों
की जान चली गयी और अभी भी दर्जन भर से ज्यादा लोग अलग अलग अस्पतालों में जिंदगी और
मौत के बीच जूझ रहे हैं. यह कांड गत वर्ष जनपद एटा में हुये जहरीली शराब कांड से
भी अधिक भयानक है. भाजपा जब विपक्ष में थी तो ऐसी घटनाओं पर भारी शोर- शराबा करती
थी, पर आज जब उसके शासन में यह सब होरहा है वह चुप्पी साधे बैठी है.
डा. गिरीश ने कहाकि इस कांड
से उत्तर प्रदेश सरकार के सुशासन के दाबों की कलई खुल गयी है. कथित हिंदू संस्कृति
का चोगा पहने इस सरकार ने सत्ता संभालते ही शराबबंदी का विरोध करने वाली महिलाओं
और पुरुषों पर लाठियां भांजी और अब शराब को जीएसटी के बाहर रख कर साबित कर दिया कि
राजस्व बटोरने के लिये वह किसी भी हद तक जा सकती है. 'योगीराज' में गरीबों की जान लेने
वाले जहर का बिकना वास्तव में चिंता का विषय है. मुख्यमंत्री को इसकी नैतिक
जिम्मेदारी लेनी चाहिये और प्रत्येक पीढित परिवार में जाकर उनसे माफी मांगनी
चाहिये. इसके लिये जिम्मेदार अफसरों और पुलिस कर्मियों को तत्काल दंडित करने की
जरूरत है.
डा. गिरीश
सोमवार, 3 जुलाई 2017
at 1:54 pm | 0 comments |
CPI
गोहत्या के नाम पर होरही
हत्याओं पर घडियाली आंसू बहाना बंद कर
कडी कार्यवाही करे मोदी
सरकार: भाकपा
आगरा- 2जुलाई 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के
आगरा और अलीगढ मंडलों के अग्रणी कार्यकर्ताओं और नेताओं की एक संयुक्त बैठक यहाँ आगरा
के वरिष्ठ नेता का. रमेश मिश्रा की अध्यक्षता में संपन्न हुयी. यह बैठक पार्टी की राष्ट्रीय
परिषद और उत्तर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी की बैठक के निर्णयों से पार्टी कमेटियों को
अवगत कराने और फैसलों को अमल में लाने के उद्देश्य से आयोजित की गयी थी.
बैठक को संबोधित करते हुये भाकपा
के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि मोदी सरकार के इस तीन साल के कार्यकाल में काम कम
बातें ज्यादा हुयीं हैं. यही वजह है कि आज देश का किसान, कामगार और आम आदमी कठिनाइयों
के कठिन दौर से गुजर रहा है. जी.एस.टी. इस सरकार का आम लोगों पर नया प्रहार है. संसद
ने जिस भावना से इस बिल को पारित किया था मोदी सरकार ने उसे उस रुप में लागू नहीं किया.
अंबानी अदानी विजय माल्या जैसे एकाधिकारवादी उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने को पेट्रोलियम
पदार्थों और शराब को जीएसटी से बाहर रखा गया है. यह हरकत जनता पर भार बढाने वाली है.
इतना ही नहीं इसके लागू होते
ही रेल किराया, खान-पान, रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुयें, कपडे, इलाज और यहाँ तक कि कृषि उपादान महंगे होगये हैं और लक्जरी
कारें और अन्य लक्जरी आयटम सस्ते होगये हैं. इसकी जटिल प्रक्रियाओं के मकडजाल में छोटा
व्यापारी तो फंस कर रह जायेगा.
डा. गिरीश ने कहा कि देश भर
में गौरक्षा के नाम पर लोगों के कत्लेआम की वारदातें लगातार बढती जारही हैं. राज्य
सरकारों को स्पष्ट संदेश कि "या तो हत्याओं को रोको नहीं तो परिणाम भुगतने को
तैयार रहो" देने के बजाय प्रधानमंत्री जी इन हत्याओं पर घडियाली आंसू बहा रहे
हैं और भाजपा अध्यक्ष पिछली सरकारों के आकडे गिना रहे हैं. यह दोनों का निंदनीय और
उपहासास्पद आचरण है. जो संगठन इस हिंसा के लिये वातावरण तैयार कर रहे हैं उन पर भी
कार्यवाही की जानी चाहिये.
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था
को गत 70 सालों में बदतरीन बताते हुये भाकपा राज्य सचिव ने राज्य सरकार पर लोकतांत्रिक
मूल्यों को कुचलने का आरोप लगाया. समस्याओं के निराकरण में पूरी तरह असफल योगी सरकार
ध्यान बंटाने को विभाजनकारी क्रिया कलापों को बढावा दे रही है और जनता के हित में आवाज
उठाने वालों को पुलिस प्रशासन के बल पर कुचल रही है. भाकपा और वामपंथ चौकस है और इनके
कारनामों के विरुध्द निरंतर आवाज उठा रहा है.
राज्य कार्यकारिणी के सदस्य
गफ्फार अब्बास एड्वोकेट ने कहा कि अभी हमने उत्तर प्रदेश में 12 जून को दमन विरोधी
दिवस सफलता पूर्वक आयोजित किया था और अब किसानों, मजदूरों और हर तरह के उत्पीडितों के हक की आवाज
बुलंद करने को 24 से 26 जुलाई तक लगातार आंदोलन चलाया जायेगा. राज्य कार्यकारिणी के
सदस्य सुहेव शेरवानी ने कहा कि हमें आंदोलन के साथ साथ संगठन के विस्तार और उसको मजबूत
करने की दिशा में ठोस प्रयास करने चाहिये.
बैठक को हाथरस के जिला सचिव
चरनसिंह बघेल, अलीगढ के एहतेशाम बेग, मथुरा के पप्पू सिंह और अशफाक, राज्य काउंसिल सदस्य तेजसिंह
वर्मा, आगरा के जिला सचिव ताराचंद, महावीर प्रसाद द्विवेदी, ओमप्रकाश पूर्व प्रधान, रमेश चंद्र कटारा, पूरन सिंह, मोहनसिंह जादूगर, जगदीश चंद्र शर्मा, सुधीर कुलश्रेष्ठ आदि ने संबोधित
किया. संचालन का. गफ्फार अब्बास ने किया.
अध्यक्षीय भाषण में रमेश मिश्रा
ने कहा कि आज़ादी के आंदोलन में और आज़ादी के बाद भारत के नव निर्माण में भाकपा ने गौरवशाली
भूमिका निभाई है. हमने किसानों कामगारों और आम जनता के हितों की रक्षा के लिये बडे
संघर्ष चलाये हैं. भाकपा सांप्रदायिकता, जातीय भेदभाव और भ्रष्टाचार के विरुध्द संघर्ष में
सभी से आगे रही है. उन्होने देश के युवाओं से कहा कि वे अपने उज्ज्वल भविष्य को साकार
करने को भाकपा के साथ जुडें.
डा. गिरीश
गुरुवार, 29 जून 2017
at 5:01 pm | 0 comments |
CPI will support U.P. band
जी.एस.टी. के विरोध
में कल होने जारहे उत्तर प्रदेश बन्द को
भाकपा ने समर्थन
प्रदान किया
लखनऊ- 29 जून 2017, पेट्रोलियम पदार्थों को
महंगा बनाये रखने को जी.एस.टी. से बाहर रखने, इसे आधी अधूरी तैयारी से लागू करने तथा कारपोरेट्स
के हित में और आम जनता व छोटे मंझोले व्यापारियों की ऊपर लादी जारही मौजूदा
व्यवस्था का विरोध करते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य इकाई
ने क्ल 30 जून को किये जारहे उत्तर प्रदेश बन्द/ भारत बन्द को समर्थन दिया है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान
में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि जी.एस.टी. बिल को संसद में पास कराते
वक्त भाजपा के नेत्रत्व वाली केंद्र सरकार ने जिस भावना को जाहिर किया था आज लागू
कराते वक्त वह कहीं नहीं दिखाई दे रही है. आज जो पक्ष सामने आरहा है उससे आम जनता
को कोई लाभ नहीं होने जारहा. कारपोरेट और बड़े औद्योगिक समूह इसका लाभ उठायेंगे और
छोटे और मझोले व्यापारी इसकी जटिलताओं के मकड़जाल में फंस कर रह जायेंगे. लगता है
कि यह भी नोटबंदी की तरह लोगों को हैरान और परेशान करेगी. पर सरकार इससेपूरी तरह
वेपरवाह बनी हुयी है.
इसी सबको देखते हुये भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी ने कई व्यापारिक संगठनों द्वारा कल कराये जारहे उत्तर प्रदेश
बन्द को समर्थन प्रदान किया है. भाकपा राज्य सचिव ने अपनी तमाम स्थानीय इकाइयों का
आह्वान किया है कि वे इस बन्द को नैतिक और भौतिक समर्थन प्रदान करें.
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भा. क. पा. उत्तर प्रदेश
मंगलवार, 27 जून 2017
at 6:08 pm | 0 comments |
योगी सरकार : असफलताओं के सौ दिन : भाकपा
लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार
के अब तक के कार्यकाल को 'असफलता के सौ दिन' शीर्षक से नवाजा है.
योगी सरकार द्वारा आज सौ दिन पूरा करने पर भाकपा की ओर से प्रतिक्रिया व्यक्त
करते हुये पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि इन सौ दिन में यह सरकार एक
कदम भी आगे बढ़ने के बजाय सौ कदम पीछे की ओर खिसकी है.
यह सरकार मुख्य तौर पर चुनावों में लुभावने वायदों और क़ानून व्यवस्था दुरुस्त
होने की लोगों की आकांक्षा के तहत सत्ता में आयी थी. इसका सबसे बढ़ा वायदा किसानों
के कर्जे माफी का था जो कि न केवल आधा अधूरा है अपितु अभी तक अधर में लटका है.
गन्ना किसानों के भुगतान के बारे में सरकार के दाबे झूठे हैं और चीनी मिलों पर
किसानों की अभी भी तमाम रकम बाक़ी पड़ी है. किसानों के हालात जस के तस बने हुए हैं और वे आत्महत्याएं कर रहे
हैं.
क़ानून व्यवस्था तो जैसे नष्टप्राय ही होचुकी है. ह्त्या, लूट, डकेती और डकेती
के साथ ह्त्या, राहजनी, बलात्कार और सामूहिक बलात्कार, बलात्कार के साथ ह्त्या आदि
सभी बड़े पैमाने पर होरहे हैं. तमाम दाबों के बावजूद भ्रष्टाचार रुकने का नाम नहीं
लेरहा. एक अबोध बच्ची तो रिश्वत देने को अपनी गुल्लक लेकर पुलिस अधिकारी के पास
पहुंची क्योंकि पुलिस उसकी माँ के हत्यारों को इसलिए नहीं पकड़ रही थी कि उसे रिश्वत
नहीं मिली थी. यह शर्मनाक घटनाक्रम योगी के सुशासन की सारी कलई खोल कर रख देता है.
सबका साथ सबका विकास का राग अलापने वाली योगी सरकार के शासन में दलितों,
महिलाओं, अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर लोगों पर जबरदस्त जुल्म होरहे हैं. सत्ता का
संरक्षण प्राप्त दबंग तत्व और संघ की विभिन्न शाखाओं के लोग किसी न किसी बहाने उन
पर शारीरिक हमले बोल रहे हैं और उनकी संपत्तियों को विनष्ट कर रहे हैं. हमलाबरों
पर कार्यवाही करने के बजाय पीड़ितों और उनके हक में आवाज उठाने वालों को ही क़ानून
के शिकंजे में घेरा जा रहा है. सहारनपुर, संभल की घटनायें सभी के सामने हैं. ये
दबंग और शासक समूह द्वारा पोषित तत्व पुलिस- प्रशासन के अधिकारियों- कर्मचारियों
पर खुले हमले बोल रहे हैं, जिसके चलते अधिकारी इनके दबाव में नाजायज काम करने को
मजबूर हैं.
निजी एवं कार्पोरेट्स के हितों को साधने और कमजोर तबकों को रौंदने की गरज से
सरकार ने मीटबंदी और खनन बंदी की तथा तमाम
तरह की भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द कर दिया. इससे नौजवान और हर किस्म का मजदूर
बेरोजगारी से कराह रहा है. 15 जून तक सडकों को गड्ढा मुक्त करने का इनका दावा भी
हवा हवाई साबित हुआ है. हर स्तर पर शिक्षा में सुधार के बजाय उसे सांप्रदायिक
बनाने की योजना पर काम चल रहा है.
सरकार केवल घोषणाओं और प्रपोगंडा के भरोसे चल रही है. इसकी असफलताओं से ध्यान
हठाने को इसके प्रबन्धक खुल कर सांप्रदायिकता और जातीय उत्पीडन का सहारा लेरहे
हैं. सरकार के काले कारनामों का विरोध करने वालों की आवाज बंद करने के प्रयास चल
रहे हैं. आजादी के बाद यह पहली ऐसी सरकार है जो शुरू के सौ दिन में ही पूरी तरह
अनुत्तीर्ण होचुकी है और बिहार के टापरों की तर्ज पर अपनी कामयाबी का ढिंढोरा पीट रही
है.
डा. गिरीश
बुधवार, 14 जून 2017
at 12:36 pm | 0 comments |
Report of Agitation of Left Parties in U.P. on Jun 12
उत्तर प्रदेश में वामपंथी
दलों का दमन विरोधी दिवस बेहद सफल
जिला केंद्रों पर किये
गये धरने- प्रदर्शनऔर आम सभायें
लखनऊ- 12 जून, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
एवं वामपंथी दलों के आह्वान पर ‘दमन विरोधी दिवस’ समूचे उत्तर प्रदेश में बेहद सफल रहा. सहारनपुर
और प्रदेश के अन्य भागों में हुयी हिंसा की वारदातों और उनमें दलितों-
अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने, महिलाओं के साथ होरहीं दिल कंपा देने वाली वारदातों, जघन्य अपराधों जिनमें
सर्राफों व्यापारियों, व्यापारियों, वाहनों और बैंकों की लूट शामिल हैं, हाईवे और नेशनल हाईवेज पर
लूट, हत्या और सामूहिक बलात्कार की बड़ती
वारदातें, जर्जर होचुकी कानून व्यवस्था, गुंडा तत्वों द्वारा शांतिप्रिय नागरिकों को निशाना बनाने
यहां तक कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकरियों को निशाना बनाने, छात्रों और नौजवानों को
जेल भिजवाने और जगह जगह दंगे फैलाने के प्रदेश सरकार और संघ परिवार के कारनामों पर
कारगर रोक लगाने आदि प्रदेश को मथ रहे
सवालों पर यह आंदोलन केंद्रित था.
इसके अलावा हाल ही में
महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में उठ खड़े हुये किसान आंदोलनों और मध्य प्रदेश में
पुलिस गोली से 6 किसानों के मारे जाने, किसानों की जर्जर हालत को पलटने को स्वामीनाथन कमेटी की
रिपोर्ट को लागू करने, केंद्र सरकार द्वारा काटने के लिये पशुओं की खरीद- फरोक्त
को रोकने वाली अधिसूचना को रद्द करने, उत्तर प्रदेश के समस्त सीमांत और लघु किसानों के सभी कर्जे
अविलंब माफ करने, प्रदेश सरकार की खनन और पशु कटान नीति से तथा नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया
में लगाई पाबंदी आदि से बेरोजगारी में बढ़ोत्तरी और विकास के चौपट होने आदि सवाल भी
इस आंदोलन के केंद्र में थे.
योगी सरकार के सत्ता में
आने के बाद से यह संयुक्त वामपंथ का पहला बड़ा आन्दोलन था. भीषण गर्मी और रमजान के
बावजूद भाकपा और वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं ने जिस उत्साह और जुझारू तेवरों के
साथ आंदोलन को कामयाब बनाया उसके लिये वे बधाई के पात्र हैं. जैसाकि आजकल यूपी में
संघ गिरोह द्वारा जनवादी आंदोलनों पर हमलों की वारदातें होरहीं हैं और हमें आशंका
थी कि वे ऐसा करेंगे, हमारे कार्यकर्ताओं ने हिम्मत और गर्मजोशी के साथ दमन के
विरुध्द आवाज बुलंद की.
प्रत्येक जगह जिलाधिकारियों
के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति और राज्य पाल को उपर्युक्त मुद्दों से जुड़ी मांगों
को शामिल कर ज्ञापन दिये गये.
राजधानी लखनऊ में जहाँ चार
दिन पूर्व वामदलों के धरने को पीत पट्टाधारियों ने निशाना बनाने की कोशिश की थी, वहीं गांधी प्रतिमा पर
पहले से ज्यादा लोग एकत्रित हुये और जोशीले नारों के साथ धरने पर बैठे. भाकपा के
जिला सचिव मो. खालिक की अध्यक्षता में हुयी सभा को पार्टी के राज्य सहसचिव
अरविंदराज स्वरुप सचिव मंडल सदस्य आशा मिश्रा, रामप्रताप त्रिपाठी, मो. अकरम और कांती मिश्रा
आदि ने संवोधित किया. सभा का संचालन सीपीएम के जिला सचिव प्रदीप शर्मा ने किया.
प्रधानमंत्री मोदी के चुनाव
क्षेत्र वाराणसी में वामपंथी कार्यकर्ताओं ने लहुरावीर चोक स्थिति आजाद पार्क में
धरना दिया. यहां संपन्न सभा की अध्यक्षता भाकपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार ने की.
संचालन माकपा के नंद लाल पटेल ने किया. सीपीएम के राज्य सचिव हीरालाल यादव, भाकपा के निजामुदीन, अजय मुखर्जी, राजनाथ पांडे, फार्बर्ड ब्लाक के संजय
भट्टाचार्य सहित अन्य वाम नेताओं ने संवोधित किया.
कानपुर में वामपंथी दलों के
कार्यकर्ताओं ने राम आसरे पार्क में धरना और सभा का आयोजन किया. भाकपा के जिला
सचिव रामप्रसाद कनौजिया, असित कुमार सिंह, माकपा के अरविंद कुमार, एसयूसीआई के बालेंदु कुमार
आदि ने सभा को संबोधित किया.
अलीगढ़ में भाकपा और माकपा
के कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट पर धरना देकर सभा की. भाकपा के जिला सहसचिव इकबाल
मंद, पूर्व सचिव एहतेशाम बेग, रामबाबू गुप्ता, सीपीएम के जिला सचिव इदरीश अहमद, नरेंद्र पचौरी, ओमप्रकाश शर्मा और माले के
धर्मेंद्र ने सभा को संबोधित किया.
आगरा में भाकपा और माकपा ने
सुभाष पार्क से कलक्ट्रेट तक जुलूस निकाला और आम सभा की. सभा को भाकपा की राज्य
काउंसिल के सदस्य तेज सिंह वर्मा, जिला सचिव ताराचंद, ओम प्रकाश प्रधान, पूरन सिंह ऐड्वोकेट, एस. के. खोसला, जगदीश प्रसाद शर्मा, भीकम सिंह, सुधीर कुलश्रेष्ठ, मोहनसिंह जादूगर, भवन निर्माण संघ के
धर्मजीत सिंह, सीपीएम के जिला सचिव श्रीलाल तोमर और भारतसिंह ने संबोधित किया.
राज्य कार्यकारिणी सदस्य का. नसीम अंसारी के
अनुसार इलाहाबाद में उपर्युक्त सवालों पर भाकपा, माकपा और माले ने 10 और 11 जून को पुतला दहन कर
ज्ञापन दिया.
फैजाबाद में तहसील के समक्ष
तिकौनियां पार्क पर धरना और सभा की गयी. सभा को भाकपा के जिला सचिव अशोक कुमार तिवारी, रामतीर्थ पाठक, रामजी राम, एस. एन. बागी, नौजवान सभा के राज्य सचिव आफताव
अहमद, सीपीएम के माताबदल व सत्यभान सिंह और माले के नेताओं ने संबोधित किया.
झांसी में भाकपा ने
कलक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन और आम सभा की. जिला सचिव शिरोमणि सिंह राजपूत की
अध्यक्षता में संपन्न सभा को भगवान दास पहलवान, लक्ष्मण सिंह आदि ने संवोधित किया.
मेरठ में भाकपा और किसान
सभा ने जिलाधिकारी कार्यालय पर भाकपा जिला सचिव शरीफ अहमद, इदरीस और किसान सभा के
नेता जितेंद्र वर्मा और संग्राम सिंह के नेत्रत्व में प्रदर्शन किया और आमसभा की.
बांदा में भाकपा ने जिलाधिकारी
कार्यालय पर भारी सुरक्षाबलों की मौजूदगी में जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया.
सभा को राज्य काउंसिल सदस्य राम चंद्र सरस, जिला सचिव केवलसिंह, देवीदयाल गुप्ता, श्यामसुंदर राजपूत, मदन भाई पटेल, श्यामबाबू तिवारी, वकार खान और हसीब अली आदि ने
संबोधित किया.
जनपद चित्रकूट में भी भाकपा
ने तहसील पर प्रदर्शन और आम सभा की. सभा को अमित यादव, चंद्रपाल पाल और माकपा के रुद्रप्रसाद
मिश्र ने संबोधित किया.
ललितपुर में भी भाकपा ने
जिला कलक्ट्रेट पर सभा कर ज्ञापन दिया. जिला सचिव जमील अहमद एड्वोकेट, किशन लाल, पर्वत लाल अहिरवार व
महेंद्र बौध्द आदि ने सभा को संबोधित किया.
गाज़ियाबाद में जिलाधिकारी
कार्यालय पर भाकपा द्वारा जिला सचिव जितेंद्र शर्मा के नेत्रत्व में धरना एवं आम
सभा की गयी. यहाँ रहीमुद्दीन, सगीर अहमद, पर्वीन, सरदार जर्नेल सिंह ने संबोधित किया. अल्पसंख्यक आबादी बहुल
मोहल्ला- शहीद नगर में सैकड़ों रोजेदारों ने वहाँ के पार्टी कार्यालय से टेलीफोन
एक्स्चेंज तक जुलूस निकाला.
मथुरा में भाकपा, माकपा और माले ने धरनास्थल
से जिलाधिकारी कार्यालय तक जुलूस निकाल कर आमसभा की. सभा को भाकपा की राज्य
कार्यकारिणी के सदस्य गफ्फार अब्बास ऐडवोकेट, अब्दुल अशफाक, मास्टर वीरेंद्र सिंह, प्रेम मिस्त्री, माकपा के दिगंबर सिंह व
टीकेंद्र शाद और माले के नसीर शाह ऐडवोकेट व सौरभ इंसान आदि ने संबोधित किया.
जालौन जिले के मुख्यालय उरई
में भाकपा कार्यालय मजदूर भवन से जिलाधिकारी कार्यालय तक शानदार जुलूस निकाला और
आम सभा की. सभा को भाकपा के वरिष्ठ नेता कैलाश पाठक, राज्य कार्यकारिणी सदस्य सुधीर अवस्थी, जिला सचिव विजय सिंह, नौजवान सभा के प्रांतीय
अध्यक्ष विनय पाठक, माकपा के जिला सचिव कमला कांत और माले के सचिव कुशवाहा ने संबोधित
किया.
जौनपुर जिला मुख्यालय पर भाकपा, माकपा व एसयूसीआई ने विशाल
प्रदर्शन किया. सभा को भाकपा राज्यकार्यकारिणी के सदस्य जयप्रकाश सिंह, जिला सचिव कल्पनाथ गुप्ता, रामनाथ यादव, सुभाष पटेल, जगन्नाथ शास्त्री, सत्यनारायन पटेल, माकपा के किरणशंकर रघुवंशी, जयलाल सरोज व इंद्रजीत पाल, एसयूसीआई के जगदीशचंद्र अस्थाना, महेंद्रकुमार मौर्य श्रीपति सिंह व प्रवीन शुक्ल ने संबोधित किया. सभा
का संचालन सुबास गौतम ने किया.
गाज़ीपुर में भाकपा द्वारा का.
सरयू पांडे पार्क में धरना दिया गया. सभा को पूर्व सांसद विश्वनाथ शास्त्री, जिला सचिव अमरीका यादव, डा. रामबरन सिंह, जनार्दनराम, शमीम, राम अवध, रामलाल, मनोजसिंह, पूर्व ब्लाक प्रमुख रामायण
यादव आदि ने संबोधित किया.
मऊ में भी जिला मुख्यालय पर
भाकपा ने जिला मुख्यालय पर धरना दिया. सभा को जिला सचिव विनोद राय, रामसोच यादव, माकपा के वीरेंद्र व माले के विनोद ने संबोधित किया.
औरैया में भाकपा ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया. सभा को राज्य काउंसिल
सदस्य अतरसिंह कुशवाहा, सरनाम सिंह, बाबूराम निराला, ओमप्रकाश दोहरे, हनुमंतसिंह व दिग्विजय सिंह ने संबोधित किया.
प्रतापगढ में भाकपा ने जिलाधिकारी
कार्यालय पर प्रदर्शन किया. सभा को जिला सचिव रामबरन, कमरुद्दीन, राजमणि, त्रिभुवननाथ शर्मा, उपेंद्रनारायण पांडे, हेमंत ओझा, महाराजदीन यादव, सीपीएम के लालबहादुर तिवारी, माले के रामनरेश पटेल, एसयूसीआई के पुष्पेंद्र विश्वकर्मा
ने संबोधित किया.
भदोही में भाकपा और माकपा ने
जिला मुख्यालय पर धरना/ प्रदर्शन किया. सभा को भाकपा ,राज्य कार्यकारिणी के सदस्य
फूलचंद यादव, जिला सचिव सुशील श्रीवास्तव, भुआल पाल, राजेंद्र कनौजिआ, महबूब अली, माकपा के सचिव कैलाशनाथ, इंद्रदेव पाल, जगन्नाथ मौर्य ने संबोधित किया.
शाहजहांपुर में निषेधाज्ञा को
तोड़ कर जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया. सभा को जिला सचिव मो. सलीम, रामशंकर नेताजी, सुरेश कुमार नेताजी, डा. रुपा शर्मा, मनीश चंद्र व प्रदीपकुमार गुप्ता
ने संबोधित किया.
सुल्तानपुर में तिकौनियां पार्क
में धरना/ प्रदर्शन किया गया जिसे भाकपा के जिला सचिव शारदा पांडे, रामअजोर उपाध्याय, मुन्ना शर्मा, प्रेमा देवी, शमीम खान, रामखिलावन, माकपा के बाबूराम यादव व एसयूसीआई
के जयप्रकाश मौर्य ने संबोधित किया.
पीलीभीत में नेहरु ऊर्जा पार्क
में संयुक्त धरने का आयोजन किया गया. सभा को भाकपा जिला सचिव चिरोंजीलाल यादव, भीमसेन शर्मा, बालकराम, भोजपाल, फारबर्ड ब्लाक के प्रांतीय
सचिव एस.एन.सिंह चौहान, माकपा के रजीउद्दीन शम्सी ने संबोधित किया.
बहराइच में भाकपा ने जिला केंद्र पर जुझारू प्रदर्शन किया. सभा
को भाकपा नेता सिध्दनाथ श्रीवास्तव, कुलेराज यादव, शशिवाला श्रीवास्तव, लालबहादुर लोदी, रामबचन सिंह, मो. शरीफ व श्रावस्ती के जंगबहादुर सिंह ने संबोधित
किया.
बस्ती में प्रदर्शनकारी शास्त्री चौक पर इकट्ठे हुये मगर प्रशासन
ने आगे नहीं बढने दिया. वहीं सभा की गयी जिसे भाकपा नेता अशर्फीलाल गुप्ता, भिखई राम, गंगाराम सोनकर, विशलावती, दुर्गावती, शांति व माकपा के के.के. तिवारी
ने संबोधित किया. जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया गया.
महाराजगंज जिला मुख्यालय पर
भाकपा ने प्रदर्शन किया जिसमें जिला सचिव गुरुशरण यादव, अवधराज यादव, अमजद शाह, रोहित, कल्पनाथ ने भाग लिया.
हाथरस में भाकपा के साथियों
ने उप जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच कर सभा की. जिला सचिव चरन सिंह बघेल, सत्यपाल रावल, द्रुगपाल सिंह, संजय खान आदि ने संबोधित
किया.
बुलंदशहर के स्याना तहसील
मुख्यालय पर भाकपा ने जोरदार प्रदर्शन किया और सभा की. सभा को राज्य सचिव मंडल
सदस्य अजय सिंह, वरिष्ठ नेता सागर सिंह, जिला सचिव मुरारीलाल आदि ने संबोधित किया.
मुजफ्फरनगर में भी जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना और सभा की
गयी जिसे भाकपा के जिला सचिव राजबल त्यागी, शाहनवाज खान, सुभाष
उपाध्याय, छोटे खान, मूर्तज़ा सलमानी, धीर सिंह सीपीएम के श्यामवीर राठी और सहदेव सिंह ने संबोधित किया.
अमरोहा के जिला मुख्यालय पर धरना और आमसभा की गयी जिसे
भाकपा के जिला सचिव नरेश चंद्रा, घसीटा सिंह, गोविंद
गोला तथा माकपा और फार्बर्ड के नेताओं ने संबोधित किया.
गोरखपुर में भाकपा और माकपा ने जिला मुख्यालय पर धरना दिया.
सभा को भाकपा जिला सचिव, सुरेश राय, समी
उल्लाह खान तथा राममूर्ति ने संबोधित किया.
मुरादाबाद में भाकपा, माकपा और माले ने प्रदर्शन कर सभा की जिसे
भाकपा के राम किशोर रस्तोगी व मोहम्मद असलम आदि ने संबोधित किया.
कानपुर देहात के जिला मुख्यालय पर भाकपा द्वारा जोरदार
धरना/ आम सभा की गयी जिसे जिला सचिव राजेंद्रदत्त शुक्ला,
वरिष्ठ नेता रणजीतसिंह सेंगर, हरिमोहन त्रिपाठी, मोतीलाल भारती, रामअवतार भारती, केप्टन आर. एस. यादव, आदि ने संबोधित किया.
मैंनपुरी में भाकपा और किसान सभा ने जिला केंद्र पर धरना
प्रदर्शन किया जिसे भाकपा जिला सचिव रामधन, वीरेंद्रसिंह चौहान तथा किसान सभा के सचिव
राधेश्याम यादव ने संबोधित किया.
जनपद फतेहपुर के खागा कस्बे में नगरपालिका से तहसील तक
जुलूस निकाला और सभा की. सभा को भाकपा राज्य कार्यकारिणी सदस्य मोती लाल, जिला
सचिव रामसजीवन सिंह, राज्य काउंसिल सदस्य फूलचंद पाल, हीरालाल चौधरी, पूरन लाल,
रामप्रकाश तथा माकपा के नरोत्तम सिंह व गया प्रसाद आदि ने संबोधित किया. तहसील के
250 गांवों को कौशांबी जनपद में देने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर भी विरोध
प्रकट किया गया.
बरेली में भाकपा ने दामोदर स्वरुप पार्क में धरना दिया जिसमें
राज्य कार्यकारिणी सदस्य राजेश तिवारी, तार्केश्वर चतुर्वेदी, डी.डी. बेलवाल, रामनाथ चच्चा, आर.एस. चौहान, रामकिशोर व उमेश वाल्मीकि आदि शामिल थे.
देवरिया में भाकपा ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जिसमें
सीपीएम के कुछ साथी शामिल थे. सभा को जिला सचिव आनंद चौरसिया, चक्रपाणि
तिवारी, कमला यादव, सदानंद ने संबोधित किया.
कौशाम्बी में भाकपा द्वारा शिवसिंह यादव के नेत्रत्व में सिराथू
तहसील पर प्रदर्शन किया गया और सभा की गयी.
फरुखाबाद में यह कार्यक्रम 15 जून को आयोजित होगा. अन्य जिलों
की रिपोर्ट अपेक्षित है.
गोंडा में भाकपा जिला सचिव रघुनाथ राम, सत्यनारायन
तिवारी, ईश्वरशरण शुक्ल, दीनानाथ त्रिपाठी
माकपा के कौशलेंद्र पांडे आदि ने ज्ञापन दिया.
डा. गिरीश
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