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मंगलवार, 14 अगस्त 2018
at 12:54 pm | 0 comments |
CPI CONDEMNS ATTACK ON ITS ACTIVIST IN KUSHIINAGAR
लखनऊ- 14 अगस्त 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य
सचिव मण्डल ने कुशीनगर जनपद की तमकुहीराज तहसील पर गत 7 अगस्त से आम जनता के
सवालों पर भाकपा के बैनर तले निरंतर धरना देरहे गरीब किसान मजदूरों पर सत्ता पोषित
माफिया- गुंडों द्वारा किये गये हमले की कड़े शब्दों में निन्दा की है।
भाकपा ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक एवं
प्रमुख सचिव गृह से मांग की कि वे गरीबों के हक की आवाज कुचलने वालों की इस करतूत
के खिलाफ कड़े से कड़े कदम उठाए।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰
गिरीश ने कहाकि ये गरीब लोग चन्द माफियाओं द्वारा गरीबों की जमीन मकान हड़पने के
खिलाफ और रोजगार दिलाने, बन्द उद्योगों और चीनी मिलों को
चलवाने, जनपद कुशीनगर और पूर्वाञ्चल के विकास की मांगों को
लेकर शांतिपूर्ण धरना देरहे थे। सप्ताह बीत जाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन ने कोई
सुधि नहीं ली। उलटे दर्जन भर सशस्त्र गुंडों ने गत रात 11 बजे उन पर हमला बोल
दिया। सभी को गहरी चोटें आयी हैं। हमलावर लोग उनका सामान भी उठा कर लेगये।
ये योगी- मोदी के अच्छे दिनों की बानगी मात्र है।
आज उत्तर प्रदेश में हक और न्याय की आवाज उठाने वालों को हर तरह से प्रताड़ित किया
जारहा है। भाकपा इसकी निन्दा करती है।
भाकपा ने अपनी गोरखपुर मण्डल की समस्त जिला इकाइयों
को निर्देश दिया कि वे भाकपा कुशीनगर के साथियों के प्रति एकजुटता का इजहार करें
और 16 अगस्त को अपने जिला मुख्यालयों पर उनको न्याय दिलाने को ज्ञापन दें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा , उत्तर प्रदेश
रविवार, 12 अगस्त 2018
at 4:52 pm | 0 comments |
Left Convention in U.P. on Proportional electoral system and election reforms
समानुपातिक चुनाव प्रणाली और चुनाव सुधार लागू
कराने को
वामपंथी दलों का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन 20 अगस्त
को लखनऊ में
लखनऊ- 12 अगस्त 2018, उत्तर
प्रदेश के वामपंथी दलों की एक बैठक आज यहां संपन्न हुयी। बैठक की अध्यक्षता भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने की।
बैठक में वामदलों ने आगामी 20 अगस्त को समानुपातिक
चुनाव प्रणाली एवं चुनाव सुधारों पर एक राज्य स्तरीय कन्वेन्शन आयोजित करने के
पूर्व के निर्णय की पुष्टि की गयी। यह कन्वेन्शन लखनऊ के गोमती नगर स्थित
अंतर्राष्ट्रीय बौध्द शोध संस्थान लखनऊ में पूर्वान्ह 11 बजे से आयोजित किया
जाएगा।
कन्वेन्शन को वामपंथी दलों के राष्ट्रीय नेता भी
संबोधित करेंगे। भाकपा के केन्द्रीय सचिव मण्डल के सदस्य एवं सांसद कामरेड डी॰
राजा, भाकपा ( मा॰ ) की पोलिट ब्यूरो के सदस्य और पूर्व सांसद का॰ नीलोत्पल बसु, भाकपा ( माले ) की पोलिट ब्यूरो के सदस्य का॰ कविता क्रष्णन तथा फारबर्ड
ब्लाक के राष्ट्रीय सचिव का॰ देवब्रत विश्वास आदि नेता प्रमुख रूप से संबोधित
करेंगे।
वामदलों ने सभी धर्मनिरपेक्ष दलों के प्रदेश
प्रमुखों को अपने बहुमूल्य सुझाव देने हेतु कन्वेन्शन में आमंत्रित करने का निश्चय
भी किया है। उनको निमंत्रण पत्र भेजा जारहा है। वामदलों के राज्य स्तरीय नेतागण भी
अपने विचार रखेंगे।
बैठक में भाकपा (मा॰ ) के राज्य सचिव का॰ हीरालाल
यादव, सचिव मण्डल के सदस्य का॰ प्रेमनाथ राय, भाकपा राज्य
सचिव डा॰ गिरीश, सहसचिव का॰ अरविन्दराज स्वरूप, भाकपा ( माले ) के प्रांतीय नेता का॰ अरुण कुमार, का॰ रमेश सिंह सेंगर, फारवर्ड ब्लाक के राज्य
महासचिव एस॰ एन॰ सिंह चौहान, डा॰ विश्वास एवं विजय पाल सिंह
आदि ने विचार व्यक्त किये॰
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
सोमवार, 6 अगस्त 2018
at 4:31 pm | 0 comments |
CPI on Devriya Episode
देवरिया काण्ड राज्य
सरकार के माथे पर है कलंक का टीका
मुख्यमंत्री योगी
आदित्यनाथ जिम्मेदारी से बच नहीं सकते
सुप्रीम कोर्ट की
निगरानी में सीबीआई करे जांच
भाकपा कल से ही
करेगी विरोध प्रदर्शन
9 अगस्त को भाकपा का
महिला दलित अल्पसंख्यक दमन विरोधी दिवस
लखनऊ- 6 अगस्त 2018, भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने देवरिया के बालिका संरक्षण गृह में अबोध
बालिकाओं के साथ लंबे समय से चल रहे अमानुषिक अत्याचार और उनके यौन शोषण पर गहरा
रोष प्रकट किया है. भाकपा ने इस जघन्य काण्ड के लिये राज्य सरकार को सीधे
जिम्मेदार ठहराया है. भाकपा राज्य केन्द्र ने अपनी कतारों का आह्वान किया है कि वे
इस घटना पर तत्काल प्रतिरोध दर्ज करायें और बलात्कारियों की संरक्षक योगी सरकार के
पुतले जलायें. साथ ही भाकपा ने 9 अगस्त को प्रदेश भर में महिला और दलित उत्पीडन विरोधी
दिवस पूरी तैयारी के साथ आयोजित करने का आह्वान भी पार्टी की जिला इकाइयों से किया
है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान
में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि गत साढे चार सालों से देश में मोदी की
और डेढ़ साल से उत्तर प्रदेश में योगी की सरकार है. लेकिन महिलाओं और अबोध बालिकाओं
के साथ एक से एक शर्मनाक वारदातें व्यापक पैमाने पर और सर्वत्र जारी हैं. देवरिया
की वारदात इसलिए और संगीन है कि यह मुख्यमंत्री के कार्यक्षेत्र में निर्बाध रूप
से जारी थी और संबंधित एनजीओ का लाइसेंस एक साल पहले ही रद्द किया जाचुका था. मात्र
जिले के अधिकारियों पर इस ‘महापाप, की जिम्मेदारी डाल कर राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी
से बच नहीं सकती. भाकपा की मांग है कि योगी आदित्यनाथ को इसकी नैतिक जिम्मेदारी
लेनी चाहिये.
डा. गिरीश ने कहाकि ये काम
करने वाली नहीं बकबास करने वाली सरकार है. यह शासन नहीं दंगासन चला रही है. यह
महिलाओं को भोग की वस्तु मानने वालों की सरकार है. भाजपा और उसके आका संघ के
अधिकांश शीर्षस्थ नेता भारतीय संस्कृति में निर्धारित गृहस्थ आश्रम में जाने से
कतराते हैं. और यह भी सर्वविदित है कि वे ब्रह्मचारी नहीं हैं. ऐसे लोगों के सत्ता
में रहते न महिलाओं की इज्जत आबरू सुरक्षित है न कमजोर तबकों का मान सम्मान. “बेटी
बचाओ बेटी पढाओ” जैसा पवित्र नारा बेटियों की बोटी नोंचने वालों के हाथ पढ़ गया है.
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि
देवरिया की इस खौफनाक घटना की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में सीबीआई
द्वारा कराई जानी चाहिये. राज्य प्रशासन से इसलिए कोई उम्मीद नहीं कि पूरा खेल
उनके सरंक्षण में चल रहा था और आज भी घटना का खुलासा एक बच्ची ने सरंक्षण गृह से
भाग कर किया है, पुलिस- प्रशासन ने नहीं. भाकपा प्रदेश के अन्य बालिका संरक्षण गृहों
की जांच की मांग भी करती है और भोगी सफेदपोशों के खिलाफ पास्को एक्ट के तहत
कार्यवाही की मांग करती है.
भाकपा ने निश्चय किया है कि
वह इस जघन्य काण्ड के खिलाफ कल से ही सडकों पर उतरेगी और महिलाओं, दलितों और
अल्पसंख्यकों पर प्रदेश और देश में होरही अत्याचार की घटनाओं के खिलाफ 9 अगस्त को महिला, दलित और अल्पसंख्यकों पर दमन
विरोधी दिवस आयोजित करेगी.
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
मंगलवार, 31 जुलाई 2018
at 4:32 pm | 0 comments |
भाजपा शासन की चूलें हिला देगा महिलाओं और अबोध बालिकाओं का यह चीर हरण
लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी उत्तर प्रदेश के सचिव एवं भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डा.
गिरीश ने कहाकि यह कैसा रामराज्य है जिसमें न महिलायें सुरक्षित हैं न अबोध
बालिकायें. पल पल महिलाओं का अपमान होरहा है. यहां तक कि खुद भाजपा की अनुसूचित
वर्ग की महिला विधायक के मन्दिर प्रवेश के बाद उसे गंगाजल से धोया जाता है.
मुजफ्फरपुर की 34 बालिकाओं
के साथ बालिका गृह में हुये बलात्कार और हमीरपुर में भाजपा की ही एक विधायक के
मन्दिर में जाने के प्रवेश के बाद ग्रामीणों द्वारा मंदिर को धोये जाने की घटनाओं
पर गहरा आक्रोश प्रकट करते हुये भाकपा नेता ने कहाकि ये वारदातें युगांडा या
अल्बानियां में नहीं अपितु उस देश में होरही हैं जिसके तीन चौथाई भाग पर अपना शासन
होने का ढिंढोरा पीटते भाजपा थकती नहीं है.
डा. गिरीश ने मांग की कि इन
घटनाओं की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में सीबीआई द्वारा की जानी चाहिये.
क्योंकि अब तक इन घटनाओं पर नीतीश और योगी का रवैया लीपापोती करने का रहा है.
भाकपा यौन शोषण के आरोपों के घेरे में आये अन्य सभी बालग्रहों के खिलाफ प्राथमिकी
दर्ज कराने की भी मांग करती है.
बिहार समाज कल्याण विभाग
द्वारा सरकारी सहायता से राज्य के 38 जिलों में चलाने वाले 110 बालिकाग्रहों का
आडिट कराया गया तो पता चला कि मुजफ्फरपुर सहित कुल 15 बाल संरक्षण ग्रहों में अबोध
बालिकाओं का लगातार यौन शोषण हुआ है. पहले बिहार सरकार ने इसे दबाने की कोशिश की
पर जब यह मामला बिहार से संसद तक गूंजा तो मुख्यमंत्री दबाव में आये और उन्होंने
मुजफ्फरपुर मामले की प्राथमिकी दर्ज कर सीबीआई जांच की सिफारिश की है. पर आज भी इस
घटना पर आक्रोश जताने वाले संगठनों पर दमनचक्र चलाया जारहा है.
भाकपा नेता ने कहाकि इस
घटना का मुख्य आरोपी बिहार राज्य की समाज कल्याण मंत्री का पति है तो हमीरपुर में
मंदिर धुलवाने वाले भाजपा समर्थक हैं. भाजपा भारतीय संस्कृति की अलमबरदार होने का
दाबा करते नहीं थकती. लेकिन जिस भारतीय संस्कृति का सूत्रवाक्य है “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता”
भाजपा शासन में इस सूत्र की ही बखिया उधेड़ी जारही है और महिलाओं की इज्जत आबरू तार
तार की जारही है.
डा. गिरीश ने कहाकि जांच से
पता चला है कि बलात्कार की शिकार बालिकाओं में से ज्यादातर की उम्र 7 से 14 साल है
और उनमें से कम से कम 3 का गर्भपात कराया गया है और अभी तीन अन्य गर्भवती हैं. तीन
तलाक मामले में मुस्लिम महिलाओं के लिये सांप्रदायिक आंसू बहाने वाले प्रधानमंत्री
मौन हैं और योगी आदित्यनाथ ने भी हमीरपुर की घटना पर अभी तक मौन नहीं तोडा. हर
मामले में विपक्ष पर जिम्मेदारी डालने की आदी भाजपा को अब मुहँ दिखाने की जगह नहीं
मिल रही क्योंकि यह सब उन्हीं के शासन काल में घटित होरहा है. उन्होंने दागी 14
अन्य बलिकाग्रहों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराये जाने की मांग की.
डा. गिरीश ने चेतावनी दी कि
दिल्ली के मात्र एक निर्भया काण्ड ने तूफ़ान मचा दिया था और उस समय के सत्तासीनों
को उसका परिणाम भुगतना पडा था. द्रौपदी के अपमान ने कौरवों का वंश नष्ट कर दिया
था. अब इतनी अबोध बालिकाओं के साथ यह जघन्य कृत्य और एक अनुसूचित महिला विधायक का
अपमान भाजपा शासन की चूलें हिला कर रख देगा.
डा. गिरीश
बुधवार, 18 जुलाई 2018
at 5:48 pm | 0 comments |
इस नए आपातकाल का अभी नामकरण किया जाना शेष है: डा. गिरीश
आपातकाल और उसकी ज्यादतियां
इतिहास की वस्तु बन गयी हैं. संघ, उसके पिट्ठू संगठनों, भाजपा और उनकी सरकार ने
विपर्यय की आवाज को कुचलने की जो पध्दति गड़ी है इतिहास को अभी उसका नामकरण करना
शेष है. फासीवाद, नाजीवाद, अधिनायकवाद, तानाशाही और इमरजेंसी आदि सभी शब्द जैसे बौने
बन कर रह गये हैं. चार साल में जनहित के हर मुद्दे पर पूरी तरह से असफल होचुका सत्ताधारी
गिरोह जनता की, विपक्ष की, गरीबों की, दलितों महिलाओं और अल्पसंख्यकों की प्रतिरोध
की हर आवाज को रौंदने में कामयाब रहा है.
झारखंड में स्वामी अग्निवेश
पर भारतीय जनता युवा मोर्चा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा किये गये
कातिलाना हमले से उन लोगों की आँखों से पर्दा हठ जाना चाहिये जो आज भी संघ गिरोह
को एक धर्म विशेष के रक्षक के रूप में माने बैठे हैं. स्वामी अग्निवेश एक ऐसे
सन्यासी हैं जो पाखण्ड और पोंगा पंथ की व्यवस्था से जूझ रहे हैं. वे मानव द्वारा
मानव के शोषण पर टिकी लुटेरी व्यवस्था के उच्छेद को तत्पर समाजसेवी हैं. उन पर हुआ
कातिलाना हमला दाभोलकर, कालबुर्गी, गोविन्द पंसारे और गौरी लंकेश की हत्याओं की
कड़ी को आगे बढाने वाला है.
अभी कल ही माननीय सर्वोच्च
न्यायालय ने मौब लिंचिंग की घटनाओं पर सरकारों को फटकार लगायी थी और उसके विरुध्द
क़ानून बनाने का निर्देश दिया था. क़ानून अब भी कई हैं और एक नया क़ानून और भी बन
जाएगा पर क्या यह क़ानून सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े गिरोह पर लागू होपायेगा यह सवाल
तो आज से ही मुहँ बायें खडा है.
अग्निवेश पर हमला उस विद्यार्थी
संगठन ने किया है जो “ज्ञान शील और एकता” का मुखौटा लगा कर भोले भाले छात्रों को
मारीच- वृत्ति से बरगला कर कतारों में शामिल कर लेता है और फिर उन्हें कथित
बौध्दिक के नाम पर सांप्रदायिक और उन्मादी नागरिक बनाता है. उत्तर प्रदेश के
कासगंज में इस संगठन द्वारा मचाये उत्पात की भेंट इन्हीं की कतारों का एक नौजवान
चढ़ गया था जिसका दोष उस क्षेत्र के अल्पसंख्यकों के मत्थे मढ़ दिया गया. मैंने उस
वक्त भी यह सवाल उठाया था कि अभिवावक अपने स्कूल जाने वाले बच्चों को इस गिरोह की
गिरफ्त से बाहर रखें ताकि वे इसकी साजिशों के शिकार न बनें. यह सवाल में आज फिर
दोहरा रहा हूँ.
पर सवाल कई और भी हैं. शशि
थरूर ने जिस शब्दाबली का प्रयोग किया उससे असहमत होते हुये भी कहना होगा कि उससे
कई गुना आपत्तिजनक और दूसरों की भावनाओं को चोट पहुंचाने वाली शब्दाबली भाजपा
नेता, मंत्रीगण और प्रवक्ता आये दिन प्रयोग करते रहते हैं. तब न विद्यार्थी परिषद
का खून उबलता है, न युवा मोर्चा का न बजरंग दल का. पर थरूर के दफ्तर पर हमला बोला
जाता है.
दादरी से शुरू हुयी मौब
लिंचिंग आज तक जारी है और उसके निशाना दलित और अल्पसंख्यक बन रहे हैं. प्रतिरोध की
आवाज उठाने वाले संगठन ‘भीम सेना’ के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को जेल के सींखचों
के पीछे डाला जाता है तो कलबुर्गी और गोविन्द पंसारे के कातिलों को क़ानून के हवाले
करने के लिये उच्च न्यायालय को जांच एजेंसियों को बार बार हिदायत देनी पड़ रही है.
जिसने भी भाजपा की घोषित कुटिलताओं के खिलाफ बोला संघ के अधिवक्तागण अदालतों में
मुकदमे दर्ज करा देते हैं. हर सामर्थ्यवान विपक्षी नेता के ऊपर कोई न कोई जांच
बैठा दी जाती है. ऊपर से प्रधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष आये दिन धमकी भरे बयान
देते रहते हैं.
यहाँ तक कि गांधी नेहरू जैसे
महापुरुषों को अपमानित करना और विपक्ष के नेताओं पर अभद्र टिप्पणी करना रोजमर्रा
की बात होगई है. लेकिन यदि कोई विपक्षी किसी महापुरुष पर टिप्पणी कर दे तो यह
आस्था का सवाल बन जाता है और उस पर चहुँतरफा हमला बोला जाता है. फिल्म, पेंटिंग और
कला के अन्य हिस्सों को दकियानूसी द्रष्टिकोण से हमले का शिकार बनाया जाता है.
अफ़सोस की बात है इन सारी
अर्ध फासिस्टी कारगुजारियों को मीडिया खास कर टीवी चैनलों से ख़ासा प्रश्रय मिलता
है. मीडिया का बड़ा हिस्सा आज तटस्थ द्रष्टिकोण पेश करने के बजाय शासक गिरोह का
माऊथपीस बन कर काम कर रहा है.
आपातकाल के दिनों में लोगों
पर शासन आपातकाल के विरोध का आरोप मढ़ता था और उन्हें जेलों में डाल देता था. संजय
गांधी के नेतृत्व वाली एक युवा कांग्रेस थी जो उत्पात मचाती थी. लेकिन वह न तो
इतनी संगठित थी और न इतनी क्रूर. कोई सुनिश्चित लक्ष्य भी नहीं थे. शुरू की कुछ अवधि
को छोड़ मीडिया ने भी ज्यादतियों के खुलासे करना शुरू कर दिया था. अदालतें भी काम
कर रहीं थीं. शूरमा संघी तो इंदिरा गांधी के बीस सूत्रीय कार्यक्रम और संजय गांधी
के 5 सूत्रीय कार्यक्रम में आस्था व्यक्त कर रिहाई पारहे थे. आज लोकतान्त्रिक सेनानी
पेंशन और अन्य सुविधायें पाने वालों में से अधिकतर वही आपातकाल के भगोड़े हैं.
पर आज स्थिति एकदम विपरीत
है. न आरोप लगाने वाली कोई वैध मशीनरी है न कोई न्याय प्रणाली है. गिरोह अभियोग तय
करता है और सजा का तरीका और सजा भी वही तय करता है. ‘कातिल भी वही है मुंसिफ भी
वही है.’ सत्ता शिखर यदि तय कर ले कि क़ानून हाथ में लेने वाले क़ानून के हवाले
होंगे तो इनमें से कई का पतलून गीला होजायेगा. पर वह या तो मौन साधे रहता है या
फिर कभी फर्जी आंसू बहा कर कि – ‘मारना है तो मुझे मार दो’ एक ओर उन्हें शह देता
है तो दूसरी ओर झूठी वाहवाही बटोरता है.
हालात बेहद नाजुक हैं. कल
दाभोलकर, कालबुर्गी, गोविन्द पानसरे और गौरी लंकेश निशाना बने थे तो आज स्वामी अग्निवेश
को निशाना बनाया गया. कल फिर कोई और निशाने पर होगा. पर ये तो जनहानि है जो दिखाई
देरही है. पर जो प्रत्यक्ष नहीं दिख रहा वह है लोकतंत्र की हानि, संविधान की हानि
और सहिष्णुता पर टिके सामाजिक ढांचे की हानि है. समय रहते इसकी रक्षा नहीं की गयी
तो देश और समाज एक दीर्घकालिक अंधायुग झेलने को अभिशप्त होगा.
डा. गिरीश.
( लेखक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल के सचिव एवं भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के
सदस्य हैं )
मंगलवार, 17 जुलाई 2018
at 7:52 pm | 0 comments |
सिर से पैर तक भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी में डूबी है उत्तर प्रदेश की योगी सरकार: भाकपा
लखनऊ- भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार
सिर से पैर तक भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी में डूबी है और डिबाई( बुलंदशहर ) के
कोतवाल के सीयूजी नंबर से जारी व्हाट्सएप मैसेज से उसकी कलई खुल कर रह गयी है.
ज्ञात हो कि उक्त पुलिस
अधिकारी के सीयूजी नंबर से जारी ये व्हाट्सएप मैसेज जारी हुआ- ‘ये योगी सरकार है
भाई हर जगह पैसा चल रहा है. पैसा कौन नहीं लेता बस माध्यम पता होना चाहिये, बस
डाइरेक्ट कोई नहीं लेता. एडीजी को कैंप कार्यालय पर लिफाफा पहुंचाओ और एसएसपी को
उनके जानकार द्वारा पैसे पहुंचा दो और मनमाफिक पोस्टिंग- तैनाती पा लो.’
अपने किसी सुपरिचित से
चैटिंग में कोतवाल योगी सरकार में जमकर विभाग में पैसे चलने की बात कहते हैं. साथ
ही वे अपने बारे में बताते हैं कि उन्होंने नोएडा से बुलंदशहर आने के लिये 50 हजार
रुपये एडीजी मेरठ रेंज के कैंप आफिस पर तैनात एक बाबू को दिये थे. उसके बाद उनका
बुलंदशहर तबादला हुआ है. चैटिंग करने वाले शख्स ने जब कोतवाल से बुलंदशहर के
एसएसपी के बारे में पूछा तो जबाबी मैसेज में कहा गया कि पैसा कौन नहीं लेता बस
माध्यम पता होना चाहिये. साथ ही कहा गया कि डिबाई कोतवाली का चार्ज लेने के लिये
उन्होंने एसएसपी के किसी ख़ास आदमी को तीन लाख रुपये पहुंचाये हैं.
जाहिर है पुलिस विभाग की
कलई खोलने वाले इस मैसेज के बाद उस पर लीपापोती शुरू होगयी है और किसी न किसी को
बलि का बकरा बनाया जा सकता है पर यह योगी सरकार के हर विभाग में चल रही घूसखोरी और
भ्रष्टाचार का आईना है. कई विभागों में रिश्वतखोरी पांच गुना तक बढ़ गयी है तो
निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी डेढ़ गुना. सडकों को गड्ढामुक्त बनाने के लिये चले
कार्यक्रम के तहत फर्जी कार्य दिखा कर रकमें डकारी गयीं तो गरीब आवास, शौचालय और
मनरेगा के तहत होने वाले कार्यों तक में कमीशनखोरी धड़ल्ले से चल रही है. रोजगार
दिलाने के नाम पर नौजवानों से ठगी करने वाले कई गिरोह काम कर रहे हैं और इन गिरोह
सरगनाओं की भाजपा नेताओं से नजदीकियां जगजाहिर हैं.
डा. गिरीश ने आरोप लगाया कि
हाल ही में उत्तर प्रदेश के जनपद आजमगढ़ और मिर्जापुर में हुयी प्रधानमंत्री की
बेहद खर्चीली रैलियों के लिये सरकारी विभागों से पैसा बसूला गया, यहाँ तक कि गरीब स्वच्छताकर्मियों तक को नहीं बख्शा गया.
प्रधानमंत्री का जुमला ‘न खाऊंगा न खाने दूंगा’ अब बदल कर ‘खाओ और खाने दो’ में
तब्दील होगया है.
भाकपा मोदी और योगी की
सरकार की भ्रष्ट कारगुजारियों का पर्दाफ़ाश करने को 1 से 14 अगस्त के मध्य व्यापक अभियान
चलायेगी, डा. गिरीश ने बताया है.
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
शुक्रवार, 13 जुलाई 2018
at 4:42 pm | 0 comments |
भाकपा ने लिये कई अहम फैसले
उत्तर प्रदेश में भाकपा ने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू की
भाजपा को हराना है प्रमुख लक्ष्य
भाकपा और वामपंथ का प्रतिनिधि लोकसभा में पहुंचाने के लिए
किये जायेंगे ठोस प्रयास
लक्ष्यों को हासिल करने को त्रिस्तरीय रणनीति बनाई
लखनऊ- 13 जुलाई 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा
चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. यहाँ संपन्न भाकपा की राज्य कार्यकारिणी की
बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुयी और आगामी चुनाव में भाकपा के लक्ष्य
निर्धारित किये गये. भाकपा ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनावों में भाजपा को
परास्त करने, भाकपा और वामपंथ का प्रतिनिधित्व लोकसभा में हासिल करने तथा
लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष शक्तियों को सशक्त बनाने की रणनीति पर विचार किया है.
भाकपा कार्यकारिणी बैठक के निष्कर्षों की जानकारी देते हुये राज्य सचिव डा.
गिरीश ने यहाँ जारी एक बयान में बताया कि उपर्युक्त लक्ष्यों को हासिल करने को
भाकपा ने त्रिस्तरीय रणनीति तैयार की है.
पहली- पार्टी जनता के ज्वलंत सवालों पर जन आन्दोलनों को धार देगी, दूसरी-
लोकतांत्रिक खासकर वामपंथी शक्तियों के साथ संबंधों की कड़ियाँ मजबूत करेगी तथा
तीसरी- भाकपा की सांगठनिक मशीनरी को चुस्त- दुरुस्त करेगी और जनाधार को विकसित और
शिक्षित करेगी.
उपर्युक्त उद्देश्यों को हासिल करने को भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने सीमित
संख्या में सीटें लड़ने का निश्चय किया है. बैठक में कई सीटों को चिन्हित कर चुनाव
की तैयारी करने का निर्देश संबन्धित जिला कमेटियों को दे दिया गया है. लड़ी जाने
योग्य अन्य सीटों पर भी शीघ्र निर्णय लिया जायेगा. मुद्दों के आधार पर
धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक शक्तियों से लक्ष्य के अनुरूप साझा समन्वय स्थापित करने
का प्रयास भी किया जायेगा. आगामी 4 और 5 अगस्त को राजधानी दिल्ली में होने जारही
भाकपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में भी लोकसभा और जल्दी ही होने वाले तीन
राज्य विधान सभा चुनावों की तैयारी के बारे में विचार किया जायेगा.
भाकपा राज्य कार्यकारिणी बैठक में निरंतर बढ़ रही महंगाई, विस्फोटक रूप लेरही
बेरोजगारी, न थमने वाली किसानों की आत्महत्याओं, दिन ब दिन उजागर होरहे घोटाले और
भ्रष्टाचार, महिलाओं दलितों अल्पसंख्यकों पर बढ़ रहे जुल्म- सितम तथा अराजकता की
स्थिति तक पहुँच चुके अपराधों के खिलाफ और मोदी/ योगी सरकार की विफलताओं को उजागर करने
को 1 से 14 अगस्त के मध्य 'भाजपा हटाओ संविधान बचाओ' अभियान चलाने का कार्यक्रम
तैयार किया गया है. इस अवधि में प्रदेश भर में सभायें, नुक्कड़ और मौहल्ला सभाएं,
गाँव सभायें तथा प्रदर्शन आदि करने की रूपरेखा तैयार की गयी. इस सवाल पर कुछ
पुस्तिकायें प्रकाशित की गयीं हैं और व्यापक पैमाने पर पर्चे बांटे जायेंगे.
अभियानों की सफलता और जिला कमेटियों के मार्गदर्शन के लिये कार्यकारिणी
सदस्यों को जिम्मेदारी बांटी गयी है. मार्गदर्शक नियुक्त किये गए कार्यकारिणी
सदस्य जिला काउंसिलों में अभियानों की रूपरेखा तैयार करायेंगे, उनके अनुपालन पर
निगरानी रखेंगे और संगठन के विस्तार और सुचारू संचालन में जिलों की मदद करेंगे.
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने को कई क्षेत्रीय कार्यकर्ता बैठकें भी आयोजित की
जायेंगीं. अलीगढ़ और आगरा मंडल के जनपदों की एक संयुक्त बैठक 23 जुलाई को मथुरा में
आयोजित किया जाना तय होचुका है.
पार्टी कार्यकर्ताओं का राजनैतिक स्तर ऊंचा उठाने को कई शिक्षण शिविर आयोजित
करने का निश्चय भी किया गया है.
भाकपा और अन्य वामपंथी दल मिल कर आगामी 20 अगस्त को लखनऊ में समानुपातिक चुनाव
प्रणाली और चुनाव सुधारों के लिये एक राज्य स्तरीय कन्वेंशन भी आयोजित करने जा रहे हैं. कन्वेंशन में वामपंथी दलों के राष्ट्रीय नेतागण
भाग लेंगे. साथ ही अन्य धर्मनिरपेक्ष दलों के नेताओं तथा बुध्दिजीवियों को भी
आमंत्रित किया जासकता है.
डा. गिरीश, राज्य
सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
गुरुवार, 5 जुलाई 2018
at 1:57 pm | 0 comments |
भाजपा ने किसानों को फिर दिखाया ठेंगा: समर्थन मूल्य वायदे से काफी कम- डा. गिरीश
खरीफ फसलों के न्यूनतम
समर्थन मूल्य ( एमएसपी ) में कल की गयी ऐतिहासिक वृध्दि के दाबे की खबर का भांडा
किसानों तक पहुंचते पहुंचते फूट गया. स्वयं प्रधानमंत्री द्वारा किसानों को दिया
भरोसा कि वे ऐतिहासिक फैसला लेने वाले हैं, छलावा ही साबित हुआ.
एमएसपी में वृध्दि की यह
घोषणा भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में किये गए वायदे के पूरे चार साल बाद ऐसे समय
में की गयी है जबकि एक साल के भीतर लोकसभा और कुछ ही माहों में कई महत्वपूर्ण
राज्यों के विधान सभा चुनाव होने वाले हैं. इसलिये इस वृध्दि के राजनैतिक
निहितार्थ भी निकाला जाना स्वाभाविक है.
यह परख की कसौटी पर इसलिये
भी हैं कि भाजपा ने 2014 के लोक सभा चुनावों के समय जारी घोषणापत्र में वायदा किया
था कि किसानों को फसल की लागत से पचास फीसदी अधिक कीमतें मुहैया करायी जायेंगी.
श्री मोदी ने बार बार चुनाव सभाओं में इसे न केवल दोहराया था बल्कि वे आज भी 2022
तक किसानों की आमद दो गुना करने का वायदा कर रहे हैं.
जिस स्वामी नाथन आयोग की
रिपोर्ट के आधार पर विपक्ष पर ताने कसते हुये ये वायदा किया गया था उसका कहना है
कि एमएसपी में इजाफा लागत के मुकाबले 50 फीसदी ज्यादा रिटर्न देने वाला होना
चाहिए. तब उपज का दाम डेढ़ गुना होगा. लेकिन सरकार द्वारा कल की गयी बढोत्तरी गत
एमएसपी पर आधारित है और उसकी तुलना में 4
से लेकर 50 प्रतिशत है न कि लागत से 50 प्रतिशत अधिक रिटर्न पर आधारित.
किसान और किसान संगठन मांग
करते रहे हैं कि स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिश सी- 2 लागत यानीकि फसल की पैदाबार से
संबंधित हर जमा लागत के ऊपर 50 प्रतिशत जोड़ कर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाना
चाहिये, जैसाकि भाजपा ने वायदा किया है. इसका अर्थ है कि मूल लागत (ए-2 ) +
पारिवारिक श्रम ( एफएल ) + जमीन का किराया + ब्याज आदि समूची लागत में आते हैं. पर
सरकार द्वारा घोषित एमएसपी मात्र ए-2 और एफएल पर आधारित है.
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के
किसानों ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुये इन्हीं तथ्यों को अपने ढंग से उजागर किया
है. उनके अनुसार धान की एक एकड़ फसल तैयार करने पर जुताई पर रुपये 4800, रोपाई पर
2800, सिंचाई पर 6000, उर्बरक पर 3000, कीटनाशक पर 1000 और जमीन का किराया 15000
आता है. इसको देखते हुये धान के एमएसपी में कम से कम 600 रूपये प्रति कुंतल का
इजाफा होना चाहिये.
यहाँ एक और मजेदार तथ्य यह
भी है कि दो मुख्य फसलों- धान और गेहूँ को छोड़ कर सभी के समर्थन मूल्य बाजार दर से
कम रहते रहे हैं. घोषित मूल्य न मिल पाना एक और अहम समस्या रही है. किसान अब भी
सशंकित हैं कि उन्हें घोषित मूल्य मिल पायेगा.
वेतनभोगी लोगों की तरह
किसानों की आमद में निरंतरता नहीं होती. उसे लगभग छह माह के अंतराल पर फसल से आमद
होती है. इस दरम्यान उसे परिवार और अगली फसल दोनों पर खर्च करना होता है. पैदाबार
हाथ में आते ही उसे बेचने को मजबूर होना पड़ता है. जमाखोर उसे कम मूल्य पर खरीद
लेते हैं. घाटे का शिकार किसान निरंतर कर्जग्रस्त होता जाता है. सरकार इन चार
सालों में इस समस्या का निदान कर नहीं पायी और किसान आत्महत्याएं करते रहे. ताजा
घोषित मूल्य भी उसे इस संकट से उबार नहीं पायेंगे.
सरकार की अन्य नीतियाँ भी
किसानों की कमर तोड़ने वाली हैं. वह कीमतें नियंत्रित करने के नाम पर कृषि उत्पादों
के निर्यात पर पाबन्दी और आयात खोलती रही है. वैश्वीकरण और उदारीकरण के लाभों से
भी वह वंचित रहा है. कृषि उत्पादों के समुचित विपणन और उन्नत खेती से भी औसत किसान
दूर ही है. ऐसे में देर से और आँखों में धूल झोंकने की गरज से की गयी इस
मूल्यवृध्दि से किसानों के चिरकालिक संकट का निदान दिखाई नहीं देरहा है.
( डा. गिरीश )
बुधवार, 4 जुलाई 2018
at 8:21 pm | 0 comments |
एएमयू प्रकरण- संघ के निशाने पर वे शिक्षा केन्द्र हैं जहां हिंदुत्व का एजेंडा नहीं चल पारहा: भाकपा
लखनऊ- भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने आरोप लगाया कि अलीगढ़
मुस्लिम विश्वविद्यालय और दूसरे अल्पसंख्यक संस्थानों में एससी, एसटी एवं अन्य
पिछड़े वर्गों के आरक्षण के मामले में खुद भाजपा और आरएसएस की नीयत साफ़ नहीं है और इस
मुद्दे के जरिये एक ही ईंट से कई निशाने साधना चाहते हैं.
यहां जारी एक प्रेस बयान
में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि भाजपा और संघ को दलित हितों से कोई
लेना देना नहीं है. यदि उन्हें दलितों/पिछड़ों की शिक्षा की जरा भी फ़िक्र होती तो वे
उनके लिये सरकार के चार साल के कार्यकाल में कई विश्विद्यालय बना कर खड़े कर सकते
थे. लेकिन उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया. रोहित वेमुला प्रकरण, ऊना में दलितों के
साथ की गयी दरिन्दगी, भीमसेना के नेता को जेल में डालने तथा समूचे देश में दलितों,
पिछड़ों पर होरहे अत्याचार की वारदातों से उत्पन्न गुस्से को भटकाने के लिए वे इस
मुद्दे को उठा रहे हैं.
उन्होंने कहाकि भाजपा और
संघ के निशाने पर वे शिक्षा केन्द्र पहले से ही हैं जहां उनका कथित हिन्दुत्व का
एजेंडा नहीं चल पारहा है. सभी जानते हैं कि पहले उन्होंने जेएनयू और आईआईएम को
निशाना बनाया. फिर जिन्ना की तस्वीर के बहाने एएमयू को निशाना बनाया गया और अब
आरक्षण के नाम पर उस पर ताला जड़ने की कोशिश की जारही है. अनुसूचित जाति जनजाति
आयोग में नामांकित संघी उसका अनुदान समाप्त करने की धमकियां देरहे हैं और एएमयू
प्रशासन को नोटिस भी थमाया जारहा है. यह समाज के कमजोर वर्गों को शिक्षा से वंचित
करने की साजिश का हिस्सा है.
भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि
भाजपा और संघ जनता से किये गए वायदों को पूरा करने में पूरी तरह विफल होचुके हैं
और चार साल के सरकार के कार्यकाल की सफलता के नाम पर उसके हाथ पूरी तरह खाली हैं.
अतएव वो समाज के विभाजन के लिये हर हथकंडा अपना रहे है. मदरसों में ड्रेस कोड का
शिगूफा और एएमयू में आरक्षण का मुद्दा ऐसे ही ताजा हथकंडे हैं. भाकपा इन हथकंडों
को कामयाब नहीं होने देगी और सरकार और भाजपा की विफलताओं के पर्दाफ़ाश के लिये
अगस्त माह में व्यापक अभियान चलायेगी.
डा. गिरीश
शुक्रवार, 29 जून 2018
at 4:59 pm | 0 comments |
सूफी संत कबीर की समाधि पर भी राजनैतिक रोटियाँ सेंकने से बाज नहीं आये मोदीजी : भाकपा
लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि जिस संत ने अपना सारा जीवन सत्य की खोज और
असत्य के खंडन में लगा दिया, प्रधानमंत्री जी ने अपने असत्य के प्रसार और सत्य की
हत्या के लिये उसी महापुरुष का जन्म दिवस और उन्हीं के महापरिनिर्वाण स्थल को
चुना.
डा. गिरीश कल महान सूफी सन्त कबीर के परिनिर्वाण स्थल 'मगहर' में प्रधानमंत्री
के कार्यक्रम और उनके अनर्गल प्रलाप पर भाकपा की प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे.
सच तो यह है कि प्रधानमंत्री जी देश भर और खास कर उत्तर प्रदेश में विपक्ष की
संभावित एकता से इस कदर भयभीत हैं कि वे निर्णय नहीं कर पारहे कि कब कहाँ और क्या
बोला जाये. कल कबीरदास जी की सीखों को ग्रहण कर उनकी शिक्षाओं पर बोलने के बजाय
श्री मोदी भाजपा के चुनावी एजेंडे पर ही चिंघाड़ते रहे, विपक्ष पर स्तरहीन
टिप्पणियां करते रहे.
डा. गिरीश ने कहाकि संत कबीर को सच्चा सम्मान तब दिया जा सकता था कि
प्रधानमंत्री जी महान संत की सीखों पर अमल करते हुये अपनी सरकार के चार साल के सच को
उद्घाटित करते. उनकी सरकार के चार साल के कार्यकाल में देश को चहुँतरफा बर्वादी का
सामना करना पड़ा है. अर्थव्यवस्था निरंतर नीचे की ओर जारही है. प्रधानमंत्रीजी के
हर विदेशी दौरे के बाद रुपये की दर डालर के मुकाबले नीचे की ओर खिसक जाती है और वह
इतिहास के उच्चतम स्तर तक जा पहुंची है. पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों ने
भी इतिहास गढ़ दिया है जिससे महंगाई सातवें आसमान पर है. पूंजीपतियों पर बैंकों का
बकाया बढ़ता ही जारहा है. घोटालेबाज जेल जाने के बजाय विदेशों में आराम फरमा रहे
हैं. चार साल में स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा धन 50 फीसदी बढ़ गया है. देश की
सीमाएं असुरक्षित हैं, हमारे जवान मारे जारहे हैं और मोदी सरकार एक अदद सर्जिकल
स्ट्राइक पर ही जश्न मना रही है.
डा. गिरीश ने कहाकि अच्छा होता प्रधानमंत्रीजी नौजवानों से किये गए दो करोड़
रोजगार देने, किसानों की आय दोगुना करने और हर एक के खाते में 15 लाख पहुंचाने के
वायदों को कबीर जी की समाधि पर दोहराते और सभी के स्वास्थ्य और सम्पूर्ण शिक्षा की
राजकीय जिम्मेदारी को दोहराते. जिस उत्तर प्रदेश में मोदीजी भाषण कर रहे थे वहां
की सरकार उद्योगपतियों के हित में 2013 के भूमि अधिग्रहण क़ानून को बदल कर किसानों
की जमीनों पर डाका डालने जारही है. मोदीजी को इस पर सफाई देनी चाहिये. अच्छा होता
वे उत्तर प्रदेश सरकार को नसीहत देते जिसके रहते महिलाओं की इज्जत और जान तार तार
होरही है, क़ानून व्यवस्था पंचर हुयी पड़ी है. दलितों अल्पसंख्यकों और सर्वसमाज के
विपन्न तबकों पर भारी अत्याचार होरहे हैं. इलाज के अभाव में गरीबों की अकाल मौतें
होरही हैं. गरीब न पढाई कर पारहे हैं न रोजगार हासिल कर पारहे हैं. शासन प्रशासन
में भ्रष्टाचार पांच गुना बढ़ गया है.
जहाँ तक कबीर अकादमी के शिलान्यास की बात है, चुनावी साल में उसकी याद आने को
राजनैतिक उद्देश्य से किया कदम ही माना जायेगा. आचार संहिता लगने तक ऐसे कई
शिलान्यास देखने को मिलेंगे. इसका शिलान्यास यदि 2014 में ही कर दिया गया होता तो
अब तक उसका निर्माण पूरा होचुका होता और लोगों को उस पर भरोसा जमता.
डा गिरीश ने कहाकि उत्तर प्रदेश में अब भाजपा की नौटंकी दोबारा चलने वाली नहीं
है. भाकपा भी भाजपा कुशासन को बेनकाब करने को व्यापक रणनीति बनाने जारही है. इस
हेतु 8 जुलाई को भाकपा की उत्तर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी की बैठक लखनऊ में आहूत
की गयी है.
डा. गिरीश
शनिवार, 23 जून 2018
at 2:23 pm | 0 comments |
दिलों के घाव ले के भी चले चलो
चले चलो दिलों में घाव ले के भी चले चलो
चलो लहूलुहान पांव ले के भी चले चलो
चलो कि आज साथ-साथ चलने की जरूरतें
चलो कि ख़त्म हो न जाएं जिन्दगी की हसरतें
जमीन, ख्वाब, जिंदगी, यकीन सबको बांटकर
वो चाहते हैं बेबसी में आदमी झुकाए सर
वो चाहते हैं जिंदगी हो रोशनी से बेखबर
वो एक-एक करके अब जला रहे हैं हर शहर
जले हुए घरो के ख्वाब ले के भी चले चलो
चले चलो ...
वो चाहते हैं बांटना दिलों के सारे बलबले
वो चाहते हैं बांटना ये जिंदगी के काफिले
वो चाहते हैं ख़त्म हों उम्मीद के ये सिलसिले
वो चाहते हैं गिर सकें न लूट के ये सब किले
सवाल ही हैं अब जवाब ले के भी चले चलो
चले चलो ....
वो चाहते हैं जातियों की बोलियों की फूट हो
वो चाहते हैं धर्म को तबाहियों की छूट हो
वो चाहते हैं जिंदगी ये हो फ़रेब, झूठ हो
वो चाहते हैं जिस तरह भी हो मगर ये लूट हो
सिरों में जो बची है छांव ले के भी चले चलो
चले चलो दिलों में घाव ले के भी चले चलो
- ब्रज मोहन
चलो लहूलुहान पांव ले के भी चले चलो
चलो कि आज साथ-साथ चलने की जरूरतें
चलो कि ख़त्म हो न जाएं जिन्दगी की हसरतें
जमीन, ख्वाब, जिंदगी, यकीन सबको बांटकर
वो चाहते हैं बेबसी में आदमी झुकाए सर
वो चाहते हैं जिंदगी हो रोशनी से बेखबर
वो एक-एक करके अब जला रहे हैं हर शहर
जले हुए घरो के ख्वाब ले के भी चले चलो
चले चलो ...
वो चाहते हैं बांटना दिलों के सारे बलबले
वो चाहते हैं बांटना ये जिंदगी के काफिले
वो चाहते हैं ख़त्म हों उम्मीद के ये सिलसिले
वो चाहते हैं गिर सकें न लूट के ये सब किले
सवाल ही हैं अब जवाब ले के भी चले चलो
चले चलो ....
वो चाहते हैं जातियों की बोलियों की फूट हो
वो चाहते हैं धर्म को तबाहियों की छूट हो
वो चाहते हैं जिंदगी ये हो फ़रेब, झूठ हो
वो चाहते हैं जिस तरह भी हो मगर ये लूट हो
सिरों में जो बची है छांव ले के भी चले चलो
चले चलो दिलों में घाव ले के भी चले चलो
- ब्रज मोहन
बुधवार, 20 जून 2018
at 6:51 pm | 0 comments |
कमरतोड़ महंगाई के खिलाफ भाकपा ने हल्ला बोला: राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के तहत समूचे उत्तर प्रदेश में प्रदर्शन किये गये
लखनऊ- भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के आह्वान पर केन्द्र और राज्य सरकार
की नीतियों के कारण थोक और खुदरा बाजार में निरन्तर बढ़ रही महंगाई, पेट्रोल डीजल
और रसोई गैस की कीमतों में ऐतिहासिक वृध्दि और राशन प्रणाली की पंगुता के खिलाफ
समूचे उत्तर प्रद्रेश में धरने प्रदर्शन आयोजित किये गए.
प्रदर्शनों के बाद
राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन स्थानीय प्रशासन को सौंपे गए. इन
ज्ञापनों में बढ़ती महंगाई के लिये केन्द्र और राज्य सरकारों की प्रतिगामी और
कारपोरेटपरस्त नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुये उसे फ़ौरन नीचे लाने को त्वरित कदम
उठाने की मांग की गयी. साथ ही डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस पर से उत्पाद कर हठाने, इन
पर से राज्यों के कर समाप्त करने तथा राशन प्रणाली को व्यापक एवं भ्रष्टाचार से
मुक्त बनाने की मांग की गयी.
ज्ञापनों में भ्रष्टाचार और
बेरोजगारी को काबू में लाने, स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं को आम आदमी के लिये सुलभ
बनाने, किसानों के हालात सुधारे जाने, मनरेगा को पुनर्व्यवस्थित करने, कानून
व्यवस्था को पटरी पर लाने, आवारा पशुओं द्वारा किसान की फसल और जनहानि रोके जाने,
दलितों महिलाओं, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बन्द किये जाने तथा धर्म जाति के नाम पर
दंगे और अराजकता फ़ैलाने पर रोक लगाने की मांग की गयी.
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश
ने दाबा किया कि अब तक राज्य केन्द्र को प्राप्त सूचनाओं के अनुसार प्रदेश भर में
दस हजार से अधिक जनता भाकपा के झंडे तले सडकों पर उतरी है. कानपुर और मऊ में क्रमशः
भाकपा के राज्य सहसचिव अरविन्दराज स्वरूप और इम्तियाज अहमद के नेतृत्व में
प्रदर्शन किया गया.
राज्य केन्द्र को अब तक गाज़ियाबाद,
मेरठ, बडौत (बागपत), मुज़फ्फर नगर, आगरा, मथुरा, हाथरस, अलीगढ, मैनपुरी, इलाहाबाद, कायमगंज
(फरुखाबाद), कानपुर देहात, उरई, चित्रकूट, लखनऊ, खागा (फतेहपुर), हरदोई,
शाहजहांपुर, बरेली, गोंडा, आजमगढ़, पिंडरा व राजापुर (वाराणसी), गाजीपुर, जौनपुर, राबर्ट्सगंज,
भदोही, कुशीनगर, बलरामपुर, बदायूं तथा बांदा आदि जनपदों से सफल आयोजनों की खबरें
प्राप्त होचुकी हैं.
डा. गिरीश ने कहाकि आन्दोलन
के अगले चरण में 1 से 14 अगस्त तक मोदी सरकार द्वारा गत चार सालों में जनता से की
गयी वायदाखिलाफी और हर मोर्चे पर सरकार की असफलता का पर्दाफाश करने को भाकपा
द्वारा बड़े पैमाने पर सभायें, नुक्कड़ सभाएँ और गोष्ठियां आयोजित की जायेंगी.
डा. गिरीश
मंगलवार, 19 जून 2018
at 5:30 pm | 0 comments |
राजनैतिक उद्देश्यों से हिंसा भड़का रहे हैं भाजपा और संघ परिवार : भाकपा ने पिलखुआ काण्ड की कड़े शब्दों में भर्त्सना की
लखनऊ- भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहाकि जनपद हापुड़ के पिलुखुआ थानान्तर्गत
बझेडा खुर्द गांव में गोहत्या के नाम पर की गयी अल्पसंख्यक व्यक्ति की हत्या
आरएसएस और भाजपा द्वारा बनाये गये विषाक्त वातावरण के कारण हुयी है. भाकपा इस
हत्या और हमले की कड़े शब्दों में निन्दा करती है.
यहां जारी एक प्रेस बयान
में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि जब मुसलमानों द्वारा गाय पालने और
उसके लाने लेजाने पर कोई कानूनी पाबन्दी नहीं है तो किसी भी मुस्लिम को गौहत्या किये
ही बिना कैसे हत्यारा बताया जासकता है और उसकी कैसे हत्या की जासकती है. भीड़ को
यदि यह शक भी है कि लेजायी जारही गाय की हत्या की जासकती है तो वह इसकी सूचना
पुलिस को दे सकती है, उसे क़ानून हाथ में लेने का कोई अधिकार नहीं है.
लेकिन राजनैतिक उद्देश्यों
से भाजपा और समूचे संघ गिरोह ने ऐसा वातावरण तैयार कर दिया है कि हड्डियों के
टुकड़ों के मिलने पर अथवा पालने या व्यापार के लिये गायों के लेजाने पर संघ गिरोह
के लोग अफवाह फैला कर भोले भाले लोगों को भी अपने जाल में फंसा लेते हैं. इसी तरह
दादरी के बिसाहडा में अख़लाक़ की हत्या की गयी और अब ऐसा ही काण्ड बझेडा खुर्द में
कर डाला गया.
भाकपा का आरोप है कि
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2014 के लोक सभा चुनाव से पहले भाजपा ने गौहत्या, लव
जेहाद, धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दे खड़े कर और बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे करा
कर अपनी जड़ें मजबूत की थीं और अब वह कैराना और नूरपुर में करारी हार के बाद फिर
उसी राह पर लौट रही है. भाजपा और संघ की यह काली करतूतें केन्द्र की मोदी सरकार और
प्रदेश की योगी सरकार के संरक्षण में अंजाम दी जारही हैं.
भाकपा महामहिम राष्ट्रपति
और राज्यपाल महोदय से मांग करती है कि वे संविधान और क़ानून की धज्जियाँ बिखेरने
वाली इन घ्रणित कार्यवाहियों का संज्ञान लें और वांछित कार्यवाही करें. भाकपा ने
पुलिस प्रशासन से भी मांग की है कि वह हत्या और हमले के दोषियों और उकसावे की
कार्यवाही करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करे. भाकपा राज्य सरकार से
मांग करती है कि मृतक परिवार को रूपये 20 लाख और घायल को रूपये 5 लाख फ़ौरन उपलब्ध
कराये. क्षेत्र में शान्ति बनाये रखने को हर संभव कदम उठाया जाये.
डा. गिरीश
सोमवार, 18 जून 2018
at 1:16 pm | 0 comments |
CPI demanded postponment of PCS entrance examination in U.P.
पीसीएस परीक्षाओं की
तिथि आगे बढ़ाने को हस्तक्षेप करें राज्यपाल: भाकपा
लखनऊ- 18 जून भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने जून माह में प्रस्तावित उत्तर प्रदेश पीसीएस
परीक्षा को निश्चित तिथि से कम से कम एक माह आगे बढाने की मांग की है.
यहां जारी एक प्रेस बयान
में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि अभी हाल में ही सिविल सेवा परीक्षा
होकर चुकी है. अधिकतर अभ्यर्थी उस परीक्षा में शामिल हुये थे. उन्हें दूसरी
परीक्षा जो कि बिल्कुल नये पैटर्न से होने जारही है, की तैयारी के लिए और अधिक समय
चाहते हैं. अभ्यर्थी समय बढवाने के लिये केन्द्र और राज्य सरकार का हर दरवाजा
खटखटा चुके हैं लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गयी. सरकार के इस तानाशाहीपूर्ण और एकतरफा
रवैय्ये से छात्रों में नाराजगी होना स्वाभाविक है. भाकपा भी इस जिद को अनुचित
मानती है.
पीसीएस परीक्षा की तैयारी
में जुटे अभ्यर्थियों के अनुसार उनके और मुख्यमंत्री के बीच जुलाई में परीक्षायें
कराने पर सहमति बन गयी थी लेकिन बाद में सरकार मुकर गयी.
भाकपा राज्य सचिव ने
महामहिम राज्यपाल से अनुरोध किया है कि वे भविष्य के इन प्रशासनिक अधिकारियों के
हितों को देखते हुये हस्तक्षेप करें और परीक्षाओं की तिथि आगे बढ़ाने के लिये राज्य
सरकार को निर्देशित करें.
डा. गिरीश
रविवार, 10 जून 2018
at 6:26 pm | 0 comments |
Agitation Prograam of CPi, U. P.
जनविरोधी और लोकतंत्रविरोधी भाजपा सरकार के खिलाफ भाकपा
अभियान चलायेगी
20 जून को महंगाई विरोधी प्रदर्शनों से शुरूआत होगी
लखनऊ- 10 जून 2018, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउंसिल की दो दिवसीय
बैठक आज यहाँ संपन्न हुयी. बैठक की अध्यक्षता अमेरिका सिंह यादव ने की. बैठक में
पार्टी के दो केन्द्रीय सचिव का. अतुल कुमार अनजान एवं का. शमीम फैजी दोनों दिन
उपस्थित रहे. उन्होंने राष्ट्रीय राजनैतिक परिद्रश्य पर विस्तार से चर्चा की.
राज्य सचिव डा. गिरीश ने राजनैतिक एवं सांगठनिक रिपोर्ट प्रस्तुत की.
कुल मिला कर बैठक में हुयी चर्चा का निष्कर्ष है कि भाजपा की केन्द्र और उत्तर
प्रदेश की सरकार जनता से किये अपने वायदों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही
हैं. आज ये सरकारें जनता के लिये असहनीय बोझ बन गयी हैं और जनता इनसे फ़ौरन निजात
पाना चाहती है. हाल में देश भर में हुए उपचुनावों के नतीजों से भी यह जाहिर होगया
है. अतएव भाकपा ने जनमुक्ति के लिये व्यापक कार्य योजना तैयार की है. जिनमें
स्वतन्त्र अभियानों के साथ धर्मनिरपेक्ष, लोकतान्त्रिक और वामपंथी शक्तियों का एक
प्लेटफार्म का निर्माण करना भी शामिल है. आगामी दिनों में भाकपा कई बुनियादी सवालों
को लेकर सडकों पर उतरेगी.
भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने यहाँ जारी प्रेस बयान में बताया कि आगामी 20
जून को आसमान छूती महंगाई के खिलाफ जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किये जायेंगे और पेट्रोल
डीजल पर से उत्पाद कर हठाने और उन्हें नीचे
लाने की मांग की जायेगी. मोदी सरकार की विफलताओं और उत्तर प्रदेश सरकार की
जनविरोधी नीतियों को उजागर करने को 1 अगस्त से 14 अगस्त के बीच व्यापक अभियान
चलाया जायेगा. 'देश बचाओ संविधान बचाओ' 'जनविरोधी भाजपा सरकार को सता से बाहर करो'
नारे के साथ देश के कोने कोनों से जत्थे निकालने की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की
प्रस्तावित योजना को पूर्ण समर्थन प्रदान किया जायेगा. सांगठनिक कार्यवाही के तहत
कोल्लम में हाल में ही संपन्न भाकपा के राष्ट्रीय महाधिवेशन के फैसलों को जिलों से
शाखाओं तक पहुँचाने को विस्तरित कार्यकर्ता बैठकें आयोजित की जायेंगीं.
भाकपा राज्य काउंसिल ने उत्तर प्रदेश में अपनी समस्त जिला इकाइयों का आह्वान
किया है कि वे इन अभियानों की तैयारियों में मुस्तैदी से जुट जायें और उन्हें
अधिकतम स्तर तक कामयाब बनायें.
राज्य काउंसिल ने एक 25 सदस्यीय कार्यकारिणी का चुनाव भी किया जिसमें राज्य
सचिव डा. गिरीश, सहसचिव का. अर्विन्दराज स्वरूप एवं का. इम्तियाज़ अहमद के अलाबा 22
अन्य शामिल हैं. का. प्रदीप तिवारी को पुनः कोषाध्यक्ष चुना गया है.
डा. गिरीश, राज्य
सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
गुरुवार, 31 मई 2018
at 2:08 pm | 0 comments |
CPI, U.P. on Results of Kairana and Nuurpur elections.
कैराना और नूरपुर
में भाजपा की हार पर भाकपा ने मतदाताओं को दी बधाई
कारपोरेटों को
मालामाल और आमजनों को कंगाल बनाने का नतीजा हैं यह परिणाम
लखनऊ- 31 मई 2018, भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा और नूरपुर
विधान सभा सीटों पर भाजपा की करारी हार को भाजपा द्वारा चलाई जारही आर्थिक
नवउदारवाद की नीतियों- जिनके चलते बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, किसानों की
तंगहाली तथा गरीबों और मजदूरों की बदहाली बड़ी है, की पराजय बताया है. यह उत्तर
प्रदेश सरकार द्वारा दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और अन्य कमजोर वर्गों पर ढाये
जारहे जुल्मों- अत्याचारों और बदतर क़ानून व्यवस्था और किसानों- कामगारों की
उपेक्षा को लेकर भाजपा को आम मतदाताओं का कड़ा जबाव है. यह कारपोरेटों को मालामाल
और आम आदमी को कंगाल बनाने का नतीजा है.
गोरखपुर और फूलपुर की
वीआईपी लोकसभा सीटों पर हार के बाद हुयी इस हार ने यह साबित कर दिया है कि गाय,
गोबर, गंगा, दंगा, जिन्ना और टीपू जैसे सवालों के जरिये विभाजन पैदा करने और वोट
हासिल करने की नीति को अब आम जनता भलीभांति समझ चुकी है. ये चुनाव नतीजे इस बात का
सबूत हैं कि जनविरोधी नीतियों और झूठे वायदों के बल पर कोई दल लंबे समय तक जनता का
विश्वास बनाए नहीं रख सकता.
यह हार इसलिए भी महत्वपूर्ण
है कि यहां सारी राजनैतिक मर्यादाएं और नैतिकतायें लांघ कर चुनाव प्रचार बंद होने
और मतदान से पहले दोनों चुनाव क्षेत्रों के अति सन्निकट प्रधानमंत्री ने 27 मई को लोकार्पण
की आड़ में रोडशो और रैली कर विपक्ष पर तीखे हमले बोले थे और कई लुभावनी घोषणायें
की थीं. भाकपा और राष्ट्रीय लोकदल ने तो इस अवैध रैली को निरस्त करने की मांग
निर्वाचन आयोग से की थी. मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, दर्जनों केन्द्रीय और प्रदेश
के मंत्रियों तथा भाजपा के शीर्षस्थ नेताओं ने वहां जमकर चुनाव अभियान चलाया था. भाजपा
ने दोनों ही क्षेत्रों में सहानुभूति भुनाने को मृत प्रतिनिधियों की बेटी और पत्नी
को चुनाव मैदान में उतारा था और ईवीएम में गडबड़ियाँ हुयीं थीं सो अलग.
ये परिणाम मोदी और योगी की
लोकप्रियता की कलई खोलने वाले हैं जिनकी दुहाई भाजपाई दिन रात दिया करती है.
भाकपा और वामपंथ ने केन्द्र
और उत्तर प्रदेश सरकार की जनविरोधी, सांप्रदायिक और फासीवादी नीतियों को शिकस्त
देने और राजनैतिक अपरिहार्यता को ध्यान में रखते हुये कैराना, नूरपुर और इससे पहले
गोरखपुर तथा फूलपुर में गैर- भाजपा दलों के प्रत्याशियों को समर्थन दिया था. संयुक्त
वामपंथ के इस निर्णय से भी भाजपा की हार सुनिश्चित हुयी है. हमें अपने इस निर्णय
पर प्रशन्नता है. भाकपा और वामपंथ इन क्षेत्रों के मतदाताओं को इस सूझबूझपूर्ण
निर्णय के लिये बधाई देते हैं.
देश के अन्य भागों में हुये
उपचुनावों के नतीजे भी अधिकतर भाजपा के विपक्ष में जारहे हैं. ये नतीजे 2019 की
तस्वीर साफ़ करने को पर्याप्त हैं.
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
गुरुवार, 24 मई 2018
at 4:58 pm | 0 comments |
CPI furtherdemands cancelation of Modi's programm on 27th in Baghpat
पीएम मोदी के
कार्यक्रम पर रोक न लगाने का निर्णय अविवेकी एवं पक्षपातपूर्ण
भाकपा ने निर्वाचन
आयोग से पुनर्विचार करने की मांग की
लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने पीएम मोदी की 27 मई की रैली और
लोकार्पण कार्यक्रम को बेहद लचर तर्कों को आधार बना कर प्रतिबंधित न करने के फैसले
को अविवेकपूर्ण और पक्षपातपूर्ण बताया है. भाकपा ने लोकहित और लोकतंत्र के हित में
अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान
में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि निर्वाचन आयोग ने उन परिस्थितियों पर
गौर नहीं किया जिसके आधार पर 27 मई को प्रस्तावित रैली एवं लोकार्पण कार्यक्रम को
प्रतिबंधित करने की मांग की गयी है.
सभी जानते हैं कि गत लोकसभा
चुनावों के दरम्यान प्रत्येक मतदान के दिन मोदी ने कहीं न कहीं रोडशो अथवा रैलियाँ
आयोजित की थीं. एक तरफ क्षेत्र विशेष में मतदान चल रहा होता था तो दूसरी तरफ भाजपा
के क्रीत टीवी चैनल उसका लाइव प्रसारण कर रहे होते थे. इससे मतदाताओं का प्रभावित
होना स्वाभाविक था. बाद में भाजपा के पक्ष में आये आश्चर्यजनक चुनाव नतीजों से भी
यह साबित होगया था.
डा. गिरीश ने आरोप लगाया कि
बाद में कई विधानसभा चुनावों और उपचुनावों में भी भाजपा ने इस हथकंडे का प्रयोग
किया. गुजरात विधान सभा के चुनावों का प्रचार थमने के बाद भी श्री मोदी ने वहां “यो
यो फेरी” का उद्घाटन किया था यह भी सभी के संज्ञान में है.
उन्होंने निर्वाचन आयोग से
सवाल कियाकि क्या निर्वाचन आयोग ने प्रधानमंत्री सचिवालय से यह पूछा कि जब
सर्वोच्च न्यायालय ने ईस्टर्न पेरिफेरल हाइवे के लोकार्पण के लिये 31 मई तक की समय
सीमा निर्धारित की है तो क्यों नहीं यह कार्यक्रम 28 मई के बाद रखा गया? क्यों
जानबूझ कर यह कार्यक्रम कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा के निर्वाचन के समय
चुनाव प्रचार बन्द होजाने और मतदान से पहले रखा गया?
भाकपा ने यह भी प्रश्न किया
है कि क्या निर्वाचन आयोग इस बात की गारंटी करेगा कि श्री मोदी के इन कार्यक्रमों
में इन दोनों चुनाव क्षेत्रों के मतदाताओं को नहीं लाया जायेगा? क्या उनके लाने
लेजाने और खाने- पीने पर धन खर्च नहीं किया जाएगा? क्या इन कार्यक्रमों का टीवी
चैनलों को प्रभावित कर लाइव प्रसारण अथवा बार बार समाचार प्रसारण नहीं कराया
जायेगा और वह इन दोनों मतदेय क्षेत्रों में प्रसारित नहीं होगा? क्या मतदान वाले दिन
दोनों चुनाव क्षेत्रों में बंटने वाले समाचार पत्र मोदीजी के भाषणों और कथित
घोषणाओं से भरे नहीं होंगे? और क्या इस सबसे दोनों क्षेत्रों के मतदाता प्रभावित
नहीं होंगे?
इन सारी स्थितियों-
परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार कर निर्णय लेने के बजाय शामली के जिलाधिकारी की
इस रिपोर्ट कि आचार संहिता तो शामली में लगी है, निर्वाचन आयोग ने यह सुविधाजनक
निर्णय लेलिया. कौन नहीं जानता कि उपचुनावों में आचार संहिता संबंधित जिले में ही
लगती है. निर्वाचन आयोग को शासक दल की मंशा और दोनों कार्यक्रमों से पैदा होने
वाली परिस्थितियों का परीक्षण भी करना चाहिये. भाकपा ने निर्वाचन आयोग से अपने
उपर्युक्त फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है.
ज्ञातव्य होकि गत दिन भाकपा
ने एक बयान जारी कर मोदी द्वारा किये जाने वाले लोकार्पण कार्यक्रम और चुनाव
क्षेत्रों के समीपस्थ जिले में प्रस्तावित रैली को रद्द करने की मांग की थी और फिर
राष्ट्रीय लोकदल ने निर्वाचन आयोग से लिखित अपील की थी.
डा. गिरीश
मंगलवार, 22 मई 2018
at 1:41 pm | 0 comments |
CPI demands postponment of BJP Railly in Bahapat, U.P.
कैराना लोकसभा और
नूरपुर विधान सभा क्षेत्रों का प्रचार थमने और मतदान से पहले होने जारही मोदी की
बागपत रैली और लोकार्पण कार्यक्रम पर रोक लगाये निर्वाचन आयोग
भाकपा ने की मांग
लखनऊ- 22 मई, 2018—भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने केन्द्रीय निर्वाचन आयोग से
मांग की है कि वह उत्तर प्रदेश की कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीटों पर
प्रचार थमने के बाद से मतदान संपन्न होने के दरम्यान उत्तर प्रदेश में
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रस्तावित लोकार्पण कार्यक्रमों और आम सभाओं
को प्रतिबंधित करें.
ज्ञातव्य हो कि उपर्युक्त
दोनों सीटों पर 26 मई को सायंकाल प्रचार कार्य थम जायेगा और 28 मई की शाम पांच बजे
तक मतदान होगा.
भाजपा और प्रधानमंत्री ने इस
प्रचारबन्दी और मतदान की अवधि में बड़ी चतुराई से 27 मई को समीपस्थ जिले बागपत के
मवीकलां में ईस्टर्न पेरिफेरल हाईवे का उद्घाटन करने और खेकडा में आमसभा करने का
कार्यक्रम निर्धारित कर लिया है. इस कार्यक्रम में अपने खर्च पर और बड़े पैमाने पर भाजपा दोनों चुनाव क्षेत्रों से जनता और
मतदाताओं को लेजाने में जुटी है. साथ ही समूची कार्यवाही और लोकलुभावन घोषणाओं को
टीवी चैनलों एवं अन्य समाचार माध्यमों के जरिये फैला कर मतदाताओं को प्रभावित किया
जायेगा.
गत लोक सभा चुनावों और कई
विधानसभा चुनावों के दरम्यान भी भाजपा और श्री मोदी ने किसी एरिया विशेष में मतदान
के दिन किसी अन्य क्षेत्र में रैली, आमसभा अथवा रोडशो आयोजित कर संचार माध्यमों के
जरिये मतदाताओं को प्रभावित करने का षडयंत्र किया था. यही कहानी वे 27 मई को दोहराने
जारहे हैं. जब माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने 31 मई तक इस हाईवे के लोकार्पण की छूट
देरखी है तो यह कार्यक्रम 28 मई के बाद की किसी तिथि पर आयोजित किया जासकता है. माननीय
सर्वोच्च न्यायालय को भी संज्ञान लेना चाहिये कि उनके आदेश की आड़ में राजनैतिक खेल
तो नहीं खेला जारहा है.
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश
ने भाजपा की इस कार्यवाही को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन और नियम विरुध्द बताते
हुये इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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