भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

About The Author

Communist Party of India, U.P. State Council

Get The Latest News

Sign up to receive latest news

फ़ॉलोअर

गुरुवार, 23 अक्टूबर 2014

भाकपा ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पर संघ का एजेंडा आगे बढ़ाने का आरोप जड़ा.

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा.गिरीश ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नायक से सवाल किया है कि क्या वे राजभवन में बैठ कर संघ के एजेंडे को ही आगे बढ़ा रहे हैं. श्री नायक की इस स्वीकारोक्ति के बाद ‘कि मैंने भाजपा से स्तीफा दिया है संघ से नहीं, कि अभी भी मैं अपने को संघ का स्वयंसेवक मानता हूं क्योंकि संघ से स्तीफा देने जैसी कोई बाध्यता नहीं है, ‘कि मैं ३५ साल से आर.एस.एस. का प्रचारक रहा हूँ,’ और राज्यपाल की तीन माह की कारगुजारियों को लेकर यह प्रश्न खड़ा होगया है कि वे राजभवन में बैठ कर भारतीय संविधान का अनुपालन कर रहे हैं या संघ के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं. भाकपा श्री नायक से स्थिति स्पष्ट करने की मांग करती है. डा.गिरीश ने कहा कि जिस संघ के श्री नायक स्वयंसेवक हैं, उसमें स्वयंसेवकों को शपथ दिलाई जाती है कि वे जहां भी रहें संघ के एजेंडे को ही आगे बढ़ायेंगे. तो उन पर संघ के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लगे आरोपों का इस महत्त्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को स्पष्टीकरण करना चाहिये. लेकिन श्री नायक स्थिति स्पष्ट करने के बजाय मामले का घालमेल करने में जुटे हैं. भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि जब श्री नायक ने संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत को उनके शीर्ष परामर्श मंडल के साथ राजभवन बुला कर उनसे दो घंटे मंत्रणा की और उन्हें रात्रिभोज दिया था तब भी भाकपा ने सबसे पहले उनके इस कदम पर आपत्ति जताई थी और तर्क दिया था कि संघ जैसे अतिवादी और सांप्रदायिक संगठन के मुखिया के साथ राज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा मंत्रणा करना संविधान की मर्यादाओं के विरुध्द है. भाकपा ने इस मंत्रणा के मुद्दों का खुलासा करने की मांग भी की थी. लेकिन कई दिनों बाद श्री नायक ने गोलमटोल जबाब दिया कि श्री भागवत उनके मित्र हैं और राजभवन सबके लिये खुला है. अब राज्यपाल ने अपने तीन माह के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जारी कर फिर से राज्यपाल के पद की मर्यादाओं का उल्लंघन किया है. लगता है एक स्वयंसेवक ने अपने शीर्ष नेतृत्व को अपने कार्य की प्रगति रिपोर्ट प्रेषित की है. लेकिन उनकी यह कार्यवाहियां लोकतंत्र के लिये घातक हैं. राष्ट्रपति महोदय को इसका संज्ञान लेना चाहिये, डा.गिरीश ने मांग की है. डा.गिरीश
»»  read more

गुरुवार, 16 अक्टूबर 2014

महंगाई को नीचे लाने को केन्द्र और प्रदेश की सरकार को बाध्य करने हेतु भाकपा ने किया राज्य भर में प्रदर्शन

लखनऊ 16 अक्टूबर। अपने चुनाव अभियान में भाजपा ने सत्ता में आते ही महंगाई को समाप्त करने के लम्बे चौड़े वायदे किये थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद लगभग पांच महीनों में भी सरकार ने महंगाई को नीचे लाने को कोई ठोस प्रयास नहीं किये। उलटे सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने रेल किराये और माल भाड़े में भारी वृद्धि की, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में लगभग 19 फीसदी की कमी आने के बावजूद डीजल के दाम बढ़ाये जाते रहे, तथा जमाखोरों और काला बाजारियों को खुली छूट दे दी गई। यही कारण है कि आज भी महंगाई लोगों के सामने बड़ी समस्या बनी हुयी है। यही वजह है कि आज भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने महंगाई को कारगर रूप से नीचे लाने को सरकार को बाध्य करने को आज देश भर में धरने एवं प्रदर्शनों का आयोजन किया।
चूंकि उत्तर प्रदेश में सरकार ने हाल ही में बिजली के दामों में बड़ी वृद्धि कर और जरूरत की कई चीजों पर वैट की दरें बढ़ा कर महंगाई बढ़ाने का रास्ता खोला है, अतएव उत्तर प्रदेश में भाकपा ने प्रदेश सरकार के इन कदमों को भी आज के आन्दोलन की जद में रखा। उत्तर प्रदेश में सूखा और बाढ़ की तबाही से किसान-कामगारों को राहत दिलाने की मांग भी केंद्र और राज्य सरकार से की गई। आन्दोलन का आह्वान भाकपा की राष्ट्रीय परिषद् ने किया था तथा पार्टी की राज्य काउन्सिल ने इस आह्वान की परिपुष्टि की थी। इससे पूर्व 14 जुलाई को भी भाकपा ने उत्तर प्रदेश में बडे पैमाने पर सडकों पर उतर कर महंगाई के खिलाफ धरने प्रदर्शन किये थे।
उपर्युक्त जानकारी देते हुये भाकपा के राज्य सचिव एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डा. गिरीश ने बताया कि जिलों-जिलों में प्रदर्शनों के उपरान्त दो अलग-अलग ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपे गये। पहला ज्ञापन राष्ट्रपति तो दूसरा राज्यपाल को संबोधित था।
राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में केन्द्र सरकार को महंगाई को नीचे लाने हेतु जरूरी निर्देश दिए जाने की मांग की गयी। इस हेतु जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और उनके वादा कारोबार पर रोक लगाने, हर परिवार को हर माह 35 किलो खाद्यान्न 2 रूपये प्रति किलो की दर से मुहैय्या कराने, अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आयी भारी गिरावट को देखते हुये पेट्रोल, डीजल एवं गैस की कीमतों में उल्लेखनीय कमी किये जाने तथा रेल किराया और माल भाड़े में कमी लाने जैसी मांगें की गयीं हैं।
राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन में बिजली की बढ़ी दरों को वापस लेने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को व्यापक और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने, पेट्रोलियम पदार्थों पर वैट कम करने तथा सूखा और बाढ़ से प्रभावित किसानों-कामगारों के हित में ठोस कदम उठाने हेतु राज्य सरकार को निर्देश दिये जाने की मांग की गयी है।
भाकपा राज्य सचिव ने दावा किया कि आज प्रदेश भर में हर जिले में बड़ी संख्या में आक्रोशित जनता भाकपा के बैनर तले सडकों पर उतरी। एक अनुमान के अनुसार लगभग 20,000 से भी अधिक लोगों ने इन प्रदर्शनों में भाग लिया, जिनमें महिलाओं एवं युवाओं की संख्या उल्लेखनीय थी।
राजधानी लखनऊ में भाकपा कार्यालय, कैसरबाग से एक जुलूस निकाला गया जो जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुँच कर सभा में तब्दील हो गया। सभा को भाकपा राज्य सचिव मंडल की सदस्या आशा मिश्रा, जिला सहसचिव परमानंद, राज्य काउन्सिल सदस्य कान्ति मिश्रा के अलावा अशोक सेठ, राजपाल यादव, अकरम, बबिता सिंह, रामचंदर, शिव प्रकाश तिवारी एवं महेंद्र रावत आदि ने संबोधित किया। ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा गया।
बलिया में भाकपा राज्य कार्यकारिणी के सदस्य एवं जिला सचिव दीनानाथ सिंह, राज्य काउन्सिल सदस्य ओम प्रकाश कुंवर एवं विद्याधर पांडे के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय पर जुझारू प्रदर्शन कर आमसभा की. ज्ञापन भी सौंपा गया।
कानपुर देहात में  भाकपा के सैकड़ों कार्यकर्ता माती स्थिति जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष धरने पर जम गये और महंगाई के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया। आम सभा के बाद ज्ञापन भी सौंपा गया. सभा को राज्य कार्यकारिणी के सदस्य राजेन्द्र दत्त शुक्ल, जिला सचिव जगरूप सिंह, मोतीलाल, रंजीत सिंह सेंगर, कुसुम, रामावतार, गुरुप्रसाद सचान एवं कैप्टन आर. एस. यादव ने संबोधित किया।
मथुरा में बड़ी तादाद में भाकपा कार्यकर्ताओं ने तहसील मोड़ से लेकर कलक्ट्रेट तक विशाल जुलूस निकाला जो कलेक्ट्रेट परिसर में पहुँच आम सभा में तब्दील हो गया। सभा को भाकपा राज्य कार्यकारिणी के सदस्य गफ्फार अब्बास एडवोकेट, जिला सचिव  बाबू लाल, सह सचिव अब्दुल हमीद, अनवार फारुकी. आदि ने संबोधित किया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलायें शामिल थीं जिनमें रामकटोरी, प्रेम कुमारी, साबो, दुलारी एवं प्रेमवती शामिल थीं। जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
ललितपुर में भाकपा कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट प्रांगण में धरना/प्रदर्शन आयोजित किया। उपस्थित जन समूह जिसमें बड़ी संख्या में नौजवान शामिल थे, को भाकपा राज्य कार्यकारिणी के सदस्य शिरोमणि राजपूत, जमील अहमद एडवोकेट, मोटी सिंह, किशुन लाल, राजेन्द्र सिंह एवं लालता सिंह ने संबोधित किया। ज्ञापन उपजिलाधिकारी  को सौंपा गया।
हाथरस में भाकपा जिला काउन्सिल के तत्वावधान में उप जिलाधिकारी सदर के कार्यालय के समक्ष धरना दिया और आम सभा की, वहां ज्ञापन लेने को उप जिलाधिकारी के मौजूद न होने पर पार्टी कार्यकर्ता आक्रोशित हो गये और प्रशासनिक तानाशाही के विरुद्ध भीषण नारेबाजी की और ज्ञापन उप जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष चिपका दिये गये। सभा को राज्य काउन्सिल सदस्य बाबू सिंह थंबार, सहसचिव चरण सिंह बघेल, रामजी लाल तोमर, सत्य पाल रावल, द्रुग पाल सिंह, लालता प्रसाद, ओमप्रकाश, जान मोहम्मद आदि ने संबोधित किया।
जौनपुर में भाकपा एवं जनसंगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट के सामने धरना देकर आमसभा की। सभा को राज्य कार्य कारिणी के सदस्य जय प्रकाश सिंह, के.आर. गुप्ता, सुबाष गौतम, सुभाष पटेल, सत्य नारायन पटेल, जगन्नाथ शास्त्री आदि ने संबोधित किया और प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
बदायूं में भाकपा एवं जनसंगठनों के कई सौ कार्यकर्ताओं ने शहर के प्रमुख मार्गों पर जुलूस निकाला। कलेक्ट्रेट से शुरू हुआ यह जुलूस कलेक्ट्रेट पर लौट कर आम सभा में तब्दील हो गया। सभा को पार्टी के जिला सचिव रघुराज सिंह के अलावा मुन्ना लाल, प्रेम पाल सिंह, राम प्रकाश, पूर्व प्रधान विमला कुमारी एवं कान्ति देवी ने संबोधित किया। ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया। प्रदर्शन में महिलाओं, बुद्धिजीवियों और नौजवानों की संख्या अधिक थी।
कानपूर महानगर में राम आसरे पार्क में एक धरने तथा सभा का आयोजन किया गया। सभा को ओम प्रकाश आनंद, राम प्रसाद कनौजिया, राजेन्द्र तिवारी, बी. के. अवस्थी, रघुवीर सिंह, प्रीतिपाल सिंह, हामिद हसन, श्रीमती संतोष सिंह, मुन्नी एवं शिवपति आदि ने संबोधित किया। नगर मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा गया।
बुलंदशहर जनपद में भाकपा ने स्याना के मुख्य बाजारों में प्रदर्शन किया और उपजिलाधिकारी कार्यालय पर सभा की। सभा की अध्यक्षता बाबा सागर सिंह ने की तथा राज्य कार्यकारिणी सदस्य अजय सिंह, मुरारी सिंह, श्रीमती दिनेश लोधी, संजय गिरी, अशोक गिरी आदि ने संवोधित किया। तहसीलदार को ज्ञापन दिया गया।
जनपद जालौन के उरई मुख्यालय पर भाकपा द्वारा एक विशाल धरने का आयोजन किया गया। वहीं पर एक सभा भी आयोजित की गयी। सभा को राज्य कार्यकारिणी सदस्य कैलाश पाठक, जिला सचिव सुधीर अवस्थी, विजय पाल सिंह, प्रभु दयाल पाल, विनय पाठक, राजेन्द्र सिंह जादों, गीता चौधरी, रक्षा अवस्थी आदि ने संबोधित किया।
आजमगढ़ जनपद में भाकपा के दलालघाट स्थित जिला कार्यालय से एक विशाल जुलूस निकाला जो कलेक्ट्रेट पर पहुँच कर सभा में तब्दील हो गया। सभा को राज्य कार्यकारिणी के सदस्य एवं जिला सचिव हामिद अली, किसान सभा के राज्य अध्यक्ष इम्तियाज़ बेग, हर मंदिर पांडे, राम सूरत यादव, दुर्बली राम, रामाज्ञा यादव, अचरज राय, जय प्रकाश राय, त्रिलोकी नाथ, जितेंद हरि पांडे आदि ने संबोधित किया। सभा की अध्यक्षता श्री कांत सिंह ने की। उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपे गये।
मैनपुरी में जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर आम सभा की गयी तथा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। सभा को पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य व जिला सचिव रामधन, हाकिम सिंह यादव, ताले सिंह यादव,राधे श्याम मिश्रा, रोहिताश कुमार भारद्वाज, सुरेश यादव, ओम वती, निर्मला, रेशमा, चुन्नी देवी आदि ने संवोधित किया। सभा की अध्यक्षता वीरेन्द्र चौहान, कृष्ण कांत दीक्षित एवं मुन्नी देवी के अध्यक्ष मंडल ने की। संचालन राधे श्याम यादव ने किया।
सुल्तानपुर में भाकपा के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना दिया और आम सभा की। भाकपा जिला सचिव शारदा पाण्डेय की अध्यक्षता में संपन्न सभा को मो. नईम, रोशन लाल प्रधान, श्री पाल पासी, जिया लाल, रामदेव, लल्लू शाही, गंगाराम, मालती शर्मा, कौशल्या देवी आदि ने संबोधित किया। धरने में महिलाओं की बराबर की भागीदारी थी।
फतेहपुर में भाकपा ने जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन कर आम सभा की जिसमें कई सौ लोग शामिल थे। जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपे गये। सभा को भाकपा जिला सचिव राम सजीवन सिंह, राज्य काउन्सिल सदस्य फूल चंद पाल, रामचंदर, राम प्रकाश आदि ने संबोधित किया।
समाचार प्रेषित किये जाने तक अन्य जिलों से भी धरने-प्रदर्शन के आयोजन के समाचार प्राप्त हो रहे हैं।
»»  read more

बुधवार, 15 अक्टूबर 2014

राज्यपाल द्वारा आर.एस.एस.के पदाधिकारियों को रात्रिभोज देना अत्यन्त आपत्तिजनक - भाकपा

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आर.एस.एस. के सरसंघ चालक श्री मोहन भागवत एवं उनके साथ अन्य वरिष्ठ प्रचारकों को राज्यपाल श्री राम नायक द्वारा विगत रात्रि दिये गये भोज और उनके साथ की गयी विशेष मन्त्रणा पर घनघोर आपत्ति व्यक्त की है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने कहा कि श्री राम नायक की जो भी प्रष्ठभूमि रही हो, पर अब वे एक संवैधानिक पद पर आसीन हैं. भारत का संविधान एक धर्मनिरपेक्ष संविधान है और आर.एस.एस. एक अतिवादी सांप्रदायिक संगठन है. अतएव संघ के कार्यकारी मंडल के पदाधिकारियों को एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा रात्रिभोज देना और उनसे मंत्रणा करना देश के हितों के विपरीत है. बयान में कहा गया है कि समाचार पत्रों के अनुसार संघ के प्रमुख पदाधिकारियों तथा राज्यपाल महोदय के बीच दो घंटों तक विभिन्न राजनैतिक मुद्दों पर चर्चा हुयी है. यही नहीं इस भोज में संघ के प्रमुख पदाधिकारियों के अतिरिक्त अन्य विशिष्ट जनों को भी बुलाया गया था. प्रदेश और देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि वे कौन से प्रमुख विषय हैं जिन पर राज्यपाल महोदय एवं श्री मोहन भागवत के बीच बातें हुयीं हैं तथा वो कौन कौन से विशिष्ट लोग हैं जो रात्रि भोज में उपस्थित थे. बयान में यह सवाल उठाया गया है कि राज्यपाल महोदय ने इन स्थितियों का संज्ञान क्यों नहीं लिया कि आर.एस.एस. ने विचारणीय मुद्दों में धर्मान्तरण, लव जेहाद, कथित घुसपैठ आदि आदि ऐसे ऐसे विन्दु रखे हैं जिनसे समाज में तनाव, विग्रह एवं सांप्रदायिक विद्वेष पैदा होता रहा है. यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश में संघ के समीपस्थ नेताओं ने ऐसे-ऐसे बयानात दिये थे जिन पर इलेक्शन कमीशन तक को संज्ञान लेना पड़ा था. राज्यपाल महोदय से मिलने वाले संघ के एक पदाधिकारी पर तो अजमेर बोम्ब ब्लास्ट तथा हैदराबाद की मस्जिद में बम ब्लास्ट मामले में जांच चल रही है. डा.गिरीश ने कहा कि राज्यपाल महोदय ने सांप्रदायिक संगठन के पदाधिकारियों को रात्रिभोज देकर अपने संवैधानिक दायित्वों से इतर कार्य किया है जो अत्यन्त आपत्तिजनक है. डा. गिरीश, राज्य सचिव.
»»  read more

शनिवार, 11 अक्टूबर 2014

नेहरू और मोदी

भाजपाई प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी एक ओर बड़ी तेजी से अंतर्राष्ट्रीय पूंजी को रिझाने के लिए तमाम करतब लगातार कर रहे हैं तो दूसरी ओर वे कांग्रेस से गांधी-नेहरू-इंदिरा की विरासत को भी छीन लेने को व्यातुर हैं। गांधी जयंती के दिन उन्होंने अपना महत्वाकांक्षी अभियान ”स्वच्छ भारत“ बड़े प्रचार के साथ एक थाना परिसर में झाडू लगा कर शुरू किया जो इंदिरा जयंती (19 नवम्बर) तक चलेगा तो दूसरी ओर उन्होंने नेहरू जयंती (बाल दिवस 14 नवम्बर) बड़े पैमाने पर मनाने की घोषणा करके कांग्रेस को अजीबोगरीब स्थितियों में डाल दिया। उन्होंने संघ परिवार और भाजपा को भी वैचारिक संकट में डाल दिया है।
भगत सिंह, डा. बी. आर. आम्बेडकर, जवाहर लाल नेहरू, पूरन चन्द जोशी और अजय घोष आधुनिक भारत को नई राजनीतिक चेतना एवं दृष्टि से लैस करने वाले नेता रहे हैं। ये सभी वैचारिक जड़ता को तोड़ने का साहस, प्रचलित धारणाओं के खिलाफ बोलने और वक्त के आगे की सोचने वाले नेता रहे हैं। धार्मिक नेताओं में विवेकानन्द ने भी यही भूमिका अदा की थी। पूरन चन्द जोशी और अजय घोष के बारे में जानने वालों की संख्या लगातार सीमित होती गई जबकि डा. बी. आर. आम्बेडकर अभी भी दलित राजनीति का सबसे अधिक प्रचलित नाम है, बात दीगर है कि उनके विचारों और कार्यों को जानने वालों की संख्या भी सीमित हाती जा रही है। भाजपा आम्बेडकर को छू-छू कर उनसे हमेशा दूर होती रही। उसने एक बार विवेकानन्द और एक बार भगत सिंह को अपनाने की असफल कोशिशें जरूर कीं परन्तु उनके वैचारिक करन्ट को वह बर्दाश्त नहीं कर सकी। उस दौर में जनता राजनीति में अधिक जागरूक थी और जनता ने भाजपा पर प्रश्नों की बौछार तेज कर दी थी कि भाजपा उनसे छिटक कर दूर खड़ी हो गयी। भाजपा गांधीवादी समाजवाद के नाम गांधी को भी अपनाने की असफल कोशिश कर चुकी है।
नेहरू अब तक भाजपा एवं संघ परिवार के लिए सबसे अधिक अछूत रहे हैं। ये लोग इंदिरा गांधी और राजीव गांधी तक की प्रशंसा कर चुके हैं परन्तु नेहरू हमेशा उनके निशाने पर रहे हैं। पहली बार भाजपा के किसी नेता ने नेहरू को स्वीकार करने की बात की है। ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि पिछले लोक सभा चुनाव का माहौल अपने पक्ष में बनाने के लिए संघ-भाजपा एवं मोदी सभी ने नेहरू के बरक्स सरदार पटेल को खड़ा करने की कोशिश इस तरह की थी मानो सरदार पटेल न ही कांग्रेसी थे और न ही नेहरू के सहयोगी। जनता को याद होना चाहिए कि यहां तक कहा गया था कि ”अगर नेहरू की जगह पटेल प्रधानमंत्री बनते.......“ और पटेल की लौह प्रतिमा गुजरात में स्थापित करने के लिए गांव-गांव लोहा इकट्ठा किया गया था। अभी कुछ दिनों पहले भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक काल्पनिक स्थिति देश के सामने रखने की कोशिश की थी कि कश्मीर मामले को अगर पटेल ने संभाला होता तो इसके एक हिस्से पर पाकिस्तान का कब्जा न होता। कुछ दिनों से फेसबुक आदि सोशल मीडिया पर भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा एक अभियान चल रहा था कि गांधी और नेहरू अगर चाहते तो भगत सिंह को फांसी नहीं होती।
भाजपा एवं संघ के साथ समस्या यह रही है कि जब तक भारतीय राजनीति में नेहरू और अजय घोष (भाकपा के महासचिव एवं शहीद भगत सिंह के साथी) के जीवन काल में जनसंघ (भाजपा का पूर्व संस्करण) संसद में दूसरे दल के रूप में स्थापित नहीं हो पाई थी। जनसंघ अमरीका और विकसित यूरोपीय देशों के पक्ष में अपनी राजनीतिक-आर्थिक नीतियों को निरूपित करता रहा था जबकि नेहरू ने भारत के विकास के लिए और उसे स्वयं पर निर्भर अर्थव्यवस्था बनाने के लिए मिश्रित अर्थव्यवस्था का वैकल्पिक मॉडल पेश किया था और वे उसी रास्ते पर आगे बढ़े। नेहरू अमरीका और विकसित यूरोपीय देशों की आर्थिक दासता स्वीकार करने के बजाय उसे चुनौती पेश कर रहे थे और सोवियत संघ के सहयोग से जहां एक ओर भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे थे वहीं वैश्विक राजनीति में वे अमरीकी साम्राज्यवाद के सामने झुकने से इंकार करते हुए नासिर और टीटो के साथ मिलकर गुटनिरपेक्ष आन्दोलन की आधार शिला रखने में व्यस्त थे। नेहरू का मानना था कि अगर प्रचलित धारणाओं के खिलाफ नए तथ्य सामने आने पर हमें अपनी सोच को बदल लेना चाहिए और उन्होंने भारतीय जनता में वैज्ञानिक मिजाज यानी साइंटिफिक टेम्पर विकसित करने पर जोर दिया था।  नेहरू का यही काम आस्था को मुद्दा बनाकर अपनी राजनीति करने वाली जनसंघ के साथ-साथ संघ के लिए सबसे ज्यादा कष्टकर और असहज परिस्थितियां पैदा करने वाला था। नेहरू का ही कथन था कि अफवाहें देश की सबसे बड़ी दुश्मन हैं और दक्षिणपंथी एवं कट्टरपंथी ताकते अफवाहों को अपना सबसे कारगर हथियार समझते हैं। हिटलर झूठ को कला के स्तर तक ले ही गया था और इसी रणनीति के सहारे भाजपा पिछले लोकसभा चुनावों में विजयी हुई है।
नेहरू और इंदिरा गांधी की विरासत पर राजनीति करने वाली कांग्रेस उनके आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से बहुत ज्यादा भटक चुकी है। नेहरू की आर्थिक एवं वैश्विक राजनीतिक समझ से वह बहुत ज्यादा दूर जा चुकी है। आज की उसकी नीतियां वही हैं जो भाजपा की हैं। कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री शशि थरूर ने तो उस दौर की आर्थिक एवं राजनीतिक नीतियों को मूर्खतापूर्ण तक कह डाला था। कांग्रेस नेहरू पर अपना दावा एक तरह से छोड़ चुकी है।
आने वाले वक्त में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री मोदी नेहरू के साथ कितनी दूर तक चल पाते हैं और संघ परिवार की इस पर क्या प्रतिक्रिया होती है? यह देखना और दिलचस्प होगा कि इस दौर में जनता नेहरू को लेकर भाजपा के सामने किस तरह के प्रश्न खड़ी करती है और क्या भाजपा और संघ को असहजता की उसी स्थिति तक धकेल पाती है अथवा नहीं जिस असहजता में वह विवेकानन्द और भगत सिंह को अंगीकार करने के दौर में भाजपा को खड़ी कर चुकी है।
- प्रदीप तिवारी
»»  read more

गुरुवार, 9 अक्टूबर 2014

महंगाई के खिलाफ भाकपा १६ अक्टूबर को सडकों पर उतरेगी.

लखनऊ- केन्द्र सरकार को पदारूढ़ हुये साढ़े चार माह बीत गये. अपने चुनाव अभियान में भी भाजपा ने सत्ता में आते ही महंगाई को समाप्त करने का वायदा किया था. लेकिन आज भी महंगाई लोगों के सामने बड़ी समस्या बनी हुयी है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी महंगाई को कारगर रूप से नीचे लाने को 16 अक्टूबर को देश भर में धरने-प्रदर्शन आयोजित करेगी. उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में बिजली के दामों में बड़ी वृध्दि कर महंगाई को बढ़ाने में आग में घी का काम किया है, अतएव भाकपा प्रदेश सरकार के इस कदम की वापसी की मांग भी करेगी. उत्तर प्रदेश में सूखा और बाढ़ की तबाही से किसान-कामगारों को राहत दिलाने की मांग भी केंद्र और राज्य सरकार से की जायेगी. उपर्युक्त जानकारी देते हुये भाकपा के राज्य सचिव एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डा.गिरीश ने बताया कि जिलों-जिलों में प्रदर्शनों के उपरान्त दो अलग अलग ज्ञापन जिलाधिकारियों को सौंपे जायेंगे. पहला ज्ञापन राष्ट्रपति तो दूसरा राज्यपाल को संबोधित होगा. राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन में केन्द्र सरकार को महंगाई को नीचे लाने हेतु जरूरी निर्देश दिए जाने की मांग की जायेगी. इस हेतु जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और उनके वादा कारोबार पर रोक लगाने, हर परिवार को हर माह 35 किलो खाद्यान्न २ रु. प्रति किलो की दर से मुहैय्या कराने, अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आयी भारी गिरावट को देखते हुये पेट्रोल डीजल एवं गैस की कीमतों में उल्लेखनीय कमी की जाने तथा रेल किराया और मालभाड़े में कमी लाने जैसी मांगें की जायेंगी. राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन में बिजली की बढ़ी दरों को वापस लेने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली को व्यापक और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने, पेट्रोलियम पदार्थों पर वैट कम करने तथा सूखा और बाढ़ से प्रभावित किसानों-कामगारों के हित में ठोस कदम उठाने हेतु राज्य सरकार को निर्देश दिये जाने की मांग की जायेगी. यहाँ जारी एक बयान में भाकपा राज्य सचिव ने बताया कि जिलों-जिलों में प्रदर्शनों की तैयारियां चल रही है. भाकपा कार्यकर्ता जन संपर्क में जुटे हैं तथा नुक्कड़ सभायें आदि आयोजित की जारही हैं. डा.गिरीश
»»  read more

बुधवार, 1 अक्टूबर 2014

बिजली दरों में बढ़ोतरी की भाकपा द्वारा कटु निन्दा

लखनऊ 1 अक्टूबर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने विद्युत नियामक आयोग द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में औसत 12 प्रतिशत तथा कृषि के लिए औसत 12.20 प्रतिशत की बढ़ोतरी के लिए आज दी गई अनुमति की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि एक साल पहले ही बिजली दरों में औसत 30 प्रतिशत बढ़ोतरी एक साल पहले ही की गई थी और इस बढ़ोतरी से सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ किसानों की कमर टूट जायेगी। ज्ञातव्य हो कि उद्योगों को आपूर्ति की जाने वाली बिजली की दरों में केवल 7.38 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है जबकि वाणिज्यिक कनेक्शनों पर केवल 6.28 प्रतिशत औसत बढ़ोतरी की गई है।
भाकपा के राज्य सचिव मंडल की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने उत्तर प्रदेश सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर प्रस्तावित बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की है। भाकपा ने कहा है कि सपा सरकार के वर्तमान कार्यकाल के दौरान बिजली की दरों में डेढ़ गुना से ज्यादा बढ़ोतरी की जा चुकी है। इस वृद्धि का असर लगातार बढ़ रही महंगाई पर भी पड़ेगा।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा है कि सरकार शहरों को भी 12 घंटे विद्युत आपूर्ति नहीं कर पा रही है और न ही बिजली चोरी को रोकने का प्रयास कर रही है। उल्टे सामान्य उपभोक्ताओं पर लगातार असहनीय भार लादती चली जा रही है। अगर राज्य सरकार इस बढ़ोतरी को वापस नहीं लेती है तो भाकपा पूरे प्रदेश में जनता को इस बढ़ोतरी के खिलाफ लामबंद करेगी और इसके खिलाफ जनसंघर्ष आयोजित करेगी।



कार्यालय सचिव

»»  read more

मंगलवार, 30 सितंबर 2014

भाकपा का सद्भावना सम्मेलन २ अक्टूबर को गाज़ियाबाद में. राष्ट्रीय महासचिव होंगे मुख्य अतिथि.

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी इस बात से बेहद चिंतित है कि देश और प्रदेश में सांप्रदायिक ताकतें बेहद सक्रिय हैं. वे लव जेहाद, गौ रक्षा के नाम पर तथा मुस्लिम मदरसों को निशाना बनाने जैसे कई मुद्दे खड़े कर सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने में जुटी हैं और तनाव पैदा कर दंगे- फसाद करा रही हैं. भाजपा और एनडीए के शासन के चार माह के कार्यकाल में छोटी- बढ़ी लगभग ८०० सांप्रदायिक वारदातें हो चुकी हैं, जिनमें मोदी का चुनाव क्षेत्र बदौदा भी शामिल है. ऊत्तर प्रदेश इन शक्तियों के खास निशाने पर है जहां कार्यरत प्रदेश सरकार कमजोर इच्छा शक्ति के चलते इन पर कारगर अंकुश नहीं लगा पा रही है. भाकपा की गत दिन यहां संपन्न राज्य काउन्सिल की बैठक में इस समस्या पर गहन चिन्तन हुआ और इस नतीजे पर पहुँचा गया कि केन्द्र में सत्तारूढ़ होने के बाद इन शक्तियों के हौसले बुलन्द हैं और संघ के अलग अलग आनुसांगिक संगठन अलग अलग तरह से विष वमन कर रहे हैं. इनकी मंशा लगातार तनाव बनाये रखने की है ताकि लोगों का ध्यान महंगाई, बेरोजगारी, सुशासन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार की विफलताओं से हठाया जासके. लेकिन एक हद तक जनता इन हथकंडों को समझ भी चुकी है और हाल में हुये उपचुनावों में उनको ठुकरा भी चुकी है. लेकिन सांप्रदायिक शक्तियां इतनी शातिर हैं कि नित नये हथकंडे खोज लेती हैं. अतएव भाकपा ने सांप्रदायिक सद्भाव के लिये निरंतर जमीनी स्तर पर काम करने का निश्चय किया है. ‘हम सदभाव के साथ साथ भूख, रोजगार और सुरक्षा के लिए भी अलख जगायेंगे’, भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा है. डा. गिरीश ने बताया कि इस अभियान की शुरुआत सद्भाव शांति एवं भाईचारे के मसीहा महात्मा गांधी के जन्म दिन से की जारही है. २ अक्टूबर को गाज़ियाबाद में “सांप्रदायिक सदभाव के वास्ते और महंगाई एवं उत्पीड़न के खिलाफ” एक क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किया जायेगा. गाज़ियाबाद के रेलवे रोड स्थिति गुरुद्वारे में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि भाकपा के राष्ट्रीय महासचिव एस. सुधाकर रेड्डी होंगे. मुख्य वक्ता आल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की सचिव अमरजीत कौर होंगी जब कि विशिष्ट वक्ता के रूप में स्वयं उन्हें आमंत्रित किया गया है. सम्मेलन के संयोजक जितेन्द्र शर्मा ने सद्भाव और भाईचारे के लिये समर्पित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के महानुभावों से इस सम्मेलन में भाग लेने का अनुरोध किया है. डा. गिरीश.
»»  read more

सोमवार, 29 सितंबर 2014

भाकपा का राज्य सम्मेलन इलाहाबाद में

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का २२वां राज्य सम्मेलन आगामी २८ फरबरी से २ मार्च तक इलाहाबाद में संपन्न होगा. यह निर्णय गत सायं सम्पन्न भाकपा की राज्य काउन्सिल की बैठक में लिया गया. भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने बताया कि पार्टी की इलाहाबाद जिला कमेटी ने अपने यहाँ राज्य सम्मेलन आयोजित करने का अनुरोध किया था, जिसे राज्य काउन्सिल ने सर्व सम्मति से स्वीकार कर लिया. भाकपा के संविधान के अनुसार पार्टी हर तीन वर्षों के अन्तराल पर प्राथमिक शाखाओं से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सम्मेलन आयोजित करती है. राष्ट्रीय स्तर पर इसे महाधिवेशन कहा जाता है. २२वां महाधिवेशन २५ से २९ मार्च तक पुड्डुचेरी में आयोजित होना सुनिश्चित किया गया है. काउन्सिल बैठक में लिये गये निर्णयानुसार प्रदेश में सभी शाखाओं एवं मध्यवर्ती कमेटियों के सम्मेलन ३१ दिसंबर तक जबकि जिलों के सम्मेलन १५ फरबरी तक पूरे कर लिये जायेंगे. भाकपा के इन सम्मेलनों में नयी कमेटियों का चुनाव एवं ऊपर के सम्मेलनों के प्रतिनिधियों का चुनाव किया जाता है. इसके अतिरिक्त गत तीन वर्षों के क्रिया कलापों, मौजूदा राजनीति, रणनीति एवं संगठन संबंधी रिपोर्टों पर चर्चा कर उन्हें पारित किया जाता है. इलाहाबाद में राज्य सम्मेलन आयोजित करने के लिये हरी झंडी मिलने के बाद वहां की जिला काउन्सिल इसकी तैयारियों में जुट गयी है. डा. गिरीश
»»  read more

रविवार, 28 सितंबर 2014

भाकपा का महंगाई के खिलाफ देशव्यापी आन्दोलन 16 अक्टूबर को

लखनऊ 28 सितम्बर। कमरतोड़ महंगाई तथा सूखा एवं बाढ़ की आपदा से आम जनता को राहत दिलाने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 अक्टूबर को प्रदेश एवं देश के सभी जिला मुख्यालयों पर व्यापक रूप से धरने एवं प्रदर्शन आयोजित करेगी। यहां राज्य मुख्यालय पर चल रही भाकपा की राज्य कौंसिल की बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने बताया कि केन्द्र की मोदी सरकार के 4 माह के कार्यकाल में महंगाई ने भारी छलांग लगाई है जिसके बोझ तले आम जनता पिस कर रह गई है। कैसी विडम्बना है कि जो सरकार महंगाई और भ्रष्टाचार हटाने के नाम पर ही सत्ता में आई थी, वह और भी बेशर्मी से महंगाई बढ़ाने में जुटी है। इसका कारण यह है कि जिस आर्थिक नव उदारवाद की नीतियों को पूर्ववर्ती केन्द्र सरकार लागू कर रही थी, वर्तमान केन्द्र सरकार उन्हीं विनाशकारी नीतियों को और भी मजबूती से लागू कर रही है। स्पष्टतया दिखाई दे रहा है कि मोदी सरकार कारपोरेट घरानों के हितों में बहुत ही बेबाकी से कदम उठा रही है और आम जनता के ऊपर इसका भार लाद रही है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में दिल्ली में सम्पन्न भाकपा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक में महंगाई के विरूद्ध देशव्यापी आन्दोलन छेड़े जाने का निर्णय लिया था। पार्टी की राज्य कौंसिल ने उत्तर प्रदेश में सूखा एवं बाढ़ की भारी तबाही को देखते हुए इस आन्दोलन को महंगाई, बाढ़ और सुखाड़ से राहत दिवस के रूप में 16 अक्टूबर को आयोजित किया है। भाकपा राज्य कौंसिल ने सभी जिला इकाईयों को निर्देश दिया है कि वे पूरी मुस्तैदी से इस आन्दोलन को कामयाब बनाने में जुट जायें और आम जनता के बीच जाकर इस मुद्दे पर आन्दोलन की जरूरत को बताया जाये।



कार्यालय सचिव
»»  read more

भाकपा का महंगाई के खिलाफ देशव्यापी आन्दोलन 16 अक्टूबर को

लखनऊ 28 सितम्बर। कमरतोड़ महंगाई तथा सूखा एवं बाढ़ की आपदा से आम जनता को राहत दिलाने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 16 अक्टूबर को प्रदेश एवं देश के सभी जिला मुख्यालयों पर व्यापक रूप से धरने एवं प्रदर्शन आयोजित करेगी। यहां राज्य मुख्यालय पर चल रही भाकपा की राज्य कौंसिल की बैठक में इस आशय का निर्णय लिया गया।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने बताया कि केन्द्र की मोदी सरकार के 4 माह के कार्यकाल में महंगाई ने भारी छलांग लगाई है जिसके बोझ तले आम जनता पिस कर रह गई है। कैसी विडम्बना है कि जो सरकार महंगाई और भ्रष्टाचार हटाने के नाम पर ही सत्ता में आई थी, वह और भी बेशर्मी से महंगाई बढ़ाने में जुटी है। इसका कारण यह है कि जिस आर्थिक नव उदारवाद की नीतियों को पूर्ववर्ती केन्द्र सरकार लागू कर रही थी, वर्तमान केन्द्र सरकार उन्हीं विनाशकारी नीतियों को और भी मजबूती से लागू कर रही है। स्पष्टतया दिखाई दे रहा है कि मोदी सरकार कारपोरेट घरानों के हितों में बहुत ही बेबाकी से कदम उठा रही है और आम जनता के ऊपर इसका भार लाद रही है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में दिल्ली में सम्पन्न भाकपा की तीन दिवसीय राष्ट्रीय परिषद की बैठक में महंगाई के विरूद्ध देशव्यापी आन्दोलन छेड़े जाने का निर्णय लिया था। पार्टी की राज्य कौंसिल ने उत्तर प्रदेश में सूखा एवं बाढ़ की भारी तबाही को देखते हुए इस आन्दोलन को महंगाई, बाढ़ और सुखाड़ से राहत दिवस के रूप में 16 अक्टूबर को आयोजित किया है। भाकपा राज्य कौंसिल ने सभी जिला इकाईयों को निर्देश दिया है कि वे पूरी मुस्तैदी से इस आन्दोलन को कामयाब बनाने में जुट जायें और आम जनता के बीच जाकर इस मुद्दे पर आन्दोलन की जरूरत को बताया जाये।



कार्यालय सचिव
»»  read more

मंगलवार, 23 सितंबर 2014

शकील सिद्दीकी को अवध रत्न सम्मान

लखनऊ 16 सितम्बर। संगम सामाजिक संस्था की ओर से स्थानीय जयशंकर प्रसाद सभागार में आयोजित एक समारोह में उर्दू साहित्यकार मलिकजादा मंजूर अहमद को इम्तेयाज अहमद अशरफी अवध रत्न सम्मान, हिन्दी साहित्य लेखन, अनुवाद, सम्पादन एवं आलोचना के लिए शकील अहमद मलिक मोहम्मद जायसी अवध रत्न सम्मान व सामाजिक सेवा के लिए सिराज मेंहदी को सईद नईम अशरफ अवध रत्न सम्मान से सम्मानित किया। सम्मान के तौर पर सभी को एक प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह तथा शाल प्रदान किया गया। समारोह की अध्यक्षता विख्यात इस्लामिक शिक्षा केन्द्र नदवा के प्रधान मौलाना सईदुर्रहमान आजमी नदवी ने की। इस मौके पर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. खान मसूद अहमद भी मौजूद रहे।
समारोह का संचालन प्रो. अशरफी ने किया। सम्मानित किये जाने के पूर्व प्रो. मलिक जादा मंजूर अहमद तथा शकील सिद्दीकी के साहित्यिक योगदान की चर्चा कई विद्वानों ने करते हुए अवध की गंगा जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाने में उनके योगदान की प्रशंसा की। शकील सिद्दीकी के साहित्य और कार्यों पर चर्चा के दौरान शोषण के खिलाफ सड़कों पर उनके संघर्ष को भी याद किया गया।
कार्यक्रम में प्रो. रूपरेखा वर्मा, राकेश, जुगुल किशोर, नईम सिद्दीकी, नदीम अशरफ जायसी, डा. अनवर जलालपुरी, हिमायत जायसी, शमीम अशरफ व जुल्फिकार अली शामिल रहे।

»»  read more

सोमवार, 22 सितंबर 2014

34 करोड़ का उपभोक्ता बाजार

तमाम देश भारत के साथ कारोबार बढ़ाना चाहते हैं। अमरीका भले आतंकवाद की समाप्ति के लिए करोड़ों डालर पाकिस्तान की सेना को देकर भारत में आतंकवादी घटनायें अंजाम दिलाता रहे परन्तु उसे भारत के इस उपभोक्ता बाजार में अपने सरमायेदारों का हित नजर आता है। इजरायल भी यही चाहता है। जापान भी यही चाहता है। तमाम विकसित यूरोपीय देश भी यही चाहते हैं और चीन भी यही चाहता है। इसीलिए ये सभी भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ते बनाये रखना चाहते हैं। केन्द्र में नई सरकार भी इन सभी से अपने रिश्तों को मजबूत करना चाहती है और उसके परिणामों की उसे कतई चिन्ता नहीं है।
पिछले 40-50 सालों में भारत में मध्यम वर्ग का उभार हुआ है और पिछले 23-24 सालों में बाजारवाद ने इस वर्ग के दिलो-दिमाग पर कब्जा कर लिया है। यह वर्ग तमाम उपभोक्ता वस्तुओं - कार, फ्रिज, टीवी, फ्लैट, मोबाईल, कम्प्यूटर को खरीदने के लिए व्याकुल है, भले उसकी आमदनी से इन्हें न खरीदा जा सकता हो। इस वर्ग की पूरी खरीददारी ईएमआई आश्रित है। पिछले दो दशकों से भारत के बैंकिंग क्षेत्र को इस बात की चिन्ता नहीं है कि किसानों, छोटे कारोबारियों, दस्तकारों और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को वह कर्जा मुहैया करवा रहा है कि नहीं परन्तु उसे इस बात की बहुत चिन्ता है कि बड़े व्यापारियों और सरमायेदारों को अनाप-शनाप पैसा मुहैया हो पा रहा है कि नहीं। तो फिर मात्र 31 करोड़ की आबादी वाले अमरीका, 13 करोड़ की आबादी वाले जापान, 8 करोड़ की आबादी वाले जर्मनी, 82 लाख की आबादी वाले इजरायल के साथ-साथ तमाम अन्य विकसित पश्चिमी देशों को इतना बड़ा उपभोक्ता बाजार और कहां मिलेगा?
इसीलिए एक बड़ी भूखी, निरक्षर, कुपोषण और रक्ताल्पता का शिकार आबादी वाले देश भारत से तमाम देश अपने सरमायेदारों के हितों को साधने के लिए व्यापारिक सम्बंध बनाने को तत्पर हैं। नए प्रधानमंत्री जापान हो आये हैं और चीन के राष्ट्रपति बरास्ते गुजरात भारत दर्शन को आ चुके हैं। प्रधानमंत्री की कई देशों की यात्रा की तैयारियां चल रहीं हैं तो कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों में भारत आने की होड़ मच गयी है।
हमारे पास उनको बेचने को क्या है? अमरीका और चीन जैसे देशों के पास भी लौह अयस्क का अपार भंडार है। परन्तु वे अपने खनिज श्रोतों का उपभोग करने के बजाय यहां से लौह अयस्क और कोयला आदि खरीदते हैं। क्यों? क्योंकि इनके भंडार सीमित हैं। जब पूरी दुनिया के खनिज भंडार समाप्त हो जायेंगे, तब वे इसका उपभोग करेंगे। दूसरी ओर हमारी सरकारें कच्चा माल बेचने के लिए व्याकुल हैं। लौह अयस्क 46 रूपये टन, फाईन 3160 रूपये टन और कोयला 500 से 700 रूपये टन बेचते हैं और उसके बाद परिष्कृत इस्पात को 34 हजार रूपये टन के हिसाब से खरीदते हैं। नई सरकार की नीतियां क्या हैं - सार्वजनिक क्षेत्र में चलने वाले खाद कारखानों का भट्ठा बैठा दो, सेल की कब्र खोद दो और विदेशी पूंजी को यही माल बनाने के लिए पलक पांवड़े बिछा दो। 
अमरीका के बौद्धिक कामों के लिए अपने बुद्धिजीवियों (बुद्धिजीवियों से यहां आशय अपनी बुद्धि बेचकर भेट भरने वालों से है) को भेजने वाले तथा विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में शामिल हमारे देश को अपने एक पुरातन शहर वाराणसी को स्मार्ट बनाने के लिए दूसरों का मुंह ताकते हुए शर्म क्यों नहीं आती। मोदी जी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने विदेशी सरमाये के लिए हिन्दुस्तान में रेड टेप हटा कर रेड कारपेट बिछा दी है। उनके कहने का मतलब पर गौर करना जरूरी है। उन्होंने हिन्दुस्तान के नियम, कायदे, कानून, विस्थापन, पर्यावरण तथा अपने देश की बहुसंख्यक आबादी के हितों - सभी को विदेशी सरमाये पर कुर्बान कर देने की तैयारी कर ली है।
हमें इस बात पर गौर करना होगा कि आज की तारीख में जब कोई विदेशी सरमायेदार उद्योग लगाता है तो विस्थापन और बेरोजगारी का शिकार कितने होते हैं, ठेका मजदूरी के नाम पर कितने मजदूरों का लहू पीने का हम अवसर मुहैया करा रहे हैं और उस उद्योग में कितने लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। सोवियत संघ की मदद से सार्वजनिक क्षेत्र में 4 मिलियन टन का इस्पात कारखाना जब बोकारों में लगा था तो 52000 लोगों को रोजगार मिला था। लेकिन यही उद्योग अगर विदेशी पूंजी लगाती है तो 3000 लोगों को भी रोजगार मुहैया हो जाये तो बहुत होगा। और इसमें अधिसंख्यक रोजगार असंगठित क्षेत्र में मिलेगा या फिर ठेका मजदूरी के जरिये।
पूरी मजदूरी मांगने का खामियाजा मारूति उद्योग के मजदूरों को क्या मिला था, यह हमें याद रखना चाहिए। सरकार तो सरमायेदारों का लठैत बनने के लिए व्याकुल है।
‘ट्रिकल डाउन’ सिद्धान्त (जिसने यह समझाने का प्रयास किया था कि जब पूंजीपति पर्याप्त मुनाफा कमा लेंगे तो पैसा टपक-टपक कर मजदूरों की जेबों में आने लगेगा) हमें आज भी याद होना चाहिए। आज तक तो ऐसा हो नहीं सका। सरमायेदारों का सरमाया तो हजारों गुना बढ़ चुका है लेकिन उनके पास से पैसा मजदूरों की जेब में गिरना तो आज तक शुरू नहीं हो सका।
कमजोर वामपंथ के दौर में यह सब होना ही है। अपनी बर्बादी की राह पर देश चल चुका है। जनता को सरकार के हर कदम और उसके हर संदेश के निहितार्थ लगातार समझते रहना होगा।
- प्रदीप तिवारी
»»  read more

मंगलवार, 16 सितंबर 2014

उपचुनावों के नतीजे- मतदाताओं ने सांप्रदायिकता को पूरी तरह नकारा -भाकपा

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने देश और उत्तर प्रदेश में हुये लोकसभा उपचुनावों के परिणामों पर संतोष व्यक्त किया है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने कहा कि हाल में हुए लोकसभा चुनावों में सांप्रदायिकता के ऊपर विकास का चोगा पहना कर भाजपा ने भारी बहुमत हासिल कर लिया था. लेकिन सत्ता में आने के बाद भाजपा अपने असली रूप में सामने आगयी और सांप्रदायिकता के नंगे नाच में लिप्त होगयी. जनता ने भाजपा की सांप्रदायिक नीतियों को पूरी तरह नकार दिया है. भाकपा जनता के इस फैसले को बेहद सकारात्मक मानती है और उसे बधाई देती है. डा. गिरीश ने कहा कि भाकपा ने भी चार विधानसभा सीटों पर उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ा था लेकिन ध्रुवीकरण, धनाभाव एवं सांगठनिक कमजोरियों के चलते उसे अपेक्षित मत नहीं मिल सके. भाकपा महसूस करती है कि चुनावी सफलता के लिये उसे नये सिरे से प्रयास करने होंगे और चुनाव प्रणाली में सुधार खासकर चुनाव की समानुपातिक प्रणाली के पक्ष में अभियान चलाना होगा. आगामी दिनों में भाकपा इन मुद्दों पर गहन चर्चा करेगी. जिन मतदाताओं ने भाकपा के पक्ष में मतदान किया अथवा चुनाव अभियान के दौर में उसके प्रति सहानुभूति जताई, भाकपा उन्हें हार्दिक धन्यवाद देती है. डा.गिरीश
»»  read more

शुक्रवार, 12 सितंबर 2014

पी.पी.एच. के लखनऊ पुस्तक बिक्री केंद्र का शुभारम्भ.

लखनऊ- वैज्ञानिक समाजवाद, इतिहास, संस्कृति, विज्ञान एवं बालोपयोगी अनूठी पुस्तकों के बिक्री केन्द्र का शुभारम्भ आज यहां २२,कैसरबाग स्थित परिसर में होगया. प्युपिल्स पब्लिशिंग हाउस, नई दिल्ली के सौजन्य से प्रारंभ पुस्तक केन्द्र का उद्घाटन प्रख्यात लेखक-समालोचक एवं प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र यादव ने किया. अपने उद्बोधन में श्री यादव ने कहा कि चेतना बुक डिपो के बंद होने के बाद से इस तरह की पुस्तकों के केन्द्र की कमी बेहद अखर रही थी. अब ज्ञान के पिपासु और सामाजिक चेतना के वाहकों को प्रगतिशील साहित्य की खरीद के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. उन्होंने पुस्तक केन्द्र खोलने के लिये पी.पी.एच. एवं स्थानीय संचालकों को बधाई दी. वरिष्ठ रंग कर्मी और भारतीय जन नाट्य संघ के प्रदेश महासचिव राकेश ने कहाकि २२, केसरबाग परिसर विविध साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनैतिक गतिविधियों का केन्द्र रहा है. अब सामाजिक आर्थिक बदलाव की चेतना जाग्रत करने वाला साहित्य भी यहाँ मिल सकेगा, यह पाठकों के लिए ख़ुशी की बात है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव डा.गिरीश ने कहा कि ज्ञान की ताकत हर ताकत से बढ़ी होती है, लेकिन सवाल यह है कि ज्ञान का आधार वैज्ञानिक है या पुरातनपंथी. वह सामाजिक परिवर्तन- व्यवस्था परिवर्तन के लिए स्तेमाल होरहा है अथवा लूट और दमन के चक्र को बनाये रखने के लिये. यहां उपलब्ध पुस्तकों से शोषण से मुक्त व्यवस्था निर्माण का मार्ग प्रशस्त होता है. इस अवसर पर भाकपा के राज्य सहसचिव अरविन्दराज स्वरूप, उत्तर प्रदेश ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रदेश महासचिव सदरुद्दीन राना, उत्तर प्रदेश महिला फेडरेशन की महासचिव आशा मिश्रा, उत्तर प्रदेश किसान सभा के महासचिव रामप्रताप त्रिपाठी, उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के महासचिव फूलचंद यादव, भाकपा के जिला सचिव मो. खालिक आदि अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद थे जिन्होंने अपनी शुभकामनायें व्यक्त कीं. कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ भाकपा नेता अशोक मिश्रा ने की. पुस्तक केन्द्र के संचालक रामगोपाल शर्मा ने बताया कि केन्द्र प्रतिदिन प्रातः १० बजे से सायं ७ब्जे तक खुला रहेगा. डा. गिरीश
»»  read more

मंगलवार, 9 सितंबर 2014

का.सुरेन्द्र राम दिवंगत : भाकपा ने शोक जताया.

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य, उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के अध्यक्ष एवं भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राष्ट्रीय सचिव का.सुरेन्द्र राम का आज निधन होगया. वे ५७ वर्ष के थे गाजीपुर जनपद के ग्राम- लहुरापुर के एक गरीब दलित परिवार में जन्मे का.सुरेन्द्र राम छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय थे. उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए.तथा एल.एल.बी. की डिग्रियां हासिल कीं. अपनी शिक्षा के दौरान वहीं वे आल इण्डिया स्टूडेंट्स फेडरेशन में शामिल होगये और उसके अगुआ नेताओं में रहे. उसी दरम्यान वे भाकपा में सक्रिय हुये और उसकी गाजीपुर जनपद काउन्सिल के लगभग दस वर्षों तक सचिव रहे. वे गाजीपुर जिला पंचायत के सदस्य भी निर्वाचित हुये. पिछले २० वर्ष से वे खेतिहर मजदूरों को संगठित करने में जुटे थे. वे निरंतर मार्क्सवाद, लेनिनवाद एवं डा. अम्बेडकर के सिध्दान्तों का अध्ययन करते रहे और उनसे प्रेरणा ग्रहण कर दलितों शोषितों एवं वंचितों के हित में संघर्ष करते रहे. अभी हाल में उन्हें गम्भीर मस्तिष्क एवं ह्रदय आघात लगा और पहले मऊ, वाराणसी और अब लखनऊ के पी.जी.आई में उन्हें भरती कराया गया. लेकिन उनकी हालात में सुधार नहीं हुआ और चिकित्सको की सलाह पर उन्हें गत रात ही उनके पैतृक निवास ले जाया गया जहां आज सुबह ही उन्होंने अंतिम श्वांस ली. उनका अंतिम संस्कार आज गाजीपुर में गंगा के तट पर किया गया जहां बड़ी संख्या में राजनैतिक एवं सामाजिक हस्तियां मौजूद थीं. संकट की इस घड़ी में भाकपा एवं खेत मजदूर यूनियन का नेतृत्व हर स्तर पर उनके साथ खड़ा रहा. आज जैसे ही उनके निधन का समाचार भाकपा के राज्य कार्यालय पर मिला, वहां शोक का माहौल पैदा होगया. उनके सम्मान में पार्टी का झंडा झुका दिया गया. राज्य कार्यालय पर एक शोक सभा का आयोजन किया गया. भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने का. सुरेन्द्र के निधन को शोषित-पीड़ितों के आन्दोलन एवं भाकपा तथा खेत मजदूर यूनियन की अपूरणीय क्षति बताते हुये उन्हें इंकलाबी श्रध्दांजली अर्पित की. उन्होंने शोक-संतप्त परिवार को पार्टी की गहन संवेदनायें प्रेषित कीं. अंत में मौन रख कर उनके कार्यकलापों को याद किया गया. शोकसभा की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश किसान सभा के सचिव का.रामप्रताप त्रिपाठी ने की. भाकपा राज्य सह सचिव अरविन्दराज स्वरूप, उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के सचिव फूलचंद यादव, भाकपा जालौन के जिला सचिव सुधीर अवस्थी, रामगोपाल शर्मा शमशेर बहादुर सिंह एवं राममूर्ति मिश्रा आदि ने भी श्रध्दा सुमन अर्पित किये. डा.गिरीश, राज्य सचिव
»»  read more

सोमवार, 8 सितंबर 2014

गन्ना किसानों के पक्ष में भाकपा की मांग.

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने गन्ने का राज्य समर्थित मूल्य रु.३५०.०० प्रति कुंतल निर्धारित किये जाने तथा चीनी मिलों पर गन्ने के बकाये का भुगतान तत्काल कराने की मांग की है. भाकपा ने निजी चीनी मिलों द्वारा चीनी मिलें न चलाने की धमकी को आपत्तिजनक करार देते हुए उन पर कड़ी कार्यवाही किये जाने की मांग की है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि कृषि की लागत बढ जाने और सूखे के चलते किसानों को गन्ने की कीमत कम से कम रु.३५० प्रति कुंतल मिलना ही चाहिये. राज्य सरकार को जल्द से जल्द इसकी घोषणा करनी चाहिये. साथ ही चीनी मिलों पर गन्ने के बकायों का तत्काल भुगतान कराने को ठोस कदम उठाये जाने चाहिये. यदि निजी चीनी मिलें मिल न चलाने की धमकियाँ देती हैं तो राज्य सरकार को इनका अधिग्रहण कर स्वयं चलाना चाहिये और केंद्र सरकार को इस मद में राज्य को आर्थिक सहायता मुहय्या करानी चाहिये. भाकपा ने चेतावनी दी है कि यदि उपर्युक्त मामले में शीघ्र समुचित कार्यवाही न की गयी तो भाकपा आंदोलनात्मक कदम भी उठा सकती है. डा. गिरीश
»»  read more

रविवार, 7 सितंबर 2014

अमितशाह और आदित्यनाथ को जेल भेजो- भाकपा

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा कि शाह के बयान से स्पष्टतः साबित होगया है कि विकास का भाजपा का नारा ढकोसला मात्र है, और सत्ता हथियाने को वह सांप्रदायिकता को ही कारगर और सबसे अब्बल औजार समझती है. श्री शाह के बयान कि “यदि उत्तर प्रदेश में तनाव बना रहा तभी भाजपा की सरकार बनेगी” की कड़े से कड़े शब्दों में भर्त्सना करते हुये भाकपा, उ. प्र. के सचिव डा.गिरीश ने कहा कि भाजपा एक साम्राज्यवादपरस्त और पूंजीवादपरस्त पार्टी है और इन्हीं तबकों के हितसाधन में जुटी रहती है. इन्ही वर्गों के हितों को पूरा करने को वह सत्ता हासिल करना चाहती है. सत्ता हासिल करने को भले ही वह विकास का राग अलापे उसका मुख्य औजार सांप्रदायिक विभाजन है. इसी उद्देश्य से उसने उत्तर प्रदेश में होरहे उपचुनावों में एक घनघोर सांप्रदायिक चेहरे- योगी आदित्यनाथ को आगे बढ़ाया. अब अमितशाह के बयान से उसके कुत्सित इरादे पूरी तरह सामने आगये हैं. डा. गिरीश ने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया कि इस तरह की बयानबाजियों अथवा कारगुजारियों का न तो निर्वाचन आयोग संज्ञान लेरहा है न राज्य सरकार. भाकपा की स्पष्ट राय है कि उत्तर प्रदेश सरकार को योगी और शाह के खिलाफ माकूल धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें जेल के सींखचों के पीछे भेजना चाहिये. सर्वोच्च न्यायालय ने भी सांप्रदायिकता भडकाने के प्रयासों पर तीखी टिप्पणी करते हुये सांप्रदायिकता को संविधान की मूल आत्मा के विरुध्द बताते हुए इसे फ़ैलाने बढ़ाने वालों को कड़ी फटकार लगाई है. निर्वाचन आयोग को भी इसका संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्यवाही करनी चाहिये. डा.गिरीश
»»  read more

मंगलवार, 2 सितंबर 2014

सूखा राहत के लिए शीघ्र ठोस कदम उठाये राज्य सरकार.

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने राज्य सरकार से मांग कि है कि वह सूखाग्रस्त इलाकों में राहत के कदम फ़ौरन उठायें. भाकपा ने ललितपुर जनपद को भी सूखाग्रस्त जनपद घोषित किये जाने कि मांग कि है. यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि राज्य सरकार ने सूखे से प्रभावित जिलों को चिन्हित करने में पहले ही देरी कर दी है. ललितपुर जिला भी सूखे से पूरी तरह प्रभावित है मगर उसे सूखाग्रस्त घोषित नहीं किया गया है. भाकपा मांग करती है कि राज्य सरकार इस मामले में फौरन ठोस कदम उठाये ताकि राज्य कि खेती किसानी को और अधिक बर्बाद होने से बचाया जासके. डा.गिरीश.
»»  read more

शनिवार, 30 अगस्त 2014

An Apeal to the voters of Uttar Pradesh.

उत्तर प्रदेश विधान सभा के उपचुनावों में प्रदेश के मतदाताओं से भाकपा की अपील आपसी मेल-मिलाप बढ़ाने! महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी पर लगाम लगाने! महिलाओं, कमजोर वर्गों पर अत्याचार रोके जाने तथा अपने विधान सभा क्षेत्र एवं जनपद के समग्र विकास के लिये! हंसिया-बाली के चुनाव निशान के सामने वाला बटन दबायें! भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों को सफल बनायें! उत्तर प्रदेश के मतदाता भाइयो और बहिनो! अभी हाल ही में हुये लोकसभा के चुनावों में आप सभी ने बड़ी ही उम्मीद और आशा के साथ एक पार्टी को भारी बहुमत देकर केन्द्र की गद्दी पर पहुंचाया था. लेकिन इस सरकार को काम करते हुये अभी सौ दिन भी नहीं हुये हैं और इस सरकार से सभी को गहरी निराशा हाथ लगी है. हमारी सीमाओं के पार से तड़-तड़ गोलियां चल रही हैं और सीमाओं के रक्षक हमारे जवान लगातार शहीद होरहे हैं. सत्ता में आने के बाद इस सरकार ने पिछली केन्द्र सरकार की नीतियों को और भी जोर-शोर से लागू किया है और डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस, रेल किराया और मालभाड़े की दरों में भारी बढ़ोत्तरी की है. इससे हर चीज की कीमतें आसमान छूरही हैं और महंगाई की मार से जनता त्राहि-त्राहि कर रही है. भ्रष्टाचार के खिलाफ बड-चड़ कर बातें करने वालों की यह सरकार अपने थोड़े समय के कार्य काल में ही तमाम आरोपों में घिरती जारही है. केन्द्र सरकार के पहले बजट ने ही विकास के इसके दाबों की कलई खोल कर रख दी. बेरोजगार नौजवानों, छात्रों, महिलाओं, किसानों, मजदूरों, दस्तकारों, दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों सभी को इसने निराश किया है. जनता ने भाजपा को इस आशा से वोट दिये थे कि उनके अच्छे दिन आयेंगे, लेकिन आगये बेहद बुरे दिन. यह पार्टी और इसकी सरकार पूरी तरह पूंजीपतियों और कार्पोरेट घरानों के हित में काम कर रही है और आम जनता को तवाह कर रही है. इससे केन्द्र सरकार के प्रति जनता में गुस्सा पैदा होरहा है. जिसका प्रमाण है हाल ही में उत्तराखण्ड, बिहार, कर्नाटक, पंजाब, मध्य प्रदेश के उपचुनाव जहां भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली. अब तो भाजपा की अंतर्कलह भी खुलकर सामने आगयी है. इस सबसे जनता का ध्यान बंटाने और उसे आपस में लड़ाने को भाजपा द्वारा तरह तरह के हथकंडे अपनाये जारहे हैं. सांप्रदायिकता को खास औजार बनाया जारहा है. उत्तर प्रदेश की सरकार ने भी आम जनता को हर मोर्चे पर निराश किया है. हर तरह के अपराध बड रहे हैं. महिलाओं और यहां तक कि अबोध बालिकाओं के साथ दुराचार और उसके बाद उनकी हत्या आम बात होगयी है. हत्या, लूट, राहजनी आदि हर तरह के अपराध बड रहे हैं. सांप्रदायिक दंगों को काबू करने में सरकार की हीला हवाली साफ दिखाई देरही है. एक तिहाई उत्तर प्रदेश को बाढ़ ने तो शेष को भयंकर सूखे ने तवाह कर दिया है. सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है. पीड़ित किसानों ने आत्म हत्याएं करना शुरू कर दीं हैं. अभूतपूर्व बिजली संकट से हर कोई परेशान है. किसानों का चीनी मिलों पर करोड़ों रुपया बकाया है जिसे अदा नहीं कराया जारहा. डीजल आदि खेती के लिये जरूरी चीजों पर राज्य सरकार ने टैक्स बढ़ा दिया है. राशन प्रणाली में लूट मची है. बेरोजगारी से निपटने को कारगर कदम नहीं उठाये जारहे, शिक्षा को व्यापार बना डाला है. शिक्षा बेहद महंगी है अतएव आम बच्चे शिक्षा नहीं लेपारहे. बेकारी भत्ता और लैपटाप आदि भी देना बंद कर दिया गया है. इलाज भी आज बहुत ही महंगा होगया है. सडकों का बुरा हाल है. भ्रष्टाचार ने सभी को तवाह किया हुआ है और गुंडे अपराधी माफिया दलाल सभी खुशहाल हैं. केंद्र और राज्य सरकार को अपने इन कदमों को पीछे खींचने को मजबूर करना होगा. इसके लिये संसद और विधान सभा के भीतर और बाहर संघर्ष करना होगा. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आजादी की लड़ाई से लेकर आज तक किसानों, कामगारों और आम जनता के हित में लगातार आवाज उठाई. है. हमें गर्व है कि हम पर आजतक भ्रष्टाचार का कोई भी आरोप नहीं लगा. सांप्रदायिकता और जातिवाद जैसी बुराइयों से हम कोसों दूर हैं. महंगाई भ्रष्टाचार बेकारी और अशिक्षा को दूर करने को हम जुझारू आन्दोलन करते रहे हैं. जातिगत लैंगिक समानता और आपसी भाईचारे के लिये हम हमेशा प्रतिबद्ध रहे हैं. हमारी समझ है कि देश और समाज की आज की समस्यायों का निदान मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था में संभव नहीं है. आजादी को आये ६७ वर्ष बीत गये और हमारी समस्यायें जस की तस बनी हुयी हैं. इन समस्यायों का समाधान केवल समाजवादी व्यवस्था में ही संभव है और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समाजवादी समाज का निर्माण करने को प्रतिबध्द है. लेकिन ये चुनाव मध्यावधि चुनाव है. केन्द्र अथवा राज्य सरकार बनाने के लिये नहीं. अतएव इन चुनावों में आप भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों को अवश्य ही मौका दे सकते हैं. यदि आपके क्षेत्र से भाकपा प्रत्याशी विजयी होगा तो आपकी समस्याओं के समाधान तथा क्षेत्र के विकास के लिये निश्चय ही वह औरों से अधिक जोरदारी से आवाज बुलंद करेगा. वह हर वक्त आपकी सेवा और सहयोग के लिये आपके बीच रहेगा. अपनी सीमित ताकत और सीमित साधनों के चलते प्रदेश में भाकपा ने केवल चार स्थानों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. वे हैं – नोएडा से प्रोफेसर सदासिव चामर्थी, सिराथू से शिवसिंह यादव, हमीरपुर से श्यामबाबू तिवारी तथा लखनऊ पूर्व से राजपाल यादव. अतएव आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि आप १३ सितंबर को होने जा रहे विधानसभा के उपचुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशियों के चुनाव चिन्ह हंसिया और बाल के सामने वाला बटन दबा कर भारी बहुमत से सफल बनायें तथा भाकपा प्रत्याशियों एवं भाकपा उत्तर प्रदेश इकाई की तन मन धन से मदद करें. निवेदक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश राज्य काउन्सिल २२, कैसरबाग, लखनऊ
»»  read more

बुधवार, 27 अगस्त 2014

उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनावों में भाकपा ने चार प्रत्याशी उतारे.

लखनऊ- १३ सितंबर को होने जारहे उत्तर प्रदेश विधानसभा के उपचुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने चार प्रत्याशी मैदान में उतारे हैं. नोएडा से प्रोफेसर सदासिव चामर्थी, सिराथू से शिवसिंह यादव, हमीरपुर से श्यामबाबू तिवारी उर्फ़ श्यामजी तथा लखनऊ पूर्व से राजपाल यादव भाकपा के प्रत्याशी होंगे. उपर्युक्त जानकारी यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने दी. डा.गिरीश ने सभी वामपंथी दलों, शक्तियों, कर्मचारियों, मजदूरों, किसानों, बुध्दिजीवियों, व्यापारियों, महिलाओं, युवाओं, छात्रों तथा शांति और विकास चाहने वाले सभी नागरिकों से अपील की है कि वे भाकपा प्रत्याशियों को अपना समर्थन और मत प्रदान करें. डा.गिरीश
»»  read more

भाजपा विधायक को 'जेड' सुरक्षा सांप्रदायिकता की राजनीति का महिमामंडन - भाकपा

लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने केंद्र सरकार द्वारा मुज़फ्फरनगर की सांप्रदायिक हिंसा के लिये कुख्यात भाजपा के विधायक संगीत सोम को ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा दिये जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है. भाकपा ने इस फैसले को तत्काल रद्द करने की मांग की है. यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा.गिरीश ने कहाकि सांप्रदायिक हिंसा के दोषी को ‘जेड’ श्रेणी की सुरक्षा देना सांप्रदायिक हिंसा की राजनीति पर मुहर लगाना है. केन्द्र सरकार के इस कदम से यह साबित होगया है कि भाजपा सत्ता में पहुंच कर भी सांप्रदायिकता की नाव पर ही सवार रहना चाहती है, विकास की उसकी गाथा दिखावा मात्र है. केन्द्र सरकार के इस कदम से हिंसक और उपद्रवी तत्वों का मनोबल बढ़ेगा और हिंसा की मार झेल रहे लोगों का मनोबल गिरेगा. डा.गिरीश ने कहाकि प्रधानमन्त्री एक तरफ लाल किले की प्राचीर से दिये अपने भाषण में सांप्रदायिकता को रोके जाने की बात करते हैं वहीं उनकी सरकार और पार्टी सांप्रदायिकता फैलाने और हिंसा भड़काने का कोई मौका नहीं छोड़ती. समय की मांग है कि केन्द्र में सत्तारूढ़ दल सांप्रदायिक नीतियों और कारगुजारियों का परित्याग करे और जनता की खुशहाली और उसके विकास के एजेंडे पर काम करे. डा.गिरीश
»»  read more

मंगलवार, 12 अगस्त 2014

शिक्षा का राष्ट्रीयकरण करो - एआईएसएफ

लखनऊ 12 अगस्त। ”शिक्षा के बाजारीकरण के फलस्वरूप शिक्षा नितान्त महंगी हो गई और उसके स्तर में भारी गिरावट आई है। शिक्षा व्यवस्था में भारी भ्रष्टाचार व्याप्त है और वे परचून की दुकान बन गये हैं। शिक्षा आम विद्यार्थी की पहुंच से बाहर होती जा रही है। गरीब छात्र अपने टैलेन्ट के अनुसार शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रहे हैं और उनके सपने चकनाचूर हो रहे हैं। अतएव आज शिक्षा को गरीब और आम छात्रों के लिए सुलभ बनाने के लिए और उसको रोजगार परक बनाने के लिए शिक्षा का राष्ट्रीयकरण किया जाना जरूरी है।“ यह निष्कर्ष था आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) द्वारा अपने 78वें स्थापना दिवस पर ”शिक्षा का बाजारीकरण और आज का छात्र“ विषय पर आयोजित विचारगोष्ठी का। विचारगोष्ठी का आयोजन एआईएसएफ की लखनऊ इकाई ने किया था।
विचार गोष्ठी में विद्यार्थियों ने शिक्षा पर जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च करने, निजी शिक्षण संस्थाओं का राष्ट्रीयकरण करने, सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने बच्चों को सरकारी एवं अनुदानित स्कूलों में ही पढ़ाने का कानून बनाने जिससे इन विद्यालयों में शिक्षण का स्तर ऊंचा उठ सके, अनुसूचित जातियों-जनजातियों की तरह ही पिछड़ी जातियों एवं अल्पसंख्यक तबकों के विद्यार्थियों से भी दाखिलों के वक्त फीस न वसूल किये जाने, और अब तक ली जा चुकी फीस का रिफंड तत्काल करने तथा सिविल सर्विसेज परीक्षा में सीसैट समाप्त करने की मांगे भी उठाई गयीं।
विचार गोष्ठी में अपने विचार प्रकट करते हुए भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि आज शिक्षा के निजीकरण के परिणामस्वरूप वह बेहद महंगी हो गई है और उसमें व्याप्त भारी भ्रष्टाचार के चलते उसकी गुणवत्ता में भी भारी गिरावट आई है, जिसका सीधा खामियाजा गरीब और आम समाज से आये हुए विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। भूमंडलीकरण की नीतियों ने शिक्षा को सामाजिक लूट के औजार के रूप में विकसित किया है जिसमें संपन्न तबकों के लोग उच्च एवं महंगे शिक्षण संस्थानों में शिक्षा हासिल कर अपनी धन की हविश को पूरा करने का औजार बनाये हुए हैं। आज शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन की जरूरत है ताकि वह गरीब और सामान्य तबकों को समाज में उनका हक दिलाने का औजार बन सके। एआईएसएफ को अपनी कार्यवाहियां इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए संगठित करनी चाहिए।
इस अवसर पर बैंक कर्मियों के नेता प्रदीप तिवारी ने कहा कि एआईएसएफ का जन्म स्वतंत्रता संग्राम के गर्भ से हुआ था लेकिन बाद में तमाम राजनीतिक दलों ने अपने-अपने दलों के छात्र संगठन गठित कर लिये और इस तरह निजी स्वार्थों को पूरा करने के लिए पूरे छात्र आन्दोलन को विघटित कर दिया। भूमंडलीकरण के दौर में शिक्षा संस्थानों में छात्र राजनीति में अराजकता और राज नेताओं की दलाली इन्हीं राजनैतिक ताकतों के द्वारा पैदा की गई। इस कारण उत्तर प्रदेश में छात्र आन्दोलन से छात्रों का मोह भंग सा हो गया। छात्र आन्दोलन की अनुपस्थिति में शिक्षा का बाजारीकरण सभी सरकारों के लिए आसान हो गया और हालात बद से बदतर हो गये।
विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए प्रो. अहमद अब्बास ने छात्रों का आह्वान किया कि वे अपने साथ हो रही तमाम नाइंसाफियों के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करें और इसे व्यवस्था परिवर्तन के संघर्ष से जोड़े। विचार गोष्ठी में विचार व्यक्त करने वाले अन्य वक्ता थे - डा. ए.के.सेठ, डा. बी.जी. वर्मा और मधुराम मधुकर।
गोष्ठी का संचालन एआईएसएफ की लखनऊ इकाई के संयोजक अमरेश चौधरी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक ओंकार नाथ पाण्डेय ने किया। गोष्ठी में विषय पर हुई चर्चा में कु. उजरा अजीम, निकेतन सिंह, सुरेन्द्र यादव, संजय मोहन श्रीवास्तव, कुशेन्द्र सिंह, कु. सुधा पाल, दीपक शर्मा, कु. शालू मौर्या, दुर्गेश, कु. शिवानी मौर्या, मेराज अख्तर, शोभम प्रजापति, निर्मल गौतम, विकास चन्द्राकर और आदित्य मौर्या ने भाग लिया।
गोष्ठी के बाद एआईएसएफ कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार द्वारा लैपटॉप, टैबलेट और कन्या विद्या धन दिये जाने के वायदों को याद दिलाते हुए पोस्ट कार्ड पर मांगें दर्ज कर मुख्यमंत्री को भेजने के अभियान का शुभारम्भ किया।

»»  read more

सोमवार, 28 जुलाई 2014

अलीगढ़ में हुये दलितों के सामूहिक हत्याकाण्ड पर भाकपा ने जारी की जांच रिपोर्ट

लखनऊ 28, जुलाई – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रतिनिधि मंडल ने राज्य सचिव डा. गिरीश के नेत्रत्व में अलीगढ़ जनपद के लोधा थानान्तर्गत वीरमपुर गांव का दौरा किया जहां गत दिनों दलितों की जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश में जुटे दबंगों ने तीन दलितों की दिन दहाड़े हत्या कर दी थी और एक अन्य को गंभीर रूप से घायल कर दिया था. प्रतिनिधिमंडल में पार्टी के जिला सचिव सुहेव शेरवानी, सहसचिव रामबाबू गुप्ता, पूर्व सचिव एहतेशाम बेग, आर.के. महेश्वरी, रनवीर सिंह अरुण कुमार सोलंकी राजकिशोर एवं हरिश्चंद्र लोधी शामिल थे. दौरे के बाद यहाँ जारी एक रिपोर्ट में डा. गिरीश ने कहा कि गांव के जाटव जाति के परिवार को आबंटन में मिली जमीन पर कब्ज़ा करने की नीयत से दबंग सवर्ण परिवार उन्हें वर्षों से प्रताड़ित कर रहा था. इस बीच सरकारें बदलती रहीं मगर पुलिस-प्रशासन पीड़ित पक्ष को ही प्रताड़ित करता रहा. घटना वाले दिन जब ये दलित घर पर आकर दोपहर का खाना खारहे थे लगभग आठ-दस दबंग लोग गंडासे, फरसे तथा दूसरे हथियारों से लैस होकर उनके घर पर चढ़ आये और उनको घसीटते- पीटते खेतों पर लेगए. एक दलित महिला और दो पुरुषों की मौके पर ही मौत होगयी जबकि चौथे घायल का अलीगढ विश्वविद्यालय के मेडिकल कालेज में इलाज चल रहा है. मृतकों में से एक कैलाश की पत्नी ने बताया कि वह दौड़ कर पूरे गांव से मदद की गुहार लगाती रही मगर कोई भी मदद के लिए आगे नहीं आया. गांव की एक बुजुर्ग महिला ने उसे मोबाइल फोन उपलब्ध कराया जिससे उसने 100 नम्बर डायल कर पुलिस को इत्तला दी लेकिन तब तक कातिल खूनी खेल खेल चुके थे. यहां तक कि शवों को जमीन में दबा देने के उद्देश्य से गड्ढे तक खोद चुके थे. घर की बुजुर्ग महिला ने बताया कि जमीन विवाद को सुलझाने को लेकर उसने तहसील से थाने तक बार बार गुहार लगाई मगर हर स्तर पर उसीके परिवार को यातना दी गयी और दबंगों को हर तरह से मदद पहुंचाई गयी. आज भी दबंगों की ओर से लगातार धमकियां मिल रही हैं. अभी तक दो आरोपियों के अलाबा कोई कातिल पकड़ा नहीं गया है. वे गांव के एक सिरे पर स्थिति झोंपड़ों में अपने को बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. उनकी पीड़ा यह है कि कुछ दिनों बाद जब गांव से पुलिस पिकेट हठ जायेगी तो परिवार की सुरक्षा का क्या होगा? भाकपा ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्रित्व काल में शासन प्रशासन दबंगों, अपराधियों और सांप्रदायिक तत्वों के हाथ की कठपुतली बन कर रह गया है और यह तत्व दलितों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों एवं अन्य कमजोरों पर बेखौफ होकर हमलाबर होरहे हैं. असहाय और निरीह जनता इस जंगलराज की यातना झेलने को अभिशप्त है. भाकपा ने निर्णय लिया कि जिला पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र ही अलीगढ़ के जिलाधिकारी से मिल कर पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग करेगा. भाकपा की मांग है कि घटना के सभी दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाये, उनके ऊपर रासुका लगाई जाये, पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआबजा दिया जाये, उन्हें अलीगढ़ अथवा खुर्जा की कांशीराम कालोनी में आवास दिया जाये, घायल का पूरा इलाज कराया जाये, मृतक कैलाश के डेढ़ वर्षीय पुत्र की शिक्षा का जिम्मा राज्य सरकार ले तथा गांव के दलितों के आवासों का निर्माण कराया जाये और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाये. भाकपा ने चेतावनी दी है कि यदि उपर्युक्त के संबंध में जिला प्रशासन ने समुचित कदम नहीं उठाये तो जनपद स्तर पर आन्दोलन तो किया ही जायेगा राज्य स्तर पर भी मामले को उठाया जायेगा. डा. गिरीश
»»  read more

शनिवार, 26 जुलाई 2014

सहारनपुर की घटनाओं पर भाकपा ने चिंता व्यक्त की : राज्य सरकार से कड़ी कार्यवाही की मांग की

लखनऊ २६ जुलाई, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आज सहारनपुर में चल रही हिंसक वारदातों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. भाकपा ने इसे शांति को पलीता लगाने की सांप्रदायिक शक्तियों का दुश्चक्र करार दिया है. भाकपा ने इस बात पर गहरा अफ़सोस जताया है कि अभी भी प्रशासन हालातों पर काबू नहीं पा सका है और हिंसक और उपद्रवी तत्व वहां खुला खेल खेल रहे हैं. हालातों पर अविलम्ब काबू पाया जाना बेहद जरूरी है. यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि सहारनपुर में एक उपसमुदाय का दूसरे समुदाय से वहां एक धर्मस्थल के विस्तार को लेकर पिछले ६-७ साल से विवाद चल रहा था. शासन- प्रशासन मामले को सुलझाने में विफल रहा था. ताजा घटनाक्रम के अनुसार इस बीच उपसमुदाय ने निर्माण कार्य करा लिया था और लिंटर डालने की तैय्यारी चल रही थी. इसी बात को लेकर गत रात दोनों पक्ष आमने सामने आगये वहां हिंसक वारदातें शुरू होगयीं. हिंसा में अब तक दो लोगों की जानें जचुकी हैं. अब सांप्रदायिक तत्व मौके का लाभ उठाने में जुट गये हैं. भगवा ब्रिगेड गली कूचों में अल्पसंख्यकों की सम्पत्तियों को जला रही है, लूट रही है. गरीबों के ठेले खोमचे जला कर राख कर दिए गये. सभी जानते हैं कि आज कांठ को लेकर भाजपा ने पूरे प्रदेश को उपद्रवों की जड़ में लेने की योजना बनाई हुई थी. सहारनपुर की घटना आपरेशन-कांठ का विस्तार है. कल ही उत्तरांचल में हुये उपचुनावों में तीनों सीटें हार चुकी भाजपा खिसियाई बिल्ली की तरह खम्भा नोंच रही है और मोदी सरकार की असफलताओं पर पर्दा डालने को सांप्रदायिक दंगे भड़काने पर उतारू है. भाकपा राज्य सचिव ने समाजवादी पार्टी की राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह ध्रुवीकरण की राजनीति से लाभ उठाने के चक्र से बाहर आये और हिंसक और उपद्रवी तत्व जिस भी समुदाय के हों, उन्हें सख्ती से कुचल दे. भाकपा ने प्रदेश भर की अमन पसंद ताकतों से अपील की है कि वह शांति और भाईचारा बनाये रखने को आगे आयें और प्रदेश को हिंसा की आग में झोंकने के प्रयासों को परवान न चड़ने दें. कल अलीगढ़ पहुंचेगा भाकपा का जांच दल- भाकपा राज्य कार्यालय से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार भाकपा का एक जाँच दल कल- २७ जुलाई को अलीगढ़ जनपद के वीरमपुर गांव जायेगा जहां गत दिनों दबंगों ने एक भूमि विवाद को लेकर तीन दलितों की दिन दहाड़े हत्या कर दी थी. डा. गिरीश
»»  read more

गुरुवार, 24 जुलाई 2014

अलीगढ में दलितों की हत्या की भाकपा ने की निन्दा.

लखनऊ २४ जुलाई. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने अलीगढ़ जनपद के लोधा थाना अंतर्गत वीरमपुर गांव में गांव के ही दबंगों द्वारा तीन दलितों की हत्या और एक अन्य को गंभीर रूप से घायल करने की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की है. भाकपा ने सभी दोषियों को शीघ्र से शीघ्र गिरफ्तार किये जाने और दलित परिवारों को सुरक्षा और न्याय दिलाने की मांग की है. यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राज्य सचिव डा. गिरीश ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार महिलाओं, दलितों एवं अन्य कमजोरों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल है. अलीगढ़ के इन दलितों की जमीन हडपने का षड्यंत्र वर्षों से चल रहा था, मगर पुलिस प्रशासन घटना की गंभीरता से आँख मूंदे रहा और यह जघन्य कांड हो गया. दिन दहाड़े चार पांच दलितों को घर से घसीट कर ले जाना और खेत पर ले जाकर उनकी पीट-पीट कर हत्या करना क्या इस बात का सबूत नहीं है कि उत्तर प्रदेश में जंगलराज कायम हो चुका है. आये दिन महिलाओं के साथ दरिंदगी की वारदातें भी थमने का नाम नहीं लेरही हैं. भाकपा ने मांग की है कि दलितों की हत्या के सभी आरोपियों को शीघ्र से शीघ्र जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाया जाये, पीड़ित दलित परिवार को नियमानुसार मुआवजा दिया जाये तथा पीड़ित परिवार को समुचित सुरक्षा दी जाये. भाकपा ने अपनी अलीगढ़ जिला इकाई को निर्देश दिया है कि वह घटनास्थल पर पहुँच न्याय दिलाने को आवश्यक कदम उठाये. डा. गिरीश
»»  read more
Share |

लोकप्रिय पोस्ट

कुल पेज दृश्य