भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का प्रकाशन पार्टी जीवन पाक्षिक वार्षिक मूल्य : 70 रुपये; त्रैवार्षिक : 200 रुपये; आजीवन 1200 रुपये पार्टी के सभी सदस्यों, शुभचिंतको से अनुरोध है कि पार्टी जीवन का सदस्य अवश्य बने संपादक: डॉक्टर गिरीश; कार्यकारी संपादक: प्रदीप तिवारी

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बुधवार, 20 जुलाई 2016

भाजपा नेता की मायावती के खिलाफ टिप्पणी और दलितों कमजोरों के प्रति हिंसा और शाब्दिक हिंसा का मुखर विरोध करेगी भाकप: डा. गिरीश

दलितों के प्रति हिंसा और शाब्दिक हिंसा का मुखर विरोध करेगी भाकपा लखनऊ/अलीगढ- 20 जुलाई, 2016, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव मंडल ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह द्वारा बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती के विषय में की गयी घृणित टिप्पणी की कडे से कडे शब्दों में निंदा की है. भाकपा ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह इन महानुभाव के खिलाफ माकूल दफाओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल के सींखचों के पीछे पहुंचाये. भाकपा के राज्य सचिव मंडल की ओर से जारी बयान में राज्य सचिव डा. गिरीश ने कहा कि अपनी स्थापना के समय से ही संघ परिवार अपने कार्यकर्ताओं में ‘बौध्दिक’ के नाम पर दलितों, अल्पसंख्यकों, पिछडों, आदिवासियों एवं महिलाओं आदि समाज के सभी कमजोर तबकों के विरुध्द नफरत का जहर घोलता रहा है. आज केंद्र की सत्ता पर एकाधिकार होजाने के बाद उनके मन मस्तिष्क में भरा यह जहर अंगडाई ले रहा है और देश भर में तमाम संघी इन तबकों के विरुध्द हिंसा और शाब्दिक हिंसा का अभियान चलाये हुये हैं. मोदी के गुजरात में पशुओं की खाल उतारने वाले दलितों पर कातिलाना हमला बोला गया. बंबई में डा. भीमराव अंबेडकर प्रतिष्ठान की इमारत को ढहा दिया गय, संघ द्वारा निर्मित घृणा के वातावरण के चलते देश भर में दलितों अल्पसंख्यकों और अन्य कमजोर तबकों के खिलाफ हिंसा और शाब्दिक हिंसा की कारगुजारियां बढी हैं. राज्य की मशीनरी हर जगह उत्पीडकों की हिमायत में खडी हैं. ताजा मामला सुश्री मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के प्रयोग का है जो संघ परिवार की घृणित सोच और उसकी नस्लवादी थीसिस का पर्दाफाश कर देता है. भाकपा और वामपंथ इन सभी कार्यवाहियों का पुरजोर विरोध कर रहे हैं. अंबेडकर भवन तोडे जाने के विरुध्द कल बंबई में हुयी विशाल रैली में भाकपा और वामपंथ ने ना केवल भारी भीड जुटाई थी बल्कि रैली को कन्हैया कुमार और का. सीताराम येचुरी ने भी संबोधित किया. संसद में भी कल यह मामला सबसे पहले वामपंथी सदस्यों ने ही उठाया था. हम गुजरात के दलितों के आंदोलन के साथ हैं और कश्मीर के पीडितों की पीडा को साझा करते हैं. एटा के शराब कांड से लेकर उत्पीडन की हर घटना में हम कमजोर तबकों के साथ खडे हैं. डा. गिरीश ने भाकपा की सभी जिला इकाइयों का आह्वान किया कि वे भाजपा नेता के खिलाफ कडी कार्यवाही की मांग को लेकर और दलित कमजोरों और अल्पसंख्यकों पर होरहे हमलों के खिलाफ स्वयं आवाज उठायें या इस तरह की आवाज उठाने वालों का साथ दें. उन्होने यह भी बताया कि 24 जुलाई को फैज़ाबाद में होने जारहे वामदलों के क्षेत्रीय सन्युक्त सम्मेलन में भी मामले पर गौर किया जायेगा और 30 व 31 जुलाई को लखनऊ में होने जारही भाकपा की राज्य काउंसिल की बैठक में भी इस मामले पर गंभीरता से विचार किया जायेगा. डा.गिरीश
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