भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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Communist Party of India, U.P. State Council

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मंगलवार, 13 जुलाई 2010

पिछड़ा

महंगाई की घनघोर आंधीभ्रष्टों बेईमानों जन-शत्रुओंसंग काले-धनियों की चांदीआमजन बेचारा थका हाराहर पल गिरते उठते जूझतेहर तरह वहीं है जाता माराकमाने की पहली ही जुगतराह खर्च ही जाते-आतेलगाये रोज़ ही करारी चपतरिक्शा टेम्पो जरूरत, भाड़ामजबूर जेब खीेंचे बीस-पच्चीसपर वह बढ़ चालिस पे अड़ाकार स्कूटर स्कूटी बाईकपास अपने न हो तब भीतन-तेल चारों ओर निकाले हाईकहो जो दुपहिया चार-पहियाउछलते कूदते तेल की मारमुंह गाये हाय दैया रे दैयानित-दिन आटा,दाल तरकारीऊपर...
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नागार्जुन की याद

नागार्जुन को ध्यान में रखते हुए उनसे संबंधित ढेर सारी बातें सामने आने के लिए होड़ मचाने लगती हैं। वे ऐसी बातें हैं, जो उनके बाद की पीढ़ी से लेकर आज तक के लेखकों में दुर्लभ हैं। नागार्जुन जिस दौर में साहित्य जगत में कलम लेकर आये, उस दौर में जीवन में किसी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए पहले त्याग करना अनिवार्य समझा जाता था। निराला ने एक गीत में लिखा...
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श्रमिक

टिकी नहीं हैशेषनाग के फन पर धरती !हुई नहीं है उर्वरमहाजनों के धन पर धरती !सोना-चाँदी बरसा हैनहीं ख़ुदा की मेहरबानी से,दुनिया को विश्वास नहीं होता हैझूठी ऊलजलूल कहानी से !.सारी ख़ुशहाली का कारण,दिन-दिन बढ़तीवैभव-लाली का कारण,केवल श्रमिकों का बल है !जिनके हाथों मेंमज़बूत हथौड़ा, हँसिया, हल है !जिनके कंधों परफ़ौलाद पछाड़ें खाता है,सूखी हड्डी से टकराकरटुकड़े-टुकड़े...
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