भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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शुक्रवार, 21 फ़रवरी 2014

राहुल गाँधी के निर्वाचन क्षेत्र अमेठी में भाकपा ने आन्दोलन का बिगुल फूंका.

मुसाफिरखाना(अमेठी)- गरीब और आम आदमी की ज्वलंत समस्यायों, कानून व्यवस्था की बिगडी हालात और भाकपा नेता का० शारदा पाण्डेय के विरुध्द कोतवाली मुसाफिरखाना में दलालों के दबाब में दर्ज किये गये फर्जी मुकदमे के विरुध्द भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय खेत मजदूर यूनियन, अ० भा० किसान सभा, अ० भा० नौजवान सभा एवं आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के लगभग २५० कार्यकर्ताओं ने मुसाफिरखाना तहसील के प्रांगण में धरना दिया एवं एक आमसभा की. सभा के मुख्यवक्ता भाकपा के राज्य सचिव डॉ० गिरीश थे. सभा को सम्बोधित करते हुये डॉ० गिरीश ने कहाकि आज केंद्र की सरकार द्वारा चलाई जारही नीतियों से जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. केंद्र सरकार आये दिन डीजल पेट्रोल एवं रसोई गैस के दाम बढ़ाती रहती है. इस कारण और सरकार के दुसरे कदमों के कारण महंगाई आसमान छू रही है. आम जनता का जीवन दूभर होगया है. इस सरके के नौ वर्ष के शासनकाल में घपलों-घोटालों और भ्रष्टाचार की तो मानो बाढ़ सी आगयी है. बेरोजगारी बढ़ी है और शिक्षा एक व्यापार बन चुकी है,जिसके बेहद महंगा होजाने के कारण आमजन शिक्षा से वंचित रह जारहे हैं. सरकार की जनविरोधी नीतियों और कारगुजारियों के चलते जनता में भारी आक्रोश है जिसका खामियाजा कांग्रेस को आगामी लोकसभा चुनावों में निश्चय ही भुगतना होगा, जनता के इस गुस्से को भाजपा अपने पक्ष में भुना कर सत्ता पर कब्जा करने की हर कोशिश में जुटी है. उसने देश और दुनियां के पूंजीपतियों, उद्योगपतियों एवं कार्पोरेट घरानों के सबसे चहेते नरेंद्र मोदी को चुनावों से पहले ही प्रधानमन्त्री पद का प्रत्याशी बना दिया है जबकि हमारे यहाँ संसदीय जनतंत्र है जिसमें चुनाव के बाद सांसदों के बहुमत द्वारा चुना गया व्यक्ति ही प्रधानमन्त्री बनता है. वे मोदी को चाय बेचनेवाले के रूप में प्रचारित कर रहे हैं ताकि गरीबों को बहकाया जासके और इस बात पर पर्दा डाला जासके कि मोदी की रैलियों और भाजपा के प्रचार अभियान में बहाया जारहा अरबों रुपया आखिर कहां से आरहा है. डॉ० गिरीश ने कहाकि सवाल यह नहीं है कि कोई चाय बेचता रहा है या चावल. सवाल यह है कि उसकी नीतियां चाय बेचने वाले जैसे गरीबों के पक्ष में खड़ी हैं या गरीबों को लूटने वाले धनपतियों के पक्ष में. ये मोदी नामक तत्व तो पूरी तरह धनपतियों का रक्षक है. डॉ० गिरीश ने कहाकि वैसे भी भाजपा की आर्थिक नीतियों और कांग्रेस की नीतियों में कोई फर्क नहीं हैं. भाजपा नाम की मुर्गी के पेट से भी वही अंडा निकलेगा जो आज कांग्रेस के पेट से बाहर आरहा है. यह पार्टी भी महंगाई, भ्रष्टाचार बढ़ाने एवं सांप्रदायिकता फेलाने के लिये सुविख्यात है. यह जो सत्ता पर कब्जा करने के मंसूबे बांध रही है वो धुल-धूसरित होकर रहेंगे. डॉ० गिरीश ने कहाकि आम जनता भ्रष्टाचार से बुरी तरह त्रस्त है और उसे पूरी तरह समाप्त करना चाहती है. वह कांग्रेस, भाजपा एवं दूसरी पूंजीवादी पार्टियों से भी बुरी तरह परेशान है और एक जन हितेषी राजनैतिक विकल्प की तलाश में है. अपनी इसी ख्वाहिश के चलते जनता ने दिल्ली विधानसभा के चुनावों में आम आदमी पार्टी को समर्थन दिया. लेकिन सरकार बनाने के बाद वे न तो अपने चुनावी वायदे पूरे कर पाये न ही सत्ता में बने रह पाये. अब उद्योगपतियों की बैठक में जाकर उन्होंने यह भी ख डाला कि न तो वह पूंजीपतियों के खिलाफ हैं न ही निजीकरण के. उन्होंने अपना यह मन्तव्य भी उजागर कर दिया की वह सरकार के द्वारा उद्योग चलाये जाने के पक्ष में नहीं है. यह वही विचार है जिसे कांग्रेस और भाजपा अपनी विनाशकारी नई आर्थिक नीतियों को जायज ठहराने के लिये प्रकट करती रही हैं. उन्होंने स्पष्ट कियाकि कोई या तो पूँजीवाद का पैरोकार हो सकता है अथवा गरीबों का. कोई पूँजीवाद का समर्थक हो सकता है या समाजवाद का. आज यह स्पष्ट होगया है कि केजरीवाल और उनकी मंडली पूंजीवाद के पक्ष में खड़ी है और उन्हीं की पैरोकार है. भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि आज ऊतर प्रदेश की सरकार भी हर मोर्चे पर विफल होचुकी है. कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है. किसान-कामगार तवाह होरहे हैं. वे आर्थिक बदहाली के चलते आत्महत्यायें कर रहे हैं. मुजफ्फरनगर शामली एवं मेरठ के दंगों सहित १४० दंगे सपा के शासनकाल में होचुके हैं जिन्हें रोकने में सरकार पूरी तरह नाकमयाब रही है. प्रदेश की सत्ता मफियायों, दलालों और दबंगों के हाथों में कैद है. ऐसे ही लोगों के कहने पर भाकपा के जुझारू नेता का० शारदा पाण्डेय के खिलाफ फर्जी मुकदमे लिखे जारहे हैं और उनको गरीबों का साथ छोड़ने अथवा जान से हाथ धोने की धमकियां दी जारही है. डॉ० गिरीश ने चेतावनी देते हुए कहाकि यदि का० शारदा पांडे के खिलाफ कुछ भी हुआ तो उत्तर प्रदेश सरकार की चूलें हिला दी जायेंगी. भाकपा सुल्तानपुर के जिला सचिव का० शारदा पाण्डेय ने कहाकि आजादी के ६५ साल बाद भी किसान मजदूर गरीब मेहनतकश आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं. भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की जनविरोधी नीतियों के चलते किसान को उसकी फसल का उचित मूल्य, मजदूर को उसका सही हक मनरेगा के तहत काम, अत्यंत गरीबों को बीपीएल के तहत मिलने वाला अनाज, राशनकार्ड नहीं मिल रहा. नौजवानों को रोजगार और गरीबों के बच्चों को शिक्षा से वंचित रखा जारहा है. भाकपा आज ही नहीं अपने जन्म से ही इन सवालों पर संघर्ष करती रही है और करती रहेगी आज भाकपा को और मजबूती प्रदान करने की जरूरत है. सभा के बाद एक ९ सूत्रीय ज्ञापन जो मुख्यमंत्री को सम्बोधित था उपजिलाधिकारी को सौंपा गया. सभा को देव पाल सिंह एडवोकेट, जियालाल कोरी, रामदेव कोरी, रामप्यारे पांडे, रोशनलाल प्रधान, श्यामदेवी, नीलम, मीणा देवी, राम्सुधारे पासी, रामतीर्थ पासी, छितईराम पासी, बीडी रही, राकेश पासी, श्रीपाल पासी, एवं लल्लन पाल आदि ने सम्बोधित किया.
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गुरुवार, 13 फ़रवरी 2014

पेट्रोलियम मंत्रालय के घोटालों की प्रभावी जाँच की मांग.

लखनऊ—१३, फरबरी- २०१४. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डॉ०गिरीश ने कहाकि के.जी. बेसिन में अम्बानी की कम्पनी रिलाइंस इण्डिया लिमिटेड के लिये गैस की कीमतें दो गुनी करने के मामले एवं चुनाव वर्ष में तेल एवं प्राक्रतिक गैस आयोग(ONGC) के मौजूदा चेयरमैन को सारे नियमों को ताक पर रख कर एक साल के लिये पुनर्नियुक्ति दिलाने के प्रयासों से यह साबित हो गया है कि पेट्रोलियम मंत्रालय भारी भ्रष्टाचार में डूबा है. डॉ० गिरीश ने इस मंत्रालय के साढ़े चार साल के क्रिया कलापों की प्रभावी, विश्वासप्रद एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. उन्होंने कहाकि दोनों ही सवाल अत्यधिक लोक महत्व के हैं और दोनों में लोकधन के अपव्यय एवं भारी भ्रष्टाचार की तमाम सम्भावनायें नजर आरही हैं अतएव भाकपा के वरिष्ठ सांसद एवं ए.आई.टी.यू.सी. के महासचिव का० गुरुदास दासगुप्त ने पिछले आठ माहों में इन मामलों को बार-बार उजागर किया. उन्होंने गैस के मुद्दे को लोक सभा में उठाया, कई बार प्रधान मंत्री को चिट्ठियां लिखीं, पूरे मसले पर एक पुस्तिका प्रकाशित की तथा सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जिस पर ४ मार्च को सुनवाई होना वांच्छित है. इसी तरह जब पेट्रोलियम मंत्री ने सारे कायदे कानूनों और स्थापित परम्पराओं को दरकिनार कर ओ.एन.जी.सी.के मौजूदा चेयरमैन के कार्यकाल को एक वर्ष आगे बढ़ाने और नियमानुसार गठित पैनल द्वारा नयी नियुक्ति के लिए की गई संसुति को निष्प्रभावी करने की कोशिश की तो का० गुरुदास ने इस मामले को भी पूरी शिद्दत से उठाया और एक नहीं दो-दो बार इस सम्बन्ध में भी प्रधानमंत्री को चिट्ठियां लिखीं. अब दिल्ली की सरकार द्वारा गैस मामले पर ऍफ़.आई.आर. दर्ज करा देने से मीडिया ने भी खासी कवरेज दी है और जनता पेट्रोलियम मंत्रालय के भीतर क्या कुछ चल रहा है, जानना चाहती है. डॉ० गिरीश ने कहाकि वैसे तो कांग्रेस अथवा भाजपा दोनों के ही शासनकाल में अधिकतर पेट्रोलियम मंत्री अम्बानी की पसंद के आधार पर ही बनते रहे हैं, लेकिन इस बार हस्तक्षेप कुछ अधिक ही है. अतएव जनता के सामने सच्चाई आनी ही चाहिये.
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बुधवार, 12 फ़रवरी 2014

LATHI-CHARGE ON STUDENTS CONDEMNED

The Central Secretariat of the Communist Party of India has issued following statement to the press:

The Secretariat of the Communist Party of India severely condemns the lathi-charge and use of water cannons on the peaceful demonstration of All India Students Federation today afternoon at the Parliament Street. The students were organizing demonstration on the call of AISF, for proper steps to implement Right to Education, Free education from K.G. to P.G; against privatization and commercialization of Education, against foreign universities, scraping of Lyngdo Committee report and democratize elections to students unions etc.

Thousands of students gathered near the Parliament Street and wanted to submit a memorandum to Education Minister. They were prevented. Police tried to disperse them by using water cannons and later resorted to brutal Lati-Charge. Even girl students were not spared. AISF President Syed Vali Ullah Khadri and many other students were severely injured and admitted in different hospitals. CPI demands action on Police Officers responsible for lathi-charge should be suspended and action should be initiated.


(S.S.BHUSARI)

Office Secretary
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सोमवार, 10 फ़रवरी 2014

सफल हड़ताल पर बैंक कर्मियों को भाकपा की बधाई

लखनऊ 10 फरवरी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने वेतन पुनरीक्षण की मांग कर रहे बैंक कर्मियों की आज से शुरू हुई दो दिवसीय अखिल भारतीय हड़ताल पर बैंक कर्मचारी एवं अधिकारी संगठनों को सफल हड़ताल आयोजित करने के लिए बधाई दी है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा है कि बैंक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की वेतन पुनरीक्षण की मांगें जायज हैं और केन्द्र सरकार एवं भारतीय बैंक संघ पांच प्रतिशत, साढ़े चार प्रतिशत और आधा प्रतिशत वेतन वृद्धि की बात कर यह साबित कर रहा है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता के साथ हल करना नहीं चाहते। बैंकों का आपरेटिंग मुनाफा लगातार बढ़ रहा है और नेट मुनाफे के कम बढ़ने का कारण बैंक के अधिकारी-कर्मचारी नहीं हैं बल्कि इंफ्रा सेक्टर के लिए जबरदस्ती दिलाये गये ऋण हैं जो सरकारी नीतियों के कारण एनपीए में तब्दील हो गये हैं। डा. गिरीश ने विश्वास जाहिर किया है कि वेतन कटवा कर हड़ताल करने वाली बैंक कर्मियों की क्रान्तिकारी जमात को इस बार भी सफलता मिलेगी।
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लेखानुदान नहीं पूर्ण बजट पास कराये राज्य सरकार - भाकपा

लखनऊ 10 फरवरी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल की एक बैठक डा. गिरीश, राज्य सचिव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य सरकार से मांग की गई कि वह 19 फरवरी से प्रारम्भ हो रहे विधान मंडल के सत्र में पूर्ण बजट लाकर के उसे पास कराये। लेखानुदान लाने की कोई भी कोशिश न तो प्रदेश की जनता के हित में है और न ही स्वयं राज्य सरकार के हित में।
बैठक के बाद यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि ऐसी चर्चा है कि उत्तर प्रदेश सरकार विधान मंडल के आगामी सत्र में लेखानुदान लाने की कोशिश में है। चुनावों के पूर्व लेखानुदान पारित कराने की केन्द्र सरकार की तो मजबूरी होती है लेकिन राज्य सरकार के सामने ऐसी कोई मजबूरी नहीं है। पूर्ण बजट पाना जनता का अधिकार है और राज्य सरकार को जनता के इस हक को नहीं छीनना चाहिए।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि इसका यह अर्थ लगाया जा रहा है कि राज्य सरकार लोकसभा चुनावों के पहले जनता के समक्ष अपनी नीतियों को घोषित करने से कतरा रही है और लेखानुदान पारित कराके अपनी जिम्मेदारियों से बचना चाह रही है। जनता को भय है कि लोक सभा चुनाव के बाद सरकार निर्मम तरीके से जनविरोधी बजट लाने को स्वतंत्र होगी और जनता के ऊपर भारी भार थोपा जायेगा। विधान मंडल के वर्तमान सत्र के दौरान सरकार के पास बजट पेश करने और पास कराने के लिए पर्याप्त समय है, अतएव समयाभाव बता कर भी सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती है।
सचिव मंडल की बैठक में लोक सभा चुनावों की तैयारियों पर गम्भीरता से विचार हुआ और निर्णय लिया गया कि भाकपा इन चुनावों में वामपंथी दलों को एकजुट करने की कोशिश करेगी। अपनी चुनावी तैयारियों को गति देते हुए भाकपा ने जनता के ज्वलंत मुद्दों पर क्षेत्रीय रैलियों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। अब तक गन्ना किसानों की समस्याओं और फिरकापरस्ती के खिलाफ 2 रैलियां आयोजित करने का निर्णय लिया जा चुका है। 15 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक रैली मेरठ के नौचंदी ग्राउन्ड पर आयोजित की जा रही है जिसमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी भी भाग लेने के लिए आ रहे हैं। दूसरी रैली पूर्वांचल की 20 फरवरी को पड़रौना में आयोजित की जा रही है जिसमें राज्य सचिव एवं सहायक सचिव आदि नेतागण भाग लेंगे।


राज्य सचिव
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गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

चौदहवें वित्त आयोग के समक्ष भाकपा द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन

6 फरवरी 2014
समक्ष
चौदहवां वित्त आयोग
भारत सरकार
कैम्प: लखनऊ

आयोग के सम्मानित सदस्यगण,
देश का सर्वाधिक आबादी वाला प्रान्त उत्तर प्रदेश आजादी के बाद अपेक्षित विकास नहीं कर पाया है। पिछले 25 सालों से यह अनेक क्षेत्रों में पिछड़ता चला जा रहा है। इसके लिए इन वर्षों में कार्यरत राज्य सरकारें तो दोषी हैं ही केन्द्र सरकारें भी बराबर की जिम्मेदार हैं। राज्य सरकारों ने यदि विकास की उपेक्षा की है तो केन्द्र सरकारों ने भी राज्य के प्रति सौतेलेपन से काम लिया है। वैसे तो पूरा प्रदेश ही पिछड़ा है परन्तु बुन्देलखण्ड और पूर्वांचल के सभी जिले तथा मध्य एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भी कई जिले बेहद पिछड़े हैं। 
कृषि: उत्तर प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है लेकिन गत वर्षों में यहां की खेती काफी पिछड़ गयी है और किसान कर्ज के जाल में डूबे हुए हैं। हजारों किसानों ने पिछले सालों में आत्महत्यायें की हैं और इससे कहीं अधिक भूख से मरे हैं। कृषि योग्य भूमि का क्षेत्रफल लगातार सिकुड़ता जा रहा है। कृषि भूमि किसानों के हाथों से निकल कर उद्योगपतियों, व्यापारियों, भू-माफियाओं और रिश्वतखोर राजनीतिज्ञों एवं अधिकारियों के हाथों में सिमटती जा रही है। इनके द्वारा कृषि उपकरणों के अधिकाधिक प्रयोग से खेतिहर मजदूर बेकार हो गये हैं।
विधान सभा चुनावों के दौरान वर्तमान सरकार द्वारा सभी किसानों का 50,000 रूपये तक का ऋण माफ करने का वायदा किया गया था परन्तु सरकार ने केवल भूमि विकास बैंक के ऋण ही माफ किये हैं जिसके कारण तमाम छोटे किसानों के खेत आदि नीलाम हो गये। कइयों को हवालात की हवा खानी पड़ी तो कइयों ने आत्महत्या कर ली।
कृषि के लिए सिंचाई बेहद जरूरी है लेकिन 25-30 सालों में प्रदेश में नहरों, बंबों, बांधों के निर्माण का कार्य बेहद धीमा है। कहा जाये तो यह पूरी तरह उपेक्षित है। निजीकरण के इस दौर में सरकारी ट्यूबवेल लगाये नहीं जा रहे हैं। भूमिगत जल का स्तर लगातार नीचे गिरता जा रहा है। सिंचाई के अभाव और भूमि सुधार लागू न किये जाने के कारण खेती दम तोड़ रही है।
औद्योगिक क्षेत्र: उत्तर प्रदेश में भारी मात्रा में कपड़ा मिलें, सूत मिलें, जूट मिलें, चमड़ा उद्योग, तेल उद्योग, इंजीनियरिंग उद्योग, चीनी मिलें, धातु उद्योग, दाल मिलें आदि थे। उनमें से बहुमत आज बन्द पड़े हैं और उद्योगपति खाली जमीनों पर कालोनियां बसा रहे हैं। अवस्थापना सुविधाओं के अभाव में औद्योगिक क्षेत्र बर्बाद हो चुका है और तमाम इकाईयां बीमार पड़ी हैं। केन्द्रीय उपक्रमों में स्कूटर इंडिया और इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज की हालत बहुत ही खराब चल रही है तो एनटीसी की सभी मिलें बन्द हैं। इसी तरह राज्य सरकार की तमाम इकाईयां बन्द हो चुकी हैं। सहकारी और सरकारी 21 चीनी मिलें पिछली सरकार ने बेच दी और गन्ना किसानों पर संकट आ गया।
कुटीर उद्योग: यहां भारी संख्या में कुटीर उद्योग थे जिनमें सबसे प्रमुख उद्योग बुनकरी रहा है। लेकिन सरकारों की कुटीर उद्योगों एवं दस्तकारी के प्रति उपेक्षा के कारण आज ये पूरी तरह बर्बादी की कगार पर हैं। लाखों-लाख बुनकर, बीड़ी मजदूर तथा अन्य दस्तकार बेरोजगारी से ग्रस्त होने के चलते भुखमरी के शिकार हो रहे हैं। असंगठित मजदूरों का तो और भी बुरा हाल है।
सड़क एवं बिजली: प्रदेश में एक ओर तो एक्सप्रेस हाईवे बनाने की परियोजनाओं पर काम चल रहा है तो दूसरी ओर तमाम अन्य सड़कों की दशा बेहद दयनीय है। राज्य की जीवन रेखा कही जाने वाली जी.टी. रोड तक अत्यधिक खराब स्थिति में है। 27 सालों में प्रदेश में बिजली की कोई नई परियोजना नहीं लगी है। अब जो परियोजनायें निर्माणाधीन हैं या बन कर तैयार हो चुकी है, उनमें निजीकरण के कारण घपले ही घपले हैं। बिजली के अभाव में प्रदेश का उद्योग और कृषि व्यापार तो चौपट हो ही गया है, बिजली की समस्या कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गयी है। आगरा की विद्युत वितरण प्रणाली को निजी हाथों में देने से वहां अनेक समस्यायें पैदा हुई हैं। पिछले 25 सालों में सार्वजनिक क्षेत्र का एक ही उद्योग प्रदेश में शुरू नहीं किया गया।
शिक्षा: शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रदेश बेहद पिछड़ चुका है। प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक महंगे निजी विद्यालयों की भरमार है, जिनमें पढ़ाई की गुणवत्ता की कोई गारंटी नहीं है। सरकार नियंत्रित विद्यालयों में भ्रष्टाचार, कार्य संस्कृति की पंगुता तथा सरकार की उपेक्षा के चलते शिक्षा दयनीय हालत में है। प्रदेश के किसान, मजदूर तबकों एवं आम आदमी के घरों के बच्चे उच्च शिक्षा तो दूर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा तक से वंचित है। वर्तमान शिक्षण सत्र में मिड डे मील के अंतर्गत अनाज एवं भोजन बनवाने का धन अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।
सरकारी एवं सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों पर प्रयोगशालायें और कम्प्यूटर कक्ष तक नहीं हैं और न ही कम्प्यूटर शिक्षक ही नियुक्त किये गये हैं। इन विद्यालयों में शिक्षकों की भी अतिशय कमी है। लगभग 20 वर्ष पूर्व शुरू किये गये विद्यालयों के वित्तविहीन उच्चीकरण के चलते इन विद्यालय के शिक्षकों को अति अल्प वेतन पर नौकरी पर रखा गया है। ऐसे शिक्षकों से क्या अपेक्षा की जा सकती है। स्वःवित्तपोषित कोर्सों के बारे में भी लगभग यही सत्य है।
इंटर पास करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप बांटने के नाम पर आयोजित होने वाले आयोजनों पर अनाप-शनाप खर्चा किया गया और कई स्थानों पर आयोजनों पर हुआ खर्चा लैपटॉप बांटने के खर्चे से कहीं अधिक का था।  उत्तर प्रदेश में राजनैतिक हितों के लिए सरकारी धन का दुरूपयोग लगभग सभी सरकारों द्वारा किया गया है।
बेरोजगारी: उद्योग शून्यता, कृषि के बेढ़ब संचालन तथा आधारभूत ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) के निर्माण में उदासीनता और पिछड़ेपन के चलते प्रदेश में भयंकर बेरोजगारी है और प्रदेश के तमाम नौजवान और मजदूर जीवनयापन के लिये पलायन करने को मजबूर हैं। पलायन से गांव खाली हो रहे हैं और शहरों पर आबादी का भार बढ़ रहा है, जिससे अन्य समस्यायें पैदा हो रहीं है। नरेगा जैसी योजनायें भ्रष्टाचार की जकड़ में हैं। ईमानदार निर्वाचित जन प्रतिनिधियों यथा ग्राम प्रधानों का जीवन तक संकट में है।
नागरिक सुविधायें: जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिनीवल मिशन चन्द बड़े शहरों में लागू किया गया है, जहां भीषण भ्रष्टाचार व्याप्त है। तमाम मध्यम एवं छोटे शहरों में सड़कों, नालियों, सफाई आदि की स्थिति बेहद दयनीय है। प्रदेश की राजधानी तक में सार्वजनिक सफाई के लिए जनता को स्थानीय ठेकेदारों को मासिक आधार पर भुगतान करना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में भी नागरिक सुविधायें हद दर्जे के निम्नतम स्तर पर हैं।
स्वास्थ्य: पूरे प्रदेश में राजकीय स्वास्थ्य सुविधायें चौपट पड़ी हैं। सरकारी अस्पतालों में से अधिकांश की इमारतें जर्जर अवस्था में हैं। अस्पतालों में पर्याप्त स्टाफ तक नहीं है। कई जिलों में एक भी महिला चिकित्सक नियुक्त नहीं है। दवाओं और उपकरणों का बेहद अभाव है। साफ सफाई और तीमारदारी की समुचित व्यवस्था तक नहीं है। निजी नर्सिंग होम्स एवं चिकित्सालय लूट के अड्डे बने हुये हैं। आम जनता स्वास्थ्य की एवज में भारी कीमत चुका रही है। ग्रामीण स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ अधिसंख्यक ग्रामीण जनता को नहीं मिल पा रहा है। उसकी एंबुलेंस गाडियां टैक्सी के रूप में चलाई जा रही हैं।
गरीब एवं असहाय तबके: प्रदेश में गरीबी की रेखा के नीचे गुजर करने वालों की संख्या बहुत अधिक है और यह प्रदेश की कुल आबादी का 70 प्रतिशत से कम नहीं है। गरीबी रेखा के नीचे के लोगों की गणना पहले योजना आयोग के दफ्तर में कर ली जाती है और फिर जिला एवं ब्लाक स्तरीय अधिकारियों को उतने ही बीपीएल परिवार चिन्हित करने के लिए निर्देश जारी कर दिये जाते हैं। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले अधिसंख्यक परिवारों के पास बीपीएल कार्ड नहीं हैं। नरेगा के अंतर्गत जॉब कार्ड देने में भी हीला हवाली की जाती है। नरेगा में काम करने के पूरे पैसे तक नहीं मिलते हैं। कहने को पैसा बैंक खातों में जमा किया जाता है परन्तु दबंगई के कारण बैंक खातों से पैसा निकालने के लिए विड्राल फार्मों पर घर-घर जाकर पहले से ही दस्तखत करवा लिये जाते हैं। गरीबों के लिए चल रही तमाम योजनायें भ्रष्टाचार में डूबी हैं।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली: प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली चौपट पड़ी है। आम आदमी को जरूरत की खास चीजें बेहद महंगी मिलती हैं। मौजूदा महंगाई ने तो आम आदमी का जीना दूभर कर दिया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को व्यापक तथा भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने की जरूरत है।
विकास के धन का दुरूपयोग: राजनीतिक उद्देश्यों से वशीभूत होकर सरकारें विकास के लिये धन को स्मारकों, मूर्तियों और अपनी जन्मभूमियों को यादगार स्थल बनाने में जुटी रहीं और प्रदेश का विकास पिछड़ता चला गया है। उत्तर प्रदेश के समूचे विकास की उपेक्षा हुई है।
वित्त आयोग के सम्मानित सदस्यगण,
इन परिस्थितियों में प्रदेश के समग्र विकास के लिए हम निम्न मांगें आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं:

  • प्रदेश में कृषि के विकास के लिए पर्याप्त धन आबंटित किया जाये। ये धन प्रदेश में सहकारी खेती विकसित करने, खेती को उपकरण एवं अन्य उपादान मुहैया कराने तथा भूमि सुधार के वास्ते दिया जाये।
  • उत्तर प्रदेश के बन्द पड़े मिलों, उद्योगों - खासकर सार्वजनिक एवं सहकारी उद्योगों को चलवाने, बीमार उद्योगों को ठीक हालत में लाने तथा नये उद्योग खुलवाने को पर्याप्त मात्रा में धन मुहैया कराया जाये।
  • बुनकरों तथा बुनकर उद्योग, अन्य कुटीर उद्योगों की दशा सुधारने तथा असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को रोजगार देने के लिए योजनायें चलाने हेतु भी पर्याप्त धन मुहैया कराया जाये।
  • सार्वजनिक क्षेत्र में प्रदेश में सड़क निर्माण, विद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए पर्याप्त धन दिया जाये।
  • प्रदेश में नहरों के निर्माण, बांधों एवं चेकडैम्स के निर्माण तथा सरकारी ट्यूबवेलों को लगाने हेतु भी धन आबंटित किया जाये।
  • प्रदेश के सरकारी स्कूलों का स्तर सुधारने तथा निजी स्कूलों का राष्ट्रीयकरण कर उन्हें संचालित करने, माध्यमिक शिक्षा सभी को मुफ्त दिलाये जाने और उच्च शिक्षा को आम आदमी के लिए सुलभ तथा सस्ती बनाने को शिक्षा का ढांचा खड़ा करने हेतु भारी धनराशि राज्य को मुहैया कराई जाये।
  • प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कुटीर एवं मध्यम उद्योग लगाने और पर्याप्त रोजगार सृजन कर उसे कार्यान्वित करने हेतु धन उपलब्ध कराया जाये।
  • नरेगा का दायरा 200 दिन प्रतिवर्ष और मजदूरी रू. 300.00 रूपये प्रतिदिन बढ़ाई जाये और शहरी क्षेत्र के लिए भी शहरी रोजगार गारंटी कानून बनाया जाये।
  • नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें, गलियां, खड़ंजे, नालियों एवं तालाबों आदि के निर्माण और सफाई को ध्यान में रखते हुए धन मुहैया कराया जाये।
  • सभी गरीबों को बीपीएल कार्ड दिलाकर उनके लिए तमाम विकासकारी योजनायें चलाने, वृद्धों, विधवाओं, विकलांगों के लिए आश्रयस्थल बनाने को पर्याप्त धन मुहैया कराया जाये।
  • आम आदमी को महंगाई और काला बाजारी से निजात दिलाने को सार्वजनिक वितरण प्रणाली को मजबूत करना जरूरी है जिसके लिए धन आबंटित किया जाये। खाद्य सुरक्षा कानून को लागू करने को भी धन की जरूरत होगी।
  • प्रदेश के बुन्देलखंड, पूर्वांचल, मध्य और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पिछड़े जिलों के विकास के लिये पर्याप्त धन मुहैया कराया जाये।
  • वन क्षेत्र के फैलाव एवं रखरखाव, वृक्षारोपण, झीलों, तालाबों-पोखरों के संरक्षण और उन्हें गहरा करने, जल संरक्षण के काम को अंजाम देने को भी धन की आवश्यकता है।
  • सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, गोबर गैस आदि से ऊर्जा दोहन के लिये पर्याप्त धनराशि भी आवश्यक है।
  • सूखा, बाढ़ तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने को अतिरिक्त धनराशि आबंटित की जाये।
  • अर्बन रिनीवल का कार्य 50,000 से अधिक आबादी वाले सभी नगरों तक लागू किया जाये, जिसमें प्रमुखता पेय जल की आपूर्ति एवं सीवरेज व्यवस्था स्थापित करने के साथ-साथ सड़कों के उच्चीकरण को दी जाये।

अतएव आपसे अनुरोध है कि प्रदेश के भौगोलिक एवं जन सांख्यकीय विस्तार तथा प्रदेश के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय की न्यूनता को देखते हुये प्रदेश के विकास के लिए उपर्युक्त बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए आप वसूल किये जाने वाले केन्द्रीय करों में से समान हिस्सा राज्य को प्रदान करें तथा केन्द्रीय निधियों में अधिकाधिक धन उत्तर प्रदेश के लिए आबंटित करने की संस्तुति करें। आबंटन के लिए 1971 की जनगणना के आंकड़ों के बजाय 2011 की वास्तविक संख्या को ध्यान में रखा जाये। विभाज्य अंश के वितरण के सिद्धान्त में वित्तीय अनुशासन के भार को बढ़ाया जाये। 

सुझाव


  • विकास का धन विकास में ही लगे अन्य मनमाने कामों में नहीं इसके लिए राज्य एवं जिलों के स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की एक निगरानी समिति बनाये जाने की सिफारिश केन्द्र सरकार से की जाये। उल्लेख आवश्यक होगा कि विधान मंडल की बैठकों की संख्या अत्यधिक घट चुकी है और पीएसी की कार्यपद्धति अंकुश लगाने में सफल साबित नहीं हुई।
  • जन प्रतिनिधियों, राज नेताओं, अधिकारियों और दलालों के भ्रष्टाचार पर नजर रखने के लिए केन्द्रीय एवं राज्य के स्तर पर पर्याप्त निगरानी व्यवस्था हो।
  • कैग के अधिकार क्षेत्र को विस्तृत किया जाये और केन्द्रीय सहायता का कैग द्वारा आडिट अनिवार्य बनाया जाये।
  • जिस धन को जिस कार्य के लिए दिया जाये उसे उसी कार्य में उपभोग किये जाने का प्रमाण लिये जाने को अनिवार्य किया जाये और उसके अन्यथा उपयोग पर यथोचित कार्यवाही के बारे में कानून बनाने पर विचार किया जाये।

आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप उपर्युक्त पर गहनता से विचार कर समुचित कार्यवाही करेंगे और उत्तर प्रदेश के विकास का रास्ता प्रशस्त करेंगे।
सादर,

भ व दी य


(डा. गिरीश)
राज्य सचिव
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शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

वायदों को निगलती अखिलेश सरकार

पिछले विधान सभा चुनावों के दौरान वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित समाजवादी पार्टी के तमाम नेता जनता से बड़े-बड़े वायदे करते हुए प्रदेश भर में जनसभायें कर रहे थे। विभिन्न तबकों के वोटों के लिए किए गए इन वायदों पर अखिलेश सरकार खरी नहीं उतरी।
बेरोजगार युवकों को बेरोजगारी भत्ता, किसानों की ऋण माफी, इंटर के विद्यार्थियों को टैबलेट और इंटर पास चुके छात्रों को लैपटॉप देने सरीखे तमाम वायदे किये गये थे। बेरोजगार युवकों को बेरोजगारी भत्ता के नाम पर की गई घोषणा में तमाम ‘किन्तु’ और ‘परन्तु’ जोड़ दिये गये जिसका परिणाम यह हुआ कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल प्रदेश में फैली विकराल बेरोजगारों की फौज में से केवल एक लाख लोगों को बेरोजगारी भत्ता दिये जाने का मामला सामने आया। बाकी लाखों बेरोजगारों को निराशा ही हाथ लगी।
इसी तरह किसानों के कर्जा माफी के नाम पर केवल भूमि विकास बैंक के कर्जों को ही माफ किया गया। चुनावों के दौरान ऋण माफी के वायदे को देखते हुए तमाम किसानों ने अपना कर्जा अदा नहीं किया जिसका परिणाम यह हुआ कि उन्हें न केवल उस कर्जे पर ब्याज की अदायगी करनी पड़ी बल्कि तमाम किसानों के खिलाफ बैंकों ने वसूली प्रमाणपत्र जारी कर दिये जिसके कारण तमाम लोगों की जमीनें और ट्रैक्टर आदि नीलाम हो गये।
इंटर के 25 लाख विद्यार्थियों को टैबलेट देने का वायदा किया गया था। दो साल पूरे होने को हैं परन्तु इस वायदे को आज तक पूरा नहीं किया गया। अब पता चला है कि इस योजना के नाम पर जो कदमताल की जा रही थी, उसे भी बंद कर दिया गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अगले साल के बजट के लिये वित्त एवं नियोजन विभाग को भेजे गये अपने बजट प्रस्ताव में इस मद में केवल एक रूपये का प्राविधान करने के लिए कहा है। मात्र एक रूपये में वे कितने छात्रों को टैबलेट दे पायेंगे, यह बड़ा सवालिया निशान है। ध्यान देने वाली बात यह है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग मुख्यमंत्री स्वयं सीधे देख रहे हैं और निश्चित रूप से ऐसा उनके निर्देशों पर ही विभाग ने किया होगा।
इंटर पास करने वाले छात्रों को अलबत्ता लैपटॉप बांटने की कवायद की गई। कहा जाता है कि जितने के लैपटॉप नहीं बांटे गये उससे ज्यादा पैसा लैपटॉप बांटने के आयोजनों पर किया गया। जो लैपटॉप बांटे गये वे बहुत ही घटिया क्वालिटी के हैं और जिन्हें यह मिले हैं, वे इसका उचित एवं आवश्यक प्रयोग भी नहीं कर पा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इन लैपटॉप की खरीद में भी भारी घोटाला हुआ है।
बुनकरों को किये गये तमाम वायदे भी हवा में ही तैर रहे हैं।
केन्द्र सरकार कई सालों से स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना चला रही है। योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। खाद्यान्न एवं भोजन पर बनने वाले व्यय का आबंटन केन्द्र सरकार राज्य सरकार को करती है। चौकाने वाली खबर है कि वर्तमान शैक्षिक सत्र में अब तक ग्राम प्रधानों तथा विद्यालयों को न तो खाद्यान्न मुहैया कराया गया है और न ही उसके बनने पर होने वाले व्यय को ही उपलब्ध कराया गया है। जिन ग्राम प्रधानों एवं प्रधानाध्यापकों ने इस आशा में कि देर-सबेर आबंटन मिल ही जायेगा, राशन की दुकान से एडवांड खाद्यान्न उठा कर भोजन बनवा कर बच्चों को मध्यान्न भोजन सुलभ कराया, वे अब परेशान हो रहे हैं क्योंकि कोटेदार राशन के पैसे मांग रहा है और भोजन बनवाने में होने वाला खर्चा तो वे अपने पास से कर ही चुके हैं।
अन्यान्य ऐसे वायदे हैं जो किये गये थे और जिन्हें अखिलेश सरकार लगातार निगलती चली जा रही है। आने वाले लोक सभा चुनावों में जनता के तमाम तबके किये गये वायदों पर जवाब जरूर मांगेंगे।
- प्रदीप तिवारी
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गुरुवार, 30 जनवरी 2014

का० इन्द्रजीत गुप्त- बेदाग छवि, गाँधी जैसी सादगी एवं लोकतान्त्रिक द्रष्टिकोण

पिछले कुछ दिनों में एक हाल में ही प्रकट हुयी पार्टी के नेताओं की सादगी और उसकी उपलब्धियों पर मीडिया ने दर्शकों और श्रोताओं के आँख और कानों को अपने तोता रटंत गुणगान से पाट दिया है. लेकिन अपनी तटस्थता का दाबा करने वाले मीडिया ने कम्युनिस्टों की कुर्बानियों, बलिदानों और सादगी को कभी प्रसारित नहीं किया अपितु जहाँ मौका मिला उन पर कीचड़ ही उछाली. लेकिन आज राष्ट्रीय सहारा ने का. इन्द्रजीत गुप्त पर एक टिपण्णी प्रकाशित कर मीडिया धर्म को निभाया है. उसका यथावत पाठ नीचे दिया जारहा है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी(सीपीआइ) के नेता इन्द्रजीत गुप्त सिर्फ १९७७-८० को छोड़ कर १९६० से जीवनपर्यन्त सांसद रहे.सबसे वरिष्ठ सांसद रहने के नाते वह तीन बार(१९९६, १९९८, १९९९) प्रोटेम स्पीकर बने और उन्होंने नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई.वह सीपीआइ के जनरल सेक्रेट्री रहे. वह आल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के जनरल सेक्रेट्री (१९८०-१९९०) रहे. वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ़ ट्रेड यूनियंस के अध्यक्ष(१९९८) रहे.और एच.डी. देवगोडा के मंत्रिमंडल में वह (१९९६-९८) गृहमंत्री रहे. उन्हें १९९२ में “आउटस्टैंडिंग पार्लियामेंतेरियां का सम्मान दिया गया. राष्ट्रपति के.आर. नारायण ने उन्हें श्रध्दांजलि देते हुए कहा था कि वह गांधीजी जैसी सादगी, लोकतान्त्रिक द्रष्टिकोण और मूल्यों के प्रति समर्पित व्यक्ति थे. ग्रहमंत्री बनने केबाद भी वह वेस्टर्न कोर्ट के दो कमरों के क्वार्टर में रहते रहे. वे टहलते हुये संसद चले जाते थे. गृहमंत्री बनने पर प्रोटोकाल के नाते उन्हें सरकारी गाड़ी से चलना पड़ा. फिर भी उन्होंने बहुत सी सुविधायें नहीं लीं थीं जो मंत्री होने के नाते उहें मिलती. यहाँ तक कि उन्होंने सुरक्षा गार्ड लेना स्वीकार नहीं किया. वह हमेशा लोगों को होने वाली असुविधाओं का पूरा ख्याल रखते थे. मंत्री रहते हुए भी एअरपोर्ट के टर्मिनल तक वायुसेवा की बस सही जाते थे न कि अपनी गाड़ी से. का. इन्द्रजीत गुप्त कज्न्म १८ मार्च १९१९ को कोलकता में हुआ था. उनके पिता सतीशचन्द्र गुप्त देश के अकाउंटेंट जनरल थे. इन्द्रजीत गुप्त के दादा बिहारीलाल गुप्त आईसीएस थे और बरोदा के दीवान थे.इन्द्रजीत गुप्त की पढ़ाई शिमला, दिल्ली के सेंट स्टीफेंस व किंग्स कालेज और केम्ब्रिज में हुई थी.इंग्लेंड में ही वह रजनीपाम दत्त के प्रभाव में आये और उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ज्वाइन कर ली. १९३८ में कोलकता लौटने पर वह किसानों और मजदूरों के आन्दोलन से जुड़ गये. आजादी के बाद कम्युनिस्ट पार्टी पर तीन बार प्रतिबन्ध लगाया गया और इसके तहत अन्य वाम नेताओं के साथ इन्द्रजीत गुप्त को या तो भूमिगत होना पड़ा या गिरफ्तार. इन्द्रजीत गुप्त का देहान्त २० फरबरी २००१ को ८१ साल की उम्र में हुआ.
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भूतल परिवहन मंत्री,श्रीप्रकाश जायसवाल,मुलायम सिंह और अखिलेश यादव सभी जिम्मेदार हैं जी.टी. रोड की दयनीय दशा के लिए.

भाकपा ने जी. टी. रोड की मरम्मत कराने की मांग उठाई. लखनऊ- ३० जनवरी २०१४, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डॉ० गिरीश ने केन्द्रीय भूतल परिवहन मंत्री को पत्र लिख कर राष्ट्रीय राज मार्ग सं० ९१(जी. टी. रोड) की कानपुर और और अलीगढ के बीच दयनीय दशा से अवगत कराया है और इसकी तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है. अपने पत्र में भाकपा राज्य सचिव ने भूतल परिवहन मंत्री को बताया है कि उक्त मार्ग अत्यंत जीर्ण- शीर्ण हालात में है. सडक में इतने गहरे गड्ढ़े हो गये हैं कि यह पता ही नहीं लगता कि गड्ढ़ों में सड़क है या सडक में गड्ढ़े. कानपूर और अलीगढ़ के बीच सफर में ६ घंटे लगते थे मगर अब सडक की इस दुर्दशा के चलते ९-१० घंटे लग जाते हैं. अतएव समय एवं ईंधन की भारी वर्बादी होती है. डॉ० गिरीश ने कहा कि यह राष्ट्रीय मार्ग केन्द्रीय मंत्री श्री श्रीप्रकाश जायसवाल, केंद्र सरकार को समर्थन दे रहे श्री मुलायम सिंह यादव एवं श्रीमती डिम्पल यादव जैसे अति विशिष्ट लोगों के चुनाव क्षेत्रों से गुजरता है. फिर भी यह इस दुर्दशा को प्राप्त है. इसकी सीधी वजह यह है कि इन नेताओं को इस मार्ग से चलने की जरूरत नहीं है. ये मान्य नेतागण हवाई जहाज अथवा हेलिकॉप्टर से यात्रायें करते हैं अतएव उन्हें इसकी फ़िक्र करने की शायद जरूरत नहीं है. हमने इन नेताओं को भी पत्र की प्रतियाँ भेजी हैं और उनसे भी इस सम्बन्ध में त्वरित कदम उठाने की मांग की है, भाकपा नेता ने कहा है. भाकपा ने चेतावनी दी है कि यदि इस मार्ग की फौरन मरम्मत नहीं कराई गयी तो सम्बन्धित नेताओं को इसका खामियाजा लोकसभा चुनावों में भुगतना पड़ सकता है. डॉ० गिरीश, राज्य सचिव, भाकपा, उत्तर प्रदेश.
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शनिवार, 25 जनवरी 2014

भाकपा उ. प्र. कार्यकारिणी की बैठक के फैसले.

लखनऊ- २५ जनवरी २०१४. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक आज यहाँ सम्पन्न हुई. बैठक की अध्यक्षता का० सुरेन्द्रराम ने की. बैठक में लिए गये फैसलों की जानकारी देते हुये पार्टी के राज्य सचिव डॉ० गिरीश ने बताया कि बैठक में कमरतोड़ महंगाई के खिलाफ ३१ जनवरी को प्रदेश के सभी जिला केन्द्रों पर धरना/प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया गया. इन प्रदर्शनों माध्यम से केन्द्र और राज्य सरकार के महंगाई बड़ाने वाले कदमों को उजागर किया जायेगा. प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रेषित किये जायेंगे. ज्ञापन में पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृध्दि पर रोक लगाने, प्रशासनिक व्यवस्था द्वारा मूल्य निर्धारण की व्यवस्था पुनः लागू कराने, इन पदार्थों पर राज्य के टेक्सों में कमी कराने, जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाने तथा जमाखोरी विरोधी अभियान चलाये जाने, बुनियादी सेवाओं का निजीकरण न किये जाने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को व्यापक बनाने, दिल्ली हरियाणा की तरह उत्तर प्रदेश में भी बिजली की दरें कम किये जाने,सभी तरह की शिक्षण संस्थाओं में ली जारही भारी फीस में प्रभावी कमी किये जाने, दवाओं की कीमतों में कमी लाने तथा निजी अस्पतालों में इलाज की दरें कम कराने की मांग की जायेगी. डॉ० गिरीश ने बताया की गन्ना किसानों की समस्यायों का समाधान कराने तथा सांप्रदायिक ताकतों की साजिशों को विफल करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय “एकता रैलियां” आयोजित की जायेंगी. अभी तक १५ फरबरी को मेरठ और २० फरबरी को कुशीनगर में रैलियां आयोजित की जायेंगी. इन रैलियों को पार्टी के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय नेतागण भाग लेंगे. मेरठ रैली में मेरठ एवं सहारनपुर मंडलों के जनपद भाग लेंगे जबकि कुशीनगर की रैली में गोरखपुर एवं बस्ती मंडल के जनपद भाग लेंगे. राज्य कार्यकारिणी की बैठक में लोकसभा चुनाव की तैय्यारियों पर भी चर्चा हुई. भाकपा ने वामदलों के साथ मिल कर चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर की है. बैठक में उत्तर प्रदेश में १६ लोकसभा सीटों की सूची तैयार कर राष्ट्रीय कार्यकारणी के विचारार्थ अग्रसारित किया गया है. केन्द्रीय कार्यकारिणी की ३१ जनवरी और १ फरबरी को दिल्ली में होने वाली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जायेगा. डॉ० गिरीश, राज्य सचिव.
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भाकपा महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन करेगी, एकता रैलियां भी आयोजित की जायेंगी. लोक सभा चुनाव की सूची भी तैयार की गयी.

लखनऊ- २५ जनवरी २०१४. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक आज यहाँ सम्पन्न हुई. बैठक की अध्यक्षता का० सुरेन्द्रराम ने की. बैठक में लिए गये फैसलों की जानकारी देते हुये पार्टी के राज्य सचिव डॉ० गिरीश ने बताया कि बैठक में कमरतोड़ महंगाई के खिलाफ ३१ जुलाई को प्रदेश के सभी जिला केन्द्रों पर धरना/प्रदर्शन आयोजित करने का निर्णय लिया गया. इन प्रदर्शनों माध्यम से केन्द्र और राज्य सरकार के महंगाई बड़ाने वाले कदमों को उजागर किया जायेगा. प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति एवं राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से प्रेषित किये जायेंगे. ज्ञापन में पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृध्दि पर रोक लगाने, प्रशासनिक व्यवस्था द्वारा मूल्य निर्धारण की व्यवस्था पुनः लागू कराने, इन पदार्थों पर राज्य के टेक्सों में कमी कराने, जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाने तथा जमाखोरी विरोधी अभियान चलाये जाने, बुनियादी सेवाओं का निजीकरण न किये जाने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को व्यापक बनाने, दिल्ली हरियाणा की तरह उत्तर प्रदेश में भी बिजली की दरें कम किये जाने,सभी तरह की शिक्षण संस्थाओं में ली जारही भारी फीस में प्रभावी कमी किये जाने, दवाओं की कीमतों में कमी लाने तथा निजी अस्पतालों में इलाज की दरें कम कराने की मांग की जायेगी. डॉ० गिरीश ने बताया की गन्ना किसानों की समस्यायों का समाधान कराने तथा सांप्रदायिक ताकतों की साजिशों को विफल करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय “एकता रैलियां” आयोजित की जायेंगी. अभी तक १५ फरबरी को मेरठ और २० फरबरी को कुशीनगर में रैलियां आयोजित की जायेंगी. इन रैलियों को पार्टी के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय नेतागण भाग लेंगे. मेरठ रैली में मेरठ एवं सहारनपुर मंडलों के जनपद भाग लेंगे जबकि कुशीनगर की रैली में गोरखपुर एवं बस्ती मंडल के जनपद भाग लेंगे. राज्य कार्यकारिणी की बैठक में लोकसभा चुनाव की तैय्यारियों पर भी चर्चा हुई. भाकपा ने वामदलों के साथ मिल कर चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर की है. बैठक में उत्तर प्रदेश में १६ लोकसभा सीटों की सूची तैयार कर राष्ट्रीय कार्यकारणी के विचारार्थ अग्रसारित किया गया है. केन्द्रीय कार्यकारिणी की ३१ जनवरी और १ फरबरी को दिल्ली में होने वाली बैठक में अंतिम निर्णय लिया जायेगा. डॉ० गिरीश, राज्य सचिव.
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शनिवार, 11 जनवरी 2014

वामदलों ने महंगाई बढ़ाने की नीतियों के खिलाफ आन्दोलन का निर्णय लिया

लखनऊ 11 जनवरी। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मा.), आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक तथा रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के राज्य के पदाधिकारियों की एक बैठक आज यहाँ सम्पन्न हुयी।
बैठक में वामदलों के केन्द्रीय नेतृत्व के आह्वान पर राज्य में महंगाई विरोधी आन्दोलन चलाने की रणनीति पर विचार किया गया। निर्णय लिया गया कि उत्तर प्रदेश में यह आन्दोलन केंद्र और राज्य दोनों ही सरकारों की महंगाई बढाने वाली नीतियों के विरोध में चलाया जायेगा।
बैठक में लिये गये निर्णय के अनुसार वाम दल 15 जनवरी से लेकर 30 जनवरी के मध्य जिलों-जिलों में सभायें, नुक्कड़ सभायें, साईकिल मार्च अथवा पदयात्राएं करके जनता के बीच जायेंगे तथा 31 जनवरी को जिला केन्द्रों अथवा तहसील केन्द्रों पर व्यापक धरने-प्रदर्शन आयोजित करेंगे।
आन्दोलन के अंतर्गत पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि पर रोक लगाने, सरकारी स्तर पर कीमतों के निर्धारण की व्यवस्था फिर से लागू करने, पेट्रोल डीजल आदि पर राज्य सरकार द्वारा लगाये गये करों में कमी कर उन्हें अन्य राज्यों के स्तर पर लाने, जनता को सेवाएं और सब्सिडी देने के काम को आधार कार्ड से न जोड़ा जोड़ने, जरूरी वस्तुओं जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाने तथा जमाखोरी विरोधी अभियान चलवाने, बुनियादी सेवाओं का निजीकरण न किये जाने तथा जो प्राइवेट कम्पनियां सार्वजनिक संसाधनों का इस्तेमाल करते हुये बुनियादी सेवायें दे रही हैं उनका ऑडिट कराये जाने, सार्वभौमिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली को फिर से लागू कराने, महंगाई को नीचे लाने को दिल्ली की तरह उत्तर प्रदेश में भी बिजली की दरें घटाए जाने, बिजली कम्पनियों का ऑडिट कराये जाने, बिजली का निजीकरण रोके जाने, लाइन हानियाँ एवं बिजली चोरी रोके जाने, सभी स्तरों पर सभी प्रकार की शिक्षण संस्थाओं में लिए जा रहे भारी शिक्षण शुल्कों में प्रभावी कटौती किये जाने, दवाओं की कीमतें घटाए जाने तथा अस्पतालों में मरीजों की लूट रोके जाने आदि मुद्दे उठाये जायेंगे।
बैठक में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश, सहसचिव अरविन्द राज स्वरूप, माकपा के सचिव एस. पी. कश्यप एवं दीनानाथ यादव, फॉरवर्ड ब्लॉक के राज्य महासचिव शिव नारायण सिंह चोहान तथा आरएसपी के सचिव संतोष गुप्ता ने भाग लिया।



कार्यालय सचिव
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शुक्रवार, 10 जनवरी 2014

बिजली के दामों में बढ़ोतरी जनविरोधी कदम


उत्तर प्रदेश में बिजली कंपनियों ने राज्य विद्युत नियामक आयोग को जो प्रस्ताव सौंपा है, उसकी मंजूरी मिलने के बाद आम उपभोक्ताओं के बिजली के बिल कम से कम दो गुने अवश्य हो जायंेगे। सभी बिजली कंपनियों ने हो रहे बिजली के दामों में बढ़ोतरी का कारण हो रहे घाटे को बताया है। उत्तर प्रदेश में बिजली की दरें पहले से ही पड़ोसी राज्यों बिहार, दिल्ली, पंजाब आदि से बहुत ज्यादा हैं।
प्रति किलो वाट फिक्स चार्ज जो इस समय रू. 50/- प्रतिमाह है, उसे बढ़ाकर डेढ़ गुना करने की बात कही गयी है। यह वह चार्ज है जो केवल कनेक्शन ले लेने पर देना पड़ता है, आप बिजली का उपभोग करें या न करें। इतनी शीत लहरी में अगर कहीं आपने हीटर लगा लिया तो आपका मीटर 1 किलो वॉट से ज्यादा का उपभोग दर्शा देगा और आप पर एक बड़ी राशि स्वीकृत लोड से अधिक लोड का उपभोग करने के नाम पर लगा दी जायेगी।
लाईफ लाईन कहे जाने वाले गरीब लोगों के घरों पर लगे 1 किलो वॉट के कनेक्शन के लिए अब 150 यूनिट के बजाय 50 यूनिट कर देने का प्रस्ताव है। 50 यूनिट से तो आज के जमाने में किसी का काम चलता ही नहीं है। इस प्रकार न्यूनतम बिजली की दरें तो किसी पर लागू नहीं होने वाली। 50 यूनिट से ज्यादा खर्च करने पर बिजली कंपनियों की प्रस्तावित दरों के अनुसार 100 यूनिट तक 4 रूपये प्रति यूनिट, 101 से 300 यूनिटों पर 4.50 पैसे प्रति यूनिट, 301 से 500 यूनिट पर 5 रूपये प्रति यूनिट और इससे अधिक पर 5.50 रूपये प्रति यूनिट दाम लिये जायेंगे।
घाटे का कारण होने वाली कथित लाईन हानियां, बिजली कंपनियों में व्याप्त भ्रष्टाचार और निजी बिजली कंपनियों से ज्यादा कीमत पर बिजली खरीदना है। निजी बिजली कंपनियां अधिक कीमत पर बिजली बेचने के लिए अपनी बैलेन्स शीटों में हेरा-फेरी कर रही हैं। इसी तरह पॉवर कारपोरेशन और उसकी तमाम कंपनियां बिजली चोरी तो करवाती ही हैं और भी अनाप-शनाप तरीके से पैसा व्यय किया जाता है जिसको व्यय करने की जरूरत नहीं है। वितरण निगमों का रू. 29,325 करोड़ रूपये बकाया है, इसमें केवल 2600 करोड़ रूपये वसूल लिये जायें तो बिजली कंपनियों का घाटा खतम हो जायेगा। 10 हजार करोड़ रूपये तो केवल उत्तर प्रदेश सरकार पर बकाया हैं। सरकार को इस बकाये को खुद तुरन्त अदा कर देना चाहिए। अगर लाइन हानियों को केवल 11 प्रतिशत कम कर दिया जाये तो कहा जाता है कि 4 हजार करोड़ रूपये की बचत हो जायेगी।
जनता के तमाम तबकों में उत्तर प्रदेश पॉवर कारपोरेशन, उसके उत्पादन एवं वितरण कंपनियों के साथ-साथ निजी उत्पादन कंपनियों के ऑडिट की मांग उठने लगी है। यानी जनता जानना चाहती है कि बही खातों में जो ब्यौरा दिखाया जा रहा है, वह कितना वास्तविक है और इसमें किसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं है। सन 2010 से बिजली कंपनियों के बही खातों का ऑडिट नहीं हुआ है। सनदी लेखाकारों यानी सी.ए. से यह ऑडिट करवाने में कुछ निकलने वाला नहीं है। हमें इन सभी कंपनियों का आडिट सीएजी यानी कैग से करवाने की मांग जोर-शोर से करनी चाहिए। कुछ ही दिनों पहले टेलीकॉम कंपनियों के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा था कि कैग को निजी टेलीकॉम कंपनियों के खातों की जांच करने का हक है। उच्च न्यायालय का कहना है कि चूंकि उनके राजस्व को सरकार के साथ साझा करना होता है इसलिए जनहित में कैग को उनका आडिट करने का अख्तियार उचित है। इस फैसले के अनुसार निजी बिजली कंपनियों का भी कैग से आडिट करवाया जा सकता है जिससे यह पता चल सके कि यह अपनी उत्पादन लागत जितनी दिखा रही हैं, क्या वास्तव में लागत उतनी ही है या ये कंपनियां हेरा-फेरी करके अधिक कीमत पर बिजली बेच रही हैं। खबर है कि उत्पादकों से बिजली खरीद कर उपभोक्ताओं तक पहुंचाने में वितरण कंपनियां खेल करती हैं। बाजार में सस्ती बिजली उपलब्ध होने के बावजूद कुछ खास लोगों से महंगी बिजली खरीदी जाती है। बाद में इसका बोझ दरों के रूप में जनता पर डाला जाता है।
इस बात की भी मांग होनी चाहिए कि सरकार जहां से भी सस्ती बिजली मिले, वहीं से बिजली खरीदे। महंगी बिजली निजी क्षेत्र से खरीदने की कोई जरूरत नहीं है। प्रदेश में 6 रूपये से लेकर पौने आठ रूपये प्रति यूनिट तक की दर से बिजली खरीदने की तैयारी है। शायद ही पूरे देश में किसी राज्य में इस दर पर बिजली खरीदी जा रही हो। आडिट से यह भी पता चलेगा कि इसके पीछे किसका हित है और किसका खेल चल रहा है।
लाईन हानियां दिखाने से लेकर सामानों की खरीद फरोख्त, ठेकों के आबंटन, परिचालन व्यय आदि की गड़बड़ियां भी सामने आ सकती है, इसलिए कंपनियां आडिट से कतराती हैं। आगरा में बिजली के निजीकरण पर महालेखाकार की रिपोर्ट से यह साबित हो चुका है। महालेखाकार ने आगरा में टोरेंट पावर के साथ हुए करार से सरकार को 5348 करोड़ रूपये की चपत लगने का खुलासा किया था। नोएडा में भी बिजली वितरण निजी हाथों में है। वहां भी खेल चल रहा है। आश्चर्य का विषय है कि आगरा में बिजली आपूर्ति करने वाली निजी कंपनी टोरेंट को केवल 2.20 रूपये प्रति यूनिट बिजली दी जा रही है। महंगी बिजली खरीद कर टोरेंट को सस्ते में देना भी बड़ा भ्रष्टाचार का मामला है। आगरा में टोरेंट लाईन हानियों को 48.62 प्रतिशत बता रहा है जोकि पूरे देश का उच्चतम स्तर है। इसके पीछे के खेल को भी उजागर करना जरूरी है।
अब समय आ गया है जब जनता को सड़कों पर उतर कर बिजली की कीमतों में किसी भी बढ़ोतरी का विरोध करने के बजाय सड़कों पर उतर पर बिजली की वर्तमान दरों में कमी की मांग करनी चाहिए और सभी बिजली कंपनियों का आडिट कैग से करवाने पर जोर देना चाहिए।
- प्रदीप तिवारी
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गुरुवार, 9 जनवरी 2014

वामदलों का महंगाई विरोधी आन्दोलन १५ से ३१ जनवरी तक.

पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में वृध्दि एवं महंगाई के खिलाफ उत्तर प्रदेश में भी आन्दोलन छेड़ेगी भाकपा. लखनऊ- ९ जनवरी २०१४. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने तय किया है कि वामदलों के केन्द्रीय नेत्रत्व के निर्देशानुसार पार्टी पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में लगातार की जारही मूल्य वृध्दि और कमरतोड़ महंगाई के खिलाफ १५ से ३१ जनवरी तक राज्यव्यापी आन्दोलन छेड़ेगी. भाकपा शीघ्र ही इस सम्बन्ध में राज्य के वामदलों के साथ बैठक भी करेगी. पार्टी के राज्य सचिव मंडल की बैठक के बाद भाकपा के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने एक बयान में कहा कि कल दिल्ली में सम्पन्न चार वामदलों की बैठक में इन सवालों पर देशव्यापी आन्दोलन छेड़ने का निर्णय लिया गया है. तदनुसार उत्तर प्रदेश में भी व्यापक आन्दोलन छेड़ा जायेगा. भाकपा राज्य सचिव मंडल की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया है कि लगातार बढ़ रही महंगाई के बोझ तले जनता का हर तबका दबा जा रहा है. ऊपर से संप्रग-२ सरकार पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी कर आग में घी डालने का काम कर रही है. निकट भविष्य में भी कीमतों की इस मार से कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. अतएव अब सडकों पर उतरने के अलाबा कोई रास्ता नहीं है. भाकपा राज्य सचिव मंडल द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि उनका यह आन्दोलन पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों नें बढ़ोत्तरी को रोकने और प्रशासनिक मूल्य बहाल करने सहित कई मांगों पर केन्द्रित होगा. हम जमाखोरी और आवश्यक वस्तुओं के वायदा कारोबार को रोकने की मांग भी करेंगे. हम सार्वभौमिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली लागू करने की मांग भी करेंगे. हम मूलभूत सेवाओं के निजीकरण का विरोध करेंगे और उन निजी कम्पनियों का ऑडिट करने की मांग करेंगे जो सार्वजानिक संसाधनों का उपयोग कर मूलभूत सेवाओं की आपूर्ति कर रही हैं. डॉ. गिरीश ने बताया कि उत्तर प्रदेश में भाकपा बिजली की दरों में प्रस्तावित वृध्दि के खिलाफ तथा बिजली की दरें कम करने, बिजली कम्पनियों का ऑडिट कराने एवं लाइन हानि कम करने के सवाल पर पहले से ही अभियान चलाये हुए है. अब महंगाई विरोधी अभियान के साथ इसे और सघन किया जायेगा. डॉ. गिरीश, राज्य सचिव.
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सोमवार, 23 दिसंबर 2013

वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाकपा प्रत्याशी डा. पी. एस. पाण्डेय को वोट देकर विजयी बनायें!


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भाकपा राज्य काउन्सिल बैठक में विद्युत् दरों में प्रस्तावित वृध्दि और देवयानी प्रकरण पर पारित प्रस्ताव

बिजली दरों में प्रस्तावित वृध्दि पर भाकपा राज्य काउन्सिल द्वारा पारित प्रस्ताव. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउन्सिल ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली की दरों में वृध्दि करने के प्रयास की निंदा की है. पार्टी ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह अपने इस इरादे को तत्काल बदल ले. उ. प्र. पावर कारपोरेशन प्रबन्धन ने मौजूदा बिजली की दरों में औसतन १० प्रतिशत की वृध्दि प्रस्तावित की है. शहरी घरेलू उपभोक्ताओं यानि साधारण आदमी के ऊपर १५% की वृध्दि का प्रस्ताव किया गया है. समाजवाद के नाम पर नव-उदारवादी आर्थिक नीतियों का पालन करने वाली उ.प्र.सरकार ने एक नायाब समाजवादी सुझाव रखा है कि जहाँ घरेलू उपभोक्ताओं से १५% अधिक बसूला जायेगा वहीं वाणिज्यिक उपभोक्तों से ६%, उद्योगों से ५-६% तथा रईसों के फार्म हाउसों से ५% अधिक ही बसूला जायेगा. उत्तर प्रदेश के शहरियों को याद है कि सरकार ने विगत जून में ही बिजली के दामों में औसतन १०.२९% की वृध्दि करके आम लोगों की जेबों पर भारी बोझ डाला था. पावर कारपोरेशन के मौजूदा प्रस्ताव में ४३,३९३ करोड़ रु. की वार्षिक राजस्व आवश्यकता का प्रस्ताव रखा गया है. जिसमें ३५,३९२ करोड़ रु. बिजली खरीदने के लिए रखे गये हैं. उल्लेखनीय है कि कार्पोरेट घरानों, बजाज हिंदुस्तान तथा रिलायंस से खरीदी जाने वाली बिजली का मूल्य प्रति यूनिट ६.०६ रु. से ७.७५ रु. तक होगा. जहाँ एक तरफ कार्पोरेट घरानों को भारी लाभ पहुँचाया जा रहा है वहीं आम शहरी उपभोक्ताओं की जेबों को हल्का कर उनको महंगाई के मकड़जाल में और अधिक फंसाया जा रहा है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउन्सिल सरकार से मांग करती है कि इस वृध्दि के प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाये और विद्युत् दरें प्रति यूनिट इस प्रकार से निर्धारित की जायें कि साधारण उपभोक्ता राहत महसूस करें और उन्हें महंगाई से कुछ राहत मिलती दिखाई दे. भाकपा अपनी जिला इकाइयों का आह्वान करती है कि वो इस वृध्दि का हर स्तर पर विरोध करें और १ जनवरी से सभायें नुक्कड़ सभायें एवं अन्य कार्यक्रम आयोजित करना प्रारंभ कर दें. देवयानी प्रकरण पर प्रस्ताव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउन्सिल भारतीय विदेश सेवा की अम्रेरिका में तैनात राजनयिक अधिकारी श्रीमती देवयानी खोबरागाड़े को अमरीकी प्रशासन द्वारा हथकडी पहनाने, जघन्य अपराधियों के साथ लाकअप बंद करने तथा निर्वस्त्र कर आपत्तिजनक तलाशी लेने की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करती है.साम्राज्यवादी अमरीका के समक्ष मानवीय सरोकारों, मानवीय अधिकारों अथवा स्त्री अस्मिता का कोई मूल्य नहीं है. अमरीकी प्रशासन पूर्व में भी अनेकों भारतीय हस्तियों के साथ इस प्रकार का अवान्च्छ्नीय व्यवहार कर चुकी है. यहाँ तक कि तीन वर्ष पहले एक एक हवाई अड्डे पर तत्कालीन भारतीय राजदूत प्रमिला शंकर की भी इसी तरह तलाशी ली जा चुकी है. भाकपा अपनी सभी जिला इकाइयों का आह्वान करती है कि पार्टी के स्थापना दिवस २६ दिसम्बर को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनायें. विचार गोष्ठियां आयोजित करें और देवयानी प्रकरण के मद्दे नजर अमेरिकी साम्राज्यवाद के पुतले जलाएं.
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भाकपा की राज्य काउंसिल बैठक सम्पन्न - आन्दोलन एवं संगठन संबंधी कई निर्णय लिये गये

लखनऊ 23 दिसम्बर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य कौंसिल ने देवयानी खोबरागढ़े प्रकरण को लेकर 26 दिसम्बर को प्रदेश में साम्राज्यवाद विरोधी दिवस मनाने, बिजली के दामों में संभावित बढ़ोतरी के विरोध में 1 जनवरी से जागरूकता अभियान चलाने, किसानों-गन्ना किसानों की समस्याओं एवं समाज में फूट डालने की साजिशों के खिलाफ क्षेत्रीय स्तर पर रैलियां आयोजित करने, लोकसभा चुनावों की तैयारियां शुरू करने और प्रदेश भर में चुनाव फंड एकत्रित करने का अभियान चलाने के महत्वपूर्ण निर्णय लिये हैं।
उपर्युक्त निर्णय यहां सम्पन्न भाकपा की दो दिवसीय राज्य कौंसिल की बैठक में लिये गये। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता लोकपाल सिंह, कान्ती मिश्रा एवं हामिद अली के संयुक्त अध्यक्ष मंडल ने की।
बैठक को सम्बोधित करते हुए भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा फैलाये गये भ्रष्टाचार एवं आसमान तोड़ महगाई से परेशानहाल जनता कांग्रेस को सबक सिखाने पर उतारू है लेकिन वह भाजपा को भी उसकी फूट डालने वाली और कांग्रेस के समान आर्थिक नीतियों के कारण पसन्द नहीं करती। जहां उसे एक नीतिगत मुद्दों पर काम करने वाला साफ-सुथरा विकल्प मिलेगा वह उसको विजयी बनाने को उत्सुक है। दिल्ली के चुनाव परिणामों से यह साबित हो गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार जिस तरह से किसानों-कामगारों के उत्पीड़न में लगी है, दंगे रोकने में अपनी ढिलाई को सिद्ध कर चुकी है, कानून-व्यवस्था समेत सभी मोर्चों पर पूरी तरह पिट चुकी है तथा जनता की नजरों में गिर चुकी है। अब शासक दल साम्प्रदायिकता रोकने के नाम पर और अपने जनाधार के खिसक जाने की वजह से गुण्डे, बाहुबली, माफियाओं एवं संदिग्ध चरित्र वाले धनबलियों को चुनाव मैदान में उतार रहा है। उत्तर प्रदेश की जनता सारे खेल को समझ रही है।
डा. गिरीश ने कहा कि आम जनता भाकपा को एक साफ सुथरी, पूर्णतः धर्मनिरपेक्ष एवं जनता के हितों के लिए संघर्षशील पार्टी मानती है। हम उत्तर प्रदेश में अन्य वाम दलों, कुछ छोटे मगर साफ सुथरे दलों को साथ लेकर लोक सभा चुनावों में जाने की कोशिश करेंगे। नये और बदले वातावरण में उत्तर प्रदेश में वामपंथ को अपनी शक्ति बढ़ानी है। उन्होंने कहा कि भाकपा सीमित सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
भाकपा राज्य कौंसिल बैठक में निर्णय लिया गया कि देवयानी खोबरागढ़े के साथ अमरीका में किये गये दुर्व्यवहार के खिलाफ एवं साम्राज्यवादी अमरीका की काली करतूतों को उजागर करने को 26 दिसम्बर को समूचे उत्तर प्रदेश में साम्राज्यवाद विरोधी दिवस मनाया जायेगा और अमरीकी साम्राज्यवाद के पुतले फूंके जायेंगे। यह दिन भाकपा का स्थापना दिवस भी है, अतएव सभायें, गोष्ठियां भी आयोजित की जायेंगी।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बिजली की दरों में बढ़ोतरी की कोशिशों के खिलाफ 1 जनवरी 2014 से लगातार सभायें, नुक्कड़ सभायें एवं जागरूकता अभियान चलाया जायेगा।
एक अन्य निर्णय के अनुसार समाज में फूट डालने की साम्प्रदायिक शक्तियों की साजिशों को उजागर करने तथा किसानों एवं गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किये जायेंगे। पश्चिम का सम्मेलन मेरठ एवं पूर्वांचल का कुशीनगर में फरवरी के पूर्वार्द्ध में आयोजित किये जायेंगे।
भाकपा ने उत्तर प्रदेश में चुनाव फण्ड एकत्रित करने के लिये अभियान चलाने का निर्णय भी लिया है। 2 से 9 फरवरी के बीच भाकपा कार्यकर्ता जनता के बीच चुनाव फण्ड मांगने को निकलेंगे। इसके अलावा पार्टी सदस्यता भर्ती एवं नवीनीकरण अभियान को गति प्रदान करने का निर्णय भी लिया गया।
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रविवार, 22 दिसंबर 2013

भाकपा ने किया ओबामा का पुतला दहन

लखनऊ 22 दिसम्बर. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने अमेरिका में तैनात भारतीय राजनयिक श्रीमती देवयानी खोब्रागढ़े को अमेरिकी प्रशासन द्वारा हथकड़ी पहनाने, जघन्य अपराधियों के साथ लाक-अप में बंद करने तथा निर्वस्त्र कर अवांछित तलाशी लेने के विरोध में आज प्रदर्शनकारी जुलूस निकाला और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा का पुतला दहन किया।
सैकड़ों की तादाद में भाकपा कार्यकर्ता आज अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद, बराक ओबामा मुर्दाबाद, देवयानी का अपमान नहीं सहेंगे, नारी का अपमान नहीं सहेंगे, ओबामा माफ़ी मांगो, देवयानी का यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद की कब्र बनेगी भारत के मैदानों में आदि नारे लगाते हुए पार्टी के कैसर बाग स्थित कार्यालय से जुलूस बना कर कैसर बाग चौराहा पहुंचे और वहां अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा के पुतले को दहन कर दिया।
इस अवसर पर संपन्न सभा को संबोधित करते हुए भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि साम्राज्यवादी अमेरिका के समक्ष मानवीय मूल्यों, सरोकारों और अधिकारों तथा स्त्री की अस्मिता का कोई मूल्य नहीं है। पूर्व में भी अमेरिकी प्रशासन भारतीय हस्तिओं के साथ इस प्रकार का दुर्व्यवहार कर चुका है। यहाँ तक की तीन वर्ष पहले एक हवाई अड्डे पर तत्कालीन भारतीय राजदूत प्रमिला शंकर की भी इसी तरह से जामा तलाशी ली गयी थी. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस घटना को बेहद गंभीरता से लेती है और 26 दिसम्बर, जोकि भाकपा का स्थापना दिवस भी है, को साम्राज्यवाद विरोधी दिवस के रूप में मनाएगी और गोष्ठियों, सभाओं का आयोजन कर देवयानी प्रकरण के विरोध में धरने प्रदर्शन आयोजित करेगी तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद के पुतले दहन करेगी।
इस प्रदर्शन में राज्य सहसचिव अरविन्द राज स्वरुप, जिला सचिव मो. खालिक, नौजवान सभा के मो. अकरम, ओ. पी. अवस्थी, सुरेन्द्र राम, फूल चन्द यादव, आनंद तिवारी, डा. पी. एस. पाण्डेय आदि अनेक अग्रणी नेता मौजूद थे।

कार्यालय सचिव
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मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

आर्थिक सामाजिक एजेंडा सेट करेगा श्रमिकों का संसद मार्च.

लखनऊ—१० दिसम्बर २०१३- जानलेवा महंगाई, केंद्र और राज्य सरकार द्वारा आमजनता के साथ की गई धोखाधड़ी, राष्ट्रीय संसाधनों एवं जनता के धन की बेशर्मी से लूट, रूडिवादी फूटपरस्त विघटनकारी शक्तियों की कारगुजारियों आदि के विरुध्द एवं केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा निर्धारित १० सूत्रीय मांगों की पूर्ति हेतु देश के सभी ११ केन्द्रीय श्रमिक संगठनों द्वारा १२ दिसम्बर को संसद पर विशाल प्रदर्शन किया जा रहा है. जुलूस प्रातः १० बजे दिल्ली के रामलीला मैदान से शुरू होगा. देश के सबसे प्रथम ट्रेड यूनियन संगठन- आल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस(एटक) ने उत्तर प्रदेश में इस प्रदर्शन को भारी सफल बनाने के लिये पूरी तरह कमर कस ली है. प्रदेश के विभिन्न भागों में लगभग दो दर्जन सभाएं, कन्वेंशन एवं रैलियां आयोजित की जा चुकी हैं. कई जगह कार्यकर्ता बैठकें भी आयोजित की गईं हैं. इन कार्यक्रमों में एटक की सचिव का. अमरजीत कौर एवं एटक के राज्य अध्यक्ष का. अरविन्द राज स्वरुप स्वरूप ने भाग लिया. क्योंकि भाकपा इस आन्दोलन को सक्रिय समर्थन प्रदान कर रही है अतएव भाकपा के राज्य सचिव डॉ.गिरीश ने भी कई सभाओं को संबोधित किया और तमाम जिलों का व्यापक भ्रमण किया. एटक सूत्रों के मुताबिक देश के दूर दराज क्षेत्रों से श्रमिकों और कर्मचारियों के जत्थे रवाना होचुके हैं. शेष भागों के जत्थे कल रवाना होंगे.बैंक कर्मी अपनी मांगों को लेकर कल वहां धरना देंगे और १२ दिसम्बर के प्रदर्शन में भी भागीदारी करेंगे. रैली के आयोजकों का दाबा है कि भले ही सांप्रदायिकता को आगे बड़ा कर महंगाई और भ्रष्टाचार तथा इसकी जनक पूंजीवादी व्यवस्था के कारनामों को प्रष्ठभूमि में धकेलने की कोशिश की जा रही हो और वर्तमान चुनाव परिणामों की आढ़ में नव-उदारवाद की नीतियों से पल्ला झाड़ने की साजिश रची जारही हो, यह रैली गरीबों किसानों मजदूरों की रोटी कपड़ा मकान इलाज और पढाई की लड़ाई को मुद्दा बनाने की दिशा में एक ठोस कार्यवाही साबित होगी. कार्यलय सचिव,एटक उत्तर प्रदेश
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सोमवार, 9 दिसंबर 2013

कांग्रेस को दण्डित करना चाहती थी जनता. भाकपा.

लखनऊ 9 दिसम्बर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज भाकपा के हजारों-हजार कार्यकर्ताओं ने गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर विभिन्न जिला केन्द्रों पर धरना एवं प्रदर्शनों का आयोजन किया। कई स्थानों पर किसानों ने गुस्से में गन्ने के बण्डल जलाये और सभी जगहों पर आम सभायें कीं। गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर आम सभायें भी कीं गईं जिनको पार्टी के जिले के नेताओं ने सम्बोधित किया। हाथरस में नगर पालिका के प्रांगड़ में आयोजित धरने को सम्बोधित करते हुए भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि सत्तासीन पार्टियों द्वारा चीनी मिले मालिकों के प्रति सदाशयता और किसानों के हितों के प्रति उदासीनता के चलते आज गन्ना किसानों का भारी शोषण हो रहा है। उनका चीनी मिलों पर 2400 करोड़ रूपये का बकाया है जिसका भुगतान अभी तक नहीं कराया गया। सरकार के दावों के बावजूद अभी तक अधिकांश चीनी मिलों ने पेराई करना शुरू नहीं किया है। किसानों को 350 रूपये प्रति क्विंटल दिये जाने की मांग के विपरीत उन्हें 280 रूपये प्रति क्विंटल कीमत देने का वायदा किया गया है और वह भी दो किश्तों में। किसान अपनी दयनीय दशा पर आंसू बहा रहा है लेकिन सारी पार्टियां उनकी इस दशा पर घड़ियाली आसूं बहा रहीं हैं। कल विधान सभा चुनावों के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बढ़ाने जैसी नीतियों से लोग बेहद नाराज हैं। वे आर्थिक नवउदारवाद की नीतियों को समझ रहे हैं। वे यह भी जानते हैं कि भाजपा भी इन्हीं नीतियों की पोषक है और ऊपर से वह समाज को बांटने की कोशिश में लगी हैं। लेकिन जनता किसी भी कीमत पर कांग्रेस को दण्डित करना चाहती थी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अन्य कोई विकल्प सामने न होने के कारण उसने भाजपा को वोट दिया। दिल्ली में एक नया विकल्प उसके सामने था अतएव वहां जनता ने भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं दिया जबकि भाजपा ने वहां पूरी ताकत झोंक दी थी। जिलों-जिलों में दिये गये ज्ञापनों में मांग की गई है कि गन्ने का मूल्य रू. 350/- प्रति क्विंटल तत्काल घोषित किया जाये, मिलों पर गन्ने के बकाये का मय ब्याज के भुगतान कराया जाये, समस्त चीनी मिलों को तत्काल चलवाया जाये और उनसे पूरा गन्ना पेराई की गारंटी ली जाये तथा न चलने वाली मिलों का अधिग्रहण किया जाये। गन्ने का समस्त भुगतान एक मुश्त दो सप्ताह के भीतर कराया जाये।
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पांच राज्यों के विधान सभा चुनाव - क्या सबक ले वामपंथ?

पांच राज्यों - दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं मिजोरम के चुनाव परिणाम हमारे सामने हैं। जहां तक मिजोरम का सवाल है वहां मुख्य मुकाबला कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट के बीच था। वहां के परिणाम पूरी तरह से शाम तक साफ हो सकेंगे। हालांकि शुरूआती रूझानों से ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस के सामने मुकाबले में वहां कोई था ही नहीं। 
राजस्थान में कांग्रेस की सरकार थी। भाजपा को वहां भाजपा को 162 सीटों (पिछले चुनावों से 84 सीटें अधिक) पर, कांग्रेस को केवल 21 सीटों पर, नेशनल पीपुल्स पार्टी को 4 सीटों पर, बसपा को 3 सीटों पर, नेशनल यूनियनिस्ट जमींदारा पार्टी को 2 सीटों पर विजय मिली है जबकि 7 सीटों पर निर्दलीय विजयी रहे हैं। मत प्रतिशत की ओर ध्यान दिया जाये तो भाजपा को इस बार 45.1 प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि 2008 में उसे केवल 34.3 प्रतिशत वोट ही मिले थे। भाजपा को सबसे बड़ी विजय इसी राज्य से मिली है। कांग्रेस के वोट प्रतिशत में कोई विशेष गिरावट दर्ज नहीं की गई है। उसे 2008 के मुकाबले केवल 3.8 प्रतिशत मत कम यानी 33 प्रतिशत वोट मिले हैं। बसपा के वोटों में भी गिरावट दर्ज की गई है। 2008 में उसे 7.6 प्रतिशत वोट मिले थे जो इस बार घट कर 3.4 प्रतिशत रह गये हैं।
छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थी। वहां भाजपा को 49 सीटों पर, कांग्रेस को 39 सीटों पर तथा बसपा को 1 सीट पर सफलता मिली है और 1 सीट पर निर्दलीय जीता है। इस राज्य में भाजपा के वोट प्रतिशत में केवल 0.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और उसे 41 प्रतिशत वोट मिले हैं। कांग्रेस के मतों में 1.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है और उसे 40.3 प्रतिशत वोट मिले हैं यानी भाजपा से केवल 0.7 प्रतिशत कम वोट ही मिले हैं। बसपा के मतों में 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और उसे केवल 4.3 प्रतिशत वोट ही मिले हैं।
मध्य प्रदेश में भी भाजपा की सरकार थी। भाजपा को यहां पिछली बार की तुलना में 22 सीटें अधिक यानी 165 सीटों पर विजय प्राप्त हुई है। कांग्रेस को पिछले चुनावों के मुकाबले में 13 सीटें कम यानी केवल 58 सीटों पर संतोष करना पड़ा है। बसपा की सीटें घटकर केवल 4 रह गयीं हैं जबकि निर्दलीय 3 सीटों पर जीते हैं। अगर वोट प्रतिशत की ओर ध्यान दिया जाये तो भाजपा के वोट प्रतिशत में 7.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और उसे कुल 44.9 प्रतिशत मत मिले हैं। कांग्रेस के वोटों की तादाद में 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और उसे 36.4 प्रतिशत वोट मिले हैं जबकि बसपा के वोटों में 2.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और उसे केवल 6.3 प्रतिशत वोट ही प्राप्त हुए हैं।
दिल्ली में बहुत बड़ा उल्ट-फेर सामने आया है। यहां 15 सालों से कांग्रेस की सरकार थी और यहां अन्ना आन्दोलन के गर्भ से उपजी आम आदमी पार्टी - ”आप“ को बहुत बड़ी सफलता मिली है और त्रिशंकु विधान सभा का गठन होगा। दिल्ली में भाजपा को 31 सीटों पर सफलता मिली है, कांग्रेस को 8 सीटों पर, जनता दल (यूनाईटेड) को 1 सीट पर, शिरोमणि अकाली दल को 1 सीट पर, निर्दलीय को 1 सीट पर सफलता मिली है जबकि ”आप“ ने अप्रत्याशित रूप से 28 सीटों पर कब्जा कर लिया है। वोट प्रतिशत पर ध्यान दिया जाये तो कांग्रेस के वोटों पर 15.3 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई और उसे केवल 25 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए हैं। भाजपा के वोटों में भी 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और उसे केवल 34 प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं जबकि अन्य के वोटों में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है। ”आप“ को भाजपा से केवल 2 प्रतिशत कम वोट यानी 32 प्रतिशत वोट मिले हैं।
पांचों राज्यों में भाकपा और वामपंथ को कोई सफलता नहीं मिली है और उन्हें प्राप्त मतों की संख्या कुछ दिनों के बाद ही पता लग सकेगी। परन्तु निश्चित ही वह संख्या नगण्य ही होगी।
मीडिया एक बार फिर चीख-चीख कर तीन-तीन राज्यों में भाजपा के सत्तासीन हो जाने के पीछे ”नमो“ (नरेन्द्र मोदी के लिए मीडिया में प्रचलित शब्द) फैक्टर का बखान कर रहा है परन्तु मत प्रतिशत और सीटों की संख्या से हमें बहुत गंभीरता से इन चुनाव परिणामों की मीमांसा करनी चाहिए और विशेषकर हमारा ध्यान इस ओर होना चाहिए कि इन चुनावों में हम - यानी भाकपा और वामपंथ कहाँ खड़े थे और हमारा हस्र क्या हुआ।
दिल्ली चुनावों में ”आप“ की सफलता ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि जनता का बहुसंख्यक तबका न कांग्रेस को सत्ता में लाना चाहता है और न ही भाजपा को परन्तु एक गुंजायमान विकल्प की अनुपस्थिति उसे लगातार खल रही है और जहां भी उसे जिस तरह का भी विकल्प दिखाई देगा वह उसके पीछे चल देगा। ”आप“ ने केवल दिल्ली की सभी सीटों पर प्रत्याशी उतार कर एक विकल्प देने का हल्का प्रयास किया जिसके नतीजे हमारे सामने हैं। अपने बारे में सोचते, विचारते और कुछ आगे की योजना बनाते समय हमें इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि चुनावों में जनता सरकार बनाने और सरकार हटाने के लिए वोट देने के लिए घरों से निकलती है न कि चार ईमानदारों सांसदों या विधायकों को जिताने के लिए।
”आप“ या इस जैसा कोई अन्य संगठन या पार्टी पूंजीवादी राजनीति का विकल्प कभी साबित नहीं हो पायेंगे। बिना वैचारिक विकल्प के आम आदमी की आज की समस्याओं का हल नहीं खोजा जा सकता। एक विकल्प देने के लिए हमें 542 सीटों पर विकल्प देने की रणनीति के साथ उतरना पड़ेगा।
एक मजबूत कार्यक्रम आधारित वामपंथी विकल्प की योजना बनाते समय हमें इस तथ्य का ध्यान रखना चाहिए। हमें अपने कवच से बाहर निकल कर सैद्धान्तिक प्रतिबद्धता के साथ चुनावी रणनीति के सवाल को भी हल करना ही होगा। वर्तमान राजनीति में कायम रहने के लिए हमें वर्तमान दौर के उन तौर-तरीकों को खोज निकालना होगा जो कहीं भी सैद्धान्तिक विचलन न पैदा करें।
- प्रदीप तिवारी
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भाकपा के नेतृत्व में गन्ना किसानों ने किया पूरे प्रदेश में धरना-प्रदर्शन

लखनऊ 9 दिसम्बर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आज भाकपा के हजारों-हजार कार्यकर्ताओं ने गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर विभिन्न जिला केन्द्रों पर धरना एवं प्रदर्शनों का आयोजन किया। कई स्थानों पर किसानों ने गुस्से में गन्ने के बण्डल जलाये और सभी जगहों पर आम सभायें कीं। गन्ना किसानों की समस्याओं को लेकर आम सभायें भी कीं गईं जिनको पार्टी के जिले के नेताओं ने सम्बोधित किया।
हाथरस में नगर पालिका के प्रांगड़ में आयोजित धरने को सम्बोधित करते हुए भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि सत्तासीन पार्टियों द्वारा चीनी मिले मालिकों के प्रति सदाशयता और किसानों के हितों के प्रति उदासीनता के चलते आज गन्ना किसानों का भारी शोषण हो रहा है। उनका चीनी मिलों पर 2400 करोड़ रूपये का बकाया है जिसका भुगतान अभी तक नहीं कराया गया। सरकार के दावों के बावजूद अभी तक अधिकांश चीनी मिलों ने पेराई करना शुरू नहीं किया है। किसानों को 350 रूपये प्रति क्विंटल दिये जाने की मांग के विपरीत उन्हें 280 रूपये प्रति क्विंटल कीमत देने का वायदा किया गया है और वह भी दो किश्तों में।
किसान अपनी दयनीय दशा पर आंसू बहा रहा है लेकिन सारी पार्टियां उनकी इस दशा पर घड़ियाली आसूं बहा रहीं हैं।
कल विधान सभा चुनावों के परिणामों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार की महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार बढ़ाने जैसी नीतियों से लोग बेहद नाराज हैं। वे आर्थिक नवउदारवाद की नीतियों को समझ रहे हैं। वे यह भी जानते हैं कि भाजपा भी इन्हीं नीतियों की पोषक है और ऊपर से वह समाज को बांटने की कोशिश में लगी हैं। लेकिन जनता किसी भी कीमत पर कांग्रेस को दण्डित करना चाहती थी। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में अन्य कोई विकल्प सामने न होने के कारण उसने भाजपा को वोट दिया। दिल्ली में एक नया विकल्प उसके सामने था अतएव वहां जनता ने भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं दिया जबकि भाजपा ने वहां पूरी ताकत झोंक दी थी।

जिलों-जिलों में दिये गये ज्ञापनों में मांग की गई है कि गन्ने का मूल्य रू. 350/- प्रति क्विंटल तत्काल घोषित किया जाये, मिलों पर गन्ने के बकाये का मय ब्याज के भुगतान कराया जाये, समस्त चीनी मिलों को तत्काल चलवाया जाये और उनसे पूरा गन्ना पेराई की गारंटी ली जाये तथा न चलने वाली मिलों का अधिग्रहण किया जाये। गन्ने का समस्त भुगतान एक मुश्त दो सप्ताह के भीतर कराया जाये।
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रविवार, 8 दिसंबर 2013

गन्ना किसानों के हित में भाकपा जंग जारी रखेगी.

गन्ना किसानों की मांगों को लेकर भाकपा का धरना/प्रदर्शन जिला मुख्यालयों पर ९ दिसंबर को. लखनऊ—८ दिसंबर – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने बताया कि गन्ना किसानों की समस्यायों के समाधान की मांग को लेकर भाकपा कल प्रदेश के जिला मुख्यालयों पर धरने/प्रदर्शन आयोजित करेगी. प्रदेश भर में इन प्रदर्शनों की व्यापक तैय्यारियों की खबर भाकपा मुख्यालय को प्राप्त हो रही हैं. धरने/प्रदर्शन के बाद महामहिम राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपे जायेंगे. इन ज्ञापनों में गन्ने की कीमत रु. ३५० प्रति कुंतल किये जाने, चीनी मिलों पर किसानों के बकाया रु.२४०० करोड़ का तत्काल भुगतान कराये जाने, अभी तक नहीं चलाई गयी मिलों को फौरन चालू कराने, जो मिलें आज भी उत्पादन करने में टालमटोल कर रही हैं उनका अधिग्रहण किये जाने, समस्त गन्ने की पेराई तक मिलें चालू रखे जाने तथा मौजूदा सत्र के गन्ने के समूचे मूल्य का भुगतान दो सप्ताह के भीतर किये जाने की मांगें की जायेंगी. डॉ. गिरीश ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने चीनी मिल मालिकों के सामने घुटने टेक रखे हैं और आज भी गन्ना किसान असहाय महसूस कर रहा है. प्रदेश में दो किसान आत्म हत्याएं कर चुके हैं जबकि कई अन्य आत्मदाह का प्रयास कर चुके हैं. उन्होंने कांग्रेस, भाजपा एवं बसपा पर गन्ना किसानों की समस्यायों पर राजनीतिक रोटियां सेंकने का आरोप भी जड़ा है. उन्होंने कहाकि किसी न किसी रूप में ये पार्टियाँ गन्ना किसानों की मौजूदा हालत के लिये जिम्मेदार रही हैं. और आज जब गन्ना किसान एक मुद्दा बन गया है, ये पार्टियाँ भी उनके हित में लड़ने का नाटक रच रही हैं. भाकपा के धरने में इन दलों की कारगुजारियों का पर्दाफाश भी किया जायेगा. डॉ.गिरीश, राज्य सचिव
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शुक्रवार, 6 दिसंबर 2013

बैंकों में 18 दिसम्बर को रहेगी हड़ताल - विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी

लखनऊ 6 दिसम्बर। बैंक कर्मचारियों की सबसे बड़ी यूनियन - एआईबीईए के आह्वान पर यू.पी. बैंक इम्पलाइज यूनियन की स्थानीय इकाई ने यूनियन बैंक आफ इंडिया की हजरतगंज शाखा के समक्ष दोपहर में विशाल प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन बैंकों से बड़े धन्ना सेठों, औद्योगिक एवं व्यापारिक घरानों द्वारा अरबों-खरबों के ऋण लेकर डकार जाने की प्रवृत्ति के खिलाफ किया गया। इस मुद्दे पर देश के सभी बैंकों में 18 दिसम्बर को आम हड़ताल का आह्वान बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों की यूनियनों ने किया है।
प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए यूपीबीईयू के उपमहासचिव वी. के. सिंह ने कहा कि जहां मार्च 2008 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में खराब ऋण की राशि 39,090 करोड़ रूपये थी वहीं यह राशि पांच साल के अन्दर बढ़कर 1,64,000 करोड़ रूपये पहुंच चुकी है, जिसके कारण बैंकों को अपनी-अपनी बैलेंस शीट में प्रावधान करना पड़ता है जो 2012-13 में 2008-09 के मुकाबले 11,121 करोड़ से बढ़कर 43,102 करोड़ पहुंच चुका है, जिसका असर बैंको के मुनाफे पर पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप बैंकों ने पिछले पांच वर्ष में कुल 3,58,893 करोड़ रूपये के सकल लाभ कमाने के पश्चात रूपये 1,40,266 करोड़ का प्रावधान खराब ऋणों के लिए किया जिसके कारण शुद्ध मुनाफा घट कर केवल 2,18,627 करोड़ रूपये रह गया। उन्होंने बताया कि 1 करोड़ से ऊपर के 7295 ऋण खातों में 68,292 करोड़ रूपये फंसा हुआ है जबकि अकेले 4 सबसे बड़े ऋण खातों में बैंकों का 22,666 करोड़ रूपये फंसा हुआ है।
यूपीबीईयू के सहायक महामंत्री एस. के. संगतानी ने प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जून 2013 में खराब ऋणों का 35 प्रतिशत अर्थात 63,671.00 करोड़ रूपये 30 सबसे बड़े औद्योगिक घरानां के ऋण खातों में बकाया था जिसके कारण वित्तमंत्री को कहना पड़ा कि ”एक अमीर मालिक की कम्पनी बीमार हो, ऐसा नहीं हो सकता, मालिक को कम्पनी में पैसा लगाना ही होगा। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि इस ऋण वसूली के लिए सरकार एवं बैंक सख्त कदम उठायें।
यूपीबीईयू के प्रांतीय उपाध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव ने प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि बैंकों में खराब ऋणों की राशि को तमाम तरीकों से छुपाया जाता रहा है जिसकी वजह से 3,25,000 करोड़ रूपये के ऋणों को अच्छे ऋणों में परिवर्तित किया गया जिसमें रू. 2,70,000 करोड़ रूपये के ऋण औद्योगिक घरानों के थे।
यूपीबीईयू के सहायक महामंत्री दीपू बाजपेई ने प्रदर्शनकारियों को बताया कि रिजर्व बैंक गवर्नर ने खराब ऋणों को अच्छे ऋणों में प्रदर्शित करने की मानसिकता की आलोचना करते हुए एक बार कहा था कि ”एक सूअर को लिपिस्टिक लगा देने से वह राजकुमारी नहीं बन जाता।“
प्रदर्शनकारियों को बैंक कर्मचारियों के प्रमुख नेता सुभाष बाजपेई, परमानन्द, अजीत सक्सेना, वी.के.सक्सेना, जे.एस.भाटिया, डी.के. रावत, ए.के. बाजपेई, ओम प्रकाश, वी.के. श्रीवास्तव, शकील अहमद, ए.के. सिंह गांधी, के.के. मिश्र, रतन लाल आदि शामिल थे।
यूपीबीईयू के अध्यक्ष आर. के. अग्रवाल ने बैंकों में बढ़ते हुए खराब ऋण की प्रवृत्ति को दीमक और घुन लगने जैसा बताया जो पूरी बैंकिंग व्यवस्था को अन्दर ही अन्दर खोखला करता जा रहा है। उन्होंने अफसोस व्यक्त किया कि किंशफिशर एअर लाईन्स पर लगभग 2,780 करोड़ रूपये का बैंकों का बकाया होने के बावजूद उसके मालिक विजय माल्या छुट्टा घूम रहे हैं और उन पर काई कार्यवाही इन ऋणों को वसूलने के लिए नहीं हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन ऋणों की वसूली के लिए इन औद्योगिक एवं व्यापारिक घरानों के खिलाफ कड़े कदम उठाये जायें एवं आवश्यकता पड़ने पर इनके मालिकों को जेल में डाला जाये।
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गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

गन्ने पर सस्ती राजनीति कर रहे हैं मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश . भाकपा

लखनऊ—भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव द्वारा कल कुशीनगर में दिये गये बयान को किसानों के जले पर नमक छिडकने वाला और पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है जिसमें उन्होंने दाबा किया है कि किसानों को गन्ने का मूल्य ४० रु. प्रति कुंतल बढ़ा कर दिलाया जारहा है. इस बयान में श्री यादव ने गन्ना किसानों की दुर्दशा के लिये केंद्र सरकार को जिम्मेदार बताकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है. मुख्यमंत्री के दाबों पर आश्चर्य व्यक्त करते हुये भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि जब गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य पिछले वर्ष की दर पर -२८० रु. कुंतल ही दिया जारहा है तो मुख्यमन्त्री ऐसा दाबा क्यों कर रहे है? हाँ यह सच है कि किसानों की दुर्दशा के लिये केंद्र सरकार भी जिम्मेदार है, पर क्या मुख्यमंत्री जी बतायेंगे कि सपा के समर्थन पर टिकी केंद्र सरकार से उन्होंने किसानों की समस्यायों के समाधान के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया? डॉ. गिरीश ने खेद के साथ कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से लुटे-पिटे किसानों का धैर्य टूट रहा है और वे आत्महत्यायें कर रहे हैं. कल भी जब मुख्यमंत्री अपना निहित स्वार्थपूर्ण बयान दे रहे थे लखीमपुर का एक और गन्ना-पीड़ित किसान आत्महत्या कर चुका था. क्या कोई उसकी इस दर्दनाक तबाही की जिम्मेदारी लेगा? उन्होंने आरोप लगाया कि जिस बुंदेलखंड में मुख्यमंत्री अपना दौरा कर के आये हैं वहां आज भी कर्ज में डूबे किसानों की जमीन-जायदाद कुर्क किये जारहे हैं और उन्हें हवालातों में ठूंसा जा रहा है. हाथरस का भी एक कर्ज में डूबा किसान राहत के लिये दर-दर की ठोकरें खा रहा है. इन सभी का कसूर यही है कि इन्होंने कर्जमाफी के सपा के बायदे पर यकीन किया. डॉ. गिरीश ने कहाकि रेलवे डेडिकेटेड फ्रेट कारीडोर, नेशनल हाईवे तथा अन्य निर्माण योजनाओं के लिये किसानों की अधिगृहीत जमीनों की एवज में उन्हें कानूनविहित लाभ तक नहीं दिए जारहे. बिजली सप्लाई दी नहीं जा रही, बिजली की कीमतें बढ़ा दी गई हैं और विद्युत् बिल जमा कर देने के बाबजूद उन पर बकाया बता कर उनके कनेक्शन काटे जारहे हैं. गन्ने की लागत बढ गयी है और उसकी कीमत ३५० रु. दिया जाना जरूरी है, लेकिन उन्हें २८० रु. कुंतल वह भी दो किश्तों में दिये जाने का वायदा किया गया है. गत वर्ष का गन्ने का बकाया २४०० करोड़ अभी तक उन्हें दिलाया नहीं गया है. अनेक मिलों ने अभी तक पेराई शुरू नहीं की है. किसानों के इन्हीं सारे सवालों पर भाकपा लगातार आंदोलनरत है और अब ९ दिसम्बर को जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन आयोजित किये जायेंगे. डॉ. गिरीश, राज्य सचिव
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