भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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रविवार, 14 जून 2020

जौनपुर और आजमगढ़ की घटनाओं की न्यायिक जांच और रासुका हटाने की भाकपा ने मांग की



लखनऊ- 14 जून 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश की  भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि वह जौनपुर जनपद के भदेठी और आजमगढ़ जनपद के सिकंदरपुर की घटनाओं के जरिये अपनी सांप्रदायिक राजनीति को धार देना चाहती है। अपने निहित राजनैतिक स्वार्थों के लिये वह कोरोना काल में भी विभाजनकारी घ्रणित राजनीति करके देश, समाज और मेहनतकशों की एकता को गहरी हानि पहुंचा रही है।
निश्चय ही दोनों ही घटनायें दुर्भाग्यपूर्ण हैं और होनी नहीं चाहिए थी। भाकपा ऐसी घटनाओं को अशोभनीय और अवांच्छित मानती है। लेकिन इन घटनाओं को लेकर समुदाय विशेष पर एनएसए की कार्यवाही घोर अनुचित और राजनीति प्रेरित है। भाकपा इसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना करती है।
भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा कि कोरोना काल में ही उत्तर प्रदेश भर में कोई दर्जन भर दलितों की हत्या होचुकी है और अन्य अनेक का उत्पीड़न हुआ है। प्रतिदिन महिलाओं के साथ बदसलूकी, हत्या और उत्पीड़न की वारदातें होरही हैं। पर उन मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लगाना तो दूर कई मामलों में एफ़आईआर तक नहीं हुयी अथवा बहुत मुश्किलों से हुयी। लेकिन उपर्युक्त दोनों मामलों में एकतरफा एनएसए की कार्यवाही सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की गरज से की गयी है।
भाकपा ने कहा कि आज ही आजमगढ़ जनपद के उबारपुर गांव में भाजपा लालगंज के जिलाध्यक्ष के बेटों ने मनरेगा में काम कर रहे मजदूरों पर दिन- दहाड़े हमला कर उन्हें लहूलुहान कर दिया। क्या न्यायहित में और निष्पक्षता का परिचय देते हुये सरकार उन पर रासुका लगायेगी, भाकपा ने सवाल खड़ा किया है।  
भाकपा सचिव मंडल ने कहा कि भाजपा और उसकी सरकारें कोरोना से निपटने में पूरी तरह विफल हो गईं। देश भर में कोरोना संक्रमितों की संख्या 3 लाख से अधिक होकर दुनियाँ में देश चौथे स्थान पर पहुँच गया। अन्य मरीज भी इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। लोग भूखों मर रहे हैं। मजदूरों को रोजगार मिलना तो दूर तमाम उद्योग बन्द होरहे हैं और मजदूरों का काम छिन रहा है। किसानों को फल और सब्जियां खेतों में नष्ट करनी पड़ी हैं। कानून व्यवस्था तार तार होचुकी है। एक से एक विकराल घपले- घोटाले सामने आरहे हैं। लोग हतप्रभ हैं और अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।
इन असफलाताओं से ध्यान हटाने को भाजपा सरकार ने अपने चिर- परिचित हथकंडों को स्तेमाल करना शुरू कर दिया है। अपने कुत्सित उद्देश्यों के लिये वह सरकारी मशीनरी को भी अन्यायपूर्ण और दमनकारी कार्यवाहियों के लिये बाध्य कर रही है। भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने मांग की कि दोनों मामलों में अवांच्छित रासुका हटाई जाये और न्यायहित में दोनों घटनाओं की जांच उच्च न्यायालय के सेवारत न्यायाधीश से करायी जाए।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 12 जून 2020

महोबा में खनन विस्फोट में मजदूरों की मौत सरकार की कुनीतियों का परिणाम: भाकपा ने दुख जताया



 लखनऊ- 12 जून 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आज महोबा में बम विस्फोट से 3 मजदूरों की दर्दनाक मौत पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पार्टी ने बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्थाओं के कराये जा रहे खनन के लिये जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की है। साथ ही म्रतकों के परिवारीजनों को रुपये 20 लाख तथा घायलों को रुपये 5 लाख की सहायता की मांग की है।
एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने बताया कि जनपद- महोबा के कबरई में खनन के लिये लगाये विस्फोटक से तीन मजदूरों की मौत हो गयी और अन्य कई घायल होगये। यह बेहद दुखद और चिंताजनक है। खबरें मिल रहीं हैं कि विस्फोट से पहले जरूरी सुरक्षा तैयारियां नहीं की गईं और यह बड़ा हादसा होगया।
उत्तर प्रदेश में ऐसी दुर्घटनाओं का होना आए दिन की बात होगयी है। सोनभद्र, मिर्जापुर और बुंदेलखंड जैसे खनन इलाकों में मजदूरों की जान की परवाह किये बिना इस तरह के विस्फोट किये जाते हैं। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में ऐसे विस्फोटों में दो दर्जन से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। हर दुर्घटना के बाद सरकार की ओर से जांच और मुआबजों की घोषणा कर दी जाती है और फिर सब कुछ उसी ढर्रे पर चल पड़ता है।
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि यदि किसान अपनी क्रषी भूमि से निजी कार्यों के लिये भी मिट्टी खोदता है तो उसे प्रताड़ित किया जाता है। उनके वाहन सील कर दिये जाते हैं, केस लगा दिये जाते हैं और प्रताड़ना से बचने को उन्हें सुविधा शुल्क देना पड़ता है। लेकिन खनन माफिया की अवैध कार्यवाहियाँ धड़ल्ले से चलती रहती हैं और जानलेवा दुर्घटनाओं को जन्म देती रहती हैं।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 11 जून 2020

यूपी में नियुक्ति घोटालों की हो सीबीआई जांच: भाकपा




 लखनऊ- 11 जून 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल से आग्रह किया कि वे बेरोजगार युवाओं के हित में उत्तर प्रदेश के नियुक्ति घोटालों की सीबीआई से जांच कराने की संस्तुति करें।
एक प्रेस बयान में भाकपा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में वर्षों से नियुक्तियों मे घोटालों का खेल चल रहा है जिसकी सजा बेरोजगार युवा झेल रहे हैं। किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया के अंतिम रूप से पूरी होने से पहले किसी न किसी प्रकार की धांधली सामने आ जाती है और नियुक्तियां कानूनी पेचों में फंस कर रह जाती हैं। बेरोजगार अभ्यर्थी हाथ मलते रह जाते हैं।
मौजूदा सरकार के पदारूढ़ होने के बाद युवाओं में उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें धांधलियों से निजात मिलेगी और उन्हें नौकरियां मिलेंगीं। लेकिन इस सरकार ने तो भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड तोड़ दिये। ताजातरीन मामले शिक्षा विभाग से संबंधित हैं जिसमें 69000 शिक्षकों की नियुक्तियां घपले में फंस गयीं और बेरोजगार एक बार फिर हाथ मलते रह गये।
यूपी के इतिहास में यह पहली बार हुआ है जब एक अभ्यर्थी के प्रमाणपत्रों के जरिये 25 शिक्षकों की नियुक्तियां कर दी गयीं, और असल अभ्यर्थी अनामिका शुक्ला बेरोजगार बनीं बैठी हैं। गत माहों में ऐसे दर्जनों मामले प्रकाश में आचुके हैं जिनमें एक व्यक्ति कई स्कूलों में अथवा फर्जी दस्तावेजों और नामों से नियुक्तियां हथिया कर वेतन ऐंठते रहे।
यूपी में विराट फर्जी नियुक्ति माफिया सक्रिय है जो बेरोजगारों के हकों पर दोहरा डाका डाल रहा है। एक ओर वो उचित अभ्यर्थियों के हकों पर हड़प रहा है, वहीं अन्य बेरोजगारों को अपने जाल में फंसा कर उनसे लाखों रुपये डकार रहा है। पोल खुलने पर युवाओं को जेल की हवा भी खानी पड़ रही है। माफिया न केवल बच निकलते हैं अपितु नौजवानों के पैसे भी हड़प कर जाते हैं।
भाकपा राज्य सचिव ने आरोप लगाया कि नियुक्तियों में इतना बड़ा घोटाला बिना उच्च स्तरीय संरक्षण के नहीं चल सकता। अतएव राज्य की जांच एजेंसियों से संपूर्ण खुलासे की उम्मीद नहीं की जा सकती। अतएव हम महामहिम राज्यपाल महोदय से अनुरोध करते हैं कि यूपी नियुक्ति घोटालों की जांच सीबीआई से कराने की संस्तुति केंद्र सरकार से करें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 8 जून 2020

कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों को तत्काल खोला जाना अनुचित: भाकपा




लखनऊ- 8 जून 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों को आज से खोले जाने के औचित्य पर सवाल उठाया है। जब अभिभावकों की चाहत और भाकपा द्वारा सभी स्कूलों को जुलाई में न खोले जाने के मुद्दे को उठाने के बाद मानव संसाधन मंत्रालय तक में इस सवाल पर पुनर्विचार चल रहा है, ऐसे में कस्तूरबा विद्यालयों को अभी से खोला जाना आग से खेलना जैसा है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि उन्हें ज्ञात हुआ है कि उत्तर प्रदेश में कस्तूरवा गांधी आवासीय विद्यालयों को आज से खोलने और सभी शिक्षकों को स्कूल पहुँचने, नामांकन करने और अन्य तैयारियां करने के आदेश दिये हैं। ज्ञात हो कि प्रदेश में 746 कस्तूरबा गांधी स्कूल हैं जिनमें शिक्षक संविदा पर रखे जाते हैं। उन्हें जून माह का मानदेय भी नहीं मिलता।
इन स्कूलों में पूर्णकालिक शिक्षकों के तौर पर महिलाओं को रखा जाता है। इन्हें विद्यालयों के हास्टल में ही रहना होता है, जहां उन्हें 5 साल तक के बच्चे को रखने की भी सुविधा प्रदान की गयी है। इन हास्टलों में कामन टायलेट्स हैं। कोविड- 19 के प्रकोप के चलते कोई भी कॉमन टायलेट्स के प्रयोग से चिन्तित हो सकता है। बच्चों के लिए तो यह और भी खतरनाक है। खासतौर पर तब, जब वहां अलग- अलग जिलों के शिक्षक सीधे पहुंचेंगे।
भाकपा राज्य सचिव ने सरकार से मांग की कि इन विद्यालयों के शिक्षकों के स्कूल पहुंचने के आदेश को तत्काल रद्द किया जाये। इन विद्यालयों को भी अन्य विद्यालयों के साथ ही खोला जाये तथा रेजीडेंट स्टाफ के लिये अलग टायलेट्स बनवाए जायें। जहां तक प्रवेश की कार्यवाही का सवाल है, उसे आन लाइन भी चलाया जा सकता है।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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शनिवार, 6 जून 2020

स्कूल खोलने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करे उत्तर प्रदेश सरकार: भाकपा



लखनऊ- 6 जून 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया कि यदि उसकी आगामी जुलाई से स्कूल खोलने की कोई योजना है तो उस पर पुनर्विचार करे। मानव संसाधन मंत्रालय और राज्य सरकार द्वारा अनलाक-2 में स्कूल खोले जाने की योजना के मद्देनजर भाकपा ने यह मांग की है।
भाकपा ने कहा कि अभी तो देश और प्रदेश में कोविड- 19 के संक्रमितों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। बयस्क ही नहीं बड़े पैमाने पर बच्चे भी संक्रमित होरहे हैं। ऐसे में अभिभावकों का विशाल हिस्सा बच्चों को स्कूल भेजने के इच्छुक नहीं है।
अधिकांश अभिभावक इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं कि स्कूलों में दैहिक दूरी बनाये रखने और कोविड प्रतिरक्षा संबंधी अन्य उपाय करना आसान नहीं है। बहुत से बच्चे तो खुद ही दैहिक दूरी के नियम को तोड़ेंगे।
अतएव अभिभावक आन लाइन कक्षाओं को ही प्राथमिकता दे रहे हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों और शहरों की गरीब आबादियों में जहां आन लाइन की व्यवस्थाएं नहीं हैं, भाकपा चाहती है कि वहां शिक्षा के अन्य उपाय किए जायें।
अधिकतर लोगों का मत है कि जब तक जिलों में एक भी कोविड केस मिल रहा है तब तक स्कूलों का खोला जाना रिस्की होगा। अथवा वे तब खोले जायें जब कोविड-19 का टीका ईजाद होजाये और हर किसी का वैक्सीनेशन होजाये। अभी तो उत्तर प्रदेश के समस्त 75 जिलों में संक्रमण व्याप्त है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि जिन देशों में विद्यालय खोले गये, तमाम सावधानियों के बावजूद वहां अनेक बच्चे संक्रमित होगये। स्कूल खोलने का निर्णय लेने से पहले सरकार को सारे पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना होगा।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 4 जून 2020

भाकपा ने कांग्रेस अध्यक्ष व अन्य की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निन्दा की - डा गिरीश

कोविड-19 की आड़ में लोकतन्त्र की हत्या करने पर आमादा है राज्य सरकार

भाकपा ने कांग्रेस अध्यक्ष व अन्य की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में निन्दा की

अमेरिका में तानाशाही के खिलाफ विद्रोह से सबक ले सरकार: भाकपा

 भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि वह कोविड- 19 की आड़ में लोकतन्त्र की हत्या करने पर पर आमादा है। इस नापाक उद्देश्य से वह मजदूरों, किसानो और आम लोगों की आवाज को कुचल रही है। सरकार के इन क्रत्यों का विरोध करने पर विपक्ष के नेताओं को जबरिया गिरफ्तार करा रही है।

यहां जारी एक प्रैस बयान में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा कि राज्य सरकार ने विपक्ष को कुचलने के अपने राजनैतिक एजेंडे के तहत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय कुमार लल्लू को गत दिनों आगरा में गिरफ्तार कर लिया। वहां जमानत मिल जाने पर मनमाने तरीके से नये केस गढ़ कर उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया। इसी तरह यूपी पुलिस ने 11 मई को बस्ती में वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं को उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वे मजदूरों- किसानों की समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने जारहे थे।

अब कल मथुरा में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की रिहाई की मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन देने पहुंचे कांग्रेस के लगभग दर्जन भर कार्यकर्ताओं को जबरिया गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

भाकपा इन गिरफ्तारियों की कठोर शब्दों में निन्दा करती है और मांग करती है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सहित सभी को तत्काल रिहा किया जाये।

उन्होने कहाकि भाजपा सरकारें कोविड- 19 से निपटने में बुरी तरह विफल होचुकी हैं और संक्रमितों की संख्या 1 लाख से ऊपर पहुँच चुकी है। वह जनता की समस्याओं के समाधान में बुरी तरह विफल होचुकी हैं। ऐसी स्थितियों में भी शासक दल अपने जनविरोधी एजेंडे को धड़ल्ले से चला रहा है और विपक्ष को जनता की समस्याएं उठाने से बाधित कर रहा है। वह कोविड-19 को अपने जनविरोधी कार्यों के कवच के रूप में स्तेमाल कर रहा है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को इस खुन्नस के कारण गिरफ्तार किया गया कि परदेशी मजदूरों को लाने के लिए कांग्रेस ने बसें यूपी बार्डर पर लगा दीं। इससे भाजपा सरकार की किरकिरी हुयी जिसका बदला उन्होने कांग्रेस अध्यक्ष की गिरफ्तारी करके लिया। जब उन बसों को यूपी में घुसने ही नहीं दिया गया तो उनकी कथित सूची को गिरफ्तारी का आधार बनाना कोरा ढकोसला है। सरकार को इससे बाज आना चाहिए।

भाकपा ने कहा कि कोविड-19 के आने से पहले भी सरकार ने सीएए का विरोध कर रहे कई आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया और अन्य कई को गिरफ्तार करने का षडयंत्र रचा। अब वही कार्यवाही वह कोरोना महामारी की आड़ में कर रही है। सरकार लगातार लोकतान्त्रिक कार्यवाहियों को बाधित कर रही है और लोकतन्त्र को कुचल रही है। अमेरिका की घटनाओं से भी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया जहां तानाशाही के खिलाफ करोड़ों लोग सड़क पर आगये है।

 

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कोविद-19 की आड़ में लोकतन्त्र की हत्या करने पर आमादा है उत्तर प्रदेश सरकार: अमेरिका में तानाशाही के खिलाफ विद्रोह से सबक लें सरकारें



लखनऊ- 4 जून 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि वह कोविड- 19 की आड़ में लोकतन्त्र की हत्या करने पर पर आमादा है। इस नापाक उद्देश्य से वह मजदूरों, किसानो और आम लोगों की आवाज को कुचल रही है। सरकार के इन क्रत्यों का विरोध करने पर विपक्ष के नेताओं को जबरिया गिरफ्तार करा रही है।
यहां जारी एक प्रैस बयान में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा कि राज्य सरकार ने विपक्ष को कुचलने के अपने राजनैतिक एजेंडे के तहत कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय कुमार लल्लू को गत दिनों आगरा में गिरफ्तार कर लिया। वहां जमानत मिल जाने पर मनमाने तरीके से नये केस गढ़ कर उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया। इसी तरह यूपी पुलिस ने 11 मई को बस्ती में वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं को उस समय गिरफ्तार कर लिया जब वे मजदूरों- किसानों की समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने जारहे थे।
अब कल मथुरा में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की रिहाई की मांग को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन देने पहुंचे कांग्रेस के लगभग दर्जन भर कार्यकर्ताओं को जबरिया गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।
भाकपा इन गिरफ्तारियों की कठोर शब्दों में निन्दा करती है और मांग करती है कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सहित सभी को तत्काल रिहा किया जाये।
उन्होने कहाकि भाजपा सरकारें कोविड- 19 से निपटने में बुरी तरह विफल होचुकी हैं और संक्रमितों की संख्या 1 लाख से ऊपर पहुँच चुकी है। वह जनता की समस्याओं के समाधान में बुरी तरह विफल होचुकी हैं। ऐसी स्थितियों में भी शासक दल अपने जनविरोधी एजेंडे को धड़ल्ले से चला रहा है और विपक्ष को जनता की समस्याएं उठाने से बाधित कर रहा है। वह कोविड-19 को अपने जनविरोधी कार्यों के कवच के रूप में स्तेमाल कर रहा है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को इस खुन्नस के कारण गिरफ्तार किया गया कि परदेशी मजदूरों को लाने के लिए कांग्रेस ने बसें यूपी बार्डर पर लगा दीं। इससे भाजपा सरकार की किरकिरी हुयी जिसका बदला उन्होने कांग्रेस अध्यक्ष की गिरफ्तारी करके लिया। जब उन बसों को यूपी में घुसने ही नहीं दिया गया तो उनकी कथित सूची को गिरफ्तारी का आधार बनाना कोरा ढकोसला है। सरकार को इससे बाज आना चाहिए।
भाकपा ने कहा कि कोविड-19 के आने से पहले भी सरकार ने सीएए का विरोध कर रहे कई आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किया और अन्य कई को गिरफ्तार करने का षडयंत्र रचा। अब वही कार्यवाही वह कोरोना महामारी की आड़ में कर रही है। सरकार लगातार लोकतान्त्रिक कार्यवाहियों को बाधित कर रही है और लोकतन्त्र को कुचल रही है। अमेरिका की घटनाओं से भी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया जहां तानाशाही के खिलाफ करोड़ों लोग सड़क पर आगये है।

जारी द्वारा

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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मंगलवार, 2 जून 2020

सरकार की कोविड-19 नीति का विशेषज्ञों द्वारा पर्दाफाश: लमहों ने खता की थी, सदियों ने सजा पायी




“यदि सरकार ने कोरोना से जंग के लिये नीतियां तय करने से पहले महामारीविदों और अन्य विशेषज्ञों से राय ली होती तो स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। सरकार को सलाह देने वाले लोगों में अनुभव की कमी थी, जिस कारण यह स्थिति हुयी। उदाहरण के तौर पर यदि तालाबंदी से पहले श्रमिकों को घर वापस जाने की अनुमति दी जाती तो पूरी योजना के साथ उन्हें भेजा जा सकता था। लेकिन अब देश के हर कोने में जिस तरह मजदूर पहुंच रहे हैं, इससे गांव, कस्बों और शहरों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं।“

यह बेवाक कथन किसी विपक्ष के नेता का नहीं अपितु एम्स के चिकित्सकों और आईसीएमआर के विशेषज्ञों के एक 16 सदस्यीय दल द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को कोविड-19 महामारी के संबंध में सौंपी रिपोर्ट का हिस्सा है। स्पष्टतौर पर इस विस्तारित रिपोर्ट में लाकडाउन से पहले सरकार की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाये गये हैं।

विशेषज्ञ कमेटी के ये निष्कर्ष कोविड-19 से निपटने में केन्द्र सरकार की समूची रणनीति के खोखलेपन को उजागर कर देते हैं। तालाबंदी और उसके प्रारंभ में मोदी जी जब अपने प्रबुध्द अनुयायियों से थाली और ताली बजवा रहे थे, मोमबत्ती और पटाखे जलवा रहे थे, तब वामपंथियों और कुछ अन्य ने यह बता उठायी थी। किन्तु तब मीडिया, आईटी सेल और सोशल मीडिया द्वारा उन्हें ट्रोल कर इस तथ्य को दबा दिया गया। मोदी सरकार की यह बड़ी भूल आज आम जन और श्रमिक वर्ग के लिये महाविपत्ति बन कर उभरी है।

इतना ही नहीं इन विशेषज्ञों ने सरकार को कोविड-19 संक्रमण के सामुदायिक प्रसार शुरू होने के प्रति भी आगाह किया है। उनका दावा है की देश के कई बड़े हिस्सों खासकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यह पूरी तरह स्थापित हो चुका है। लेकिन अपनी नाक बचाने में जुटी सरकार दावे कर रही है कि देश सामुदायिक प्रसार से अभी भी दूर है।

सच तो यह है कि दुनियां में कोरोना से अधिक प्रभावित देशों की सूची में भारत सातवें पायदान पर पहुंच चुका है। अतएव प्रधानमंत्री को सौंपी गयी विशेषज्ञ रिपोर्ट स्पष्टतः कहती है कि देश में कोरोना महामारी के मौजूदा स्तर को देखते हुये इस बात की उम्मीद अवास्तविक है कि इसे पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है। संक्रमण का सामुदायिक संचरण देश के एक बड़े हिस्से में पहले ही शुरू हो चुका है।

विशेषज्ञों ने कहा, देशव्यापी कड़े लाकडाउन से अपेक्षा थी कि योजनाबध्द तरीके से एक खास अवधि में बीमारी पर काबू पाया जाये और मामलों को बढ़ने से रोका जाये। साथ ही ऐसा प्रबन्धन किया जाये कि आम स्वास्थ्य सेवा प्रणाली भी प्रभावित न हो। पर ऐसा हो न सका।  अपितु लाकडाउन के चार चरणों में अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन को पर्याप्त हानि और असाधारण असुविधा हुयी।
अन्य कई सनसनीखेज बातों के अतिरिक्त विशेषज्ञ समिति ने आरोप लगाया है कि  महामारी से संबंधित तथ्यों को विशेषज्ञों और जनता के साथ खुले और पारदर्शी तरीके से अभी तक साझा नहीं किया गया। समिति ने इसे जल्द से जल्द साझा किये जाने की अपेक्षा की है। समिति ने महामारी के संबंध में 11 सिफ़ारिशें भी जारी की हैं।

विशेषज्ञों की इस रिपोर्ट के खुलासे से सरकार में हड़कंप मच गया है। जनता को साधने के लिये स्थानीय जन प्रतिनिधियों एवं पार्टी पदाधिकारियों को जनता के बीच जाकर सरकार की इस नाकामी पर पर्दा डालने के कोशिश की जिम्मेदारी दी गयी है। समूची सरकार, भाजपा, संघ परिवार और पार्टी कार्यकर्ता जो महामारी की कमर तोड़ने के लिये मोदीजी के करिश्मे और लाकडाउन को एकमात्र उपाय बता रहे थे, आज पूरी तरह पलटी मार गये हैं। अब सारी ज़िम्मेदारी जनता पर डाल दी गयी है।
आज कहा जा रहा है कि लाकडाउन कोरोना वायरस महामारी का कोई समाधान नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिये मोदीजी ने लाकडाउन खत्म करके अनलाक-1 लगाया है। जनता खुद सावधानी बरते और महामारी को हराये, आदि आदि। इसी को कहते हैं चित्त भी मेरी और पट्ट भी मेरी।

सरकार अपने साधनों और प्रचार तंत्र के बल पर भले ही अपनी बिगड़ी छवि को सुधार ले पर देश के आर्थिक ढांचे को जो क्षति पहुंची है उसकी जल्दी भरपाई संभव नहीं। और लाकडाउन तथा घर वापसी में देश के अस्सी करोड़ मेहनतकशों और सामान्य जनों ने जो असहनीय और अपार पीड़ा झेली है उसका निदान किसी मरहम से संभव नहीं। शासकों कि एक चूक ने सब कुछ तहस- नहस और अस्त- व्यस्त करके रख दिया है। ठीक ही कहा है किसी ने- ‘लमहों ने खता की थी, सदियों ने सजा पायी।‘

प्रस्तुति-

डा॰ गिरीश  


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सोमवार, 1 जून 2020

निजीकरण के विरूध्द भाकपा की एकजुटता




भाकपा और सहयोगी संगठनों ने उत्तर प्रदेश में बिजलीकर्मियों के आंदोलन का जमकर समर्थन किया
“बिजली एक सामाजिक जरूरत है, जिसे पाने का अधिकार हर भारतीय को है”: डा॰ अंबेडकर
आने वाले दिनों में सभी को और तीव्र संघर्षों के लिये तैयार रहना होगा:
डा॰ गिरीश
लखनऊ- 01 जून 2020, ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये विद्युत संशोधन अधिनियम 2020 के खिलाफ विद्युतकर्मियों और अभियन्ताओं के प्रतिरोध आंदोलन को उत्तर प्रदेश में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और उसके सहयोगी संगठनों का आज जम कर समर्थन मिला।
भाकपा के राज्य सचिव मण्डल ने इस ज्वलंत जन- प्रश्न पर सत्ता द्वारा थोपे गये सन्नाटे और भय के आडंबर को तोड़ने के लिये विद्युतकर्मियों/ अभियन्ताओं, भाकपा एवं सहयोगी संगठनों के कार्यकर्ताओं एवं अन्य सभी आंदोलनकारियों को क्रान्तिकारी अभिनंदन पेश किया है।
ज्ञातव्य हो कि भाकपा के उत्तर प्रदेश राज्य नेत्रत्व ने 30 मई को ही इस आंदोलन को समर्थन प्रदान करने का आह्वान किया था।
भाकपा राज्य काउंसिल के आह्वान और निर्देश पर आज पार्टी की अधिकतर जिला इकाइयों ने स्थानीय विद्युत प्रतिष्ठानों पर सामूहिक रूप से पहुंच कर समर्थन का पत्र संघर्षरत अभियंताओं- कर्मचारियों को सौंपा। कई जगह स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से ज्ञापन महामहिम राष्ट्रपति अथवा प्रधानमंत्री जी को प्रेषित किये गये।
भाकपा ही नहीं कई जगह किसान सभा, एटक, नौजवान सभा, विद्युत पेंशनर्स एसोसियेशन एवं केंद्रीय श्रम संगठनों की संयुक्त कमेटियों ने भी समर्थन में बैठकें कीं, धरने दिये और ज्ञापन अथवा एकजुटता पत्र सौंपे। वे सभी बधाई के पात्र हैं।
इन सब गतिविधियों की खबरें सोशल मीडिया पर लगातार प्राप्त होरही हैं।
कई जगह राजनीतिक दलों और देश के भविष्य के प्रति जागरूक नागरिकों ने भी आंदोलन का समर्थन किया। वाराणसी के वामपंथी- लोकतान्त्रिक दलों ने तो कल ही बैठक कर निजीकरण के इस प्रयास के विरोध में उतर रहे मेहनतकशों के प्रति एकजुटता का इजहार किया। वे सब भी धन्यवाद के पात्र हैं। कुल मिला कर के आंदोलन को अभूतपूर्व समर्थन मिला है।
“ बिजली एक सामाजिक जरूरत है, जिसे पाने का हर भारतीय को अधिकार है। सरकार की यह ज़िम्मेदारी है कि वह हर नागरिक को बिजली उपलब्ध कराये।“ यह शब्द किसी और के नहीं स्वयं बाबा साहब डा॰ भीमराव अंबेडकर के हैं। इसीलिए आजाद भारत में पहले बिजली उत्पादन और फिर वितरण को सार्वजनिक क्षेत्र में लाया गया भी। उसके परिणाम भी देखने को मिले।
लेकिन कारपोरेट घरानों की हितचिंतक यह सरकार जनता के हितों हेतु हमारे राजनैतिक अग्रजों द्वारा उठाए कदमों को पलटने पर आमादा है। सार्वजनिक क्षेत्र की बरवादी के इस कदम को बेशर्मी के साथ ‘आत्मनिर्भरता’ का नाम दिया जा रहा है। इसे न कर्मचारी बर्दाश्त करेंगे, न जनता बर्दाश्त करेगी, न लोकवादी राजनैतिक शक्तियां बर्दाश्त करेंगी और नहीं वामपंथी शक्तियां।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि आने वाले दिनों में सभी को अधिक कठिन संघर्षों के लिये तैयार रहना होगा।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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रविवार, 31 मई 2020

Circular of CPI, UP


भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल
22, कैसर बाग, लखनऊ- 226001
दिनांक- 31 मई 2020
सभी राज्य काउंसिल सदस्यों, जिला सचिवों, ब्रांच सचिवों एवं सक्रिय कार्यकर्ताओं के लिये निर्देश पत्र
( यह पार्टी का आंतरिक दस्तावेज़ है, इसे केवल वाट्स एप के जरिये पार्टी साथियों को भेजें। फेसबुक, ब्लाग आदि पर पोस्ट न करें )
प्रिय साथी,
क्रान्तिकारी अभिवादन।
जैसा कि आपको ज्ञात है कि कल 1 जून 2020 को बिजली विभाग के सभी श्रेणी के अभियन्ता एवं कर्मचारी ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण के उद्देश्य से केन्द्र सरकार द्वारा लाये जारहे विद्युत संशोधन अधिनियम के खिलाफ राष्ट्रव्यापी प्रतिरोध प्रदर्शन/ काला दिवस का आयोजन करने जा रहे हैं।
इस संबन्ध में व्यापक जानकारी देते हुये राज्य केन्द्र से कल ही एक बयान जारी किया गया है जो फेसबुक एवं वाट्स एप आदि पर मौजूद है। तमाम लोगों ने न केवल इसे पसंद किया है अपितु कई पार्टियों के नेताओं ने उसे अपना बयान बना कर प्रसारित किया है।
कार्यक्रम के तहत बिजली कर्मी कार्यस्थलों पर काली पट्टियाँ बांधेंगे और अपरान्ह 3: 00 बजे विद्युत परियोजनाओं, विभागीय कार्यालयों तथा विद्युत उपकेन्द्रों पर सभा आदि करेंगे। इस संबन्ध में स्थानीय स्तर पर समाचार पत्रों में उनकी विज्ञप्तियाँ प्रकाशित होरही हैं।
चूंकि हमने उन्हें समर्थन प्रदान करने का फैसला किया है अतएव राज्य नेत्रत्व ने गहन विचार करके निम्न तरीके से समर्थन प्रदान करने का निर्णय लिया है।
1-  आपके समीप जहां भी ( परियोजना, कार्यालय अथवा ऊपकेन्द्र  ) विरोध प्रदर्शन होने जा रहा हो वहाँ पहुँच कर साथी समर्थन व्यक्त करें। पार्टी अथवा जन संगठन के पैड पर टाइप किया हुआ अथवा हाथ से लिखा समर्थन पत्र वाकायदा उन्हें सौंपें।
2-  यदि आपके समीप कहीं प्रदर्शन की सूचना नहीं है तो किसी भी बिजली केन्द्र या दफ्तर पर कार्य अवधि में ( आम तौर पर 10 से 5 बजे ) पहुँच कर उपस्थित कर्मचारियों में सबसे वरिष्ठ को अन्य सबके समक्ष लिखित समर्थन पत्र सौंपे।
3-  यदि आप कई साथी हैं तो झण्डा/ बैनर के साथ भी जा सकते हैं। जरूरी नहीं कि वहां जाकर भाषण ही देना है। यदि वे भाषण कराते हैं तो अच्छी बात है। अन्यथा अपना परिचय दें, उद्देश्य बतायें और समर्थन पत्र उन्हें सौंप दें।
4-  यह कार्यक्रम जिले में अनेक स्थलों पर किया जा सकता है। जहां भी हमारा एक दो भी साथी है निकटवर्ती विद्युत गृह पर पहुँच कर समर्थन प्रदान कर सकता है। बेहतर यही होगा कि यह कार्यक्रम अधिक से अधिक जगह हो।
5-  समर्थन पत्र सौंपते हुये और यदि भाषण देने का अवसर मिलता है तो बोलते हुये फोटो लें और सोशल मीडिया पर साझा करें। समर्थन पत्र और फोटो स्थानीय समाचार पत्रों को भी सौंपे। अथवा विज्ञप्ति जारी करें।
6-  यदि संभव हो और पूर्व परिचय हो तो अपने पहुँचने की सूचना कर्मियों को फोन पर पहले से ही दी जा सकती है।
7-  यह कार्यक्रम सफल और व्यापक तभी होगा जब आप अभी से सभी साथियों को अपने तरीकों से अवगत कराना शुरू कर देंगे। गाँव, गली, मोहल्लों, कस्बों, नगरों, जिला केन्द्रों और परियोजना स्थलों तक यह कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है।
8-  राज्य काउंसिल के साथी और जिला सचिव एवं उप सचिव यदि इसे गंभीरता से लें तो यह कार्यक्रम पार्टी की एक शानदार उपलब्धि बन सकता है।
9-  राज्य कार्यकारिणी के साथी तत्काल अपने लिये आबंटित जिलों से संपर्क करें और उन्हें कार्यक्रम की सूचना दें व भली प्रकार कार्यक्रम आयोजित  करने  लिये प्रेरित करें।
10- समर्थन पत्र कल जारी किए गये बयान के आधार पर अपनी जरूरत के हिसाब से छोटा बड़ा तैयार किया जा सकता है। यह बयान वाट्स एप के राज्य काउंसिल ग्रुप में तथा फेसबुक पर उपलब्ध है। वरिष्ठ साथी कनिष्ठ साथियों की इस सब में मदद करें, गाइड करें।
11- दैहिक दूरी बनाए रखनी है और मुछीका भी जरूर लगाना है।
आशा ही नहीं पूरा विश्वास है आप इस कार्यक्रम को भी इस अवधि में अब तक किये गये कार्यक्रमों की तरह गंभीरता से लेंगे। समय बहुत कम है अतएव बिना विलंब किये तैयारियों में जुट जायेंगे।
पुनः क्रांतिकारी अभिवादन के साथ।
आपका साथी
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव


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शनिवार, 30 मई 2020

ऊर्जा क्षेत्र के निजीकरण की कार्यवाही राष्ट्रीय हितों के प्रतिकूल: विद्युत्कर्मियों के आंदोलन का समर्थन करेगी भाकपा




लखनऊ- 30 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने पावर सैक्टर के निजीकरण के लिये केन्द्र सरकार द्वारा लाये गये विद्युत संशोधन अधिनियम 2020 के खिलाफ समस्त विद्युत कर्मियों और अभियन्ताओं द्वारा संयुक्त रूप से 1 जून को देश भर में आयोजित विरोध प्रदर्शन/ काला दिवस को समर्थन प्रदान किया गया है।
इस संबंध में जारी एक बयान में भाकपा ने कहा कि स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद खाद्य समस्या से निजात दिलाने को क्रषी क्षेत्र के विकास और सिमटे औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिये आधारभूत ढांचा मजबूत करने के लिये सार्वजनिक क्षेत्र की नींव रखी गयी थी। ऊर्जा  भी एक आधारभूत आवश्यकता है अतएव देश की पहली संसद ने गहन विचार विमर्श के बाद देश को आत्मनिर्भर बनाने की द्रष्टि इसे सार्वजनिक क्षेत्र में लाने का निर्णय लिया था। सभी जानते हैं कि ऊर्जा के सार्वजनिक क्षेत्र में आने के बाद ही देश में ऊर्जा निर्माण और वितरण का ढांचा खड़ा किया गया जिससे भारत क्रषी उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना और उसने  औद्योगिक क्षेत्र में व्यापक प्रगति की।
मौजूदा सरकार आत्मनिर्भरता के जुमले के तहत ही ऊर्जा का निजीकरण करने पर आमादा है और कोरोना काल में लाक डाउन की स्थितियों का लाभ उठाते हुये यह विनाशकारी अधिनियम ले आयी है। इस बिल में देश के बाहर बिजली बेचने का प्राविधान भी किया गया है ताकि प्रधान मंत्री के कारपोरेट दोस्त उनके निजी पावर हाउस द्वारा निर्मित बिजली को पाकिस्तान को बेच सके। दिन भर पाकिस्तान विरोध के नाम पर राजनीतिक रोटियाँ सैंकने वाली भाजपा सरकार को अपने चहेते पूंजीपति के आर्थिक लाभ के लिये पाकिस्तान को बिजली बेचने से कोई गुरेज नहीं।
भाकपा ने आरोप लगाया कि इस बिल में सब्सिडी एवं क्रास सब्सिडी खत्म करने, डिस्काम ( वितरण ) को कारपोरेट जगत के हाथों सौंपने और टैरिफ की नयी व्यवस्था लादने के जनविरोधी प्राविधान किये गए हैं। इससे आम उपभोक्ताओं खासकर किसानों पर भारी बोझ डाला जायेगा। इसकी शुरूआत बिजली दरों में बढ़ोत्तरी के साथ पहले ही हो चुकी है। इस बिल के लागू होने के बाद किसानों और आम उपभोक्ताओं को 10 रुपये प्रति यूनिट की दर पर  बिजली मिलेगी।
भाकपा ने आरोप लगाया कि निजीकरण के अपने कदम को जायज ठहराने को भाजपा सरकार बिजली को घाटे में होने और विद्युत चोरी जैसे बहाने बना रही है। जबकि यह घाटा सरकार की कारपोरेटपरस्त नीतियों की देन है। सच तो यह है कि उत्तर प्रदेश के  सार्वजनिक क्षेत्र- यूपीपीसील द्वारा केन्द्रीय पूल के औसत से कम कीमत पर बिजली तैयार की जाती है। जबकि कारपोरेट घराने अत्यधिक महंगी दरों पर बिजली बना कर केन्द्रीय पूल को देते हैं।
भाकपा ने कहा कि हम विद्युत कर्मियों के आंदोलन को द्रढता के साथ समर्थन इसलिये दे रहे हैं कि वह किसानों, आम नागरिकों यहाँ तक कि उद्योग जगत के हितों में है। उद्योग चलेंगे तो रोजगार भी मिलेंगे। लाक डाउन के बाद भयावह हुयी बेरोजगारी की समस्या को देखते हुये ये अति आवश्यक है। जबकि ऊर्जा क्षेत्र का निजीकरण और उसको कार्पोरेट्स को सौंपने की मोदी सरकार की कार्यवाही राष्ट्रीय हितों के प्रतिकूल है।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने सभी किसान संगठनों, मजदूर संगठनों उद्योग व्यापार से जुड़े संगठनों और आम जनता से अपील की कि वे अपने हितों की रक्षा के लिये विद्युतकर्मियों के प्रतिरोध का समर्थन करें और लाक डाउन की आड़ में देश की सार्वजनिक संपत्तियों को अपने पूंजीपति समर्थकों को बेचने की केन्द्र सरकार की साजिश के खिलाफ आवाज बुलंद करें।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 29 मई 2020

तमाम किसानों को नहीं मिल पा रही सम्मान निधि की राशि : भाकपा ने प्रधानमंत्री/ मुख्यमंत्री से दिलवाने की मांग की



लखनऊ- 29 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने प्रधानमंत्री जी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को पत्र लिख कर तमाम किसानों को किसान सम्मान निधि उपलब्ध कराने की मांग की है।
अपने इस पत्र में भाकपा ने कहा कि हमारी पार्टी के राज्य मुख्यालय को उत्तर प्रदेश भर से सूचनायें प्राप्त होरही हैं कि केन्द्र सरकार द्वारा घोषित और बहु- प्रचारित किसान सम्मान निधि की राशि हजारों किसानों को प्राप्त नहीं हो पा रही है। कुछ किसानों को इस निधि की एक भी किश्त नहीं मिली जबकि कुछ को आंशिक रूप से किश्तें मिली हैं।
यह किसानों के साथ भारी अन्याय है। खास कर कोरोना काल में जबकि किसानों की अर्थव्यवस्था लाक डाउन के चलते पंगु हो गयी है और उन्हें सरकार की आर्थिक सहायता की बेहद जरूरत है।
इस पत्र के माध्यम से भाकपा ने प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी को स्मरण दिलाया कि आप और आपकी पार्टी के सभी जिम्मेदार अधिकारी बार बार दोहराते हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी ने कहा था कि उनकी सरकार द्वारा भेजे गए एक रुपये में से 16 पैसे नीचे तक पहुंच पाते हैं। यह एक सचाई थी जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री ने सदाशयता से कबूला था।
लेकिन भाकपा, उत्तर प्रदेश इस बात पर अफसोस जाहिर करती है कि किसानों के लिये बहु- प्रचारित किसान सम्मान निधि जो रुपये 6 हजार वार्षिक है, आपके लाख दावों के बावजूद उन तक नहीं पहुंच पा रही है।
उत्तर प्रदेश में किसानों को सम्मान निधि की धनराशि दिलवाने के लिये कई किसान संगठन आवाज उठा चुके हैं। समाचार पत्र से ज्ञात हुआ कि भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर किसानों को सम्मान निधि प्राप्त न होने की शिकायत की है।
किसान तहसील से लेकर अन्य अधिकारियों के यहां चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं होरही है। कई जगह से इस हेतु किसानों से सुविधा शुल्क बसूले जाने की शिकायतें भी मिल रही हैं।
भाकपा ने प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी से मांग की कि समस्त किसानों की वांच्छित सम्मान निधि की राशि उन्हें तुरन्त दिलायें और कोरोना काल में इसे बढ़ा कर 12 हजार रुपये एकमुश्त किसानों को दिलवाये जायें। भ्रष्टाचार और घूसख़ोरी को लगाम लगायें।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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मंगलवार, 26 मई 2020

चर्चा- नहीं मिला लाक डाउन का लाभ




लाक डाउन के औचित्य- अनौचित्य पर दुनियां में गंभीर बहस छिड़ी हुयी है। यह बहस भारत में अभी भले ही शैशवकाल में हो पर दुनियां अन्य हिस्सों में काफी ज़ोर पकड़ चुकी है।
अब ब्रिटेन की स्टैनफोर्ट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और नोवेल पुरूस्कार विजेता माइकल लेविट ने लाक डाउन के औचित्य पर कई सवाल खड़े कर दिये हैं।
उन्होने दावा किया है कि महामारी के रोकने में लाक डाउन का कोई फायदा नहीं हुआ है। उन्होने कहा कि लोगों को घरों के अन्दर रखने का फैसला विज्ञान के आधार पर नहीं घवराहट के आधार पर लिया गया।
ब्रिटेन में लगाये गए लाक डाउन के बारे में प्रोफेसर माइकल लेविट ने कहा कि सरकार ने प्रोफेसर नील फ्रेग्यूसन की जिस माडलिंग के आधार पर लाक डाउन का फैसला लिया है, उसमें मौत के आंकड़ों को वेवजह 10 से 12 गुना तक ज्यादा बढ़ा कर दिखाया गया है।
उन्होने प्रतिष्ठित अमेरिकी वित्तीय कंपनी जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट को आधार बनाते हुये कहा है कि लाक डाउन न सिर्फ महामारी के प्रसार को कम करने में असफल रहा बल्कि, उसकी वजह से करोड़ों लोगों की नौकरी भी छिन गयी।
प्रोफेसर लेविट ने कहा, मुझे लगता है लाक डाउन से जिंदगियां बची नहीं हैं, उलटे उससे कई जिंदगियां गयी जरूर हैं। इससे कुछ सड़क दुर्घटनायें जरूर रुकी होंगी ( भारत में तो सड़क दुर्घटनाओं में ही हजारों की मौत हो गयी ), लेकिन घरेलू हिंसा, तलाक और शराब पीने की आदत चरम पर पहुंच गयी हैं। साथ ही अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों को भी इलाज नहीं मिला है।
जेपी मॉर्गन के शोधकर्ता मार्को कोलानोविक ने कहा कि सरकारों को गलत वैज्ञानिक दस्तावेजों के आधार पर लाक डाउन लगाने के लिये भ्रमित किया गया। लाक डाउन या तो अक्षम पाया गया या कम प्रभावी पाया गया। लाक डाउन हटाये जाने के बाद से संक्रमण की दर में गिरावट आयी है।
यह संकेत देता है कि वायरस की अपनी गतिशीलता है, जिस पर लाक डाउन का असर नहीं हुआ।
प्रस्तुति-
डा॰ गिरीश

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रविवार, 24 मई 2020

टिड्डियों की समस्या के खिलाफ युध्द स्तर पर अभियान चलायें केन्द्र और राज्य सरकारें: भाकपा




लखनऊ- 24 मई 2020, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने कहा कि वनस्पति भक्षी कीट टिड्डियों के कई दल राजस्थान और मध्य प्रदेश में कई दिन पहले दाखिल होचुके हैं और यदि उन्हें तत्काल विनष्ट नहीं किया गया तो शीघ्र ही वे उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़, मेरठ आदि मंडलों के दर्जन भर से अधिक जिलों को अपनी चपेट में ले लेंगे।

इससे फल, सब्जी, चारा आदि की खड़ी फसलें नष्ट हो जायेंगी और पहले ही कोरोना और मौसम की मार से पीड़ित किसान और तवाह होकर रह जायेंगे। बाग बगीचे और पार्क आदि भी बरवाद होजाएंगे।

इस संकट पर गहरी चिन्ता का इजहार करते हुये भाकपा ने केन्द्र और राज्य सरकार से उन्हें त्वरित रूप से नष्ट करने की मांग की। एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार को हवाई जहाज और हेलिकोप्टर्स से कीट नाशक छिड़क कर आसमान में ही इसे नष्ट कर देना चाहिये। जमीन पर भी फायर ब्रिगेड आदि को तैनात किया जाना चाहिये।

उन्होने कहा कि यदि सरकार ने उच्च तकनीकी और साधनों का प्रयोग किया होता तो टिड्डियों को कई दिन पहले ही नष्ट किया जा सकता था। ये विमान और हेलिकोप्टर्स महानुभावों की हवाखोरी के लिये ही हैं, या आपदा नियंत्रण के लिये भी? भाकपा ने सवाल किया है।

भाकपा ने कहा आदेश निर्गत कर दायित्व की इतिश्री करने वाली राज्य सरकार ने कई इस संबंध में भी कई आदेश जारी कर दिये हैं। पर कई जिलों के प्रशासन ने टिड्डियों से निपटने की ज़िम्मेदारी किसानों पर ही डाल दी और उन्हें थाली बेला बजाने जैसे कई टोटके बता कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली है। यह किसान और जनता के साथ छलावा है।

डा॰ गिरीश ने कहा कि यह सरकार समस्याओं के निदान से ज्यादा उनके सांप्रदाईकरण और राजनीतिकरण में जुटी रहती हैं और उसके बुरे परिणाम जनता को भुगतने पड़ते हैं। वे कोरोना संकट को जमातियों के मत्थे मढ़ मगरूर बने रहे और वह विकराल रूप में देश भर में फ़ैल गया। अब वे टिड्डियों को पाकिस्तानी बता कर मगरूर बने हुये हैं और टिड्डियाँ राजस्थान, मध्य प्रदेश पार कर यूपी तक आने वाली हैं।

उन्होने कहा जब सारे तकनीकी संसाधन सरकार के पास उपलब्ध हैं तो इस समस्या को किसानों के मत्थे मढ़ देना उचित नहीं।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 22 मई 2020

Left With Working Class


उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों के शीर्ष नेत्रत्व ने-

मजदूर संगठनों के प्रतिरोध प्रदर्शन की सफलता के लिये उन्हें बधाई दी

प्रतिरोध प्रदर्शनों में बाधा उत्पन्न करने पर केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया

कहा- अन्याय के खिलाफ किसी भी प्रतिरोध की आवाज को दबाना चाहती हैं भाजपा सरकारें

अंफन तूफान से जन- धन हानि पर जताया दुख: राहत और पुनर्वास के लिये केन्द्र से पर्याप्त धन आबंटन की मांग की

लखनऊ- 22 मई 2020, उत्तर प्रदेश और देश के श्रमिक संगठनों के आह्वान पर प्रतिरोध दिवस पर हजारों हजार श्रमिकों के लाकडाउन की पाबंदियों के बावजूद प्रतिरोध दर्ज कराने पर उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों ने उन्हें बधाई दी है।

वामपंथी दलों के राज्य नेत्रत्व ने उत्तर प्रदेश के वामदलों क्रमशः भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी, भाकपा- माले और फारबर्ड ब्लाक के प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं को भी बधाई दी जिन्होने मजदूर वर्ग के आंदोलन के समर्थन में जगह- जगह धरने दिये और मजदूरों के ऊपर सरकारों द्वारा लादी गयी विपत्ति के खिलाफ आवाज बुलंद की।

वामपंथी दलों ने आरोप लगाया कि लाक डाउन की आड़ में केंद्र और राज्य सरकार अन्याय के खिलाफ प्रतिकार की आवाज को दबाने पर उतारू हैं। दिल्ली में राजघाट पर शांतिपूर्ण प्रतिरोध कर रहे मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों को गिरफ्तार कर लिया गया। लखनऊ में गांधी प्रतिमा की ओर धरना देने जारहे श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों को दारुल शफ़ा के समक्ष रोक लिया और वहीं पर ज्ञापन देने को बाध्य किया। अन्य जगह भी सरकार के निर्देश पर ट्रेड यूनियनों और वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं को स्थानीय प्रशासन ने एक दिन पहले से ही धमकाना शुरू कर दिया था।

आज फिर सरकार ने उत्तर प्रदेश में 6 माह के लिए किसी भी किस्म की हड़ताल पर पाबन्दी लगा दी। श्रम कानूनों को तीन साल के लिये सस्पेंड करने के बाद मेहनतकश तबकों के खिलाफ यह एक और बड़ा हमला है। उत्तर प्रदेश में जनवादी गतिविधियों को कुचलने का प्रयास गत दिसंबर से ही किया जाता रहा है और सीएए के विरोध में खड़े वामपंथी दलों व अन्य को गिरफ्तार किया गया अथवा गिरफ्तारी की कोशिशें की गईं। अब फिर बहाने लगा कर एक विपक्षी दल के नेता को गिरफ्तार किया गया है। वामपंथी दल इस सबकी कड़े से कड़े शब्दों में निन्दा करते हैं।

संयुक्त बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भाकपा- मार्क्सवादी के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा- माले के राज्य सचिव सुधाकर यादय एवं फारबर्ड ब्लाक के प्रदेश संयोजक अभिनव कुशवाहा ने अंफान से बंगाल और उड़ीसा में जन और धन हानि की तवाही पर गहरा दुख व्यक्त किया है और राहत और पुनर्वास के लिये केन्द्र सरकार से अधिक से अधिक धनराशि इन राज्यों को मुहैया कराने की मांग की है।

जारी द्वारा-
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश

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मंगलवार, 19 मई 2020

CPI Protest in UP



मजदूरों को राहत पहुंचाने जैसे सवालों पर भाकपा ने प्रदर्शन आयोजित किये

महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल उ॰ प्र॰ को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किये

22 मई को मजदूरों के संयुक्त प्रतिरोध का समर्थन करेगी भाकपा

लखनऊ- 19 मई 2020, अनियोजित लाक डाउन के चलते मजदूरों को मौत के मुंह में धकेल दिये जाने, उन्हें घरों तक पहुंचाने में केन्द्र और राज्य सरकार की विफलताओं, श्रम क़ानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव, रोजगार और राशन उपलब्ध कराने में सरकारों की घनघोर असफलता, किसानों की फसल की बरवादी और बिकवाली में उसे राम भरोसे छोड़ देने, दलितों, अल्पसंख्यकों पर होरहे उत्पीड़न और कानून- व्यवस्था में गिरावट, घोषित सरकारी योजनाओं की राहत राशि सभी को न देने, पेट्रोल डीजल की कीमतों में अत्यधिक बढ़ोत्तरी, केन्द्र सरकार द्वारा घोषित आर्थिक पैकेज में देश और जनता के साथ की गयी धोखाधड़ी, सार्वजनिक क्षेत्र को बेचने तथा कोरोना की विपत्ति के दौर में भी सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने आदि के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के केन्द्रीय आह्वान पर आज समूचे उत्तर प्रदेश में धरने एवं प्रदर्शन किये गये।
यद्यपि एक सप्ताह पूर्व 11 मई को भी भाकपा ने वामदलों के साथ मिल कर प्रदेशव्यापी प्रदर्शन किये थे और केंद्रीय नेत्रत्व का आह्वान मात्र 4 दिन पूर्व हुआ था फिर भी आज भाकपा ने राज्य के अनेक जिलों में सफल प्रतिरोध प्रदर्शन किये और महामहिम राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन स्थानीय अधिकारियों को सौंपे अथवा ई मेल के जरिये भेजे गये। कई जिलों में कई कई स्थानों पर प्रतिरोध प्रदर्शन हुये।
राज्य मुख्यालय लखनऊ के अलाबा अभी तक गाजियाबाद, नोएडा, कानपुर, अयोध्या, बाराबंकी, झांसी, मथुरा, गाजीपुर, जौनपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, गोंडा, निजामाबाद (आजमगढ़ ), उरई, शामली, महाराजगंज, कानपुर देहात, इलाहाबाद, सोनभद्र, बांदा, बहराइच आदि जनपदों से प्रतिरोध दिवस के आयोजन की खबरें अब तक प्राप्त होचुकी हैं।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने मजदूरों, किसानों और अवाम की आवाज उठाने के समस्त कार्यकर्ताओं को पार्टी की राज्य काउंसिल की ओर से बधाई दी है। साथ ही केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त तत्वावधान में 22 मई को आयोजित मजदूरों के प्रतिरोध प्रदर्शन को भाकपा की ओर से सक्रिय समर्थन प्रदान करने का आह्वान किया है।
प्रस्तुत ज्ञापन में मांग की गयी है कि प्रवासी मजदूरों को घरों तक पहुंचाने के लिए और अधिक ट्रेन और बसें चलायी जायें जिनमें उन्हें खाना और पानी की सुविधा दी जाये। पहले से ही घरों को निकल पड़े मजदूरों को रोकने के बजाय उन्हें सम्मानपूर्वक वाहनों में बैठा कर घर पहुंचाया जाये। उन पर किसी भी तरह का अत्याचार ना किया जाये। सभी मजदूरों को 10 हजार रुपये बतौर खर्च/ यात्रा खर्च दिये जायें। अवसाद से आत्महत्याओं अथवा दुर्घटनाओं में होरही मौतौं पर रु॰ 20 लाख की मदद और घायलों को रु॰ 5 लाख दिये जायें।
मनरेगा को कमजोर नहीं किया जाये। हर व्यक्ति को पूर्ण रोजगार देना सुनिश्चित किया जाये। मनरेगा के तहत काम के दिन बढ़ाए जायें और प्रत्येक परिवार के सभी वयस्क सदस्यों को काम और समय पर भुगतान दिया जाये। शहरी क्षेत्रों में रोजगार और आवास की गारंटी की जाये। राशन देने के लिये किसी भी तरह की शर्त ना रखी जाये। हर एक परिवार को हर माह 35 किलो खाद्यान्न निशुल्क देना सुनिश्चित किया जाये।
श्रम कानून के साथ कोई छेड़छाड़ ना की जाये। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 3 सालों के लिये श्रम क़ानूनों को रद्द करने के फैसले को रद्द किया जाये। सभी संगठित और असंगठित, सरकारी और गैर सरकारी विभागों/ उद्योगों में संविदा अथवा गैर संविदा कर्मियों व अन्य के बकाया वेतनों का भुगतान सुनिश्चित किया जाये।  ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और छोटे किसानों के मुद्दों का उचित निवारण किया जाये। मौसम और लाक डाउन की मार से प्रभावित किसानों के अनाज, फल, सब्जी और दूध को उचित कीमतों पर खरीदना सुनिश्चित किया जाये। किसानों को 12 हजार रुपये की तत्काल एकमुश्त सहायता दी जाये।
बुजुर्गों, विधवाओं और शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिये पेंशन और दूसरी सामाजिक सुरक्षायें सुनिश्चित की जायें और बढ़ाई जायें। कैंसर, टीवी, हार्ट, किडनी जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की फौरन व्यवस्था की जाये। गर्भवती महिलाओं के लिये घरों पर कंसल्टेशन और प्रसूति की व्यवस्था की जाये। सभी की कोरोना जांच और इलाज मुफ्त कराये जायें। नोडल सेंटर, कोरोंटाइन केन्द्र, आइसोलेशन केन्द्र एवं अस्पतालों में अव्यवस्थाएं दूर कर ताजा और ससमय भोजन, पानी, दवाई और सफाई आदि की व्यवस्था की जाये।
आर्थिक राहत पैकेज आसमान में ही लटक कर रह गया है। इसमें जरूरतमंदों के लिये कुछ नहीं है। लोगों को सीधे राहत दी जाये। आत्मनिर्भरता के नाम पर सार्वजनिक क्षेत्र को बेचना बंद किया जाये। लाक डाउन के अनुपालन के नाम पर लोगों की प्रताड़ना, पिटाई, जबरिया बसूली, चालान और जेल भेजना बन्द किया जाये। दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और अन्य कमजोर तबकों पर जुल्म बढ़ गये हैं। उनकी सुरक्षा की जाये। कानून व्यवस्था ठीक की जाये।
विश्व बाज़ार में कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने पेट्रौल डीजल के दामों में भारी व्रद्धि कर दी है जिससे महंगाई और मंदी बढ़ेगी। उन्हें फौरन वापस लिया जाये।
कोरोना की महाविपत्ति के दौर में भी केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार न केवल राजनीति कर रही हैं, अपितु सांप्रदायिक विद्वेष भी फैला रही हैं। इससे कोरोना के खिलाफ जंग कमजोर होरही है। इन पर फौरन लगाम लगायी जाये।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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