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मंगलवार, 2 जून 2020
at 7:08 pm | 0 comments |
सरकार की कोविड-19 नीति का विशेषज्ञों द्वारा पर्दाफाश: लमहों ने खता की थी, सदियों ने सजा पायी
“यदि सरकार ने कोरोना से जंग के लिये नीतियां तय
करने से पहले महामारीविदों और अन्य विशेषज्ञों से राय ली होती तो स्थिति इतनी नहीं
बिगड़ती। सरकार को सलाह देने वाले लोगों में अनुभव की कमी थी, जिस कारण यह स्थिति हुयी। उदाहरण के तौर पर यदि तालाबंदी से पहले
श्रमिकों को घर वापस जाने की अनुमति दी जाती तो पूरी योजना के साथ उन्हें भेजा जा
सकता था। लेकिन अब देश के हर कोने में जिस तरह मजदूर पहुंच रहे हैं, इससे गांव, कस्बों और शहरों में कोरोना के मामले बढ़
रहे हैं।“
यह बेवाक कथन किसी विपक्ष के नेता का नहीं अपितु
एम्स के चिकित्सकों और आईसीएमआर के विशेषज्ञों के एक 16 सदस्यीय दल द्वारा
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को कोविड-19 महामारी के संबंध में सौंपी रिपोर्ट
का हिस्सा है। स्पष्टतौर पर इस विस्तारित रिपोर्ट में लाकडाउन से पहले सरकार की
तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाये गये हैं।
विशेषज्ञ कमेटी के ये निष्कर्ष कोविड-19 से निपटने
में केन्द्र सरकार की समूची रणनीति के खोखलेपन को उजागर कर देते हैं। तालाबंदी और
उसके प्रारंभ में मोदी जी जब अपने प्रबुध्द अनुयायियों से थाली और ताली बजवा रहे
थे, मोमबत्ती और पटाखे जलवा रहे थे, तब वामपंथियों और
कुछ अन्य ने यह बता उठायी थी। किन्तु तब मीडिया, आईटी सेल और
सोशल मीडिया द्वारा उन्हें ट्रोल कर इस तथ्य को दबा दिया गया। मोदी सरकार की यह
बड़ी भूल आज आम जन और श्रमिक वर्ग के लिये महाविपत्ति बन कर उभरी है।
इतना ही नहीं इन विशेषज्ञों ने सरकार को कोविड-19
संक्रमण के सामुदायिक प्रसार शुरू होने के प्रति भी आगाह किया है। उनका दावा है की
देश के कई बड़े हिस्सों खासकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यह पूरी तरह स्थापित हो
चुका है। लेकिन अपनी नाक बचाने में जुटी सरकार दावे कर रही है कि देश सामुदायिक
प्रसार से अभी भी दूर है।
सच तो यह है कि दुनियां में कोरोना से अधिक
प्रभावित देशों की सूची में भारत सातवें पायदान पर पहुंच चुका है। अतएव
प्रधानमंत्री को सौंपी गयी विशेषज्ञ रिपोर्ट स्पष्टतः कहती है कि देश में कोरोना
महामारी के मौजूदा स्तर को देखते हुये इस बात की उम्मीद अवास्तविक है कि इसे पूरी
तरह समाप्त किया जा सकता है। संक्रमण का सामुदायिक संचरण देश के एक बड़े हिस्से में
पहले ही शुरू हो चुका है।
विशेषज्ञों ने कहा, देशव्यापी
कड़े लाकडाउन से अपेक्षा थी कि योजनाबध्द तरीके से एक खास अवधि में बीमारी पर काबू
पाया जाये और मामलों को बढ़ने से रोका जाये। साथ ही ऐसा प्रबन्धन किया जाये कि आम
स्वास्थ्य सेवा प्रणाली भी प्रभावित न हो। पर ऐसा हो न सका। अपितु लाकडाउन के चार चरणों में अर्थव्यवस्था और
आम जनजीवन को पर्याप्त हानि और असाधारण असुविधा हुयी।
अन्य कई सनसनीखेज बातों के अतिरिक्त विशेषज्ञ समिति
ने आरोप लगाया है कि महामारी से संबंधित तथ्यों
को विशेषज्ञों और जनता के साथ खुले और पारदर्शी तरीके से अभी तक साझा नहीं किया गया।
समिति ने इसे जल्द से जल्द साझा किये जाने की अपेक्षा की है। समिति ने महामारी के संबंध
में 11 सिफ़ारिशें भी जारी की हैं।
विशेषज्ञों की इस रिपोर्ट के खुलासे से सरकार में हड़कंप
मच गया है। जनता को साधने के लिये स्थानीय जन प्रतिनिधियों एवं पार्टी पदाधिकारियों
को जनता के बीच जाकर सरकार की इस नाकामी पर पर्दा डालने के कोशिश की जिम्मेदारी दी
गयी है। समूची सरकार, भाजपा, संघ परिवार
और पार्टी कार्यकर्ता जो महामारी की कमर तोड़ने के लिये मोदीजी के करिश्मे और लाकडाउन
को एकमात्र उपाय बता रहे थे, आज पूरी तरह पलटी मार गये हैं। अब
सारी ज़िम्मेदारी जनता पर डाल दी गयी है।
आज कहा जा रहा है कि लाकडाउन कोरोना वायरस महामारी का
कोई समाधान नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिये मोदीजी ने लाकडाउन खत्म
करके अनलाक-1 लगाया है। जनता खुद सावधानी बरते और महामारी को हराये, आदि आदि। इसी को कहते हैं चित्त भी मेरी और पट्ट भी मेरी।
सरकार अपने साधनों और प्रचार तंत्र के बल पर भले ही
अपनी बिगड़ी छवि को सुधार ले पर देश के आर्थिक ढांचे को जो क्षति पहुंची है उसकी जल्दी
भरपाई संभव नहीं। और लाकडाउन तथा घर वापसी में देश के अस्सी करोड़ मेहनतकशों और सामान्य
जनों ने जो असहनीय और अपार पीड़ा झेली है उसका निदान किसी मरहम से संभव नहीं। शासकों
कि एक चूक ने सब कुछ तहस- नहस और अस्त- व्यस्त करके रख दिया है। ठीक ही कहा है किसी
ने- ‘लमहों ने खता की थी, सदियों ने सजा पायी।‘
प्रस्तुति-
डा॰ गिरीश
सोमवार, 1 जून 2020
at 7:29 pm | 0 comments |
निजीकरण के विरूध्द भाकपा की एकजुटता
भाकपा और
सहयोगी संगठनों ने उत्तर प्रदेश में बिजलीकर्मियों के आंदोलन का जमकर समर्थन किया
“बिजली एक
सामाजिक जरूरत है, जिसे पाने का अधिकार हर भारतीय को है”:
डा॰ अंबेडकर
आने वाले
दिनों में सभी को और तीव्र संघर्षों के लिये तैयार रहना होगा:
डा॰ गिरीश
लखनऊ- 01 जून 2020, ऊर्जा क्षेत्र
के निजीकरण के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये विद्युत संशोधन अधिनियम 2020
के खिलाफ विद्युतकर्मियों और अभियन्ताओं के प्रतिरोध आंदोलन को उत्तर प्रदेश में भारतीय
कम्युनिस्ट पार्टी और उसके सहयोगी संगठनों का आज जम कर समर्थन मिला।
भाकपा के राज्य सचिव मण्डल ने इस ज्वलंत जन- प्रश्न
पर सत्ता द्वारा थोपे गये सन्नाटे और भय के आडंबर को तोड़ने के लिये विद्युतकर्मियों/
अभियन्ताओं, भाकपा एवं सहयोगी संगठनों के कार्यकर्ताओं एवं अन्य
सभी आंदोलनकारियों को क्रान्तिकारी अभिनंदन पेश किया है।
ज्ञातव्य हो कि भाकपा के उत्तर प्रदेश राज्य नेत्रत्व
ने 30 मई को ही इस आंदोलन को समर्थन प्रदान करने का आह्वान किया था।
भाकपा राज्य काउंसिल के आह्वान और निर्देश पर आज पार्टी
की अधिकतर जिला इकाइयों ने स्थानीय विद्युत प्रतिष्ठानों पर सामूहिक रूप से पहुंच कर
समर्थन का पत्र संघर्षरत अभियंताओं- कर्मचारियों को सौंपा। कई जगह स्थानीय अधिकारियों
के माध्यम से ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति अथवा प्रधानमंत्री जी को प्रेषित किये गये।
भाकपा ही नहीं कई जगह किसान सभा, एटक, नौजवान सभा, विद्युत पेंशनर्स
एसोसियेशन एवं केंद्रीय श्रम संगठनों की संयुक्त कमेटियों ने भी समर्थन में बैठकें
कीं, धरने दिये और ज्ञापन अथवा एकजुटता पत्र सौंपे। वे सभी बधाई
के पात्र हैं।
इन सब गतिविधियों की खबरें सोशल मीडिया पर लगातार प्राप्त
होरही हैं।
कई जगह राजनीतिक दलों और देश के भविष्य के प्रति जागरूक
नागरिकों ने भी आंदोलन का समर्थन किया। वाराणसी के वामपंथी- लोकतान्त्रिक दलों ने तो
कल ही बैठक कर निजीकरण के इस प्रयास के विरोध में उतर रहे मेहनतकशों के प्रति एकजुटता
का इजहार किया। वे सब भी धन्यवाद के पात्र हैं। कुल मिला कर के आंदोलन को अभूतपूर्व
समर्थन मिला है।
“ बिजली एक सामाजिक जरूरत है, जिसे पाने का हर भारतीय को अधिकार है। सरकार की यह ज़िम्मेदारी है कि वह हर
नागरिक को बिजली उपलब्ध कराये।“ यह शब्द किसी और के नहीं स्वयं बाबा साहब डा॰ भीमराव
अंबेडकर के हैं। इसीलिए आजाद भारत में पहले बिजली उत्पादन और फिर वितरण को सार्वजनिक
क्षेत्र में लाया गया भी। उसके परिणाम भी देखने को मिले।
लेकिन कारपोरेट घरानों की हितचिंतक यह सरकार जनता के
हितों हेतु हमारे राजनैतिक अग्रजों द्वारा उठाए कदमों को पलटने पर आमादा है। सार्वजनिक
क्षेत्र की बरवादी के इस कदम को बेशर्मी के साथ ‘आत्मनिर्भरता’ का नाम दिया जा रहा है। इसे न कर्मचारी बर्दाश्त करेंगे, न जनता बर्दाश्त करेगी, न लोकवादी राजनैतिक शक्तियां
बर्दाश्त करेंगी और नहीं वामपंथी शक्तियां।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि आने वाले दिनों
में सभी को अधिक कठिन संघर्षों के लिये तैयार रहना होगा।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
रविवार, 31 मई 2020
at 1:03 pm | 0 comments |
Circular of CPI, UP
भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001
दिनांक- 31
मई 2020
सभी राज्य
काउंसिल सदस्यों, जिला सचिवों,
ब्रांच सचिवों एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं के लिये निर्देश पत्र
( यह पार्टी
का आंतरिक दस्तावेज़ है, इसे केवल वाट्स एप के जरिये पार्टी
साथियों को भेजें। फेसबुक, ब्लाग आदि पर पोस्ट न करें )
प्रिय साथी,
क्रान्तिकारी अभिवादन।
जैसा कि आपको ज्ञात है कि कल 1 जून 2020 को बिजली विभाग
के सभी श्रेणी के अभियन्ता एवं कर्मचारी ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के उद्देश्य से केन्द्र
सरकार द्वारा लाये जारहे विद्युत संशोधन अधिनियम के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध प्रदर्शन/
काला दिवस का आयोजन करने जा रहे हैं।
इस संबन्ध में व्यापक जानकारी देते हुये राज्य केन्द्र
से कल ही एक बयान जारी किया गया है जो फेसबुक एवं वाट्स एप आदि पर मौजूद है। तमाम लोगों
ने न केवल इसे पसंद किया है अपितु कई पार्टियों के नेताओं ने उसे अपना बयान बना कर
प्रसारित किया है।
कार्यक्रम के तहत बिजली कर्मी कार्यस्थलों पर काली पट्टियाँ
बांधेंगे और अपरान्ह 3: 00 बजे विद्युत परियोजनाओं, विभागीय कार्यालयों तथा विद्युत उपकेन्द्रों पर सभा आदि करेंगे। इस संबन्ध
में स्थानीय स्तर पर समाचार पत्रों में उनकी विज्ञप्तियाँ प्रकाशित होरही हैं।
चूंकि हमने उन्हें समर्थन प्रदान करने का फैसला किया
है अतएव राज्य नेत्रत्व ने गहन विचार करके निम्न तरीके से समर्थन प्रदान करने का निर्णय
लिया है।
1- आपके
समीप जहां भी ( परियोजना, कार्यालय अथवा ऊपकेन्द्र ) विरोध प्रदर्शन होने जा रहा हो वहाँ पहुँच कर साथी
समर्थन व्यक्त करें। पार्टी अथवा जन संगठन के पैड पर टाइप किया हुआ अथवा हाथ से लिखा
समर्थन पत्र वाकायदा उन्हें सौंपें।
2- यदि
आपके समीप कहीं प्रदर्शन की सूचना नहीं है तो किसी भी बिजली केन्द्र या दफ्तर पर कार्य
अवधि में ( आम तौर पर 10 से 5 बजे ) पहुँच कर उपस्थित कर्मचारियों में सबसे वरिष्ठ
को अन्य सबके समक्ष लिखित समर्थन पत्र सौंपे।
3- यदि
आप कई साथी हैं तो झण्डा/ बैनर के साथ भी जा सकते हैं। जरूरी नहीं कि वहां जाकर भाषण
ही देना है। यदि वे भाषण कराते हैं तो अच्छी बात है। अन्यथा अपना परिचय दें, उद्देश्य बतायें और समर्थन पत्र उन्हें सौंप दें।
4- यह
कार्यक्रम जिले में अनेक स्थलों पर किया जा सकता है। जहां भी हमारा एक दो भी साथी है
निकटवर्ती विद्युत गृह पर पहुँच कर समर्थन प्रदान कर सकता है। बेहतर यही होगा कि यह
कार्यक्रम अधिक से अधिक जगह हो।
5- समर्थन
पत्र सौंपते हुये और यदि भाषण देने का अवसर मिलता है तो बोलते हुये फोटो लें और सोशल
मीडिया पर साझा करें। समर्थन पत्र और फोटो स्थानीय समाचार पत्रों को भी सौंपे। अथवा
विज्ञप्ति जारी करें।
6- यदि
संभव हो और पूर्व परिचय हो तो अपने पहुँचने की सूचना कर्मियों को फोन पर पहले से ही
दी जा सकती है।
7- यह
कार्यक्रम सफल और व्यापक तभी होगा जब आप अभी से सभी साथियों को अपने तरीकों से अवगत
कराना शुरू कर देंगे। गाँव, गली, मोहल्लों, कस्बों, नगरों, जिला केन्द्रों
और परियोजना स्थलों तक यह कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है।
8- राज्य
काउंसिल के साथी और जिला सचिव एवं उप सचिव यदि इसे गंभीरता से लें तो यह कार्यक्रम
पार्टी की एक शानदार उपलब्धि बन सकता है।
9- राज्य
कार्यकारिणी के साथी तत्काल अपने लिये आबंटित जिलों से संपर्क करें और उन्हें कार्यक्रम
की सूचना दें व भली प्रकार कार्यक्रम आयोजित करने लिये
प्रेरित करें।
10-
समर्थन पत्र कल जारी किए गये बयान के आधार पर अपनी जरूरत के हिसाब से छोटा बड़ा तैयार
किया जा सकता है। यह बयान वाट्स एप के राज्य काउंसिल ग्रुप में तथा फेसबुक पर उपलब्ध
है। वरिष्ठ साथी कनिष्ठ साथियों की इस सब में मदद करें, गाइड करें।
11-
दैहिक दूरी बनाए रखनी है और मुछीका भी जरूर लगाना है।
आशा ही नहीं पूरा विश्वास है
आप इस कार्यक्रम को भी इस अवधि में अब तक किये गये कार्यक्रमों की तरह गंभीरता से लेंगे।
समय बहुत कम है अतएव बिना विलंब किये तैयारियों में जुट जायेंगे।
पुनः क्रांतिकारी अभिवादन के
साथ।
आपका साथी
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
शनिवार, 30 मई 2020
at 7:52 pm | 0 comments |
ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की कार्यवाही राष्ट्रीय हितों के प्रतिकूल: विद्युत्कर्मियों के आंदोलन का समर्थन करेगी भाकपा
लखनऊ- 30 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने पावर सैक्टर के निजीकरण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा
लाये गये विद्युत संशोधन अधिनियम 2020 के खिलाफ समस्त विद्युत कर्मियों और अभियन्ताओं
द्वारा संयुक्त रूप से 1 जून को देश भर में आयोजित विरोध प्रदर्शन/ काला दिवस को समर्थन
प्रदान किया गया है।
इस संबंध में जारी एक बयान में भाकपा ने कहा कि स्वतन्त्रता
प्राप्ति के बाद खाद्य समस्या से निजात दिलाने को क्रषी क्षेत्र के विकास और सिमटे
औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिये आधारभूत ढांचा मजबूत करने के लिये सार्वजनिक क्षेत्र
की नींव रखी गयी थी। ऊर्जा भी एक आधारभूत आवश्यकता
है अतएव देश की पहली संसद ने गहन विचार विमर्श के बाद देश को आत्मनिर्भर बनाने की द्रष्टि
इसे सार्वजनिक क्षेत्र में लाने का निर्णय लिया था। सभी जानते हैं कि ऊर्जा के सार्वजनिक
क्षेत्र में आने के बाद ही देश में ऊर्जा निर्माण और वितरण का ढांचा खड़ा किया गया जिससे
भारत क्रषी उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना और उसने औद्योगिक क्षेत्र में व्यापक प्रगति की।
मौजूदा सरकार आत्मनिर्भरता के जुमले के तहत ही ऊर्जा
का निजीकरण करने पर आमादा है और कोरोना काल में लाक डाउन की स्थितियों का लाभ उठाते
हुये यह विनाशकारी अधिनियम ले आयी है। इस बिल में देश के बाहर बिजली बेचने का प्राविधान
भी किया गया है ताकि प्रधान मंत्री के कारपोरेट दोस्त उनके निजी पावर हाउस द्वारा निर्मित
बिजली को पाकिस्तान को बेच सके। दिन भर पाकिस्तान विरोध के नाम पर राजनीतिक रोटियाँ
सैंकने वाली भाजपा सरकार को अपने चहेते पूंजीपति के आर्थिक लाभ के लिये पाकिस्तान को
बिजली बेचने से कोई गुरेज नहीं।
भाकपा ने आरोप लगाया कि इस बिल में सब्सिडी एवं क्रास
सब्सिडी खत्म करने, डिस्काम ( वितरण ) को कारपोरेट जगत
के हाथों सौंपने और टैरिफ की नयी व्यवस्था लादने के जनविरोधी प्राविधान किये गए हैं।
इससे आम उपभोक्ताओं खासकर किसानों पर भारी बोझ डाला जायेगा। इसकी शुरूआत बिजली दरों
में बढ़ोत्तरी के साथ पहले ही हो चुकी है। इस बिल के लागू होने के बाद किसानों और आम
उपभोक्ताओं को 10 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली मिलेगी।
भाकपा ने आरोप लगाया कि निजीकरण के अपने कदम को जायज
ठहराने को भाजपा सरकार बिजली को घाटे में होने और विद्युत चोरी जैसे बहाने बना रही
है। जबकि यह घाटा सरकार की कारपोरेटपरस्त नीतियों की देन है। सच तो यह है कि उत्तर
प्रदेश के सार्वजनिक क्षेत्र- यूपीपीसील द्वारा
केन्द्रीय पूल के औसत से कम कीमत पर बिजली तैयार की जाती है। जबकि कारपोरेट घराने अत्यधिक
महंगी दरों पर बिजली बना कर केन्द्रीय पूल को देते हैं।
भाकपा ने कहा कि हम विद्युत कर्मियों के आंदोलन को द्रढता
के साथ समर्थन इसलिये दे रहे हैं कि वह किसानों, आम नागरिकों
यहाँ तक कि उद्योग जगत के हितों में है। उद्योग चलेंगे तो रोजगार भी मिलेंगे। लाक डाउन
के बाद भयावह हुयी बेरोजगारी की समस्या को देखते हुये ये अति आवश्यक है। जबकि ऊर्जा
क्षेत्र का निजीकरण और उसको कार्पोरेट्स को सौंपने की मोदी सरकार की कार्यवाही राष्ट्रीय
हितों के प्रतिकूल है।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने सभी किसान संगठनों, मजदूर संगठनों उद्योग व्यापार से जुड़े संगठनों और आम जनता से अपील की कि वे
अपने हितों की रक्षा के लिये विद्युतकर्मियों के प्रतिरोध का समर्थन करें और लाक डाउन
की आड़ में देश की सार्वजनिक संपत्तियों को अपने पूंजीपति समर्थकों को बेचने की केन्द्र
सरकार की साजिश के खिलाफ आवाज बुलंद करें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
शुक्रवार, 29 मई 2020
at 5:57 pm | 0 comments |
तमाम किसानों को नहीं मिल पा रही सम्मान निधि की राशि : भाकपा ने प्रधानमंत्री/ मुख्यमंत्री से दिलवाने की मांग की
लखनऊ- 29 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने प्रधानमंत्री जी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
जी को पत्र लिख कर तमाम किसानों को किसान सम्मान निधि उपलब्ध कराने की मांग की है।
अपने इस पत्र में भाकपा ने कहा कि हमारी पार्टी के राज्य
मुख्यालय को उत्तर प्रदेश भर से सूचनायें प्राप्त होरही हैं कि केन्द्र सरकार
द्वारा घोषित और बहु- प्रचारित किसान सम्मान निधि की राशि हजारों किसानों को
प्राप्त नहीं हो पा रही है। कुछ किसानों को इस निधि की एक भी किश्त नहीं मिली जबकि
कुछ को आंशिक रूप से किश्तें मिली हैं।
यह किसानों के साथ भारी अन्याय है। खास कर कोरोना
काल में जबकि किसानों की अर्थव्यवस्था लाक डाउन के चलते पंगु हो गयी है और उन्हें
सरकार की आर्थिक सहायता की बेहद जरूरत है।
इस पत्र के माध्यम से भाकपा ने प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री
जी को स्मरण दिलाया कि आप और आपकी पार्टी के सभी जिम्मेदार अधिकारी बार बार
दोहराते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी ने कहा था कि उनकी सरकार
द्वारा भेजे गए एक रुपये में से 16 पैसे नीचे तक पहुंच पाते हैं। यह एक सचाई थी
जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री ने सदाशयता से कबूला था।
लेकिन भाकपा, उत्तर प्रदेश इस
बात पर अफसोस जाहिर करती है कि किसानों के लिये बहु- प्रचारित किसान सम्मान निधि
जो रुपये 6 हजार वार्षिक है, आपके लाख दावों के बावजूद उन तक
नहीं पहुंच पा रही है।
उत्तर प्रदेश में किसानों को सम्मान निधि की धनराशि
दिलवाने के लिये कई किसान संगठन आवाज उठा चुके हैं। समाचार पत्र से ज्ञात हुआ कि भाजपा
के अनुसूचित जाति मोर्चा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर किसानों को सम्मान निधि
प्राप्त न होने की शिकायत की है।
किसान तहसील से लेकर अन्य अधिकारियों के यहां चक्कर
काट रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं होरही है। कई जगह से इस हेतु किसानों से
सुविधा शुल्क बसूले जाने की शिकायतें भी मिल रही हैं।
भाकपा ने प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी से मांग
की कि समस्त किसानों की वांच्छित सम्मान निधि की राशि उन्हें तुरन्त दिलायें और कोरोना
काल में इसे बढ़ा कर 12 हजार रुपये एकमुश्त किसानों को दिलवाये जायें। भ्रष्टाचार और
घूसख़ोरी को लगाम लगायें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
मंगलवार, 26 मई 2020
at 7:17 pm | 0 comments |
चर्चा- नहीं मिला लाक डाउन का लाभ
लाक डाउन के औचित्य- अनौचित्य पर दुनियां में गंभीर
बहस छिड़ी हुयी है। यह बहस भारत में अभी भले ही शैशवकाल में हो पर दुनियां अन्य हिस्सों
में काफी ज़ोर पकड़ चुकी है।
अब ब्रिटेन की स्टैनफोर्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और
नोवेल पुरूस्कार विजेता माइकल लेविट ने लाक डाउन के औचित्य पर कई सवाल खड़े कर दिये
हैं।
उन्होने दावा किया है कि महामारी के रोकने में लाक डाउन
का कोई फायदा नहीं हुआ है। उन्होने कहा कि लोगों को घरों के अन्दर रखने का फैसला विज्ञान
के आधार पर नहीं घवराहट के आधार पर लिया गया।
ब्रिटेन में लगाये गए लाक डाउन के बारे में प्रोफेसर
माइकल लेविट ने कहा कि सरकार ने प्रोफेसर नील फ्रेग्यूसन की जिस माडलिंग के आधार पर
लाक डाउन का फैसला लिया है, उसमें मौत के आंकड़ों को वेवजह 10 से
12 गुना तक ज्यादा बढ़ा कर दिखाया गया है।
उन्होने प्रतिष्ठित अमेरिकी वित्तीय कंपनी जेपी मॉर्गन
की रिपोर्ट को आधार बनाते हुये कहा है कि लाक डाउन न सिर्फ महामारी के प्रसार को कम
करने में असफल रहा बल्कि, उसकी वजह से करोड़ों लोगों की नौकरी
भी छिन गयी।
प्रोफेसर लेविट ने कहा, मुझे लगता है लाक डाउन से जिंदगियां बची नहीं हैं, उलटे
उससे कई जिंदगियां गयी जरूर हैं। इससे कुछ सड़क दुर्घटनायें जरूर रुकी होंगी ( भारत
में तो सड़क दुर्घटनाओं में ही हजारों की मौत हो गयी ), लेकिन
घरेलू हिंसा, तलाक और शराब पीने की आदत चरम पर पहुंच गयी हैं।
साथ ही अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी इलाज नहीं मिला है।
जेपी मॉर्गन के शोधकर्ता मार्को कोलानोविक ने कहा कि
सरकारों को गलत वैज्ञानिक दस्तावेजों के आधार पर लाक डाउन लगाने के लिये भ्रमित किया
गया। लाक डाउन या तो अक्षम पाया गया या कम प्रभावी पाया गया। लाक डाउन हटाये जाने के
बाद से संक्रमण की दर में गिरावट आयी है।
यह संकेत देता है कि वायरस की अपनी गतिशीलता है, जिस पर लाक डाउन का असर नहीं हुआ।
प्रस्तुति-
डा॰ गिरीश
रविवार, 24 मई 2020
at 6:18 pm | 0 comments |
टिड्डियों की समस्या के खिलाफ युध्द स्तर पर अभियान चलायें केन्द्र और राज्य सरकारें: भाकपा
लखनऊ- 24 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने कहा कि वनस्पति भक्षी कीट टिड्डियों के
कई दल राजस्थान और मध्य प्रदेश में कई दिन पहले दाखिल होचुके हैं और यदि उन्हें तत्काल
विनष्ट नहीं किया गया तो शीघ्र ही वे उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़, मेरठ आदि मंडलों के दर्जन भर से अधिक जिलों को अपनी चपेट में ले लेंगे।
इससे फल, सब्जी, चारा आदि की खड़ी फसलें नष्ट हो जायेंगी और पहले ही कोरोना और मौसम की मार
से पीड़ित किसान और तवाह होकर रह जायेंगे। बाग बगीचे और पार्क आदि भी बरवाद होजाएंगे।
इस संकट पर गहरी चिन्ता का इजहार करते हुये भाकपा ने
केन्द्र और राज्य सरकार से उन्हें त्वरित रूप से नष्ट करने की मांग की। एक प्रेस बयान
में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार को हवाई जहाज और
हेलिकोप्टर्स से कीट नाशक छिड़क कर आसमान में ही इसे नष्ट कर देना चाहिये। जमीन पर भी
फायर ब्रिगेड आदि को तैनात किया जाना चाहिये।
उन्होने कहा कि यदि सरकार ने उच्च तकनीकी और साधनों
का प्रयोग किया होता तो टिड्डियों को कई दिन पहले ही नष्ट किया जा सकता था। ये विमान
और हेलिकोप्टर्स महानुभावों की हवाखोरी के लिये ही हैं, या आपदा नियंत्रण के लिये भी? भाकपा ने सवाल किया है।
भाकपा ने कहा आदेश निर्गत कर दायित्व की इतिश्री करने
वाली राज्य सरकार ने कई इस संबंध में भी कई आदेश जारी कर दिये हैं। पर कई जिलों के
प्रशासन ने टिड्डियों से निपटने की ज़िम्मेदारी किसानों पर ही डाल दी और उन्हें थाली
बेला बजाने जैसे कई टोटके बता कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। यह किसान और जनता
के साथ छलावा है।
डा॰ गिरीश ने कहा कि यह सरकार समस्याओं के निदान से
ज्यादा उनके सांप्रदाईकरण और राजनीतिकरण में जुटी रहती हैं और उसके बुरे परिणाम जनता
को भुगतने पड़ते हैं। वे कोरोना संकट को जमातियों के मत्थे मढ़ मगरूर बने रहे और वह विकराल
रूप में देश भर में फ़ैल गया। अब वे टिड्डियों को पाकिस्तानी बता कर मगरूर बने हुये
हैं और टिड्डियाँ राजस्थान, मध्य प्रदेश पार कर यूपी तक आने वाली
हैं।
उन्होने कहा जब सारे तकनीकी संसाधन सरकार के पास उपलब्ध
हैं तो इस समस्या को किसानों के मत्थे मढ़ देना उचित नहीं।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
शुक्रवार, 22 मई 2020
at 7:37 pm | 0 comments |
Left With Working Class
उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों के शीर्ष नेत्रत्व ने-
मजदूर संगठनों
के प्रतिरोध प्रदर्शन की सफलता के लिये उन्हें बधाई दी
प्रतिरोध
प्रदर्शनों में बाधा उत्पन्न करने पर केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया
कहा- अन्याय
के खिलाफ किसी भी प्रतिरोध की आवाज को दबाना चाहती हैं भाजपा सरकारें
अंफन तूफान
से जन- धन हानि पर जताया दुख: राहत और पुनर्वास के लिये केन्द्र से पर्याप्त धन आबंटन
की मांग की
लखनऊ- 22 मई 2020, उत्तर प्रदेश
और देश के श्रमिक संगठनों के आह्वान पर प्रतिरोध दिवस पर हजारों हजार श्रमिकों के लाकडाउन
की पाबंदियों के बावजूद प्रतिरोध दर्ज कराने पर उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने उन्हें
बधाई दी है।
वामपंथी दलों के राज्य नेत्रत्व ने उत्तर प्रदेश के
वामदलों क्रमशः भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट
पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा- माले और फारबर्ड ब्लाक के प्रदेश
भर के कार्यकर्ताओं को भी बधाई दी जिन्होने मजदूर वर्ग के आंदोलन के समर्थन में जगह-
जगह धरने दिये और मजदूरों के ऊपर सरकारों द्वारा लादी गयी विपत्ति के खिलाफ आवाज बुलंद
की।
वामपंथी दलों ने आरोप लगाया कि लाक डाउन की आड़ में केंद्र
और राज्य सरकार अन्याय के खिलाफ प्रतिकार की आवाज को दबाने पर उतारू हैं। दिल्ली में
राजघाट पर शांतिपूर्ण प्रतिरोध कर रहे मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों को गिरफ्तार कर
लिया गया। लखनऊ में गांधी प्रतिमा की ओर धरना देने जारहे श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों
को दारुल शफ़ा के समक्ष रोक लिया और वहीं पर ज्ञापन देने को बाध्य किया। अन्य जगह भी
सरकार के निर्देश पर ट्रेड यूनियनों और वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं को स्थानीय प्रशासन
ने एक दिन पहले से ही धमकाना शुरू कर दिया था।
आज फिर सरकार ने उत्तर प्रदेश में 6 माह के लिए किसी
भी किस्म की हड़ताल पर पाबन्दी लगा दी। श्रम कानूनों को तीन साल के लिये सस्पेंड करने
के बाद मेहनतकश तबकों के खिलाफ यह एक और बड़ा हमला है। उत्तर प्रदेश में जनवादी गतिविधियों
को कुचलने का प्रयास गत दिसंबर से ही किया जाता रहा है और सीएए के विरोध में खड़े वामपंथी
दलों व अन्य को गिरफ्तार किया गया अथवा गिरफ्तारी की कोशिशें की गईं। अब फिर बहाने
लगा कर एक विपक्षी दल के नेता को गिरफ्तार किया गया है। वामपंथी दल इस सबकी कड़े से
कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं।
संयुक्त बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भाकपा- मार्क्सवादी के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव सुधाकर यादय एवं फारबर्ड ब्लाक के प्रदेश संयोजक
अभिनव कुशवाहा ने अंफान से बंगाल और उड़ीसा में जन और धन हानि की तवाही पर गहरा दुख
व्यक्त किया है और राहत और पुनर्वास के लिये केन्द्र सरकार से अधिक से अधिक धनराशि
इन राज्यों को मुहैया कराने की मांग की है।
जारी द्वारा-
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
मंगलवार, 19 मई 2020
at 7:15 pm | 0 comments |
CPI Protest in UP
मजदूरों को
राहत पहुंचाने जैसे सवालों पर भाकपा ने प्रदर्शन आयोजित किये
महामहिम राष्ट्रपति
और राज्यपाल उ॰ प्र॰ को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किये
22 मई को
मजदूरों के संयुक्त प्रतिरोध का समर्थन करेगी भाकपा
लखनऊ- 19 मई 2020, अनियोजित
लाक डाउन के चलते मजदूरों को मौत के मुंह में धकेल दिये जाने, उन्हें घरों तक पहुंचाने में केन्द्र और राज्य सरकार की विफलताओं, श्रम क़ानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव, रोजगार और
राशन उपलब्ध कराने में सरकारों की घनघोर असफलता, किसानों की
फसल की बरवादी और बिकवाली में उसे राम भरोसे छोड़ देने, दलितों, अल्पसंख्यकों पर होरहे उत्पीड़न और कानून- व्यवस्था में गिरावट, घोषित सरकारी योजनाओं की राहत राशि सभी को न देने,
पेट्रोल डीजल की कीमतों में अत्यधिक बढ़ोत्तरी, केन्द्र सरकार
द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज में देश और जनता के साथ की गयी धोखाधड़ी, सार्वजनिक क्षेत्र को बेचने तथा कोरोना की विपत्ति के दौर में भी
सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने आदि के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के केन्द्रीय
आह्वान पर आज समूचे उत्तर प्रदेश में धरने एवं प्रदर्शन किये गये।
यद्यपि एक सप्ताह पूर्व 11 मई को भी भाकपा ने वामदलों
के साथ मिल कर प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किये थे और केंद्रीय नेत्रत्व का आह्वान मात्र
4 दिन पूर्व हुआ था फिर भी आज भाकपा ने राज्य के अनेक जिलों में सफल प्रतिरोध प्रदर्शन
किये और महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन स्थानीय अधिकारियों को
सौंपे अथवा ई मेल के जरिये भेजे गये। कई जिलों में कई कई स्थानों पर प्रतिरोध प्रदर्शन
हुये।
राज्य मुख्यालय लखनऊ के अलाबा अभी तक गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर, अयोध्या, बाराबंकी, झांसी, मथुरा, गाजीपुर, जौनपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, गोंडा, निजामाबाद (आजमगढ़
), उरई, शामली,
महाराजगंज, कानपुर देहात, इलाहाबाद, सोनभद्र, बांदा, बहराइच आदि जनपदों
से प्रतिरोध दिवस के आयोजन की खबरें अब तक प्राप्त होचुकी हैं।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने मजदूरों, किसानों और अवाम की आवाज उठाने के समस्त कार्यकर्ताओं को पार्टी की राज्य
काउंसिल की ओर से बधाई दी है। साथ ही केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त तत्वावधान
में 22 मई को आयोजित मजदूरों के प्रतिरोध प्रदर्शन को भाकपा की
ओर से सक्रिय समर्थन प्रदान करने का आह्वान किया है।
प्रस्तुत ज्ञापन में मांग की गयी है कि प्रवासी
मजदूरों को घरों तक पहुंचाने के लिए और अधिक ट्रेन और बसें चलायी जायें जिनमें
उन्हें खाना और पानी की सुविधा दी जाये। पहले से ही घरों को निकल पड़े मजदूरों को
रोकने के बजाय उन्हें सम्मानपूर्वक वाहनों में बैठा कर घर पहुंचाया जाये। उन पर
किसी भी तरह का अत्याचार ना किया जाये। सभी मजदूरों को 10 हजार रुपये बतौर खर्च/
यात्रा खर्च दिये जायें। अवसाद से आत्महत्याओं अथवा दुर्घटनाओं में होरही मौतौं पर
रु॰ 20 लाख की मदद और घायलों को रु॰ 5 लाख दिये जायें।
मनरेगा को कमजोर नहीं किया जाये। हर व्यक्ति को
पूर्ण रोजगार देना सुनिश्चित किया जाये। मनरेगा के तहत काम के दिन बढ़ाए जायें और
प्रत्येक परिवार के सभी वयस्क सदस्यों को काम और समय पर भुगतान दिया जाये। शहरी
क्षेत्रों में रोजगार और आवास की गारंटी की जाये। राशन देने के लिये किसी भी तरह की
शर्त ना रखी जाये। हर एक परिवार को हर माह 35 किलो खाद्यान्न निशुल्क देना
सुनिश्चित किया जाये।
श्रम कानून के साथ कोई छेड़छाड़ ना की जाये। उत्तर
प्रदेश सरकार द्वारा 3 सालों के लिये श्रम क़ानूनों को रद्द करने के फैसले को रद्द
किया जाये। सभी संगठित और असंगठित, सरकारी और गैर
सरकारी विभागों/ उद्योगों में संविदा अथवा गैर संविदा कर्मियों व अन्य के बकाया
वेतनों का भुगतान सुनिश्चित किया जाये। ग्रामीण
क्षेत्रों के गरीब और छोटे किसानों के मुद्दों का उचित निवारण किया जाये। मौसम और
लाक डाउन की मार से प्रभावित किसानों के अनाज, फल, सब्जी और दूध को उचित कीमतों पर खरीदना सुनिश्चित किया जाये। किसानों को
12 हजार रुपये की तत्काल एकमुश्त सहायता दी जाये।
बुजुर्गों, विधवाओं और
शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिये पेंशन और दूसरी सामाजिक सुरक्षायें
सुनिश्चित की जायें और बढ़ाई जायें। कैंसर, टीवी, हार्ट, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की फौरन
व्यवस्था की जाये। गर्भवती महिलाओं के लिये घरों पर कंसल्टेशन और प्रसूति की
व्यवस्था की जाये। सभी की कोरोना जांच और इलाज मुफ्त कराये जायें। नोडल सेंटर, कोरोंटाइन केन्द्र, आइसोलेशन केन्द्र एवं अस्पतालों
में अव्यवस्थाएं दूर कर ताजा और ससमय भोजन, पानी, दवाई और सफाई आदि की व्यवस्था की जाये।
आर्थिक राहत पैकेज आसमान में ही लटक कर रह गया है।
इसमें जरूरतमंदों के लिये कुछ नहीं है। लोगों को सीधे राहत दी जाये। आत्मनिर्भरता
के नाम पर सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना बंद किया जाये। लाक डाउन के अनुपालन के नाम
पर लोगों की प्रताड़ना, पिटाई,
जबरिया बसूली, चालान और जेल भेजना बन्द किया जाये। दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और अन्य कमजोर तबकों पर
जुल्म बढ़ गये हैं। उनकी सुरक्षा की जाये। कानून व्यवस्था ठीक की जाये।
विश्व बाज़ार में कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद
केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने पेट्रौल डीजल के दामों में भारी व्रद्धि कर
दी है जिससे महंगाई और मंदी बढ़ेगी। उन्हें फौरन वापस लिया जाये।
कोरोना की महाविपत्ति के दौर में भी केन्द्र और
उत्तर प्रदेश सरकार न केवल राजनीति कर रही हैं, अपितु
सांप्रदायिक विद्वेष भी फैला रही हैं। इससे कोरोना के खिलाफ जंग कमजोर होरही है।
इन पर फौरन लगाम लगायी जाये।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
रविवार, 17 मई 2020
at 1:44 pm | 0 comments |
Nation Wise Protest of CPI on 19 May
लोगों को असहायता और निराशा के हाथों बरवाद होने को
छोड़ा नहीं जा सकता
सरकार की
अकर्मण्यता के खिलाफ देशव्यापी प्रतिरोध दिवस आयोजित करेगी भाकपा
लखनऊ- 17 मई, 2020, अनियोजित लाक डाउन के कारण मजदूरों को मौत के मुंह में धकेलने, उन्हें घरों तक पहुंचाने
में केन्द्र और राज्य सरकारों की असफलता, श्रम क़ानूनों में मजदूर
विरोधी बदलाव, रोजगार और राशन उपलब्ध कराने में सरकारों की असफलता, किसानों की फसल की बरवादी और विकवाली में उसे राम भरोसे छोड़ देने, घोषित सरकारी योजनाओं की मदें सभी तक नहीं पहुँचने,
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अप्रत्याशित बढ़ोत्तरी तथा आर्थिक पैकेज में आम जनता
के साथ धोखाधड़ी आदि के विरोध में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 19 मई को देश भर में प्रतिरोध
दिवस का आयोजन करेगी।
इस दिन जहां लाक डाउन की बन्दिशें नहीं हैं वहां श्रम
कार्यालयों, जिलाधिकारी अथवा तहसील कार्यालयों पर पहुंच कर प्रतिरोध
दर्ज कराया जायेगा और ज्ञापन दिये जायेंगे। जहां लाक डाउन प्रभावी होगा वहां पार्टी
कार्यालयों अथवा आवासों पर पार्टी कार्यकर्ता धरने, भूख हड़ताल
आदि आयोजित करेंगे। सभी काली पट्टियाँ बांधेंगे, पार्टी के झंडे-
बैनरों- पट्टिकाओं के अतिरिक्त काले झंडे लगायेंगे
तथा महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन भेजे अथवा सौंपे जायेंगे।
सभी को दैहिक दूरी का पालन करना है और मुछीका लगाये
रहना है।
उपर्युक्त के संबंध में भाकपा के राज्य सचिव एवं पार्टी
की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डा॰ गिरीश ने कहाकि मेहनतकश तबकों और वाम- लोकतान्त्रिक
शक्तियों के आंदोलन के दबाव में यूपी में काम के घंटे पुनः आठ कराने और मजदूरों को
घर तक पहुंचाने को कदम उठाने को सरकारों को बाध्य करने में हम कामयाब रहे हैं, लेकिन अभी भी सरकार द्वारा थोपी गयी आफतों के पहाड़ से हमें जूझना है। इसीलिए
11 मई को वामपंथी दलों द्वारा उत्तर प्रदेश में तथा भाकपा द्वारा अन्य कई राज्यों में
किये गए आंदोलन के बाद अब भाकपा ने पूरे देश में आंदोलन का बिगुल फूंका है।
भाकपा ने आरोप लगाया कि केन्द्र और राज्य सरकारों की
अकर्मण्यता और उपेक्षा के चलते देश भर में लाखों लाख मजदूर काम- धंधा छिन जाने से दाने
दाने को मुंहताज होगए हैं। उनके पास खाने को नहीं है। अपने घर पहुँचने के लिये पैसे
नहीं हैं। अपनी और अपने परिवार की गुजर बसर करना उन्हें मुश्किल होरहा है। इस सबके
बावजूद सरकार उनकी बदहाली को नजरंदाज कर रही है। तरह तरह की पाबन्दियाँ उन पर थोपी
जा रही हैं जिनके चलते लगभग 400 लोग दुर्घटनाओ आदि में मारे
जा चुके हैं।
प्रधानमंत्री की ओर से की गयी 20 लाख करोड़ रुपये के
पैकेज की घोषणा और वित्त मंत्री द्वारा इसके खर्च का दिया गया धारावाहिक विवरण राजनीतिक
लफ्फाजी के सिवा कुछ नहीं है। उनके पास कोरोना से पैदा हुये संकट से निपटने के लिये
कोई ठोस योजना नहीं है। मोदी सरकार की नव- उदारवादी नीतियों की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था
बीमार पड़ गयी है और वह डूब रही है। कोरोना के संकट ने इसे और बढ़ा दिया है। पूंजीवादी
और कार्पोरेटपरस्त सरकार का नेत्रत्व बिगड़ी अर्थव्यवस्था का भार मेहनतकशों और आम जनता
के कंधों पर लाद देना चाहता है। श्रम क़ानूनों, वेतन और भत्तों में
कटौती आदि सरकार की इसी मंशा के सबूत हैं।
ऐसे हालातों में लोगों को असहायता और निराशा के हालातों
में नहीं छोड़ा जा सकता। इसीलिए भाकपा ने 19 मई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का फैसला
लिया है। पार्टी समर्थकों और सभी जनभक्त लोगों से भी अपने अपने तरीकों से इस आंदोलन
में भागीदारी की अपील की है।
भाकपा के राज्य सह सचिव का॰ अरविन्दराज स्वरूप एवं का॰
इम्तियाज़ अहमद ने भाकपा के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की है कि आम जनता की
आवाज बुलंद करने को मुस्तैदी से जुट जायें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
शनिवार, 16 मई 2020
at 7:01 pm | 0 comments |
मजदूरों की लगातार हादसों में मौतों पर भाकपा ने जताया दुख। मजदूरों को घरों तक पहुंचाओ: भाकपा
लखनऊ- 16 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी, उत्तर प्रदेश के सचिव मण्डल ने आज औरैया में 24 मजदूरों
और मध्य प्रदेश के सागर में उत्तर प्रदेश के ही 6 मजदूरों की सड़क दुर्घटनाओं में म्रत्यु
पर गहरी पीड़ा जतायी है। पार्टी ने दोनों दुर्घटनाओं में दर्जनों घायलों के शीघ्र स्वस्थ
होने की कामना की है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा॰
गिरीश ने कहा कि मजदूर वर्ग के प्रति देश प्रदेश की सरकारों ने असहनीय असहिष्णुता का
प्रदर्शन किया है। अनियोजित लाक डाउन की यातनाओं ने उन्हें घर लौटने को मजबूर किया।
जब राजसत्ता और व्यवस्था उन्हें घर लौटने के साधन सुलभ न करा सकी तो वे जान- जोखिम
में डाल कर सड़कों पर निकल पड़े।
आज फिर 24+ 6 मौतों ने हर संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर
दिया है। पर केन्द्र सरकार दुख व्यक्त करने के ट्वीट तक और राज्य सरकार ‘कड़े निर्देश दे दिये गए हैं’ के बयान तक सीमित होकर रह
गयी हैं। जितने लोग देश- प्रदेश में कोरोना से म्रत हुये हैं उससे कहीं ज्यादा रास्तों
में दम तोड़ चुके हैं। सरकारों के सिवा इसके लिये कौन जिम्मेदार है?
लोग घरों को निकल पड़े हैं, निकल रहे हैं और आगे भी निकलेंगे। अब इस प्रवाह को रोक पाना असंभव है। रोकने
के प्रयास आत्मघाती ही साबित होंगे। अब यही संभव है कि केन्द्र और राज्य सरकारें मिल
कर ब्रहद योजना बनायें। जो जहां है, जिस प्रांत में है, जिस स्थान पर है, उसे वहां से वाहनों में बैठा कर रेलवे
स्टेशनों और मुख्य बस अड्डों पर लाया जाये और वहाँ से भोजन पानी के साथ उन्हें सकुशल
घरों तक पहुंचाया जाये।
भाकपा ने सरकार को एक के बाद एक सुझाव दिये, जिन्हें यदि लागू किया गया होता तो जान माल की इस भयावह बरवादी से बचा जा
सकता था। पर सरकार औरों की सुनती नहीं और खुद कुछ करती नहीं। असफल हो चुकी सरकार नैतिक
ज़िम्मेदारी लेने तक को तैयार नहीं। यह स्थिति अधिक समय तक चली तो देश प्रदेश के जनजीवन
के लिये घातक होगी।
भाकपा दुर्घटनाओं, भूख, प्यास से राहों में म्रतकों के परिवारों को रु॰ 20 लाख की आर्थिक मदद और सभी
घायलों को रु॰ 5 लाख दिये जाने की मांग करती है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
शुक्रवार, 15 मई 2020
at 6:03 pm | 0 comments |
हादसों और दुर्घटनाओं से मजदूरों की मौतों से भाकपा व्यथित : सड़क पर आये एक एक मजदूर को घर तक पहुंचाए सरकार
लखनऊ- 15 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने मुजफ्फर नगर और मध्य प्रदेश के गुना में कल सड़क हादसों
में 14 मजदूरों की दर्दनाक मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। भाकपा ने आज फिर उत्तर
प्रदेश के ही विभिन्न स्थानों पर सड़क हादसों में मजदूरों की मौतों की खबरों को अंतस्तल
तक हिला देने वाली बताया है। भाकपा ने इन हादसों के लिये सीधे राज्य और केन्द्र सरकार
को जिम्मेदार ठहराया है। पार्टी ने केन्द्र और राज्य सरकार के मुखियाओं से इन मौतों
की नैतिक ज़िम्मेदारी लेने की मांग की है।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश
ने कहा कि अनियोजित लाक डाउन में मिल रही यातनाओं से पीड़ित और उन्हें समय पर घरों तक
पहुंचाने में केन्द्र और राज्य सरकारों की असफलताओं से प्रवासी मजदूरों का धैर्य टूट
चुका है और वे अपनी जान हथेली पर रख कर घरों को निकल रहे हैं। अब सड़कों पर न निकलने
की सत्ताधारियों की अपील और रेल- बसों से पहुंचाने के उनके बयानों का उनके लिये कोई
महत्व नहीं रह गया है।
‘अब मरता क्या न करता’ की स्थिति
में निकले देश के इन कर्णधारों और पूंजी के निर्माताओं को उनके रास्तों में रोका जारहा
है, उनकी बची खुची पूंजी उनसे छीनी जारही है, उन्हें लाठी- डंडों से खदेड़ा जा रहा है, अपने खर्चे
से जुटाये यातायात के साधन उनसे छीने जारहे हैं, उन्हें शारीरिक
और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया जारहा है॰
उनमें से अनेक भूख, प्यास, बीमारी और थकान से जानें गंवा चुके हैं। हर रोज तमाम लोग सड़क दुर्घटनाओं में
जान गंवा रहे हैं। हर दर्दनाक मंजर पर उत्तर प्रदेश सरकार का एक जैसा बयान- “ मुख्यमंत्री
ने घटना का संज्ञान लिया है, घटना पर दुख व्यक्त किया है, घटना की जांच के आदेश दे दिये गये हैं, म्रतको व घायलों
को मुआबजे का ऐलान कर दिया गया है” आदि अब पीड़ितों को ही नहीं हम सबको मुंह चिड़ाने
लगा है। गत तीन सालों में हुयी हजारों घटनाओं की कथित जांच का परिणाम भी आज तक अज्ञात
है।
भाकपा साफ़तौर पर कहना चाहती है कि सड़कों पर निकल पड़े
इन मजबूर मजदूरों को अब सत्ताधारियों के उपदेशों और सहानुभूति की जरूरत नहीं है। उनकी
पहली जरूरत है उन्हें जो जहां है वहाँ से पिक अप ( Pick Up ) कर
घरों तक पहुंचाया जाये। इन तीन सालों में तीन तीन कांबड़ यात्राओं और अर्ध कुंभ को, कुंभ से भी बेहतर तरीके से आयोजित करने का श्रेय उत्तर प्रदेश सरकार लेती
रही है। फिर इन कुछेक लाख मजदूरों की यह जानलेवा उपेक्षा किसी की भी समझ से परे है।
इन असहाय मजदूरों की मौतों पर मुआबजे की मांग तो की
जाती रही है और की जानी ही चाहिये, लेकिन आज हम सरकारों
से एक ही मांग कर रहे हैं कि- ‘जो भी मजदूर सड़क पर दिखे उसे उचित
संसाधन से सुरक्षित घर पहुंचाया जाये। यह सरकार का कर्तव्य है और नैतिक दायित्व भी।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
सोमवार, 11 मई 2020
at 5:15 pm | 0 comments |
Agitation Of Left Parties of U.P.
श्रमिकों
पर टूट रहे सरकारों के कहर और कोरोना के नाम पर तानाशाही लादने के खिलाफ वामपंथी दलों
ने विरोध का बिगुल फूंका
सैकड़ों स्थानों
पर अनशन किया गया, धरने दिये गये और ज्ञापन सौंपे गये
लखनऊ- 11 मई 2020, कोरोना से
निपटने में केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार की अदूरदर्शिता, लाक
डाउन को मनमाने और बचकाने तरीकों से लागू करने से देश और उत्तर प्रदेश की जनता का
बहुमत संकटों से घिर गया है। मजदूरों और प्रवासी मजदूरों की तो सरकारों ने दुर्गति
बना कर रख दी है। आम जनता को इस संकट से उबारने के लिये संजीदा प्रयास करने के
बजाय सरकारें संकट का भार आमजनों खास कर मजदूरों पर थोप रही हैं। अफसोस है कि इस
संकट काल में भी भाजपा और उसकी सरकारें सांप्रदायिक कार्ड खेलने से बाज नहीं
आरहीं। इससे संकट और भी गहरा होगया है। पुलिस का कहीं कहीं मानवीय चेहरा दिख जाता
है परंतु शेष मामलों में वह दमन की पर्याय बन कर रह गयी है।
वामपंथी दल स्पष्टरूप से कहना चाहते हैं कि मजदूरों, किसानों, लघु उद्यमियों, व्यापारियों
और आमजन को तत्काल कदम उठा कर संकट से निकाला न गया तो देश और उत्तर प्रदेश की
जनता को अभूतपूर्व हानि उठानी पड़ सकती है। अतएव इसी परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश
के वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट
पार्टी- मार्क्सवादी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- माले एवं आल
इंडिया फारबर्ड ब्लाक के हजारों कार्यकर्ताओं ने आज उपर्युक्त तबकों को राहत
प्रदान करने की मांग को लेकर अपने कार्यालयों, घरों, तहसीलों एवं जिलाधिकारी कार्यालयों पर सैकड़ो स्थानों पर अनशन अथवा धरने
आयोजित किये।
यद्यपि वामदलों ने कार्यालयों अथवा घरों पर ही धरने
अथवा भूख हड़ताल का आह्वान किया था लेकिन कई जगह उत्साही साथियों ने कलक्ट्रेट, तहसील अथवा खंड विकास कार्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपे। प्रदेश में
वामदलों के आह्वान पर कई स्वतंत्र वामपंथियों, ट्रेड यूनियनों
और महिला संगठनों ने भी मेहनतकश तबकों और देश हित में अपनी आवाज बुलंद की। एक एक जिले
में कई कई जगह धरने/ अनशन किये गये। कई जगह अधिकारियों से मिल कर ज्ञापन दिये गये तो
कई जगह ईमेल के जरिये ज्ञापन राष्ट्रपति और राज्यपाल को भेजे गये।
सभी 15 सूत्रीय ज्ञापनों में कहा गया है कि केन्द्र
सरकार और उत्तर प्रदेश की सरकार ने पहले से महंगे चल रहे डीजल और पेट्रोल की
कीमतों में भारी व्रद्धि कर दी है, जिसका उद्योग, व्यापार और खेती पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और महंगाई और भी बढ़ जायेगी। अतएव
केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा की गयी व्रद्धियां तत्काल वापस ली जायें। कम से कम
आधी की जायेँ।
ज्ञापनों में कहा गया महामारी का सारा बोझ आम जनता
पर डालना बन्द किया जाये और अमीरों पर अधिक टैक्स लगाया जाये।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा श्रम क़ानूनों को 3 साल
के लिये रद्द करने और काम के घंटे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। यह लाक डाउन से
लुटे-पिटे मजदूरों पर आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा हमला है। इन कदमों को अविलंब वापस
लिया जाये।
न्यूनतम वेतन रु॰ 21 हजार किया जाये। सभी संगठित और
असंगठित, सरकारी और गैर सरकारी विभागों/ उद्यमों में संविदा अथवा अन्य श्रमिकों के
बकाया वेतनों का भुगतान सुनिश्चित किया जाये। समस्त प्रवासी मजदूरों की घर वापसी
सरकारी खर्चे पर शीघ्र से शीघ्र सुनिश्चित की जाये। रास्ते में उनका उत्पीड़न रोका
जाये। हर एक श्रमिक को रु॰ 7500 की एकमुश्त मदद तत्काल दी जाये।
राशनकार्ड अथवा गैर राशनकार्डधारी हर परिवार को 35
किलो खाद्यान्न हर माह निशुल्क देना सुनिश्चित किया जाये। हर व्यक्ति को पूर्ण
रोजगार सुनिश्चित किया जाये। कोरोना वायरस से लड़ने के नाम पर जनता को भयाक्रांत और
दंडित करना बन्द किया जाये।
कैंसर, टीवी, हार्ट, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की फौरन
व्यवस्था की जाये। अस्पताल खोले जायें, सभी का इलाज
सुनिश्चित किया जाये। गर्भवती महिलाओं के लिये घर पर कंसल्टेशन और प्रसूति की
व्यवस्था की जाये।
मौसम की मार और लाक डाउन के प्रहार से व्यथित किसानों
के उत्पाद- अनाज, सब्जी, फल, दूध सब्जी आदि को उचित कीमत पर खरीदना सुनिश्चित किया जाये। अभी तक उत्तर
प्रदेश में गेहूं खरीद 25% भी नहीं हुयी। मौसम से प्रभावित गेहूं की भी खरीद की
जाये। प्रत्येक खरीद का तत्काल भुगतान किया जाये। किसानों को रु॰ 12 हजार की
एकमुश्त मदद की जाये। मंडी कानून में किसान विरोधी संशोधन वापस लिये जायें। आँधी-
तूफान से प्रतिदिन होरही जन और धन हानि की आर्थिक भरपाई की जाये।
कुटीर, लघु, मध्यम उद्योगों और छोटे व्यापारियों के लिये राहत पैकेज की घोषणा की
जाये। कोरोना की बीमारी के अलाबा लाक डाउन की विभिन्न कमजोरियों से अब तक लगभग 450
लोगों की जानें जा चुकी हैं। इन अवसाद, अभाव से पीड़ित
आत्महत्या करने वालों, रास्ते में दम तोड़ने वालों और
दुर्घटनाओं में म्रत श्रमिकों के परिवारों को रु॰ 50 लाख की आर्थिक सहायता दी
जाये।
सभी की कोरोना जांच मुफ्त कराई जाये। मुफ्त
चिकित्सा कराई जाये। कोरोंटाइन और आइसोलेशन केन्द्रों की स्थितियों में सुधार किया
जाये। जांच और इलाज में प्रशासनिक ढील बंद की जाये।
दलितों, अल्पसंख्यकों और
महिलाओं का उत्पीड़न और उन पर हिंसा रोकी जाये। लाक डाउन के नाम पर नागरिकों को जेल
भेजना, पीटना, वाहनों का चालान काटना
और जुर्माना बसूलना बंद किया जाये।
कोरोना की इस महा विपत्ति के समय भी भाजपा, संघ और सरकार द्वारा सांप्रदायिकता और नफरत की राजनीति बन्द की जाये। कोरोना
की आड़ में तानाशाही लादने को नए नये नये कानून थोपना बन्द किया जाये।
कोरोना से मुक़ाबले के लिये सभी दलों की बैठकें हर
स्तर पर बुलाई जायेँ और संयुक्त समितियां बनायी जायें। राजनैतिक गतिविधियों पर
थोपी हुयी पाबंदियां फौरन हटायी जायें।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भाकपा- मार्क्सवादी के राज्य सचिव
का॰ हीरा लाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव का॰ सुधाकर यादव
एवं फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा ने आज के महत्वपूर्ण आंदोलन को सफल
बनाने वाले वामपंथी कार्कर्ताओं और समर्थकों को बधाई दी है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
शुक्रवार, 8 मई 2020
at 7:07 pm | 0 comments |
16 मजदूरों की मौत पर भाकपा ने जताया रोष
लखनऊ- 8 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आज औरंगाबाद में रेलवे ट्रैक पर मालगाड़ी से कुचल कर 16
मजदूरों की मौत पर गहरा अफसोस, पीड़ा और आक्रोश का इजहार किया
है। पार्टी ने कल विशाखापत्तनम में एक फैक्टरी में गैस रिसाब से हुयी 12 श्रमिकों और
नागरिकों की मौत पर भी गहरा दुख व्यक्त किया है। पार्टी ने रेल से कुचल कर म्रत मजदूरों
के परिवार को 50 लाख रु॰ प्रति म्रतक राहत राशि देने की मांग की।
यहां जारी एक प्रेस बयान में पार्टी के राज्य सचिव डा॰
गिरीश ने कहाकि कोरोना संकट के शुरुआत से ही मजदूरों के प्रति सरकार का रवैया बहुत
ही शत्रुतापूर्ण रहा है। पहले उन्हें लाक डाउन में भूखे प्यासे मरने को छोड़ दिया गया।
और जब भूख और अर्थाभाव के चलते जान हथेली पर रख कर वे घरों की ओर चल दिये तो रास्तों
में उन्हें पीटा गया, क्वारंटाइन किया गया और कई जगह सड़कों
पर ही तड़पते छोड़ दिया गया। भूख, प्यास,
बीमारी से कई दर्जन मजदूरों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
वामपंथी दलों और विपक्ष के दबाव में सरकार ने बेमन से
मजदूरों को घर पहुंचाने का निर्णय लिया मगर अब भी उनके रास्ते में अनेक किस्म के रोड़े
अटकाए जारहे हैं। उनसे रेल किराया बसूला जारहा है, यदि वे अपना
खर्च कर बस, ट्रक आदि से चल पड़े तो वाहन जब्त कर उन्हें खदेड़
दिया गया। और अब जो पैदल ही जा रहे हैं वे सड़क दुर्घटनाओं में मारे जारहे हैं। यदि
सरकार ने सतर्कता बरतते हुये अपने दायित्व का निर्वाह किया होता तो ये 16 मजदूर भी
मौत के झपट्टे से बच जाते। सच तो यह है कि कोरोना संकट से पूंजीवाद और पूंजीवादी सरकार
का मजदूरों, गरीबों और आम जनता के प्रति घिनौना चरित्र उजागर
होगया है।
भाकपा मांग करती है कि सरकार/ सरकारें अपना रवैया बदलें।
एक एक मजदूर को रेल/ बसों से सुरक्षित घर पहुंचायें। मजदूरों के जीवन और अधिकार छिनने
से बाज आयें सरकारें, भाकपा आगाह करना चाहती है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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