भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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शुक्रवार, 22 जनवरी 2010

राजनीतिक-संठनात्मक रिपोर्ट

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय परिषद ने जिसकी बैठक बंगलौर में 27-28 दिसम्बर 2009 को आयोजित हुई जिसने निम्नलिखित राजनीतिक-संगठनात्मक रिपोर्ट स्वीकृत की:पिछली राष्ट्रीय परिषद की बैठक के बाद गुजरे छः महीने में देश में आर्थिक तथा राजनीतिक संकट और अधिक गहरा हुआ है। उसके साथ ही दक्षिणपंथी और वाम-विरोधी ताकतों का हमला बढ़ा है एवं कम्युनिस्ट तथा अन्य वामपंथी पार्टियां कमजोर हुई हैं, जो बचाव में आ गयी हैं। कुल स्थिति जिसका हम आज...
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सीआरएफ ओल्डएज होम की 10वीं जयंती

कामरेड सीआर को एक श्रद्वांजलिमहान अक्टूबर समाजवादी क्रांति से विश्व भर में अनेक लोगों को यह प्रेरणा मिली कि एक ऐसे नये समाज के निर्माण के लिए संघर्ष किया जाये जो एक वर्ग द्वारा दूसरे वर्ग को या एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के शोषण से विहीन हो। उससे प्रेरणा पाकर लोगों ने एक ऐसा समाज बनाने की कोशिश की जिसमें गरीबी, बेरोजगारी और असमानता न हो, ऐसे लोगों में एक नाम है का. चन्द्र राजेश्वर राव का। उन्हें लोग प्यार से का. सी.आर. कहा...
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आदमी का बच्चा

जिन्दगी सुधारने नागपुर गया था। राज्यों की राजधानियां शायद वे जगहें हैं, जहां टूटी हुई जिन्दगियां सुधारी जाती हैं। सुना है, सैक्रैटेरियेट और विष्वविद्यालयों में जिन्दगीसाज रहते हैं, जो एक कदम से टूटी-फूटी और कबाड़खाने में रखी जिन्दगी को अच्छी से अच्छी दूकान के शो-केस में रख देते हैं। लोगों ने कहा - बी.ए. किये चार-पांच साल हो गये। एम.ए. कर डालो, तो जिन्दगी सुधर जायगी, वरना यहीं पड़े-पड़े सड़ जाओगे। सोचा, बदबू आने के पहले नागपुर जाकर...
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प्रजातंत्र के कुत्ते

व्यंग्यरोज की तरह सुबह सैर करने को निकला तो मुझे देखकर नुक्कड़ वाली नीम के नीचे सोया मरियल कुत्ता पंजे झाड़ कर उठ खड़ा हुआ। इससे पहले शायद ही मैंने उसे अपने पांव पर खड़े देखा हो। किसी ने रोटी डाल दी तो उसी प्रकार लेटे-लेटे खा ली नहीं तो हरि इच्छा। नजदीक आने पर वह मेरे पांव के पास आकर कुंऽकुंऽऽ करने लगा। मैंने भरपूर नजर से उसे देखा, उसने भरपूर नजर से मुझे देखा, सहानुभूति अंकुरित तो होनी ही थी। फिर अचानक वह जोर-जोर से भौंकने लगा।...
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रोजगार का आउटसोर्सिंग-एक बड़ा खतरा

1. प्रस्तावना1. बैंकों के नियमित एवं स्थायी काम का आउटसोर्सिंग टेक्नालाजी से ज्यादा खतरनाक है। यह उस प्रक्रिया का अंग है जिसके तहत किसी संस्थान का काम बाहरी एजेंसियों को दिया जाता है जो ये काम मजदूरों से कराती हैं। यह तरीका विश्व भर में मालिकों द्वारा अपनाया गया ताकि कर्मचारियों पर खर्च को कम किया जा सके तथा अधिक से अधिक मुनाफा कमाया जा सके, साथ ही यूनियन न बनने दिया जाये और यदि यूनियन है तो उसे काम करने नहीं दिया जाय। आउटसोर्सिंग...
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कामरेड पूरन चन्द्र जोशी की कुछ यादें

मेरे एक पुराने मित्र डा. पी.सी.जोशी ने कामरेड पी.सी.जोशी की जन्म शताब्दी पर उनके बारे में कुछ लिखने को कहा। उनके इस अनुरोध से मेरे दिलो-दिमाग में पुरानी यादें घूम गयीं और उनमें से कुछ को मैं लिखने की कोशिश कर रहा हूं। मैं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की कानपुर जिला पार्टी का अंग 1950 में बना। विद्यार्थी मोर्चे पर काम करना मैंने बन्द ही किया था और यह सीखना चाहता था कि लाल कानपुर के मजदूर वर्ग को किस तरह संगठित किया जाता है। 1950...
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