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सोमवार, 31 मई 2010
at 9:48 am | 0 comments | प्रदीप तिवारी
संप्रग-2 सरकार का एक साल
22 मई को संप्रग-2 सरकार ने अपना पहला साल पूरा कर लिया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उस दिन एक भोज देने वाले थे। उस दिन की शुरूआत मंगलौर हवाई अड्डे पर एयर इंडिया के एक विमान के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के साथ हुई जिसमें 158 यात्री काल कवलित हो गये। संप्रग-2 के एक वर्ष के दौरान केन्द्रीय सरकार द्वारा नियंत्रित यातायातसाधनों की दुर्घटनाओं में एक हजार से अधिक यात्री मारे गये। यह संप्रग-2 की कार्यकुशलता की एक बानगी है।संप्रग-1 सरकार से वामपंथ द्वारा समर्थन वापसी के बाद से मंहगाई जिस गति से बढ़ना शुरू हुई उसने संप्रग-2 सरकार के पहले साल में एक ऐसी गति पकड़ ली जिसका ढूंढ़ने पर भी इतिहास में कोई उदाहरण शायद ही मिल सके। खाद्यान्नों की कीमतें दो गुना से ज्यादा बढ़ गयीं। दालों और चीनी की कीमतों में तो तीन गुने से ज्यादा वृद्धि हुई। आम जनता के कराहने की आवाज को अपने कानों तक न आने देने के लिए प्रधानमंत्री ऐतिहासिक विकास-दर हासिल करने की बांसुरी बजाने में मशगूल रहे, मंहगाई पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया। 24 मई केा अखबार नबीसों को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने महंगाई की बाबत पूछे गये सवालों का जवाब देते हुए वर्षान्त तक महंगाई पर काबू पाने की उम्मीद जताते हुए जोर दिया कि जल्दी ही देश 10 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर लेगा। महंगाई से त्रस्त जनता के घावों पर संप्रग-2 सरकार के मंत्री नमक छिड़कते रहे। ”चीनी की कमी से मधुमेह से बचने में मदद मिलेगी“ जैसे जुमले पूरी की पूरी सरकार के रवैये को साफ करते हैं। उल्टे पेट्रोलियम पदार्थों और खाद की कीमतों में बढ़ोतरी कर सरकार ने महंगाई की आग को और हवा दी। साथ ही खेती को पूरी तरह अलाभप्रद कर देने की साजिश भी जिससे कार्पोरेट खेती के लिए रास्ता खोला जा सके।संप्रग-2 सरकार के पहले साल ही स्पेक्ट्रम और आईपीएल जैसे घोटाले सामने आ चुके हैं। स्पेक्ट्रम घोटाले के आरोपी संचार मंत्री ए. राजा अभी भी उसी विभाग के मंत्री बने हुए हैं। ऐ घोटाले तो बानगी मात्र हैं कि संप्रग-2 के कार्यकाल में पहले ही साल कितने घोटाले किए जा चुके हैं जिनका खुलना अभी बाकी है। शायद ही कोई विभाग हो जो भ्रष्टाचार से बजबजा न रहा हो। पूरी की पूरी व्यवस्था भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी है।संप्रग-2 सरकार के सभी मंत्री अहंकार से ग्रस्त हैं। बड़े बोल बोलना और दूसरे की बेइज्जती करना उनके प्रिय शगल है। शशि थरूर ने तो देश के प्रथम कांग्रेसी प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू पर भी कीचड़ उछाल दिया। पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने बीजिंग में हदें पार कर अपनी ही सरकार का मखौल बना दिया। गृह मंत्री चिदम्बरम आनन-फानन में माओवादियों के खात्मे की उद्घोषणायें करते रहे और उन्होंने इस समस्या की जड़ समझने तक की कोई कोशिश नहीं की। परिणामस्वरूप एक सौ से अधिक पुलिस जवान शहीद हो चुके हैं। देश के समन्वित विकास के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। 72 प्रतिशत जनता बीस रूपये प्रतिदिन से कम की आय पर जीवन-यापन कर रही है। असंगठित क्षेत्र में आय और रोजगार की दशा सुधारने के कोई संकेत प्रधानमंत्री भी नहीं दे सके हैं।संप्रग-2 सरकार ने अमरीकी साम्राज्यवाद और उसके संगठन - विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के सामने समर्पण कर दिया। देश की सम्प्रभुता तक से समझौता कर लिया गया। भारत सरकार वही नीतियां लागू कर रही है जो उसके अमरीकी आका चाहते हैं। नाभिकीय दायित्व बिल इसका ज्वलन्त उदाहरण है।अपनी असफलताओं पर पर्दा डालने के लिए संप्रग-2 सरकार के कर्णधार राज्य सरकारों के मत्थे तमाम बातों को मढ़ते रहते हैं। युवराज राहुल अपनी मां के साथ अमेठी एवं रायबरेली संसदीय क्षेत्र का विकास न होने का आरोप वर्तमान बसपा सरकार पर मढ़ते रहते हैं। लम्बे समय तक केन्द्र एवं राज्य सरकार कांग्रेस की रही हैं, उस दौरान उन क्षेत्रों के विकास के लिए कांग्रेसी सरकारों ने क्या किया? यह जनता के लिए सोचने का सवाल है।संप्रग-2 सरकार के पहले साल भी उस पर सरकार बचाने के लिए सीबीआई के दुरूपयोग के आरोप लगते रहे। महंगाई को लेकर वाम मोर्चा के कटौती प्रस्ताव पर लोक सभा में सपा, राजग और बसपा का बहिष्कार का रवैया इसका ताजा उदाहरण है।इसीलिए शायद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 24 मई की अपनी प्रेस कांफ्रेस में अपनी सरकार को कोई नम्बर नहीं दिये जैसाकि वे संप्रग-1 की सरकार के कार्यकाल के दौरान किया करते थे।
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