भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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शनिवार, 7 मई 2022

जंगलराज बना उत्तर प्रदेश


थम नहीं रहीं उत्तर प्रदेश में महिलाओं पर हिसा की वारदातें

सरकार और पुलिस की कार्यवाही प्रचार और आत्मसंतुष्टि तक सीमित: भाकपा

लखनऊ- 7 मई 2022, अपने एक प्रेस वक्तव्य में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा है कि वह इस बात पर भारी चिन्तित है कि जंगलराज बन चुके उत्तर प्रदेश में महिलाएं ही नहीं अबोध बालिकाएं तक सुरक्षित नहीं हैं। उनकी जान और अस्मत के प्यासे कानून व्यवस्था और बाबा के बुलडोजर को ठेंगा दिखा रहे हैं। सरकार द्वारा की जाने वाली कथित कार्यवाही से अखबारों की खबर भले ही बन जाती हो और हुक्मरानों को आत्मसंतुष्टि मिल जाती हो, पर सच यह है कि न तो महिलाओं पर हिंसा रुक पा रही है, और न ही अन्य आपराधिक वारदातें कम हो पा रही हैं।

गत 48 घंटों में ही लखीमपुर में 8 साल की बच्ची को वीभत्स बलात्कार कर लहूलुहान कर दिया गया, गाजियाबाद के होटल में अलीगढ़ की महिला की हत्या कर हत्यारा फरार होगया वहीं मथुरा में पुलिस चौकी से मामूली फासले पर महिला की कुल्हाड़ी से हत्या कर अपराधी गायब होगया। ये चंद उदाहरण हैं जिनसे प्रदेश की जर्जर कानून व्यवस्था और महिलाओं और बच्चियों की असुरक्षा का खुलासा हो जाता है।

भाकपा ने कहा महिला सुरक्षा के उत्तर प्रदेश सरकार के सारे दावे खोखले हैं और प्रदेश में महिलायें बेहद भय और असुरक्षा के माहौल में जी रही हैं। उत्तर प्रदेश महिला फेडरेशन और जनवादी महिला समिति आदि ने शीर्ष पुलिस अधिकारी से मिल कर महिलाओं की सुरक्षा की मांग उठायी है, और सुरक्षा संबंधी कई सुझाव भी दिये हैं, पर सरकार हिलने को तैयार नहीं है। वह उन्हीं कारनामों को अंजाम दे रही है जिनसे प्रचार मिले और विभाजन पैदा हो।

जनमानस इस स्थिति को लंबे समय तक सहन  नहीं कर सकता, और न ही विपक्षी पार्टियां ही। भाकपा ने इन घटनाओं पर स्थानीय तौर पर आवाज उठायी है और हालात नहीं सुधरे तो राज्य स्तर पर आवाज उठायी जायेगी, भाकपा राज्य सचिव मंडल ने अपने बयान में कहा है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश  

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गुरुवार, 5 मई 2022

भाकपा प्रतिनिधिमंडल चंदौली पहुंचा-


पुलिस प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाये: न्यायिक जांच की मांग दोहराई

लखनऊ- 5 मई 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मण्डल के निर्देश पर एक पार्टी का एक राज्य स्तरीय प्रतिनिधिमंडल आज जनपद- चंदौली के थाना- सैयदराजा के अंतर्गत मनराजपुर गांव में पहुंचा जहां पुलिस दबिश के दौरान एक युवती की हत्या होगयी थी और उसकी दूसरी बहिन छात्रा प्रताड़ना के चलते गंभीर रूप से बीमार होगयी थी।

प्रतिनिधिमंडल में भाकपा राज्य काउंसिल के सदस्य का॰ आर॰ के॰ शर्मा, राबर्ट्सगंज लोक सभा क्षेत्र से भाकपा प्रत्याशी रहे का॰ अशोक कनौजिया, राबर्ट्सगंज विधान सभा क्षेत्र से भाकपा के प्रत्याशी रहे छात्र नेता का॰ विजय शंकर यादव एवं भाकपा चंदौली के जिला सचिव का॰ सुखदेव मिश्रा शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश को अपनी विस्त्रत रिपोर्ट प्रेषित की है।

पीड़ित परिवार और ग्रामीणजनों से भेंट और व्यापक चर्चा के उपरान्त अपनी रिपोर्ट में प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि परिवार और ग्रामवासी अभी भी दहशत में जी रहे हैं और उन्हें प्रशासन की कार्यवाहियों पर विश्वास नहीं है। पुलिस मामले की लीपापोती में जुटी है, जिसका जीता जागता उदाहरण यह है कि फोरेंसिक टीम घटना के पांचवें दिन आज मौके पर पहुंची है। ऐसी जगह जहां सैकड़ों स्त्री पुरुष आ जा रहे हैं पाँच दिन बाद कौनसे सबूत बचे रह सकते हैं। उन्हें मजिस्टीरियल जांच पर भी विश्वास नहीं। दोषी पुलिसजनों को जेल जाने से बचाने का षडयंत्र है यह जांच।

समूचे हालातों को ध्यान में रखते हुये भाकपा प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि मामले की जांच उच्च न्यायालय की देखरेख में करायी जाये, दोषी पुलिस जनों को अबिलंब जेल भेजा जाये, पीड़ित परिवार को रुपए 50 लाख हानि की भरपाई हेतु दिये जायें, परिवार के मुखिया पर हुयी पुलिस कार्यवाहियों की समीक्षा कर उन्हें निस्तारित किया जाये तथा ग्रामीणजनों को भयमुक्त किया जाये।

प्रतिनिधिमंडल ने घटना को सरकार की कार्यप्रणाली और इसके तहत प्रदेश के बुलडोजर राज- पुलिसराज में तब्दील होने का परिणाम बताया है तथा घटना की कड़े शब्दों में निन्दा की है।

प्रतिनिधिमंडल ने जारी प्रेस बयान में कहाकि सच तो यह कि राज्य सरकार पुलिस के जरिये भय और आतंक का माहौल बनाए रखना चाहती है ताकि उसकी असफलताओं के विरूध्द लोग उठ खड़े न हों। जो पुलिस जघन्य अपराधों को रोक नहीं पा रही है, सामूहिक बलात्कारों और हत्याकांडों तक के खुलासे कर नहीं पा रही है, तथा खुद ही बलात्कार में लिप्त पायी जा रही है वही पुलिस निर्दोषों लोगों यहां तक कि बेटियों तक की हत्या से बाज नहीं आरही है।

जारी द्वारा-

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

 

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बुधवार, 4 मई 2022

उत्तर प्रदेश: रामराज्य जब ऐसा है तो रावण राज को कोसने का क्या मतलब

 


ललितपुर बलात्कार कांड से आक्रोशित और विचलित है आम जनता: भाकपा

बड़ा सवाल- रक्षक ही भक्षक बने हैं तो न्याय मांगने आखिर कहाँ जायें पीड़िताएं

घटना को लेकर भाकपा की झांसी मंडल की जिला इकाइयां 6 मई को जिला केन्द्रों पर ज्ञापन देंगी

लखनऊ- 4 मई 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने ललितपुर बलात्कार कांड पर गहरी चिंता जताई है। पार्टी ने पीड़िता और उसके परिवार के साथ गहरी सहानुभूति जताई है। जघन्यतम घटना की कड़े से कड़े शब्दों में निन्दा करते हुये सभी दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर रासुका लगाने की मांग की है। साथ ही मांग की है कि सरकार प्रायश्चित के बतौर पीड़िता को रुपये एक करोड़ रुपये तत्काल हस्तांतरित करे।

यहां जारी प्रेस बयान में राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि चंदौली में पुलिस द्वारा घर में घुस कर युवती की हत्या की खबर की स्याही सूखी भी नहीं थी कि यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर ने बलात्कार पीड़िता से ही बलात्कार न केवल मानवता को तार तार कर दिया अपितु संपूर्ण कानून व्यवस्था की शैतानियत और पंगुता को नंगा कर दिया है। पुलिस द्वारा थाने में हुयी इस दिल दहलाने वाली घटना से विचलित जनता सवाल कर रही है कि अब प्रताड़ित महिला और बालिकाएं न्याय पाने को कहां जायें? लोग कह रहे हैं, जो रामराज्य में हो रहा है वह तो रावण राज में भी नहीं हुआ।

भाकपा ने अफसोस जताया कि जब यूपी की कानून- व्यवस्था की हालत और पुलिस ही भय पैदा कर रही है, सूबे के मुख्यमंत्री हिमालय की वादियों में मौज ले रहे हैं। बेईमानों के बगल में बैठ कर लोगों को सद- आचरण के उपदेश दे रहे हैं। भाकपा ने सवाल किया कि बाबा का बुलडोजर दुराचारी और हत्यारी पुलिस के प्रति खामोश क्यों है? भाकपा ने चेतावनी दी कि कानून व्यवस्था के हालातों में तत्काल सुधार न लाया गया सरकार को तीखी जन- कार्यवाहियों से रूबरू होना होगा। भाकपा राज्य सचिव मंडल के आह्वान पर सभी दोषियों की गिरफ्तारी, उन पर रासुका लगाने और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग को लेकर भाकपा की झांसी मंडल की इकाइयां 6 मई को जिला केन्द्रों पर ज्ञापन देंगी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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मंगलवार, 3 मई 2022

पुलिस दबिश के दौरान युवती की हत्या प्रकरण -


बुलडोजरराज- पुलिसराज की देन है चंदौली में दबिश के दौरान युवती की हत्या

भाकपा कड़े शब्दों में भर्त्सना करती है- घटनास्थल पर भेजेगी अपना प्रतिनिधिमंडल

लखनऊ- 3 मई 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मण्डल ने जनपद- चंदौली के थाना- सैयदराजा अंतर्गत मनराजपुर गांव में पुलिस दबिश के दौरान युवती की हत्या को राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और इसके तहत प्रदेश के बुलडोजर राज- पुलिसराज में तब्दील होने का परिणाम बताया है। भाकपा ने घटना की कड़े शब्दों में निन्दा कराते हुये दोषी पुलिसजनों को जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाने की मांग की है।

यहां जारी एक प्रैस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने सवाल किया कि जब वांच्छित यादव युवक को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी थी तो दोबारा और उस समय दबिश देने का क्या औचित्य था, जब घर में सिर्फ दो युवतियाँ ही थीं? युवतियों के साथ गंभीर रूप से मारपीट करके पुलिस आखिर क्या हासिल करना चाहती थी? सच तो यह कि राज्य सरकार पुलिस के जरिये भय और आतंक का माहौल बनाए रखना चाहती है ताकि उसकी असफलताओं के विरूध्द लोग उठ खड़े न हों। जो पुलिस अपराधों को रोक नहीं पा रही है और सामूहिक हत्याकांडों तक के खुलासे कर नहीं पा रही है वही पुलिस निर्दोषों लोगों यहां तक कि बेटियों तक की हत्या से बाज नहीं आरही है।

भाकपा ने आरोप लगाया कि घटना के विरोध में आवाज उठाने वाले ग्रामीणजनों पर आरोप लगा कर पुलिस उनमें दहशत पैदा करना चाहती है ताकि न्याय का गला घौंटा जा सके। अतएव पुलिस के आला अधिकारी ग्रामीणों के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज होने की बात कर रहे हैं। अतएव जरूरी है कि वहाँ के आला पुलिस अधिकारी हटाये जायें और घटना की जांच उच्च न्यायालय की देखरेख में करायी जाये। अन्याय के विरूध्द आवाज उठाने वाले ग्रामीणों को यदि फँसाने की कोशिश की गयी तो भाकपा इसका कड़ा विरोध करेगी।

भाकपा राज्य सचिव मंडल ने घटनास्थल पर पार्टी का प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है ताकि वह जमीनी स्तर पर पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट राज्य केन्द्र को दे सके। प्रतिनिधिमंडल से पीड़ित परिवार से भेंट कर उनका दुख दर्द भी साझा करेगा। प्रतिनिधिमंडल में भाकपा राज्य काउंसिल सदस्य का॰ आरके शर्मा, आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के प्रांतीय सचिव का॰ अजय मुखर्जी एवं अखिल भारतीय नौजवान सभा के नेता और राबर्ट्सगंज विधान सभा क्षेत्र से भाकपा के प्रत्याशी रहे का॰ विजय शंकर यादव आदि प्रमुख रूप से रहेंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 25 अप्रैल 2022

भाकपा उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने इलाहाबाद पहुंच समूहिक हत्याकांड की पड़ताल की


 सुनियोजित लक्ष्यों पर बुलडोजर चला कर भय तो उत्पन्न किया जा सकता है, कानून का राज नहीं: डा॰ गिरीश।

लखनऊ- 25 अप्रैल 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सचिव डा॰ गिरीश के नेत्रत्व में जनपद- इलाहाबाद के थाना- थरवई अंतर्गत ग्राम- खेवराजपुर का दौरा किया जहां गत 16 अप्रैल को एक पशु व्यापारी सहित उसके परिवार के 5 व्यक्तियों की बर्बर तरीके से हत्या कर घर में आग लगा दी गयी थी।

प्रतिनिधिमंडल में डा॰ गिरीश के अतिरिक्त भाकपा राज्य कार्यकारिणी सदस्य का॰ नसीम अंसारी, भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राज्य सचिव का॰ फूलचंद यादव, उत्तर प्रदेश बिजली कर्मचारी संघ के प्रदेश सचिव का॰ जवाहरलाल विश्वकर्मा तथा इलाहाबाद के भाकपा नेता का॰ रामफेर तिवारी आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।

प्रतिनिधिमंडल ने वहां पहुँच कर घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया, परिवार के एकमात्र शेष सदस्य पशु व्यापारी के युवा पुत्र श्री सुनील सिंह यादव से भेंट कर उन्हें ढाढस बंधाया तथा निकट संबंधियों व ग्रामवासियों से घटना के बारे में जानकारी ली।

इलाहाबाद से यहां पहुंचने पर एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि पशु व्यापारी, उनकी पत्नी, दिव्यांग बेटी, गर्भवती बहू और एक साल की बेटी की न्रशंस हत्या और हत्या के पहले की गयी बर्बरता कानून के राज की घनघोर असफलता और राज्य सरकार के माथे पर कलंक का टीका है। भाकपा इसकी कड़े शब्दों में भर्त्सना करती है।

पुलिस और खुफिया तंत्र की इससे बड़ी विफलता क्या हो सकती है कि घटना के 9 दिन बीत जाने के बाद भी अपराधियों को पकड़ना तो दूर हत्यारों का सुराग तक नहीं लगाया जा सका है। इससे पीड़ित परिवार व्यथित, चिंतित और घबराया हुआ है। म्रत व्यापारी के पुत्र सुनील ने कहाकि मेरे परिवार के हत्यारे जल्द से जल्द पकड़े जाने चाहिए और हमें न्याय मिलना चाहिये। एक रिश्तेदार महिला ने कहाकि हम चाहते हैं कि जो हादसा हमारे साथ हुआ है वह किसी अन्य के साथ न हो। इसके लिये जरूरी है कि सभी हत्यारे जल्द से जल्द जेल के सींखचों के पीछे हों।

उपस्थित ग्रामवासियों ने बताया कि जनपद इलाहाबाद में सन 2017 से अब तक 8 परिवार खत्म कर दिये गये हैं जिनमें 34 का कत्ल हुआ है। इन हत्याओं से पहले कई में महिलाओं/ बालिकाओं से दरिंदगी तक हुयी। एक अन्य सामूहिक हत्याकांड तो अप्रैल माह में ही हुआ है। वे कहते हैं कि इन संगीन वारदातों के अपराधियों को पुलिस ने पकड़ा होता तो अपराधियों की हिम्मत एक के बाद एक हत्याकांडों को अंजाम देने की न होती। इन सामूहिक हत्याकांडों के अतिरिक्त जनपद में हर दिन एक दो हत्याएं अथवा संगीन आपराधिक वारदातें हो रहीं हैं।

इन घटनाओं से इलाहाबाद के नागरिक भयभीत हैं। अकारण सी दिखने वाली इन वारदातों ने लोगों को अंदर तक हिला दिया है। पुलिस का नाकारापन और विफलता उन्हें विचलित किए हुये है। यह कानून के राज की विफलता और राज्य सरकार की अक्षमता का प्रतीक है। जो सरकार सुनियोजित लक्ष्यों पर बुलडोजर चला कर वाहवाही और वोट बटोरती है वह प्रदेश के नागरिकों के जीवन की रक्षा करने में असमर्थ है। इलाहाबाद या किसी अन्य जगह का नाम बदलने मात्र से वहां सुशासन कायम नहीं होजाता राज्य सरकार को समझना चाहिए।

भाकपा ने मांग की है कि इस समेत समूचे हत्याकांडों का विश्वास करने योग्य खुलासा जल्द से जल्द किया जाये और अपराधियों को जेल के सींखचों के पीछे भेजा जाये। उत्तर प्रदेश पुलिस के निकम्मेपन और अहमन्यता को देखते हुये जरूरी होगया है कि जांच केंद्रीय एजेंसियों को सौंपी जाये। खेवराजपुर हत्याकांड और आगजनी से विनष्ट परिवार के वारिश सुनील यादव को अपने जीवन को पुनः पटरी पर लाने के लिये रुपये पचास लाख का आर्थिक अनुदान दिया जाये।

भाकपा ने चेतावनी दी कि प्रदेश के लोगों की जिंदगियाँ समाप्त करने के इस खेल को भाकपा मूकदर्शक बन देखती नहीं रहेगी और शीघ्र ही इसके खिलाफ सशक्त आवाज उठायी जाएगी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 18 अप्रैल 2022

Press Note of CPI


उत्सवों की आड़ में की जारही भड़कावे की कारगुजारियाँ पूर्व नियोजित: भाकपा

लखनऊ- 18 अप्रैल 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने इस बात पर गहरी चिन्ता जताई है कि हाल के दिनों में भाजपा और संघ परिवार ने धर्म के नाम पर हिंसा का खुला खेल खेला हुआ है। पांच राज्यों के चुनावों में चार में सत्ता हथियाने के बाद यह सांप्रदायिक तांडव और अधिक भयावह रूप से सामने आया है।

भाकपा ने कहा होली के अतिरिक्त हिन्दू धार्मिक उत्सवों को लोग निजी तौर पर मनाते चले आ रहे हैं। लेकिन इस बार अचानक इन उत्सवों को भीड़ के उत्सवों में बदल दिया गया है। पूर्व नियोजित तरीके से संघ के आनुषांगिक संगठन शस्त्रों, भयावह आवाज वाले ध्वनि विस्तारकों (डीजे) और अवांच्छित नारों के साथ एक समुदाय के धर्मस्थलों के इर्द गिर्द अवांच्छित गतिविधियां कर उकसावे पैदा कर रहे हैं। परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश सहित तमाम जगहों पर आपसी टकराव होते होते बचे हैं तो कई जगह हिंसक झड़पें तक हुयी हैं।

इन भड़काऊ और राजनीति से प्रेरित आयोजनों में आम हिन्दू समुदाय भाग नहीं ले रहा। लेकिन बजरंग दल आदि संगठन सुनियोजित तरीके से इनमें दलित- पिछड़े वर्ग के बेरोजगारों को धर्म की घुट्टी पिला कर उद्वेलित करके ला रहे हैं और उन्हें सांप्रदायिकता के लिए ईंधन के तौर पर स्तेमाल कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन सत्ता के दवाबों में काम कर रहा है और स्थितियों से पेशेवर तरीकों से निपटने में अक्षम पा रहा है। यह जांच का विषय है कि इन आयोजनों में व्यय किया जा रहा भारी मात्रा में धन किन स्रोतों से आ रहा है।

कमरतोड़ महंगाई, सीमाएं लांघ चुकी बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, बलात्कार और अपराधों की बाढ़ और गैर कानूनी प्रशानिक अत्याचारों से आम जन का ध्यान हटाने के उद्देश्य से भी यह सब किया जा रहा है।

शांति की बात करने वालों को शारीरिक रूप से और सोशल मीडिया के जरिये प्रताड़ित किया जा रहा है। कुछेक चेनलों और अखबारों को छोड़ कर अधिकांश मीडिया भी घटनाओं को निष्पक्ष रूप से पेश करने के बजाय समुदाय विशेष को निशाना बना रहा है। यह हालत तब है जब मीडियाकर्मियों को भी फासिस्टी दमनचक्र का निशाना बनाया जा रहा है।

भाकपा ने कहा राजनीतिक उद्देश्यों से समाज को बांटने की इन कोशिशों से सारा देश चिंतित है। देश के 13 राजनैतिक दलों ( उत्तर प्रदेश की दो बड़ी पार्टियां शामिल नहीं ) ने संयुक्त बयान जारी कर अशांति और विभाजन पैदा करने वाली गतिविधियों पर चिन्ता जताई है और आमजन से शांति बनाए रखने की अपील की है।

भाकपा के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने सभी से शांति और भाईचारा बनाने की अपील की है और अपने समस्त कार्यकर्ताओं और इकाइयों से अपील की है कि वे दलितों वंचितों और कमजोरों को शिक्षित कर समरसता बनाये रखने को प्रेरित करें।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा , उत्तर प्रदेश

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रविवार, 3 अप्रैल 2022

भाकपा उत्तर प्रदेश ने प्रतापगढ़ में तहसील लिपिक की हत्या पर गहरा आक्रोश जताया


घटना की सीबीआई जांच और म्रतक परिवार को 50 लाख रु॰ की आर्थिक सहायता देने की मांग की

लखनऊ- 3 अप्रैल 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने जनपद- प्रतापगढ़ की तहसील लालगंज के नकल लिपिक एवं पूर्व नाजिर सुनील कुमार शर्मा की हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है। भाकपा ने हत्या की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की मांग राज्य के मुख्यमंत्री से की है।

सीबीआई जांच इसलिए जरूरी है कि इस हत्या का आरोप उसी तहसील के उप जिलाधिकारी पर लग रहा है। बताया जाता है कि उन्हें प्रतापगढ़ जनपद की राजनीति के धुरंधरों का संरक्षण प्राप्त है, ऐसे में पुलिस अथवा राज्य सरकार की एजेंसियां शायद ही निष्पक्ष जांच कर पायें।

आरोप है कि उक्त अधिकारी और उसके गुर्गों ने लिपिक को 30 मार्च की रात उसके घर के दरवाजे पर इस कदर पीटा कि उसकी हालत चिंताजनक बन गयी। उसका डाक्टरी मुआयना भी अगले दिन तब होसका जब उसने जिला प्रशासन से लिखित गुहार की। इस संबंध में मानवीय आधार पर जिला ट्रेड यूनियन काउंसिल (एटक) जनपद- प्रतापगढ़ के अध्यक्ष एवं भाकपा की राज्य काउंसिल के सदस्य कामरेड हेमन्त नन्दन ओझा ने कई कई बार अधिकारियों से मिल कर और लिखित आवेदन कर शर्मा की जान बचाये जाने की मांग की।

बताया जाता है कि चिकित्सकीय परीक्षण में गंभीर चोटों के सामने आने के बाद उक्त अधिकारी ने लिपिक को अपने कब्जे में लेलिया। इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती होने से रोका और लालगंज ट्रामा सेंटर में इसलिए बाधित रखा कि मामले का भंडाफोड़ न होजाये। हेमन्त नन्दन ओझा के प्रयास और जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से उसे जिला अस्पताल लाया गया। लेकिन तब तक उसकी हालत को और भी बिगाड़ दिया गया था। अस्पताल में भी त्वरित और समुचित उपचार नहीं मिल पाने से अंततः 2 अप्रैल की देर शाम उसकी म्रत्यु होगयी और उसके छोटे छोटे 3 बच्चे अनाथ हो गए।

बताया जारहा है कि 31 मार्च से 2 अप्रैल के बीच उप जिलाधिकारी एवं उसके पोषित गुंडों ने श्री शर्मा से किन्हीं कागजातों/ स्टांप पेपर्स पर दस्तखत भी करा लिये हैं। रामराज्य में रक्षक ही भक्षक बन गये हैं। ऐसी क्या वजह थी कि 30 मार्च से 2 अप्रैल के बीच पूरे 72 घंटों तक एक अदने से कर्मचारी को सत्ता मद में चूर अधिकारी के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया।

इसलिए जांच के दायरे में उप जिलाधिकारी, जिला प्रशासन और पुलिस, ट्रामा सेंटर और अस्पताल सभी आते हैं। इन अति ताकतवर लोगों की जांच राज्य से ऊपर की एजेंसी ही कर सकती है इसलिए भाकपा सीबीआई जांच की मांग कर रही है।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने सवाल किया कि क्या माननीय मुख्यमंत्री जी का बुलडोजर एक कर्मचारी की न्रशंस हत्या करने वालों पर भी चलेगा या फिर वह वोट बटोरने का हथकंडा ही बना रहेगा।

भाकपा ने म्रतक के अनाथ बच्चों के भरणपोषण और शिक्षा के लिये रुपए 50 लाख की सहायता प्रदान करने की मांग भी की है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

 

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शनिवार, 2 अप्रैल 2022

महापंडित राहुल सांक्रत्यायन एवं डा॰ भीमराव अंबेडकर के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में

 

भाकपा का “सामाजिक न्याय एवं समरसता सप्ताह”- 9 से 14 अप्रैल- 2022 के बीच।

-:विचार हेतु विषय:-  

“समाजवादी व्यवस्था के निर्माण में सामाजिक न्याय एवं समरसता की भूमिका”

(भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने प्रख्यात लेखक, घुमक्कड़, स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी और समाजवाद के संघर्ष के अप्रतिम योध्दा महापंडित राहुल सांक्रत्यायन के जन्मदिवस 9 अप्रेल से सामाजिक न्याय और दलित चेतना के अग्रदूत डा॰ भीमराव अंबेडकर के जन्मदिवस 14 अप्रैल के बीच सामाजिक न्याय एवं समरसता सप्ताह आयोजित करने तथा  “समाजवादी व्यवस्था के निर्माण में सामाजिक न्याय एवं समरसता की भूमिका” विषय पर विचार गोष्ठियां आयोजित करने का निश्चय किया है। प्रस्तुत आधार नोट इसी उद्देश्य से आपके उपयोग हेतु तैयार किया गया है।)

-डा॰ गिरीश।

 

हाल के वर्षों में सामाजिक न्याय के आंदोलन और सामाजिक समरसता (आपसी भाईचारे) के उद्देश्य को भारी झटके लगे हैं। सत्ता और सत्ता प्राप्ति हेतु की जाने वाली राजनीति ने दोनों मिशनों को अपनी जरूरतों के हिसाब से रौंदा है। आजादी के बाद से हमने जो कुछ हासिल किया है उसको पलटने का क्रम प्रारंभ होचुका है और अब उसे मिटाने की तैयारी है। सबकुछ ऐसे ही चलने दिया गया तो दोनों ही आन्दोलन शब्दकोश में दर्ज शब्द मात्र रह जायेंगे।

सत्ताधारियों और वोट के अखाड़ेबाजों ने सामाजिक न्याय की अवधारणा को पहले आरक्षण के दायरे में समेटने का प्रयास किया। ऐतिहासक परिप्रेक्ष्य में विभिन्न वजहों से सामाजिक सान्स्क्रतिक और आर्थिक क्षेत्रों में पिछड़ चुके लोगों के लिये आरक्षण एक संवैधानिक उपचार है, मगर वह सामाजिक न्याय की जगह नहीं ले सकता।

पूंजीवादी राजनीति के खिलाड़ियों ने सामाजिक न्याय को सोशल इंजीनियरिंग के नाम पर जातीय गोलबंदी  में बदल दिया है। कांग्रेस शुरू से ही लुक छिप कर यह खेल खेलती रही और निर्वाचन क्षेत्रों में बहुसंख्य जातियों से जुड़े उम्मीदवार उतारती रही। सुविधाजनक तरीके से कांग्रेस को मैदान से हटाने का पहला प्रयोग राम मनोहर लोहिया ने किया और पिछड़े पावें सौ में साठ का नारा दिया। वहीं चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस से अलग होकर अजगर- (अहीर, जाट, गूजर और राजपूत) का जातीय गठबंधन खड़ा कर सत्ता हासिल की तो माननीय कांशीराम जी ने एक कदम और आगे बढ़ कर जिसकी जितनी संख्या भारी, उतनी उसकी साझेदारी, का नारा देकर जातीय गोलबंदी का नया प्रयोग किया। दक्षिणी राज्यों में कुछ भिन्न तरीकों से ये प्रयोग होते रहे हैं।

ऐसे ही कुछ प्रयोगों से सत्तारूढ़ हुयी क्षेत्रीय पार्टियों को केवल सांप्रदायिक विभाजन के बल पर सत्ता से हटाने में विफल रही भारतीय जनता पार्टी ने उपर्युक्त सभी प्रयोगों का काकटेल बना डाला और उसको नाम दिया- सोशल इंजीनियरिंग। चुनाव क्षेत्रों में अधिक वोट बैंक वाली जातियों को टिकिट देकर अपने आधार वोट बैंक के सहारे जीत हासिल कर सत्ता हड़पने का प्रयोग ही भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग है। क्षेत्रीय पार्टियां भी अपने अपने तरीकों से यह प्रयोग करती रही हैं। सोशल इंजीनियरिंग के इस प्रयोग ने सामाजिक न्याय के उद्देश्य को बहुत पीछे धकेल दिया है।

वास्तव में सामाजिक न्याय मानव समाज के विकास की वह मंजिल है जिसमें पर्याप्त और संतुलित भोजन, जरूरी आवश्यकताओं से युक्त स्वच्छ और हवादार आवास, प्राथमिक से लेकर विशिष्ट उपचार की सस्ती और सुलभ चिकित्साप्रणाली, सभी को समान और शुल्क रहित संपूर्ण शिक्षा, सुलभ और व्यापक परिवहन, जान और सम्मान की रक्षक शासन प्रणाली एवं न्याय प्रणाली तक प्रत्येक  नागरिक की पहुंच हो। इन सबको हासिल करने को संरक्षित और समुचित आय देने वाला रोजगार जरूरी है, अतएव सभी को रोजगार सामाजिक न्याय की पूर्व शर्त है।

लेकिन आज सबकुछ इसके ठीक उलट होरहा है। रोजगार के अवसर और रोजगार दोनों ही घट रहे हैं। सरकार की नीतियाँ मुट्ठी भर कार्पोरेटों को लाभ पहुंचाने वाली और शेष को कंगाल बनाने वाली हैं। इससे गरीबों और अमीरों के बीच की खाई निरंतर गहरी होरही है। तमाम अध्ययन इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। गत बजट के समय फरबरी माह में आये प्राइस सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि 2015- 16 की तुलना में 2020- 21 में सबसे गरीब 20 फीसदी आबादी की आमदनी 50 फीसदी तक गिर गयी, जबकि इसी दौरान सबसे धनाढ्य 20 फीसदी आबादी की आमदनी में 30 फीसदी का इजाफा हुआ। यह अनेक आंकड़ों में से एक आंकड़ा है। और ऐसे तमाम घटनाक्रम सामाजिक न्याय के लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी बाधा हैं।

गरीबों को मुफ्त राशन, किसान सम्मान निधि या ऐसे अन्य प्रोत्साहन पैकेज सामाजिक न्याय का पर्याय नहीं हो सकते। अपितु उनको सरकार द्वारा बार बार आगे बढ़ाया जाना गरीबी और तंगहाली के न केवल बने रहने अपितु उनके पैर पसारने के प्रमाण हैं। दूसरी ओर ये शासक दलों के लिये सत्ता प्राप्ति के हथकंडे भी हैं।

सामाजिक न्याय की भांति ही सामाजिक समरसता(भाईचारे) की अवधारणा को रौंदा जाता रहा है। आपसी एकता और भाईचारा ही वह मंत्र है जिसकी बुनियाद पर भविष्य की तरक्की के स्तंभ खड़े होते हैं। लेकिन अंग्रेजों की बांटो और राज करो की नीति को परवान चढ़ाने को उनके भारतीय पिट्ठूओं ने हिन्दू- मुस्लिम विभाजन गहरा करने को हिन्दू महासभा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की। इसका उद्देश्य महात्मा गांधी के साम्राज्यवादविरोधी आंदोलन और कम्युनिस्टों के साम्राज्यवादविरोधी और मेहनतकशों का राज कायम करने के ध्येय की राह में रोड़े अटकाना था।  आजाद भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाए जाने की इनकी मांग की प्रतिक्रियास्वरूप अलग मुस्लिम राष्ट्र की मुस्लिम लीग की मांग ने अंततः विभाजन को जन्म दिया। यह विभाजन हिन्दू कट्टरपंथियों के लिए आजाद भारत में अपनी विभाजनकारी कारगुजारियों को आगे बढ़ाने का सुगठित आधार बना।

संघी कट्टरपंथियों द्वारा की गयी गांधीजी की हत्या ने कुछ समय के लिए संप्रदायवादियों के रथ के पहिये थाम दिये थे। लेकिन बाद में उनके द्वारा उठाए गए अनेकानेक मुद्दों से सांप्रदायिक विभाजन तीव्र हुआ और देश अनेकों हिंसक सांप्रदायिक दंगों से रूबरू हुआ। गत शताब्दी के आखिरी तीन दशकों में अयोध्या, मथुरा, काशी, कश्मीर और कामन सिविल कोड जैसे मुद्दों ने सामाजिक विभाजन का जो तूफान खड़ा किया उससे भाजपा न केवल तमाम राज्यों और केन्द्र की सत्ता तक पहुंची अपितु वह दुनियाँ की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने लगी। अब यह विभाजनकारी एजेंडा शासन- सत्ता के जरिये  भी आगे बढ़ाया जारहा है। आज संप्रदायवाद फ़ासिज़्म की दूसरी मंजिल पाने को अंगड़ाई ले रहा है।

सांप्रदायिकता सामाजिक विभाजन का औज़ार तो है ही यह शोषक शक्तियों के खिलाफ शोषितों की एकता को खंडित करती है। कारपोरेट्स और पूंजीपतियों द्वारा मजदूर- किसानों के वर्गीय संघर्षों को बाँट कर उन्हें कमजोर करने का का काम करती है। आमजन की चेतना से महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अत्याचार आदि को हठा कर उसके स्थान पर खतरनाक उद्देश्यों वाली हिन्दुत्व, इस्लामिक अथवा धर्म की आड़ में पनपने वाली अन्य चेतनाओं को बैठाती है। सर्वधर्म समभाव के भाव को कमजोर कर एक धर्म के अनुयायियों में दूसरे धर्म के अनुयायियों के प्रति नफरत के बीज बोती है। एक धर्म के अनुयाइयों को दूसरे धर्म के अनुयाइयों से श्रेष्ठ साबित कर वह कथित श्रेष्ठवर्ग को अश्रेष्ठ पर दमन और शासन करने को उकसाती है। अंततः सर्वहारा के उदार मूल्यों वाले अंतर्राष्ट्रीयतावाद को अपदस्थ कर बहुमत समुदाय के संकीर्ण राष्ट्रवाद को पनपाती है।

विभाजन की यह राजनीति जरूरी नहीं कि हमेशा बड़े मुद्दों पर ही परवान चढ़े। छोटे मोटे मुद्दे उठा कर इसकी निरंतरता को बरकरार रखा जाता है। हाल के दिनों में ऐसे कई प्रयोग हुये हैं। तीन तलाक, लव जेहाद और हिजाब विवाद उसी श्रेणी में आते हैं। अभी बहुत दिन नहीं हुये जब कर्नाटक के उडुपी जिले में आयोजित सालाना कौप मरीगुड़ी उत्सव में गैर हिन्दू वैंडरों को मंदिर परिसर के आसपास कारोबार न करने देने की मांग उठी थी जो अब कई जिलों तक फैल गयी है। इसी बीच केरल से खबर आयी कि कन्नूर जिले के कुछ मंदिरों के प्रबंधतन्त्र ने विख्यात पूराक्कली- मराथुकली कलाकार विनोद पणिकर की मन्दिर समारोहों में कला- प्रस्तुति पर कथित तौर पर रोक लगा दी है। बताया जाता है कि पणिकर के बेटे ने मुस्लिम लड़की से शादी की है, इसीलिए उन पर यह रोक लगाई गयी है। उत्तर प्रदेश में तो जीवित अथवा म्रत पशुधन को व्यापारिक उद्देश्यों से ले जारहे मुस्लिम व्यापारियों को आए दिन हिंसक हमलों का शिकार बनना पड़ता है। गत वर्षों में इसी तरह की उन्मादी भीड़ के हमलों में पुलिस इंस्पेक्टर सुबोध सिंह की न्रशंस हत्या हो चुकी है।

इस बीच झटका मीट और नवरात्र के दिनों में मीट का कारोबार रोकने के मसले अल्पसंख्यकों के विभाजन की राजनीति को हवा देने और अल्पसंख्यकों के व्यापार पर चोट करने की गरज से संघ परिवार द्वारा उठाए जा रहे हैं। लेकिन यह कट्टरता दूसरी ओर भी दिखाई देती है। रमजान के दिनों में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) परिसर के आसपास के बाज़ारों के दिन में खुलने पर रोक लगा दी जाती है। इससे अल्पसंख्यकों- बहुसंख्यकों का व्यापार तो प्रभावित होता ही है, गैर रोजेदार दिन में दाने दाने को तरस जाते हैं। यदि यह अलीगढ़ में होता है तो अन्य कई जगह होता ही होगा।

दरअसल, हमारे सामाजिक जीवन में विद्वेष की राजनीति की घुसपैठ लगातार बढ़ती जारही है और इसके कारण कई तरह की विसंगतियां देखने को मिल रही हैं। अब तक तो उत्तर भारतीय राज्यों में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण या जातीय गोलबंदी के कारण अनेक समस्याएं पैदा होती रही हैं और यह उनके पिछड़ेपन की बड़ी वजह भी हैं। लेकिन संघ की वैचारिक विस्तार की कारगुजारियों के चलते इस तरह की प्रव्रत्तियाँ अब केरल जैसे राज्य में भी बढ़ने लगी हैं, जहां तरक्कीपसंद ताक़तें पर्याप्त दमदार हैं।

इसमें दो राय नहीं कि दक्षिण के राज्यों में उत्तर के मुक़ाबले सामाजिक समावेशीकरण कहीं बेहतर हुआ है और इन्हें उसका फायदा भी खूब मिला है। यह भी एक सुस्थापित तथ्य है कि कलहप्रिय समाज कभी तरक्की नहीं कर सकता। अतएव राज्य और केन्द्र सरकारों का दायित्व यह है कि वे सामाजिक तानेबाने को बिगाड़ने की कोशिशों से सख्ती से निपटें। परन्तु ठीक इसके विपरीत होरहा है। आज तो भाजपा की केन्द्र और राज्य सरकारें और समूचा संघ परिवार स्वयं ही सामाजिक तानेबाने को तहस नहस करने में जुटा है। जनजाग्रति और जनता के जीवन से जुड़े सवालों पर आंदोलन ही इसकी काट हो सकते हैं।

भारत के सामने गरीबी, बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, पेयजल और पर्यावरण के मोर्चे पर पहले से गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। महामारी ने उन्हें और विकराल बना दिया है। जिनसे निपटना राज्यतंत्र की प्राथमिकता होनी चाहिये और राजनैतिक दलों की भी।   

अतएव सांप्रदायिकता का निषेध समरसता है- आपसी भाईचारा है। इसे हासिल करके ही हम देश और जनता को प्रगति के रास्ते पर ले जा सकते हैं। समरसता के वातावरण में ही सामाजिक न्याय का संघर्ष आगे बढ़ सकता है। और समाजवाद के लक्ष्य को तभी हासिल किया जा सकता है जब समरसता और सामाजिक न्याय का रथ आगे बड़े। श्रमिकों, किसानों और मेहनतकशों के अन्य हिस्सों द्वारा किए जा रहे सतत संघर्ष इस लक्ष्य तक पहुँचने में मददगार हो सकते हैं।

डा॰ भीमराव अंबेडकर और महापंडित राहुल सांक्रत्यायन दोनों ही महापुरुषों ने अपने अपने ढंग से सामाजिक न्याय और समरसता की जरूरत पर बल दिया है। अतएव उनके कार्यों, विचारों एवं योगदान की अलग से चर्चा की जानी चाहिए।  

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश    

  

 

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सोमवार, 28 मार्च 2022

भाकपा, उत्तर प्रदेश की राज्य काउंसिल की दो दिवसीय बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये


भाजपा सरकार के जनविरोधी कार्यों और कुटिल चालों के खिलाफ अभियान जारी रखेगी भाकपा

लखनऊ- 28 मार्च, 2022- यहां संपन्न भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य काउंसिल की दो दिवसीय बैठक में अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनैतिक, आर्थिक एवं सामाजिक स्थितियों पर चर्चा हुयी, उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव परिणामों की गहन समीक्षा की गयी और निकट भविष्य के सांगठानिक एवं सामाजिक अभियानों की रूपरेखा तैयार की गयी।

भाकपा राज्य काउंसिल का निष्कर्ष है कि चुनाव परिणामों के आने के बाद से सत्ता, सत्ताधारियों और उनके संरक्षित प्रभुत्व वर्ग ने आम जन और कमजोर तबकों पर तीखे हमले बोल दिये हैं; और आगामी दिनों में ये हमले और तेज हो सकते हैं। यह भी नोटिस लिया गया कि सरकार ने गरीबों के लिये मुफ्त खाद्यान्न देने की योजना को आगे बढ़ा कर यह मान लिया है कि वह अपने शासन के सात साल में गरीबों को गरीबी से उबारने में असमर्थ रही है और आगे भी गरीबी हटाने के लिये उसके पास कोई ठोस नीति या कार्यक्रम नहीं है। स्पष्ट है कि गरीबी हटाने के बजाय वह इस खैरात के जरिये गरीबों को अपना वोट बैंक बनाए रखना चाहती है। भाजपा सरकार के जन विरोधी क्रत्यों और कुटिल चालों को उजागर करते हुये भाकपा अपना अभियान जारी रखेगी।

उत्तर प्रदेश चुनाव परिणामों के बारे में भाकपा का मत है कि विपक्ष के विखराब, भाजपा को ज्वलंत मुद्दों पर घेरने के बजाय जातीय और सांप्रदायिक गोलबंदी आधारित उसका चुनाव अभियान, किसान आंदोलन की ताकतों खास कर वामपंथी ताकतों को भाजपा विरोधी गोलबंदी से बाहर रखना तथा विपक्षी नेत्रत्व की भयग्रस्तता और बोनापन आदि के चलते जनता की तमाम नाराजगी के बावजूद भाजपा गठबंधन परिपूर्ण बहुमत हासिल करने में कामयाब रहा। सत्ताबल, धनबल और माफियातन्त्र का भी भाजपा ने भरपूर दोहन किया। दो गठबंधनों के बीच हुये तीव्र ध्रुवीकरण से दोनों गठबंधनों को तो लाभ मिला, लेकिन बहुमत जनता जो भाजपा को हराना चाहती थी, अपने को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

भाकपा ने धन के अभाव के बावजूद पूरे मनोबल के साथ 35 सीटों पर चुनाव लड़ा, और हर स्तर पर भाजपा की नीतियों और कारनामों का पर्दाफाश किया। आगे भी भाकपा मुद्दों पर आधारित आंदोलन और संघर्षों के बल पर अपना चुनावी अभियान जारी रखेगी और आगामी नगर निकाय चुनावों में व्यापक तौर पर साथ देगी।

भाकपा राज्य काउंसिल ने महापंडित राहुल सांक्रत्यायनके जन्मदिन 9 अप्रेल और डा॰ भीमराव अंबेडकर के जन्मदिवस 14 अप्रेल को व्यापक पैमाने पर मनाने का निश्चय किया है और 9 अप्रेल से 14 अप्रेल के बीच “सामाजिक न्याय की गारंटी समाजवादी व्यवस्था में ही संभव” विषय पर विचार गोष्ठियाँ, सभाएं एवं समारोह आयोजित किए जाएँगे।

अपने सांगठानिक ढांचे को नीचे से शुरू कर ऊपर तक चुस्त दुरुस्त और व्यापक बनाने को भाकपा आगामी माहों में ब्रांचों से लेकर जिलों के सम्मेलन आयोजित करेगी। उसके बाद सितंबर माह में राज्य सम्मेलन आयोजित किया जायेगा। विधान सभा चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों और युवा कार्यकर्ताओं के लिये एक प्रशिक्षण शिविर भी शीघ्र लगाया जाएगा।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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रविवार, 9 जनवरी 2022

किसानों को राहत


बेमौसम बारिश और ओलों से हुयी फसल हानि की भरपाई करायी जाये: भाकपा
लखनऊ- 9 जनबरी 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मण्डल ने कहाकि बेमौसम की बारिश और ओलों से उत्तर प्रदेश में फसलों को भारी क्षति पहुंची है और पहले से ही विपन्न आर्थिक हालातों से जूझ रहे किसान देवालियापन के कगार पर आ खड़े हुये हैं। चुनावी शोर में किसानों की हानि राजनीति की आँखों से ओझल हो गयी है।
यहाँ जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव मण्डल ने कहाकि यूं तो बेमौसम बारिश का असर समूचे उत्तर प्रदेश में है लेकिन बुंदेलखंड और प्रदेश के कुछ अन्य भागों में हुयी भारी ओलाव्रष्टि ने किसानों को तवाह करके रख दिया है। इस हानि की भरपाई जरूरी है।
भाकपा ने निर्वाचन आयोग से मांग की कि वह गैर राजनेतिक संस्थाओं के जरिये किसानों की हानि की भरपाई कराने की व्यवस्था करे ताकि पीड़ित किसानों के दुखों को कम किया जा  सके।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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शुक्रवार, 7 जनवरी 2022

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022

#भाकपा ( सीपीआई ) नेताओं की विपक्षी नेता से भेंट संबंधी मीडिया खबरों पर भाकपा ने खंडन जारी किया
#उत्तर प्रदेश में भाकपा प्रत्याशियों की पहली सूची शीघ्र।

लखनऊ- 7 जनबरी 2022, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( CPI ) के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने मीडिया के कतिपय हिस्सों में प्रकाशित उस खबर का खंडन किया है जिसमें कहा गया है कि भाकपा ( CPI ) के केन्द्रीय और राज्य के नेताओं ने एक दल के नेता से भेंट की और उनसे कहाकि उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में उस नेता विशेष के नेत्रत्व में ही लोकतन्त्र सशक्त रह सकता है और वे ( नेता विशेष ) और उनकी सोच ही सांप्रदायिक और अधिनायकशाही ताकतों को ध्वस्त कर सकती है।
यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा ( सीपीआई ) राज्य सचिव मंडल ने कहाकि मीडिया ने जिस रूप में यह खबर प्रकाशित की है उससे भाकपा की कतारों, उसके शुभचिंतकों और अन्य राजनैतिक हल्कों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुयी है, अतएव भाकपा स्पष्ट करना चाहती है कि उसके किसी केन्द्रीय अथवा राज्य के नेता ने इस दरम्यान उत्तर प्रदेश के चुनावों को लेकर किसी गैर- वामपंथी दल के नेता से कोई भेंट नहीं की है। फिर उत्तर प्रदेश के चुनावी परिद्रश्य पर चर्चा और किसीको सर्टिफिकेट थमाने का प्रश्न कहां उठता है?
उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनावों संबंधी रणनीति के बारे में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहाकि वह बार बार कहता रहा है कि घोर जनविरोधी, अलोकतांत्रिक, सांप्रदायिक और फासीवाद की ओर बढ़ रही भाजपा और उसके नेत्रत्व में चल रहे एनडीए को उत्तर प्रदेश में शिकस्त देना बेहद जरूरी है। परन्तु यह कठिन लक्ष्य किसानों कामगारों और शोषित पीड़ित जनता के जीवन को संकट में डालने वाले मुद्दों पर सोद्देश्य आंदोलनों तथा वामपंथी, धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतान्त्रिक शक्तियों की व्यापक और कार्यक्रम आधारित एकता से ही हासिल किया जा सकता है। 
यद्यपि ऐसी एकता स्वरूप ग्रहण नहीं कर पायी है, फिर भी भाकपा ऐसी एकता के लिए निरंतर प्रयास करती रही है और करती रहेगी, भाकपा राज्य सचिव मंडल ने ज़ोर देकर कहा है। 
गत दिन लखनऊ में संपन्न भाकपा राज्य कार्यकारिणी बैठक में उत्तर प्रदेश में समान विचारधारा वाले दलों के साथ मिल कर लगभग 60 विधान सभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला लिया गया है।
इन दलों से बात कर भाकपा प्रत्याशियों की पहली सूची शीघ्र जारी की जायेगी।
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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बुधवार, 29 दिसंबर 2021

नीट काउंसिलिंग

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मंगलवार, 28 दिसंबर 2021

विधानसभा चुनाव फौरन घोषित हों

#लखनऊ पहुंची निर्वाचन आयोग की टीम से से भाकपा ने की मांग 
#शासक दल द्वारा चुनावी उद्देश्य से सरकारी मशीनरी और धन का दुरुपयोग रोकें
#चुनाव प्रक्रिया तत्काल शुरू करने और आदर्श आचार संहिता फौरन लागू करने की मांग की।
लखनऊ- 28 दिसंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश की राज्य काउंसिल की ओर से आज पार्टी के कोषाध्यक्ष एवं राज्य कार्यकारिणी के सदस्य कामरेड प्रदीप तिवारी ने आज मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री सुशील चन्द्रा के नेत्रत्व लखनऊ पहुंचे भारत निर्वाचन आयुक्तों से भेंट की और उन्हें 2022 में होने जारहे विधान सभा चुनावों के संबंध में पार्टी का प्रतिवेदन सौंपा और चर्चा में भाग लिया।
भाकपा प्रतिवेदन में मजबूती से कहा गया है की शासक दल द्वारा चुनाव अभियान के लिए सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को रोके जाने के लिए तत्काल विधान सभा चुनावों की घोषणा की जाये और आदर्श आचार संहिता अविलंब लागू की जाये। 
भाकपा के प्रतिवेदन में कहा गया है कि देश के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश की विधानसभा के चुनाव सन- 2022 के प्रारंभ में अपेक्षित हैं। ये चुनाव स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत हों, निर्वाचन आयोग से ऐसी अपेक्षा है।
चुनावों में शासक दल लाभ उठाने की कोशिश करते रहे हैं, यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है। लेकिन वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी केन्द्र और उत्तर प्रदेश दोनों ही जगह सत्ता में है, अतएव वह चुनावों में अधिकाधिक लाभ उठाने की स्थिति में है।
प्रतिवेदन में आरोप लगाया गया है कि भाजपा ने नैतिकता की सारी सीमाएं लांघते हुये पिछले कई माह से शासन तंत्र और राजकीय कोश का उपयोग चुनावी तैयारियों के लिए शुरू कर दिया है। वास्तविक और कल्पित योजनाओं के शिलान्यास, उद्घाटन और लोकार्पण के नाम पर बड़े बड़े और बेहद ख़र्चीले सरकारी कार्यक्रम आयोजित किए जारहे हैं जिनमें स्वयं प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं अन्य मंत्रीगण चुनावी भाषण कर रहे हैं।
इन्हीं महानुभावों द्वारा संविधान, कानून और मर्यादाओं को ताक पर रख कर धार्मिक स्थलों और आयोजनों को सांप्रदायिक विभाजन और वोट की राजनीति के लिये प्रयोग किया जारहा है। वोटर्लिस्ट्स से विपक्ष समर्थक मतदाताओं के नामों को गायब करने की कोशिशों की खबरें भी लगातार मिल रही हैं।
कोविड प्रोटोकाल का उल्लंघन कर शासकदल और सरकारी कार्यक्रम धड़ल्ले से जारी हैं, जबकि विपक्ष के कार्यक्रमों पर अनावश्यक पाबन्दियाँ थोपी जारही हैं। विपक्ष को नैतिक रूप से कमजोर करने को आयकर विभाग, सीबीआई तथा ईडी जैसी संस्थाओं का राजनैतिक दुरुपयोग किया जारहा है। विपक्ष समर्थक तमाम लोगों को फर्जी मुकदमों में फंसाया जारहा है।
केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा सार्वजनिक धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर प्रचार माध्यमों को जो विज्ञापन दिये जा रहे हैं उनकी विषय वस्तु आपत्तिजनक है। ये विज्ञापन भाजपा के प्रचार- प्रसार और विपक्ष को कमजोर करने के उद्देश्य से जारी किए जारहे हैं। अधिकतर प्रचार माध्यम भाजपा का भौंपू बन चुके हैं। चुनाव को निकट आते देख सरकारी धन से तमाम खैरातें बांट कर मतदाताओं को प्रभावित किया जारहा है। 
आशंका व्यक्त की जारही है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान भी भाजपा शासकीय मशीनरी और सरकारी राजस्व का दुरुपयोग करेगी। भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और सत्ताबल से अर्जित धन के बल पर तमाम असामाजिक तत्वों को स्तेमाल कर चुनावों में धांधली करायेगी। ईवीएम मशीनों के दुरुपयोग की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जासकता।
इन तमाम हथकंडों के बावजूद सरकारों की जनविरोधी नीतियों के कारण भाजपा को हार का भय सता रहा है। अतएव वह चुनावों को आगे बड़ाना चाहती है। इसके लिये वह कोविड के फैलाव का बहाना बना सकती है।
प्रतिवेदन में चुनाव की प्रक्रिया तत्काल शुरू करने और आदर्श आचार संहिता को फौरन लागू करने की मांग की गयी है ताकि भाजपा द्वारा सरकारी तंत्र के दुरुपयोग पर कानूनी लगाम कसी जासके।  
भाकपा ने मांग की कि राजनैतिक उद्देश्य के लिये भाजपा सरकार द्वारा सरकारी मशीनरी, सरकारी धन और घोषणाओं के दुरुपयोग पर कारगर रोक लगायी जाये। प्रचार माध्यमों को जनता के धन से विज्ञापन देकर अपने निजी राजनैतिक उद्देश्यों को पूरा करने की कारगुजारियों को तत्काल रोका जाये। 
साथ ही सांप्रदायिक विषवमन, जातीय विद्वेष और धर्म के राजनीतिक उद्देश्य हेतु प्रयोग पर कड़ी कार्यवाही की जाये। मतदाता सूचियों में किसी तरह की गड़बड़ी न हो और सभी को मतदान का अवसर मिले, इस बात की गारंटी की जाये। विपक्ष को डराने के उद्देश्य से चुनाव से पूर्व सक्रिय की गयीं ईडी, सीबीआई एवं आईटी जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग रोका जाये। 
भाकपा ने मांग की कि चुनाव निर्धारित समय पर ही कराये जायें और अपरिहार्य कोविड प्रोटोकाल का पालन समान रूप से कराया जाये। चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों, इसकी गारंटी की जाये। स्वास्थ्यकर्मी, बैंक कर्मी एवं आम लोगों के बीच हमेशा रहने वाले कर्मियों को चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखा जाये।
जारी द्वारा- 
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश
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गरीबों और अमीरों के बीच खाई और चौड़ी हुयी 2021 में

2021 में गरीब और गरीब तथा अमीर और अमीर हुये हैं। 

'सबका साथ और सबका विकास' का आलाप 'गरीबों का वोट और अमीरों को नोट' में बदला। 

इसी तथ्य पर पर्दा डालने को भाजपा कर रही है तमाम तिकड़में। 

हां ये विकास  ही है जिसकी रट मोदी शाह योगी और समूचा संघ परिवार दिन रात लगाये रहता है। विकास के इस विकास के तहत पूंजीपति वर्ग और कार्पोरेट घराने मालामाल हुये हैं और गरीब और अधिक गरीबी की ओर धकेले जा चुके हैं।
जिस कोरोना को अर्थव्यवस्था की बरवादी का कारण बताया जाता रहा है उस काल में भी पूंजीवाद ने आपदा में अवसर तलाश लिये। गत एक वर्ष में बाजार नयी ऊंचाइयों को छूते हुए 52 फीसदी तक बढ़ा।
देश में अरबपतियों की संख्या बढ़ कर 126 पहुंच गई। एक अरब डालर ( करीब 75,000 करोड़ रुपये ) की हैसियत वाले प्रवर्तकों और कारोबारियों की संख्या वर्ष 2020 में 85 थी, जो 2021में रिकार्ड तोड़ कर 126 पर पहुंच गई है। इनकी कुल संपत्ति 728 अरब डालर ( करीब 54.6 लाख करोड़ रुपये ) है, जो दिसंबर 2020 में 494 अरब डालर ( करीब 37 लाख करोड़ रुपये) थी। इन अरबपतियों की सूची में इत्र कारोबारी पीयूष जैन जैसे अरबपति शामिल नहीं हैं, जिनकी काली संपत्ति इस गणना की परिधि से बाहर है।
उधर इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी सामने आरहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इसी अवधि के दरम्यान देश में आर्थिक असमानता भी बढ़ गई है। यानी गरीब और गरीब होगये हैं। वहीं, अमीरों की संपत्ति में बढ़ोत्तरी दर्ज हुयी है।
वैश्विक असमानता रिपोर्ट के मुताबिक भारत में गरीब और अमीर में असमानता का स्तर पांच गुना तक बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 में  शीर्ष10 फीसदी आबादी के पास कुल राष्ट्रीय आय का 57 फीसदी हिस्सा है। इन 10 फीसदी में से 1 प्रतिशत के पास 22 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं निचली 50 फीसदी (आधी) आबादी के पास केवल 13 प्रतिशत हिस्सा है।
जी हां! अमीरों के और अमीर होने और गरीबों के और भी गरीब होने के ये आंकड़े 2021 के हैं, जिसके लिए भाजपा के झुठैत न नेहरू को जिम्मेदार ठहरा सकते हैं न इंदिरा गांधी को। 'सबका साथ, सबका विकास' का भाजपा का आलाप 'गरीबों का वोट और अमीरों को नोट' में बदल चुका है।
इसी पर पर्दा डालने को खैरातें बांटी जारही हैं, धर्म की आड़ ली जारही है तथा सांप्रदायिक विभाजन और जातीय समीकरण बैठाने की तमाम तिकड़में की जारही हैं।
डा. गिरीश।
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शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

प्रकाशनार्थ

अयोध्या में राम नाम पर मची है लूट
भाकपा ने सर्वोच्च न्यायालय की देख रेख में जांच की मांग उठाई

लखनऊ-24 दिसंबर, 2021- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार पर जीरो टौलरेंस की बात करने वाली भाजपा सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी है और उसके भ्रष्टाचार के आगोश में राम मन्दिर परिसर तक आगया है। सच तो यह है कि अयोध्या में राम के नाम पर लूट मची है और गरीबों को उजाड़ कर संघी और उनके पोषित लोग ज़मीनें हड़प रहे हैं। भाजपा ने आस्था का कार्पोरेटीकरण और चुनावीकरण कर दिया है। भाजपा के मन्दिर निर्माण के केन्द्र में श्री राम के संघर्षों के साथियों के वंशज दलित पिछड़े आदिवासी नहीं हैं अपितु अधिकारी व्यापारी माफिया और कारपोरेट घराने हैं।
भाकपा ने अयोध्या में राम नाम पर चल रही लूट की सर्वोच्च न्यायालय की देख रेख में जांच करने की मांग की है। वो इसलिए भी कि मन्दिर निर्माण ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के आधार पर हुआ है। 
ज्ञात हो कि उत्तरप्रदेश के चुनावों में भाजपा अयोध्या के विकास और वहां बन रहे राम मंदिर को प्रमुख मुद्दा बना रही थी, लेकिन वह अब मंदिर के नाम पर ज़मीन घोटाले के आरोपों  में बुरी तरह फंस गई है। सुप्रीम कोर्ट ने जब रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में फ़ैसला दिया और मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हुआ तो वहां विधायकों, मेयर, आयुक्त, एसडीएम और डीआईजी के रिश्तेदारों ने अयोध्या में तमाम ज़मीनें खरीद डाली हैं। खबर है कि ये ज़मीनें महंगे दामों में खरीदी गई हैं। 
महर्षि रामायण विद्यापीठ ट्रस्ट ने 1990 के दशक की शुरुआत में, राम मंदिर स्थल से 5 किलोमीटर से भी कम दूरी पर बरहटा मांझा गांव और अयोध्या में आसपास के कुछ अन्य गांवों में बड़े पैमाने पर ज़मीन का अधिग्रहण किया था। इस ज़मीन में से लगभग 21 बीघा जमीन दलितों से नियमों का उल्लंघन करते हुए ख़रीदी गई थी। इस ख़बर के सामने आने के बाद योगी सरकार ने अपर मुख्य सचिव राजस्व मनोज कुमार सिंह के नेतृत्व में जांच बैठाई है। विशेष सचिव राजस्व ज़मीन खरीद मामले को लेकर जांच करेंगे और शासन को एक हफ्ते में रिपोर्ट सौंप देंगे।
भाकपा सहित विपक्षी दलों द्वारा उठाई गयी सशक्त आवाज के बाद सरकार ने लीपापोती के उद्देश्य से शासकीय जांच बैठायी है। यह सरकार की स्वीकारोक्ति है कि भ्रष्टाचार हुआ है। 
भाकपा मांग करती है कि अपने भाषणों में मन्दिर मन्दिर रटने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘चंदे की लूट’ और ‘ज़मीन की लूट’ पर जवाब देना चाहिए और पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और विश्वसनीय जांच करानी चाहिए। 
भाकपा ने आरोप लगाया कि पहले राम मंदिर के चंदे में घोटाला किया गया और अब दलितों की जमीन को हड़पा जा रहा है। इसकी जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में की जानी चाहिए, क्योंकि राम मंदिर को बनवाने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिया था।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया कि राम के नाम पर लूट का यह खेल अयोध्या तक ही सीमित नहीं है, इसका दायरा काशी तक फैल चुका है और इसे मथुरा तक बढ़ाने की कुचेष्टा की जा रही है। भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने गत दिनों बयान दिया है कि मथुरा श्री कृष्ण की जन्मभूमि है और अब वहां उनका भव्य मंदिर बनना चाहिए। उनके पहले उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी कृष्ण मंदिर की वकालत कर चुके हैं और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी बार-बार मथुरा के चक्कर काट रहे हैं। आए दिन संघ गिरोह का कोई न कोई संगठन मथुरा प्रकरण पर भड़काऊ बयानबाजी करता रहता है। 
इधर काशी में पिछले दिनों जिस काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का उद्घाटन प्रधानमंत्री द्वारा किया गया उस पर और उसके लक़दक़ उदघाटन पर जनता के धन के सैकड़ों करोड़ रुपये बहाये जा चुके हैं। अब इस भव्यता की कीमत भी श्रद्धालु जनता को ही चुकानी है। बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के लिए पहले मामूली रकम लगती थी, लेकिन अब इसकी भी बाकायदा रेट- लिस्ट जारी कर दी गई है। इसका भुगतान कम से कम ग़रीब के लिए संभव नहीं है।
लोगों का अनुमान है कि जब अयोध्या में राम मंदिर बन कर तैयार हो जाएगा,  तब वहां भी यही कहानी दोहराई जाएगी। रामलला तक पहुंचने के मौके और अधिकार अमीरों को ही मिलेंगे, क्योंकि गरीब आदमी के लिए जेब ढीली कर उनका दर्शन कर पाना कठिन हो जायेगा। अब वो दिन चले गए जब जब लोग तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए धर्मशालाएं बनाया करते थे। अब धर्म के नाम पर व्यापार इस कदर बढ़ गया है कि अब आस्था दर्शन पूजा दीन- दुखियों की जगह केवल अमीरों की पहुंच में हो गई है। 
मंदिरों में दर्शन, पूजा और प्रसाद के नाम पर व्यापार तो शुरु हो ही गया है, मंदिरों के नाम पर बने न्यासों में जो लाखों-करोड़ों की कमाई होती है, उस पर भी व्यापारियों की नज़र टिकी रहती है। कई मंदिर ट्रस्ट अपने खर्च पर गरीबों की पढ़ाई, इलाज जैसे काम करते हैं। मगर जिस तरह धर्म को धंधा बना लिया गया है, उसमें परोपकार के ये काम कितने देर तक चलेंगे, कहना कठिन है।
अयोध्या में जिस तरह ज़मीनों की ख़रीद-फ़रोख़्त में गड़बड़ी उजागर हुई है,  उससे सिध्द होगया है कि भाजपा राम के नाम पर लूट मचाये हुये है। राफेल लड़ाकू विमान खरीद से लेकर अयोध्या काशी तक भ्रष्टाचार का यह मायाजाल पसरा पड़ा है। इस पर तभी लगाम लगेगी जब उच्चस्तरीय जांच के बाद दोषी जेल के सींखचों के पीछे होंगे। भाजपा सरकार से ये उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह अपने पिटारे में बैठे भ्रष्टाचारियों पर बुलडोजर चलाएगी। 
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश  

 
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बुधवार, 22 दिसंबर 2021

प्रकाशनार्थ


कोरोना की संभावित लहर को देखते हुये समुचित सुरक्षात्मक कदम उठाये सरकार: भाकपा
लखनऊ- 22 दिसंबर, 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश ने एक बयान जारी कर कहा कि कोरोना के पुनः प्रसार का खतरा बड़ता जा रहा है और सरकार जनता के प्रति दायित्वों को छोड़ सिर्फ चुनावी कामों में मशगूल है।
भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि केन्द्र और राज्य सरकार की लापरवाही से दूसरी लहर के समय अस्पतालों में पलंग, आक्सीजन और डाक्टरों के अभाव में तमाम नागरिकों को जीवन से हाथ धोना पड़ा था। सरकारी अस्पताल तो मानो मौत के अड्डे बन गए थे। लेकिन सरकार बड़ी बेशर्मी से कहती है कि आक्सीजन और इलाज के अभाव में कोई भी दिवंगत नहीं हुआ। 
भाकपा राज्य सचिव ने कहा कि महामारी से हुयी भीषण जनहानि के बावजूद सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में कोई सुधार नहीं किया। यही वजह कि गत माहों में डेंगू आदि बुखारों से भी भारी मौतें हुयी हैं। सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों, नर्सों और अन्य स्टाफ की तमाम जगहें खाली पड़ी हैं। दवाओं, पलंगों और उपकरणों का भी भारी अभाव है। 
अब जब कोरोना पैर पसारने लगा है और खतरनाक ओमीक्रान वैरियंट से प्रभावितों की संख्या भी बड़ती जा रही है, सरकार नयी व्यवस्थायें करने के बजाय उपलब्ध पलंगों को ही रिजर्व करने की बात कर रही है।
सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और महंगाई हटाने जैसे मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय विभाजन और वोट की राजनीति में जुटी है। अतएव नागरिकों में असुरक्षा की भावना बड़ती जा रही है। भाकपा मांग करती है कि अस्पतालों में डाक्टरों और स्टाफ की भर्ती की जाये, दवाएं उपकरण उपलब्ध कराये जायें। सचल इलाज समूह जो घरों पर चिकित्सा और देखभाल करें उपलब्ध कराई जायें। वैक्सीनेशन की रफ्तार बड़ाई जाये तथा अन्य सुरक्षात्मक उपाय किए जायें। 
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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रविवार, 28 नवंबर 2021

TET पेपर लीक के लिए मुख्यमंत्री जिम्मेदार: भाकपा

प्रकाशनार्थ-
लखनऊ- 28 नवंबर, 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने TET परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने पर गहरा आक्रोश जताया है। पार्टी ने इसे छात्रों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताते हुए, इसके लिए सीधे मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया है।
भाकपा ने कहा कि पेपर लीक होने और लाखों अभ्यर्थियों को हैरान परेशान करने वाले इस कांड के दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की चेतावनी देने वाले बड़बोले मुख्यमंत्री और उनकी सरकार वोटों के जुगाड़ में इतनी मशरूफ है कि प्रदेश में एक से एक बड़े कांड होरहे हैं। 
प्रयागराज सामूहिक हत्याकांड की स्याही सूखी भी न थी कि अब इतना बड़ा कांड होगया। जनता परेशान है और मुख्यमंत्री चेतावनियों तक सीमित होकर रह गए हैं।
भाकपा ने मांग की कि दोषियों और उनके संरक्षक माफियाओं को कड़ी सजा दी जाये और सभी अभ्यर्थियों को रुपये 50 हजार प्रति व्यक्ति कम्पेनशेसन के तौर पर दिये जायें।
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश।
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शुक्रवार, 19 नवंबर 2021

प्रकाशनार्थ


कृषि कानूनों को वापस लेने का निर्णय चुनावों में हार के भय से लिया गया

यह किसान आंदोलन की जीत और सरकार के दंभ की पराजय है: भाकपा

लखनऊ- 19 नवंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने प्रधानमंत्री द्वारा तीन क्रषी क़ानूनों को वापस लेने की घोषणा को किसान आंदोलन की बड़ी जीत और अहंकारी, तानाशाह एवं कार्पोरेटपरस्त मोदी सरकार की बड़ी हानि बताया है।
एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि अभी आंदोलन के कई मुद्दे हैं जिन पर सरकार को ठोस कदम उठाने हैं। तीनों क़ानूनों को संसद में रद्द करने के अलावा किसानों की उपजों की सही कीमत और सम्पूर्ण खरीद संबंधी एमएसपी कानून बनाना शेष है। साथ ही बिजली बिल 2020 को रद्द करने और लखीमपुर किसान- पत्रकार हत्याकांड के प्रायोजक केन्द्रीय ग्रहमंत्री को हटाने, 700 से अधिक किसानों की शहादत को सम्मान और उनके परिजनों को पर्याप्त मुआबजे का प्रश्न भी लंबित है। श्रमिकों के अधिकारों वेतनों और अन्य देयों में कटौती रद्द कराने, बेरोजगारों को रोजगार, पुरानी पेंशन बहाली, महंगाई को नीचे लाने और लोकतान्त्रिक क्रियाओं पर दमन जैसे मुद्दे भी लंबित पड़े हैं।
भाकपा ने कहाकि केन्द्र सरकार का यह निर्णय 5 राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा की करारी हार के भय से बेहद देर से उठाया गया कदम है। प्रधानमंत्री आज भले ही सदाशयता का नाटक कर रहे हैं लेकिन सभी जानते हैं उन्होने, उनकी सरकार और पार्टी भाजपा ने लोकतान्त्रिक आंदोलनों को कुचलने को कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी। 
दिल्ली आरहे किसानों की राह में अवरोध खड़े किये, आंदोलन स्थल पर बाड़ें लगवाईं, कीलें ठोकीं, आँसू गैस, पानी और रबर बुलेट से प्रहार किये, उन्हें खालिस्तानी बताया, आन्दोलनजीवी बता कर उनका मज़ाक उड़ाया, उन पर लखीमपुर में बुलडोजर चढ़वा कर हत्यायेँ कीं और प्रधानमंत्री ने आज तक उनकी शहादत पर दो शब्द तक नहीं बोले। सीएए, एनआरसी विरोधी आंदोलनों पर दमनचक्र और जगह जगह पर विपक्ष के आंदोलनकारियों को देशद्रोह जैसे आरोपों में गिरफ्तार कराया। 
किसान आंदोलन ने लोकतांत्रिक आंदोलनों के लिये रास्ता हमवार किया है और लोकतन्त्र की रक्षा की है। इस महान आंदोलन को वोटों के लिये किसी के भी द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। भाकपा शुरू से ही चट्टान की तरह आंदोलन के साथ खड़ी है और आगे भी खड़ी रहेगी। आगामी आंदोलन के संबंध में संयुक्त किसान मोर्चा के फैसले का इंतिज़ार रहेगा। 
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा , उत्तर प्रदेश
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बुधवार, 17 नवंबर 2021

प्रकाशनार्थ

प्रकाशनार्थ-

कानपुर में पुलिस प्रताड़ना से एक युवक की मौत की भाकपा ने कड़े शब्दों में निन्दा की

लखनऊ- 17 नवंबर, 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने यहां बयान जारी कर यह आरोप दोहराया है कि प्रधानमंत्री अथवा मुख्यमंत्री  कितना भी गला फाड़ कर चीखें, उत्तर प्रदेश में पुलिसराज कायम है और हर दिन पुलिस किसी न किसी की हत्या कर रही है। यह मुख्यमंत्री के उन शर्मनाक बयानों का दुष्परिणाम है कि पुलिस को ठोकने के आदेश हैं।
 गोरखपुर में  व्यापारी, आगरा में वाल्मीक युवक और कासगंज में अल्पसंख्यक युवक की हत्या के बाद अब ठोकोराज की पुलिस ने कानपुर में एक युवक को कस्टडी में इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई और एक परिवार फिर उजड़ गया।
भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने घटना की तीव्रतम निन्दा की है, और इसके लिए मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया है। भाकपा ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने, पीड़ित परिवार को 50 लाख सहायता और परिवार के एक व्यक्ति को नौकरी देने की मांग की है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के दलों पर तंज कसा है कि वे जनता की रक्षा में आवाज उठाने के बजाय चुनावी मंच सजाने में जुटे हैं। भाकपा आमजनों की आवाज लगातार उठा रही है, और उठाती रहेगी।
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश।
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सोमवार, 15 नवंबर 2021

उत्तर प्रदेश में जंगलराज



उत्तर प्रदेश में हर दिन हो रहे हैं बलात्कार और पीडिताओं की हत्याएं

कानून व्यवस्था की पंगुता पर झूठ पर झूठ बोलना बन्द करे भाजपा नेत्रत्व

पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने को हर संभव कदम उठायेगी भाकपा- राज्य सचिव ने दी चेतावनी

लखनऊ- 15 नवंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने भाजपा और उसके शीर्षस्थ नेत्रत्व पर आरोप लगाया है कि वे उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था को दुरुस्त बता कर भुक्त भोगी उत्तर प्रदेश की जनता के घावों पर नमक छिड़क रहे हैं। भाजपा नेत्रत्व के निर्लज्ज और झूठे दावों के विपरीत सच तो यह है कि उत्तर प्रदेश में जंगलराज कायम है। जिन बालिकाओं और महिलाओं के निर्भयतापूर्वक स्कूल जाने के दाबे मुख्यमंत्री अपने बयानों और सरकारी धन से दिये जा रहे विज्ञापनों में कर रहे हैं वे दाबे न केवल खोखले हैं बल्कि कड़वे सच पर पर्दा डालने वाले हैं।
एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि गत दिन जब केन्द्रीय गृह मंत्री उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री की तारीफ़ों के पुल बांध रहे थे और बड़बोले मुख्यमंत्री अपराधियों को भयाक्रांत करने के अपने खोखले दावों पर अपनी पीठ खुद थपथपा रहे थे, उस वक्त भी उत्तर प्रदेश में कई होनहार छात्राओं महिलाओं से दरिंदगी तथा उनमें से एक की हत्या करने की दिल दहलाने वाली घटनायें घट रहीं थीं।
गत शनिवार को ही जनपद- पीलीभीत के थाना- बरखेड़ा के एक गाँव की कक्षा 12वीं की 16 वर्षीय छात्रा अपनी माँ को सुबह साढ़े नौ बजे तक लौटने की कह कर कोचिंग सेंटर के लिए निकली थी। दरिंदों ने दिन दहाड़े उससे गन्ने के खेत में बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी। परिवार को सोलह घंटे बाद उसका लहूलुहान शव नग्नावस्था में मिला। होनहार इस छात्रा ने हाई स्कूल की परीक्षा A ग्रेड में पास की थी और वह डाक्टर बन समाज सेवा करना चाहती थी। डा॰ गिरीश ने दिन रात झूठ की फसल उगाने वाले मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि क्या वे इस छात्रा के सपने लौटा देंगे? क्या उस परिवार को उनकी होनहार बेटी लौटा देंगे?
इसी दिन हुयी एक अन्य घटना भी भगवाइयों के रामराज्य के प्रपोगंडा की कलई खोल कर रख देती है। दिन दहाड़े ही लखीमपुर जनपद के खीरी थानान्तर्गत एक गाँव की एक 16 वर्षीय छात्रा स्कूल से घर लौट रही थी, कि गाँव के बाहर छात्रा को अकेला देख दो लोग उसे खेत में खींच ले गये और छात्रा से सामूहिक बलात्कार किया। किसी तरह दरिंदों के चंगुल से छूट छात्रा घर पहुंची और आपबीती से परिजनों को अवगत कराया।
बरेली जनपद के मोरादाबाद क्षेत्र की घटना मुख्यमंत्री के इस दाबे को तार तार कर देती है कि उत्तर प्रदेश के अंदर अपराधी थर थर काँप रहे हैं। क्षेत्र की एक पीड़ित महिला द्वारा कल किये खुलासे के अनुसार 8 व्यक्तियों ने उसके साथ जबरन बलात्कार किया और वीडियो बना लिया। महिला को मुंह बन्द रखने की धमकी दी और मजबूरन वह खामोश रही। पर भयमुक्त दरिंदों ने उसको आन लाइन वीडियो भेज सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी तो महिला को मुंह खोलना पड़ा, और उसने एफ़आईआर दर्ज कराई।
योगीराज में दरिन्दे विकलांग बच्चियों पर भी रहम करने को तैयार नहीं हैं। यहाँ नाबालिगों काम पिपासा भी काबू से बाहर जा रही है। बदायूं जनपद के दातागंज क्षेत्र में 11 और 14 वर्ष के दो नाबालिग लड़के विकलांग 14 वर्षीय बच्ची को उस समय घर से उठा कर गन्ने के खेत में लेगये जब वह घर में अकेली थी। दोनों ने बारी बारी से उसके साथ बलात्कार किया। बालिका दायें पैर से अपंग थी और चल भी नहीं सकती थी।
उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के साथ ऐसे जघन्य क्रत्य हर दिन हो रहे हैं और प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंती आदि सभी उत्तर प्रदेश के हालातों पर झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं।
भाकपा ने सभी अपराधियों को जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाने, उन्हें कड़ी सजा दिये जाने, पीड़ित्त परिवारों को समुचित मुआबजा दिये जाने और संबंधित थानों के पुलिसकर्मियों के विरूध्द कड़ी से कड़ी सजा दिये जाने की मांग की है। भाकपा ने कहा कि नैतिकता का तकाजा तो यह है कि मुख्यमंत्री जनता के समक्ष अपनी असमर्थता स्वीकार करें और इन बालिकाओं के अभिभावकों के पास पहुँच उनसे माफी मांगें ताकि उनके जख्मों पर मरहम लग सके। 
भाकपा ने घटना वाले जिलों की अपनी इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे पीड़ित परिवारों से मिलें, उन्हें ढाढ़स बंधाएं और उन्हें न्याय दिलाने को हर संभव कदम उठायेँ। 
डा॰ गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा, उत्तर प्रदेश
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शुक्रवार, 5 नवंबर 2021

हिंदुत्व का प्रदूषण

दीपोत्सव अपना रौद्र रूप दिखा कर गुजर गया। अढ़ाई सौ रुपये लीटर तेल, दीपक तो नाममात्र को ही जले। शत्रु देश चीन की लड़ियां फुलझड़ियां ही हावी दिखीं। गरीब घरों के बच्चे अमीरों की आबादी में एक मोमबत्ती, एक अदद पटाखे अथवा कोई खाली दीपक ही मिल जाये, ललचाते घूमते दिखे। मिठाई तो दूर कई घरों में सामान्य पकवान तक नहीं बने।
वहीं अमीरों और अमीर होने का दम्भ पाले मध्यमवर्ग का उल्लास पागलपन की हद तक था। पकवान मिठाइयां उन्हें मुबारक। मेरा एतराज पागलपन की सारी हदें पार चुके पटाखेबाजी से है। सर्वोच्च न्यायालय ने जहरीले पटाखे न चलाने की सीख क्या देदी, संघ परिवार और उसका समूचा प्रचारतंत्र चिंघाड़ उठा।  "ये सारी पाबन्दियों हिंदुओं पर ही क्यों?" जैसे सवालों की झड़ी लग गयी। संदेश ये था कि खूब फोड़ो पटाखे। 
हिंदुत्व के इस उन्माद ने तर्क और हानि जैसे प्रश्नों को पीछे धकेल दिया। जिन पटाखों की खोज चीन ने की, आज भी अधिकतर बारूद चीन से ही आरही है, पर रामराज्य में चीन विरोधी राष्ट्रवाद घल्लूघारा होगया। जो बुज़ुर्गवान शुध्द हवा की तलाश में सुबह सुबह पार्कों बगीचों का रुख करते हैं नाती पोतों के साथ पाकिस्तान और मुसलमानों को संदेश देने में जुटे थे। हिंदू नामधारी तमाम निरीह प्राणियों के फेफड़ों में धुआं उंडेल रहे थे। मासूम सा तर्क था पाकिस्तान और मुसलमानों को सन्देश देना है तो इत्ती कुर्बानी तो करनी होगी।
मुझे याद है कि 2014 से पहले टीवी चैनलों पर दीवाली के हफ्ते भर पहले से सैलिब्रिटीज की अपीलें आने लगतीं थीं कि पटाखे नहीं चलाने। पक्ष विपक्ष के नेतागण भी स्वास्थ्य पर्यावरण की रक्षा के लिए सावधान करते नजर आते। पर अब बात अलग है। 24 कैरट का रामराज है। धुआं भी झेलना है और असह्य कानफोड़ू शोर भी।
सारी शासकीय मशीनरी ने कानों में तेल डाल लिया था। कानून और उसके रक्षक कुंभकर्णी निद्रा में सोये थे। रात डेढ़ दो बजे तक चले इस महाताण्डव की कोई शिकायत तक सुनने को तैयार न था। वाट्सएप मेसेज अभी तक टच नहीं किये गए। राजसत्ता के इशारों को हमारी ब्यूरोक्रेसी से अधिक भगवान? भी नहीं समझते। 
सो बुजुर्गों ने, बीमारों ने, नवजातों ने रात भर धुआं झेला और नीन्द खराब की। सुबह उठे तो आसमान में उषा की लालिमा की जगह धुएं की कालिमा छायी हुयी थीं। जो आज दोपहर तक राहु की तरह रोशनी को निगले हुये है।
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गुरुवार, 4 नवंबर 2021

प्रकाशनार्थ



पेट्रोल डीजल की कीमतों में मामूली कमी पर भाकपा की प्रतिक्रिया-

"तोहफा नहीं ये धोखा है," 2020 - 21 में की गयी सारी बढ़ोत्तरियों को वापस ले सरकार।

 लखनऊ- 4 नवंबर 2021, केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में की गयी मामूली कमी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने कहा कि ये कमी तोहफा नहीं धोखा है, और सरकार को इन जिंसों पर 2020 से लेकर अब तक की गयी सारी बढ़ोत्तरी को वापस लेना चाहिए। साथ ही इन लगभग दो वर्षों में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों को बढ़ा कर जनता की जेब से निकाले गये धन को ब्याज सहित लौटाना चाहिये।
भाकपा ने सवाल किया कि यदि सरकार  जनता को दीवाली का तोहफा ही देना चाहती थी तो उसे कम से कम एक हफ्ते पहले देना चाहिए था, जैसे कि सरकारी कर्मियों को महंगाई भत्ता दिया गया है। औसतन आदमी जब त्यौहार से संबंधित 90 प्रतिशत खरीददारी कर चुका है तब यह कथित तोहफा बेमानी है।
सच तो यह है कि उपचुनावों में भाजपा की हुयी करारी हार, विपक्ष खासकर वामपंथ के    महंगाई विरोधी अभियानों, ट्रांसपोर्टर्स, वाहन उद्योग और बाजार के दबावों, जनता की भारी नाराजगी तथा उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनावों में हार के भय से भाजपा सरकार ने ये दिखावा किया है। पर जनता सब समझती है और वह लुटेरों को समझाना भी जानती है।
भाकपा ने गत वर्षों में की गयी समूची बढ़ोत्तरियों को वापस लेने और एरियर्स के भुगतान की मांग के साथ साथ टोल टैक्स बसूली और वाहनों पर लगायी जारही तमाम पैनल्टीज पर भी सवाल उठाया है। इन दोनों ने यात्रा और माल ढुलाई को असहनीय पीड़ादायक बना दिया है।
टोल टैक्स के औचित्य पर सवाल उठाते हुए भाकपा राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि वाहन खरीद पर अधिकतम जीएसटी बसूली जाती है। वाहन रजिस्ट्रेशन के नाम पर भारी रोड टैक्स और बीमा राशि बसूली जाती है, डीजल पेट्रोल पर अतिरिक्त कर( सेस ), एक्साइज एवं वैट बसूले जाते हैं। फिर इसी धन से बनने वाली सड़कों पर टोल टैक्स बसूलना जनता की लूट है और उसके साथ बड़ा धोखा है।
उन्होंने बताया कि एक्सप्रेसवे पर जरा स्पीड बढ़ने पर रुपये 2 हजार की पैनल्टी ठोक दी जाती है। सड़क पर चलना और माल ढुलाई आज बहुत कठिन होगया है और ये बढ़ती महंगाई का सबसे बड़ा कारण है। जनता के साथ ये अपराध वह सरकार कर रही है जो आसमान से नहीं टपकी जनता के वोटों से चुनी गयी है।
अब वक्त आगया है इस सारी लूट के खिलाफ चहुँतरफ़ा आवाज उठे और सरकार को अपने कदम वापस खींचने के लिए बाध्य किया जाये, भाकपा ने कहा है।
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा उत्तर प्रदेश।
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रविवार, 31 अक्टूबर 2021

उत्तर प्रदेश के वामदल फिर गर्म



महंगाई, खाद की किल्लत, धान की खरीद न किये जाने और बेरोजगारी के खिलाफ 9 नवंबर को सड़कों पर उतरेंगे वामदल।

 लखनऊ- 31 अक्टूबर 2021, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों की एक बैठक आज यहां संपन्न हुयी। बैठक में बर्दाश्त के बाहर जा पहुंची महंगाई, रासायनिक खादों की कमी और काला बाजारी से जूझते किसानों की पीड़ा, धान और अन्य कृषि उपजों की सरकारी खरीद में खड़े किये जारहे अवरोध, बाढ़ और तूफान से हुयी फसल हानि की भरपायी से सरकार की किनाराकशी, युवाओं को रोजगार से वंचित रखने एवं वामदलों और अन्य  की गतिविधियों को पुलिस के बल पर बाधित करने जैसे प्रमुख  सवालों पर आंदोलन को धार देने पर विचार किया गया।
निर्णय लिया गया कि उपर्युक्त सवालों पर आगामी 9 नवंबर को उत्तर प्रदेश भर में वामदल संयुक्त रूप से जंगजू प्रदर्शन करेंगे। ये प्रदर्शन मुख्य तौर पर खाद बिक्री केन्द्रों, धान खरीद केन्द्रों, तहसीलों अथवा जिला मुख्यालयों पर किये जायेंगे। स्थानानुसार अथॉरिटीज को ज्ञापन सौंपे जायेंगे।
वामदलों ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में रासायनिक खाद की जबर्दस्त किल्लत किसान विरोधी केन्द्र और राज्य सरकार की देन है। अपनी मांगों के लिये 11 माह से जूझ रहे किसानों को सबक सिखाने के उद्देश्य से खाद का अभाव खड़ा किया गया है।  
इसी उद्देश्य से धान आदि फसलों को निर्धारित कीमत पर सरकार द्वारा खरीदा नहीं जा रहा, सरकारी मुलाजिम तमाम बहाने लगा कर उपजों को रिजेक्ट कर रहे हैं और किसान खुले बाजार में आधे से भी कम दामों पर इसे बेचने को लाचार हैं।
वोटों की नशेड़ी सरकार जब अपनी वोटों की फसल उगाने में मस्त है, तब किसान खाद न मिल पाने और फसल न बो पाने से पस्त है। अति वारिश और तूफान से हुयी फसलों की बर्बादी से वह पहले ही हलकान है। संवेदनहीन सरकार द्वारा मुआवजा देना तो दूर हानि का अभी तक सर्वे तक नहीं कराया गया।
खाद की भारी कमी के चलते जगह जगह किसान कई कई दिनों तक लाइनों में लगे हैं, लाइन में खड़े खड़े किसान ने दम तोड़ दिया, उनमें आपसी झगड़े हो रहे हैं, विक्रय एजेंसियों से झगड़े हुये हैं, यहां तक कि खरीद केन्द्रों पर गोलीबारी तक हुयी है और ललितपुर में तो एक किसान ने आत्महत्या तक कर ली।
बड़े पैमाने पर खाद की काला बाज़ारी जारी है। इसे मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकार किया है और काला बाजारी रोकने को समिति गठित की है। यह दीगर बात है कि मुख्यमंत्री काला बाजारियों को ठोक नहीं पा रहे, जैसे कि वे तमाम मजलूमों को ठोकवाते रहते हैं। सभी जानते हैं कि भाजपा जमाखोरों और काला बाजारियों की पुश्तैनी पार्टी है।
इस बीच पेट्रोल डीजल रसोई गैस के दाम सातवें आसमान पर पहुंचा दिये गये हैं। एक माह में ही प्रति लीटर 8 रुपये का इजाफा हुआ है। इन बढ़ोत्तरियों से समूचा बाजार महंगाई की चपेट में है। त्यौहारी सीजन में जनता के अरमानों पर पानी फिर गया है।
 बेरोजगारों को रोजगार देने के बजाय सरकार झूठे आंकड़े फैला रही है। बीमारियों से जनता को बचाने में सरकार पूरी तरह फेल है। लोगों के गुस्से और नाराजगी से डरी सरकार वामपंथ और विपक्ष के आंदोलनों में पुलिस बल का दुरुपयोग कर बाधाएं उत्पन्न कर रही है।
अतएव  वामदलों ने 9 नवंबर को सड़कों पर उतरने का निश्चय किया है।
वामदलों ने आगरा में भाजपाइयों द्वारा लगाये गये झूठे आरोपों के आधार पर 3 होनहार कश्मीरी छात्रों की गिरफ्तारी, उन पर देशद्रोह के आरोप लगाने तथा उनका भविष्य उजाड़ने की करतूत की कठोरतम शब्दों में निंदा की है और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है।
साथ ही त्रिपुरा में संघ गिरोह द्वारा अल्पसंख्यकों के विरुध्द चलाये जा रहे हिंसक अभियान की तीव्र भर्त्सना करते हुए  जिम्मेदार सभी को कानून के हवाले करने की मांग की है। वामदलों ने रेखांकित किया कि वहां उपस्थित हुयी भयावह स्थिति में वामपंथी दलों ने कारगर हस्तक्षेप किया वहीं अन्य कटटरपंथियों ने अफवाहों को रसद मुहैया करा के अपना उल्लू सीधा करने का प्रयास किया। जनता को दोनों से सावधान रहना होगा।
आज की बैठक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी , मार्क्सवादी के राज्य सचिव डा. हीरालाल यादव, भाकपा माले के राज्य सचिव का. सुधाकर यादव, आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के प्रदेश संयोजक का. अभिनव कुशवाहा एवं लोकतांत्रिक जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जुबेर अहमद कुरैशी आदि शामिल थे।
 डा. गिरीश

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शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2021

खाद दो! धान खरीदो! वरना गद्दी छोड़ दो!



खाद की किल्लत पैदा कर किसानों से बदला लेरही हैं भाजपा सरकारें- भाकपा

शीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित न की गयी तो भाकपा खामोश नहीं बैठेगी

 लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश में रासायनिक खाद की जबर्दस्त किल्लत किसान विरोधी केन्द्र और राज्य सरकार की देन है। अपनी मांगों के लिये 11 माह से जूझ रहे किसानों को सबक सिखाने के उद्देश्य से खाद का अभाव खड़ा किया गया है। 
इसी उद्देश्य से धान आदि फसलों को निर्धारित कीमत पर सरकारी तौर पर खरीदा नहीं जा रहा और किसान आधे से भी कम दामों पर इसे बेचने को लाचार हैं।
वोटों की नशेड़ी सरकार जब अपनी वोटों की फसल उगाने में मस्त है, तब किसान खाद न मिल पाने और फसल न बो पाने से पस्त है। अति वारिश और तूफान से हुयी फसलों की बर्बादी से वह पहले ही हलकान है।
खाद की भारी कमी के चलते जगह जगह किसान कई कई दिनों तक लाइनों में लगे हैं, उनमें आपसी झगड़े हो रहे हैं, विक्रय एजेंसियों से झगड़े हुये हैं, यहां तक कि गोलीबारी हुयी है और ललितपुर में तो एक किसान ने आत्महत्या तक कर ली।
बड़े पैमाने पर खाद की काला बाज़ारी जारी है। इसे मुख्यमंत्री ने खुद स्वीकार किया है और काला बाजारी रोकने को समिति गठित की है। यह दीगर बात है कि मुख्यमंत्री काला बाजारियों को ठोक नहीं पा रहे, जैसे कि वे तमाम मजलूमों को ठोकवाते रहते हैं। सभी जानते हैं कि भाजपा जमाखोरों और काला बाजारियों की पुश्तैनी पार्टी है।
भाकपा ने चेतावनी दी कि यदि खाद की काला बाजारी तत्काल रोकी न गयी, पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराया नहीं गया और किसानों की सभी उपजें सरकारी केंद्रों पर खरीदने की व्यवस्था न की गयी तो भाकपा शीघ्र ही खाद बिक्री केन्द्रों और धान क्रय केन्द्रों पर प्रदर्शन करेगी।
डा. गिरीश, राज्य सचिव
भाकपा,  उत्तर प्रदेश।
29- 10-2021

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गुरुवार, 21 अक्टूबर 2021

आगरा में वाल्मीकि युवक हत्याकांड


 

भाकपा ने हत्या के आरोप में पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार करने और

न्यायिक जांच की मांग की

 

लखनऊ- 21 अक्तूबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल ने आगरा में वाल्मीकि युवक की पुलिस द्वारा हत्या पर गहरा रोष जताते हुये इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। पार्टी ने सभी दोषी पुलिसकर्मियों को हत्या के अभियोग में गिरफ्तार करने और पीड़ित परिवार को रुपए एक करोड़ मुआबजा दिये जाने, पीड़ित परिवार के एक को नौकरी दिये जाने तथा घटना की जांच सर्वोच्च न्यायालय से कराने की मांग की है।

एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि उत्तर प्रदेश सरकार हत्या और दमन की सरकार बन कर रह गयी है। हर दिन प्रदेश में किसी न किसी मजदूर, किसान, दलित, महिला अथवा व्यापारी की हत्या पुलिस या भाजपा पोषित माफियाओं के हाथों होरही है। ऊपर से प्रधानमंत्री डींगें हांक गए हैं कि यूपी में माफिया माफी मांग रहा है। सच कहा जाये तो यूपी जंगलराज में तब्दील होचुका है। थाने में हुयी चोरी के सबूत मिटाने को थाना पुलिस ने यह जघन्य कांड कर डाला। सच तो यह है कि मुख्यमंत्री ने पुलिस को शासन का बेलगाम गिरोह बना रखा है।

भाकपा राज्य सचिव ने कहाकि पार्टी राज्य केन्द्र ने भाकपा की जिला आगरा कमेटी को निर्देश दिया है कि पुलिस प्रताड़ना के शिकार वाल्मीकि परिवार को न्याय दिलाने के लिये हर संभव प्रयास करें।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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