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गुरुवार, 24 अगस्त 2017
at 6:29 pm | 0 comments |
Left Demanded expulsion of Rail Minister and Health Minister of U.P.
रेल मंत्री और उत्तर
प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की बर्खास्तगी तथा घटनाओं की न्यायिक जांच आदि मांगों को लेकर प्रदेश भर में सड़कों पर उतरे वाम
दल
लखनऊ- 24 अगस्त 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और
अन्य वामपंथी दलों ने आज गोरखपुर बाल- संहार कांड और एक के बाद एक रेल दुर्घटनाओं में
होरही मौतों और संपत्ति की हानि आदि पीडादायक सवालों को लेकर उत्तर प्रदेश भर में जिला
मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर ज्ञापन दिये. वामदलों ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री
और रेल मंत्री को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की.
वामपंथी दलों ने कहाकि गोरखपुर
मेडिकल कालेज में आक्सीजन के अभाव में हुयी बच्चों की मौत का सवाल हो या पूर्वोत्तरी
उत्तर प्रदेश में बाढ की तबाही और वहाँ पैर पसार रहीं बीमारियों का सवाल, या फिर खतौली और औरैया में
हुयी रेल दुर्घटना का मामला, केंद्र और राज्य सरकार अकर्मण्य, संवेदनशून्य और अपनी अक्षमताओं
पर पर्दा डालने वाली साबित हुयी हैं. वामदल देश और प्रदेश में होरहे घटनाक्रमों में
जनता की इस तबाही को मूक दर्शक बन नहीं देख सकते अतएव वे जनहित में सड़कों पर उतर रहे
हैं.
भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश
ने बताया कि वामदलों के नेत्रत्व में हुये इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों
ने शिरकत की है और रेल मंत्री और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री की मांग को शिद्दत
के साथ उठाया है. लोकतंत्र में लोक प्रश्नों पर जबावदेही तय होनी चाहिये और इस संबंध
में नाटक नहीं, कार्यवाही दिखनी चाहिये. वामदलों ने गोरखपुर बाल हत्या कांड और रेल हादसों की
जांच क्रमश: हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश से कराने की मांग की है.
वामदलों ने आक्सीजन कान्ड में
मृत बच्चों के परिवारों को रुपये पच्चीस लाख की सहायता और जिनका इलाज चल रहा है इलाज
की समूची व्यवस्था करने की मांग की है. रेल हादसों में मृतकों और घायलों के लिये भी
इतनी ही धनराशि की मांग की है. वामदलों ने स्वास्थ्य सेवाओं का निजी करण रोकने, स्वास्थ्य बजट दोगुना किये
जाने, स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोके जाने, हर नागरिक को मुफ्त इलाज उपलब्ध
कराने, हर एक लाख की आबादी पर सौ शैयाओं वाला और हर दस लाख की आबादी पर एक हजार शैयाओं
वाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल खोले जाने तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की दशा सुधारे
जाने की मांग की है.
वामदलों द्वारा दिये ज्ञापनों
में बाढ की विभीषिका से नागरिकों को बचाने के लिये पर्याप्त कदम उठाने, इन इलाकों में भरपूर राहत सामग्री
भेजे जाने, बाढ के बाद फैलने वाली महामारियों से बचाव के लिये ठोस कदम उठाने, इंसेफिलाइटिस, डेंगू, चिकुनगुनियां व स्वाइन फ्लू
जैसी महामारियों की रोकथाम के लिये विशेष अभियान चलाने, जिन जनपदों में औसत से कम बारिश
हुयी है उन्हें सूखाग्रस्त घोषित किये जाने तथा कथित स्वच्छता अभियान के नाम पर विज्ञापनों के जरिये
प्रचार माध्यमों को लुटायी जारही धनराशि को सफाई कर्मियों की नियुक्ति और सफाई उपकरण
खरीदने पर खर्च किये जाने की मांग की है.
आज के इस आंदोलन में भाकपा, माकपा, भाकपा- माले, फारबर्ड ब्लाक तथा एसयूसीआई-सी
ने भाग लिया. ज्ञापन राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित थे जिन्हें जिले के अधिकारियों
को सौंपा गया.
रविवार, 20 अगस्त 2017
at 12:54 pm | 0 comments |
CPI on Rail accident
भाकपा ने मुज़फ्फरनगर
रेल हादसे पर गहरा दुख जताया
रेल मंत्री से त्यागपत्र
और मृतक परिवारों को रुपये पच्चीस लाख मुआबजे की मांग की
लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की
उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी ने कल मुज़फ्फरनगर जनपद के खतौली में हुये रेल हादसे पर गहरा
अफसोस जताया है. पार्टी ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना जताते हुये सभी
मृतकों के प्रति श्रध्दांजलि अर्पित की है. पार्टी ने इस हादसे के लिये रेल प्रशासन
को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराते हुये रेल मंत्री को हठाये जाने की मांग की है. हर मृतक
परिवार को रुपये 25 लाख सहायता राशि दिये जाने तथा प्रत्येक घायल के इलाज और तीमारदारी
का संपूर्ण व्यय वहन करने की मांग भी सरकार से की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में
भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि यात्रियों पर बार बार बढाये जारहे भाडे और
कटौतियों का भार लादने वाला रेल मंत्रालय रेलवे के विकास और सुरक्षा के संबंध में जरुरी
कदम नहीं उठा पारहा है. यही वजह कि रेलवे के ये तीन साल हादसे और जान लेने के साल बन
गये हैं. एक के बाद एक बडी रेल दुर्घटना होरही है जिनमें अब तक सैकडों लोगों की जान
जाचुकी है. कल की रेल दुर्घटना में भी रेल प्रशासन की मुजरिमाना लापरवाही उजागर होचुकी है.
मगर न रेल मंत्री को शर्म आयी न प्रधानमंत्री की संवेदना जागी. हमें अच्छी तरह याद
है कि जिस दिन प्रधानमंत्री शपथ लेने वाले थे उस दिन ही एक बडा रेल हादसा होचुका था
लेकिन प्रधानमंत्रीजी ने अपने शपथग्रहण समारोह की लक- दक में कोई कमी नहीं की थी.
भाकपा ने आरोप जड़ा कि इस सरकार
की संवेदना पूरी तरह मर चुकी है. और सरकारी तंत्र अपनी नाकामयाबियों पर पर्दा डालने
को इसे आतंकी घटना बताने की कोशिश में जुटा है. यदि ऐसा है भी तो इसके लिये मोदी योगी
के अलाबा कौन जिम्मेदार है? पूर्व की सरकारों को बात बात पर कठघरे में खड़ा करने वाली सरकार
को याद दिलाना चाहते हैं कि स्वर्गीय श्री लालबहादुर शास्त्री जब रेल मंत्री थे तो
उन्होने मामूली से रेल हादसे के बाद स्तीफा देदिया था. पर एक के बाद एक नर संहार होने
के बावजूद भाजपा का न कोई मंत्री स्तीफा देरहा है न मुख्यमंत्री. यह जनता के प्रति
जबावदेही के सिध्दांत को ठेंगा दिखाना है.
भाकपा ने रेलवे द्वारा घोषित
मुआबजे को अपर्याप्त बताते हुये हर मृतक परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये मुआबजा देने तथा हर घायल का समुचित इलाज कराने की मांग की है.
भाकपा ने अपनी मुज़फ्फरनगर जिला
इकाई को निर्देश दिया है कि वह वहाँ घायलों के उपचार में पूरा सहयोग करें और अन्य जिला
इकाइयों को कहा है कि वे रेल मंत्री के स्तीफे और मृतक परिवारों को पर्याप्त मुआबजे
की मांग को लेकर आंदोलन करें
डा. गिरीश
गुरुवार, 17 अगस्त 2017
at 8:00 pm | 0 comments |
Gorakhpur Carnege: left Parties will protest on August 24 on Districts headquarter in Uttar Pradesh
गोरखपुर की हृदयविदारक
घटना में अबोध बच्चों की मौत के सभी जिम्मेदारों को सजा दिलाने
और
स्वास्थ्य सेवाओं को
व्यापक बनाने और भ्रष्टाचार से मुक्त कराने आदि मांगों को लेकर
उत्तर प्रदेश के
वामपंथी दल 24 अगस्त को संयुक्त रुप से विरोध प्रदर्शन करेंगे
लखनऊ- गत दिनों गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन के
अभाव में हुयी भयंकर घटना में मरने वाले निरीह बच्चों की संख्या अब तक 100 का
आंकड़ा पार कर चुकी है. पीड़ित बच्चों की मौत का सिलसिला अभी भी थमने का नाम नहीं
लेरहा है. अब वहां इन्सेफिलाइटिस ने कहर वरपाना शुरु कर दिया है जिसकी रोकथाम न
पूर्ववर्ती सरकारें कर पायीं न गत तीन सालों में भाजपा की केंद्र सरकार. जबकि यह
क्षेत्र उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री का चुनाव क्षेत्र है और वे जब विपक्ष
में थे तो इस मसले पर काफी शोरगुल मचाते रहते थे. अब इस क्षेत्र में भारी बाढ आयी
हुयी है और सरकार उसकी विभीषिका से नहीं निपट पारही. अब बाढ और जलभराव से तमाम
महामारियां फैलेंगीं और असंवेदनशील सरकार तथा भ्रष्टाचार और जडता की हालत में
पहुंचा सरकारी स्वास्थ्य सेवा तंत्र इससे कैसे निपटेंगे यह एक बड़ा सवाल खड़ा होगया
है.
बच्चों की मौत का गम तो कभी
भुलाया नहीं जा सकता; पर उन घावों का भर पाना बेहद मुश्किल है जो इस त्रासदी के
बाद हुक्मरानों ने दिये हैं. प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने बयान दिया कि 'अगस्त माह में तो इससे भी
ज्यादा मौतें होती हैं.' मुख्यमंत्री ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाडते हुये कह
डाला कि मौतें आक्सीजन के अभाव के कारण नहीं हुयीं. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने
घावों पर नमक छिड़कने वाला बयान दिया कि इतने बड़े देश में ऐसी वारदातें तो होती ही
रहती हैं. अपने लाल किले से दिये गये भाषण में प्रधान मंत्री ने घटना का सतही तौर
पर जिक्र किया और राज्य सरकार की अकर्मण्यता पर एक शब्द भी नहीं बोला. इतना ही
नहीं अपनी घटिया और सांप्रदायिक सोच का प्रदर्शन करते हुये सरकार ने एक
कर्तव्यपरायण डाक्टर जो कि अल्पसंख्यक समुदाय से हैं और जिन्होने इन बच्चों की जान
बचाने को भारी मशक्कत की को बलि का बकरा बना डाला.
अब जिलाधिकारी गोरखपुर की
जांच में खुलासा हुआ है कि आक्सीजन की सप्लाई बाधित हुयी थी और इसी वजह से बड़े
पैमाने पर मौतें हुयीं. इस जांच के बाद राज्य सरकार को मुहं छिपाने को भी जगह नहीं
बची.
वामपंथी दलों ने इस जघन्य कांड
पर गहरा दुख और क्षोभ व्यक्त किया है. वे चाहते हैं कि पीडितों के जख्म भरने को
ऊपर से नीचे तक दोषियों को दंडित किया जाये. इसके लिये राज्य सरकार को जिम्मेदारी लेनी
चाहिये और स्वास्थ्य मंत्री को तो फौरन स्तीफा देना चाहिये. समूची वारदात्त की न्यायिक जांच की जानी चाहिये.
मृतक प्रत्येक बच्चे के परिवार को रुपये पच्चीस लाख बतौर संवेदना राशि और अभी भी
इलाज करा रहे बच्चों के इलाज और तीमारदारी की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिये.
वामपंथी दलों का मानना है कि सरकारों की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार के चलते प्रदेश
में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है और वे पंगुता की स्थिति में हैं. स्वास्थ्य
बजट में भारी बढोत्तरी किये जाने और स्वास्थ्य व्यवस्था को भ्रष्टाचार से मुक्त
किये जाने की जरुरत है. इंसेफिलाइटिस, डेंगू, चिकुनगुनियां और स्वाइन फ्लू जैसी बीमारियों के खिलाफ एक
सुनियोजित अभियान चलाने की जरुरत है. इसके लिये स्वच्छता अभियान के प्रपोगंडा को
हकीकत में बदलने की जरूरत है. हर सालआने वाली बाढ और और उसके बाद फैलने वाली
महामारियों की रोकथाम के लिये ठोस कदम उठाने की जरुरत है.
सरकार की सोई संवेदनाओं को
जगाने और पीढितों को न्याय दिलाने को वामपंथी दल अलग अलग और मिल कर लगातार अभियान
चला रहे हैं और अब उन्होने संयुक्त बैठक कर 24 अगस्त को संयुक्त रुप से प्रदेश भर
में जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है. प्रदर्शनों के बाद
राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन सौंपे जायेंगे. ज्ञापन के जरिये निम्न
मांगें उठायी जायेंगी.
1-
गोरखपुर बाल संहार की
जिम्मेदारी समस्त राज्य सरकार की है और वह इसे वहन करते हुये अपने स्वास्थ्य
मंत्री को हठाये.
2-
अन्य सभी दोषियों को
चिन्हित करने और उन्हें सजा दिलाने को इस कांड की न्यायिक जांच कराई जाये.
3-
प्रत्येक मृतक बच्चे के
परिवार को रुपये 25 लाख की संवेदना राशि फौरन दी जाये और जिन बच्चों का आज भी इलाज
चल रहा है उनके इलाज की समुचित व्यवस्था की जाये.
4-
स्वास्थ्य बजट को बढा कर कम
से कम दोगुना किया जाये. स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त किया
जाये. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत सुधारी जाये. हर नागरिक को मुफ्त इलाज
और दवाओं का दायित्व सरकार ले.
5-
हर एक लाख की आबादी पर सौ शय्याओं
वाला दवाओं, डाक्टरों और उपकरणों से सुसज्जित अस्पताल खोला जाये और हर दस लाख की आबादी पर
एक हजार शय्याओं वाले सुपर स्पेसियलिटी अस्पताल खोले जायें.
6-
लुटेरी निजी स्वास्थ्य
सेवाओं को सीमित किया जाये.
7-
इंसेफिलाइटिस, डेंगू, चिकुनगुनियां और स्वायन
फ्लू जैसी महामारियों की रोक थाम के लिये विशेष अभियान चलाया जाये.
8-
सूबे के विभिन्न इलाकों में
आने वाली बाढ और उसके बाद फैलने वाली महामारियों की रोकथाम के लिये ठोस कदम उठाये
जायें.
9-
बीमारियों की रोकथाम के
लिये टीवी विज्ञापनों पर चर्चित स्वच्छता अभियान को जमीन पर उतारा जाये और
विज्ञापनों पर खर्च होरही धनराशि को सफाई कर्मियों की नियुक्ति और सफाई के लिये आवश्यक
उपकरण खरीदने पर खर्च किया जाये.
आंदोलन कर ज्ञापन देने
का निर्णय भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मा. ), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले), आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक तथा
एसयूसीआई- सी के राज्य नेतृत्व की संयुक्त बैठक में लिया गया.उदीोकप
रविवार, 13 अगस्त 2017
at 4:06 pm | 0 comments |
गोरखपुर काण्ड की जिम्मेदारी ले राज्य सरकार : भाकपा ने सीबीआई जांच कराने की मांग की
लखनऊ- 13 अगस्त- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी ने गोरखपुर
की ह्रदय विदारक घटना जिसमें कि अब तक 60 से अधिक बच्चों की मौत की खबरें आरही
हैं, पर गहरा अफसोस व्यक्त किया है. भाकपा ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी
संवेदना व्यक्त की है. पार्टी ने प्रत्येक मृतक बच्चे के परिवार को रूपये पांच लाख
बतौर संवेदना राशि देने की मांग की है. घटना को उत्तर प्रदेश सरकार की मुजरिमाना
लापरवाही करार देते हुए भाकपा ने सरकार से इसकी जिम्मेदारी कबूल करने की मांग की
है. साथ ही घटना की गंभीरता को देखते हुए इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की
है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि मुख्यमंत्री
के गृह जनपद में घटित इस जघन्यतम "नर संहार" जैसी घटना से अनुमान लगाया
जासकता है कि उत्तर प्रदेश के हालात किस हद तक भयावह होचुके हैं. लेकिन बेहद अफसोस
की बात है कि मुख्यमंत्री सहित समूची सरकार इस घटना पर इतनी गैर संवेदनशील है कि
वह इसको सामान्य घटना बता रही है. जो स्वास्थ्य मंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री
इसके लिए जिम्मेदार हैं, उनसे स्तीफा माँगने बजाय उन्हीं से जांच कराने का नाटक
किया जारहा है. क्या इस घटना की जिम्मेदारी विश्विद्यालय के प्रधानाचार्य पर डाल
कर सरकार इससे बचना चाहती है? या मुख्य सचिव से जांच करा के मामले में लीपा पोती करना
चाहती है? बात बात पर सीबीआई की जांच बैठाने वाली और विपक्ष को सीबीआई जांच कि
धमकी देने वाली सरकार इस काण्ड की सीबीआई जांच से क्यों मुकर रही है? भाकपा ने
सवाल उठाये हैं.
भाकपा पुरजोर शब्दों में मांग करती है कि प्रकरण की सीबीआई से जांच कराई जाए
ताकि समस्त दोषियों को सजा दिलाई जासके. भाकपा ने मृतकों के परिवार को संवेदना
राशि और जिनका इलाज अभी भी चल रहा है उन्हें अनुदान राशि शीघ्र से शीघ्र प्रदान
करने की मांग की है.
भाकपा ने अपनी समस्त जिला इकाइयों और अनुयायियों का आह्वान किया है कि वे
सरकार की संवेदना को झकझोरने और इस काण्ड के पीडितों को न्याय दिलाने को आवाज
उठायें और मोमबत्ती मार्च निकालें, धरने प्रदर्शन और पुतला दहन आदि कार्यक्रम
आयोजित करें.
डा. गिरीश
गुरुवार, 10 अगस्त 2017
at 5:39 pm | 0 comments |
भाकपा ने टीईटी अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज की निंदा की
लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आज
बी.एड. और टेट प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक अभ्यर्थियों पर लखनऊ में हुए लाठीचार्ज
जिसमें कि कई महिलायें और पुरुष अभ्यर्थी घायल हुए हैं, कड़े शब्दों में निंदा की
है. पार्टी ने इस दमन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग
की है.
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि ये
प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थी 2011 से लेकर आज तक रोजगार पाने की मांग कर रहे हैं और
राज्य सरकार द्वारा निकाली गयी रिक्तियों के विज्ञापनों के अनुसार किये गए आवेदनों
पर हर अभ्यर्थी कई कई हजार रुपये खर्च कर चुका है. इस बीच प्रदेश में तीन- तीन
सरकारें बदल गयीं मगर इन्हें रोजगार नहीं मिला है. इस बार इन सबने भाजपा से गहरी
उम्मीद लगाई थी और गत चुनावों में उन्हें वोट भी दिया था, लेकिन इस सरकार ने भी
उन्हें न्याय दिलाने के बजाय लाठियां ही बरसाईं. ज्ञात हो कि ये अभ्यर्थी भाजपा के
कार्यालय और विधान सभा के समक्ष धरना देरहे थे जहां पुलिस ने भीषण लाठीचार्ज कर
उन्हें खदेड़ दिया.
भाकपा ने इन अभ्यर्थियों की मांगों को न्यायोचित बताते हुए कहाकि वह शिक्षा का
बजट बढाये और शिक्षा के प्रसार के लिए इस युवा शक्ति का संजीदगी से स्तेमाल करे.
डा. गिरीश
बुधवार, 9 अगस्त 2017
at 2:15 pm | 0 comments |
CPI Called for Secular Democratic and Left Platfarm
देश और लोकतंत्र को
बचाने के लिये 'धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और वामपंथी प्लेटफार्म' तैयार किया जाये
भारत छोड़ो आंदोलन की
वर्षगांठ पर भाकपा ने किया आह्वान
लखनऊ/ हाथरस- 9 अगस्त 2017, भारत छोड़ो आंदोलन की
वर्षगांठ पर आज भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने समूचे उत्तर प्रदेश में कई कार्यक्रम
आयोजित किये. इस अवसर पर सभायें, विचार गोष्ठियां और जहां- तहां धरने/ प्रदर्शन किये गये.
लखनऊ में एनसीपी द्वारा गांधी प्रतिमा पर आयोजित धरने में भाकपा ने शिरकत की तो
अन्य कई जगहों पर वामपंथी और लोकतांत्रिक संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में
भाकपा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने भाग लिया.
हाथरस में भाकपा के
तत्वावधान में- "आज के राजनैतिक संदर्भों में भारत छोड़ो आंदोलन का
संदेश" विषय पर एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य वक्ता भाकपा
के राज्य सचिव डा. गिरीश थे.
डा. गिरीश ने कहा कि
महात्मा गांधी के नेतृत्व में 'अंग्रेजो भारत छोड़ो' नारे के साथ हुये इस आंदोलन में देश के लाखों
लोग सड़कों पर उतर आये थे जिससे भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिल गयी थी और
पांच साल बाद ही अंग्रेजों को यहां से भागना पड़ा था. आज़ादी से पहले और उसके बाद हम
सबने एक ऐसे भारत के निर्माण का सपना देखा था जिसमें देश के हर नागरिक को रोटी, कपड़ा, मकान, इलाज, रोजगार, पढाई और सम्मान उपलब्ध हो
और सभी बोली- भाषाओं तथा धर्मों और रीति रिवाजों को मानने वाले लोग शांति और
भाईचारे के साथ देश की तरक्की में योगदान करें. लेकिन आज उसके ठीक विपरीत घटित
होरहा है.
उन्होने कहाकि आज कर्ज में
डूबे किसान और दस्तकार आत्महत्यायें कर रहे हैं और उनके कर्जमाफी पर बहुत चिल्लपों
मची है लेकिन कार्पोरेट और पूंजीपति समर्थक इस सरकार ने गत पांच वित्तीय वर्षों में
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लगभग 2. 5 लाख करोड़ रुपये के ऋण को ‘डूबा ऋण’ घोषित किया है. इसमें से
81,683 करोड़ रुपये पिछले वित्त वर्ष- 2016- 17 के हैं. यदि इस धन को सख्ती से
बसूला जाये तो इससे देश के किसानों- कामगारों पर बैंकों का बकाया ऋण आसानी से माफ
किया जा सकेगा. इसी तरह यदि बैंकों के अब तक के समस्त ना चुकता ऋणों ( एनपीए ) को
बकायेदारों से बसूल कर लिया जाये तो देश के समस्त किसानों और मजदूरों को कम से कम
10 साल तक 10 हजार रुपये प्रति माह पेंशन देने लायक धन जुटाया जा सकता है. लेकिन
इस सरकार ने पिछले तीन सालों में कारपोरेट पूंजी को टैक्स घटा कर कई रियायतें दीं
हैं और गरीबों की कमर तोड़ने का काम किया है.
उन्होने कहाकि पाकिस्तान
जैसे अर्ध्द लोकतांत्रिक देश में पनामा लीक्स पेपर्स में नाम आने पर वहां के प्रधानमंत्री
को कुर्सी छोड़नी पड़ी है, लेकिन भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में इस सूची के नाम क्यों
उजागर नहीं किये जारहे हैं?
डा. गिरीश ने कहा कि मौजूदा
केंद्र सरकार अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर सर्वसत्ताहरण के प्रयासों में लगी है.
चीन की तरह इसकी नीति आंतरिक विस्तारवादी है. अपने सर्वसत्ताहरण और विस्तारवाद को
आगे बढाने को वह सभी पार्टियों में तोड़- फोड़ कर रही है और उनके एक से एक दागी
नेताओं से दल बदल करा कर भाजपा में शामिल करा रही है. कल गुजरात से राज्यसभा के चुनाव
में उसने जो कुछ किया उससे लोकतंत्र शर्मसार हुआ है. वह ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ और ‘वामपंथ मुक्त भारत’ जैसे अलोकतांत्रिक नारे
देरही है. सारी नैतिक मर्यादायें ताक पर रख विपक्ष की सरकारों को अपने अधीन कर रही
है. अतएव आज लोकतंत्र को भारी खतरा पैदा होगया है. गरीबों के हक सरे आम छीन रही इस
सरकार ने गरीबों को भ्रमित करने को मंदिर निर्माण, गोरक्षा, गंगा की पवित्रता और लव जेहाद जैसे मुद्दे उछाल
रखे हैं और इन्हीं को लेकर वह दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं आदि पर निरंतर हमले करा रही है.
गरीबों को मिलने वाली तमाम राहतों को समाप्त करती जारही इस सरकार ने गरीबों को
अनेक पाबंदियों में जकड़ डाला है.
वह ऐसा क्यों कर रही है? इस सवाल के जबाव में डा.
गिरीश ने कहा कि सता पर काबिज संघ और उसकी चेरी भाजपा ने अपने को आज़ादी की लड़ाई से
न केवल दूर रखा अपितु सांप्रदायिकता को भड़का कर आज़ादी की राह में रोड़े अटकाये. वह
जनता से भी कोसों दूर रही है. उसने भारत के उदार और सामासिक ताने बाने को छिन्न
भिन्न करने को कट्टर हिंदुत्व का सिध्दांत गड़ा और कथित हिंदू राष्ट्र के मोहजाल
में तमाम जनता को फांस लिया. आज सत्ता में पहुंचने पर इनका असली- विभाजक और
जनविरोधी चेहरा सामने आगया है. लोग समझते जारहे हैं कि आरएसएस एक नस्लवादी सत्ता
हड़प गिरोह है और धर्म उसका मुखौटा मात्र है.
उन्होने कहाकि आज की
राजनैतिक पृष्ठभूमि में भारत छोड़ो आंदोलन का यही संदेश है कि हम सब लोकतंत्र की
रक्षा के लिये, पूंजीपतियों और कारपोरेट्स को आम नागरिक की कीमत पर एकतरफा बढ़ावा देने की
कोशिशों को रोके जाने, सत्तर साल में हमने जो कुछ हासिल किया है उसको बरवाद होने
से रोके जाने और देश की एकता अखंडता को बचाने के लिये मिल कर संघर्ष करें.
लोकतंत्र में ही अपने अधिकारों को हासिल करने की लड़ाई लड़ी जा सकती है. उन्होने
कहाकि इसीलिये भाकपा ने इन मुद्दों पर संघर्ष के लिये एक 'धर्मनिर्पेक्ष, लोकतांत्रिक और वामपंथी
प्लेटफार्म' के निर्माण का आह्वान किया है. उन्होने कहाकि यह प्लेटफार्म देशहित में काम
करेगा चुनावी हितों से इसे नहीं जुड़ने दिया जायेगा. उन्होने सभी धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक और वामपंथी
शक्तियों से इस दिशा में शीघ्र और ठोस कदम उठाने की अपील की.
गोष्ठी को जिला सचिव
चरनसिंह बघेल, जगदीश आर्य, राजाराम, नबाव खां, आर. डी. आर्य, नूर मुहम्मद, पपेंद्र कुमार, संजय खान, गौरीशंकर बघेल, होशियार सिंह एवं शैलेंद्र कुमार सिंह आदि ने संबोधित
किया.
समाचार मेल किये जाने तक लगभग
दो दर्जन जिलों से कार्यक्रम आयोजित किये जाने के समाचार प्राप्त हुये हैं.
डा. गिरीश
रविवार, 30 जुलाई 2017
at 6:50 pm | 0 comments |
CPI State counsil
किसानों, नौजवानों और आम जनता के सवालों
पर आंदोलन करेगी भाकपा
लखनऊ- 30 जुलाई 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की
राज्य काउंसिल ने कहाकि राज्य सरकार की नीतियों के परिणामस्वरुप प्रदेश में नीलगायों
और छुट्टा पशुओं ने किसानों की फसलों की तबाही मचा दी है और नगरीय क्षेत्रों में आवारा
पशु लोगों पर हमले बोल रहे हैं और अनेक लोगों की जानें तक लेचुके हैं. भाकपा मांग करती
है कि सरकार नील गायों को नियंत्रित करने को फौरन ठोस कदम उठाये और आवारा पशुओं के
लिये सरकार नियंत्रित बाड़े (कांजी हाउस) बनवाये और फालतू घूम रहे गोवंश को गोशालाओं
में रखने का इंतजाम करे. पार्टी ने कहाकि यदि इस समस्या का तत्काल निदान नहीं किया
तो किसान तबाह होकर रह जायेंगे. भाकपा इस मुद्दे पर जन अभियान छेड़ेगी.
यहाँ दो दिन तक चली भाकपा की
राज्य काउन्सिल की बैठक में 24, 25 एवं 26 जुलाई को हुये प्रदेशव्यापी आंदोलन जिसके तहत उत्तर
प्रदेश में तहसीलों और जिला केंद्रो पर तीन दिनों तक धरने- प्रदर्शन किये गये और कुल
मिला कर 25,000 लोग सडकों पर उतरे; की व्यापक समीक्षा की गयी और इसे सफल बनाने के लिये जिला काउंसिलों
और पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी गयी.
बैठक को संबोधित करते हुये भाकपा
राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि मोदी और योगी सरकार की नीतियों ने किसानों, मजदूरों, दलितों, महिलाओं अल्पसंख्यकों, छात्रों- नौजवानों पर मुसीबतों
का बढा पहाड़ लाद दिया है और वे कराह उठे हैं. महंगाई की मार से आम जनता बदहाल है. अपराध
और अत्याचारों ने प्रदेश के जनजीवन को अस्त- व्यस्त कर दिया है. अतएव जनता के उन तमाम
सवालों जिन पर 24 से 26 जुलाई का आंदोलन हुआ को शामिल करते हुये आंदोलन को और नीचे
तक ले जाया जायेगा और ब्लाक स्तरों पर धरने प्रदर्शन और गांव, कस्बों और शहरों में सभायें
लगातार की जायेंगी. इन आंदोलनों को सफल और व्यापक बनाने को मंडलीय और क्षेत्रीय बैठकें
भी की जायेंगी. लखनऊ मंडल की बैठक 5 अगस्त, इलाहाबाद मंडल की 6 अगस्त और वाराणसी मंडल की 12
अग्स्त को होगीं तथा अन्य की तिथि भी शीघ्र निर्धारित की जायेगी.
सह सचिव का. अरविंदराज स्वरुप
ने सांगठनिक सवालों पर रिपोर्ट रखी तथा सहसचिव का. इम्तियाज़ अहमद ने प्रदेश के बिगडते
हालातों पर चर्चा की. बैठक की अध्यक्षता का. हामिद अली एड्वोकेट ने की तथा 31 साथियों
ने चर्चा में भाग लिया.
बैठक में भाजपा द्वारा लोकतंत्र, भारत के धर्मनिरपेक्ष ताने
बाने और कमजोरों पर बोले जारहे हमलों के खिलाफ तथा उसके द्वारा सता की भूख में तमाम
मर्यादायें तोड कर विपक्षी दलों को छिन्न भिन्न करने के प्रयासों के खिलाफ तमाम धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक एवं वामपंथी ताकतों
के मंच के निर्माण की आवश्यकता महसूस की गयी और इसके लिये पहल का निश्चय किया गया.
भाकपा इसके लिये शीघ्र ही प्रदेश के वामपंथी दलों से चर्चा करेगी.
बैठक में एक प्रस्ताव पारित
कर शिक्षा मित्रों को समकक्ष वेतन वाले अन्य पदों पर समायोजित करने की मांग की गयी.
केंद्र और राज्य सरकार की वायदा खिलाफी और उनके कतिपय कदमों यथा- नोटबंदी, मीटबंदी, खननबंदी, नियुक्ति प्रक्रियाओं पर रोक
आदि से प्रदेश के नौजवान और श्रमिक बडे पैमाने पर बेकारी की मार झेल रहे हैं और उनके
सामने बड़ी विपत्ति खड़ी होगयी है. भाकपा ने इन सभी बेरोजगारों के प्रति हमदर्दी जताते
हुये उनकी मांगों और आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की है. साथ ही आंगनबाड़ियों, आशा बहुओं और मध्यान्ह भोजन
रसोइयों के मानदेय बढा कर न्यूनतम वेतनमान दिये जाने की मांग की है. पर्ल इंडिया के
ठगे गये एजेंटों और जमाकर्ताओं का धन वापस कराने की मांग केंद्र सरकार से की है.
भाकपा ने निकाय चुनाव शीघ्र
से शीघ्र कराने की मांग की तथा बड़े पैमाने पर चुनावों में उतरने का निश्चय किया है.
भाकपा राज्य काउंसिल ने आल इंडिया
स्टूडेंट्स फेडरेशन एवं अखिल भारतीय नौजवान सभा द्वारा रोजगार, शिक्षा और लोक्तंत्र की रक्षा
जैसे देश को मथ रहे सवालों पर कन्याकुमारी से हुसैनीवाला (पंजाब ) तक निकाले जारहे
“बचाओ भारत बदलो भारत” लोंग मार्च का समर्थन करते हुये सितंबर के प्रथम सप्ताह में
इसके उत्तर प्रदेश भ्रमण कार्यक्रम को सफल बनाने की जरूरत पर बल दिया.
डा. गिरीश
बुधवार, 26 जुलाई 2017
at 4:26 pm | 0 comments |
Three days agitation of CPI in U.P. is very successful
भाकपा के तीन दिवसीय
आंदोलन में हजारों किसान कामगारों ने भागीदारी की
लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
की राष्ट्रीय परिषद के आह्वान पर किसानों की निरंतर जर्जर होरही आर्थिक स्थिति और
उनके द्वारा की जारही आत्महत्यायें, अभूतपूर्व बेरोजगारी की मार झेल रहे मजदूरों और युवाओं की
समस्याओं, केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जनता से किये गये वायदों से पूरी तरह
किनाराकशी, उत्तर प्रदेश में जघन्य अपराधों से जूझ रही जनता की वेदना को उजागर करने और
प्रदेश में दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों और कमजोर तबकों के साथ लगातार होरही उत्पीडन
की वारदातों पर अविलंब लगाम लगाये जाने आदि ज्वलंत सवालों पर भाकपा ने समूचे उत्तर
प्रदेश में 24 से 26 जुलाई तक तीन दिवसीय
आंदोलन चलाया.
भाकपा की राज्य सचिव मंडल
द्वारा की गयी आंदोलन की समीक्षा के अनुसार भारी वर्षा और धान की रोपाई के बावजूद प्रदेश
के 64 जिलों में 25 हजार से भी अधिक कार्यकर्ता और जनता इन तीन दिनों में सड़कों पर
उतरे. कई जिलों में तीन दिनों तक लगातार जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर धरने दिये
गये तो कई जिलों में जिला मुख्यालय पर दिन रात सत्याग्रह जारी रहा. अधिकतर जिलों
में पूरे तीन दिन कार्यक्रम चला तो कई छोटे जिलों ने दो या एक दिन कार्यक्रम
चलाया. जिन जिलों ने तीन दिनों तक अभियान चलाया उनमें दो दिन तहसील केंद्रों पर तो
एक दिन जिला केंद्र पर प्रदर्शन किये. सभी जगह महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल को संबोधित
ज्ञापन स्थानीय अधिकारियों को सौंपे गये. कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों से प्रशासन
की झडपें भी हुयीं.
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने
इस बात पर अफसोस जताया कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के सत्ता संभालने के बाद यह
सबसे अधिक जन भागीदारी वाला आंदोलन है लेकिन टीवी चैनल्स ने इसकी पूरी तरह उपेक्षा
की तो अखबारों ने केवल स्थानीय स्तर पर ही कुछ कबरेज किया. पूंजीवादी दलों के
नेताओं को जुकाम होने को बड़ी खबर बताने वाले मीडिया ने देश और प्रदेश की बहुसंख्यक
जनता की समस्याओं पर केंद्रित इस आंदोलन पर ब्लैक आउट रखा. भाकपा इसे जनता की
समस्याओं पर पर्दा डाले रखने की मीडिया की कवायद के रूप में देख रही है.
राजधानी लखनऊ में आज भाकपा के
सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय कैसरबाग से जुलूस निकाला और जी. पी. ओ. स्थित
गांधी प्रतिमा के समक्ष सभा की. इससे पूर्व 24 जुलाई को मोहनलालगंज और 25 जुलाई को
बख्शी का तालाब तहसील पर प्रदर्शन किये.
भाकपा मुख्यालय को प्राप्त
सूचना के अनुसार जनपद जालौन के उरई स्थित मुख्यालय पर विशाल प्रदर्शन किया गया और
तहसील केंद्रों पर धरने दिये गये. भाकपा का यह जुलूस उरई में गत कई वर्षों में
किसी भी राजनैतिक दल द्वारा किये गये प्रदर्शनों से बढ़ा था. अनुमति के नाम पर
प्रशासन ने बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की. महिलाओं युवाओं और छात्रों की भागीदारी
उल्लेखनीय थी. जनपद गोंडा के जिला मुख्यालय पर तीन दिन तक लगातार चले धरने में
हजार से अधिक किसान- कामगारों की भागीदारी रही. गाज़ीपुर के जिला मुख्यालय पर का. सरयू
पांडे पार्क में तीन दिन/ रात चले धरने को स्थानीय समाचारपत्रों ने सतत सत्याग्रह
की संज्ञा दी. यहाँ भी प्रशासन ने अनुमति के नाम पर धरने को हठाने की असफल कोशिश
की. जौनपुर में तीन दिन तक तहसीलों और जिला केंद्र पर हुये प्रदर्शनों में सैकड़ों
की तादाद में लोगों ने हुंकार भरी. भदोही में भी तीनों दिन तहसील और जिला केंद्रों
पर सैकड़ों की तादाद में किसान, कामगार, दस्तकार जुटे और सरकार की अकर्मण्यता पर हमला बोला. बलिया
में जिला मुख्यालय के अतिरिक्त कई तहसीलों पर धरने और सभायें हुयीं. गोरखपुर के टाउनहाल
ग्राउंड में धरना एवं सभा का आयोजन किया गया.
कानपुर महानगर में जिला
मुख्यालय और तहसील केंद्र पर जुझारु प्रदर्शन हुआ तो अलीगढ़ के जिला मुख्यालय पर
धरना दिया गया. मथुरा में भी जिला मुख्यालय और तहसील केंद्र पर प्रदर्शन किये गये.
जिला मुख्यालय पर ज्ञापन लेने जब कोई सक्षम अधिकारी नहीं आया तो जिलाधिकारी कार्यालय
पर घेरा डाल दिया गया. बाद में अपर जिलाधिकारी ने पहुंच कर ज्ञापन लिया. हाथरस में
तीन तहसीलों पर धरने हुये तो हापुड़ के जिला मुख्यालय पर पहली बार भाकपा का धरना
हुआ. मेरठ में जिला मुख्यालय और तहसील मवाना पर प्रदर्शन हुये. बुलंदशहर की स्याना
और अनूपशहर तहसीलों पर धरने/ प्रदर्शन किये गये. औरैया के जिला मुख्यालय पर
प्रदर्शन किया गया. शामली जिला मुख्यालय पर बहुत अर्से बाद शानदार प्रदर्शन हुआ.
बिजनौर में कई तहसील मुख्यालयों पर तो मुरादाबाद और अमरोहा में जिला मुख्यालयों पर
प्रदर्शन किये गये. मुज़फ्फरनगर के जिला मुख्यालय पर भी प्रदर्शन किया गया. हरदोई
के जिला मुख्यालय और तहसील केंद्र पर प्रदर्शन हुये.
इलाहाबाद जनपद मुख्यालय पर
शानदार प्रदर्शन के अलाबा एक तहसील केंद्र पर धरना हुआ. श्रावस्ती के जिला
मुख्यालय इकौना में पहली बार सैकड़ों की तादाद में किसानों मजदूरों ने सरकार की
जमीन हड़पने की कारगुजारी के खिलाफ ललकारा. फतेहपुर जनपद के खागा में शानदार
प्रदर्शन हुआ. बहराइच और बलरामपुर में भी प्रदर्शन किये गये. मैनपुरी के जिला
मुख्यालय और तहसील घिरोर पर धरने हुये. देवरिया में भी जिला मुख्यालय के अतिरिक्त
रामपुर कारखाना तहसील पर धरना हुआ. बाराबंकी में जेल भरो किया गया तो शहजहांपुर
में जिला मुख्यालय पर धरना दिया गया. प्रशासन से भाकपा कार्यकर्ताओं की झड़्प भी
हुयी. वाराणसी की पिंड्रा तहसील पर धरना दिया गया. झांसी में जिलाधिकारी कार्यालय पर
शानदार प्रदर्शन हुआ जिसमें छात्र महिलायें व पल्लेदार अच्छी संख्या में शामिल थे.
बदायूं में जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन हुआ जिसमें आंगनबाढी कार्यकर्त्रियां
भी शामिल रहीं. आज के कार्यक्रमों की रिपोर्ट समाचार लिखे जाने तक लगातार प्राप्त होरही
हैं.
आंदोलनकारियों ने केंद्र और
राज्य सरकार द्वारा किये गये वायदों की याद दिलाते हुये किसानों की आमद डेढ़ गुना
बढाने और उनके समस्त कर्जे माफ करने की मांग की. खेती की बढ़्ती लागत को नीचे लाने
और कृषि उपयोगी जिंसों को करमुक्त किये जाने सहित स्वामीनाथन आयोग की सभी
सिफारिशें अविलंब लागू करने की मांग की. कृषि उत्पादों की लगातार गिर रही कीमतों
को स्थिरता प्रदान करने को सरकार द्वारा एक लाख करोड़ रुपये का फंड स्थापित करने और
60 वर्ष के सभी किसानों खेत मजदूरों और दस्तकारों को रु. 10,000 प्रति माह पेंशन देने
की मांग भी की. मोदी सरकार द्वारा लाये गये भूमि अधिग्रहण अध्यादेश 2014 को तत्काल
वापस लिये जाने व पट्टाधारकों को जमीन व
मकानरहितों को मकान देने की मांग की.
ज्ञापनों में भाजपा के
चुनावी वायदे की याद दिलाते हुये युवाओं को रोजगार दिलाने और नोटबंदी, मीटबंदी, खामी भरी खनननीति और
भर्तियों के रद्द करने से उत्तर प्रदेश में युवाओं और मजदूरों को झेलनी पड़
रही बेकारी की मार से बचाने की मांग की.
सहारनपुर, संभल की घटनाओं की न्यायिक जांच कराने और वहां दलितों के खिलाफ की जारही
एकतरफा कार्यवाही को रोके जाने की मांग की. दलितों अल्पसंख्यकों महिलाओं छात्रों
युवाओं पर होरहे बेतहाशा अत्याचारों को फौरन रोके जाने और हत्या लूट व
भ्रष्टाचार पर कारगर रोक लगाने की मांग
की. राज्य सरकार की पशुनीति के चलते ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवारा पशुओं की
आयी बाढ़ से किसानों की फसलों और इंसानों की जिंदगी पर आये संकट से निजात दिलाने की
मांग भी की गयी है.
इसके अलाबा बढ़्ती महंगाई पर
रोक लगाने तथा जनता की रोजमर्रा की जरुरियातों- दवाओं आदि को जीएसटी के दायरे से
मुक्त कराने की मांग की.
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने ऐसे
समय में जबकि मोदी और योगी सरकार का चाबुक आम जनता पर निर्ममता से चल रहा है और प्रदेश
की नामी गिरामी पार्टियां खामोश बैठी हैं, भाकपा कार्यकर्ता और समर्थकों को जनता के हक की
आवाज शानदार तरीके से बुलंद करने के लिये उन्हें क्रांतिकारी बधाई दी है.
डा. गिरीश
शनिवार, 22 जुलाई 2017
at 1:15 pm | 0 comments |
Agitation of CPI
किसान- कामगारों की समस्याओं
और उत्तर प्रदेश में कमजोर तबकों के उत्पीड़न के खिलाफ भाकपा का प्रदेशव्यापी आंदोलन
24 से 26 जुलाई तक
लखनऊ- किसानों- कामगारों की ज्वलंत
समस्याओं के समाधान और उत्तर प्रदेश में व्याप्त अराजकता के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट
पार्टी 24, 25 और 26 जुलाई को समस्त जिलों में प्रदर्शन आयोजित करेगी. भाकपा की राष्ट्रीय
परिषद के निर्देश और राज्य कार्यकारिणी के आह्वान पर होने जारहे प्रदर्शनों के उपरांत
महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिले के अधिकारियों को सौंपे जायेंगे.
भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश
के अनुसार यह आंदोलन स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किये जाने, खेती की बढती लागत को नीचे
लाने, क्रषि उपादानों को जीएसटी के बाहर रखे जाने, क्रषि उत्पादों की बढती कीमतों को स्थिर करने हेतु
सरकार द्वारा एक लाख करोड़ का कीमत नियंत्रण कोष स्थापित किये जाने, सभी बैंकों एजेंसियों से लिया
गया कर्ज माफ किये जाने, सभी किसानों, खेत मजदूरों और दस्तकारों को रु.
10 हजार प्रति माह पेंशन दिये जाने, भूमि अधिग्रहण अध्यादेश को तत्काल वापस किये जाने, भूमि सुधार अमल में लाने, सहारनपुर की घटनाओं की न्यायिक
जांच कराने व वहाँ कमजोर वर्ग के खिलाफ होरही एकतरफा कार्यवाहियों को रोके जाने, दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों, छात्रों- युवाओं, अन्य कमजोर तबकों और व्यापारियों
पर होरहे अत्याचारों पर रोक लगाने तथा दंगाराज- गुंडाराज समाप्त कर कानून का राज स्थापित
करो आदि प्रमुख मांगों को लेकर किया जारहा है.
डा. गिरीश ने कहा कि मोदी और
योगी की सरकारें जन सरोकारों से मुहं चुरा रही हैं. वे समाज को गाय, गंगा और मंदिर जैसे सवालों पर बांट कर राज करने की नीति पर चल रही हैं.
अपनी असफलताओं पर पर्दा डालने को वे धार्मिक उन्माद और युध्दोन्माद पैदा कर रही हैं.
इससे जनता तबाह होरही है और नेता अफसर माफिया फल फूल रहे हैं. बेरोजगारी ने नौजवानों
की कमर तोड़ कर रख दी है. जनता को अब तत्काल राहत प्रदान किया जाना जरुरी है. भाकपा
द्वारा यह आंदोलन इसी उद्देश्य को लेकर किया जारहा है. उन्होने शोषित- पीड़ित जनता से
अपील की कि अपने हकों के लिये इस आंदोलन में भागीदारी करें.
डा. गिरीश
मंगलवार, 11 जुलाई 2017
at 3:24 pm | 0 comments |
CPI on General budget of U.P.
बजट नहीं यह सरकार
की दिशाहीनता का गजट है: भाकपा
लखनऊ- 11 जुलाई 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार के पहले आम बजट को प्रदेश सरकार की
दिशाहीनता का गजट करार दिया है. यह गत चुनावों में भाजपा के घोषणपत्र की तर्ज पर
जुमलों का दस्तावेज है. विकास के स्थान पर इसमें धार्मिक आस्थाओं के दोहन पर जोर
है. सरकार इसे सभी को समर्पित बजट बता रही है, पर यह न किसी को समर्पित
है न किसी का उत्थान करने वाला है.
कुल मिला कर यह एक परंपरागत बजट है. पिछली सरकारों की तर्ज
पर इसमें आय के परंपरागत स्रोतों से
उपलब्ध धनराशि को कुछ घटाबढी करके विभिन्न मदों के लिये आबंटित कर दिया गया है.
कुछ नयी मदें जोड दी गयी हैं. उपलब्ध धनराशि के आंकड़े मुद्रास्फीति और केंद्र की
परियोजनाओं की धनराशि के जोड़ देने के कारण अधिक दिखाई दे रहे हैं, कोई
नई आय कहीं से नहीं होरही है. गरीब, किसान, मजदूर, छात्र, नौजवान, महिला, दलित अल्पसंख्यकों की मौजूदा स्थितियों पर
इससे कोई फर्क पढने वाला नहीं है. रोटी, कपड़ा, मकान, इलाज और पढाई के हालात यथावत बने रहेंगे.
बजट भाषण का बड़ा भाग राज्य सरकार की विफलताओं पर पर्दा
डालने और मुख्यमंत्री की प्रशंसा करने को समर्पित था. फर्जी आंकड़ों के बोझ तले दबे
वित्तमंत्री जी पहले लड़खड़ा कर बैठ गये और दो तीन बार पानी पीने के बाद भी उनके बजट
पढने में असमर्थ रहने पर दूसरे मंत्री ने शेष बजट पेश किया. सत्तर सालों में यह
पहला अवसर है जब उत्तर प्रदेश की विधानसभा में एक बजट दो मंत्रियों द्वारा
प्रस्तुत किया गया.
एक ध्यान देने वाली बात यह भी है कि उत्तर प्रदेश जिसमें
श्री मंगल पांडे, रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हज़रत महल, चंद्रशेखर आज़ाद, अशफाक उल्लाह खान और आचार्य
नरेंद्र देव जैसे आज़ादी की लडाई के हजारों योध्दा उत्पन्न हुये उन सबकी यह सरकार
उपेक्षा कर रही है और अपनी योजनाओं का नामकरण श्यामाप्रसाद मुखर्जी और दीनदयाल
उपाध्याय के नाम पर कर रही है जो आज़ादी की लडाई से कोसों दूर थे. देश के ऊपर अपने
महत्वहीन नेताओं को लादने की भाजपा की यह कोशिश उसे महंगी पड़ेगी.
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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