भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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सोमवार, 19 अक्टूबर 2009

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा धन संग्रह अभियान - ११, १२ एवं १३ दिसम्बर को पुरे उत्तर प्रदेश में

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मजदूरों एवं किसानो की पार्टी है। वह अपने वर्ग के हित में तमाम संघर्ष चलती है। पार्टी को तथा संघर्षों को चलने में धन की भी महत्वपूर्ण जरुरत होती है। पार्टी को उसके वर्ग से ही धन की प्राप्ति होती है। पार्टी हर साल एक बार अपने वर्ग की जनता से धन इकट्ठा करती है। उसके कार्यकर्ता समाज के तमाम तबको से धन के लिए संपर्क करते है।
देश में असंगठित मजदूरों की तादाद बढ़ती चली जा रही है। पार्टी उन्हें भी संगठित करने और उनके लिए संघर्ष करने के काम को भी अपने एजेंडा पर ले चुकी है।
हम सन २००९ में ११, १२ एवं १३ दिसम्बर को धन इकट्ठा करने का कम एक अभियान के रूप में करेंगे। हमारे कार्यकर्ता आम जनता के पास जायेंगे। लेकिन उत्तर प्रदेश बहुत ही बार प्रदेश है और हमारे कार्यकर्ताओं की तादाद बहुत ही सीमित है। हम चाह कर भी प्रदेश की जनता के अधिसंख्यक जनता के पास नहीं पहुच पायेंगें। इस बार हम इस ब्लॉग के जरिये नए लोगो तक पहुचना चाहते है।
हम आपसे निवेदन करते है की अगर संघर्षो के इस अभियान में आप कुछ देना चाहते है तो :
१- आप भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश के नाम चैक यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया की किसी भी शाखा पर खाता नम्बर ३५३३०२०१००१७२५२ में जमा कर सकते है।
२- आप आर टी गी एस द्वारा भी उपरोक्त खाते में जमा कर सकते है। खाता नम्बर वाही रहेगा आप केवल आई ऍफ़ एस सी कोड UBIN0535338 यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया CLARKS AVADH BRANCH लिखे।
३- आप लखनऊ में भुगतान योग्य ड्राफ्ट या चैक से भी पैसा भेज सकते है। ड्राफ्ट/ चैक कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया उत्तर प्रदेश स्टेट काउंसिल सा नाम जरी करें और इसे २२, कैसर बाग़ लखनऊ - २२६ ००१ के पते पर भेज देन
धन जमा करने के बाद आप हमें ईमेल पर सूचित करें जिससे आपको रशीद भेजी जा सके।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विधान सभा उपचुनावों में प्रत्याशी

ललितपुर से कामरेड बाबु लाल अहिरवार
कोलसला से कामरेड सभा जीत यादव
पुवायां से कामरेड सुरेश कुमार
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शुक्रवार, 25 सितंबर 2009

आओ और सड़कों पर फैला ख़ून देखो...

सब कुछ
एक भारी चिल्‍लाहट थी, नमकीन चीज़ें,
धड़कती हुई रोटी के ढेर,
मेरी आर्ग्‍यूवेलस की बस्‍ती के बाज़ार में जहां मूर्ति
सागर की सफ़ेद मछलियों के बीच एक बेजान दावत-सी लगती थी,
जैतून का तेल जहां कलछुली तक पहुंचता था,
पांवों और हाथों की गंभीर धड़कन जहां
रास्‍तों में भर जाती थी,
जहां जिंदगी की तेज़ गंध
ढेरों में रखीं मछलियां,
जहां सर्द धूप पड़ती हुई छतों के सांचे, जिन पर
वायु-सूचकों के मुर्गे थक जाते हैं,
जहां आलुओं के सुहावने उन्‍मत्‍त हाथी-दांत,
सागर तक फैले हुए टमाटर जहां थे

और एक सुबह सब-कुछ जल उठा
और एक सुबह आग की लपटें
पृथ्‍वी से बाहर लोगों को निगलती हुईं
निकल आईं,
और तबसे आगे आग
और तबसे आगे बारूद
और तबसे आगे ख़ून

डाकू वायुयानों और मूरों के साथ
डाकू अंगूठियों और राजकुल-महिलाओं के साथ
डाकू काले चोगे पहने हुए मठाधीशों के साथ
हवा से होकर बच्‍चों को मारने आए
और सड़कों पर बच्‍चों का ख़ून बहने लगा
बच्‍चों का ख़ून जैसा होता है

विश्‍वासघाती
सेनापतियो:
मेरे मृत आवास को देखो
टुकड़े हुए स्‍पेन को देखो:
लेकिन हरेक मृत आवास से फूलों की जगह
प्रज्‍वलित धातु बाहर निकलती है
स्‍पेन के हरेक गह्वर से
स्‍पेन बाहर निकलता है
लेकिन हरेक मृत बच्‍चे की आंखों से एक बंदूक बाहर आती है
लेकिन हरेक जुर्म से गोलियों का जन्‍म होता है
जो तुम्‍हारे अंदर वह जगह ढूंढ ही लेंगी
जहां दिल रहता है

तुम पूछोगे: क्‍यों नहीं मेरी कविता
तुमसे नींद की, पत्तियों की, मेरी मातृभूमि के
भव्‍य ज्‍वालामुखियों की बात करती है
आओ और देखो
सड़कों पर फैला ख़ून
आओ और सड़कों पर फैला ख़ून देखो...
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हम

हम लेखक हैं
कथाकार हैं
हम जीवन के भाष्यकार हैं
हम कवि हैं जनवादी।
चंद, सूर,
तुलसी, कबीर के
संतों के, हरिचंद वीर के
हम वंशज बढ़भागी।
प्रिय भारत की
परम्परा के
जीवन की संस्कृति-सत्ता के
हम कर्मठ युगवादी
हम श्रस्ता हैं,
श्रम शासन के
मुद मंगल के उत्पादन के
हम द्रष्टा हितवादी।
भुत, भविष्यत्,
वर्तमान के
समता के शाश्वत विधान के
हम हैं मानववादी।
हम कवि हैं जनवादी।


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गुरुवार, 17 सितंबर 2009

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य अल्पसंख्यक समिति की बैठक

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल की अल्पसंख्यक समिति की बैठक १० अक्टूबर २००९ को लखनऊ में राज्य कार्यालय पर शाम को ५.३० बजे से शुरू होगी जिसमें स्ल्पसंख्यक जनता की समस्याओं पर चर्चा होगी और आन्दोलन की रूप रेखा तैयार की जायेगी.
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा मथुरा में यमुना एक्सप्रेस वे विकास प्राधिकरण द्वारा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसान सम्मलेन

यमुना एक्सप्रेस वे विकास प्राधिकरण के नम पर आगरा, मथुरा, अलीगढ, महामायानगर जिलों की कृषि योग्य जमीनों का अधिग्रहण कर ८५० राजस्वा ग्रामो के अस्तित्व को समाप्त कर उस इलाके में रह रहे लाखो किसानों एवं ग्रामीण मजदूरों के सामने आजीविका का संकट उत्पन्न करने तथा हजारों सालो से चले आ रहे प्राकृतिक संतुलन को समाप्त कर देने की साजिश के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल ४ अक्टूबर को सुबह १०.०० बजे से मथुरा शहर में कामरेड धर्मेन्द्र स्मृति सभागार, बिजलीघर, मथुरा कैंट में इन चार जनपदों के किसानो का विशाल प्रतिनिधि सम्मलेन आयोजित करेगी जिसमे राज्य सरकार के इस भ्रष्ट फैसले के विरोध में आन्दोलन की रूप रेखा तय की जायेगी। सम्मलेन में आने वाले प्रतिनिधि मथुरा के हमारे निम्न साथिओं से फ़ोन पर संपर्क कर सकते है।
कामरेड गफ्फार अब्बास ९८९७७६८७३५
कामरेड गिरधारी लाल चतुर्वेदी ९२५९२७१३१४
कामरेड बाबु लाल ९३५८७०८२३७
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शनिवार, 12 सितंबर 2009

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल द्वारा कार्यशाला

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउंसिल दिनांक ११ अक्टूबर को अपने राज्य कार्यकारिणी के सदस्यों तथा जिला सचिवों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन कर रही है.
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी की बैठक दिनांक १० अक्टूबर २००९ को लखनऊ में राज्य कार्यालय पर होगी जिसमें रास्ट्रीय सचिव कामरेड सुधाकर रेड्डी भी उपस्थित रहेंगे।
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पाश के ५९वे जन्मदिवस ९ सितम्बर २००९ पर उनकी एक कविता - "सबसे खतरनाक होता है हमारे सपनों का मर जाना"

श्रम की लूट सब से खतरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सब से खतरनाक नहीं होती
गद्दारी-लोभ की मुट्ठी सब से खतरनाक नहीं होती
बैठे-सोये पकड़े जाना - बुरा तो है
सहमी-सी चुप में जकडे जाना - बुरा तो है
पर सब से खतरनाक नहीं होता

कपट से शोर में
सही होते हुए भी दब जाना - बुरा तो है
किसी जुगनू की लौ में पढ़ने लग जाना - बुरा तो है
भींच कर जबड़े बस वक़्त काट लेना - बुरा तो है
सब से खतरनाक नहीं होता
सब के खतरनाक होता है

मुर्दा शान्ति से मर जाना
न होना तड़प का, सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौट कर घर आना
सब से खतरनाक होता है
हमारे सापनों का मर जाना
सब से खतरनाक वह घरी होती है
तुम्हारी कलाई पर चलती हुई भी जो
तुम्हारी नज़रों के लिए रुकी होती है

सब से खतरनाक वो आँख होती है
जो सब कुछ देखती हुई भी ठंडी बर्फ होती है
जिसकी नज़र दुनिया को
मुहब्बत से चूमना भूल जाती है
जो चीजों से उठती अंधेपन की
भाप पर मोहित हो जाती है
जो रोज़मर्रा की साधारणता को पीती हुई
एक लक्ष्यहीन दुहराव के दुष्चक्र में ही गुम जाती है

सब से खतरनाक वो चाँद होता है
जो हर कत्ल कांड के बाद
वीरान हुए आंगनों में चदता है
लेकिन तुम्हारी आंखों में मिर्चों की तरह नहीं लड़ता है

सबसे खतरनाक वो गीत होता है
तुम्हारे कान तक पहुचनें के लिए
जो विलाप को लांघता है

डरे हुए लोगों के दरवाजे पर जो
गुंडे की तरह हुंकारता है
सब से खतरनाक वो रात होती है
जो उतरती है जीवित रूह के आकाशों पर
जिसमें सिर्फ़ उल्लू बोलते, गीदर हुआंते
चिपक जाता स्थायी अँधेरा बंद दरवाजों की चौगाठों पर

सब से खतरनाक वो दिशा होती है
जिसमें आत्मा का सूरज डूब जाए
और उसकी मुर्दा धूप की कोई फाँस
तुम्हारे जिस्म के पूरब में चुभ जाए
श्रम की लूट सबसे खतरनाक नही होती
पुलिस की मर सबसे खतरनाक नहीं होती
गद्दारी लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होती
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गुरुवार, 27 अगस्त 2009

‘ब्रिक’ देशों का शिखर सम्मेलन

अभी हाल ही में (जून 2009 में) रूस के येकातेरिनबर्ग नामक शहर में ‘ब्रिक’ देशों का शिखर सम्मेलन हुआ। ‘ब्रिक’ का अर्थ है: ब्राजील, रूस, इण्डिया (भारत) और चीन। इन देशों के अंगे्रजी नामों के पहले अक्षरों को मिलाकर ब्रिक बनता है। इसके अलावा शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद ही शंघाई सहयोग समिति (एस0सी0सी0) की बैठक भी हुई। यह देशों का मिलाजुला संगठन हैं जिसमें रूस, चीन और भारत शामिल हैं।उपर्युक्त सम्मेलन आज के विश्व और वैश्विक अर्थतंत्र में विकासमान देशों की बढ़ती भूमिका दर्शाते हैं। द्वितीय विश्व यु़द्ध के बाद साम्राज्यवादी संकट के फलस्वरूप अधिकतर पिछड़े देश आजाद होते चले गये। लेकिन इन नये आजाद देशों के सामने सबसे बड़ी समस्या थी आर्थिक पिछड़ेपन की, जो उन्हें राजनैतिक तौर पर भी स्थिर नहीं होने दे रही थी।पिछड़े और विकासमान देशों की एक सम्पूर्ण श्रेणी ही उभर आई जिन्हें सबसे बड़ा खतरा साम्राज्यवाद से था। इन पिछड़े देशों के सामने कृषि, उद्योगों, भारी मशीनों, यातायात, बाजार, अर्थतंत्र इत्यादि के विकास की समस्याएं मँुंह बाए खड़ी थीं। संसाधन, स्रोत, धन एवं पूँजी तथा तकनीक कहाँ से आयेगी? ऐसे में समाजवादी देश सहायता को आगे आये। गुट निरपेक्ष आंदोलन का जन्म हुआ।विकास की रणनीति:-अपने अर्थतंत्रों का विकास करने के लिए पिछड़े देशों ने नई रणनीति अपनाई। इसलिए उन्हें विकासमान देश भी कहते हैं। कुल मिलाकर यह रणनीति समाजवादी देशों के साथ मिलकर अपने पैरों पर खड़े होने की अर्थात आत्मनिर्भरता की रणनीति थी। इसलिए यह साम्राज्यवाद विरोधी नीति थी और है। साम्राज्यवाद, खासकर अमरीकी साम्राज्यवाद, कभी भी नहीं चाहता है कि कोई भी विकासमान देश आर्थिक तौर पर मजबूत हो और आत्म निर्भर बने। इन विकासमान देशों में भारत भी शामिल है। उसकी आर्थिक और विदेश नीति हमेशा ही साम्राज्यवाद विरोध की रही है।युद्धोत्तर काल में पिछले लगभग पाँच से छह दशकों में विकासमान देशों में भारी परिवर्तन आया है। यह गुणात्मक परिवर्तन है, बिल्कुल जमीन आसमान का। एक समय था जब इन पिछडे़ देशों को कर्जों और सहायता की भारी जरुरत हुआ करती थी। दुनिया में उनकी छवि सहायता माँगने वालों की थी। लोगों को विश्वास तक नहीं था कि वे कभी इस स्थिति से निकल भी पाएंगे।बदलती भूमिका-लेकिन आज समय बदला हुआ है। आज भी विकासमान देशों के सामने कई समस्याएँ हैं, लेकिन आज वे न सिर्फ सहायता पाते है बल्कि कई देशों को सहायता देने भी लगे है। आज विकासमान देश बड़े पैमाने पर निर्यात कर रहे हैं जबकि कुछ ही समय पहले तक वे बड़े पैमाने पर आयात करते थे। आज वे न सिर्फ कच्चे मालों का बल्कि मशीनों तथा अन्य तैयार मालों का बड़े पैमाने पर निर्यात करने लगे हैं। भारत के कम्प्यूटर प्रोग्राम, कारें, मशीनें, कपड़े तथा अन्य सामान यूरोप और अमरीका के बाजारों में छाए हुए हैं, इसी प्रकार चीन के भी विकासमान देशों की पूँजी दूसरे देशों में लग रही है। विकासमान देश डब्लू0टी0ओ0 का महत्वपूर्ण गुट बनाते हुए अमरीका के विरूद्ध एकता कायम कर रहे हैं। इस कार्य में ब्राजील, भारत, चीन समेत कुल बीस देशों का गुट विश्व अर्थतंत्र में प्रभावी भूमिका अदा कर रहा है।आज विकासमान देशों की विकास दर विकसित देशों से कही आगे निकल गई है। जहाँ विकसित देशों की दरें 2 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के बीच हैं वहीं भारत चीन तथा कुछ अन्य विकासमान देश 6 प्रतिशत से 9 प्रतिशत की दर से विकास कर रहे हैं।आज अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर विकासमान देश विश्व अथंतत्र में उचित कीमतों, बाजार तथा निर्यात में हिस्सेदारी उनके सामानों पर पाबंदियाँ हटाने और शुल्क कम करने इत्यादि और सामात्यतः भेद भाव समाप्त करने की माँग कर रहे है। आज विकासमान देश विश्व अर्थतंत्र में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनते जा रहे हैं।विकासमान देशों का परस्पर सहयोग-जी-20 और 8$5 के बाद ‘ब्रिक’ और शंघाई स0स0 महत्वपूर्ण घटनाएँ हैं। ब्रिक ने माँग की? कि एक अधिक न्यायपूर्ण विश्व आर्थिक व्यवस्था कायम की जाये। सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा से लेकर अधिक विविध मुद्रा प्रणाली की माँग की गयी। विकासमान देशों तथा विश्व के इतिहास में यह एक नई घटना है। अब तक विश्व अर्थतंत्र अमरीकी, ब्रिटिश तथा अन्य उच्च औद्योगीकृत देशों की मुद्राओं से चल रहा था। लेकिन इन विकासमान देशों ने अपनी-अपनी मुद्राओं को अन्तर्राष्ट्रीय मुद्राएं बनाने की दिशा में कुछ कदम उठाना शुरू कर दिया है।भारत समेत अन्य देशों ने ‘संरक्षणवाद’ का विरोध किया है अर्थात् साम्राज्यवाद के पक्ष में संरक्षण का। भारत एवं अन्य देशों के नेताओं ने विश्व आर्थिक मंदी के दौर में उचित कदम् उठाने की माँग की हैं। उन्होंने निर्णय लिया है कि संकट की इस घड़ी में वे एक दूसरे की मदद करेंगे। उन्होंने तय किया है कि वास्तविक अर्थतंत्र में परस्पर सहयोग बढ़ाया जाये। इस दिशा में सम्बद्ध देशों ने संयुक्त संगठन भी बना लिया है।ब्राजील के नेता लूई इनासियों लूला का कहना है कि आज बदलते विश्व में उचित भूमिका अदा करना ‘ब्रिक’ राष्ट्रों के सामने बड़ी चुनौती है, उन्होंने ‘दोहा राउंड’ की समुचित समाप्ति की माँग की।आज ‘ब्रिक’ देश विश्व अर्थतंत्र के विकास का 65 प्रतिशत पैदा करते हैं। दुनिया की लगभग आधी जनता इन देशों में रहती है ये देश विश्व का लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन करते हैं।उनके विकास की गति दुनिया में सबसे अधिक हैं, फलस्वरूप वे एशिया तथा विश्व के नये विकास इंजन हैं। अब ये देश कृषि प्रधान नहीं रह गये। वे अब अधिकाधिक औद्योगिक इलेक्ट्रानिक तथा अन्य आधुनिकतम क्षेत्रों में विकास कर रहें हैं।विकासमान देशों में अब इतना आत्मविश्वास पैदा हो गया है कि वे ‘ब्रेटन वुड्स’ के जवाब में अपनी अलग मुद्रा व्यवस्था की बात कर रहे हैं। वास्तव में यह एक समानांतर व्यवस्था नहीं बल्कि बहु दिशावाद का विकास करके ‘ब्रिक’ तथा ऐसे अन्य देशों की मुद्राओं का विकसित देशों की अन्तराष्ट्रीय मुद्राओं के समकक्ष लाने तथा विश्व बाजार और मुद्रा व्यवस्था में अन्य के साथ कार्यशील मुद्रा विकसित करने का प्रयत्न हैं।आज विकासशील देश बहुत बड़े परिवर्तन की कगार पर खड़े हैं।-अनिल राजिमवाले
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मंगलवार, 21 जुलाई 2009

झंडा गीत

मजलूमों ने मुल्कों-मुल्कों अब झंडा लाल उठाया है
जो भूखा था जो नंगा था अब गुस्सा उसको आया है।
रोके तो कोई हमको जरा सारा संसार हमारा है
सारा संसार हमारा है, सारा संसार हमारा है।

हम मेहनत से मजदूरी से धन-दौलत पैदा करते है,
फिर लाठी गोली खाते है और उल्टे भून्खो मरते है।
हो ऐसा चौपट राज ख़तम, सारा संसार हमारा है,
सारा संसार हमारा है, सारा संसार हमारा है।

तामीरे है खैराते है और तीरथ हज भी होते है
यूँ खून के धब्बे दमन से ये दौलत वाले धोते है।
हम दान के टुकड़े खाएं क्यो, सारा संसार हमारा है,
सारा संसार हमारा है, सारा संसार हमारा है।

हम दुनिया नई बनायेंगे, हम बस्ती नई बसायेंगे,
पूंजीपतियों, सामंतों को सब मिल मार भगायेंगे।
क्यों जनता राज न हो कायम सारा संसार हमारा है,
सारा संसार हमारा है, सारा संसार हमारा है।
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इंटरनेशनल गीत

उठ जाग ओ भूखे बंदी,
अब खींचो लाल तलवार
कब तक सहोगे भाई,
जालिम अत्याचार

तुम्हारे रक्त से रंजित क्रंदन,
अब दश दिश लाया रंग
ये सौ बरस के बंधन,
हम एक साथ करेंगे भंग

ये अन्तिम ज़ंग है जिसको,

हम एक जीतेगे एक साथ
गाओ इंटरनेशनल
भव स्वतंत्रता का गान
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विधान सभा उपचुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी

मुरादाबाद पश्चिम से कामरेड नेम सिंह
विधुना से कामरेड राम बाबु त्रिवेदी
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शनिवार, 18 जुलाई 2009

कामरेड क्लारा जेटकिन और कामरेड रोजा लक्सुम्बेर्ग


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बुधवार, 15 जुलाई 2009

कामरेड सज्जाद ज़हीर


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सोमवार, 13 जुलाई 2009

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का संविधान (हिन्दी में)

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का संविधान (हिन्दी में)
प्रस्तावना
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भारतीय मजदूर वर्ग की राजनैतिक पार्टी है। वह सामान्य रूप से मजदूरों, किसानों, मेहनतकश जनता, बुद्धिजीवियों तथा अन्य का एक स्वैच्छिक संगठन है जो समाजवाद और कोम्मुनिस्म के ध्येय के लिए समर्पित है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ठोस रूप से एक न्यायोचित समाजवादी समाज के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है जिसमें सबों के लिए सामान अवसर तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की गारंटीसभी तरह के शोषण जिसमें जातीय, वर्गीय तथा लैंगिक शोषण शामिल हैं और मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण की समाप्ति के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी, एक ऐसा समाज जिसमें मेहनतकश जनता द्वारा उत्पादित सम्पदा पर कुछा मुट्ठी भर लोग कब्जा नहीं करेंगे। मार्क्सवाद-लेनिनवाद का विज्ञानं एक ऐसी नै समाजवादी व्यवस्था की दिशा में मार्ग निर्धारित करने के लिए अपरिहार्य है। यकीनन, यह मार्ग विशेष ऐतिहासिक पर्तिस्थितियों और हमारे देश की खास विशेषताओं एवं पहलुओं, उसके इतिहास, परम्परा, संस्कृति, सामाजिक संरचना और विकास के स्तर द्वारा निर्धारित होगा। यह लक्ष्य कठिन संघर्ष तथा लोकतान्त्रिक मानदंडों एवं मूल्यों के प्रति ठोस प्रतिबद्धता के बिना हासिल नहीं होगा।
समाजवाद के निर्माण के लिए मेहनतकश जनता द्वारा सत्ता की प्राप्ति जो समाजवादी लोकतंत्र पर आधारित हो, आवश्यक है। मेहनतकश जनता और उनके ऐतिहासिक मिशन के प्रति अटूट निष्ठा के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस मिशन की प्राप्ति के लिए काम करेगी एंड अंत में एक कम्युनिस्ट समाज की स्थापना के अन्तिम लक्ष्य की दिशा में आगे बढेगी।
भारत का समाजवादी समाज और समाजवादी राज्य पूरी तरह व्यक्तिगत स्वतंत्र के अधिकार, भाषण, प्रेस, सममेलन, अंतःकरण की स्वतंत्र तथा धार्मिक विश्वास की रक्षा करेगा। वह विपक्षी दल गठित करने के अधिकार की भी गारंटी करेगा बशर्ते की वे संविधान का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हों। समाजवादी संविधान हमेश चौकसी रखेगा तथा लोकतंत्र के ध्वंस और जनता के बुनियादी अधिकारों के उल्लंघन को रोकेंगा। पार्टी की संभावनाएं एवं राजनितिक नीतियाँ वस्तुगत वास्तविकता के आधार पर निर्धारित होंगी। हमारी पार्टी का संचित अनुभव और विश्व क्रन्तिकारी अनुभव इस प्रक्रिया में पार्टी की मदद करेगा। जीवन ने यह दिखला दिया है की पूंजीवादी पथ पर चल कर और जब तक पूजीपति वर्ग का राज्य सत्ता पर नियंत्रण है तब तक इस कर्तव्य को पूरा नहीं किया जा सकता है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जन्वधि केन्द्रितावाद तथा पार्टी के अन्दर पूर्ण लोकतंत्र के अधर पर अपने को और अपने कार्य को संगठित करती है। पार्टी पूरी द्रढ़ता से यह विश्वास करती है की कर्वैगत एकता अनिवार्य है। पार्टी कांग्रेस एंड रास्ट्रीय परिषद् के निर्णय सभी पार्टी इकाइयों और पार्टी सदस्यों पर बाध्यकारी होंगे। प्रमुख राजनितिक मसलो पर अल्पमत की राइ की जानकारी सभी पार्टी इकाइयों तथा पार्टी सदस्यों को दी जायेगी। राजनितिक, संगठनात्मक या अवसरवादी कारणों के अधर पर गुटों एवं ग्रुपों के निर्माण की इजाजत नही दी जायेगी। पार्टी स्वतंत्र एवं खुली बहस में विश्वास करती है। पार्टी विसम्मति की राय का आदर करेगी।
देशभक्ति के उदात्त विचारों से अनुप्राणित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भारत की स्वतंत्रता एवं सर्भौमिकता का अविचल रूप से समर्थन करती है। राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्रीय एकीकरण के लिए संघर्ष करती है तथा सेphootvadi एवं दकियानूसी अवधारणाओं, सम्प्रदायवाद, पुन्रूत्थान्वाद, छुआछुत, जितिवाद, धार्मिक असहिंश्नुता, महिलाओं के खिलाफ भेदभाव एवं उन्हें सामान अधिकारों से वंचित रक्खे जाने की पुरी द्रढ़ता से विरोध करती है और कम्युनिस्ट पार्टी अंधराष्ट्रवाद तथा पूजीवादी रस्त्रवाद के खिलाफ संगर्ष करती है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी हमारे समाज से सभी तबकों के अपनी इच्छा के अनुरूप किसी भी धर्मं को मानने एवं कृत्या करने के अधिकार का पूरी द्रढ़ता से समर्थन करती है, लेकिन वह किसी भी धर्मं के khilaaph ghrana का प्रचार करने की इजाजत नहीं देगी।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी भारत के संविधान तथा संस्थापित कानून और समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता एवं लोकतंत्र के सिद्धांतों में पूर्ण nishtha और vishvas बनाये rakhegi।



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