फ़ॉलोअर
सोमवार, 25 नवंबर 2013
at 4:42 pm | 0 comments |
लोकतंत्र में दंगाईयों का महिमा मंडन
21 नवम्बर उत्तर प्रदेश के राजनैतिक पटल पर हलचल भरा दिन रहा। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के घोषित उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने आगरा में एक रैली को सम्बोधित किया जिसमें मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपियों - संगीत सोम, सुरेश राणा और वीरेन्द्र गुर्जर का अभिनन्दन किया गया तो बरेली में समाजवादी पार्टी की रैली को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने सम्बोधित किया जिसमें इन नेताओं के बगलगीर थे मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपी मौलाना तौकीर। कांग्रेस ने प्रदेश में खाद्य सुरक्षा मुहैया कराने की मांग को लेकर लखनऊ में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन पर प्रदेश सरकार ने लाठी चार्ज करवाया और कांग्रेसी नेतृत्व डरपोकों की तरह एक ही कार पर चढ़ कर अपने को बचाता हुआ नजर आया। इस दृश्य की फोटो तमाम अखबारों ने प्रकाशित की है। एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि मुजफ्फरनगर दंगों के पीड़ितों में से केवल एक वर्ग को राहत देने की अधिसूचना वापस ले।
नरेन्द्र मोदी भाजपा के घोषित प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं तो दूसरी ओर सपा सुप्रीमो बार-बार तीसरे मोर्चे के केन्द्र में सत्ता में आने और खुद के प्रधानमंत्री बनने की घोषणा करते रहते हैं। प्रधानमंत्री बनने के लिए व्याकुल दोनों नेताओं और उनकी पार्टियों ने मुजफ्फरनगर के दंगों के आरोपियों को जिस प्रकार महिमा मंडित किया वह संविधान में निर्दिष्ट धर्म निरपेक्षता की मूल भावना की हत्या तो है ही साथ ही अनैतिक और गैर कानूनी भी है। इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
इसे दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि जिन लोगों को दंगे जैसे सामाजिक और राष्ट्रीय अपराध के लिए जेल के अन्दर होना चाहिए, वे न केवल खुले घूम रहे हैं बल्कि चुनाव जीतने के लिए राजनीतिज्ञ उनका महिमा मंडन कर रहे हैं। लोकतंत्र के लिए यह बहुत ही खतरनाक प्रवृत्ति है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने दंगा पीड़ितों को भी धर्म के आधार पर विभाजित करने का प्रयास किया। उसने केवल दंगा पीड़ित मुस्लिम अल्पसंख्यकों को ही पांच-पांच लाख मुआवजा देने की घोषणा की। ध्यान देने योग्य बात है कि शरणार्थी शिविरों में रह रहे हिन्दू और मुस्लिम दंगा पीड़ित समाज के वंचित तबके से ही हैं। इनमें कोई भी बड़ा आदमी नहीं है। यह उनमें एकता का आधार था परन्तु सरकार ने इन वंचित तबकों में भेदभाव करने का संविधानविरोधी फैसला लिया। सपा सरकार ने अपनी विभाजनकारी नीतियों के चलते विभाजन पैदा करने की कोशिश की और निश्चित रूप से भाजपा को इसका फायदा उठाने को विभाजन की प्रक्रिया की तीव्र करने का एक मौका मुहैया कराया। इसकी घोर निन्दा की जानी चाहिए।
चुनावों में हार-जीत का फैसला अंतोगत्वा आम जनता के वोटों के होता है। फैसलों के बाद बनी सरकारों का खामियाजा भी इसी जनता को भुगतना होता है। इसलिए इस तरह महिमा मंडित होने वाले और ऐसे लोगों को महिमा मंडित करने वालों, दोनों के बारे में आम जनता को ही विचार करना चाहिए कि वे इनके साथ आसन्न चुनावों में किस तरह का व्यवहार करें। जनता अगर इससे चूकती है, तो चुनावों के बाद खामियाजा भी उसे ही भुगतना होगा।
शासक पुराने समय से समाज को विभाजित कर शासन करने की राज नीति का पालन करते आये हैं। लोकतंत्र में भी यह प्रवृत्ति जारी है। देश की अधिसंख्यक जनता मेहनतकश है। वह अपनी मेहनत के बल पर की गई कमाई के सहारे ही अपना जीवनयापन करती है। यह मेहनतकश जनता अगर चुनावों के दौरान विभाजनकारी राजनीति का शिकार होने से खुद को बचा सके तो वह अपना जीवन बदल सकती है, अपना जीवन स्तर बदल सकती है। परन्तु वास्तव में ऐसा हो नहीं रहा है। विभाजनकारी शक्तियां उसे धर्मो, जातियों और क्षेत्रों में बांटने में लगातार सफल होती रही हैं। विभाजनकारी शक्तियों की सफलता के कारण ही जनता चुनावों के पहले ही ऐसे शक्तियों के हाथों हार चुकी होती है। जनता 1947 के बाद से अपनी विफलता का परिणाम लगातार भुगत रही है। विभाजनकारी शक्तियों और विभाजनकारी कारकों की संख्या में खतरनाक बढ़ोतरी लगातार जारी है।
यह प्रक्रिया लोकतंत्र के लिए बहुत ही खतरनाक है। इस प्रक्रिया को रोकने के लिए हमें लगातार प्रयास करते रहने होंगे। जनता में समझदारी विकसित करने के लगातार प्रयास किये जाने चाहिए।
- प्रदीप तिवारी
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
मेरी ब्लॉग सूची
-
CPI Condemns Attack on Kanhaiya Kumar - *The National Secretariat of the Communist Party of India issued the following statement to the Press:* The National Secretariat of Communist Party of I...7 वर्ष पहले
-
No to NEP, Employment for All By C. Adhikesavan - *NEW DELHI:* The students and youth March to Parliament on November 22 has broken the myth of some of the critiques that the Left Parties and their mass or...9 वर्ष पहले
-
रेल किराये में बढोत्तरी आम जनता पर हमला.: भाकपा - लखनऊ- 8 सितंबर, 2016 – भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने रेल मंत्रालय द्वारा कुछ ट्रेनों के किराये को बुकिंग के आधार पर बढाते चले जाने के कदम ...9 वर्ष पहले
Side Feed
Hindi Font Converter
Are you searching for a tool to convert Kruti Font to Mangal Unicode?
Go to the link :
https://sites.google.com/site/technicalhindi/home/converters
Go to the link :
https://sites.google.com/site/technicalhindi/home/converters
लोकप्रिय पोस्ट
-
बैलट से ही कराये जायें निकाय चुनाव: भाकपा लखनऊ- 13 अप्रेल 2017, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने मांग की है कि आगामी जुलाई से...
-
आओ ! दुख और जंज़ीर के साथियों हम चलें कुछ भी न हारने के लिए कुछ भी न खोने के लिए सिवा अर्थियों के आकाश के लिए हम गाएंगे भेजेंगे अपनी आशाएँ क...
-
The following is the text of the political resolution for the 22 nd Party Congress, adopted by the national council of the CPI at its sess...
-
मिल कर क़दम बढ़ाएँ हम जय, फिर होगी वाम की ! शोषित जनता जागी है पीड़ित जनता बाग़ी है आएँ, सड़कों पर आएँ, क्या अब चिंता धाम की ! ना यह अवसर छोड़ेंगे...
-
Hindustan Times today carried the following news : AgenciesNew Delhi, June 26, 2010First Published: 13:16 IST(26/6/2010)Last Updated: 19:10 ...
-
लखनऊ- २८ जनबरी, २०१५. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार जन समस्याओं और जन आन्दोलनों की अनद...
-
वाशिंगटनः आतंकी संगठन अलकायदा के खिलाफ लड़ाई के नाम पर अमरीका दुनिया में अपनी दखलंदाजी बढ़ाता जा रहा है। इस संबंध में एक रिपोर्ट के अनुसार अमर...
-
आज एक बात पर बेहद आश्चर्य हो रहा है.अपने एक साल से अधिक के शासन काल में मुख्यमंत्री,उ.प्र.श्री अखिलेश यादव ने एक से एक शातिर और कुख्यात अधिक...
-
लखनऊ 27 अप्रैल। देश की जनता को तबाह कर रहे मंहगाई और भ्रष्टाचार की जननी कांग्रेस नीत केन्द्र सरकार को बेनकाब करने, कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचा...
-
लखनऊ- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहाकि जिस संत ने अपना सारा जीवन सत्य की खोज और असत्य के खंडन में लगा दिया,...
0 comments:
एक टिप्पणी भेजें