भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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गुरुवार, 1 जुलाई 2010

महंगाई के विरोध में 5 को सवाई माधोपुर बंद

दैनिक भास्कर ने आज छापा है :
जुलाई को भारत बंद के आह्वान के तहत सवाई माधोपुर बंद करने का निर्णय लिया गया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव रामगोपाल गुणसारिया ने आम जनता से बंद को सफल बनाने की अपील की.
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भाकपा ने महंगाई के विरोध में लगाया जाम

dainik bhaskar mein aaj chhapa hai :
भास्कर न्यूज & ramgarh diesel, केरोसिन, रसोई गैस एवं पैट्रोल पदार्थों की कीमतों में वृद्धि के विरोधस्वरूप भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की रामगढ़ इकाई की ओर से बुधवार को अलवर-दिल्ली मार्ग जाम कर केंद्र सरकार विरोधी नारे लगाए गए। करीब एक घंटे तक चले जाम के दौरान दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार जुड़ गई। भाकपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य बाजार से रैली निकालकर प्रदर्शन करते हुए तहसील कार्यालय के बाहर मंच पर सरकार विरोधी नारेबाजी की। इस अवसर पर भाकपा सचिव शंभू सोनी ने कहा कि यदि सरकार ने वक्त रहते उचित कदम नहीं उठाए तो देश में अराजकता का माहौल बन जाएगा। जिसकी जिम्मेवार कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी के आश्रय में चल रही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार होगी। जाम और प्रदर्शन में भाकपा की जिला काउंसिल के सदस्य धर्मचंद जैन, रामधन सैनी, इब्राहिम खां, नजीर अहमद व गिर्राज मारवाड़ी सहित दर्जनों काम्युनिस्टों ने भाग लिया।
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बुधवार, 30 जून 2010

पैट्रो पदार्थों में मूल्यवृद्धि के खिलाफ जताया रोष

bhaskar ne aaj chhapa hai :
बलाचौर & पैट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी को लेकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने यूपीए सरकार का पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कामरेड परमिंदर मेनका भिंदा ने कहा कि केंद्र मनमानी पर उतारू है। महंगाई घटाने की बजाए बढ़ाती जा रही है। कामरेड प्यारे लाल ने कहा कि पैट्रो पदार्थों व घरेलू गैस की कीमतें बढ़ाकर सरकार ने लोक विरोधी चेहरा बेनकाब कर दिया है। कामरेड बख्शीश सिंह ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि केंद्र सरकार जिस तरह से गरीब विरोधी फैसले रही है जनता उसे माफ नहीं करेगी। इस मौके पर फौजी चन्नण राम, हेमराज माणेवाल, दविंदर कौर, मलकीत गहूंण, अमरजीत माणेवाल, धर्मपाल सियाणा, शिंदर रत्तेवाल, नरिंदर रत्तेवाल, अश्विनी मेनका, सोढ़ी राम मौजूद थे।बगीचा सिंह, कुलदीप, बूटा मोहम्मद आदि मौजूद रहे।
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भाकपा द्वारा घाटी में शांति की अपील

thatshindi ne aaj chhapa hai :
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के उप महासचिव सुधाकर रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी कश्मीर में जिस तरीके से हिंसा फैल रही है, उससे वाकई में दुखी है।
रेड्डी ने कहा, "भाकपा और वामपंथी पार्टियों की ओर से हम घाटी में शांति बहाली की अपील करते हैं।"
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1857 में हम आज ही के दिन लखनऊ में जीते थे

30 जून 2010वार्तालखनऊ। आजादी की लड़ाई के लिए अंग्रेजों के खिलाफ 1857 में मेरठ से शुरू हुए गदर की आंच धीरे-धीरे पूरे देश में पहुंची और आज के दिन ही यानी 30 जून को राजधानी लखनऊ के चिनहट इलाके में अंग्रेजों को परास्त होना पड़ा।चिनहट इलाके का महाबीर जी का मंदिर इस युद्ध का गवाह बना।मंदिर के पास आजादी के लिए लड़ रहे विद्रोहियों और अंग्रेज सेना के बीच हुए युद्ध में विद्रोहियों की जीत हुई। अंग्रेज भागकर रेसीडेंसी में छुप गए। इस युद्ध में दो सौ से ज्यादा अंग्रेज सैनिक मारे गए और उनकी पांच तोपों पर विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया।

भारत का इतिहास राष्ट्रीय अभिलेखागार में संरक्षित है

एक जुलाई 1857 को विद्रोहियों ने मच्छी भवन पर आक्रमण किया। युद्ध में अंग्रेज परास्त हुए और मच्छी भवन पर विद्रोहियों का अधिकार हो गया। इसी रात अंग्रेज सेनापति लॉरेंस ने मच्छी भवन के बारूदखाने को तोप से उड़वा दिया। दो जुलाई को विद्रोहियों ने रेसीडेंसी पर आक्रमण कर दिया। इस हमले में लॉरेंस बुरी तरह घायल हुआ और चार जुलाई को उसकी मौत हो गई। 30 जून 1857 से शुरू हुई लड़ाई 23 मार्च 1858 तक चली और इसमें लखनऊ पूरी तरह अंग्रेजों के कब्जे में आ गया। इस बीच में मौका कभी अंग्रेजों के हाथ आता, तो कभी विद्राहियों के हाथ। विद्रोहियों ने पांच जुलाई 1857 को नवाब वाजिद अली शाह के ग्यारह साल के बेटे विरजिस कादर को लखनऊ का नवाब घोषित कर दिया और बेगम हजरत महल ने उसके नाम पर शासन का कार्य भार देखना शुरू कर दिया।विद्रोहियों ने एक बार फिर रेसीडेंसी पर 31 जुलाई को हमला किया, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। नवंबर की 16-17 और 18 तारीख को लखनऊ की गलियों में भयंकर कत्लेआम हुआ। आलमबाग, कैसरबाग, सिकंदरबाग, शाह नजफ रोड और दिलकुशा लड़ाई के प्रमुख केंद्र रहे। आलमबाग के रास्ते जब अंग्रेज लखनऊ में प्रवेश नहीं कर सके तो वे दिलकुशा में जमा हुए और वहां से सिकंदरबाग की ओर कूच कर गए।
‘ईस्ट इंडिया कंपनी’ वापस आ रही है
धीरे-धीरे विद्रोहियों के हौसले पस्त होते गए, क्योंकि अंग्रेज बड़ी योजना के साथ लड़ रहे थे। अंग्रेजों ने 23 मार्च 1858 को रेसीडेंसी पर फिर से अधिकार कर लिया और पूरे लखनऊ पर उनका शासन हो गया।इसी के साथ लखनऊ में गदर को दबा दिया गया।
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Fuel price hike hits India’s poor

World Socialist Web Site wsws.org
Published by the International Committee of the Fourth International (ICFI)
PUBLISHED THE FOLLOWING ITEM ON IT'S WEBSITE TODAY :
By Saman Gunadasa 30 June 2010
The Indian government last Friday slashed fuel price subsidies in a move that will boost already high inflation, impact heavily on working people and provoke unrest. The price of gasoline is now to be determined by the market for the first time since December 2003. The government has announced that diesel and other fuels will also be deregulated.
Following the government’s decision, the price of petrol jumped by 3.50 rupees per litre or 7 percent, diesel by 2 rupees per litre or 5 percent, an LPG (cooking gas) cylinder by 35 rupees and litre of kerosene by 3.50 rupees. The higher cost of transport, cooking and lighting will immediately affect hundreds of millions of people. The price of other products will also rise as transport costs flow through the economic chain.
The finance ministry’s chief economic adviser Kaushik Basu conservatively estimated that the deregulation would add 0.9 percent to inflation. India’s benchmark wholesale price index for May was up 10.16 percent compared to a year before. The inflation rate for food for the week ending June 12 was 16.9 percent year-on-year and was even higher at 17.6 percent for the basic commodities sub-index which includes items such as rice and wheat.
The ruling Congress-led United Progressive Alliance (UPA) is under growing pressure to slash its budget deficit. Government finances in every country are being closely scrutinised by global markets as the sovereign debt crisis that emerged in Greece has spread to other parts of Europe.
Under the impact of the global financial crisis, India’s growth rate fell from 9.8 percent growth in 2007-08, its slowest pace since 2003, to 6.7 percent in 2008-09 before recovering somewhat to 7.4 percent in 2009-10. In an interview in Washington on June 23, India’s Finance Minister Pranab Mukherjee expressed concerns that Indian exports to the European Union, which constitute about 23 percent of total exports, could be affected by the EU debt crisis.
The government made major concessions to big business in three stimulus packages introduced between December 2008 and March 2009, boosting the fiscal deficit from 2.6 percent of gross domestic product (GDP) in 2007-08 to 6.7 percent in the 2009-10 fiscal year.
The combined central and state government debts have risen to around 80 percent of GDP.
Now the government is imposing these burdens on working people. Its February budget pledged to slash the deficit from 6.9 percent of GDP in the last financial year to 5.5 percent this year and 4.1 percent in 2012-13.
At last year’s G20 summit, all countries including India gave a commitment to eliminate energy subsidies. The announcement on fuel prices came just prior to last weekend’s G20 leaders meeting in Toronto. Defending the decision, Indian Prime Minister Manmohan Singh declared that setting petrol and diesel prices free were “much-needed reforms.”
The imposition of market pricing on oil products is part of a broader pro-market “reform” agenda being pushed through by the UPA government, including the privatisation and restructuring of state-owned enterprises. These plans have already provoked strikes by telecom workers in April and coal miners in May against the government’s plans to disinvest in these sectors.
Big business welcomed the fuel price deregulation. The Confederation of Indian Industry declared: “Most importantly, the move has shown that the government has the ability to implement policy changes even if they are politically difficult.”
The fuel price hikes will impact heavily on the majority of the population. According to official statistics, 37 percent of India’s population of 1.1 billion lives below the poverty line. More than 70 percent lives on less than $US2 a day.
At the same time, according to a World Wealth Report released on June 23 by Capgemini and Merrill Lynch Wealth Management, the number of dollar millionaires in India in 2009 increased to 126,700, pushing the country into 15th position in the world.
The price rises immediately provoked angry protests over the weekend. A demonstration organised by the Hindu supremacist Bharatiya Janata Party (BJP) blocked traffic in the capital of New Delhi with protesters shouting “Down with the government”, and burning effigies of the prime minister. The BJP also organised a protest in the Punjab.
When in power between 1998 and 2004, however, the BJP was instrumental in extending the pro-market agenda and the opening up of India to foreign investors that was started under the previous Congress-led government. The BJP took the first steps towards establishing market-based fuel prices, with a system of automatic rises in line with international prices, but abolished it in the face of widespread opposition.
Other protests were organised by Communist Party of India-Marxist (CPM) in West Bengal and Kerala where the party heads the state governments. Thousands of people were affected by a 24-hour strike by bus and taxi operators in Calcutta. Protesters in the state capital chanted, “Roll back the price increases.” A CPM leader Brinda Karat told the media: “This move shows how utterly insensitive and callous the government is to the terrible impact of price rises on the people of this country.”
The CPM and the Communist Party of India (CPI), together with the right-wing BJP, are supporting a nationwide strike against the fuel price rises on July 5. The protest is also being backed by the BJP’s allies and smaller leftists and regionally-based parties. The CPM and its allies issued a statement denouncing the price rises as “another cruel blow” to the people and urged maximum support to pressure the government to back down.
Like the CPM’s one-day strike in April over rising food prices, the CPM’s latest protest is not to mobilise the working class as an independent political force as the rallying point for a struggle against capitalist rule. Rather it is directed at subordinating popular anger to the party’s political manoeuvring as well as to refashion its tattered credentials as an oppositional and anti-business party.
The strike was timed to coincide with a “cut motion” in parliament instructing the government to roll back increases in excise and custom duties on petrol and diesel in the budget. The CPM made clear at the time that its intention was not to “destabilise” the government, pointing out that if that had been its aim it would have moved a no-confidence motion.
The CPM and its “left” allies, which have thoroughly integrated themselves into the Indian political establishment, function as a convenient political safety valve to contain the hostility of the masses. The party backed the UPA government during its first four years in office and was responsible for its anti-working class policies. CPM-led state governments in West Bengal, Kerala and Tripura are notorious for their ruthless implementation of similar pro-market economic policies.
Having let off steam at its one-day protest in April, the CPM took no further national action. The UPA government ignored the strike and proceeded to increase fuel prices. Again the CPM, in a de facto alliance with the BJP, has stepped in to contain the widespread opposition to the latest decision.
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CPI CONDEMN KILLING OF CRPF JAWANS BY MAOIST IN CHHATISGARH

It is unfortunate that 26 CRPF Jawans were killed in different incidents yesterday and 8 Jawans hurt today by the blasts, triggered by the Maoists in Chhattisgarh.

The Communist Party of India condemns this mindless massacre of Jawans by the Maoists. It may be recalled that in the recent period, there were several incidents, including the sabotage of a train in which hundreds of innocent and ordinary people were killed.

We would like to remind the Maoists that this kind of heinous actions would only be self-defeating.

We urge upon the Maoists to desist from this kind of heinous massacre of the innocents.
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक (हैदराबाद, 12 से 14 जून 2010) द्वारा पारित प्रस्ताव - मणिपुर

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद घोषणा करती है कि मणिपुर और पूर्वोत्तर क्षेत्र में वर्तमान संकट भारत सरकार के गलत कदमों के कारण है।
राष्ट्रीय परिषद भारत सरकार से अपील करती है कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 39 और 53, जो मणिपुर की दो जीवन रेखाएं हैं, पर 63 दिन पुराने अवरोध को खत्म करने के लिए तुरन्त हस्तक्षेप करें। यह अवरोध नागा संगठनों ने 12 अप्रैल 2010 से ही कर रखा है।
भारत सरकार और एनएससीएन के मध्य 13 साल पुरानी समझौता वार्ता, जिसमें हमारे देश के पूर्वोत्तर राज्यों की सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता शामिल है, पारदर्शी नहीं हैं तथा कोई नहीं जानता कि क्या हो रहा है।
राष्ट्रीय परिषद पूर्वोत्तर राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता को अक्षुण्य रखने, जो संविधान में उल्लेखित है तथा संप्रग-1 के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में जिसे दोहराती है और भारत सरकार से कहना चाहती है कि वह इस क्षेत्र की मौजूदा सीमाओं को बनाये रखे।
राष्ट्रीय परिषद भारत सरकार से यह भी अपील करना चाहती है कि वह नगा नेता मुवईया के मणिपुर में प्रवेश करने की योजना को तुरन्त रोके ताकि वहां व्याप्त तनाव को कम किया जा सके।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक (हैदराबाद, 12 से 14 जून 2010) द्वारा पारित प्रस्ताव - गाजा पट्टी पर इस्राइली हमले की निन्दा

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद गाजा पट्टी के लिए राहत साम्रगियां लेकर जा रहे जहाजों पर इस्राइल द्वारा हमला करने की निन्दा करती है। गाजा पट्टी की नाकेबंदी का सामना करना पड़ रहा है। छह जहाजों पर अनेक देशों के करीब 700 कार्यकर्ता सवार थे। वे 10,000 टन मानवीय सहायता लेकर गाजा जा रहे थे जहां करीब तीन सालों से नाकेबंदी चल रही हैं.
गाजा तट से 65 किमी दूर अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र में जहाजों पर हमला करने से पता चलता है कि इस्राइल को अंतर्राष्ट्रीय कानून या विश्व जनमत की कोई परवाह नहीं है। इस हमले में अनेक लोग मारे गये तथा कई घायल हो गये थे।
इस्राइल की इस कार्रवाई से एक बार फिर यह साबित हो गया कि इस्राइल विश्व जनमत और मानवीय मूल्यों को धता बताते हुए किस हद तक जा सकता है। यह एक तथ्य है कि फिलिस्तीनी जनता के खिलाफ उस लड़ाई में अमरीका इस्राइल की पूरी मदद कर रहा है।एक तरफ जहां पूरा विश्व इस्राइली हमले की निन्दा कर रहे हैं, वहीं भारत सरकार ने काफी दबे स्वर में प्रतिक्रिया व्यक्त की है क्योंकि भारत इस्राइल के साथ सैनिक एवं अन्य क्षेत्रों में सहयोग कर रहा है। पार्टी मांग करती है कि भारत सही रवैया अपनाये और इस्राइल की निन्दा करे।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद मांग करती है कि इस्राइल गाजा पट्टी से अपनी नाकेबंदी तुरन्त समाप्त करे तथा वहां के लोगों तक मानवीय सहायता पहुंचने दें।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद सभी शांति प्रिय एवं साम्राज्यवाद विरोधी ताकतों का आह्वान करती है कि वे इस्राइली हमले की निन्दा करें और फिलिस्तीनी जनता के साथ एकजुटता प्रकट करें।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक (हैदराबाद, 12 से 14 जून 2010) द्वारा पारित प्रस्ताव - यूरोपीय यूनियन और इस्राइल के साथ मुक्त vyapa

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद यूरोपीय यूनियन और इस्राइल के साथ बिना किसी सार्वजनिक चर्चा के मुक्त व्यापार समझौता करने के प्रयास पर गंभीर चिंता एंव आपत्ति प्रकट करती है।
यह खतरनाक प्रवृत्ति है कि ये समझौता वार्ता गोपनीय ढंग से की जा रही है जिसमें कोई पारदर्शिता नहीं है।
यूरोपीय यूनियन में 27 विकसित यूरोपीय देश शामिल हैं। वहां कृषि काफी विकसित है और किसानों को बड़े पैमाने पर अनुदान दिया जाता है। इस्राइल में भी लगभग यही स्थिति है।
इन देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने का मतलब है कि हमारे किसानों को यूरोप एवं इस्राइल के किसानों के साथ गैर-बराबरी के स्तर पर प्रतिस्पर्घा करनी पड़ेगी, जिससे हमारी अर्थव्यवस्था चौपट हो जायेगी क्योंकि उनके उत्पादों का निःशुल्क आयात करने दिया जायेगा। इस बात की भी आशंका है कि इन समझौतों से हमारे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और खुदरा व्यापार पर असर पड़ेगा क्योंकि यूरोप और इस्राइल की बहुराष्ट्रीय कंपनियां इन क्षेत्रों में भी प्रवेश करेगी जैसाकि समझौते में प्रावधान हैं यह भी रिपोर्ट आयी है कि यूरोपीय यूनियन को बौद्धक सम्पदा संरक्षण का प्रावधान होगा जिसका घातक परिणाम होगा तथा हमारे लोगों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सस्ती दवा बनाने के भारत के हित प्रभावित होंगे। साथ ही किसानों की मदद करने के लिए कृषि उत्पादों की वसूली करने का अधिकार भी प्रभावित होगा। इसके अलावा हमें कृषि में जीएम टेक्नोलॉजी जैसी नई तकनीकी अपनाने के लिए मजबूर किया जायेगा।इस सन्दर्भ में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद मांग करती है कि भारत सरकार यूरोपीय यूनियन और इस्राइल के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने के लिए चल रही समझौता वार्ताओं के बारे में एक श्वेत पत्र जारी करें तथा इस दिशा में आगे बढ़ने से पहले संसद में इस पर बहस कराये।
भारत सरकार ने जिस गोपनीय एवं षड़यंत्रपूर्ण तरीके से इतनी महत्वपूर्ण समझौता वार्ता चलायी, राष्ट्रीय परिषद उसकी निन्दा करती है।हम भारत के लोगों से, जिन्हें हमारे देश के भविष्य की चिंता है, अपील करते हैं कि वे वास्तविक तथ्यों के आधार पर इस बारे में राष्ट्रव्यापी बहस के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करें इसके पहले कि भारत सरकार समझौता वार्ता करने की दिशा में आगे बढ़ें।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक (हैदराबाद, 12 से 14 जून 2010) द्वारा पारित प्रस्ताव - श्रीलंका के तमिल लोगों की समस्याओं पर

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद श्रीलंका की तमिल समस्या, जिसका तमिलनाडु की राजनीति पर सीधा प्रभाव पड़ता है, से निपटने में भारत सरकार की घोषणाओं तथा कार्रवाईयों में असंगति और निर्मम रवैये पर निराशा प्रकट करती है। इसलिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद भारत सरकार से अनुरोध करती है कि श्रीलंका के तमिल शरणार्थियों की दयनीय स्थिति पर विचार करे जो 1990 से ही लगातार तमिलनाडु आते रहे हैं और तमिलनाडु के शिविरों में जिनकी संख्या करीब चार लाख तक पहुंच गयी है तथा जिनकी देखभाल केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा की जा रही है।
चूंकि वे न तो श्रीलंका वापस जाने की स्थिति में हैं और न ही उन्हें भारतीय नागरिक माना जा रहा है, इसलिए वे एक कैप्टिव की जिंदगी जी रहे हैं, जिसका शीघ्र समाधान होना जरूरी है।
तमिलनाडु में रहने वाले शरणार्थियों को यह विकल्प देना चाहिए कि या तो वे श्रीलंका वापस चले जाएं या उन्हें भारत की नागरिकता दी जाए।
यद्यपि श्रीलंका सरकार ने घोषणा की है कि आतंकवाद के खिलाफ उनकी लड़ाई 17 मई 2009 को सफलतापूर्वक खत्म हो गयी, पर विस्थापित तमिल लोगों को, जिनकी संख्या साढ़े चार लाख है, एक साल से भी अधिक समय से विभिन्न शिविरों में कैप्टिव बनाकर रखा जा रहा है। यह मानवाधिकार उल्लंघन का स्पष्ट मामला है। इसलिए भारत सरकार की श्रीलंका सरकार से कहना चाहिए कि वह शिविरों को समाप्त करे तथा तमिल नागरिकों को अपनी पसंद की जगहों में वापस जाने देना चाहिए।
श्रीलंका सरकार ने अपने देश में लगभग सभी पिं्रट एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया को बन्द कर दिया है। इसलिए लोगों को कुछ पता नहीं चल रहा है कि श्रीलंका में क्या हो रहा है यहां तक कि दूरदर्शन को भी श्रीलंका में काम करने की इजाजत नहीं हैं। श्रीलंका सरकार की इस घोर अलोकतांत्रिक कार्रवाई की निन्दा की जानी चाहिए तथा इन प्रतिबंधों को हटाने के लिए कदम उठाये जाने चाहिए ताकि वहां की वास्तविक स्थिति के बारे में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रिपोर्ट प्राप्त की जा सकें।
भारत सरकार मानवीय आधार पर उदारतापूर्वक सभी प्रकार की सहायता दे रही है। हम भारत सरकार से अपील करते हैं कि वह एक भारतीय एजेंसी का गठन करें जो पुनर्वास कार्यक्रमों पर नजर रखेगी और उसमें हिस्सा लेगी तथा एक समय सीमा में स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए काम करेगी।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक (हैदराबाद, 12 से 14 जून 2010) द्वारा पारित प्रस्ताव - भूमि सुधार के सम्बंध में

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद गंभीर चिंता के साथ इस तथ्य को नोट करती है कि सरकार की नवउदारवादी नीतियों ने कांग्रेस और भाजपा शासित राज्यों में भूमि सुधार की प्रक्रिया को ठप्प कर दिया है।यह नीति उद्योगीकरण और विशेष आर्थिक क्षेत्रों के निर्णय आदि के नाम पर उनकी मूल्यवान कृषि भूमि के अधिग्रहण के जरिये किसानों और गांवों के आम लोगों पर नये हमलों का पथ प्रशस्त करती है।उद्योगों को स्थापित करने के नाम पर और खदानों के लिए आदिवासियों को उनकी जमीन और घरों से खदेड़ा जा रहा है। सुपर-मुनाफों के लिए अपने जमीन छीनों अभियान में खदान माफिया जमीन को बर्बाद करते हैं और गरीब आदिवासियों को उनके घरों से बाहर खदेड़ देते हैं, उन्हें रोजी-रोटी से वंचित कर देते हैं। इस पृष्ठभूमि में, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद अपनी तमाम यूनिटों का आह्वान करती है कि वे भूमि सुधारों के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान में उतर पड़ें।भूमि सुधार आंदोलन में सीलिंग से बची फालतू जमीन और सरकारी जमीनों को भूमिहीन लोगों को देने और गरीबों के लिए एक व्यापक आवास योजना की मांग की जानी चाहिए।भूमि सुधार आंदोलन ब्रिटिश लोगों द्वारा बनाये गयी पुराने पड़े 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून को निरस्त करने की मांग भी करेगा।इसके स्थान पर संसद एक ऐसा कानून बनाये जो खाद्य सुरक्षा के लिए उपजाऊ जमीन का बचाव करे और सार्वजनिक हित के नाम पर अंधाधुंध तरीके से जमीन के अधिग्रहण को बंद करें।यदि कृषि जमीन का अधिग्रहण किया जाये तो प्रभावित किसानों को उसका वाजिब मुआवजा मिलना चाहिए। और उनका पूरी तरह पुनर्वास किया जाना चाहिए।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद समूची पार्टी का आह्वान करती है कि वह भूमि सुधारों के लिए और जमीन के जबरन अधिग्रहण के विरूद्ध आन्दोलन में उतर पड़ें।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक (हैदराबाद, 12 से 14 जून 2010) द्वारा पारित प्रस्ताव - विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश के सम्बंध म

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद देश में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस शुरू करने की इजाजत देने की भारत सरकार की कोशिश की भर्त्सना करती है। इससे उच्च शिक्षा का क्षेत्र के दरवाजे मुनाफे के लिए लालायित विदेशों के लोगों के लिए खुल जाते हैं जो किसी एकैडमिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के बिना ही यहां अपने कैंपस खोलना चाहेंगे। भारत में जो तथाकथित विदेशी विश्वविद्यालय आने की कोशिश कर रहे हैं, उनको अपने ही देश में कोई खास मान्यता या विश्वसनीयता हासिल नहीं है।बिना किसी नियामक तंत्र के विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश से उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र को, जिसकी हालत बड़ी संख्या में शुद्धता निजी पेशेवर कालेजों के प्रवेश के कारण पहले ही खस्ता है, नुकसान पहुंचेगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग/मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया/एआईसीटीई/मानव संसाधन विकास मंत्रालय उच्च शिक्षा में कोई विश्वसनीय नियामक तंत्र को नहीं बना पाये हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद दोहराना चाहेगी और सरकार को याद दिलाना चाहेगी कि उच्च शिक्षा पर यूनेस्को के प्रस्ताव में (जिसे उच्च शिक्षा के सम्बंध में विश्व कांफ्रेंस 2009 में पारित किया गया था) उच्च शिक्षा को जनहित के रूप में रखने को कहा गया था।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक (हैदराबाद, 12 से 14 जून 2010) द्वारा पारित प्रस्ताव - उल्फा से वार्ता के सम्बंध में

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद ऑल असम कन्वेंशन के संयोजकों द्वारा एक ऐसा समाधान निकालने के लिए जो कुल मिलाकर असम के लोगों के लिए लाभप्रद और स्वीकार्य हो, भारत सरकार और यूनाईटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम (उल्फा) के बीच वार्ता शुरू कराने के सम्बंध में उठाई गई पहल कदमी की भूरि-भूरि प्रशंसा करती है।इस कन्वेंशन में 130 सामाजिक, राजनैतिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि और साथ ही अन्य आमंत्रित लोग शामिल हुए थे।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद भारत के प्रधानमंत्री से निवेदन करती है कि भारत सरकार और उल्फा के बीच वार्तालाप के सम्बंध में नेशनल कन्वेंशन की सिफारिशों को पेश करने के लिए कन्वेंशन द्वारा नियुक्त स्टीयरिंग कमेटी को निमंत्रित करें।
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक (हैदराबाद, 12 से 14 जून 2010) द्वारा पारित प्रस्ताव - खाद्य सुरक्षा और मंहगाई

गंभीर खाद्य असुरक्षा और आसमान छूती महंगाई के मद्देनजर यह स्पष्ट है कि यूपीए-दो सरकार आज जनता की वास्तविक समस्याओं को हल करने और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा, जिसका वायदा किया गया था, पर अमल करने के मामले में गंभीर नहीं है। खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के भूमंडलीय भूख सूचकांक में 84 देशों में भारत अत्यंत नीचे 65वें स्थान पर है। इससे देश में गंभीर खाद्य असुरक्षा का पता चलता है। प्रति व्यक्ति खाद्य उपलब्धता 1990 के वर्षों के बाद गिरती जा रही है। बाल कुपोषण एवं रक्ताल्पता की शिकार महिलाओं के संबंध में आंकड़े चिंताजनक हैं।खाद्य सामग्रियों में मुद्रा स्फीति की दर 16 प्रतिशत से लगातार ऊंची चल रही है। खाद्य अनुदान में अधिक आबंटन करने के बजाय संप्रग-दो सरकार ने इस अनुदान को 2009-10 के 56 हजार करोड़ रूपये से घटाकर 2010 में 55578 करोड़ रूपये कर दिया है।इस गंभीर स्थिति का तकाजा है कि सर्वसुलभ सार्वभौम सार्वजनिक वितरण प्रणाली को फिर से शुरू किया जाये। पर सरकार ऐसा करने को तैयार नहीं। दूसरी तरफ सरकार केरल, जो खाद्यान्नों की कमी वाला राज्य है, जैसे राज्यों को स्वीकृत खाद्यान्न कोटे का आबंटन नहीं करती।इसके अलावा प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून में और भी बुनियादी दोष हैं। न्यायमूर्ति बाधवा की अध्यक्षता में बनी समिति ने इस संबंध में अपनी जो रिपोर्ट सर्वोच्च न्यायालय को दी, उसमें सरकार के सुझावों की कमियों-खामियों को उजागर किया गया है। सरकार के प्रस्तावित कानून से अन्त्योदया योजना के तहत जिन लोगों को दो रूपये प्रति किलो के भाव पर 35 किलो गेहूं/चावल हर महीने मिलता है, वह बंद हो जाएगा। प्रस्तावित कानून की यह विफलता यह है कि उसमें इस बात को स्वीकार नहीं किया गया है कि खाद्य सुरक्षा सर्वव्यापक, सार्वभौमिक (सभी नागरिकों के लिए होनी चाहिए)।अतः भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद कीमतों पर अंकुश लगाने में सरकार की विफलता और खाद्य अर्थव्यवस्था के प्रबंधन और मुद्रास्फीति को कम करने के लिए बाजार की ताकतों पर इसकी पूरी तरह निर्भरता की भर्त्सना करती है। वह अपनी इस मांग को दोहराती है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सार्वभौम बनाया जाये (अर्थात इसका फायदा हरेक को मिले)। भोजन तक उनकी पहुंच से और आम लोगों की बुनियादी जरूरतों से जनता को वंचित करने के लिए वित्तीय कठिनाईयां कभी कोई तर्क नहीं हो सकती। प्रस्तावित खाद्य अधिकार कानून को फिर से इस तरह ड्राफ्ट किया जाना चाहिए कि उसमें खाद्यान्नों की उपलब्धता एवं पोषक आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद आशा करती है कि नवगठित राष्ट्रीय सलाहकार परिषद जनता की परेशानियों के प्रति संवेदनशील होगी और उसके सरोकारों के प्रति तर्कसंगत रवैया अपनायेगी।पार्टी अपनी यूनिटों का आह्वान करती है कि वे महंगाई के खिलाफ और खाद्य सुरक्षा के लिए अपने अभियान को तेज करें। वह पार्टी इकाईयों का आह्वान करती है कि वे इन मुद्दों पर पहली जुलाई 2010 को नई दिल्ली में होने वाले वामपंथी पार्टियों के राष्ट्रीय सम्मेलन को सफल बनायें।

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‘Cong govt callously hiked fuel price’

India Bloom News Service published the following news today :

Left parties – Communist Party of India (CPI), Communist Party of India-Marxist (CPI-M), Revolutionary Socialist Party (RSP) and Forward Bloc (FB) on Tuesday jointly issued a statement to announce a 12-hour All India Hartal to protest the recent fuel hike on July 5.“The Congress-led government has delivered another cruel blow to the people by increasing the price of petrol, diesel, kerosene oil and cooking gas steeply and by deregulating the prices and leaving it to the market,” said the statement signed by statement signed by Prakash Karat (CPI-M), A B Bardhan (CPI), Debabrata Biswas (FB) and T J Chandrachoodan (RSP).“This comes after its refusal to take any effective step to curb price rise of food items and essential commodities which is causing acute suffering to the people,” read the statement.The statement further said: “On top of the food inflation at nearly 17 per cent and the general inflation rate in double digits, the Congress-led government has callously raised the fuel prices making the burden on the people unbearable. The government is putting forth deceptive arguments to justify the hike and refuses to listen to the protests of the people.”The Left parties said the only way for the people is to launch a ‘powerful collective protest’ to compel the government to heed their voice to withdraw the hikes.“The Left parties have consulted other secular opposition parties. Along with the Left parties, the AIADMK, Telugu Desam Party, Samajwadi Party, Biju Janata Dal, Janata Dal (S) Indian National Lok Dal have decided to call for a countrywide hartal on July 5. Discussions with some other secular opposition parties to join the hartal is also on,” the statement said. The shutdown will be from 6.00 a.m. to 6.00 p.m.All essential services like supply of water, milk, electricity, hospital and emergency services will be exempted from the hartal.Meanwhile, India’s main Opposition, Bharatiya Janata Party (BJP), has called for a 24-hour nationwide shutdown (Bharat Bandh) against price rise the same day (July 5).“In order to protest against this unjustified hike in petroleum prices and the total ineptitude of UPA Government to address this problem, BJP President Nitin Gadkari has given a call for a Bharat Bandh on 5th July,” read a BJP statement on Tuesday.Fuel prices were deregulated by the Indian government on June 25, leading to a sharp rise in prices of petrol, diesel, kerosene and LPG cylinders even as the Opposition parties as well as several coalition partners of the ruling UPA severely criticized the hike.
Petrol price was hiked by Rs 3.73 while diesel price is increased by Rs 2. Kerosene prices rose by Rs 3.
LPG cylinders would cost Rs 35 more now on.
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मंगलवार, 29 जून 2010

महंगाई के विरोध में भाकपा का प्रदर्शन

दैनिक भास्कर ने आज छापा है कि:
जोधपुर. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में बढ़ोतरी के विरोध में सोमवार को यूनियन मैदान, सोजती गेट पर प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पुतला फूंका। पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुरी तिराहे से लेकर नई सड़क चौराहे तक जुलूस निकालकर डीजल, पेट्रोल, केरोसिन व रसोई गैस के दाम बढ़ाने पर विरोध जताया। प्रधानमंत्री का पुतला फूंकने से पहले सभा का आयोजन किया गया। इसमें भाकपा जिला सचिव विजय मेहता ने पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतें बढ़ाने को जन विरोधी कदम बताया। मेहता ने कहा कि भाकपा ने बढ़ी कीमतों के विरोध में आंदोलन का शुभारंभ कर दिया है। सभा को बीएम नाथानी, एसआर लूंकड़, परमेंद्र, द्वारकेश व्यास, सद्धिक कुरेशी, सन्नू महाराज आदि ने संबोधित किया।
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महंगाई के खिलाफ 5 जुलाई आम हड़ताल को सफल बनाओ - वामदलों का आह्वान

लखनऊ 29 जून। कांग्रेस आई नेतृत्व वाली केन्द्र की संप्रग सरकार ने पेट्रोल, डीजल, किरासन तेल और रसोई गैस के दाम बढ़ा दिये हैं। महंगाई पर रोक लगाने के लिए उचित कदम उठाने की बजाय पेट्रोलियम पदार्थों के दाम की वृद्धि महंगाई को और बढ़ायेगी। खाद्य पदार्थों के लिए मुद्रास्फीति दर 17 फीसदी तक पहुंच गयी है। सरकार जनता के विरोध को सुनने के लिए तैयार नहीं है। सरकार पर दबाब डालने के लिए वाम दलों और अन्य धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक दलों ने 5 जुलाई को आम हड़ताल का आह्वान किया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने प्रदेश के व्यापारियों, किसानों, मजदूरों, वकीलों, महिलाओं, छात्रों, नौजवानों एवं महंगाई से प्रभावित आमजन का आह्वान किया है कि इस आम हड़ताल को सफल बनायें। उक्त बयान वाम दलों की बैठक के बाद जारी किया गया। बैठक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा. गिरीश, अशोक मिश्र, भानु प्रताप सिंह, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के राज्य सचिव एस.पी.कश्यप, दीना नाथ सिंह एवं प्रेम नाथ राय उपस्थित थे। इस हड़ताल से पानी, बिजली, अस्पताल जैसी सेवाओं को मुक्त रखा गया है।

(डा. गिरीश)
राज्य सचिव
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
उत्तर प्रदेश
(एस.पी.कश्यप)
राज्य सचिव
भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मा.)
उत्तर प्रदेश
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LEFT PARTIES STATEMENT ALL INDIA HARTAL ON JULY 5

The Congress-led government has delivered another cruel blow to the people by increasing the price of petrol, diesel, kerosene oil and cooking gas steeply.

This comes after its refusal to take any effective step to curb price rise of food items and essential commodities which is causing acute suffering to the people.

On top of the food inflation at nearly 17 per cent and the general inflation rate in double digits, the Congress-led government has callously raised the fuel prices making the burden on the people unbearable.

The government is putting forth deceptive arguments to justify the hike and refuses to listen to the protests of the people.

The only way for the people is to launch a powerful collective protest to compel the government to heed their voice.

The Left Parties have consulted other secular opposition parties. Along with the Left parties, the AIADMK, Telugu Desam Party, Samajwadi Party, Biju Janata Dal, Janata Dal(S), Indian national Lok Dal have decided to call for a countrywide hartal on July 5. Discussion with some other secular opposition Parties to join the hartal is also on.

We appeal to all sections of the people to register their protest by joining the hartal.

The hartal will be from 6.00 a.m. to 6.00.p.m.

Ass essential services like supply of water, milk, electricity, hospital and emergency services will be exempt from the hartal.

Sd/-

Prakash Karat A.B. Bardhan
General Secretary, CPI(M) General Secretary, CPI


Debabrata Biswas T.J. Chandrachoodan
General Secretary, AIFB General Secretary,RSP
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सोमवार, 28 जून 2010

CPI's Protests against Petroleum Price hike & Gas tragedy

Central Chronicle today published the followings news :
By Our Staff ReporterBhopal, June 27: Communist Party of India, Bhopal district protested against the central government demanding the withdrawal from the sudden price rises in the petroleum products and to provide optimum monetary package to the victims of the Gas tragedy, here in the city on Sunday.The protest was in the form of a rally supported by "Transport Hammal Mazdoor Sabha" affiliated to the Party's labour wing AITUC, which began from Itwara and ended up in Itwara after it went a long march to the different places of the Capital. The rally was leaded by Party's Bhopal district Secretary Sailendra Sailly, comprising a large number of party supporters. During this protest the party activists demanded Maximum package for the gas victims as per the parameters set by the American State against the similar tragedy, Extradition of Anderson and providing harsh punishment, reestablishment of Bhopal Memorial Hospital and representation of the maximum victims, ensuring their Health, job and rehabilitation and withdrawal in the hike in the petroleum products.
http://www.centralchronicle.com/viewnews.asp?articleID=39858
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रविवार, 27 जून 2010

लो क सं घ र्ष !: छोटी-बड़ी बातों का कामरेड - कामरेड राजेन्द्र केसरी

(फोटो कैप्शन: तीन साल पहले जब हमने इंग्लैण्ड की एक शोध छात्रा क्लेर हेस को बीड़ी उद्योग पर अध्ययन करने का काम सौंपा था तो उसने राजेन्द्र केसरी का इस विषय पर लंबा इंटरव्यू लिया था। ये फोटो उसी वक्त उसने इन्दौर में शहीद भवन में लिया था जो उसने कामरेड राजू के प्रति अपनी श्रृद्धांजलि के साथ भेजा है।)

लोहे की हरी अल्मारी के भीतर एक पुराना सा टाइपराइटर इंतजार कर रहा है कि कोई उसे बाहर निकालेगा। कोई दरख्वास्त, कोई नोटिस, कोई सर्कुलर, कोई परचा - कुछ तो होगा जिसे टाइप होना होगा। टाइपराइटर के साथ ही वे सारी दरख्वास्तें, नोटिस, सर्कुलर और परचे भी इन्तजार कर रहे हैं कि कोई उन्हें टाइप करेगा, आॅफिस पहुँचाएगा, कोर्ट ले जाएगा, नोटिस बोर्ड पर लगाएगा। 27 मई को गुजरे आज महीना होने को आया, इंतजार खत्म ही नहीं होता।
एक बूढ़ी अम्मा है। साँवेर के नजदीक एक गाँव में रहती है। मांगल्या के पास की एक गुटखा फैक्टरी में काम करती थी। वहाँ राजू ने यूनियन बनायी हुई है। वहीं से वो राजू केसरी काॅमरेड को जानती है। बस में सत्रह रुपये खर्च करके इन्दौर में पार्टी के आॅफिस शहीद भवन तक आती है। वो शहीद भवन आकर राजू केसरी से मिलना चाहती है कि वो उसके देवर के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट लिखवाये। उसे पुलिस के पास जाकर रिपोर्ट लिखवानी है कि उसके देवर ने उस पर बहुत बड़ा पत्थर उठाकर फेंका। वो शहीद भवन में आकर राजू का कई बार तो घंटों इंतजार करती है। काॅमरेड राजू आते हैं, अम्मा से हँसी-मजाक करते हैं, अपना काम करते हैं लेकिन अम्मा के साथ रिपोर्ट लिखवाने नहीं जाते। बूढ़ी अम्मा खूब गुस्सा हो जाती है। काॅमरेड राजू हँसकर उसका गुस्सा और कोसना सुनते रहते हैं। अम्मा अपने सत्रह रुपये बेकार जाने का हवाला देती है। काॅमरेड राजू हँसते-हँसते उससे कहते हैं कि अम्मा मेरे घर चलकर सो जाना। मैं खाना भी खिला दूँगा और 17 रुपये भी दे दूँगा।
मैं उस दिन वहीं शहीद भवन में ही थी। सब काॅमरेड राजू और बूढ़ी अम्मा की बातचीत सुनकर हँस रहे थे। मैंने राजू केसरी से कहा, ’’काॅमरेड, क्यों बूढ़ी अम्मा को सताते हो? उसकी रिपोर्ट क्यों नहीं लिखवा देते?’’ राजू बोला, ’’काॅमरेड आप जानती नहीं हो। मैं खुद अम्मा के गाँव उसके घर जाकर आया, वो पत्थर भी देखकर आया जो ये बोलती है कि इसके देवर ने इस पर फेंका था, लेकिन इसे लगा नहीं। अब मैं पुलिस को जाके क्या बोलूँ कि इसके देवर ने इसको पत्थर मारा जो इसको लगा नहीं इसलिए उसको गिरफ्तार कर लो? फिर जब इसको इसका देवर कल सचमुच में पत्थर मारेगा तो फिर अम्मा को कौन बचाएगा?’’ अम्मा बड़बड़ाती रही, राजू टाइप करते-करते मुस्कुराते रहे, मैं अम्मा को समझाने की कोशिश करके निकल आयी।
जाॅब कार्ड बनवाना है, राशन कार्ड बनवाना है, लेबर कमिश्नर के पास जाना है, पेंशन दिलवानी है, ऐसे ढेर छोटे-बड़े कामों को काॅमरेड राजू केसरी को करते देखने की यादें हैं। यादें और भी हैं। विनीत ने बताया कि राजू केसरी की पहली याद वो है जब काॅमरेड रोशनी दाजी हमें छोड़ चली गयी थी। रोशनी की अंतिम यात्रा निकलने के पहले राजू केसरी सैकड़ों मजदूरनियों का जुलूस लेकर नारे लगाते हुए पहुँचा था। बेशक राजू सहित सभी रो रहे थे लेकिन सबकी आवाज बुलंद थी - ’काॅमरेड रोशनी दाजी को लाल सलाम’।
बीड़ी मजदूरिनों को संगठित करने, रेलवे हम्मालों की यूनियन बनाने, गुटखा फैक्टरियों में काम करने वाली औरतों का संगठन खड़ा करने जैसे अनेक कामों से राजू केसरी पार्टी का काम आगे बढ़ा रहे थे। बीड़ी के बारे में तो वे बताते भी थे कि इन्दौर की बीड़ी बनाने वाली बाइयाँ दूसरी जगहों की बीड़ी मजदूरों से कितनी अच्छी स्थिति में हैं। इन्दौर में सभी बीड़ी कारखानों के मजदूरों में राजू का काम फैला था और 3 हजार से ज्यादा बीड़ी मजदूर एटक के सदस्य बने थे। हाल में मुंबई में हुए बीड़ी-सिगार मजदूरों के राष्ट्रीय सम्मेलन में राजू को बीड़ी-सिगार फेडरेशन के मध्य प्रदेश के संयोजक की महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गयी थी।
लड़ने में काॅमरेड राजू केसरी नंबर एक थे। मुझे खुद बताते थे कि कामरेड, आज फलाने की धुलाई कर दी। आज किसी को धक्का मारकर बाहर कर दिया। कामरेड बसन्त मुझे एक दिन बोले, ’’ये राजू हर चीज में झगड़ा डालता है। अड़ जाता है तो किसी की सुनता ही नहीं।’’ उनके साथ लगभग हर वक्त रहने वाले कामरेड सत्यनारायण बोले कि हम दोनों हर रोज लड़ते थे। आज शहीद भवन में सब कामरेड्स आँखें नम किये इंतजार करते हैं कि राजू आये और लड़ाई करे।
जब से इन्दौर में महिला फेडरेशन का काम शुरू किया, तभी से कामरेड मोहन निमजे और काॅमरेड राजू केसरी अपनी यूनियन की महिलाओं को महिला फेडरेशन की गतिविधियों में हमेशा भेजते रहे। अभी 8 मार्च 2010 को महिला दिवस के लिए मैंने काॅमरेड राजू से बात की तो वो प्रोमेड लैबोरेटरीज की कर्मचारी महिलाओं से बात करने के लिए हमारे साथ गये, गेट मीटिंग ली और बोले, ’’मैं मैनेजर से बात करूँगा कि 8 मार्च के दिन वो तुम लोगों की जल्दी छुट्टी कर दे ताकि तुम लोग महिला दिवस के जुलूस में शामिल हो जाओ, लेकिन अगर वो न माना तो तुम लोग आधे दिन की तनख्वाह कटवा कर आ जाना। छुट्टी मिले या नहीं लेकिन आना जरूर।’’ सारी महिलाएँ जोर से सिर हिलाकर बोलीं कि बिल्कुल आएँगे और 8 मार्च को आधे दिन की छुट्टी लेकर महिलाएँ आयीं और जुलूस में शामिल हुईं।
27 मई को जब राजू हमें छोड़कर चले गये तो बीड़ी मजदूरनियाँ, रेलवे हम्माल, प्रोमेड लैबोरेटरीज और तमाम कारखानों के मजदूर फिर छुट्टी लेकर आये अपने लड़ाकू काॅमरेड को आखिरी सलाम कहने। सबकी आँखों में आँसू थे लेकिन उन्होंने राजू से सीख लिया था कि आँखों में आँसू भले हों लेकिन किसी भी काॅमरेड को लाल सलाम कहते वक्त आवाज नहीं काँपनी चाहिए।
मिल मजदूर के लड़के थे राजू केसरी। एक दिन अपने बारे में बता रहे थे कि जब सिर्फ 14 बरस की उम्र थी तब उनके पिता दुर्घटना की वजह से काम करने लायक नहीं रह गये थे। सन 1975 में राजू ने पार्टी आॅफिस में पोस्टर चिपकाने की नौकरी 40 रुपये महीने पर की थी। काॅमरेड पेरीन दाजी कहती हैं कि ’’राजू पार्टी आॅफिस में झाड़ू लगाता था। उसका रंग काला था, तो शुरू में तो हम सब उसे कालू ही कहते थे। राजू तो वो बाद में बना।’’ झाड़ू लगाते-लगाते और पोस्टर चिपकाते-चिपकाते काॅमरेड राजू ने दसवीं पास की और टाइपिंग भी सीख ली। पार्टी के तमाम नोटिस और तमाम कागज टाइप करने की जिम्मेदारी तब से राजू ने ही संभाली हुई थी।
एक दिन मैंने उनसे पूछा कि जब आप पार्टी से जुड़े तो कम्युनिज्म से क्या समझते थे? तो बोले कि ’’काॅमरेड, 14 बरस की उम्र में मैं कुछ नहीं समझता था। सिर्फ इतना जानता था कि लाल झण्डा पकड़ना सम्मान की बात है। उस वक्त लाल झण्डे की लोग बहुत इज्जत करते थे। उन दिनों इन्दौर की कपड़ा मिलों में 30-35 हजार मजदूर काम करते थे और मजदूरों की आवाज केवल मिल क्षेत्र में ही नहीं बल्कि पूरे शहर में सुनी जाती थी।’’
सन् 1975 में ही मेरी माँ कामरेड इन्दु मेहता ने भी पार्टी की सदस्यता ली थी। उन्हीं दिनों मुझे एक चिट्ठी में मेरी माँ ने लिखा था कि ’’तुम लोगों के लिए एक बेहतर दुनिया छोड़कर जाना चाहती हूँ। इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए समाजवाद कायम करने का संघर्ष जरूरी है।’’ उस वक्त मेरी माँ की उम्र 53 वर्ष थी। वो काॅलेज में राजनीतिशास्त्र पढ़ाती थीं, उन्होंने समाजवाद और माक्र्सवाद के बारे में कई किताबें पढ़ी थीं। लेकिन राजू केसरी जैसे काॅमरेड्स उतनी किताबें नहीं पढ़ते। माक्र्सवाद के बारे में उनकी समझ पार्टी स्कूल से बनती है। वो मानवता की जरूरत और मानवता के लिए संघर्ष के माक्र्सवादी पाठ वहीं सीखते हैं। राजू केसरी मुझे कहा करते थे कि हमने तो माक्र्सवाद काॅमरेड इन्दु मेहता से ही सीखा।
ट्रेड यूनियन की राजनीति भी राजू केसरी ने काम करते-करते और अपने वरिष्ठ साथियों के काम करने के तरीकों को देखकर सीखी। पिछले 35 बरसों में पार्टी और कम्युनिस्ट विचारधारा से राजू ने गहरा संबंध बना लिया था। सही-गलत के बारे में और नये तरीकों की जरूरत के बारे में भी वो सोचते थे और बात करते थे। एक दिन शहीद भवन में बोले, ’’काॅमरेड, मैं ट्रेड यूनियन के काम से संतुष्ट नहीं हूँ। मजदूर हमारे पास आते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि उनके हकों की लड़ाई लाल झण्डे वाली यूनियन ही लड़ सकती है। हम उनका संगठन बनाते हैं। उनके हक की लड़ाई लड़ते हैं। मैनेजमेंट को मजदूरों के हक में झुकाते हैं, लेकिन जब उनकी माँग पूरी हो जाती है तो उन्हें यूनियन की जरूरत नहीं महसूस होती। वो सब छोड़-छाड़कर चले जाते हैं। बताइए काॅमरेड, अगर हम मजदूरों को उनके स्वार्थों से ऊपर उठाकर उनकी राजनीतिक समझ नहीं बना पाये तो ट्रेड यूनियन का क्या काम किया?’’ इन जायज सवालों का सामना करते हुए भी राजू को इस बात में कभी संदेह नहीं रहा कि रास्ते तभी निकलते हैं जब संघर्ष और कोशिशें जारी रखी जाती हैं। इसीलिए उसने लगातार मजदूरों, कर्मचारियों के नये-नये संगठन बनाना जारी रखा। हाल में आपूर्ति निगम के हम्मालों का संगठन और प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों व कर्मचारियों का संगठन बनाने में राजू ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। अपनी तरह से वो कोशिश भी करते थे कि यूनियन में शामिल मजदूर भत्ते-तनख्वाहों तक ही न रुकें बल्कि उनका सही राजनीतिक विचार भी बने। एक बार 15 अगस्त को हम्माल यूनियन के मजदूरों के बीच झण्डा फहराते हुए राजू केसरी मजदूरों से बोले कि ’’भगतसिंह ने हिन्दुस्तान की ऐसी आजादी के लिए कुर्बानी तो नहीं दी थी जहाँ हमारे बच्चों को दूध न मिले, काॅपी-किताब न मिले, उल्टे हम धर्म के नाम पर लड़ें और सब तरह की बेईमानियाँ करें। ये तो भगतसिंह और आजादी के उन सब दीवानों के साथ नाइन्साफी है।’’
असंगठित क्षेत्र में यूनियन को फैलाने का जो काम काॅमरेड राजू केसरी और उनके साथी काॅमरेडों ने किया, उसका महत्त्व इसलिए और भी बढ़ जाता है कि वो ऐसे वक्त में किया गया काम है जब असंगठित तो दूर, संगठित क्षेत्रों की ट्रेड यूनियनों में भी हताशा का माहौल है।
उदारीकरण के मजदूर विरोधी माहौल में ट्रेड यूनियन की राजनीति कितनी कठिन है, राजू जैसे काॅमरेड्स इस किताब को अपने अनुभव की रोशनी में रोज पढ़ते हैं। मैंने उनसे पूछा था कि, ’’काॅमरेड, फिर आप पार्टी के साथ अभी तक क्यों जुड़े हैं?’’ वो बोले, ’’काॅमरेड मैंने आशा नहीं छोड़ी है कि एक वैकल्पिक समाज, शोषणरहित समाज व्यवस्था एक दिन जरूर आएगी। लोग समाजवाद के महत्त्व को एक दिन जरूर समझेंगे। हमें एक अच्छा नेतृत्व चाहिए बस, एक दिन हम समाजवाद के सपने को जरूर सच कर लेंगे।’’
रात को दस-साढ़े दस बजे तक राजू पार्टी का काम करते रहे और फिर आधी रात अचानक अपने अधूरे काम, अधूरी लड़ाइयाँ और अधूरे सपने छोड़कर वो चले गए। मैं उनके घर गयी तो पूरा मोहल्ला भीगी आँखों के साथ बैठा था। उनकी 17 बरस की लड़की शानो मुझसे बात करने लगी अपने पापा के बारे में। मुझसे बोली, ’’आपकी पार्टी कितनी अच्छी है। मेरा भाई भी पार्टी ज्वाइन कर सकता है क्या? अभी वो सिर्फ 13 साल का है। पापा उसे इन्जीनीयर बनाना चाहते थे।’’
उसकी बात सुनकर मुझे लगा कि इतिहास अपने आपको इस शक्ल में दोहराये, ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि जैसे कम उम्र में राजू को पार्टी ज्वाइन करने की जरूरत पड़ी, वैसे ही उसके बेटे को पड़े। हम सब जो बचे हैं, पार्टी में राजू केसरी की खाली जगहों को देर-सबेर भर ही लेंगे। लेकिन राजू के बच्चों को इन्जीनीयर, डाॅक्टर, कलाकार या जो भी बनना हो, वो बनने का उन्हें अवसर मिलना चाहिए। हम सभी को मिलकर राजू के बच्चों की अच्छी पढ़ाई की पूरी व्यवस्था करनी चाहिए। बच्चे जब बड़े हों तो सोच-समझकर पार्टी से जुड़ें, वैसी दुनिया बनाने की कोशिशों में अपना हिस्सा बँटाएँ जिसका सपना उनके पापा देखते थे और जिन्दगी की आखिरी साँस तक उसको सच करने की खातिर वे हर छोटा-बड़ा काम करते रहे।
कामरेड राजू केसरी को लाल सलाम।
जया मेहता,
संदर्भ केन्द्र, 26, महावीर नगर, इन्दौर -452018
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गरीबों के साथ सरकार ने किया छलावा : भाकपा

जागरण याहू में यह छापा है आज :
Jun 26, 11:58 pm
मुहम्मदाबाद गोहना (मऊ) । केंद्र सरकार ने पेट्रोल, गैस, डीजल एवं मिट्टी के तेल के दामों में बढ़ोत्तरी करके गरीबों की पीठ में छूरा भोंकने जैसा छलावे का काम किया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं भारती खेत मजदूर यूनियन संघ के लोग इसके विरोध में सड़कों पर निकलेंगे। उक्त बातें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्य कौंसिल सदस्य रामबचन राम ने शनिवार को कही। वे भारतीय खेत मजदूर संघ के कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि पूंजीपतियों के दबाव में सरकार ने यह कदम उठाया है। डीजल महंगा होने से खेतों की सिंचाई एवं जुताई महंगी होगी जो किसानों के लिये सजा से कम नहीं। रसोई गैस के दामों में बढ़ोत्तरी से आम लोगों को भारी दिक्कत होगी।
इस अवसर पर विक्रम कवि, बेचई प्रसाद, डा.बृजराज चौहान, पतिराज, शशिकांत सिंह, शिव प्रसाद, श्यामा यादव आदि लोग उपस्थित रहे। अध्यक्षता बेचई प्रसाद ने किया।
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शनिवार, 26 जून 2010

बचत पर चोट

अमर उजाला कोम्पक्ट ने आज यह समाचार प्रकाशित किया है :
वाराणसी। बढ़ती कीमतों से जूझ रहे आम उपभोक्ताओं की बचत पर एक और चोट हुई है। एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और केरोसिन की कीमतों में वृद्धि ने महंगाई की तितलौकी को नीम चढ़ा दिया। आटा, चावल, चीनी, आलू, प्याज, तेल की कीमतों के ताप से रसोई पहले ही तप रही थी। अब रसोई में महंगाई की आग है और जनता आगबबूला।एक बार फिर सोचने पर विवशरसोई गैस समेत पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमत ने गृहणियों को एक बार फिर बजट पर सोचने पर विवश कर दिया है। शुक्रवार रात बारह बजे से कीमत में इजाफा कर दिया गया। रही सही कसर केरोसीन की बढ़ी कीमत ने भी पूरी कर दी। बढ़ी हुई कीमत ने शहरवासियों को मायूस कर दिया है। प्रीमियम पेट्रोल की कीमत ५२।९५ रुपये से बढ़ कर ५६.९२ रुपये जबकि प्रीमियम डीजल ३९.०५ रुपये से बढ़कर ४१. २० हो गई है।
आज नहीं होगी कोई बुकिंगशनिवार को हजरत अली की जयंती पर राजकीय अवकाश होने पर शहर की गैस एजेंसियां भी बंद रहेंगी। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन एसोसिएशन के अध्यक्ष कुमार अग्रवाल ने बताया कि रविवार को एजेंसियों को खोल कर बढ़े हुई कीमत पर ही बुकिंग की जाएगी। उन्होंने बताया कि कीमत तय होने से पहले ही प्लांट से लोड कम कर दिया गया था। इसलिए पहले ही शहर में सिलेंडर की कमी हो गई।नहीं दिया पेट्रोलपेट्रोल-डीजल की कीमत वृद्धि का पता चलते ही दोपहर से ही पेट्रोल और डीजल लेने वालों का तांता लग गया। शाम छह बजे के बाद अधिकतर पेट्रोल पंपों ने सौ रुपये से अधिक पेट्रोल देना बंद कर दिया। कइ तो सादा पेट्रोल बंद कर प्रीमियम की बिक्री करते रहे। रात दस बजे तक शहर के अधिकतर पेट्रोल पंपों ने पेट्रोल की बिक्री ही रोक दी थी।
राजनीतिक दलों की कड़ी प्रतिक्रिया
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने मूल्य में वृद्धि करने की कड़ी आलोचना की है। मूल्य वृद्धि के विरोध में शनिवार को टाउनहाल से विरोध जुलूस निकालने का निर्णय किया है। जुलूस चौक, गोदौलिया होते हुए चितरंजन पार्क पर समाप्त होगा।
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Protests in Orissa over fuel price hike

Thaindian News carried the following item today :26 June 2010 16:14:39 by IANS
Hundreds of workers of the Communist Party of India (CPI) staged a demonstration in front of the office of the Bharat Petroleum at Cuttack, 26 km from here.
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Fuel price hike triggers nationwide protests, bandhs

Hindustan Times today carried the following news :
AgenciesNew Delhi, June 26, 2010First Published: 13:16 IST(26/6/2010)Last Updated: 19:10 IST(26/6/2010) The government's fuel price hike provoked protests in many parts of the country and brought life in some regions to standstill as political parties called for bandhs demanding a rollback of the proposed hike.
The price of diesel went up by Rs 2 a litre, kerosene by Rs 3 a litre and cooking gas by Rs 35 per cylinder. The prices of petrol will now be costlier by Rs 3.50 per litre.
Strike in West Bengal
Buses, taxis and autorickshaws went off the roads on Saturday in response to a public transport strike called by the Centre of Indian Trade Unions (CITU) against the fuel price hike in West Bengal as the handful of taxis and autorickshaws that plied made a killing by charging exorbitant fares. Ferry services on various rivers across the state also did not operate.
The strike was called by CITU, the labour arm of the ruling Communist Party of India-Marxist (CPI-M), hours after the central government on Friday ended government curbs on petroleum pricing and hiked the prices of diesel, kerosene and cooking gas.
Desperate commuters got onto trucks to reach their destinations while cycle rickshaws and the city's runner-pulled rickshaws provided relief to many while charging them more money.
"What can I do? I have to appear for my job interview. I paid Rs 100 to the rickshaw puller for travelling from my home to Ballygunge. I don't know why life is disrupted by calling strikes so often in Bengal," said Kolkata resident Amit Biswas.
Though flights and train services were kept outside the purview of the protest, people had trouble getting transport to reach their destinations from the Netaji Subhas Chandra Bose airport or railway stations.
Car owners were lucky as vehicles meant for private use were exempted from the strike. Metro Railway services, also in the exempted category, also functioned normally.
"There are no reports of any untoward incident. The situation is completely peaceful," state Director General of Police Bhupinder Singh said.
Bandh in Kerala
In Kerala public transport and commercial vehicles were off the roads in response to a bandh call by the CPI(M)-led ruling Left Democratic Front (LDF), reports from across the state said. Universities have postponed the examinations scheduled for the day. There were no reports of any untoward incident from anywhere, police said, adding essential services have been exempted from the strike.
Protests in Maharashtra
Senior BJP leader Gopinath Munde led an agitation of party workers in Mumbai protesting the price hike and over all inflation in the country.
Addressing party workers outside state BJP office in South Mumbai, Munde said, "the anti-people policies of the UPA government are responsible for rising inflation," adding, "this will pose additional burden on the common man."
BJP workers organised similar protests against price rise in other places in Maharashtra, he said.
Agitations in Andhra Pradesh
All Opposition parties in Andhra Pradesh on Saturday took to streets in a massive way protesting the steep hike petroleum product prices and organised agitations even as Chief Minister K Rosaiah said government would take a decision on July 1 on reducing the impact of the hike.
The protesters demanded an immediate rollback in fuel price hike. Praja Rajyam Party (PRP) chief Chiranjeevi, as part of the agitation, participated in a padayatra from Tummalapally auditorium to Sub-Collector’s office after riding a bullock cart fitted with lorry steering for some distance in Vijayawada.
Similarly, CPI State Committee secretary K Narayana also participated in a demonstration in Vijayawada.
Slamming the government for increasing the fuel prices, the protesters burnt the effigy of Central government.
Shutdown in Tripura
The Communist Party of India-Marxist (CPI-M)-led ruling Left Front in Tripura called for a 12-hour shutdown in the state on Monday to protest against the hike in fuel prices.
Left Front spokesperson Gautam Das told reporters that by increasing prices of petrol, diesel, kerosene and cooking gas, the central government "has made the greatest assault on people".
"The dawn-to-dusk strike would be observed Monday to condemn the hike in prices of fuel and to demand withdrawal of the decision," he said.
Demonstrations Punjab and Haryana
Opposing the hike in prices of petro-products, BJP leaders on Saturday staged demonstrations across Chandigarh. BJP workers also held demonstrations at other places in Punjab and Haryana.
Criticism in Jammu and Kashmir
Criticising the Centre for hike in fuel prices, the Jammu and Kashmir unit of CPI(M) today said the "callous and anti-people" decision is a crucial blow to the common man, who are already suffering due to the runaway increase in the prices of food and essential commodities.
Criticism in Tamil Nadu
MDMK leader Vaiko and Dravidar Kazhagam general secretary K Veermani today condemned the hike in the prices of petroleum products and asked the Centre to withdraw it immediately as the increase would push inflation further up. In a statement, Vaiko alleged the hike was only to "cover the uncovered deficit" of the union budget.
He said it had become the UPA government's practice to hike the prices of petroleum products at frequent intervals.
Protests in Orissa
Members of Orissa's ruling Biju Janata Dal (BJD) on Saturday staged protests at various places in the state against the fuel price hike, saying it would "bring a lot of hardship to the people". While the BJD members staged protests inside the assembly, party workers and leaders staged a march in Bhubaneswar shouting slogans against the central government's decision.
Criticism in Uttar Pradesh
Slamming the UPA government for the fresh hike in petroleum-products, Bhartiya Kisan Union (BKU) on Saturday said the move will hit overburdened farmers.
(With IANS and PTI inputs)
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