भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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सोमवार, 27 सितंबर 2021

CPI on Bharat Band


अभूतपूर्व रहा किसानों- कामगारों का भारत बन्द

भाकपा ने सभी बन्द समर्थकों को दिली मुबारकबाद दी

सरकार को चेताया कि वह दीवार पर लिखी इबारत को समझे वरना नतीजे भुगतने को तैयार रहे

लखनऊ- 27 सितंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने दावा किया कि भाजपा और उसकी सरकारों द्वारा खड़े किये गये तमाम अवरोधों के बावजूद आज भारत बन्द और उत्तर प्रदेश बन्द पूरी तरह सफल रहा। मुख्यतः यह किसानों कामगारों का बन्द था और उन्होने अपना काम पूरी तरह बन्द रखा। उनकी अपील पर तमाम बाजार, स्कूल, वाहन, कचहरियाँ आदि भी बन्द रहे। किसान संगठनों के आह्वान पर इन दस माहों में हुयी जन कार्यवाहियों में आज की कार्यवाही बहुत बड़ी थी। भाकपा ने बन्द में भाग लेने वाले और बन्द समर्थकों सभी को बधाई दी है।

उत्तर प्रदेश में तानाशाह योगी सरकार ने गत रात से ही किसान नेताओं, भाकपा एवं वामपंथी नेताओं की गिरफ्तारी शुरू कर दी थी। अनेकों नेताओं को घरों में बन्द कर दिया। विरोध प्रदर्शनों की राह में रोड़े खड़े किये और अनेक जगह प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। बावजूद इसके बन्द पूरी तरह कामयाब रहा।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि विभिन्न किसान यूनियनों और वाम किसान संगठनों ने बन्द को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यद्यपि तमाम दलों ने बन्द के समर्थन का ऐलान किया था लेकिन उत्तर प्रदेश में सड़कों पर भाकपा और वामपंथी दलों के समूह अधिक दिखे। लाल झंडों का इतना बड़ा सैलाव देश प्रदेश में कई वर्ष बाद देखने को मिला।

भाकपा ने कहाकि भाजपा सरकार दीवार पर लिखी खुली इबारत को समझे और तीनों काले क्रषी क़ानूनों की वापसी, एमएसपी कानून बनाने, विद्युत बिल 2020 को रद्द करने, सार्वजनिक क्षेत्र को बेचे जाने से बाज आने व रोजगार देने, महंगाई को नीचे लाने और विभाजन तथा तानाशाही की राजनीति बन्द करने की तत्काल घोषणा करे। वरना पीड़ित जनता की आंधी में उसका तंबू ध्वस्त हो जायेगा।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश  

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रविवार, 26 सितंबर 2021

CPI on Cabinet expension of UP


भाजपा के भय, भ्रम और बदहवाशी को दर्शाता है आचार संहिता की पूर्ववेला में किया गया उत्तर प्रदेश का मंत्रिमंडल विस्तार: डा॰ गिरीश

लखनऊ- 26 सितंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने कहा कि जब विधान सभा चुनाव के मात्र 5 माह बचे हैं, उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल के विस्तार से भाजपा के भय, भ्रम और बदहवाशी सामने आगये हैं। नये मंत्रियों में से कई तो विधान मंडल के सदस्य तक नहीं और उनके विधान मंडल पहुंचने से पहले ही यह सरकार समाधिस्थ हो जाएगी। कुछ दिन के बाद आचार संहिता लग जायेगी और माननीय मंत्रीगण निठल्ले बैठ कर जनता के धन से वेतन भत्ते पायेंगे और इनके बल पर भाजपा का प्रचार करेंगे।

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहा कि साधे गये जातीय समीकरणों से साबित होगया है कि भाजपा सरकार का विकास का दावा पूरी तरह खोखला है। झूठ और झूठे प्रचारतंत्र से गड़े गये विकास के दावों में जरा भी दम होता तो भाजपा को इस नंगेपन से जातियों की शरण में न जाना पड़ता। यह इस बात का भी सूचक है कि भाजपा के सहयोगी दल उसे छोड़ चुके हैं और केवल दो दल ही उसके साथ हैं। इसीलिए भाजपा बसपा मार्का अंतर्पार्टी जातीय गठजोड़ में जुटी है।

ऐसे समय में जब महंगाई, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी सारे रिकार्ड तोड़ चुके हैं, किसानों- कामगारों से पाकिस्तानी नागरिकों जैसा व्यवहार किया जा रहा है, कानून व्यवस्था औंधे मुंह पड़ी है और महिलाओं, दलितों और अल्पसंख्यकों को बड़े पैमाने पर जुल्मों का शिकार बनाया जा रहा है; वोटों का गणित बैठाने को भाजपा अब सांप्रदायिक विभाजन के साथ ही जातीय विभाजन के भरोसे है। लेकिन चुनाव से चंद माह पहले हुआ यह विस्तार भाजपा के खोखलेपन की पोल खोलने वाला है और जनता इसे भलीभाँति समझती है।

सच कहा जाये तो यह विस्तार भाजपा के लिये विपरीत परिणाम देने वाला साबित होगा।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा , उत्तर प्रदेश   

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शुक्रवार, 24 सितंबर 2021

Cast Census

 

जातिगत जनगणना से मुकरने से भाजपा सरकार का असली चेहरा सामने आया

 भाकपा ने 2021 की जनगणना में जाति को शामिल करने की मांग को पुनः दोहराया

लखनऊ- 24 सितंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कहाकि कठिन और बोझिल प्रक्रिया बता कर जातिगत जनगणना को टालने के निर्णय से भाजपा की केन्द्र सरकार का असली चेहरा सामने आगया है। ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायालय को केन्द्र सरकार ने सूचित किया है कि 2011 की जनगणना में जाति को जोड़ने को लेकर अनेक कठिनाइयां आयी थीं, अतएव जातिगत जनगणना न कराये जाने का नीतिगत निर्णय लिया गया है।

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने अपनी इस मांग को जोरदार शब्दों में दोहराया कि 2021 की जनगणना में जाति को शामिल किया जाये। इससे सामाजिक संरचना पर पड़े रहस्य के पर्दे हटेंगे और अवसरों के न्यायपूर्ण वितरण के आधार मजबूत होंगे।

भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा कि अपने कारपोरेटपरस्त, तानाशाह और सांप्रदायिक एजेंडे को लागू करने और सत्ता शिखर तक पहुँचने को भाजपा और उसकी सरकार जिन जातियों को ईंधन की तरह इस्तेमाल करती है, उन्हीं को न्याय से वंचित रखने में उसे जरा भी गुरेज नहीं होता। वह धड़ल्ले से जाति को जनगणना में शामिल करने के सवाल से भाग रही है। भाकपा इसे बर्दाश्त नहीं करेगी और उसके कार्यकर्ता इस सवाल को जनता के बीच ले जायेंगे।

भाकपा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की विपक्षी पार्टियों को इस सवाल पर एकजुट हो आवाज उठानी चाहिये और भाजपा सरकार को अपने इस तुगलकी फैसले को वापस लेने को बाध्य करना चाहिये।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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बटाईदारों से फसल न खरीदने का फैसला किसान विरोधी: तत्काल वापस ले केन्द्र सरकार - भाकपा


खनऊ- 24 सितंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि वह शासन प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को रोकने के बजाये, हर तरह से किसानों को बरवाद करने पर आमादा है। बटाईदार किसानों से धान और गेहूं की सरकारी खरीद न किये जाने का तुगलकी फैसला किसानों की रही सही कमर भी तोड़ देगा।

राज्य सरकार राशन प्रणाली में धांधली रोकने और एमएसपी खरीद में पारदर्शिता स्थापित करने में असफल रही है। अपनी इस असफलता का ठीकरा बटाईदार किसानों पर फोड़ना चाहती है। इसीलिए उसने ऐसा फैसला लिया है।

भाकपा ने कहा कि आज तमाम छोटी जोतों वाले किसान अपनी ज़मीनें बटायी या वार्षिक पट्टे पर देकर शहरों में नौकरियाँ करने चले जाते हैं। कई अशक्त, बुजुर्ग और महिला किसान भी अपनी ज़मीनें बटाईदार किसानों को देकर खेती करवाते हैं। अब सरकार के नए फैसले के अनुसार ये किसान सरकारी खरीद केन्द्रों पर धान/ गेहूं नहीं बेच पाएंगे और उन्हें बाज़ारों में बेच कर भारी घाटा उठाएंगे। और आगे से वे बटायी पर खेती कर नहीं पाएंगे तो हजारों किसानों की ज़मीनों पर खेती हो नहीं पायेगी। और ज़मीनें खाली रहने पर किसान उसे बेचने को बाध्य होंगे। सरकार ऐसा ही चाहती है।

भाकपा ने कहाकि पहले तीन काले क्रषी कानून व विद्युत बिल 2020 लाकर सरकार ने किसानों की ज़मीनें कार्पोरेट्स के हवाले कराने का रास्ता खोल दिया है। अभी तक एमएसपी की गारंटी वाला कानून तक नहीं बनाया। गन्ना मूल्य घोषित नहीं किया, और अब एमएसपी पर उपज न खरीदने का रास्ता भी खोज लिया। निश्चय ही यह कदम घनघोर किसान क्रषी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए घातक है। भाकपा इस पर कडा विरोध जताती है, और इसको रद्द करने की मांग करती है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 9 सितंबर 2021

किसानों के साथ छलावा है केन्द्र सरकार द्वारा घोषित एमएसपी : भाकपा


लखनऊ- 9 सितंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, उत्तर प्रदेश के राज्य सचिव मंडल ने कल केन्द्र सरकार द्वारा  गन्ने और रबी फसलों के समर्थन मूल्य में अति अल्प व्रध्दी को किसानों के साथ छलावा और उन्हें पूरी तरह बरवाद करने वाला कदम बताया है। किसान तो एमएसपी की गारंटी करने वाला कानून मांग रहे थे, गारंटी तो दूर सरकार ने एमएसपी निर्धारण में ही धोखा कर दिया, भाकपा ने आरोप लगाया है।

किसानों की आमदनी दो गुना करने का दावा करने वाली सरकार ने गन्ने के मूल्य में मात्र 1. 75 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर इसे 285 से 290 रुपये कुंतल किया है। गेहूं की कीमत 1975 से बढ़ा कर 2015 रूपये कर मात्र 2 प्रतिशत की व्रध्दी की है। इसी तरह अन्य जिंसों की कीमतों में मामूली बढ़ोत्तरी की है। यह महंगाई की मार से देवलियापन की स्थिति तक पहुंचे किसानों के जले पर नमक छिड़कना जैसा है।

सरकार ने दावा किया हुआ है कि उसने स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को लागू कर दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार किसानों की जुताई, सिंचाई खाद, बीज, बिजली, कीटनाशक आदि की लागत+ उसका श्रम और देखरेख का खर्च+ उगायी गयी फसल वाली जमीन का किराया जोड़ कर एमएसपी निर्धारित किया जाना चाहिए। लेकिन सरकार ने इस बीच डीजल पेट्रोल बिजली के दाम आसमान पर पहुंचा दिये, खाद, कीटनाशक, ट्रैक्टर और अन्य क्रषी उपकरणों के दामों में भारी बढ़ोत्तरी कर दी, अब प्रमुख फसलों पर मात्र 2 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर एमएसपी को बेमानी बना दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेत्रत्व वाली मूल्य निर्धारण संबंधी समिति के इस निष्कर्ष कि गेहूं की लागत 1008 रुपये कुंतल आती है को चुनौती देते हुये भाकपा ने कहा कि या तो सरकार इस आंकड़े को साबित करके दिखाये, नहीं तो स्वामीनाथन समिति के फार्मूले पर संशोधित मूल्य घोषित करे। लागत में अगली मार्च तक होने वाली संभावित बढ़ोत्तरियों को भी जोड़ा जाना चाहिये।

भाकपा ने कहाकि सरकार किसानो की जरूरत की जिंसो को महंगा बना कर औसत किसान की जेब से साल में कम से कम 50 हजार रूपये निकलवा रही है और उनमें से कुछ को 6 हजार सालाना की खैरात देकर शेष को ठेंगा दिखा रही है। किसानों की माली हालत बेहद जर्जर हो चुकी है और खेती में निरंतर घाटे के चलते वे परिवार का भरण पोषण और इलाज पढ़ाई तक देने में असमर्थ होगये हैं। उनमें से अनेक आत्महत्यायें कर रहे हैं अथवा पलायन को मजबूर हैं। वे खेतिहर मजदूरों को अपरिहार्य वेतन नहीं दे पारहे अतएव खेत मजदूर भी लगातार पलायन कर रहे हैं और गाँव उजाड़ होते चले जारहे हैं।

भाकपा ने कहाकि लगता है देश भर में चल रहे ऐतिहासिक किसान आंदोलन से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया और किसानों की परेशानी बढ़ाने वाला असरहीन एमएसपी घोषित कर दिया। इस धोखाधड़ी से किसानों में और भी गुस्सा बढ़ेगा और किसान आंदोलन और व्यापक होगा।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

 

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शुक्रवार, 3 सितंबर 2021

समूचे उत्तर प्रदेश में फैलते जारहे जानलेवा बुखार से मौतों पर भाकपा ने गहरी चिन्ता जताई


कहा- ईवेंटफुल कारगुजारियों पर समय जाया करने के बजाय लोगों के जीवन की रक्षा करे राज्य सरकार

लखनऊ- 3 सितंबर 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहाकि राज्य सरकार की मुजरिमाना लापरवाही और स्वास्थ्य सेवाओं की उपेक्षा के चलते आज डेंगूनुमा जानलेवा बुखार का प्रदेश में दायरा बढ़ता ही जारहा है और यदि अब भी तत्काल कारगर कदम नहीं उठाये गये तो यह भी कोरोना की दूसरी लहर की तरह प्रदेश में हा हाकार मचा देगा। भाकपा ने राज्य सरकार को आगाह किया कि वो अपने नाटकीय क्रत्यों का परित्याग कर महामारी से लोगों को बचाने को युद्ध स्तर पर कार्यवाही करे।

एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहाकि आगरा मंडल के मथुरा और फीरोजाबाद जनपदों में एक माह में बच्चों एवं बड़ों की सैकड़ों जान लेचुकी बीमारी आज आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, कानपुर आदि मंडलों में पाँव पसार चुकी है और हजारों लोगों को अपनी चपेट में लेचुकी है। हालात यह हैं कि सीएचसी, पीएचसी एवं अन्य सरकारी अस्पतालों में पलंग न मिल पाने से लोग बेंचों और बराण्डों में इलाज कराने को मजबूर हैं अथवा निजी अस्पतालों में लुटने- पिटने और जान गँवाने को अभिशप्त है। अकेले फीरोजाबाद में ही सत्तर से अधिक लोगों की जानें जा चुकी हैं और वहां का मेडिकल कालेज और कई निजी अस्पताल मरीजों से अटे पड़े हैं।

कोरोना की दूसरी लहर जैसी भयावह स्थिति आ उपस्थित होने के बावजूद न तो प्रदेश में कहीं फागिंग होती दिख रही है न कीटनाशकों का छिड़काव। अधिकांश नगर निकायों और विविध पंचायतों को जबरिया हथियाए बैठी भाजपा का ध्यान साज सफाई पर भी नहीं है। कोविडकाल से ही भाकपा और वामपंथी पार्टियां स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और उन्हें प्रभावी बनाने की मांग कर रहीं थीं, मगर उस ओर ध्यान देने के बजाय राज्य सरकार वोट बटोरने की गरज से ईवेंटफुल कारगुजारियों में जुटी रही।

परिणाम यह है कि एक और महामारी ने प्रदेश को अपनी गिरफ्त में लेलिया और सरकार बयानों, विजिट्स और कुछ तबादलों पर लटक कर रह गयी है। भले ही राज्य सरकार कोरोना को हराने के दंभपूर्ण दावे करे लेकिन अभी भी प्रदेश में कोरोना उपस्थिती दर्ज करा रहा है। विगत 24 घंटों में ही राजधानी लखनऊ में कोरोना के सात मरीजों सहित 18 जनपदों में कोरोना पाजिटिव केस मिले हैं। लापरवाहियों के चलते यह कभी भी छलांग भर सकता है।

सरकार और सत्ताधारी दल न केवल लोगों के स्वास्थ्य के प्रति उपेक्षा बरत रहे हैं अपितु बीमारियों के प्रसार की राह हमवार कर रहे हैं। विपक्ष की जहां लोकतान्त्रिक और प्रोटोकाल पालन करने वाली कार्यवाहियाँ बाधित की जारही हैं, वहीं शासक दल की कथित जन आशीर्वाद यात्राओं में प्रोटोकाल की धज्जियां उड़ाई जारही हैं। एक नेता के स्म्रति भोज में एकत्रित लाखों भोजनार्थियों जिनमें 90 प्रतिशत भाजपायी थे, ने सारे नियम कानूनों और कोविड प्रोटोकाल को हवा में उड़ा दिया। आश्चर्य की बात है कि तबलीगी जमात पर चीख चीख कर कोरोना फैलाने के आरोप लगाने वाले टीवी चेनलों ने वहाँ हुयी मारामारी की एक झलक तक नहीं दिखाई।

भाकपा ने सरकार से मांग की कि तत्काल प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कारगर सफाई अभियान चलवाये, व्यापक पैमाने पर फागिंग और कीटनाशक छिड़कवाए, अस्पतालों में मानवीय गरिमा के अनुकूल इंडोर वार्ड्स और पलंगों की व्यवस्था कराये, दवाओं और जांच की माकूल व्यवस्था कराये तथा स्वास्थ्य विभाग की सक्षम और संसाधनों से युक्त टीमें गांवों और शहरी आबादियों में पहुंच कर छानबीन, जांच और इलाज को अंजाम दें।

वोटों की लालसा में सामाजिक विभाजन के लिये नाम बदलने और आस्था के दोहन के लिये शराब और मीट बंदी जैसे कामों में लिप्त सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह उन लोगों के जीवन बचाने और जीवनयापन को प्राथमिकता दे जिनके कि वोटों से चुन कर वह सत्तारूढ़ हुयी है, भाकपा ने कहा है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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गुरुवार, 2 सितंबर 2021

शराब और मीट पर पाबन्दी के तुगलकी फरमान से मथुरा एवं अन्य स्थानों पर रोजी रोटी से वंचित हो जाएंगे हजारों लोग। फैसले से बाज आये राज्य सरकार।


 

लखनऊ- 2 सितंबर 2021, भारत की परंपरा सर्वे भवन्तु सुखिन: की है, इसीसे भारत का गौरव बढ़ेगा, हिन्दुत्व का गौरव बढ़ाने के नाम पर हजारों लोगों की रोजी रोटी छीनने और उनके परिवारों को भुखमरी की विभीषिका में धकेलने से नहीं।

उपर्युक्त विचार एक प्रेस बयान में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने व्यक्त किये। डा॰ गिरीश सूबे के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मथुरा में मीट और शराब की बिक्री पर पाबंदी लगाने के फैसले पर अपनी पार्टी की प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।

उन्होने कहाकि इस मनहूस फैसले से मथुरा के तमाम गरीब जिनमें दलित और अल्पसंख्यक अधिक हैं, भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। जनराजस्व की भी बड़ी हानि होगी। उन्होने आरोप लगाया कि जब से भाजपा सत्ता में आयी है, लोगों के रोजगार छीनने में जुटी है। उनको वैकल्पिक रोजगार देने की व्यवस्था किये बिना दसियों हजार लोगों की रोजी रोटी छीनना कहीं से भी उचित नहीं है।

यदि मीट और शराब की बिक्री रोकने से ही हिन्दुत्व का गौरव बड़ता है तो इसकी शुरुआत योगीजी को अपने गृह जनपद गोरखपुर से करनी चाहिये। और फिर यह गौरव मथुरा तक सीमित क्यों रहे, इसे समूचे उत्तर प्रदेश में विस्तार देना चाहिये। ये कितना उपहासास्पद है कि जो सरकार जहरीली शराब का निर्माण और बिक्री तथा उससे होने वाली मौतों को नहीं रोक पारही वह असली शराब की बिक्री रोक कर हिन्दुत्व को परवान चड़ाएगी। जो सरकार राजस्व के लालच में पीक कोविड काल में शराब बिकवाती रही वह अपनी सनक को पूरा करने को उसे बिकने से रोकेगी।

सरकार ने पहले ही मथुरा के कई कस्बों में मीट की बिक्री पर पाबंदी लगा कर हजारों को रोजगार से वंचित कर रखा है। अब नया फरमान दसियों हजार लोगों के मुंह का निवाला छीनेगा। राज्य सरकार ने पहले ही हजारों सरकारी नौकरियों में भर्ती को उलझा के रखा हुआ है, और चन्द नौकरियाँ दी भी जातीं हैं तो मुख्यमंत्री नियुक्तिपत्र स्वयं वितरित कर राजनीतिक लाभ उठाने में जुट जाते हैं। भाजपा राज में रोजगार से वंचित लोग आत्महत्यायें कर रहे हैं और भुखमरी तथा अर्थाभाव से जनित बीमारियो से मर रहे हैं।

ऐसे में मथुरा में शराब और मीट की बिक्री पर पाबन्दी लगाना लोगों के जीवन से खिलवाड़ करना है।

भाकपा ने कहाकि यदि मगरूर सरकार पाबन्दी लगाना ही चाहती है तो पहले इस कारोबार और इसके सहयोगी कारोबार से जुड़े लोगों को वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था करानी चाहिये, तब किसी पाबन्दी की सोचना चाहिये। भाकपा ने मथुरा एवं उत्तर प्रदेश के समस्त नागरिकों से अपील की कि हिन्दुत्व की आड़ में लोगों की रोजी रोटी छीनने वाले इस घिनौने आदेश का पुरजोर विरोध करें।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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बुधवार, 1 सितंबर 2021

उत्तर प्रदेश: आम जनता की ज्वलंत समस्याओं को लेकर वामदलों ने समूचे उत्तर प्रदेश में जबर्दस्त प्रदर्शन किये


 

लखनऊ-  1 सितंबर 2021, उत्तर प्रदेश के चार वामपंथी दलों- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी ), भाकपा माले- लिबरेशन एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के तत्वावधान में आज आसमान छूती महंगाई, बेरोजगारी, बुखार से होरही मौतों और बाढ़ की विभीषिका से तवाही, भुखमरी और अर्थाभाव से की जारही आत्महत्याएं, जर्जर कानून व्यवस्था, भाजपा द्वारा चलायी जारही विभाजन और तानाशाही की राजनीति और बांदा जनपद में स्वतन्त्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने वाले अधिकारियों और भाजपाइयों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही जैसे ज्वलंत सवालों पर आज समूचे प्रदेश में बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर कर दस्तक दी।

कई जिलों में वामदलों के साथ लोकतान्त्रिक जनता दल के कार्यकर्ता भी आंदोलन में शामिल रहे। जिलों जिलों में धरने और प्रदर्शनों के बाद महामहिम राष्ट्रपति महोदय और राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपे गए। भारी वारिश के बावजूद वामपंथियों का यह आंदोलन उल्लेखनीय ढंग से सफल रहा, भले ही हमेशा की तरह टीवी चेनलों ने इसे नजरंदाज किया है।   

ज्ञापनों में महंगाई पर कारगर रोक लगाने, डीजल पेट्रोल रसोई गैस पर लगे असहनीय टैक्सों को पर्याप्त मात्रा में घटाने, सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री रोके जाने, हर बेरोजगार को काम दिलाने- मनरेगा में 200 दिन काम और प्रतिदिन 600 रुपये मजदूरी दिलाने, इस तरह की योजना शहरों में चलाये जाने, दवाओं और खाद्य वस्तुओं के दाम बांधने, हर व्यक्ति को रुपए 7500/- प्रति माह दिये जाने, खाने की सभी सामग्री किट के रूप में उपलब्ध कराये जाने, टीकाकरण में तेजी लाने, जनता पर बोझ बढ़ाने वाले बिजली बिल 2021 को वापस लेने, तीन क्रषी क़ानूनों को वापस कराने, एमएसपी की गारंटी करने, योगी सरकार द्वारा दमनकारी असंवैधानिक आलोकतांत्रिक रवैया रोके जाने, कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने- दलितों अल्पसंख्यकों महिलाओं व अन्य कमजोर तबकों पर अत्याचार रोके जाने, भ्रष्टाचार पर कारगर रोक लगाने की मांग की गयी है।

साथ ही पैगासस कांड की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करायी जाये, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और सुधार किया जाये, बुखार से होरही मौतों से जान की रक्षा की जाये, बाढ़ की विभीषिका से तवाही का मुआबजा दिया जाये, गरीबों को आवास दिलाये जायें, गरीब बच्चों की पढ़ाई में हुयी हानि की भरपाई की जाये तथा आंदोलनकारी किसानों से सरकार तत्काल वार्ता करे आदि सवालों को भी उठाया गया। बांदा में स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने वाले अधिकारियों और भाजपाइयों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की मांग की गयी।

बयान जारी किये जाने तक लखनऊ, गोरखपुर, कुशीनगर, संत कबीर नगर, बस्ती, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी, गाजीपुर, सोनभद्र, भदोही, सुल्तानपुर, अयोध्या, इलाहाबाद, मछलीशहर ( जौनपुर ), खागा ( फ़तेहपुर ), प्रतापगढ़, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, उरई ( जालौन ), झांसी, ललितपुर, कानपुर महानगर, कानपुर देहात, औरैया, कायमगंज ( फरुखाबाद ), बरेली, बदायूं, पूरनपुर ( पीलीभीत ), शाहजहाँपुर, मुरादाबाद, मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़, हाथरस, मथुरा, आगरा एवं मैनपुरी आदि जनपदों में सफल आंदोलन की खबरें सोशल मीडिया से प्राप्त हो चुकी हैं।

वामपंथी दलों के नेताओं ने आज फिर रसोई गैस के दाम 25 रुपये बढ़ाए जाने पर गहरा आक्रोश जताया। महंगाई की मार से पीढ़ित जनता के ऊपर यह बड़ा कुठराघात है। भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश, माकपा राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भाकपा माले सचिव का॰ सुधाकर यादव, आ॰ इ॰ फारबर्ड ब्लाक के राज्य संयोजक अभिनव कुशवाहा एवं लोकतान्त्रिक जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जुबेर अहमद कुरेशी ने सभी आंदोलनकारियों को बधाई दी है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश              मो॰ नं॰ 9412173664, 7055893132

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गुरुवार, 26 अगस्त 2021

सुस्पष्ट नीति निर्धारण एवं क्रियान्वयन हेतु राष्ट्रीय जनगणना में जाति के आंकड़े शामिल किये जायें: भाकपा, उत्तर प्रदेश


 

लखनऊ- 26 अगस्त 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश राज्य सचिव मंडल की बैठक आज यहां पार्टी के कैसरबाग स्थित कार्यालय पर संपन्न हुयी। बैठक की अध्यक्षता  भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने की। का॰ इम्तेयाज़ अहमद पूर्व विधायक एवं का॰ अरविंदराज़ स्वरूप ने चर्चा में भाग लिया।

बैठक में मुख्य रूप से जनता खासकर किसान मजदूरों और नौजवानों के ज्वलंत सवालों पर 1 सितंबर को होने वाले राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारियों की समीक्षा की गयी, राष्ट्रीय  जनगणना में जाति को शामिल किए जाने पर गहन चर्चा हुयी, केन्द्र सरकार द्वारा सरकारी संस्थानों को बेचे जाने पर रोष जताया गया और विधान सभा चुनावों की तैयारियों पर चर्चा की गयी।

ज्ञात हो कि भाकपा उत्तर प्रदेश की निरंकुश और घोर जनविरोधी सरकार को सत्ता में वापसी से रोकना चाहती है, अतएव वामपंथी एवं लोकतांत्रिक शक्तियों की व्यापक एकता चाहती है।

बैठक में वामपंथी दलों के संयुक्त तत्वावधान में 1 सितंबर को प्रदेश भर में होने वाले जन प्रदर्शन की तैयारियों का जायजा लिया गया। पाया गया कि पूरे प्रदेश में इस आंदोलन की व्यापक तैयारियां चल रही हैं। यह आंदोलन महंगाई पर कारगर रोक लगाने, डीजल पेट्रोल रसोई गैस पर लगे असहनीय टैक्सों को पर्याप्त मात्रा में घटाने, सार्वजनिक उपक्रमों की बिक्री रोके जाने, हर बेरोजगार को काम दिलाने- मनरेगा में 200 दिन काम और प्रतिदिन 600 रुपये मजदूरी दिलाने, इस तरह की योजना शहरों में चलाये जाने, दवाओं और खाद्य वस्तुओं के दाम बांधने, हर व्यक्ति को रुपए 7500/- प्रति माह दिये जाने, खाने की सभी सामग्री किट के रूप में उपलब्ध कराये जाने, टीकाकरण में तेजी लाने, जनता पर बोझ बढ़ाने वाले बिजली बिल 2021 को वापस लेने, तीन क्रषी क़ानूनों को वापस कराने, एमएसपी की गारंटी करने, योगी सरकार द्वारा दमनकारी असंवैधानिक आलोकतांत्रिक रवैया रोके जाने, कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने- दलितों अल्पसंख्यकों महिलाओं व अन्य कमजोर तबकों पर अत्याचार रोके जाने, भ्रष्टाचार पर कारगर रोक लगाने आदि सवालों पर होने जारहा है।

साथ ही पैगासस कांड की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करायी जाये, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और सुधार किया जाये, गरीब बच्चों की पढ़ाई में हुयी हानि की भरपाई की जाये तथा आंदोलनकारी किसानों से सरकार तत्काल वार्ता करे आदि सवालों को भी उठाया जाएगा।

ज्ञात हो कि लोकतान्त्रिक जनता दल, उत्तर प्रदेश ने भी वामपंथी दलों के साथ आंदोलन में भागीदारी की घोषणा की है। स्थानीय स्तर पर कई दलों और सामाजिक समूहों का समर्थन भी आंदोलन को मिल रहा है।

भाकपा राज्य सचिव मंडल ने पार्टी के केन्द्रीय सचिव मंडल द्वारा दोहराये गये इस रुख का समर्थन किया है कि राष्ट्रीय जनगणना में जाति के आंकड़े संग्रहीत कर नीतिगत निर्णय लिये जायें।

राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनावों हेतु पार्टी की तैयारियों पर का जायजा भी लिया। पार्टी जनता के हितों की रक्षा हेतु किए गये संघर्षों और आंदोलनों के आधार पर चुनाव लड़ती है। इसके अतिरिक्त भी जिलों में तैयारियों हेतु पार्टी कार्यकर्ता और समर्थकों की आम सभाएं करने का निश्चय किया है। ऐसी एक सभा दिनांक 28 अगस्त को हमीरपुर जनपद के मौदहा में तथा 29 अगस्त को चित्रकूट में होगी।

इन सभाओं में राज्य सचिव डा॰ गिरीश, सहसचिव का॰ अरविंदराज़ स्वरूप, राष्ट्रीय परिषद के सदस्य का॰ रामचंद सरस तथा उत्तर प्रदेश नौजवान सभा के प्रदेश संयोजक विनय पाठक आदि संबोधित करेंगे।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश              मो॰ नं॰ 9412173664, 7055893132

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बुधवार, 25 अगस्त 2021

जहरीली शराब से मौतों और अपराधों पर रोक नहीं लगा पारही उत्तर प्रदेश सरकार: भाकपा


लखनऊ- 25 अगस्त 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहाकि उत्तर प्रदेश में जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। साथ ही प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति भी बद से बदतर होती जारही है। माफियाराज और गुंडागर्दी पर डींगें हाँकने वाली सरकार इन तत्वों के सामने पूरी तरह असफल नजर आरही है।

कल ही आगरा जनपद में जहरीली शराब से कम से कम 8 लोगों की मौत होगयी। गत सप्ताह बुलंदशहर नोएडा एवं अन्य जनपदों में भी कई मौतें हुयीं हैं। इसके साथ ही हत्या, आत्महत्या, बैंक लूट, छिनेती, महिलाओं के साथ बलात्कार और उनकी हत्याओं में भारी उछाल आया है।

राज्य सरकार का ध्यान सुशासन और लोगों के जानमाल की रक्षा पर न होकर आगामी चुनावों पर केन्द्रित होगया है। जनता परेशान है और शासक दल उससे जबरिया आशीर्वाद ग्रहण करने में जुटा है। भाकपा ने सरकार से मांग की कि वह प्रदेश के स्त्री- पुरुषों के जानमाल और सम्मान की रक्षा के लिये ठोस कदम उठाए।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 20 अगस्त 2021

उत्तर प्रदेश मेन भ्रष्टाचार के खुलासे

 

सीएजी रिपोर्ट और विधान सभा में हुये भ्रष्टाचार के खुलासों पर संज्ञान लें महामहिम राज्यपाल

भाकपा ने कड़ी कार्यवाही की मांग की: मुद्दे को जनता के बीच लेजाने की चेतावनी दी

लखनऊ- 20 अगस्त 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मण्डल ने कहाकि भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक ( सीएजी ) की रिपोर्टों और अल्पकालीन विधायी सत्र में हुये कुछेक खुलासों से भाजपा सरकार का भ्रष्टाचारी और जनपीड़क चेहरा सामने आगया है। अभी चंद मामले सामने आए हैं और आगे कई और मामले सामने आ सकते हैं। भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की बात करने वाली सरकार आज भ्रष्टाचार की हीरो नजर आरही है। इन खुलासों की बिना पर भाकपा ने राज्य सरकार के सत्ता में बने रहने का नैतिक सवाल उठाया है।

उजागर हुये घोटालों में से एक है बिल्डर्स घोटाला। इसके तहत चहेते और भगवा रंग में रंगे बिल्डर्स को जनता के गाड़े पसीने की कमाई में से 170 करोड़ से अधिक लुटा दिये गये। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा हाईटेक टाउनशिप योजना में बिल्डरों को मनमाने तरीके से लाभ पहुंचाने की गरज से अधिक ऊंची बिल्डिंग बनाने के नाम पर फ्लोर एरिया रेशियो में छूट दी गयी और इसके लिए शुल्क में छूट दे दी गयी। इससे जनराजस्व का 170॰ 99 करोड़ का नुकसान हुआ है।

सीएजी ने मार्च 2020 में ही इस मामले को शासन को भेज दिया था, लेकिन राज्य सरकार ने आज तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं की। इसी तरह के कई और मामले भी प्रकाश में आए हैं जिनमें चहेतों को लाभ मिला और सरकारी राजस्व को करोड़ों की चपत लगी। इसी तरह गाजियाबाद विकास प्राधिकरण जीडीए में भी बिल्डरों को 2. 51 करोड़ का लाभ पहुँचने का खुलासा भी सीएजी ने किया है।

सीएजी जांच में 11 जिलों में बरती गयी अनियमितता के जरिये दवा सप्लायरों को 6. 17 करोड़ का लाभ पहुँचाने का भी खुलासा हुआ है। सप्लायरों ने दवाओं और अन्य चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति तय समय पर नहीं की। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को ऐसे सप्लायरों पर अर्थ दंड लगाना था, मगर उन्होने ऐसा नहीं किया। इस लापरवाही के चलते दवा सप्लायरों को 6. 17 करोड़ का अनुचित लाभ पहुंचाया गया जबकि दवाओं की उपलब्धता न होने से बीमार लोगों को बाजार से दवा खरीदने के लिये मजबूर होना पड़ा।

 जांच के अनुसार 4 सालों में 374 दवा आपूर्तिकताओं को 37. 37 करोड़ के 3339 आपूर्ति आदेश दिये गये। सप्लाई आर्डर मिलने के 60 दिन बाद भी इन सप्लायरों ने दवा की आपूर्ति नहीं की। ऐसे में नियमानुसार यह सप्लाई आदेश स्वतः निरस्त हो जाना चाहिए था। अन्य तमाम नियमों की अवहेलना वाले इस घोटाले की शासन ने जांच कर कार्यवाही करने का आश्वासन 2019 में सीएजी को दिया था, मगर जनवरी 2021 तक ऐसी किसी कार्यवाही की जानकारी सीएजी तक नहीं पहुंची। तो ऐसे चल बन रहा है मोदी जी का आयुष्मान भारत।

यहाँ तक कि छात्रों को बैग बांटना भी सरकार को गवारा नहीं था। बैग न बांटे जाने से 5. 33 करोड़ का नुकसान तो हुआ ही 1. 55 करोड़ विद्यार्थी इससे वंचित रह गये। ये कैसा सबका साथ और सबका विकास है इस सरकार का।

टोल कंपनियों द्वारा सरकार को 287 करोड़ का चूना लगाने और सरकार द्वारा इससे आँखें मूँदने का मामला भी विधान सभा में प्रश्नोत्तर के दौरान सामने आया है। एक तो वाहन चालन पर कई कई टैक्स सरकार द्वारा बसूलने के बाद भी उपभोताओं पर टोल टैक्स थोपा गया है। वह भी टूटी फूटी सड़कों पर। अब सरकार की चहेती इन टोल बसूलने वाली कंपनियों ने सरकार से होने वाले एग्रीमेंट्स पर कम स्टांप लगा कर जनता के राजस्व को 287 करोड़ का चूना लगाया गया है। बानगी देखिये कि अलीगढ़ गाजियाबाद के बीच टोल बसूली के 1141 करोड़ का अनुबंध मात्र 100 रूपये के स्टांप पर किया गया है। घोटालों से संबंधित वाद 10- 10 वर्षों से लटके पड़े हैं, पर सरकार चहेतों के हित में आंख मूँदे हुये है।

भ्रष्टाचार के ये चंद खुलासे ही सरकार के स्वच्छ और भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने के दावों को तार तार कर देते हैं। जब अन्य निर्मित और निर्माणाधीन योजनाओं और विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के मामले उजागर होंगे तो इस सरकार का असली चेहरा और खुल कर सामने आ जायेगा।

भाकपा ने आश्चर्य व्यक्त किया है कि इन महाघोटालों के मीडिया में उजागर होजाने के बाद भी इस सरकार ने इस पर कोई सक्रियता नहीं दिखायी। इसको छिपाने को वह तमाम विभाजनकारी और जनता को गुमराह करने के हथकंडे अपना रही है। बचने के लिये सरकार ने विधान मंडल का सत्र बहुत ही छोटा रखा और मुद्दों पर बात करने के बजाय मुख्यमंत्री अब्बाजान, तालिबान और अफगानिस्तान पर उलट्बांसियां करते रहे।

भाकपा ने महामहिम राज्यपाल महोदय से मांग की कि वे इन घोटालों का तुरंत संज्ञान लें और ठोस दंडात्मक कार्यवाही करें। सीएजी की रिपोर्ट और विधान सभा में सरकार की स्वीकारोक्ति के इन मामलों में किसी भी जांच की आवश्यकता भी नहीं है। भाकपा ने चेतावनी दी है कि वह इन सवालों को जनता के बीच ले जायेगी।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश  

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बुधवार, 18 अगस्त 2021

अलीगढ़ और मैनपुरी का नाम बदलने की कोशिश पर भाकपा ने कड़ा विरोध जताया


लखनऊ- 18 अगस्त 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने भाजपा और उसकी राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने पहले तो लोकतान्त्रिक निकायों पर घोर आलोकतांत्रिक तरीकों से कब्जा किया और अब वह उन निकायों का इस्तेमाल विभाजन और कट्टरता की राजनीति को हवा देने के लिये कर रही है। 16 अगस्त को अलीगढ़ एवं मैनपुरी की भाजपा द्वारा हथियाई गयी जिला पंचायतों द्वारा दोनों जिलों का नाम बदलने का प्रस्ताव इसी तालिबानी इरादे से किया गया है। ज्ञात हो कि कुछ दिन पहले फीरोजाबाद की जिला पंचायत ने भी उसका नाम बदलने का प्रस्ताव पास किया था।

भाकपा ने कहाकि वह 2022 के विधान सभा चुनावों में समाज में विभाजन/ ध्रुवीकरण कर लाभ उठाने की गरज से की जारही इन कार्यवाहियों का वह पुरजोर विरोध करेगी तथा सभी लोकतान्त्रिक ताकतों से अपील करती है कि वे भी इन तालिबानी करतूतों का मुखर विरोध करें।

भाकपा ने कहा कि जिन जिला पंचायत सदस्यों ने ये प्रस्ताव पारित किए हैं वे जनता से विकास, भ्रष्टाचार मुक्त और जबावदेह प्रशासन के वायदे करके चुनाव जीत कर आए थे। उनमें से अधिकतर को भाजपा के विरूध्द वोट देकर मतदाताओं ने विजयी बनाया था। लेकिन सत्ता धन और छल के बल पर भाजपा ने उनको अपने पाले में घसीट लिया और अब उन्हें अपनी विभाजन की राजनीति का औज़ार बना रही है। अलीगढ़ मैनपुरी और फीरोजाबाद जनपदों की जनता की अनगिनत समस्याएं हैं जो उनका नाम बदलने से नहीं सच्चाई के साथ किए गए विकास से दूर होंगी। जिला पंचायतों को वही करना चाहिए, उसी के लिये उन्हें चुना भी गया है।

जहां तक ऐतिहासिक तथ्यों का सवाल है न तो अलीगढ़ का नाम कभी हरिगढ़ रहा और नहीं मैनपुरी का कभी मयन नगर रहा। समूचे अलीगढ़ जनपद का नाम 18 वीं शताब्दी से पहले कोल या कोइल था, जिसकी भौगोलिक सीमायें समय समय पर बदलतीं रहीं। 18वीं सदी में मुगल सल्तनत ने इस क्षेत्र का सूबेदार नजफ़ अली शाह को नियुक्त किया था जिसका किला अलीगढ़ कहलाया। तभी से इसका नाम अलीगढ़ है। विभाजन की राजनीति के लिये समय समय पर संघ और उसके आंगिक संगठन हरिगढ़ नाम उछालते रहे हैं और 1989 में वे इसको लेकर अलीगढ़ में भीषण दंगा कराने में कामयाब रहे थे।

इसी तरह मैनपुरी नाम का भी संत मयन के नाम से कोई रिश्ता नहीं रहा, कल्पित नाम संघियों के खुराफाती दिमाग की देन है।

भाकपा ने कहा कि जिस समय देश और उत्तर प्रदेश की जनता आसमान छूती महंगाई, कोरोना महामारी की तवाही, अभूतपूर्व बेरोजगारी, भुखमरी और खराब से खराब कानून व्यवस्था के दंश को झेल रही है उस समय भाजपा और उसकी सरकार निहित स्वार्थों के तहत और ध्यान बंटाने को विभाजनकारी मुद्दे उठा कर जनता के जीवन और जजवातों से खिलवाड़ कर रही है। यह सब यूं ही चलने नहीं दिया जायेगा। जनता को धोखा देने के षडयंत्रों को कदम कदम पर उजागर किया जायेगा।

डा॰ गिरीश ने बताया कि भाजपा की जनविरोधी नीतियों से जनता को निजात दिलाने के उद्देश्य से वामपंथी दलों ने 1 सितंबर को समूचे प्रदेश में जबर्दस्त प्रतिरोध जताने का निर्णय लिया है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा,  उत्तर प्रदेश

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शनिवार, 14 अगस्त 2021

कानपुर की घटना पर भाकपा ने गहरा रोष जताया। मुख्यमंत्री से खेद व्यक्त करने और पीड़ित परिवार से माफी मांगने की मांग की।


लखनऊ- 14 अगस्त 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने गत दिन कानपुर महानगर के बर्रा में बजरंगदलियों द्वारा पुलिस की मौजूदगी में सरेराह एक गरीब रिक्शा चालक की पिटाई और उसकी सामाजिक प्रताड़ना को उत्तर प्रदेश सरकार के माथे पर कलंक का का एक बदनुमा दाग बताते हुये इसकी कठोरतम शब्दों में भर्त्सना की है। पार्टी ने सभी दोषियों जिनके कि चेहरे वीडियो में स्पष्ट दिखाई देरहे हैं तथा उनके संरक्षणदाताओं को माकूल दफाओं में गिरफ्तार करने की मांग की है। भाकपा ने इस जघन्य और निंदनीय कांड पर कानपुर महानगर पुलिस की ढिलाई पर भी गहरी हैरानी जतायी है।

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव मंडल ने कहा कि आखिर सत्ता और वोटों की खातिर भाजपा किस हद तक समाज और देश की एकता से खिलवाड़ कर सकती है यह हाल ही में जंतर मंतर, कानपुर और देश के अन्य हिस्सों में हुयी पोलिटिकल लिंचिंग की इन घटनाओं से साबित होगया है। दिन रात विकास का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा आखिर चुनाव से पहले कैसे लिंचिंग, अल्पसंख्यक उत्पीड़न, फर्जी गोकशी, कथित लव जेहाद एवं धर्मांतरण जैसे पर-उत्पीड़क एजेंडों पर पहुँच जाती है, यह अब सबके सामने स्पष्ट हो गया है। एक गरीब के खिलाफ दूसरे गरीब को खड़ा कर धर्मांतरण के लिए ललचाने का आरोप लगवाना समुदाय विशेष को पीड़ित करने और विद्वेष फैलाने की साजिश है।

भाकपा ने सवाल किया कि भाजपा और संघ का ये कैसा हिन्दुत्व है जो गरीबों की लिंचिंग, हत्या, पिटाई और उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसाने तक सीमित रह गया है। यहां इंकलाब जिंदाबाद का ऐतिहासिक नारा लगाने वालों पर देशद्रोह के आरोप लगाये जाते हैं और समाज में सांप्रदायिक जहर घोलने और हिंसा करने तथा भड़काने वालों को न केवल बचाया जाता  है अपितु महिमामंडित किया जाता है। भाकपा मांग करती है कि पुलिस संरक्षण में हुयी लोकतन्त्र और भाईचारे को शर्मसार करने वाली इस घटना पर प्रदेश के मुख्यमंत्री को खेद प्रकट करना चाहिये और पीड़ित परिवार से क्षमा मांगनी चाहिये।

भाकपा ने सभी लोकतान्त्रिक शक्तियों और शख़्सियतों का आह्वान किया कि वे अन्याय और अत्याचार के विरूध्द सशक्त और संगठित आवाज उठायेँ

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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शुक्रवार, 13 अगस्त 2021

जमीनी स्तर पर हो बाढ़ से राहत और बचाव का काम : भाकपा


लखनऊ- 13 अगस्त 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न भागों में बाढ़ से भारी तवाही और लाखों लोगों की दुश्वारियों पर गहरी चिन्ता जताई है। भाकपा ने संगीन बने हालातों के बावजूद राज्य सरकार की हालातों के प्रति उपेक्षा पर भी अफसोस जताया है।

यहां जारी एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि प्रदेश के 30 जिलों के लगभग 3000 गांव और कई शहरी क्षेत्र भीषण बाढ़ की चपेट में हैं। इन गांवों के किसानों की फसल पूरी तरह नष्ट होगयी है, उनके घर द्वार डूब और ढह गये हैं, लोग दाने दाने और आशियाने को मुंहताज हैं, उन्हें स्वच्छ पानी और दवाई तक नहीं मिल पारही तथा दर्जनों की जानें जा चुकी हैं। वाराणसी और इलाहाबाद के हजारों मकानों की पहली मंज़िलें तक डूब गयी हैं।

भाकपा ने कहाकि राहत एवं बचाव कार्य चिंताजनक स्थिति तक अपर्याप्त हैं। पीढ़ितों की समस्याओं का जमीनी स्तर पर निदान करने के बजाय शासक नौकायन और व्योमायान का लुत्फ उठा रहे हैं। लोगों की तकलीफ़ों के प्रति सरकार की यह असंवेदनशीलता असहनीय और अक्षम्य है।

भाकपा ने मांग की कि प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जमीनी स्तर पर किये जायें, जहां वाहन अथवा नाव नहीं पहुंच सके वहां हवाई जहाजों/ हेलिकोप्टर्स से सामग्री पहुंचाई जाये। सामग्री में आटा, चावल, नमक, मसाले, रिफाइंड, हरी मिर्च, प्याज, अदरक , नीबू, मिट्टी का तेल, माचिस, स्टोव, पेयजल, फल, बिस्कुट, जरूरी दवाएं एवं टार्च आदि जरूरी वस्तुएं शामिल की जायें।

भाकपा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सभी जिला इकाइयों से आग्रह किया है कि वे जनता के सहयोग से लोगों की हर संभव मदद करें।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश

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सोमवार, 9 अगस्त 2021

उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों की आन लाइन बैठक संपन्न : लिए गये कई अहम फैसले


विद्युत ( संशोधन ) बिल 2021 के खिलाफ कल होने वाली अभियन्ताओं और कर्मचारियों की हड़ताल को संपूर्ण समर्थन प्रदान किया गया

केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार की मनमानी के खिलाफ और जनता के ज्वलंत सवालों पर 1 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर संयुक्त प्रदर्शन करने का लिया गया निर्णय

काकोरी कांड और भारत छोड़ो आंदोलन के महा योध्दाओं को नमन कर उनके प्रति आदरांजलि व्यक्त की गयी।

लखनऊ- 9 अगस्त 2021, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों की आन लाइन बैठक आज संपन्न हुयी। बैठक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी- मार्क्सवादी के राज्य सचिव डा॰ हीरालाल यादव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी- एमएल, लिबेरेशन के सचिव का॰ सुधाकर यादव एवं आल इंडिया फारबर्ड ब्लाक के प्रदेश संयोजक अभिनव कुशवाहा शामिल रहे।

बैठक में सबसे पहले काकोरी कांड के महानायकों को नमन करते हुये उनके प्रति क्रान्तिकारी क्रतज्ञता ज्ञापित की गयी। आज के ही दिन 1925 को भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के क्रांतिकारियों द्वारा ब्रिटिश राज के विरूध्द भयंकर युध्द छेड़ने की इच्छा से हथियार खरीदने के लिये ब्रिटिश सरकार का खजाना लूटने को लखनऊ के निकट काकोरी स्टेशन पर ट्रेन रुकवा कर इस महान घटना को अंजाम दिया गया था। कम्युनिस्ट, सोशलिस्ट, और कांग्रेस आदि धाराओं के भारत छोड़ो आंदोलन के अमर नायकों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया गया और उनके प्रति क्रान्तिकारी आदरांजली अर्पित की गयी। कहा गया कि जो लोग इन आंदोलनों और समूचे स्वतन्त्रता संग्राम का विरोध कर रहे थे और अंग्रेजों के पिट्ठू बने हुये थे, दुर्भाग्यवश वे ही आज  देश और प्रदेशों की गद्दी पर काबिज हैं और लोकतन्त्र, संविधान, अब तक की उपलब्धियों और आमजनों को निर्ममता से रौंद रहे हैं।

रेखांकित किया गया कि कम्युनिस्ट, सोशलिस्ट और लोकतान्त्रिक शक्तियाँ आज इन दोनों ऐतिहासिक पर्वों को धूमधाम से मना रहे हैं और देश भर में जनता के ज्वलंत सवालों पर आवाज उठा रहे हैं।

बैठक में विद्युत  ( संशोधन ) बिल 2021 के विरूध्द कल 10 अगस्त को होने जा रही विद्युत कर्मचारियों और अभियन्ताओं की राष्ट्रव्यापी हड़ताल को समर्थन प्रदान करने का निर्णय लिया गया। वामदलों की कतारों का आह्वान किया गया कि वे इस हड़ताल को पूर्ण समर्थन प्रदान करें।

बैठक में प्रमुख एजेंडा पीड़ित जनता के विभिन्न सवालों पर आंदोलन करने का था। सर्वसम्मत निर्णय लिया गया कि महंगाई पर कारगर रोक लगाने, डीजल पेट्रोल रसोई गैस पर लगे असहनीय टैक्सों को पर्याप्त मात्रा में घटाने, हर बेरोजगार को काम दिलाने- मनरेगा में 200 दिन काम और प्रतिदिन 600 रुपये मजदूरी दिलाने, इस तरह की योजना शहरों में चलाये जाने, दवाओं और खाद्य वस्तुओं के दाम बांधने, हर व्यक्ति को रुपए 7500/- प्रति माह दिये जाने, खाने की सभी सामाग्री किट के रूप में उपलब्ध कराये जाने, टीकाकरण में तेजी लाने, जनता पर बोझ बढ़ाने वाले बिजली बिल 2021 को वापस लेने, तीन क्रषी क़ानूनों को वापस कराने, एमएसपी की गारंटी करने, योगी सरकार द्वारा दमनकारी असंवैधानिक आलोकतांत्रिक रवैया रोके जाने, कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने- दलितों अल्पसंख्यकों महिलाओं व अन्य कमजोर तबकों पर अत्याचार रोके जाने, भ्रष्टाचार पर कारगर रोक लगाने आदि सवालों पर 1 सितंबर 2021 को जिला मुख्यालयों पर संयुक्त प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया।

केन्द्र और उत्तर प्रदेश सरकार अंध निजीकरण से बाज आये, पैगासस कांड की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करायी जाये, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और सुधार किया जाये, गरीब बच्चों की पढ़ाई में हुयी हानि की भरपाई की जाये तथा आंदोलनकारी किसानों से सरकार तत्काल वार्ता करे आदि सवालों को भी उठाया जाएगा।

लोकतान्त्रिक जनता दल उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष जुबेर अहमद कुरैशी ने भी अपने दल की वामपंथी दलों के साथ आंदोलन में भागीदारी की घोषणा की है।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश              मो॰ नं॰ 9412173664, 7055893132

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रविवार, 8 अगस्त 2021

भाजपा मुक्त उत्तर प्रदेश बनाने को गंभीर प्रयास करेगी भाकपा: राज्य कार्यकारिणी बैठक मेन कई अहम मुद्दों पर हुयी चर्चा


लखनऊ- 8 अगस्त 2021, उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष के प्रारंभ में होने जारहे विधान सभा चुनावों में पार्टी की भागीदारी एवं तैयारियों पर चर्चा करने हेतु भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य कार्यकारिणी की एक दिवसीय बैठक इलाहाबाद के वरिष्ठ श्रमिक नेता का॰ नसीम अंसारी की अध्यक्षता में संपन्न हुयी। बैठक को पार्टी के केन्द्रीय सचिव अतुल अंजान ने भी संबोधित किया। राज्य सचिव एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डा॰ गिरीश ने देश और प्रदेश के मौजूदा हालातों रिपोर्ट प्रस्तुत की। सहसचिव का॰ अरविन्दराज स्वरूप ने सांगठानिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। सहसचिव का॰ इम्तियाज़ अहमद (पूर्व विधायक) सहित राज्य कार्यकारिणी के सभी सदस्यों ने चर्चा में भाग लिया।

बैठक के निष्कर्षों की जानकारी देते हुये राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने कहाकि कारपोरेट घरानों और धनवानों के हितों की पोषक, गरीब और सामान्यजनों के हितों पर निरंतर चोट कर रही, संविधान और लोकतन्त्र पर हमलावर एवं खुलेआम समाज को बांटने के काम में जुटी केन्द्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों से जनता आजिज़ आ चुकी है। 2022 में उत्तर प्रदेश और 2024 में केन्द्र सरकार को क्रमशः हटाना जरूरी है।

भाकपा राज्य कार्यकारिणी ने कहाकि वह 2022 के चुनावों में भाजपा मुक्त उत्तर प्रदेश बनाने के लिये गंभीर प्रयास करेगी। इसके लिये वह वामपंथी दलों की एकजुटता के साथ ही  सभी प्रासंगिक एवं प्रभावी लोकतान्त्रिक शक्तियों की एकता के लिये काम करेगी। विपक्ष के वोटों का विखराव कम से कम हो इसके लिये अभियान चलायेगी। भाकपा खुद सभी सीटों पर न लड़ कर संतुलित संख्या में अपने उम्मीदवार उतारेगी।

डा॰ गिरीश ने बताया कि राज्य कार्यकारिणी ने राज्य नेत्रत्व को अधिक्रत  किया है कि वह सीटों के चयन की प्रक्रिया तेज करे। तदनुसार सभी राज्य कार्यकारिणी सदस्यो को निर्देश दिया गया है कि वे जिलों की जिला काउंसिल एवं आम कार्यकर्ता बैठकें आयोजित कर 10 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट राज्य केंन्द्र को भेजें। सितंबर के मध्य में राज्य काउंसिल की बैठक की जायेगी जिसमें चुनावों की तैयारी पर और व्यापक रूप में चर्चा की जायेगी।

राज्य कार्यकारिणी बैठक में महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, निजीकरण, कोरोनाकाल में लोगों के जीवन- रोजगार आदि की रक्षा करने में असफलता, बेरोजगारी, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, छात्र- छात्राओं को शिक्षा से वंचित करने, संविधान और लोकतन्त्र पर हमलों, जर्जर कानून व्यवस्था और समाज को बांटने की भाजपा और संघ की कोशिशों आदि सवालों पर सरकार को घेरने एवं उसके खिलाफ संयुक्त और स्वतंत्र आंदोलन करने पर बल दिया गया।

इस मुद्दे पर गहन चर्चा करने को प्रदेश के वामपंथी दलों का नेत्रत्व कल आन लाइन बैठक कर निर्णय लेगा।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश  

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सोमवार, 2 अगस्त 2021

वोट की राजनीति का खेल: फीरोजाबाद का नाम बदलने की साजिश। भाकपा ने कडा एतराज जताया


लखनऊ- 2 अगस्त 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर जनता के बीच जाने को मुद्दे नहीं बचे हैं, अतएव मुद्दाविहीन सरकार चुनावी लाभ के लिये विभाजन पैदा करने का खेला करने जा रही है। ऐसे अनेक खेलों में से एक शहरों का नाम बदलना भी है। इसके तहत फीरोजाबाद का नाम बदल कर चंद्र नगर करने की योजना है।

भाकपा विभाजन कर वोट बटोरने की इस प्रस्तावित कार्यवाही का कड़ा विरोध करती है।

एक प्रेस बयान में भाकपा राज्य सचिव ने आरोप लगाया कि नियत योजनानुसार फीरोजाबाद की जिला परिषद द्वारा उपर्युक्त संबंधी प्रस्ताव पास कर राज्य सरकार को भेजा गया है। कितना हास्यास्पद है कि जिला परिषद की पहली बैठक में फीरोजाबाद जनपद के विकास पर कोई चर्चा नहीं हुयी और विद्वान पार्षद नाम बदलने की अनूठी योजना लेकर सामने आगये। ये फीरोजाबाद जनपद की उस जनता का अपमान और उनके हितों से खिलवाड़ है जिसने कि हाल ही में उन्हे जनपद के विकास के लिये चुन कर भेजा है।

भाकपा राज्य सचिव ने सरकार से कहा कि यदि फीरोजाबाद पर क्रपा करनी ही है तो फीरोजाबाद की जनता को उन दुश्वारियों से निजात दिलाइये जिन्हें वह दशकों से झेल रही है। फीरोजाबाद में बड़े पैमाने पर जल भराव होता है, जिले और शहर की सड़कों की हालत बेहद खस्ता है, पानी और बिजली की सप्लाई अस्त व्यस्त है, कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों को गुजरे लायक वेतन तक नहीं मिलता, हर परिवार में तीन में से दो सदस्य बेरोजगार हैं, स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है, कांच उद्योग से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण लोगों के फेफड़ों को छलनी कर रहा है तथा जनपद की तीन चौथाई आबादी कुपोषित है। इन विकराल समस्याओं की ओर न सरकार का ध्यान है न जिला परिषद का।

डा॰ गिरीश ने राज्य सरकार से पूछा है कि वह बताए कि इलाहाबाद और मुगल सराय का नाम बदलने से वहाँ के लोगों के जीवन में कितना उत्थान हुआ?

असफल सरकार और उसके पैरोकार निहित राजनैतिक स्वार्थों के लिये इतिहास से भी छेड़ छाड़ पर उतारू हैं। अपने कुत्सित उद्देश्यों को सांप्रदायिक जामा पहनाने को वो कह रहे हैं कि फीरोजाबाद का नाम पूर्व में चंद्रावर नगर था, और सम्राट अकबर ने 15वीं शताब्दी में बदल कर इसे फीरोजाबाद कर दिया। जबकि देश के जाने माने इतिहासकार और एएमयू के मानद प्रोफेसर इरफान हबीब कहते हैं कि इस तरह का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है कि फीरोजाबाद का नाम चंद्रावर नगर था। फीरोजाबाद नाम फ़ीरोज शाह तुगलक के शासन काल में अस्तित्व में आया। यह गलत है कि अकबर ने किसी प्राचीन नाम को बदल कर इसे फीरोजाबाद नाम दिया।

नाम बदलने के पैरोकार जिले की अधिक्रत वेबसाइट का हवाला देते हैं जिसमें स्थान का नाम चंद्रावर नगर बताया गया है, जिसे अकबर के मनसबदार फ़ीरोजशाह ने 1556 में बदल कर फीरोजाबाद कर दिया। सभी जानते हैं कि ये वेबसाइट्स ब्रिटिशकाल में तैयार गज़ट पर आधारित हैं, और अंग्रेजों ने बांटो और राज करो की नीति के तहत तथ्यों से मनमानी छेड़छाड़ की।

इस संबंध में अन्य इतिहासकारों का कथन है कि प्राचीन काल में चंद्रावर शहर यमुना नदी के किनारे स्थित था। सन 1193- 94 के युध्द में मोहम्मद गौरी ने कन्नौज के राजा जयचंद को हरा कर नगर पर कब्जा कर लिया था। ऐतिहासिक तथ्यों और भौगोलिक स्थितियों का विश्लेषण करने पर निष्कर्ष निकलता है कि चंद्रावर नगर का वर्तमान फीरोजाबाद से दूर दूर तक संबंध नहीं है।

स्थानों के नाम बदल कर और अन्य विभाजनकारी मुद्दों को उछाल कर वोटों की राजनीति करना योगी सरकार का प्रमुख मुद्दा रहा है जिसे वह 2017 से निर्बाध रूप से चला रही है। इसके लिये वह जन सरोकारों की उपेक्षा भी कर रही है और इतिहास से भी छेड़छाड़ कर रही है। भाकपा इन क्रत्यों पर कड़ा विरोध जताती है, डा॰ गिरीश ने कहा है।

डा॰ गिरीश

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गुरुवार, 22 जुलाई 2021

अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता पर सरकार के हमलों पर भाकपा ने प्रतिरोध जताया


लखनऊ- 22 जुलाई 2021, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने उत्तर प्रदेश के मुखर टीवी चेनल भारत समाचार पर भाजपा सरकार की दमनात्मक कार्यवाही की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है। भाकपा ने दैनिक भाष्कर समाचार समूह पर इसी तरह की कार्यवाही की भी भर्त्सना की है।

डा॰ गिरीश ने कहा कि पिछले कई माहों से भारत समाचार सरकार की गंभीर विफलताओं और जनता के प्रति दमनात्मक कार्यवाहियों को बेबाकी से उजागर कर रहा था। इससे एक डरी हुयी, विफल और निरंकुश भाजपा सरकार बौखला रही थी, और आज उसने संपादक ब्रजेश मिश्रा एवं चेनल हैड वीरेंद्र सिंह के घरों और दफ्तर पर आईटी की रेड करा दी।

यह प्रेस की स्वतन्त्रता पर आपातकाल से भी बड़ा हमला है। अब ये अघोषित नहीं घोषित आपातकाल है। यह पेगासस का विस्तार है। यह भाजपा और संघ के कथित हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद का असली चेहरा है, जो अब देश और दुनियां के सामने स्पष्ट उजागर होगया है। ये सब वह भाजपा करा रही है जिसके शीर्ष नेता, प्रवक्ता, आईटी सेल और प्रचार तंत्र दिन भर झूठ, भ्रम और भय फैलाते हैं। जिम्मेदार नागरिकों की जासूसी कराते हैं।

डा॰ गिरीश ने कहा कि भाकपा लोकतन्त्र, संविधान और अभिव्यक्ति की आजादी की रक्षा के लिये आगे बढ़ कर काम करती रही है। इस घटना से भाकपा कार्यकर्ताओं में गहरा रोष है, और वे अपने गुस्से का लोकतान्त्रिक तरीकों से हर जगह इजहार करेंगे।

डा॰ गिरीश  

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गुरुवार, 15 जुलाई 2021

सर्वोच्च न्यायालय की सुस्पष्ट टिप्पणियों के बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कांबड़ यात्रा रद्द न करना आश्चर्यजनक: भाकपा


लखनऊ-15 जुलाई 2021, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कांबड़ यात्रा निकलवाने पर अपनी प्रतिक्रिया जताते हुये भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने कहाकि कोरोना की दूसरी लहर का असर इतना व्यापक था कि उसकी चपेट में गांव और शहर के वे गरीब और निम्न मध्यवर्गीय परिवार भी बड़े पैमाने पर आये थे जिनके युवा/ युवतियां अधिकतर कांवड यात्रा पर जाते रहे हैं।

उनमें से अनेक परिवारों ने अपनों को खोया है। असंख्य परिवार ऐसे हैं जिनमें पूरे के पूरे परिवार कोरोना की चपेट में आये और इलाज और अव्यवस्थाओं से आर्थिक रूप से टूट कर रह गये हैं। रही सही कसर लाक डाउन से फैली बेरोजगारी और सरकार प्रायोजित महंगाई ने पूरी कर दी है।

ऐसे में उन्हें रोजगार और आर्थिक सहयोग प्रदान करने के बजाय योगी सरकार उन्हें कांबड़ यात्रा का लालीपाप दिखा रही है। भाकपा ने कहाकि लोग गमजदा हैं, कोरोना की भयावहता से वाकिफ़ हैं तथा वे अपने बचाव के प्रति सजग भी हुये हैं, अतएव कहीं से किसी ने भी कांबड़ यात्रा शुरू करने की मांग नहीं की। लेकिन ये भाजपा की राज्य सरकार है जो कांबड़ यात्रा के लिये लोगों को उकसा रही है।

भाकपा ने कहाकि अभी हम सबने कुम्भ मेले से कोरोना के प्रसार और उसकी तवाही का मंजर खुली आँखों से देखा है। हम यह भी जानते हैं कि भाजपा की इन्हीं सरकारों ने पहली लहर के दौराना दिल्ली में हुये तबलीगी जमात के सम्मेलन पर खूब बावेला मचाया था और तमाम तबलीगियों के जेल के सींखचों के पीछे पहुंचा दिया था। उनमें से कई आज भी जेलों में बंद हैं। यह महामारी पर दोगली राजनीति का स्पष्ट उदाहरण है।

भाकपा राज्य सचिव डा॰ गिरीश ने आरोप लगाया कि योगी सरकार वोट की राजनीति के लिये लोगों के जीवन से खिलबाड़ करने पर आमादा है। उत्तराखंड सरकार द्वारा यात्रा रद्द करने और प्रधानमंत्री और गृह मंत्रालय द्वारा नागरिकों की सुरक्षा के प्रति आगाह करने के बावजूद उसने अभी तक कांबड़ यात्रा रद्द करने का फैसला नहीं लिया है। इसका अर्थ है कि योगी सरकार को लोगों की जान- जीवन की कोई परवाह नहीं है और अपने निहित राजनैतिक स्वार्थों के लिये वह लोगों की आस्था का दोहन करना चाहती है।

भाकपा ने इस बात पर गहरा संतोष जताया कि देश की सर्वोच्च अदालत ने मामले को गंभीरता से लिया है और राज्य/ केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है। आश्चर्यजनक है कि सर्वोच्च न्यायालय की खरी खरी टिप्पणियों के बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी अपने फैसले को रद्द नहीं किया है। इसे राज्य सरकार की ढीढता ही कहा जायेगा।

भाकपा ने आशा जताई कि निश्चय ही सर्वोच्च न्यायालय लोगों के जनजीवन की रक्षा के लिये समय रहते उचित निर्णय लेकर मगरूर सरकार को निर्देशित करेगा।

डा॰ गिरीश, राज्य सचिव

भाकपा, उत्तर प्रदेश।

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