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गुरुवार, 1 अक्टूबर 2015
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उत्तर प्रदेश को दंगों की आग में झौंकने की संघ परिवार की साजिश. दादरी वारणसी और गोंडा की घट्नायें इसी उद्देश्य से.. भाकपा
लखनऊ- 1 अक्तूबर, 2015- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने भारतीय जनता पार्टी और आर.एस.एस. पर आरोप लगाया है कि वे अपने दीर्घकालीन और तात्कालिक उद्देश्यों की प्रतिपूर्ति के लिये उत्तर प्रदेश और समूचे देश को सांप्रदयिक्ता और सांप्रदायिक दंगों की आग में झौंकने की साजिश में जुटे हैं. क्षुद्र राजनैतिक उद्देश्यों की खातिर की जारही हिंसा, विभाजन की इन कार्यवाहियों की भाकपा ने कड़े शब्दों में निंदा की है.
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि हाल ही में उत्तर प्रदेश के किसी न किसी हिस्से में अलग अलग बहानों से भाजपा और संघ परिवार ने सांप्रदायिक विद्वेष फैला कर प्रदेश को दंगों की आग में झौंकने का काम किया है.
सबसे ताजा घटना दिल्ली से सटे जनपद- गौतम बुध्द नगर (नोएडा ) की है जहां औद्योगिक क्षेत्र- दादरी के थाना- जारचा के गांव- विसाहड़ा में सोमवार की रात्रि लगभग एक हजार लोगों की उन्मादी भीड़ ने गांव के एक मुस्लिम परिवार के घर पर धाबा बोल दिया और घर के मुखिया इखलाक को पीट- पीट कर मार डाला तथा उसके बेटे दानिश को भी बुरी तरह पीटा जो अस्पताल में जीवन के लिये संघर्ष कर रहा है. उपद्रवियों ने घर की महिलाओं को भी नहीं बख्शा और घर का सारा सामान भी नष्ट- भ्रष्ट कर दिया.
घटना को अंजाम देने के लिये इन उपद्रवियों ने एक मंदिर पर लगे माइक से सोची समझी साजिश के तहत यह प्रसारित किया कि इखलाक ने गोकशी की है और वहां पड़ा मांस का टुकड़ा गाय का है. यह संघ परिवार द्वारा समाज में घोले जारहे जहर का ही परिणाम है कि इस बे सिर पैर की अफवाह पर हजार एक लोग एकत्रित होगये और वर्षों पुराने अपने पडौसी के खून के प्यासे बन गये. भीड़ हिंसा करती रही और कोई भी पडौसी वचाव के लिये नहीं आया. पुलिस भी सूचना के काफी देर बाद पहुंची.
पुलिस और प्रशासन की ढिलाई का ही परिणाम है कि पुलिस द्वारा पकड़े लोगों को छुडाने को भीड़ ने पुलिस पर हमला तक बोला. इतना ही नहीं अगले दिन आसपास के गांवों में अफ्वाहें फैला कर तनाव पैदा किया गया और विसाहड़ा से लगभग 5 कि.मी. दूरी पर स्थित गांव- ऊंचा अमीरपुर में कथित गोहत्या के दोषियों को फांसी पर लट्काने की मांग के बहाने बड़े पैमाने पर तोड़्फोड़ की गयी. इन घटनाओं से संपूर्ण क्षेत्र में तनाव व्याप्त है और विसाहड़ा सहित तमाम गांवों के अल्पसंख्यक पलायन कर रहे हैं.
अभी पिछले ही सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी में एक साधु गिरोह ने जो कि संघ परिवार का ही आउट्फिट है गंगा में गणेश प्रतिमायें विसर्जित करने के लिये हंगामा खड़ा कर दिया, जबकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार गंगा में प्रतिमायें विसर्जित नहीं की जासकतीं. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अपने राजनैतिक उद्देश्यों की प्रतिपूर्ति के लिये संघ परिवार गंगा को पवित्र बनाने के नाम पर तमाम नाटक नौटंकी करता रहता है. पुलिस प्रशासन यहाँ भी दो दिनों तक नाटक करता रहा और कठोर कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया. अब साधुओं की पिटाई के नाम पर भाजपा और संघ परिवार वहां तनाव बढाने को हर हथकंडा अपना रहे हैं.
ठीक इसी तर्ज पर गत सप्ताह गोंडा शहर में मूर्ति विसर्जन को जारहे जलूस में पाबंदी के बावजूद डीजे लगाया गया जिसे पुलिस ने नहीं रोका. जब ये जुलूस अल्पसंख्यक बहुल आबादी में पहुंचा तो वहां तनाव व्याप्त होगया. मौके का लाभ उठा कर उपद्रवियों ने आगजनी और लूट्पाट की.
समूचे उत्तर प्रदेश की इन दिनों ऐसी ही तस्वीर है जब त्योहारों के कर्मकाण्डों को बहाना बना कर दंगे फैलाने की साजिश रची जारही है. इसका तात्कालिक उद्देश्य उत्तर प्रदेश में चल रहे पंचायत चुनावों और बिहार विधान सभा के चुनावों में लाभ उठाना है. धर्मपरायणता और सांप्रदायिकता क्योंकि शासक वर्ग और उसकी सरकारों के जनविरोधी कार्यों को जनता में स्वीकार्य बनाती है, अतएव केंद्र और राज्य सरकार का रवैय्या दंगे फसाद रोकने का नहीं; उनके होजाने के बाद राजनैतिक रोटियां सैंकने का है.
भाजपा जहां हर जगह खुल कर दंगाइयों के साथ खड़ी है वहीं मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने अपने को दरोगा की तरह धमकी देने और मुआबजा जारी करने तक सीमित कर रखा है.
ऐसे में भाकपा समाज के सभी धर्मनिरपेक्षजनों से अपील करती है कि वे उत्तर प्रदेश की शांति और सहिष्णुता को बचाने के लिये आगे आयें. भाकपा राज्य सरकार से भी मांग करती है कि वह सांप्रदायिकता से निपटने को द्रढ इच्छाशक्ति का परिचय दे और तदनुसार अपनी पुलिस और प्रशासन की चूलें कसे.
डा. गिरीश
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