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गुरुवार, 17 दिसंबर 2009

बैंक कर्मचारियों द्वारा प्रतिगामी आर्थिक नीतियों के खिलाफ संसद पर जुझारू प्रदर्शन


दिल्ली: देश के बैंक कर्मचारी आन्दोलन की यह परिपाटी रही है कि इस क्षेत्र में काम करने वाले हमारे साथी न केवल अपने वेतन और सेवाशर्तों के लिए जुझारू कार्रवाईयों में उतरते रहे हैं बल्कि देश की आम जनता से संबंधित मुद्दों पर भी उनके तेवर उतने ही जुझारू रहते हैं। जब उनके वेतन पुनरीक्षण पर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हो चुके थे, कुछ इन्हीं जुझारू तेवरों के साथ बैंकों के राष्ट्रीयकरण की रक्षा के लिए 3 दिसम्बर को सुबह से ही तमाम राज्यों से आ रहे एआईबीईए और एआईबीओए के साथियों का राम लीला मैदान पहुंचना शुरू हो गया था। साढ़े दस बजे तक हजारों की संख्या में बैंक कर्मचारी राम लीला मैदान पहुंच चुके थे। हर प्रदर्शनकारी के चेहरे पर जोश एवं उत्साह तथा निष्ठा एवं विश्वास झलक रहा था जोकि बैंक कर्मचारी आन्दोलन का ट्रेडमार्क है। वे राज्यवार अपने-अपने संगठनों के बैनर के पीछे कतारबद्ध होकर संसद की ओर कूच के लिए तैयार हो रहे थे। वे देश के कोने-कोने से और सभी राज्यों से आये थे। देश के सुदूर पूर्व - इंफाल एवं गंगटोक से लेकर पश्चिम - राजकोट एवं जामनगर तक तथा उत्तर में कश्मीर की पहाड़ियों से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी तक का वे वास्तविक प्रतिनिधित्व कर रहे थे। जुलूस में अंशकालिक सफाईकर्मी, चपरासी, लिपिक एवं अधिकारी सभी एक दूसरे के कंधे से कंधा मिला कर गगनभेदी नारे लगाते हुए रामलीला ग्राउन्ड से कूच किए। जुलूस में ऐसे प्रदर्शनकारी भी थे जिन्हें दिखाई नहीं देता लेकिन संगठन के आह्वान पर तमाम दुश्वारियों को झेलते हुए वे दिल्ली पहुंचे थे। जुलूस का पहला हिस्सा जब सभा स्थल पार्लियामेन्ट स्ट्रीट पर दाखिल हो चुका था, उस समय उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली के साथी रामलीला ग्राउन्ड पर अपनी बारी की प्रतीक्षा कर रहे थे। जुलूस से विशालकाय दृश्य से ही दिल्ली पहुंचे प्रदर्शनकारियों की संख्या का पता चलता है।
संसद मार्ग पहुंच कर जुलूस आम सभा में परिवर्तित हो गया। आमसभा को बैंक कर्मचारियों के नेताओं के अलावा सम्बोधित करने वालों में प्रमुख थे - भाकपा के उप महासचिव का. सुधाकर रेधी, भाकपा के राष्ट्रीय सचिव का. गुरूदास दासगुप्ता, का. डी. राजा तथा का. अमरजीत कौर, भाकपा के राज्य सभा सांसद का. आर.सी. सिंह, डब्लूएफटीयू के उप महासचिव का. एस. महादेवन, एटक के एचिवगण का. जी.एल.धर एवं का. डी.एल. सचदेवा एवं उपाध्यक्ष का. एस.एस.त्यागराजन, इंटक के अध्यक्ष डा. संजीव रेधी, माकपा नेता का. सीता राम येचुरी तथा बासुदेव आचार्य, बीएमएस के उपाध्यक्ष सुब्बाराॅव, सीटू के सचिव का. तपन सेन, एआईयूटीयूसी के महासचिव आर.के.शर्मा, टीयूसीसी के महासचिव एस.पी.तिवारी आदि। वक्ताओं ने एआईबीईए और एआईबीओए के नेतृत्व एवं सदस्यों को बैंकों के राष्ट्रीयकरण की रक्षा के लिए संघर्ष करने के लिए बधाई दी और सहयोग का वायदा किया।

सायंकाल एक प्रतिनिधिमंडल वित्तमंत्री से मिला और उन्हें एक ज्ञापन दिया। इस मुलाकात के दौरान भाकपा के सचिव का. गुरूदास दासगुप्ता एवं का. डी. राजा भी मौजूद थे। प्रतिनिधि मंडल में का. सी.एच.वेंकटाचलम, का. राजेन नागर, का. आलोक खरे, का. एस. नागराजन, का. विश्वास उतंगी तथा का. पी. बालाकृष्णन शामिल थे। प्रतिनिधि मंडल ने सरकार द्वारा चलाये जा रहे तथाकथित बैंकिंग रिफार्म के कदमों के खिलाफ अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया तथा इन प्रतिगामी कदमों को वापस लेने की जोरदार मांग की।

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